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चावल की भरमार से परेशान भारत, रिकॉर्ड मात्रा में एथनॉल उत्पादन के लिए किया आवंटन
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8 months agoon
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Divya Akashनई दिल्ली,एजेंसी। भारत ने इस बार रिकॉर्ड मात्रा में चावल एथनॉल उत्पादन के लिए आवंटित किया है, क्योंकि देश भारी भरकम भंडार से जूझ रहा है। नई फसल के आगमन के साथ इन स्टॉक्स के और बढ़ने की संभावना है। यह हालात एकदम उलट हैं उस समय से जब देश को चावल की कमी के चलते निर्यात पर रोक लगानी पड़ी थी।
एथनॉल योजना को मिला बल
चावल को एथनॉल में बदलने की इस रणनीति से भारत अपने भारी चावल भंडार को घटाने में सफल हो रहा है और साथ ही सरकार की महत्वाकांक्षी 20% एथनॉल ब्लेंडिंग योजना को भी गति मिल रही है। गन्ने की कमी के कारण पिछले एक साल में एथनॉल उत्पादन में बाधा आ रही थी, लेकिन अब चावल से इसकी पूर्ति हो रही है।
मार्च में भारत ने चावल के निर्यात पर लगभग दो साल पुराना प्रतिबंध हटा दिया, जो मानसून की विफलता और उत्पादन में गिरावट के कारण लगाया गया था। इस साल पर्याप्त बारिश के चलते रिकॉर्ड उत्पादन की उम्मीद है।
भोजन प्राथमिकता, पर भंडार बहुत ज्यादा
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया, “हमारी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि देश में भोजन की कोई कमी न हो। लेकिन जब हमारे पास आवश्यकता से कहीं ज्यादा चावल है, तो हमने इसका उपयोग एथनॉल उत्पादन के लिए करने का निर्णय लिया है।”
भारतीय खाद्य निगम (FCI) ने 2024-25 विपणन वर्ष के लिए रिकॉर्ड 52 लाख मीट्रिक टन चावल एथनॉल के लिए आवंटित किया है, जो वैश्विक चावल व्यापार का लगभग 9% है। तुलना करें तो पिछले वर्ष यह मात्र 3,000 टन था।
FCI भारत की लगभग आधी चावल की फसल खरीदता है और उसके पास अब तक का रिकॉर्ड 5.95 करोड़ टन चावल भंडार (अनमिल्ड धान समेत) 1 जून तक मौजूद है, जबकि सरकार का लक्ष्य केवल 1.35 करोड़ टन का था।
कॉर्न की कीमतों पर राहत
चावल की उपलब्धता से मक्का (कॉर्न) की कीमतों पर दबाव कम हुआ है, जो पिछले साल रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थीं और भारत को मक्का का रिकॉर्ड आयात करना पड़ा था। ग्रेन-बेस्ड डिस्टिलरीज़ चावल, मक्का और क्षतिग्रस्त अनाज का इस्तेमाल करती हैं और कीमत के अनुसार फीडस्टॉक बदलती हैं।
भारत, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और उपभोक्ता है, 2025-26 तक पेट्रोल में 20% एथनॉल मिलाने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। मई में यह दर 19.8% तक पहुंच गई, जो लगभग लक्ष्य के करीब है।
उत्पादन बढ़ाने की संभावनाएं
ग्रेन एथनॉल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन की जॉइंट सेक्रेटरी अरुषि जैन ने कहा कि यदि सरकार चावल का समर्थन मूल्य घटाती है या एथनॉल की खरीद कीमत बढ़ाती है, तो और अधिक चावल एथनॉल उत्पादन के लिए उपयोग किया जा सकता है।
FCI वर्तमान में चावल ₹22,500 प्रति टन बेच रहा है, जबकि तेल विपणन कंपनियां ₹58.5 प्रति लीटर की दर से चावल-आधारित एथनॉल खरीद रही हैं, जो कई निर्माताओं के अनुसार पर्याप्त मार्जिन नहीं देती।
भविष्य में और चावल एथनॉल में जाएगा
राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बी.वी. कृष्णा राव के अनुसार, अक्टूबर से एक और बंपर फसल आने की उम्मीद है जिससे FCI का स्टॉक और बढ़ सकता है। भारत पहले से ही वैश्विक चावल निर्यात का 40% करता है और इसके बाद भी निर्यात में 2025 में 25% की बढ़ोतरी के साथ रिकॉर्ड 2.25 करोड़ टन तक पहुंचने की संभावना है। यह थाईलैंड और वियतनाम जैसे प्रतिद्वंद्वियों के लिए चुनौती है।
फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन (FAO) के अनुसार, भारत ने इस वर्ष 146.1 मिलियन टन चावल का रिकॉर्ड उत्पादन किया है, जबकि घरेलू मांग केवल 120.7 मिलियन टन रही।
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खेल
सीनियर-वीमेंस वनडे ट्रॉफी…छत्तीसगढ़ की लगातार चौथी जीत:विदर्भ को 7 विकेट से हराया, माहीक नरवसे रहीं मैच की हीरो, 4 विकेट झटके, अर्द्धशतक भी जमाया
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6 hours agoon
February 12, 2026By
Divya Akashरायपुर,एजेंसी। बीसीसीआई की ओर से आयोजित सीनियर वीमेंस वनडे ट्रॉफी में छत्तीसगढ़ महिला टीम का शानदार प्रदर्शन जारी है। टूर्नामेंट के अपने चौथे मुकाबले में छत्तीसगढ़ ने विदर्भ को 7 विकेट से हराकर लगातार चौथी जीत दर्ज की। यह मुकाबला 12 फरवरी को बड़ौदा में खेला गया।
मैच में छत्तीसगढ़ ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। पहले बल्लेबाजी करते हुए विदर्भ की टीम 47.5 ओवर में 158 रन बनाकर ऑलआउट हो गई। विदर्भ की ओर से कप्तान दिशा कसाट ने शानदार पारी खेलते हुए 65 रन बनाए। उनके अलावा लतिका इनामदार (27 रन) और मोना (17 रन) ही दोहरे अंक तक पहुंच सकीं।
छत्तीसगढ़ के गेंदबाजों ने अनुशासित गेंदबाजी करते हुए विदर्भ को बड़ा स्कोर खड़ा करने का मौका नहीं दिया और नियमित अंतराल पर विकेट चटकाए। छत्तीसगढ़ की ओर से माहीक नरवसे और तरन्नुम पठान ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 4-4 विकेट अपने नाम किए।

