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बिज़नस

जापान के निर्यात में सालाना आधार पर मई में 1.7 प्रतिशत की गिरावट

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तोक्यो,एजेंसी। जापान के निर्यात में मई महीने में गिरावट आई है। अमेरिका को मोटर वाहनों के निर्यात में सालाना आधार पर करीब 25 प्रतिशत की भारी गिरावट इसकी मुख्य वजह रही। वित्त मंत्रालय ने बुधवार को बताया कि निर्यात में सालाना आधार पर 1.7 प्रतिशत की गिरावट आई जो विश्लेषकों द्वारा पूर्वानुमानित गिरावट से कम है। आयात में 7.7 प्रतिशत की गिरावट आई, जो कमजोर घरेलू मांग को दर्शाता है। यह अप्रैल में दर्ज दो प्रतिशत की गिरावट से भी बदतर है। वहीं व्यापार घाटा मई में 637.6 अरब येन या 4.4 अरब डॉलर रहा। 

जापान अभी तक शुल्क मुद्दे को सुलझाने के लिए अमेरिका के साथ किसी समझौते पर नहीं पहुंच पाया है। प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा ने इस सप्ताह की शुरुआत में कनाडा में जी-7 शिखर सम्मेलन से इतर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात के बाद कहा था कि दोनों पक्ष कुछ बिंदुओं पर सहमत नहीं हो पाए हैं। अमेरिका ने जापान के मोटर वाहनों व उसके घटकों के निर्यात पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क और अन्य वस्तुओं पर 24 प्रतिशत शुल्क लगाया है। 

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देश

Gold Demand in India: भारत में सोने की मांग मजबूत, आयात रिकॉर्ड स्तर पर, चांदी में भी जबदरस्त उछाल

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मुंबई, एजेंसी। देश में सोने का आयात वित्त वर्ष 2025-26 में 24 प्रतिशत बढ़कर अब तक के उच्चतम स्तर 71.98 अरब डॉलर पहुंच गया है। यह वृद्धि मुख्य रूप से कीमती धातु की ऊंची कीमतों के कारण हुई है। वाणिज्य मंत्रालय ने यह जानकारी दी। वित्त वर्ष 2024-25 में सोने का आयात 58 अरब डॉलर रहा था, जबकि 2023-24 में यह 45.54 अरब डॉलर और 2022-23 में 35 अरब डॉलर था।

वित्त वर्ष 2025-26 में मात्रा के हिसाब से सोने का आयात 4.76 प्रतिशत घटकर 721.03 टन रहा, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 757.09 टन था। इसी तरह, चांदी का आयात बीते वित्त वर्ष में लगभग 150 प्रतिशत बढ़कर 12 अरब डॉलर हो गया। मात्रा के लिहाज से यह 42 प्रतिशत बढ़कर 7,334.96 टन रहा। इन कीमती धातुओं के आयात में वृद्धि से देश का व्यापार घाटा वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 333.2 अरब डॉलर पहुंच गया। 

आयात मूल्य बढ़ा

वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, सोने की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण आयात मूल्य बढ़ा है, जबकि मात्रा में गिरावट आई है। मंत्रालय ने बताया कि सोने के आयात की कीमत वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 99,825.38 डॉलर प्रति किलोग्राम हो गई, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 76,617.48 डॉलर प्रति किलोग्राम थी। इसी दौरान आयात मात्रा 757.09 टन से घटकर 721.03 टन रह गई। 

स्विट्जरलैंड सबसे बड़ा सप्लायर

मंत्रालय के अनुसार स्विट्जरलैंड सोने के आयात का सबसे बड़ा स्रोत रहा, जिसकी हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत है। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात (16 प्रतिशत से अधिक) और दक्षिण अफ्रीका (लगभग 10 प्रतिशत) का स्थान है। सोना देश के कुल आयात का पांच प्रतिशत से अधिक हिस्सा है। भारत दुनिया में चीन के बाद सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है और इसका उपयोग मुख्य रूप से आभूषण उद्योग में होता है। 

