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पंजाब के जसबीर के मोबाइल में 150 पाकिस्तानी नंबर मिले:अफसरों-ISI एजेंटों के हो सकते हैं; यूट्यूबर ज्योति के साथ फोटो से रडार पर आया

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चंडीगढ़,एजेंसी। पंजाब में पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार यूट्यूबर जसबीर सिंह के मोबाइल में पाकिस्तान के 150 कॉन्टैक्ट नंबर मिले हैं। इतना ही नहीं, उसका हिसार (हरियाणा) की यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा के साथ भी कनेक्शन मिला है।

यूट्यूब पर अपलोड एक वीडियो में जसबीर सिंह, ज्योति मल्होत्रा के साथ पाकिस्तान में शॉपिंग करता दिख रहा है। फिलहाल, यूट्यूबर को 3 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है।

जसबीर (41) जिला रोपड़ के माहलां गांव का रहने वाला है। पुलिस का दावा है कि नंबरों की जांच चल रही है। अभी शक है कि ये नंबर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI एजेंटों या फिर पाकिस्तानी अधिकारियों के भी हो सकते हैं।

उधर, जसबीर सिंह का परिवार गांव से गायब हो गया है। चमकौर साहिब के गांव माहलां स्थित घर पर न तो उसकी पत्नी है न ही बेटा। ग्रामीणों केओ अनुसार, मंगलवार तक जसबीर का परिवार घर में ही था, बुधवार से यहां पर कोई भी नहीं दिखाई दिया है। उसके माता-पिता का देहांत हो चुका है, जसबीर का एक भाई मोहाली में रहता है।

ज्योति की गिरफ्तारी के बाद फोटो सामने आई ज्योति मल्होत्रा की 16 मई 2025 को हुई गिरफ्तारी के बाद एक फोटो सामने आई, जिसमें जसबीर सिंह ज्योति के साथ दिख रहा है। इस वीडियो के बाद से वह सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर आ गया।

जसबीर के वकील ने खुद मीडिया को बताया है कि 17 मई यानी ज्योति की गिरफ्तारी के एक दिन बाद पंजाब पुलिस ने उसे तलब कर लिया था। वह लगातार पुलिस के सामने पेश हाे रहा था और उसने सारी जानकारियां पुलिस को दी। उसके बैंक खातों की डिटेल भी पुलिस के पास है।

भारतीय सेना की जानकारियां शेयर करने का शक स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल के AIG डॉ. रवजोत गरेवाल के अनुसार, सूचना मिली थी कि जसबीर सिंह उर्फ जान महल पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के संपर्क में है। वह पाकिस्तान की किसी संस्था के भी संपर्क में है। हो सकता है कि उसने आर्मी को लेकर पाकिस्तान को जानकारियां दी हों। सारी पड़ताल के बाद पुलिस ने पूछताछ के लिए उसे हिरासत में ले लिया।

पाकिस्तान की एम्बेसी के कार्यक्रम में भी गया था पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तानी अधिकारी दानिश के कहने पर जसबीर दिल्ली में पाकिस्तान एम्बेसी के किसी कार्यक्रम में शामिल हुआ। वहां उसकी पाकिस्तानी आर्मी के अधिकारियों और यूट्यूबरों के साथ मुलाकात हुई। शक है कि वह ISI एजेंट शाकिर उर्फ जट्‌ट रंधावा के भी संपर्क में था।

जसबीर के पाकिस्तानी उच्चायोग से निष्कासित अधिकारी एहसान-उर-रहीम उर्फ ​​दानिश से भी कॉन्टैक्ट में होने की बात सामने आई है। जसबीर तीन बार 2020, 2021 और 2024 में पाकिस्तान गया। वहां पर ISI अधिकारियों के साथ भी संपर्क में आने के एंगल से जांच चल रही है।

पाकिस्तान में ज्योति के साथ शॉपिंग करते हुए जसबीर सिंह।

पाकिस्तान में ज्योति के साथ शॉपिंग करते हुए जसबीर सिंह।

लाहौर में ज्योति संग शॉपिंग करते दिखे पाकिस्तान में जब जसबीर गया था, तो उस समय ज्योति मल्होत्रा भी उसके ग्रुप में थी। दोनों लाहौर में घूमे थे। वहां जसबीर ज्योति के शॉपिंग वाले वीडियो में उसके साथ नजर आया। इसका फोटो खुद जसबीर सिंह ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया है।