तरन्नुम पठान।

माहीक नरवसे (MOM)
47.3 ओवर में 3 विकेट के नुकसान पर हासिल किया लक्ष्य
159 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी छत्तीसगढ़ की टीम ने 47.3 ओवर में 3 विकेट के नुकसान पर लक्ष्य हासिल कर लिया। टीम की जीत में माहीक नरवसे ने ऑलराउंड प्रदर्शन करते हुए 66 रन की मैच जिताऊ पारी खेली।
उनका अच्छा साथ शिल्पा साहू (45 रन) ने दिया, जबकि कप्तान कृति गुप्ता ने नाबाद 27 रन बनाए। विदर्भ की ओर से कोमल जंजाड, आरती बेहनवाल और कंचन नागवानी को 1-1 विकेट मिला।
शानदार बल्लेबाजी और घातक गेंदबाजी के लिए माहीक नरवसे को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। उन्होंने मैच में 66 रन बनाने के साथ 4 विकेट भी झटके।

देश
चांदी आज ₹7,316 गिरी, कीमत ₹2.59 लाख किलो हुई:सोना ₹1,672 गिरकर ₹1.56 लाख पर आया, देखें अपने शहर में सोने के दाम
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7 hours agoon
February 12, 2026By
Divya Akashनई दिल्ली,एजेंसी। सोने-चांदी के दाम में आज 12 फरवरी को गिरावट रही। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, एक किलो चांदी की कीमत 7,316 रुपए कम होकर 2,59,133 रुपए पर आ गई है। इससे पहले बुधवार को चांदी की कीमत 2,66,449 रुपए किलो थी।
वहीं, आज 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत 1,672 रुपए गिरकर 1,55,650 रुपए पर आ गई है। इससे पहले बुधवार को ये 1,57,322 रुपए प्रति 10 ग्राम थी। सर्राफा बाजार में 29 जनवरी को सोने ने 1,76,121 रुपए और चांदी ने 3,85,933 रुपए का ऑल टाइम हाई बनाया था।
43 दिन में सोना ₹22,455 और चांदी ₹28,713 महंगी हुई
- इस साल अब तक सोने की कीमत 22,455 रुपए बढ़ चुकी है। 31 दिसंबर 2025 को 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 1,33,195 रुपए का था, जो अब 1,56,147 रुपए हो गया है।
- वहीं, चांदी 28,713 रुपए महंगी हो गई है। 31 दिसंबर 2025 को एक किलो चांदी की कीमत 2,30,420 रुपए थी, जो अब 2,59,133 रुपए प्रति किलो पहुंच गई है।
2025 में सोना 75% और चांदी 167% महंगी हुई
- 2025 में सोना 57 हजार रुपए (75%) बढ़ा है। 31 दिसंबर 2024 को 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 76,162 रुपए का था, जो 31 दिसंबर 2025 को 1,33,195 रुपए हो गया।
- चांदी इस दौरान 1.44 लाख रुपए (167%) बढ़ी। 31 दिसंबर 2024 को एक किलो चांदी 86,017 रुपए की थी, जो साल के आखिरी दिन 2,30,420 रुपए प्रति किलो हो गई।
सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है।

