विदेश
रूस ने कैंसर की वैक्सीन बनाई:पुतिन सरकार ने कहा- 2025 से नागरिकों को मुफ्त लगाएंगे; यह सदी की सबसे बड़ी खोज
मॉस्को,एजेंसी। रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि हमने कैंसर की वैक्सीन बनाने में सफलता हासिल कर ली है। इसकी जानकारी रूसी स्वास्थ्य मंत्रालय के रेडियोलॉजी मेडिकल रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर आंद्रेई कप्रीन ने रेडियो पर दी। रूसी न्यूज एजेंसी TASS के मुताबिक, इस वैक्सीन को अगले साल से रूस के नागरिकों को फ्री में लगाया जाएगा।
डायरेक्टर आंद्रेई ने बताया कि रूस ने कैंसर के खिलाफ अपनी mRNA वैक्सीन विकसित कर ली है। रूस की इस खोज को सदी की सबसे बड़ी खोज माना जा रहा है। वैक्सीन के क्लिनिकल ट्रायल से पता चला है कि इससे ट्यूमर के विकास को रोकने में मदद मिलती है।
इससे पहले इस साल की शुरुआत में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बताया था कि रूस कैंसर की वैक्सीन बनाने के बेहद करीब है।
क्या होती है mRNA वैक्सीन mRNA या मैसेंजर-RNA इंसानों के जेनेटिक कोड का एक छोटा सा हिस्सा है, जो हमारी सेल्स (कोशिकाओं) में प्रोटीन बनाती है। इसे आसान भाषा में ऐसे भी समझ सकते हैं कि जब हमारे शरीर पर कोई वायरस या बैक्टीरिया हमला करता है तो mRNA टेक्नोलॉजी हमारी सेल्स को उस वायरस या बैक्टीरिया से लड़ने के लिए प्रोटीन बनाने का मैसेज भेजती है।
इससे हमारे इम्यून सिस्टम को जो जरूरी प्रोटीन चाहिए, वो मिल जाता है और हमारे शरीर में एंटीबॉडी बन जाती है। इसका सबसे बड़ा फायदा ये है कि इससे कन्वेंशनल वैक्सीन के मुकाबले ज्यादा जल्दी वैक्सीन बन सकती है। इसके साथ ही इससे शरीर की इम्यूनिटी भी मजबूत होती है। mRNA टेक्नोलॉजी पर आधारित यह कैंसर की पहली वैक्सीन है।

इससे पहले इस तकनीक के आधार पर कोविड-19 की वैक्सीन बनाई गई हैं।
कैंसर होने से पहले नहीं बल्कि बाद में दी जाती है वैक्सीन कैंसर स्पेशलिस्ट एमडी मौरी मार्कमैन का कहना है कि कैंसर की वैक्सीन बनाना बायोलॉजिकल तौर पर असंभव है। कैंसर के लिए कोई टीका नहीं हो सकता क्योंकि कैंसर कोई बीमारी नहीं है। यह शरीर में हजारों अलग-अलग स्थितियों का परिणाम है।
फिर भी वैक्सीन कुछ कैंसरों की रोकथाम में जरूरी रोल निभाती है। ये वैक्सीन कैंसर रोगियों को उपचार के दौरान सुरक्षा देने में जरूरी टूल हैं। क्योंकि कैंसर मरीज को इलाज के दौरान दूसरी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
कैंसर वैक्सीन की खास बात यह है कि यह कभी कैंसर होने से पहले नहीं दी जाती है, बल्कि यह उन लोगों को दी जाती है जिन्हें कैंसर ट्यूमर है। यह वैक्सीन हमारे इम्यून सिस्टम को यह पहचानने में मदद करती है कि कैंसर सेल्स कैसी दिखती है।
कैंसर वैक्सीन बनाना मुश्किल क्यों?
- कैंसर सेल्स ऐसे मॉलिक्यूल से बनते हैं जो इम्यून सेल्स को दबा देते हैं। अगर कोई वैक्सीन इम्यून सेल्स को एक्टिव कर भी दे तो हो सकता है वो इम्यून सेल्स ट्यूमर के अंदर प्रवेश न कर पाए।
- कैंसर सेल्स सामान्य सेल्स की तरह ही होती हैं और इस वजह से इम्यून सिस्टम को यह उतनी खतरनाक नहीं लगतीं। इससे इम्यून सिस्टम के लिए यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि किस पर हमला करना है।
- अगर कैंसर का एंटीजन सामान्य और असामान्य सेल्स दोनों पर मौजूद होता है तो वैक्सीन दोनों पर हमला करना शुरू कर देती है। इससे शरीर को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचता है।
- कई बार कैंसर ट्यूमर इतना ज्यादा बड़ा होता है कि इम्यून सिस्टम उससे लड़ नहीं पाता है। कुछ लोगों का इम्यून सिस्टम काफी कमजोर होता है, इस वजह से कई लोग वैक्सीन लगने के बाद भी रिकवर नहीं कर पाते हैं।
भारत में पुरुषों से ज्यादा महिलाओं को कैंसर भारत में 2022 में कैंसर के 14.13 लाख नए केस सामने आए थे। इनमें 7.22 लाख महिलाओं में, जबकि 6.91 लाख पुरुषों में कैंसर पाया गया। 2022 में 9.16 लाख मरीजों की कैंसर से मौत हुई।
5 साल में भारत में 12% की दर से कैंसर मरीज बढ़ेंगे इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) का आकलन है कि 5 साल में देश में 12% की दर से कैंसर मरीज बढ़ेंगे, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती कम उम्र में कैंसर का शिकार होने की है। नेचर जर्नल में प्रकाशित एक रिसर्च के अनुसार, कम उम्र में कैंसर की सबसे बड़ी वजहों में हमारी लाइफस्टाइल है।
ग्लोबल कैंसर ऑब्जरवेटरी के आंकड़ों के अनुसार, 50 साल की उम्र से पहले ब्रेस्ट, प्रोस्टेट और थायरॉइड कैंसर सबसे ज्यादा हो रहे हैं। भारत में ब्रेस्ट, मुंह, गर्भाशय और फेफड़ों के कैंसर के सबसे ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं।

