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बजट 2025 में कृषि को मिली बड़ी सौगात, प्रधानमंत्री धनधान्य योजना का हुआ ऐलान

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नई दिल्ली, एजेंसी। भारत में कृषि क्षेत्र हमेशा से ही एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है, और सरकार हर साल अपने बजट में इस क्षेत्र को मजबूत करने के लिए नई योजनाओं की घोषणा करती रही है। इस बार 2025 के बजट में कृषि सेक्टर के लिए कई अहम घोषणाएं की गई हैं, जिनसे एग्रीकल्चर स्टॉक्स में शानदार तेजी देखने को मिल रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में प्रधानमंत्री धनधान्य योजना का ऐलान किया, जिससे कृषि क्षेत्र में निवेशकों को नई उम्मीदें मिलीं। इसके अलावा किसान क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने और दाल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए भी नए कदम उठाए गए हैं।

प्रधानमंत्री धनधान्य योजना का ऐलान

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बजट में प्रधानमंत्री धनधान्य योजना शुरू करने की घोषणा की है। इस योजना के तहत, किसानों को वित्तीय सहायता देने के लिए सरकार के साथ राज्य सरकारें मिलकर काम करेंगी। इस योजना के पहले चरण को 100 जिलों में लागू किया जाएगा, जिससे किसानों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी। इसके अलावा, किसानों के लिए खास तौर पर कर्ज़ की लिमिट को बढ़ाया गया है, जो कृषि क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।

किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की लिमिट बढ़ी

बजट में एक और महत्वपूर्ण घोषणा की गई, जो सीधे तौर पर किसानों को फायदा पहुंचाने वाली है। वित्त मंत्री ने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की लिमिट को 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने का ऐलान किया। इससे किसानों को फसल उगाने और कृषि से जुड़ी अन्य जरूरतों के लिए अधिक कर्ज मिल सकेगा, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति में सुधार होगा। यह कदम कृषि क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण प्रोत्साहन है, जो किसानों के लिए कई अवसर खोलेगा।

कपास और दाल उत्पादन पर फोकस

बजट में कपास और दाल उत्पादन को बढ़ाने के लिए भी विशेष योजनाओं की घोषणा की गई है। वित्त मंत्री ने कपास किसानों के लिए एक नया मिशन शुरू करने का ऐलान किया है, जो उन्हें तकनीकी मदद और वित्तीय सहायता प्रदान करेगा। वहीं दाल उत्पादन में भारत को अग्रणी बनाने के लिए भी कई कदम उठाए जाएंगे। इससे न सिर्फ किसानों को लाभ होगा, बल्कि देश की खाद्यान्न सुरक्षा भी मजबूत होगी।

फल और सब्जी किसानों के लिए नए इंसेंटिव्स

इसके अलावा, सरकार ने फल और सब्जी किसानों के लिए भी नए इंसेंटिव्स की घोषणा की है। कृषि क्षेत्र में बदलाव लाने के लिए इन क्षेत्रों को भी प्रोत्साहन देने का निर्णय लिया गया है। इससे किसानों को अधिक उत्पादन के लिए प्रोत्साहन मिलेगा और वे अपनी आय बढ़ाने में सक्षम होंगे। इस तरह के कदम कृषि क्षेत्र की स्थिरता को बढ़ावा देंगे।

एग्रीकल्चर स्टॉक्स में शानदार तेजी

कृषि क्षेत्र के लिए बजट में की गई घोषणाओं का सीधा असर शेयर बाजार पर दिखा। विशेष रूप से एग्रीकल्चर से जुड़ी कंपनियों के स्टॉक्स में जबरदस्त तेजी देखी गई। बजट के बाद कावेरी सीड कंपनी के शेयर में 13.49% की बढ़त देखने को मिली, जो 1020.70 रुपये पर ट्रेड कर रहे थे। नाथ बायो-जीन्स का शेयर भी 5.77% बढ़कर 178.60 रुपये पर कारोबार कर रहा था। इसके अलावा, मंगलम सीड्स, धानुका एग्रीटेक, और यूपीएल जैसे प्रमुख एग्री स्टॉक्स में भी शानदार बढ़त देखी गई।