देश
रिटेल महंगाई 8 महीने में सबसे ज्यादा:जनवरी में बढ़कर 2.75% पर पहुंची, अक्टूबर 2025 में यह रिकॉर्ड निचले स्तर 0.25% पर थी
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7 hours agoon
February 12, 2026By
Divya Akashनई दिल्ली,एजेंसी। जनवरी में रिटेल महंगाई पिछले महीने के मुकाबले बढ़कर 2.75% पर पहुंच गई है। दिसंबर में ये 1.33% पर थी। 8 महीनों में सबसे ज्यादा है। मई 2025 में महंगाई 2.82% पर पहुंच गई थी। सरकार ने गुरुवार, 12 फरवरी को महंगाई के आंकड़े जारी किए हैं।
नए पैमाने में शामिल हुए ई-कॉमर्स और एयरफेयर
सरकार ने महंगाई मापने के लिए आधार वर्ष को 2012 से बदलकर 2024 कर दिया है। यह बदलाव एक दशक से अधिक समय के बाद किया गया है। ब्लूमबर्ग के सर्वे में 32 अर्थशास्त्रियों ने अनुमान जताया था कि इससे जनवरी की महंगाई दर 2.77% के आसपास रह सकती है।
खाने-पीने की चीजों का वेटेज घटा
पुराने इंडेक्स में खाने-पीने की चीजों का वेटेज लगभग 50% था, जिसे अब घटाकर 36.8% कर दिया गया है। सांख्यिकी मंत्रालय के सचिव सौरभ गर्ग के मुताबिक, भारतीयों की आय बढ़ने के साथ अब वे भोजन पर कम और हाउसिंग व अन्य सेवाओं पर ज्यादा खर्च कर रहे हैं।
- क्या हटा: अब पुराने हो चुके रेडियो, वीसीआर (VCR) और तांगा-गाड़ी के किराए को इंडेक्स से बाहर कर दिया गया है।
- क्या जुड़ा: इसकी जगह अब हवाई किराया , ऑनलाइन सब्सक्रिप्शन, ई-कॉमर्स शॉपिंग, ग्रामीण हाउसिंग रेंट और बिजली की कीमतों को शामिल किया गया है।
बेस ईयर क्या होता है?
बेस ईयर वो साल होता है जिसकी कीमतों को आधार (बेस) माना जाता है। यानी, उसी साल की चीजों की औसत कीमत को 100 का मान देते हैं। फिर, दूसरे सालों की कीमतों की तुलना इसी बेस ईयर से की जाती है। इससे पता चलता है कि महंगाई कितनी बढ़ी या घटी है।
उदाहरण: मान लीजिए 2020 बेस ईयर है। उस साल एक किलो टमाटर रू.50 का था। अब 2025 में वो रू.80 का हो गया। तो महंगाई = (80 – 50) / 50 × 100 = 60% बढ़ी। यही फॉर्मूला CPI में यूज होता है, लेकिन ये पूरे बाजार की चीजों पर लागू होता है।
बेस ईयर कैसे चुना जाता है और कैसे काम करता है?
सरकार आमतौर पर हर 5-10 साल में नया बेस ईयर चुनती है। ये ऐसा साल होता है जो सामान्य हो, न ज्यादा सूखा हो, न महामारी, न ज्यादा महंगाई।
अक्टूबर में 14 साल के निचले स्तर पर थी रिटेल महंगाई
अक्टूबर में रिटेल महंगाई 0.25% के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गई थी। इसका कारण खाने-पीने की चीजों की कीमतों में कमी थी। ये 2012 CPI सीरीज में सबसे कम महंगाई थी। यानी, ये करीब 14 साल का निचला स्तर रहा था।
महंगाई कैसे बढ़ती-घटती है?
महंगाई का बढ़ना और घटना प्रोडक्ट की डिमांड और सप्लाई पर निर्भर करता है। अगर लोगों के पास पैसे ज्यादा होंगे तो वे ज्यादा चीजें खरीदेंगे। ज्यादा चीजें खरीदने से चीजों की डिमांड बढ़ेगी और डिमांड के मुताबिक सप्लाई नहीं होने पर इन चीजों की कीमत बढ़ेगी। वहीं अगर डिमांड कम होगी और सप्लाई ज्यादा तो महंगाई कम होगी।


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