बिज़नस
अमेरिका में पेट्रोल की कीमत चार डॉलर प्रति गैलन के पार, 2022 के बाद सबसे अधिक
न्यूयॉर्क,एजेंसी। ईरान युद्ध के बीच वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से अमेरिका में पेट्रोल की कीमत 2022 के बाद पहली बार औसतन चार डॉलर प्रति गैलन से अधिक हो गई है। वाहन कंपनियों के संघ ‘एएए’ के अनुसार, नियमित पेट्रोल की राष्ट्रीय औसत कीमत अब 4.02 डॉलर प्रति गैलन हो गई है जो युद्ध शुरू होने से पहले की तुलना में एक डॉलर से अधिक है।

इससे पहले रूस के यूक्रेन पर हमला करने के दौरान करीब चार वर्ष पहले अमेरिका में पेट्रोल इतना महंगा हुआ था। यह कीमत राष्ट्रीय औसत है जिसका अर्थ है कि कुछ राज्यों में लोग काफी समय से चार डॉलर प्रति गैलन से अधिक का भुगतान कर रहे हैं। राज्यों के बीच कीमतें कर दरों में अंतर के कारण अलग-अलग होती है।
अमेरिका और इजराइन के 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य कार्रवाई शुरू होने के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव और बढ़ोतरी हुई है। इस संघर्ष के कारण आपूर्ति श्रृंखला में गंभीर व्यवधान उत्पन्न हुए हैं और पश्चिम एशिया के प्रमुख तेल उत्पादकों ने उत्पादन में कटौती भी की है जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ा है। एएए के अनुसार, डीजल अब औसतन 5.45 अमेरिकी डॉलर प्रति गैलन पर बिक रहा है, जो युद्ध शुरू होने से पहले लगभग 3.76 अमेरिकी डॉलर प्रति गैलन था। डीजल का इस्तेमाल कई मालढुलाई और डिलिवरी ट्रक में ईंधन के रूप में किया जाता है।

विदेश
ट्रम्प बोले- अमेरिका किसी देश की मदद नहीं करेगा:हमसे तेल खरीदो, नहीं तो हिम्मत दिखाओ और होर्मुज जाकर ले लो
तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी,एजेंसी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अब अमेरिका किसी देश की मदद नहीं करेगा। देशों को खुद ही अपने हालात संभालने होंगे।
उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि ब्रिटेन जैसे देश जो होर्मुज स्ट्रेट से फ्यूल नहीं ले पा रहे हैं, उन्हें अमेरिका से तेल खरीदना चाहिए क्योंकि अमेरिका के पास इसकी कोई कमी नहीं है।
ट्रम्प ने कहा कि अगर देश चाहें, तो हिम्मत दिखाएं और खुद होर्मुज स्ट्रेट जाकर तेल ले लें। अमेरिका उनकी मदद के लिए नहीं आएगा, जैसे वे अमेरिका की मदद के लिए नहीं आए।
अपने बयान में उन्होंने यह भी कहा कि ईरान काफी हद तक कमजोर हो चुका है और सबसे मुश्किल काम पहले ही पूरा हो गया है। अब बाकी देश खुद जाकर अपना तेल ले सकते हैं।