एग्री स्टॉक्स में प्रमुख कंपनियां

  1. कावेरी सीड कंपनी: कावेरी सीड कंपनी का शेयर 13.49% बढ़कर 1020.70 रुपये पर पहुंच गया।
  2. नाथ बायो-जीन्स: इस कंपनी का शेयर 5.77% बढ़कर 178.60 रुपये पर ट्रेड कर रहा था।
  3. बेयर क्रॉप साइंस: इसके शेयर में 0.67% की बढ़त देखी गई, जो 5148.25 रुपये पर ट्रेड कर रहे थे।
  4. मंगलम सीड्स: मंगलम सीड्स का शेयर 7.09% बढ़कर 222 रुपये पर दिखाई दे रहा था।
  5. धानुका एग्रीटेक: धानुका एग्रीटेक का शेयर 2.61% बढ़कर 1479.35 रुपये पर पहुंचा।
  6. यूपीएल: यूपीएल के शेयर में 0.94% की वृद्धि देखने को मिली, जो 609 रुपये पर ट्रेड कर रहे थे।
  7. पारादीप फॉस्फेट्स: इस कंपनी का शेयर 2.75% बढ़कर 115.90 रुपये पर था।
  8. राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स: इसका शेयर 0.95% बढ़कर 164.75 रुपये पर ट्रेड कर रहा था।

बजट का कृषि क्षेत्र पर प्रभाव

बजट में किए गए ऐलानों ने कृषि क्षेत्र में नई उम्मीदें जगा दी हैं। सरकार के इन कदमों से न सिर्फ किसानों की स्थिति में सुधार होगा, बल्कि निवेशकों को भी एग्रीकल्चर सेक्टर में नए अवसर मिलेंगे। एग्री स्टॉक्स में तेजी के कारण यह सेक्टर अब निवेशकों के लिए आकर्षक बन गया है। किसानों के लिए कर्ज की सीमा बढ़ना, कपास और दाल उत्पादन को बढ़ावा देना, और नए इंसेंटिव्स की घोषणा से यह क्षेत्र और मजबूत हो सकता है।

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सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान की भारत को धमकी:रक्षामंत्री बोले- जिस पल पानी पर खतरा लगा, हम जंग शुरू कर देंगे

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इस्लामाबाद, एजेंसी। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सिंधु जल संधि स्थगित रहने को लेकर भारत को धमकी दी है। पाकिस्तानी चैनल ARY न्यूज से बातचीत में आसिफ ने कहा कि अगर पाकिस्तान को लगा कि उसकी जल सुरक्षा खतरे में है, तो वह भारत के खिलाफ जंग छेड़ सकता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भारत पाकिस्तान के हिस्से के पानी के प्रवाह में दखल दे रहा है और रणनीतिक हथियार के तौर पर इसका इस्तेमाल कर रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पिछले एक साल में इस मामले में क्या नए घटनाक्रम हुए हैं, इसकी उन्हें पूरी जानकारी नहीं है।

अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत ने 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था। भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं करता, तब तक संधि बहाल नहीं की जाएगी।

गंभीर जल संकट का सामना कर रहा पाकिस्तान

रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान इस समय गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है। खासकर सिंध और बलूचिस्तान में पानी की कमी लगातार बढ़ रही है। सिंध के सिंचाई विभाग के आंकड़ों के मुताबिक-

  • नॉर्थ वेस्ट कैनाल में 64.1% पानी की कमी है।
  • राइस कैनाल में 38% की कमी दर्ज की गई है।
  • दादू कैनाल में 82% तक पानी की कमी है।

पाकिस्तान की सिंचाई व्यवस्था के अहम हिस्से सुक्कुर बैराज को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। पानी का स्तर लगातार घटने से कृषि और अर्थव्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

भारत-पाकिस्तान के बीच का सिंधु जल समझौता क्या है?