जसबीर सिंह अपने गांव में शानदार घर बनवा रहा है।

जसबीर सिंह अपने गांव में शानदार घर बनवा रहा है।

गांव में जसबीर बना रहा आलीशान कोठी जसबीर सिंह इन दिनों अपने गांव में आलीशान कोठी बना रहा है। पिछले साल से घर का काम चल रहा है। गांव वालों ने बताया कि पिछले कुछ महीनों से जसबीर घर पर ही ज्यादा रहता था। गांवों के लोगों ने बताया कि जसबीर की चार एकड़ जमीन है। परिवार में पत्नी और एक बेटा है। जबकि उसके भाई का परिवार मोहाली में रहता है।

सरपंच बोले- पुलिस ने फोन पर दी अरेस्ट की सूचना गांव के सरपंच इंद्रजीत सिंह ने बताया कि उन्हें 4 मई की सुबह पुलिस का फोन आया था कि आपके गांव के जसबीर को अरेस्ट किया गया है। सरपंच ने कहा- मुझे लगता है कि जसबीर पर लगाए गए आरोप गलत हैं। बेशक उसका पेशा ब्लॉगर का है, लेकिन वह करीब 4 साल नॉर्वे भी रहकर आया है। पैसा तो उसके पास है।

29 मई को मुल्लांपुर में पंजाब किंग्स और आरसीबी के बीच हुए मैच को देखने भी जसबीर आया था।

29 मई को मुल्लांपुर में पंजाब किंग्स और आरसीबी के बीच हुए मैच को देखने भी जसबीर आया था।

जसबीर सिंह IPL मैच देखने 29 मई को मोहाली आया था जसबीर सिंह को क्रिकेट मैच का भी शौक है। वह मुल्लांपुर में पंजाब किंग्स और आरसीबी के बीच हुआ मैच देखने अपने बेटे और कुछ दोस्तों के साथ पहुंचा था। यह ब्लॉग भी उसने अपने चैनल पर शेयर किया है। वहीं, अब पुलिस उसकी सारी प्रॉपर्टी व अन्य चीजों की भी पड़ताल कर रही है।

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नेपाल सीमा से गिरफ्तार हुए TMC के पूर्व विधायक जहांगीर खान, STF की बड़ी कार्रवाई

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कोलकाता, एजेंसी। तृणमूल कांग्रेस के नेता जहांगीर खान को ‘जबरन वसूली’ के आरोप में सोमवार को उत्तर बंगाल में भारत-नेपाल सीमा के पास से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने यह जानकारी दी। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने खान को गिरफ्तारी से दी गई अंतरिम सुरक्षा 26 मई को वापस ले ली थी। खान के खिलाफ दक्षिण 24 परगना जिले के फाल्टा थाने में सात प्राथमिकी दर्ज हैं।
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, ”खान को उत्तर बंगाल में भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया।” हालांकि पुलिस ने गिरफ्तारी के संबंध में विस्तृत जानकारी नहीं दी है। खान 21 मई को फाल्टा विधानसभा उपचुनाव में चौथे स्थान पर रहे थे। हालांकि, उन्होंने चुनाव से कुछ दिन पहले अपनी उम्मीदवारी वापस लेने की घोषणा की थी, लेकिन नाम वापस लेने की अवधि समाप्त हो चुकी थी इसीलिए उनका नाम ईवीएम में दर्ज रहा।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने खान को मिली अंतरिम सुरक्षा वापस ली
इससे पहले कलकत्ता हाई कोर्ट ने खान के खिलाफ दर्ज कई आपराधिक मामलों में पुलिस की किसी भी सख्त कार्रवाई से उन्हें मिली अंतरिम सुरक्षा वापस ले ली थी। कोर्ट ने 18 मई को खान को सख्त कार्रवाई से राहत दी थी, लेकिन बाद में इसे रद्द कर दिया गया। जजों ने कहा कि राज्य में राजनीतिक स्थिति में बदलाव और याचिकाकर्ता द्वारा राजनीतिक बदले की भावना के दावों के कारण ऐसी सुरक्षा जारी रखना उचित नहीं होगा।