अमेरिका ने ईरान में हथियार डिपो पर एयरस्ट्राइक की
अमेरिका ने ईरान के इस्फहान शहर में एक बड़े हथियार डिपो पर एयरस्ट्राइक की है। वॉल स्ट्रीट जर्नल रिपोर्ट के मुताबिक, यह हमला सोमवार रात को किया गया। इसके लिए 2000 पाउंड के बंकर-बस्टर बमों का इस्तेमाल हुआ।
रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि इस डिपो में बड़ी मात्रा में हथियार और सैन्य सामग्री रखी गई थी, जिसे निशाना बनाया गया। बंकर-बस्टर बमों का इस्तेमाल मजबूत और भूमिगत ठिकानों को तबाह करने के लिए किया जाता है।
हमले के बाद डिपो में रखे हथियारों में विस्फोट होने से कई धमाके हुए और इलाके में आग के बड़े गुबार उठे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी सोशल मीडिया पर धमाकों का एक वीडियो शेयर किया है।
इस्फहान में हथियार डिपो पर हमले का वीडियो…
ईरान जंग से जुड़ी तस्वीरें…

इजराइल के हाइफा शहर में सोमवार को हिजबुल्लाह की तरफ से दागी गई एक ईरानी मिसाइल अटैक के बाद ऑयल रिफाइनरी में आग लग गई।

लेबनान के बेरूत में विस्थापित लोगों के लिए अस्थायी शिविर बनाए गए हैं। तस्वीर में इन अस्थायी शिविर के बाहर बच्चे खेलते नजर आ रहे हैं।
इटली का अमेरिका को सैन्य बेस देने से इनकार

इटली ने अमेरिका को अपने सिगोनेला मिलिट्री बेस का इस्तेमाल करने से रोक दिया। यह बेस सिसिली आइलैंड पर है। अमेरिका यहां विमान उतरना चाहता था, लेकिन इटली ने इजाजत नहीं दी।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के कुछ बॉम्बर विमान इटली के इस बेस पर उतरकर आगे मिडिल ईस्ट जाना चाहते थे। लेकिन इटली को इस प्लान की पहले से कोई जानकारी नहीं दी गई थी। अमेरिका ने न तो इटली से इजाजत मांगी और न ही उसके सैन्य अधिकारियों से बात की।
इससे कुछ दिन पहले स्पेन भी ऐसा ही कदम उठा चुका है। स्पेन ने ईरान जंग में शामिल अमेरिकी विमानों के लिए अपना एयरस्पेस बंद कर दिया था।