आंकड़ों के अनुसार, स्विट्जरलैंड से आयात 11.36 प्रतिशत बढ़कर 24.27 अरब डॉलर हो गया। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के अनुसार, चालू खाता घाटा (सीएडी) दिसंबर तिमाही में बढ़कर 13.2 अरब डॉलर (जीडीपी का 1.3 प्रतिशत) हो गया, जबकि पिछले वर्ष 2024-25 की इसी अवधि में यह 11.3 अरब डॉलर था। हालांकि, चालू खाता घाटा अप्रैल-दिसंबर 2025 में घटकर 30.1 अरब डॉलर (जीडीपी का एक प्रतिशत) रहा, जबकि एक वर्ष पहले इसी अवधि में यह 36.6 अरब डॉलर (जीडीपी का 1.3 प्रतिशत) था। 

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देश

2030 तक भारत का डिजिटल विज्ञापन बाजार छू लेगा $22 अरब का आंकड़ा, दोगुनी होगी रफ्तार

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मुंबई, एजेंसी। बाजार अनुसंधान कंपनी रेडसीर कंसल्टिंग (RedSeer Consulting) ने कहा कि भारत में डिजिटल विज्ञापन बाजार अगले पांच वर्षों में दोगुना होकर 2030 तक 22 अरब डॉलर का हो सकता है। रेडसीर की ताजा रिपोर्ट के अनुसार डिजिटल विज्ञापन खर्च की वृद्धि व्यापक अर्थव्यवस्था से आगे निकल रही है। यह खंड 2025 में कुल वैश्विक विज्ञापन खर्च का 70 से 75 प्रतिशत था और 2025 में वैश्विक वास्तविक जीडीपी की तुलना में 3 से 5 गुना तेज गति से बढ़ रहा है। 

रेडसीर कंसल्टिंग के वरिष्ठ सलाहकार माधव गुलाटी ने बताया, ”भारतीय डिजिटल विज्ञापन बाजार 2025 में 11 अरब डॉलर का था। इसके 2030 तक 10 से 15 प्रतिशत की संचयी वार्षिक वृद्धि दर से बढ़कर 19 अरब डॉलर से 22 अरब डॉलर के बीच रहने का अनुमान है।” 

भौगोलिक लिहाज से 2025 में वैश्विक डिजिटल विज्ञापन खर्च में लगभग 46 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ अमेरिका सबसे आगे है। उसके बाद लगभग 24 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ चीन का स्थान है। रिपोर्ट के मुताबिक इस बाजार में भारत की हिस्सेदारी करीब एक प्रतिशत है। 

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देश

क्रिसिल का पहली तिमाही में शुद्ध लाभ 46% बढ़कर 233 करोड़ रुपए

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मुंबई, एजेंसी। घरेलू क्रेडिट रेटिंग एजेंसी क्रिसिल का 2026 की जनवरी-मार्च तिमाही में शुद्ध लाभ 45.9 प्रतिशत बढ़कर 233.3 करोड़ रुपए रहा। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी का शुद्ध लाभ 159.8 करोड़ रुपए था। कंपनी की एकीकृत कुल आय भी वर्ष 2026 की पहली तिमाही में 29.6 प्रतिशत बढ़कर 1,093.7 करोड़ रुपए हो गई, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 843.8 करोड़ रुपए थी। क्रिसिल का वित्त वर्ष एक जनवरी से 31 दिसंबर (कैलेंडर वर्ष) तक चलता है। 

क्रिसिल के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अमीश मेहता ने कहा कि इस अवधि में कारोबार में वृद्धि ग्राहक-केंद्रित दृष्टिकोण और विशिष्ट, विशेषज्ञता-आधारित समाधानों के कारण हुई है। उन्होंने कहा कि वैश्विक परिस्थितियां यह दर्शाती हैं कि जटिल हालात में ग्राहकों के लिए क्रिसिल की विश्लेषणात्मक और जोखिम समाधान सेवाओं की कितनी अहम भूमिका है। 

क्रिसिल ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि और मजबूती उसके कारोबार के लिए अवसर प्रदान करती रहेगी। कंपनी ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है, जो पिछले वित्त वर्ष के 7.6 प्रतिशत से कम है। हालांकि इसमें और गिरावट का जोखिम भी बताया गया है। क्रिसिल ने प्रति शेयर नौ रुपए के अंतरिम लाभांश की भी घोषणा की है। 

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