खान के वकील किशोर दत्ता ने कोर्ट में तर्क दिया कि 4 मई को विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद उनके मुवक्किल के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे। उन्होंने दावा किया कि ये मामले राजनीतिक बदले की भावना का नतीजा थे और कहा कि सुरक्षा न केवल चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी थी, बल्कि खान को कथित उत्पीड़न से बचाने के लिए भी थी। दूसरी ओर, अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने सुरक्षा बढ़ाने की मांग का विरोध किया। उन्होंने कहा कि पहले दी गई सुरक्षा केवल खान को 21 मई को फाल्टा में हुए दोबारा मतदान (रीपोल) में भाग लेने में सक्षम बनाने के लिए थी, जिसके नतीजे 24 मई को घोषित किए गए थे।

 पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में फाल्टा विधानसभा उपचुनाव (रीपोल) के बीच एक बड़ी राजनीतिक घटनाक्रम में, जहांगीर खान ने अपना नामांकन वापस ले लिया, जो पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा झटका था। उन्होंने कहा कि दौड़ से हटने का फैसला फाल्टा के लोगों की भलाई के लिए लिया गया था। खान ने कहा, “मैं फाल्टा का बेटा हूं और चाहता हूं कि फाल्टा शांतिपूर्ण रहे और तरक्की करे। हमारे मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी फाल्टा के विकास के लिए एक विशेष पैकेज दे रहे हैं, इसलिए मैंने निर्वाचन क्षेत्र में दोबारा मतदान प्रक्रिया से दूर रहने का फैसला किया है।”

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भाजपा की फूट डालने की पुरानी चाल कामयाब नहीं होगी, क्रॉस वोटिंग की आशंका पर दिग्विजय सिंह का तीखा हमला

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भोपाल, एजेंसी। मध्य प्रदेश में कांग्रेस से राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने अपना नामाकंन दाखिल किया। उनका मुकाबले में भाजपा ने तीसरे उम्मीदवार के रूप में महेश केवट को उतारा है। ऐसे में मुकाबला बेहद रोचक हो गया है। वहीं कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग का खतरा बढ़ गया है। हालांकि कांग्रेस ने इसे भाजपा की गलतफहमी बताया है।

कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह का कहना है, “बीजेपी को गलतफहमी है कि वे पार्टी में फूट डाल सकते हैं। कांग्रेस पूरी तरह से संगठित और एकजुट है; सभी कांग्रेस विधायक पार्टी की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन को मजबूती से अपना पूरा समर्थन देंगे और बीजेपी की फूट डालने की पुरानी चाल कामयाब नहीं होगी। मीनाक्षी नटराजन कांग्रेस की उम्मीदवार हैं और हम कांग्रेस में एकजुट हैं।”

बता दें कि 230 सदस्यों वाली मध्य प्रदेश विधानसभा में प्रभावी वोट संख्या 228 है। इनमें से BJP के पास 164 और कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं। बीना की विधायक निर्मला सप्रे के वोट की स्थिति साफ न होने (जो BJP की तरफ झुकती दिख रही है) और विजयपुर के विधायक मुकेश मल्होत्रा ​​के वोटिंग पर रोक के कारण, कांग्रेस की प्रभावी संख्या घटकर 62 रह गई है।

राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए हर उम्मीदवार को 58 वोटों की ज़रूरत होती है। इस तरह, BJP को दो सीटें जीतने के लिए 116 वोटों की ज़रूरत है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कुल 164 वोटों में से 116 वोट डालने के बाद BJP के पास 48 वोट बचेंगे, जबकि तीसरी सीट पक्की करने के लिए उसे 10 और वोटों की ज़रूरत होगी। कांग्रेस के पास एक सीट जीतने के लिए ज़रूरी संख्या तो है, लेकिन BJP द्वारा तीसरे उम्मीदवार के ऐलान ने उसकी चिंताएं बढ़ा दी हैं और नटराजन के चुनाव जीतने की राह मुश्किल कर दी है।

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क्या शिवसेना की तहर दो गुटों में बंट जाएगी TMC?, सांसद के इस्तीफे से बंगल में गरमाई सियासत