ट्रम्प बोले- होर्मुज के रास्ते तेल नहीं मिल रहा तो हमसे खरीदो
डोनाल्ड ट्रम्प ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि ब्रिटेन जैसे देश जो होर्मुज स्ट्रेट से फ्यूल नहीं ले पा रहे हैं, उन्हें अमेरिका से तेल खरीदना चाहिए क्योंकि अमेरिका के पास पर्याप्त तेल है।
उन्होंने कहा कि ये देश हिम्मत दिखाएं, होर्मुज तक जाएं और तेल खरीद लें।
ट्रम्प ने यह भी कहा कि अब देशों को खुद अपनी लड़ाई लड़ना सीखना होगा। अमेरिका उनकी मदद के लिए नहीं आएगा, जैसे वे अमेरिका की मदद के लिए नहीं आए थे।
उन्होंने अपने बयान में कहा कि ईरान काफी हद तक कमजोर हो चुका है और अब देशों को अपना तेल खुद हासिल करना चाहिए।
मिडिल ईस्ट में जंग की वजह से यूरोप के कई देशों महंगाई बढ़ी
यूरोप के कई देशों में महंगाई बढ़ गई है। मार्च महीने में यह बढ़कर 2.5% हो गई, जबकि फरवरी में 1.9% थी। यह जानकारी यूरोप की संस्था यूरोस्टेट ने दी है।
महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह तेल और गैस की कीमतों का बढ़ना है। मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के कारण ऊर्जा की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, मार्च में तेल-गैस की कीमतें करीब 4.9% बढ़ गईं, जबकि फरवरी में ये कम हुई थीं।
गाजा में अब तक UN के 390 से ज्यादा कर्मचारियों की मौत
गाजा में UN की एजेंसी UNRWA के 390 से ज्यादा कर्मचारियों की मौत हुई है। इसकी जानकारी UNRWA के प्रमुख फिलिप लाजारिनी ने दी है।
उन्होंने कहा कि इस मामले की सच्चाई जानने के लिए एक बड़ी और स्वतंत्र जांच टीम बनाई जानी चाहिए। UNRWA गाजा में लोगों की मदद करने वाली सबसे बड़ी संस्था है। यह वहां खाने-पीने, इलाज और जरूरी सेवाएं देती है।
लाजारिनी ने कहा कि इतने लोगों की मौत बहुत गंभीर बात है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
रिपोर्ट-अमेरिका की ईरान में घुसकर यूरेनियम जब्त करने की तैयारी
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ईरान के खिलाफ जमीनी कार्रवाई करने का आदेश दे सकते हैं। अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प ईरान के पास मौजूद यूरेनियम को अपने कब्जे में लेना चाहते हैं।
ईरान के पास करीब 400 किलो समृद्ध (एनरिच्ड) यूरेनियम है, जिसका इस्तेमाल परमाणु बम बनाने में किया जा सकता है। ट्रम्प ने अपने सहयोगियों से कहा है कि ईरान को यह यूरेनियम छोड़ना ही होगा।
अगर बातचीत से बात नहीं बनी, तो इसे जबरदस्ती भी लिया जा सकता है। इस बीच, अमेरिका मिडिल ईस्ट में करीब 10,000 अतिरिक्त सैनिक भेजने की योजना बना रहा है। इनमें से 3,500 से ज्यादा सैनिक पहले ही वहां पहुंच चुके हैं।
यूरेनियम एक ऐसा पदार्थ है, जिससे परमाणु ऊर्जा भी बनाई जा सकती है और परमाणु बम भी। फर्क सिर्फ इस बात से पड़ता है कि उसे कितना एनरिच यानि कि शुद्ध किया गया है।
विदेश
होर्मुज स्ट्रेट पर नाकेबंदी करने वाले ईरानी कमांडर की मौत:इजराइल के हमले में घायल हुए थे तंगसीरी, ईरान बोला- ऑपरेशन पर असर नहीं पड़ेगा
तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी,एजेंसी। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर नाकेबंदी से जुड़े IRGC नेवी चीफ अलीरेजा तंगसीरी की मौत की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। वे पिछले हफ्ते इजरायली एयरस्ट्राइक में गंभीर रूप से घायल हुए थे और बाद में उनकी मौत हो गई।
रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के मुताबिक, तंगसीरी हमले के समय कोस्टल डिफेंस और मैरीटाइम ऑपरेशंस से जुड़े थे। उन्हें होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की नाकेबंदी का प्रमुख चेहरा माना जाता था, जिसके जरिए ईरान ने वैश्विक तेल सप्लाई पर दबाव बनाया।

ईरान ने उनकी मौत के बावजूद साफ किया है कि उसके सैन्य ऑपरेशंस पर कोई असर नहीं पड़ेगा और रणनीति पहले की तरह जारी रहेगी। गौरतलब है कि इजराइल के रक्षा मंत्री ने 26 मार्च को दावा किया था कि एक एयरस्ट्राइक में तंगसीरी को मार गिराया गया।
जंग से जुड़ी तस्वीरें…

कुवैत में बिजली और पानी के प्लांट पर हुए हमले के बाद आग लग गई थी। हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई है।

ईरान ने रविवार को दक्षिणी इजराइल के केमिकल प्लांट रामत होवाव पर मिसाइल से हमला किया।

ईरान ने रविवार को वीडियो जारी कर इजराइल के इंडस्ट्रियल इलाके में मिसाइल हमलों को दिखाया।

लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी इलाके में सोमवार सुबह इजराइली हवाई हमले के बाद वहां से धुआं उठता देखा गया।
ट्रम्प ने ईरान के ऊर्जा ठिकानों को तबाह करने की धमकी दी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट तुरंत नहीं खोला गया और समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका उसके ऊर्जा ठिकानों को तबाह कर देगा।
सोशल मीडिया पर जारी बयान में ट्रम्प ने कहा कि पावर प्लांट, ऑयल वेल और खार्ग आइलैंड को पूरी तरह उड़ा दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर डीसैलिनेशन प्लांट्स को भी निशाना बनाया जा सकता है।
ट्रम्प ने दावा किया कि अमेरिका एक नए और ज्यादा समझदार शासन के साथ बातचीत कर रहा है और इसमें प्रगति हो रही है। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि अगर जल्द समझौता नहीं हुआ तो सैन्य कार्रवाई तेज की जाएगी।
उन्होंने कहा कि यह कदम अमेरिकी सैनिकों और अन्य लोगों की मौत का बदला लेने के लिए उठाया जाएगा, जिनके लिए उन्होंने ईरान को जिम्मेदार ठहराया।
ईरान बोला-कुवैत के डीसैलिनेशन प्लांट पर इजराइल ने हमला किया
ईरान ने आरोप लगाया है कि कुवैत के डीसैलिनेशन प्लांट पर इजराइल ने हमला किया है। ईरानी सेना का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान को बदनाम करने और उस पर आरोप डालने की साजिश के तहत की गई।
तस्नीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ईरान ने इस हमले को ‘जायनिस्ट शासन’ (इजराइल) की क्रूर कार्रवाई बताया है और कहा है कि इसके गंभीर नतीजे होंगे।
ईरान ने अमेरिका और इजराइल को चेतावनी देते हुए कहा कि क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकाने, उनके सैनिक और हित अब निशाने पर रहेंगे। साथ ही, इजराइल की सैन्य, सुरक्षा और आर्थिक संरचनाओं को भी टारगेट करने की बात कही गई है।
फारस की खाड़ी में भारत के 18 जहाज और 485 क्रू मौजूद
ईरान जंग के बीच फारस की खाड़ी में भारत के 18 जहाज और 485 भारतीय क्रू मौजूद हैं और सभी सुरक्षित हैं। पोर्ट्स, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय ने बताया कि पिछले 24 घंटों में किसी भी तरह की समुद्री घटना नहीं हुई है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
भारत सरकार के मुताबिक, हाल ही में दो भारतीय LPG कैरियर BW TYR और BW ELM सफलतापूर्वक होर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत की ओर बढ़ चुके हैं। इसके अलावा, पिछले 24 घंटों में 8 भारतीय नाविकों को सुरक्षित भारत वापस लाया गया है।
स्पेन ने अमेरिका के लिए एयरस्पेस बंद किया
स्पेन ने ईरान के खिलाफ युद्ध में शामिल अमेरिकी सैन्य विमानों के लिए अपना एयरस्पेस बंद कर दिया है। साथ ही, मिलिट्री बेस के इस्तेमाल पर भी रोक लगा दी गई है।
स्पेन की रक्षा मंत्री मार्गारीटा रोब्लेस ने कहा कि देश न तो अपने एयरस्पेस और न ही सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल ईरान से जुड़े किसी भी सैन्य अभियान के लिए करने देगा।
इस फैसले के बाद अमेरिकी विमानों को अपने रूट बदलने पड़ेंगे, हालांकि मानवीय और आपातकालीन उड़ानों को छूट दी गई है।
स्पेन के अर्थव्यवस्था मंत्री कार्लोस कुएर्पो ने कहा कि यह फैसला एकतरफा और अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ शुरू किए गए युद्ध का समर्थन न करने के आधार पर लिया गया है।
स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज पहले ही अमेरिका-इजराइल सैन्य अभियान की आलोचना कर चुके हैं। वहीं, डोनाल्ड ट्रम्प ने इस फैसले के जवाब में व्यापारिक कार्रवाई की धमकी दी है। इस निर्णय के बाद अमेरिका और स्पेन के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ने की संभावना है।
ईरान बोला- लेबनान में राजदूत अपना काम जारी रखेगा
ईरान ने लेबनान के निष्कासन आदेश को ठुकराते हुए कहा है कि उसका राजदूत बेरूत में ही अपना काम जारी रखेगा। विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि राजदूत अपने कर्तव्यों का निर्वहन करता रहेगा।
दरअसल, लेबनान ने पिछले हफ्ते ईरान के राजदूत मोहम्मद रजा शिबानी को पर्सोना नॉन ग्राटा घोषित कर 29 मार्च तक देश छोड़ने का निर्देश दिया था।
हालांकि, तय समयसीमा गुजरने के बाद भी राजदूत बेरूत में ही मौजूद हैं, जिससे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ गया है।
ईरान का अमेरिका से सीधी बातचीत से इनकार
ईरान ने अमेरिका के साथ किसी भी तरह की सीधी बातचीत से इनकार किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि अब तक दोनों देशों के बीच सिर्फ मध्यस्थों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान हुआ है।
उन्होंने बताया कि अमेरिका ने बातचीत की इच्छा जताई है, लेकिन उसकी ओर से भेजी गई शर्तें अतार्किक हैं। बघाई ने कहा कि ईरान का रुख शुरू से स्पष्ट रहा है, जबकि अमेरिका बार-बार अपनी स्थिति बदल रहा है।
ईरान ने यह भी कहा कि उसे पूरी तरह पता है कि वह किस ढांचे में बातचीत पर विचार करेगा। प्रवक्ता ने अमेरिकी कूटनीति पर तंज करते हुए कहा कि वहां खुद लोग उसके दावों को कितनी गंभीरता से लेते हैं।
पाकिस्तान में हुई बैठकों पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरान ने कहा कि ये उनकी अपनी पहल है और तेहरान इसमें शामिल नहीं हुआ। उसने मिडिल-ईस्ट के देशों से कहा कि वे युद्ध खत्म करने की कोशिश करें, लेकिन यह भी ध्यान रखें कि संघर्ष की शुरुआत किसने की थी।
हिजबुल्लाह बोला- इजराइल के हाइफा नेवल बेस पर मिसाइलें दागीं
हिजबुल्लाह ने दावा किया है कि उसने इजराइल के उत्तरी शहर हाइफा में नेवल बेस पर मिसाइलें दागी हैं। संगठन के मुताबिक, यह हमला इजराइल के खिलाफ चल रही सैन्य कार्रवाई का हिस्सा है।
इस हमले के बाद हाइफा की एक ऑयल रिफाइनरी में आग लगने की खबर भी सामने आई है। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि आग सीधे मिसाइल हमले से लगी या गिरते मलबे के कारण।
हिजबुल्लाह का दावा-114 इजराइली टैंकों को निशाना बनाया
लेबनान के हथियारबंद संगठन हिजबुल्लाह ने दावा किया है कि मौजूदा संघर्ष की शुरुआत से अब तक उसने 114 इजराइली टैंकों को निशाना बनाया है। यह जानकारी अल मायादीन चैनल के हवाले से सामने आई है। हालांकि, इजराइली सेना की ओर से भी इस पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

