एक्रॉ,एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को घाना की संसद को संबोधित किया। उन्होंने कहा, ‘आज इस प्रतिष्ठित सदन को संबोधित करते हुए मुझे गर्व महसूस हो रहा है। घाना में होना सौभाग्य की बात है। यह लोकतंत्र की भावना से भरी हुई धरती है। घाना पूरे अफ्रीका के लिए प्रेरणा का केंद्र है।’
मोदी ने कहा, ‘भारत लोकतंत्र की जननी है। यह हमारे लिए एक सिस्टम नहीं, बल्कि संस्कार है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में भारत दुनिया के लिए शक्ति का स्तंभ है। एक मजबूत भारत एक स्थिर और समृद्ध दुनिया में योगदान देगा।’
PM मोदी ने कहा, ‘घाना के राष्ट्रपति जॉन महामा से कल नेशनल अवॉर्ड मिलना मेरे लिए सम्मान की बात है। भारत के 140 करोड़ लोगों की ओर से, मैं इस सम्मान के लिए घाना के लोगों को धन्यवाद देता हूं। हमारी दोस्ती आपके मशहूर शुगर लोफ अनानास से भी मीठी है।’
PM मोदी 2 जुलाई से 10 जुलाई तक विदेश यात्रा पर हैं। इस दौरान वे 5 देशों में जाएंगे। घाना उनका पहला पड़ाव है। प्रधानमंत्री मोदी को बुधवार को घाना का सर्वोच्च सम्मान ‘द ऑफिसर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द स्टार ऑफ घाना’ दिया गया था। दोनों देशों ने 4 अलग-अलग समझौते (MoU) भी साइन किए।
PM मोदी के संबोधन की बड़ी बातें…
घाना G20 का स्थायी सदस्य बना। यह भारत की प्रेसीडेंसी में मुमकिन हुआ। भारत की फिलॉसिफी ह्यूमैनिटी फर्स्ट है। हम सभी के खुश रहने में यकीन रखते हैं। हमें घाना में एक ऐसा देश दिखाई देता है, जो साहस के साथ हर चुनौती का बहादुरी से सामना करता है।
भारत लोकतंत्र की जननी है। हमारे लिए लोकतंत्र सिर्फ एक व्यवस्था नहीं, मूलभूत मूल्यों का हिस्सा है। भारत में 2,500 से ज्यादा राजनीतिक दल, अलग-अलग राज्यों में 20 अलग-अलग पार्टियों की सरकारें, 22 आधिकारिक भाषाएं और हजारों बोलियां हैं।
हम एक उज्ज्वल और टिकाऊ भविष्य को सुरक्षित करने के लिए अफ्रीका के डेवलपमेंट फ्रेमवर्क का समर्थन करते हैं। साथ मिलकर, हम वादों और तरक्की से भरे भविष्य को आकार देंगे।
दुनिया जलवायु परिवर्तन, महामारी, आतंकवाद और साइबर सुरक्षा जैसे नए और जटिल संकटों का भी सामना कर रही है। पिछली सदी में बनाए गए संस्थान जवाब देने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। बदलती परिस्थितियों में वैश्विक शासन में विश्वसनीय और प्रभावी सुधारों की जरूरत है।
PM मोदी बोले- भारत-घाना के बीच 25 हजार करोड़ से ज्यादा का व्यापार
घाना के राष्ट्रपति PM मोदी को सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित करते हुए।
2 जुलाई को सर्वोच्च सम्मान मिलने के बाद PM मोदी ने कहा था, ‘घाना से सम्मानित होना मेरे के लिए गर्व की बात है। इससे पहले उन्होंने घाना के राष्ट्रपति जॉन महामा के साथ जॉइंट स्टेटमेंट जारी किया। मोदी ने कहा कि भारत और घाना आतंकवाद को मानवता का दुश्मन मानते हैं और इसके खिलाफ मिलकर काम करेंगे।’
मोदी ने कहा, ‘यह युद्ध का समय नहीं है, बल्कि बातचीत और डिप्लोमेसी के जरिए समस्याओं का हल होना चाहिए। दोनों देश संयुक्त राष्ट्र (UN) में सुधारों पर एकमत हैं। इसके साथ ही दोनों ने पश्चिम एशिया और यूरोप में चल रहे संघर्षों पर चिंता जताई।’
PM मोदी ने कहा, ‘भारत और घाना के बीच व्यापार 25 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा हो चुका है और अगले 5 साल में इसे दोगुना करने टारगेट है।’ उन्होंने घाना के राष्ट्रपति जॉन महामा को भारत आने का न्योता दिया।’
दोनों देशों में 4 MoU साइन हुए
