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कल आएगी भयंकर तबाही! लोगों में दहशत का माहौल…

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टोक्यो/नई दिल्ली,एजेंसी। 05 जुलाई, 2025 की तारीख जैसे-जैसे नज़दीक आ रही है, लोगों के दिलों की धड़कनें भी तेज हो रही हैं। इसकी वजह है जापान की मशहूर मंगा आर्टिस्ट और भविष्यवक्ता रियो तात्सुकी की दशकों पुरानी एक डरावनी भविष्यवाणी। तात्सुकी ने अपनी मंगा किताब ‘द फ्यूचर आई सौं’ में दावा किया था कि 5 जुलाई, 2025 को जापान के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में एक भीषण सुनामी आएगी, जो भारी तबाही मचाएगी।

कौन थीं रियो तात्सुकी?

रियो तात्सुकी जापान की एक मंगा आर्टिस्ट थीं, जिन्हें सपनों के जरिए भविष्य देखने की शक्ति होने का दावा था। उन्होंने कई घटनाओं की भविष्यवाणी पहले ही कर दी थी, जैसे – राजकुमारी डायना की मौत, कोरोना वायरस महामारी, फ्रेडी मर्करी का निधन और 2011 में जापान में आए विनाशकारी टोहोकू भूकंप।

उनकी किताब ‘द फ्यूचर आई सौं’, जो 1999 में प्रकाशित हुई थी, उनके सपनों और डायरी में लिखी गई बातों का ग्राफिक फॉर्म में संग्रह है। इसी किताब में उन्होंने 5 जुलाई, 2025 को एक बड़ी प्राकृतिक आपदा की भविष्यवाणी की थी।

तात्सुकी की डरावनी भविष्यवाणी

तात्सुकी के अनुसार, जापान और फिलीपींस के बीच समुद्र की गहराई में एक दरार पैदा होगी, जिससे 2011 की तबाही से भी तीन गुना बड़ी सुनामी आएगी। इस भविष्यवाणी को लेकर अब जापान में चिंता का माहौल बन गया है, खासतौर पर तब जब हाल ही में दक्षिणी जापान के टोकारा द्वीप समूह में दो हफ्तों के भीतर 1000 से ज्यादा भूकंप दर्ज किए गए हैं।

क्या कह रहे हैं वैज्ञानिक?

हालांकि जापान सरकार और वैज्ञानिक इस भविष्यवाणी को आधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं कर रहे हैं, लेकिन वे किसी भी आपदा से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। टोकारा द्वीप पर हाल के भूकंपों की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.5 तक दर्ज की गई है। अकुसेकी द्वीप पर कंपन का स्तर जापान के 7-बिंदु पैमाने पर 6 मापा गया, जिससे वहां कुछ इमारतों में दरारें आ सकती हैं।

टूरिज्म पर भी असर, एयरलाइंस अलर्ट पर

तात्सुकी की भविष्यवाणी का असर जापान के टूरिज्म सेक्टर पर भी दिखने लगा है। हांगकांग से जापान आने वाले पर्यटकों की संख्या में 11% की गिरावट दर्ज की गई है। कई पर्यटकों ने जुलाई और अगस्त के लिए अपनी बुकिंग रद्द कर दी हैं। हांगकांग की ट्रैवल एजेंसी ईजीएल टूर्स ने भी माना कि सोशल मीडिया पर चल रही इन भविष्यवाणियों ने लोगों में डर पैदा कर दिया है।

क्या सच में कुछ बड़ा होने वाला है?

अब जबकि 5 जुलाई बस एक दिन दूर है, सभी की निगाहें जापान पर टिकी हैं। क्या रियो तात्सुकी की यह भविष्यवाणी भी सच साबित होगी या यह सिर्फ एक संयोग है? इस सवाल का जवाब तो आने वाला कल ही देगा। लेकिन फिलहाल जापान में लोग सतर्क हैं और सरकार हर स्थिति से निपटने की तैयारी कर रही है।

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नेस्ले इंडिया का चौथी तिमाही में मुनाफा 27%  बढ़कर 1,110 करोड़ रुपए

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नई दिल्ली,एजेंसी। चॉकलेट, कॉफी, मैगी जैसे दैनिक उपयोग की चीजें बनाने वाली कंपनी नेस्ले इंडिया का 2025-26 की चौथी तिमाही में एकीकृत शुद्ध लाभ 27.18 प्रतिशत बढ़कर 1,110.9 करोड़ रुपए रहा। कंपनी का वित्त वर्ष 2024-25 की चौथी (जनवरी-मार्च) तिमाही में शुद्ध लाभ 873.46 करोड़ रुपए था। नेस्ले इंडिया ने मंगलवार को शेयर बाजार को दी सूचना में बताया कि जनवरी-मार्च तिमाही में उत्पादों की बिक्री से नेस्ले इंडिया का राजस्व 6,723.75 करोड़ रुपए रहा जो सालाना आधार पर 23.42 प्रतिशत अधिक है। चौथी तिमाही में परिचालन आय 6,747.79 करोड़ रुपए रही जबकि एक वर्ष पहले इसी तिमाही में यह 5,503.88 करोड़ रुपए थी। 