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कोलकाता, एजेंसी। बंगाल चुनाव में बीजेपी की शानदार जीत की पूरे देश में चर्चा है तो वहीं तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद पार्टी के बीच अंदरूनी कलह भी सामने आने लगी है इसे लेकर अब पार्टी के भविष्य की रणनीति पर लोग चर्चा कर रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में अब इस बात को लेकर चर्चा शुरू हो गई है कि क्या तृणमूल कांग्रेस में भी Shiv Sena की तरह अंदरूनी खींचतान बढ़ेगी या पार्टी नेतृत्व समय रहते हालात संभाल लेगा। विपक्ष लगातार TMC में असंतोष और गुटबाजी के आरोप लगा रहा है, जबकि पार्टी नेतृत्व इसे सामान्य राजनीतिक घटनाक्रम बता रहा है।

अगल गुट बनाने को लेकर चर्चा तेज इस्तीफा 
दरअसल, अंदरूनी कलह के बीच पार्टी के सांसदों के एक समूह ने भविष्य की रणनीति और पार्टी से अलग होकर एक नया गुट बनाने की संभावना पर चर्चा करने के लिए सोमवार को यहां बैठक की। बैठक में हिस्सा लेने वाले नेताओं में सुखेंदु शेखर राय भी शामिल थे, जिन्होंने सोमवार को ही पार्टी से इस्तीफा दे दिया और राज्यसभा की सदस्यता भी छोड़ दी थी। उनके अलावा तृणमूल के लोकसभा सांसद प्रसून बनर्जी, शर्मिला सरकार, जगदीश चंद्र बसुनिया, कालीपद सरन खेरवाल और अरूप चक्रवर्ती भी बैठक में मौजूद थे। 

ममता बनर्जी को व्हाट्सऐप पर भेजा 
मीडिया से बातचीत में राय ने कहा कि उन्होंने राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन से मुलाकात कर उन्हें अपना इस्तीफा सौंप दिया है। राय ने कहा, ”मैंने पार्टी से इस्तीफा देने के अपने फैसले से ममता बनर्जी को व्हाट्सऐप और ईमेल के जरिये अवगत करा दिया है। यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल के 60 विधायकों द्वारा एक अलग गुट बनाने के बाद सामने आया है, जहां रिताब्रता बनर्जी ने ममता बनर्जी के नामित उम्मीदवार के बजाय नेता प्रतिपक्ष का कार्यभार संभाल लिया है।

इस्तीफे को लेकर दिया ये बयान 
राय ने कहा, “विधानसभा में जो कुछ भी हुआ, क्या कोई यह बता सकता है कि राज्यसभा या लोकसभा में वैसी ही स्थिति पैदा नहीं होगी?” हालांकि, राय ने स्पष्ट किया कि राज्यसभा और पार्टी से उनका इस्तीफा राज्य विधानसभा में हुए घटनाक्रम से अलग है, क्योंकि वहां के विधायकों ने इस्तीफा नहीं दिया है। उन्होंने कहा, ”उनके कदम और मेरे कदम के बीच कोई संबंध नहीं है। यह पूरी तरह से अलग है। मैंने पार्टी से इस्तीफा दिया है, उन्होंने नहीं। राज्यसभा में मेरा कार्यकाल 2029 में समाप्त होना था, लेकिन मैंने सैद्धांतिक तौर पर इस्तीफा दे दिया, क्योंकि मेरे लिए (पार्टी में) बने रहना मुश्किल हो गया था।”

‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक में शामिल हुए अभिषेक बनर्जी
यह राजनीतिक घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी और उनके भतीजे एवं पार्टी सांसद अभिषेक बनर्जी यहां ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक में भाग ले रहे हैं। इस बैठक में गठबंधन के भीतर एकजुटता पर जोर दिया गया और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने तथा जनता की आजीविका से जुड़े मुद्दों को उठाने की आवश्यकता बताई गई।

तृणमूल के इन दोनों नेताओं के अलावा बैठक में कांग्रेस की सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के तेजस्वी यादव, नेशनल कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्ला और पीडीपी की महबूबा मुफ्ती के साथ-साथ वामपंथी नेता भी मौजूद थे। हालांकि ममता से नाराज विधायकों ने अभी तक अलग पार्टी बनाए जाने को लेकर कोई भी अधिकारिक ऐलान नहीं किया। 

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