दोनों देशों ने चार महत्वपूर्ण समझौते (MoU) पर साइन किए। विदेश मंत्रालय के सचिव दम्मू रवि ने बताया कि ये समझौते दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करेंगे।
पहला समझौता- विदेश मंत्रालय लेबल पर जॉइंट कमीशन बैठक की स्थापना करना।
दूसरा समझौता- पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में दोनों देश एक्सपर्ट्स की ट्रेनिंग और एक्सपीरियंस शेयर करेंगे।
तीसरा समझौता- कल्चरल एक्टिविटी से जुड़ा है, जिससे सांस्कृतिक कार्यक्रमों और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
चौथा समझौता- स्टैंडर्ड सेटिंग (प्रोडक्ट और सर्विस के लिए गुणवत्ता नियम तय करना) करना, जिससे आर्थिक सहयोग बढ़ेगा।
मोदी को 21 तोपों की सलामी दी गई
PM नरेंद्र मोदी बुधवार को अफ्रीकी देश घाना पहुंचे। घाना के राष्ट्रपति जॉन महामा ने राजधानी एक्रॉ में एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया। PM मोदी को 21 तोपों की सलामी के साथ गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
इसके बाद मोदी होटल पहुंचे, जहां भारतीय समुदाय के लोगों ने उनका स्वागत किया। होटल के बाहर भारतीय वेशभूषा में पहुंचे स्कूली बच्चों ने मोदी को संस्कृत में श्लोक सुनाया।
इसके बाद उन्होंने घाना के राष्ट्रपति के साथ राजधानी अक्कारा के जुबली हाउस में द्विपक्षीय वार्ता की।
PM मोदी के घाना दौरे की तस्वीरें…
दोनों देशों के विदेश सचिव ने बुधवार को MoU साइन किए। इस दौरान PM मोदी और घाना के राष्ट्रपति महामा पीछे खड़े रहे।
PM मोदी ने घाना के राष्ट्रपति के साथ मंगलवार रात द्विपक्षीय वार्ता की।
PM मोदी के सम्मान में घाना की भारतवंशी महिलाओं ने शास्त्रीय नृत्य किया।
घाना के राष्ट्रपति ने मोदी को रिसीव किया। इसके बाद उन्हें एयरपोर्ट पर गार्ड ऑफ ऑनर मिला।
एयरपोर्ट पर PM मोदी के सम्मान में पारंपरिक लोक नृत्य किया गया।
भारत ने घाना को 6 लाख कोविड वैक्सीन दी थी
भारत और घाना अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक-दूसरे के मजबूत समर्थक रहे हैं। दोनों देश गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) के सदस्य हैं और संयुक्त राष्ट्र जैसे संगठनों में मिलकर काम करते हैं। घाना ने भारत की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के दावे का समर्थन किया है।
जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद और अन्य वैश्विक मुद्दों पर दोनों देश एक-दूसरे के साथ खड़े रहते हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान भारत ने घाना को वैक्सीन और चिकित्सा मदद दी थी। भारत ने घाना को 6 लाख कोविड वैक्सीन दी थी।
गांधी के आदर्शों पर चलकर घाना को आजादी मिली
क्वामे एन्क्रूमा घाना के सबसे बड़े नेता थे, जिन्हें ‘अफ्रीका का महात्मा गांधी‘ भी कहा जाता है। उन्होंने अमेरिका में पढ़ाई के दौरान गांधीजी के विचार पढ़े और उनसे बहुत प्रभावित हुए। इसके बाद घाना आकर उन्होंने कन्वेंशन पीपुल्स पार्टी (CPP) बनाई और देश में आजादी की लड़ाई शुरू की।
एन्क्रूमा ने इसके लिए अहिंसा, एकता और नागरिक अवज्ञा जैसे गांधीवादी तरीकों का इस्तेमाल किया। एन्क्रूमा का मानना था कि बिना हिंसा के ब्रिटिश शासन के खिलाफ शांतिपूर्ण आंदोलन चलाकर ही घाना आजाद हो सकता है, जैसा गांधी ने भारत में किया था।
एन्क्रूमा ने 1950 में ‘पॉजिटिव एक्शन’ नाम से देशभर में हड़ताल की अपील की। इसके लिए उन्हें जेल भी जाना पड़ा, लेकिन इससे उनकी लोकप्रियता और बढ़ गई। 6 मार्च 1957 को एन्क्रूमा की अगुआई में घाना अफ्रीका का पहला देश बना जिसने ब्रिटेन से आजादी हासिल की।