समीक्षाधीन तिमाही में कुल खर्च सालाना आधार पर 21 प्रतिशत बढ़कर 5,217.48 करोड़ रुपए हो गया। कुल आय (जिसमें अन्य आय भी शामिल है) 22.73 प्रतिशत बढ़कर 6,766.24 करोड़ रुपए रही। वित्त वर्ष 2025-26 की जनवरी-मार्च तिमाही में घरेलू बिक्री 23.11 प्रतिशत बढ़कर 6,445.07 करोड़ रुपए रही। कंपनी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक मनीष तिवारी ने कहा, ”नेस्ले इंडिया ने दहाई अंकों की मजबूत वृद्धि दर्ज की और 6,445 करोड़ रुपए की अपनी अब तक की सबसे अधिक घरेलू बिक्री हासिल की…।” 

निर्यात से राजस्व 31 प्रतिशत बढ़कर 278.68 करोड़ रुपए रहा। तिवारी ने कहा कि इस प्रदर्शन में सभी उत्पाद समूहों का योगदान रहा और प्रीमियम उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़ाने के साथ-साथ संसाधनों का अनुशासित उपयोग और मजबूत क्रियान्वयन वृद्धि के प्रमुख कारक रहे। पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में नेस्ले इंडिया का लाभ सालाना आधार पर नौ प्रतिशत बढ़कर 3,499.08 करोड़ रुपए रहा। कुल आय 14.46 प्रतिशत बढ़कर 23,194.95 करोड़ रुपए हो गई। तिवारी ने कहा कि पिछले पांच वर्ष में कंपनी के प्रमुख ब्रांड मैगी नूडल्स ने बाजार में अपनी अग्रणी स्थिति बनाए रखी जबकि किटकैट तथा नेस्कैफे की बाजार हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है।  

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Crude Oil Import: अमेरिका-ईरान युद्ध का असर, कच्चे तेल इंपोर्ट में बड़ी गिरावट

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मुंबई, एजेंसी। अमेरिका-ईरान युद्ध का असर अब भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर साफ दिखाई देने लगा है। हालिया शिपिंग आंकड़ों के मुताबिक, मार्च महीने में भारत के कच्चे तेल के आयात में फरवरी के मुकाबले करीब 13% की गिरावट दर्ज की गई है।

इस गिरावट की बड़ी वजह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ा तनाव है, जो दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक है। इस रूट से आने वाली सप्लाई में भारी कमी आई है और खाड़ी देशों से तेल आयात 61% तक गिरकर लगभग 1.18 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गया है। हालात इतने गंभीर हैं कि हाल के दिनों में इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की संख्या बेहद कम हो गई है।

रूस बना नंबर-1 सप्लायर

खाड़ी क्षेत्र से आपूर्ति प्रभावित होने के बाद भारत ने वैकल्पिक स्रोतों की ओर रुख किया है। रूस अब भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बनकर उभरा है। रूस से आयात लगभग दोगुना होकर 2.25 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया है और कुल आयात में उसकी हिस्सेदारी करीब 50% हो गई है।

सऊदी अरब दूसरे नंबर पर

वहीं सऊदी अरब अब दूसरे स्थान पर पहुंच गया है, जबकि अंगोला से आयात बढ़ने के कारण वह तीसरे नंबर पर आ गया है। यूएई और इराक क्रमशः चौथे और पांचवें स्थान पर खिसक गए हैं। इस बदलाव का असर ओपेक पर भी पड़ा है। भारत के कुल तेल आयात में ओपेक देशों की हिस्सेदारी घटकर करीब 29% रह गई है, जो अब तक का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है। 

वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव ने भारत की तेल आपूर्ति रणनीति को बदल दिया है, जहां खाड़ी देशों पर निर्भरता कम होकर रूस और अन्य विकल्पों की भूमिका तेजी से बढ़ रही है।

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शेयर बाजार में रौनक, हरे निशान पर बाजार बंद, सेंसेक्स 753 अंक उछला

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मुंबई, एजेंसी। शेयर बाजार में आज दिनभर तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स 753.03 अंक की तेजी के साथ 79,273.33 के स्तर पर पहुंच गया। निफ्टी में 215.75 अंक की बढ़त रही, ये 24,576.60 के स्तर पर बंद हुआ। रियल्टी और ऑटो शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली। एशियाई बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत और अमेरिका-ईरान तनाव में संभावित नरमी की उम्मीद ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया।

तेजी के कारण

कच्चे तेल की कीमतों में नरमी

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट क्रूड की कीमतों में कमी आई है। भारत तेल का बड़ा आयातक है, इसलिए तेल सस्ता होने से इकोनॉमी और कंपनियों के मार्जिन को फायदा मिलता है।

ग्लोबल मार्केट से अच्छे संकेत

अमेरिकी बाजारों में मजबूती और एशियाई बाजारों (निक्केई और कोस्पी) में बढ़त का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ा।  

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी

अमेरिका में 10 साल के ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में गिरावट आई है। जब बॉन्ड यील्ड गिरती है, तो विदेशी निवेशक (FIIs) भारतीय जैसे उभरते बाजारों में पैसा लगाना पसंद करते हैं।

सोमवार को मामूली बढ़त

शेयर बाजार में सोमवार, 20 अप्रैल को मामूली बढ़त रही। सेंसेक्स 27 अंक की तेजी के साथ 78,520 पर बंद हुआ। निफ्टी में 11 अंक की बढ़त रही, ये 24,365 के स्तर पर बंद हुआ। 

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