सिंधु नदी प्रणाली में कुल 6 नदियां हैं- सिंधु, झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास और सतलुज। इनके किनारे का इलाका करीब 11.2 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इसमें 47% जमीन पाकिस्तान, 39% जमीन भारत, 8% जमीन चीन और 6% जमीन अफगानिस्तान में है। इन सभी देशों के करीब 30 करोड़ लोग इन इलाकों में रहते हैं।

1947 में भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के पहले से ही भारत के पंजाब और पाकिस्तान के सिंध प्रांत के बीच नदियों के पानी के बंटवारे का झगड़ा शुरू हो गया था। 1947 में भारत और पाक के इंजीनियरों के बीच ‘स्टैंडस्टिल समझौता’ हुआ। इसके तहत दो मुख्य नहरों से पाकिस्तान को पानी मिलता रहा। ये समझौता 31 मार्च 1948 तक चला।

1 अप्रैल 1948 को जब समझौता लागू नहीं रहा तो भारत ने दोनों नहरों का पानी रोक दिया। इससे पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की 17 लाख एकड़ जमीन पर खेती बर्बाद हो गई। दोबारा हुए समझौते में भारत पानी देने को राजी हो गया।

इसके बाद 1951 से लेकर 1960 तक वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता में भारत पाकिस्तान में पानी के बंटवारे को लेकर बातचीत चली और आखिरकार 19 सितंबर 1960 को कराची में भारत के PM नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के बीच दस्तखत हुए। इसे इंडस वाटर ट्रीटी या सिंधु जल संधि कहा जाता है।

सिंधु जल समझौता स्थगित करने का पाकिस्तान पर असर

पाकिस्तान में खेती की 90% जमीन यानी 4.7 करोड़ एकड़ एरिया में सिंचाई के लिए पानी सिंधु नदी प्रणाली से मिलता है। पाकिस्तान की नेशनल इनकम में एग्रीकल्चर सेक्टर की हिस्सेदारी 23% है और इससे 68% ग्रामीण पाकिस्तानियों की जीविका चलती है। ऐसे में पाकिस्तान में आम लोगों के साथ-साथ वहां की बेहाल अर्थव्यवस्था और बदतर होने लगी है।

पाकिस्तान के मंगल और तारबेला हाइड्रोपावर डैम को पानी नहीं मिल पा रहा है। इससे पाकिस्तान के बिजली उत्पादन में 30% से 50% तक की कमी आ सकती है। साथ ही औद्योगिक उत्पादन और रोजगार पर असर पड़ेगा।

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गॉडजिला अल नीनो से भारत में सूखे का खतरा बढ़ा:NASA ने जारी की तस्वीर, समुद्र में बढ़ रही गर्मी से मानसून कमजोर हुआ

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नई दिल्ली, एजेंसी। भारत समेत दक्षिण एशिया के कई देशों में सूखे और बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। इसकी वजह अल नीनो की मजबूत स्थिति है। नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी (JPL) के मुताबिक पश्चिमी प्रशांत महासागर में 1997 के बाद ऐसी परिस्थितियां बन रही हैं।

29 साल पहले इतिहास का सबसे शक्तिशाली अल नीनो बना था, जिसे सुपर या गॉडजिला अल नीनो कहा गया। जून 2026 में वैसी ही स्थिति बनती दिख रही है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह पिछले कुछ दशकों का सबसे प्रभावशाली अल नीनो हो सकता है। नासा के सैटेलाइट ने समुद्र में जमा हो रही भारी मात्रा में गर्मी की फोटो और आंकड़े जारी किए हैं।

1997-98 के अल नीनो के कारण दुनिया के कई हिस्सों में भीषण बाढ़, सूखा, फसलों को भारी नुकसान और रिकॉर्ड स्तर की गर्मी दर्ज की गई थी। मौजूदा अल नीनो भी उसी दिशा में बढ़ सकता है।