घाना की आजादी का असर पूरे अफ्रीका पर पड़ा। लिहाजा बाकी देशों में भी आजादी की मांग तेज हो गई। कुछ ही साल बाद नाइजीरिया, केन्या, तंजानिया जैसे कई देशों ने ब्रिटिश, फ्रेंच या बेल्जियन उपनिवेशवाद से स्वतंत्रता हासिल की।
नई दिल्ली, एजेंसी। रूस और चीन समेत BRICS देशों ने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की है। देशों ने कहा कि आतंकियों को पनाह देने वालों के खिलाफ मिलकर कार्रवाई की जाएगी।
इसके साथ ही, आतंकियों तक पहुंचने वाली फंडिंग रोकने और उन्हें सुरक्षित ठिकाने देने वालों पर कार्रवाई करने पर भी सहमति बनी है।
BRICS देशों के बीच संयुक्त बयान जारी करने पर सहमति ऐसे समय में बनी है, जब पश्चिम एशिया में तनाव है और ईरान, सऊदी अरब और UAE के कई मुद्दों पर अलग-अलग रुख हैं।
भारत ने लगातार बातचीत के जरिए इन मतभेदों को दूर करने और सदस्य देशों के बीच आम सहमति बनाने में अहम भूमिका निभाई।
BRICS समिट से जुड़ीं फोटोज
PM मोदी, रूसी राष्ट्रपति पुतिन और चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग BRICS समिट के दौरान बातचीत करते हुए।
मोदी, पुतिन और जिनपिंग एक साथ मंच पर नजर आए। इस दौरान मोदी दोनों नेताओं का हाथ थामे दिखे।
BRICS समिट में PM मोदी के साथ जिनपिंग, पुतिन और इंडोनेशियाई राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो समेत दूसरे नेता नजर आए।
PM मोदी ने 18वें BRICS समिट से पहले चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का भारत मंडपम में स्वागत किया
BRICS नेताओं के स्वागत के लिए सजे मंच पर रामेश्वरम के प्रसिद्ध रामनाथस्वामी मंदिर की तस्वीर लगी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शी जिनपिंग को इस मंदिर के बारे में बताया।
BRICS समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन साथ दिखाई दिए।
ब्रिक्स नई दिल्ली घोषणा: 10 सबसे अहम बातें
पहलगाम आतंकी हमले की निंदा: 22 अप्रैल 2025 के हमले की कड़ी निंदा, 26 लोगों की मौत का जिक्र।
आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख: आतंकवाद के हर रूप और हर वजह की निंदा की गई।
आतंकवाद को धर्म से न जोड़ें: आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता या समुदाय से जोड़ने का विरोध।
सीमा पार आतंकवाद पर कार्रवाई: आतंकवाद, उसकी फंडिंग और आतंकियों को पनाह देने वालों के खिलाफ मिलकर कार्रवाई पर जोर।
आतंकियों की जवाबदेही तय हो: आतंकियों और आतंकी संगठनों के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई की बात।
संयुक्त राष्ट्र की आतंकरोधी संधि जल्द बने: अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर प्रस्तावित संधि को जल्द अपनाने की मांग।
ब्रिक्स के मूल सिद्धांत मजबूत होंगे: आपसी सम्मान, संप्रभु समानता, एकजुटता और सहमति से फैसलों पर जोर।
एकतरफा टैरिफ की निंदा: एकतरफा टैरिफ और व्यापारिक पाबंदियों पर चिंता जताई गई। कहा कि ऐसे कदम WTO के नियमों के अनुरूप होने चाहिए।
परमाणु खतरा: परमाणु हथियारों के इस्तेमाल के खतरे और बढ़ते वैश्विक तनाव पर चिंता जताई गई।
भारत की अध्यक्षता की सराहना: BRICS देशों ने भारत की अध्यक्षता में हुए BRICS प्लस और आउटरीच संवाद की सराहना की।
PM मोदी ने शनिवार को BRICS समिट 2026 के औपचारिक शुरुआत की घोषणा की।
ब्रिक्स समिट में PM मोदी के बयान की अहम बातें
अगले 20 साल का नया एजेंडा बनाएं
BRICS के अगले 20 साल के लिए नया एजेंडा और फैसलों पर अमल की स्थायी व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव।