ईरानी स्पीकर बोले- ट्रम्प के बयानों पर तुरंत भरोसा न करें
ईरान के संसद स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने निवेशकों को सलाह दी है कि ट्रम्प के बयानों पर तुरंत भरोसा करके फैसला न लें। उनका कहना है कि जब अमेरिकी बयान से बाजार तेजी से ऊपर-नीचे हो, तो उसी दिशा में चलने के बजाय उल्टा सोचकर कदम उठाना बेहतर हो सकता है।
उन्होंने कहा कि ट्रम्प के बयान का फायदा बाजार के बड़े खिलाड़ी उठा रहे हैं। ट्रम्प ने 22 मार्च को कहा था कि ईरान के साथ अच्छी बातचीत और उसके एनर्जी ठिकानों पर हमले टाल दिए गए हैं। इससे बाजार में राहत आई, अमेरिकी शेयर बाजार चढ़े और तेल की कीमतें गिर गईं।
लेकिन कुछ ही दिनों बाद हालात बदल गए। ट्रम्प ने फिर सख्त बयान दिए, इजराइल ने तेहरान पर हमले किए और सऊदी अरब में ड्रोन इंटरसेप्शन की खबरें आईं। इसके बाद बाजार पलट गया। शेयर गिरे और तेल की कीमतें फिर बढ़ गईं।
कुछ ट्रेडर्स का कहना है कि बड़े एलान से पहले ही बाजार में अचानक ज्यादा खरीद-फरोख्त होने लगती है, जिससे लगता है कि कुछ लोगों को खबर पहले से मिल जाती है।
गालिबाफ ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिकी सेना ईरान में घुसती है, तो उसे कड़ा जवाब मिलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका सार्वजनिक रूप से बातचीत की बात करता है, लेकिन अंदर ही अंदर सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।

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