समुद्र में गर्म पानी जमा हो रहा

नासा के सेंटिनल-6 माइकल फ्रीलिच सैटेलाइट से मिले आंकड़ों के मुताबिक भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के बड़े हिस्से में समुद्र का जलस्तर सामान्य से ज्यादा है। वैज्ञानिकों के मुताबिक-

  • यह संकेत देता है कि समुद्र की सतह के नीचे बड़ी मात्रा में गर्म पानी जमा हो रहा है। जब समुद्र का पानी गर्म होता है तो वह फैलने लगता है। इससे जलस्तर बढ़ जाता है।
  • समुद्र की सतह के नीचे जमा गर्मी दुनिया के मौसम को प्रभावित करती है। गर्म पानी का भंडार बड़ा और गहरा हो जाए, तो इसका वैश्विक असर होता है। इससे कई देशों में मौसम का संतुलन बिगड़ सकता है।
  • समुद्र के भीतर ‘केल्विन वेव्स’ नाम की विशाल जल-तरंगें गर्मी को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचा रही हैं। जब प्रशांत महासागर की व्यापारिक हवाएं कमजोर पड़ती हैं, तब इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया के पास जमा गर्म पानी पूर्व की ओर दक्षिण अमेरिका के तटों की तरफ बढ़ने लगता है।
  • इस कारण समुद्र की गहराई से ऊपर आने वाला ठंडा पानी कम हो जाता है और समुद्र का तापमान तेजी से बढ़ने लगता है। यही स्थिति अल नीनो की पहचान मानी जाती है।

दुनियाभर में सूखे-बाढ़ की आशंका

वैज्ञानिकों का कहना है कि पूर्वी प्रशांत महासागर अभी 1997 जितना गर्म नहीं हुआ है, लेकिन नई केल्विन वेव्स लगातार उस क्षेत्र की ओर बढ़ रही हैं। इससे संकेत मिल रहे हैं कि अल नीनो आने वाले महीनों में और मजबूत हो सकता है।

इतिहास बताता है कि अल नीनो के दौरान दुनिया के कई हिस्सों में अत्यधिक बारिश और बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है, जबकि ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया और एशिया के कुछ क्षेत्रों में सूखे की स्थिति बन सकती है। इसके अलावा भीषण गर्मी, फसल उत्पादन में कमी और मौसम संबंधी आपदाओं की घटनाएं भी बढ़ सकती हैं।

NOAA ने 11 जून को अल नीनो की घोषणा की थी

अमेरिका की राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन (NOAA) ने 11 जून को अल नीनो की स्थिति घोषित कर दी थी। यह घोषणा मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर में लगातार कई महीनों तक सामान्य से अधिक तापमान दर्ज होने के बाद की गई।

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अमेरिका ने ईरान के तेल बेचने पर प्रतिबंध हटाया:अगले 60 दिन भारत भी खरीद सकता है, ईरान में फिर तैनात होंगे UN के न्यूक्लियर इंस्पेक्टर

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तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन, एजेंसी। अमेरिका ने ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों की बिक्री पर लगी पाबंदियों में 60 दिन की ढील दे दी है। यह फैसला स्विट्जरलैंड में दोनों देशों के बीच हुई बातचीत के बाद लिया गया है।

अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने ईरानी मूल के कच्चे तेल, पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के उत्पादन, डिलीवरी और बिक्री के लिए अस्थायी सामान्य लाइसेंस जारी किया है। यह छूट 21 अगस्त तक लागू रहेगी। इससे भारत समेत कई देश फिर से ईरानी तेल खरीद सकेंगे।

वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि स्विट्जरलैंड में हुई वार्ता के दौरान ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में बिना रोक-टोक आवाजाही बनाए रखने का भरोसा दिया है। इसके साथ ही ईरान UN की परमाणु एजेंसी IAEA के इंस्पेक्टर्स को दोबारा देश में काम करने की मंजूरी देने पर भी सहमति जताई है।

इस बीच स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत दूसरे दिन भी जारी है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने अमेरिका की कोशिश ईरान के साथ स्थायी समझौते तक पहुंचने की है और अब तक की बातचीत में अच्छी तरह आगे बढ़ी है।

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