ग्लोबल साउथ नियम बनाने में हिस्सा ले
AI, साइबरस्पेस, अंतरिक्ष और बायोटेक्नोलॉजी के नियम तय करने में विकासशील देशों की बराबर भागीदारी पर जोर।
युवाओं को तैयार करें
युवा राजनयिकों और नीति-निर्माताओं को बातचीत और कानून की ट्रेनिंग देने का सुझाव।
नाविकों के लिए इमरजेंसी नेटवर्क बने
मुसीबत में फंसे नाविकों को इलाज, परिवार से संपर्क और सुरक्षित निकालने के लिए देशों के बीच नेटवर्क बनाने की बात।
भविष्य सबका, फैसला भी सबका
मोदी ने कहा- दुनिया का भविष्य साझा है तो उसे तय करने का अधिकार भी सभी देशों के पास होना चाहिए।
जिनपिंग BRICS के लिए 7 साल बाद भारत आए
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 7 साल बाद भारत पहुंचे हैं। गलवान झड़प के बाद यह जिनपिंग का यह पहला भारत दौरा है। BRICS समिट में शामिल होने के बाद वे आज शाम प्रधानमंत्री मोदी से द्विपक्षीय बैठक करेंगे।
तनाव के बीच ईरान-UAE राष्ट्रपतियों ने बातचीत की
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने BRICS समिट से इतर UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद से मुलाकात की।
दोनों नेताओं की यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा हुआ है और कई क्षेत्रीय मुद्दों पर दोनों देशों के रुख अलग हैं।
हालांकि, ईरान और UAE पिछले कुछ सालों से रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में यह मुलाकात तनाव के बीच दोनों देशों के बातचीत का रास्ता खुला रखने का संकेत है।
BRICS नेताओं ने साथ में पौधा लगाया
BRICS समिट 2026 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और BRICS देशों के नेताओं ने भारत मंडपम के बाहर लॉन में साथ मिलकर पौधा लगाया।
BRICS नेताओं ने साथ ग्रुप फोटो खिंचवाई
BRICS देशों ने कहा- आतंकवाद को धर्म से न जोड़ा जाए
BRICS देशों ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता या समुदाय से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। सदस्य देशों ने आतंकवाद के हर रूप की निंदा की और इसके खिलाफ मिलकर कार्रवाई करने पर जोर दिया।
घोषणा में कहा गया कि आतंकवाद को किसी भी वजह से सही नहीं ठहराया जा सकता। आतंकियों की फंडिंग और उन्हें सुरक्षित ठिकाने देने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई जरूरी है।
ईरान-UAE के मतभेदों के बावजूद संयुक्त बयान मंजूर
भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक सफलता के तौर पर BRICS देशों ने शनिवार को नई दिल्ली घोषणा को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी।
पश्चिम एशिया के संघर्ष को लेकर ईरान और UAE के बीच मतभेदों के बावजूद कई दौर की बातचीत के बाद सहमति बनी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो दिवसीय BRICS समिट के पहले दिन की बैठक के अंत में घोषणा को मंजूरी दिए जाने का ऐलान किया।
BRICS ने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की
BRICS देशों ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की है।
नई दिल्ली घोषणा में सदस्य देशों ने आतंकवाद के हर रूप के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर जोर दिया।
घोषणा में सीमा पार आतंकवाद, आतंकियों की फंडिंग और उन्हें पनाह देने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात भी कही गई है।
जिनपिंग बोले- पश्चिम एशिया युद्ध से लोगों को भारी नुकसान
सरकारी एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध से पूरे क्षेत्र के लोगों को भारी नुकसान हुआ है। इस युद्ध से अंतरराष्ट्रीय समुदाय का भी हित पूरा नहीं हो रहा है।
अगले साल चीन संभालेगा BRICS की अध्यक्षता
अगले साल BRICS की अध्यक्षता चीन करेगा। इस मौके पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मिडिल-ईस्ट में जारी युद्ध और तनाव पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि युद्ध किसी के हित में नहीं है। शी ने कहा कि BRICS देशों को मजबूती से इतिहास के सही पक्ष के साथ खड़ा रहना चाहिए।
पजशकियान बोले- परमाणु ठिकानों पर हमले बंद हों
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने कहा कि शांतिपूर्ण परमाणु ठिकानों को किसी भी हमले या धमकी से सुरक्षित रखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि BRICS देशों को एकतरफा प्रतिबंधों का मिलकर सामना करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। उनके मुताबिक, BRICS को दुनिया में न्याय की आवाज बनना चाहिए।
पजशकियान ने फिलिस्तीन के मुद्दे को भी अहम बताया। उन्होंने कहा कि फिलिस्तीनी लोगों को अपने भविष्य का फैसला खुद करने का अधिकार मिलना चाहिए। उनके मुताबिक, यह वैश्विक व्यवस्था की निष्पक्षता और विश्वसनीयता की बड़ी परीक्षा है और BRICS को इस मामले में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
ईरानी राष्ट्रपति की बेटी जहरा BRICS मार्केट पहुंचीं
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान की बेटी जहरा पजशकियान BRICS बाजार पहुंचीं। उन्होंने यहां बने ईरान पवेलियन का दौरा किया और ईरानी कला व हस्तशिल्प देखे।
BRICS के 20 साल पर PM मोदी ने 2 डाक टिकट जारी किए
BRICS देशों ने नई दिल्ली घोषणा को सर्वसम्मति से दी मंजूरी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली घोषणा को अपनाने का प्रस्ताव रखा। PM मोदी ने कहा, “किसी भी सदस्य ने कोई आपत्ति नहीं जताई है। नई दिल्ली घोषणा-2026 को सर्वसम्मति से मंजूरी दी जाती है।”
भंडारा, एजेंसी। महाराष्ट्र के भंडारा जिले में शुक्रवार को ट्रक और बोलेरो की टक्कर में 3 बच्चों समेत 8 लोगों की मौत हो गई, जबकि 3 लोग घायल हैं। पुलिस के मुताबिक, हादसा सुबह करीब 4 बजे नागपुर-रायपुर नेशनल हाईवे पर पिंपलगांव सड़क के पास हुआ।
सभी लोग छत्तीसगढ़ के रायपुर से नेशनल हाईवे-53 के रास्ते नागपुर जा रहे थे। ट्रक में फंसे पिकअप को निकालने के लिए दो जेसीबी की मदद लेनी पड़ी। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और राहत-बचाव का काम शुरू किया।
घटना से जुड़ी तस्वीरें…
हादसे के बाद आसपास के लोगों ने घायलों को बाहर निकालकर अस्पताल भेजा।
हादसे के बाद बोलेरो पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। इसमें कितने लोग सवार थे, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
मौके पर पुलिस ने क्रेन और जेसीबी की मदद से ट्रक में फंसी बोलेरो को बाहर निकाला।
घायलों को पुलिस और स्थानीय लोगों ने एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया।
10 सितंबर: वैन-ट्रक की टक्कर में 6 की मौत
इससे पहले गुरुवार को नांदेड जिले में नांदेड-भोकर रोड पर वैन और ट्रक की टक्कर हो गई थी। हादसे में 6 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 8 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।
पुलिस के मुताबिक हादसा शाम करीब 7 बजे सीताखंडी घाट के पास हुआ। टाटा मैजिक वैन नांदेड से भोकर की ओर जा रही थी, तभी सामने से आ रहे ट्रक से उसकी जोरदार टक्कर हो गई।
टक्कर इतनी तेज थी कि वैन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। हादसे के बाद स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और वैन में फंसे घायलों को बाहर निकाला। सभी घायलों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
काठमांडू/नई दिल्ली, एजेंसी। नेपाल में 26 अगस्त को आई भयानक बाढ़ से बड़े पैमाने पर तबाही हुई। टूटे घर, सड़कें, पुल और दूसरी सुविधाएं दोबारा बनाने के लिए 7,233 करोड़ नेपाली रुपए यानी करीब रू.45 हजार करोड़ की जरूरत का अनुमान है। यह नेपाल की GDP का करीब 11% है।
बाढ़ और भूस्खलन से 16 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। अब तक 1,377 लोगों की मौत और करीब 5,130 लोगों के लापता होने की खबर है। करीब 65% रिकवरी खर्च यानी रू.29 हजार करोड़ सड़क, पुल, बिजली और दूसरी जरूरी सुविधाओं पर खर्च होंगे। बाढ़ में 7,570 घर, 48 सरकारी इमारतें, 18 स्कूल और 7 स्वास्थ्य केंद्र भी क्षतिग्रस्त हुए हैं।
नेपाल त्रासदी से जुड़ी तस्वीरें…
बाढ़ और भूस्खलन से हुई मौतों के बाद नुवाकोट जिले के बिदुर में सामूहिक दफन की तैयारी करते सुरक्षाकर्मी।
बाढ़ और भूस्खलन के 16 दिन बाद भी तबाही के निशान साफ नजर आ रहे हैं। नुवाकोट के देवीघाट में मलबे के बीच से गुजरते स्थानीय लोग।
बाढ़ और भूस्खलन से जमा हुए मलबे को हटाने का काम जारी है। नुवाकोट के धुंगे बाजार इलाके में बाढ़ से बर्बाद हुए इलाकों से मलबा हटाती क्रेन।
बाढ़ के बाद प्रभावित लोगों की मदद जारी है। नुवाकोट में अस्थायी राहत केंद्र के बाहर मुफ्त दवा वितरण केंद्र पर बाढ़ पीड़ित मरीज से बात करतीं सशस्त्र पुलिस बल की डॉक्टर सबिता केसी।
545 लापता लोगों की तलाश में खोजी कुत्ते उतारे
अपर त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में 545 लापता लोगों की तलाश के लिए प्रशिक्षित खोजी कुत्ते उतारे गए हैं। टीमें सुरंगों, हेडवर्क्स और मलबे में तलाश कर रही हैं।
बाढ़ के समय प्रोजेक्ट में 1,433 लोग काम कर रहे थे। इनमें 878 बचा लिए गए, जबकि 545 लापता हैं। इनमें 9 दक्षिण कोरियाई, 34 चीनी और 50 भारतीय शामिल हैं।
नेपाली सेना, ड्रोन टीम, दक्षिण कोरियाई विशेषज्ञ और शेरपा रेस्क्यू टीम भी अभियान में जुटी हैं।
भारत ने भेजी 130 टन से ज्यादा राहत सामग्री
नेपाल के राहत और बचाव अभियान में भारत लगातार मदद कर रहा है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, 26 अगस्त से अब तक आठ विशेष उड़ानों के जरिए नेपाल को 130 टन से ज्यादा राहत सामग्री भेजी गई है।
भारत ने 54 विशेषज्ञों को भी नेपाल भेजा है। इनमें सुरंग और मलबे में फंसे लोगों को निकालने वाली टीमें, मेडिकल विशेषज्ञ और फोरेंसिक कर्मी शामिल हैं।
भारत ने टेंट, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप और दवाओं के साथ मलबा हटाने और सुरंगों में बचाव के लिए गैस डिटेक्टर, ब्रीदिंग उपकरण, मड रेस्क्यू सूट, जनरेटर, लाइटिंग टावर और पानी निकालने वाले पंप भी भेजे हैं।
पुनर्निर्माण की लागत का 75% सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर पर
पुनर्निर्माण की अनुमानित लागत में करीब 75% यानी रू.2.96 लाख करोड़ बुनियादी ढांचे को दोबारा खड़ा करने में खर्च होंगे। बाढ़ में 7,570 निजी घर, 48 सार्वजनिक इमारतें, 18 स्कूल और 7 स्वास्थ्य संस्थान क्षतिग्रस्त हुए हैं।
इससे साफ है कि नेपाल के सामने चुनौती केवल लोगों को तत्काल राहत देने की नहीं है। उसे अगले कई वर्षों तक सड़क, पुल, बिजली, स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और घरों को दोबारा बनाने के लिए भारी खर्च करना होगा।