कोरबा
कृषि स्थायी समिति की बैठक 11 को
कोरबा । जिला पंचायत कोरबा की कृषि स्थायी समिति की बैठक 11 जुलाई को दोपहर 12 बजे समिति की सभापति श्रीमती अनंत सुष्मिता कमलेश की अध्यक्षता में जिला पंचायत सभाकक्ष कोरबा में आहूत की गई है।
बैठक में कृषि, उद्यान, मछली, सिंचाई, रेशम विभाग की योजनाओं की समीक्षा की जायेगी। इसी तरह विद्युत, विपणन, क्रेडा विभाग, नोडल अधिकारी जिला सहकारी केंद्रीय बैंक एवं जिला विपणन विभाग की समीक्षा की जायेगी। इसके साथ ही सभापति की अनुमति से अन्य विषयों पर चर्चा की जायेगी।
कोरबा
हृदय रोगियों के लिए वरदान बनी एनकेएच की कैथलैब सुविधा
कोरबा में पहली बार 3 मरीजों में सफल एआईसीडी प्रत्यारोपण
अब स्थानीय स्तर पर हो रहा उन्नत हृदय उपचार
कोरबा। शहर के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल एनकेएच में कैथलैब सुविधा शुरू होने के बाद हृदय रोगियों को बड़े शहरों जैसी अत्याधुनिक चिकित्सा सेवाएं स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध होने लगी हैं। इससे गंभीर मरीजों को रायपुर या अन्य महानगरों में उपचार के लिए भटकना नहीं पड़ रहा और समय पर इलाज मिलने से जीवन रक्षा आसान हो रही है।

भीषण गर्मी, अनियमित खान-पान और बदलती जीवनशैली के कारण इन दिनों हृदय संबंधी समस्याओं के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। कई लोग सीने में जलन, गैस, अपच और बेचैनी को सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि कई मामलों में ये हार्ट अटैक के शुरुआती संकेत साबित हो रहे हैं। पिछले सप्ताह एनकेएच में 15 से अधिक हृदय रोगी पहुंचे, जिनका विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में तत्काल उपचार किया गया।
रायपुर से आने वाले कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. सतीश सूर्यवंशी एवं डॉ. एस.एस. मोहंती की टीम द्वारा मरीजों की जांच के बाद 5 मरीजों की एंजियोप्लास्टी और 5 मरीजों की एंजियोग्राफी की गई। इसके अलावा एक मरीज में सफलतापूर्वक पेसमेकर प्रत्यारोपित किया गया। विशेष उपलब्धि के रूप में कोरबा में पहली बार अब तक 3 मरीजों में एआईसीडी (ऑटोमेटिक इम्प्लांटेबल कार्डियोवर्टर डिफिब्रिलेटर) प्रत्यारोपण भी सफलतापूर्वक किया जा चुका है।
क्या है एआईसीडी?
एआईसीडी एक छोटा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है, जिसे छाती में प्रत्यारोपित किया जाता है। यह हृदय की धड़कनों पर लगातार नजर रखता है और खतरनाक अनियमित धड़कन या अचानक हृदय गति रुकने की स्थिति में विद्युत झटका देकर दिल की सामान्य लय बहाल करता है। यह उपकरण कई मरीजों के लिए जीवनरक्षक साबित होता है।
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार मई माह में कैथलैब में 17 मरीजों की एंजियोग्राफी, 12 मरीजों की एंजियोप्लास्टी तथा एक मरीज का पेसमेकर प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक किया गया। कैथलैब सुविधा शुरू होने के बाद से अब तक एनकेएच में 400 से अधिक एंजियोग्राफी और 200 से ज्यादा एंजियोप्लास्टी की जा चुकी हैं।
एनकेएच ग्रुप के डायरेक्टर डॉ. एस. चंदानी ने बताया कि जिले की पहली कैथलैब सुविधा शुरू होने से अब कोरबा में ही हृदय रोगों का समग्र और उन्नत उपचार संभव हो गया है। इससे मरीजों का समय, धन और अनावश्यक परेशानी बच रही है, वहीं गंभीर परिस्थितियों में तत्काल उपचार मिलने से बेहतर परिणाम भी सामने आ रहे हैं।
कोरबा
वेदांता समूह की दो कंपनियों को इक्रा से मिली AA+ रेटिंग
नई दिल्ली, एजेंसी। वेदांता समूह की दो कंपनियों वेदांता लिमिटेड और वेदांता एल्युमीनियम मेटल लिमिटेड को घरेलू साख निर्धारक एजेंसी इक्रा से एए प्लस रेटिंग मिली है। ये दोनों कंपनियां गत मई से विभिन्न कारोबारों को अलग-अलग करने के बाद बनी हैं। एजेंसी ने समूह की शॉर्ट-टर्म रेटिंग को भी‘ए1 प्लस’पर बरकरार रखा है। समूह का कहना है कि साल 2014 के बाद यह उसकी सबसे ऊंची घरेलू रेटिंग है। इक्रा ने रेटिंग के साथ‘स्टेबल’आउटलुक दिया है और रेटिंग को‘वॉच विद डेवलपिंग इम्पलीकेशन्स’की श्रेणी से हटा दिया है।

अंतररष्ट्रीय साख निर्धारक एजेंसी मूडीज की सहयोगी कंपनी इक्रा ने समूह की एक अन्य कंपनी तलवंडी साबो पावर लिमिटेड की रेटिंग‘ए प्लस/ वॉच डेवलपिंग’से‘एए-/स्टेबल’में अपग्रेड किया है। वेदांता ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, ‘यह समूह के लिए एक अहम पड़ाव भी है, क्योंकि कारोबारों को अलग-अलग करने प्रक्रिया से अलग हुए दो सबसे बड़े व्यवसायों को अब ‘एए प्लस’ रेटिंग मिल गई है। समूह के दीर्घावधि ऋण में इन दोनों व्यवसायों की हिस्सेदारी 75 फीसदी से अधिक है।’ इक्रा ने उम्मीद जतायी है कि कॅमोडिटी की अनुकूल परिस्थितियों, बेहतर लागत संरचनाओं तथा एल्युमीनियम, जिंक और तेल एवं गैस व्यवसायों में कमाई की मजबूत संभावनाओं के चलते ये रुझान मौजूदा वित्त वर्ष में भी जारी रहेंगे।
वेदांता का कारोबार जिंक, सिल्वर, एल्युमिनियम, कॉपर, निकेल, लौह अयस्क, तेल एवं गैस और बिजली उत्पादन तक फैला हुआ है। प्रमुख अंतररष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों एस एंड पी, मूडीज एवं फिच ने पिछले दो महीने में वेदांता की होल्डिंग कंपनी वेदांता रिसोर्सेज की रेटिंग को अपग्रेड किया है।
कोरबा
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 का उद्देश्य कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन से पर्यावरण प्रदूषण रोकना है – सीईओ
जिला पंचायत में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 पर हुई कार्यशाला
कोरबा। भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा 27 जनवरी 2026 को अधिसूचित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026, वर्ष 2016 के पुराने नियमों का स्थान लेंगे। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन के माध्यम से पर्यावरण प्रदूषण को रोकना तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उक्त बातें जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री दिनेश कुमार नाग ने बुधवार को जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 संबंधी कार्यशाला में कही।

सीईओ श्री नाग ने बताया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार यह नियम 01 अप्रैल 2026 से शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों सहित पूरे देश में लागू हो चुका है। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत स्तर पर इन नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे कचरे का वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित निपटान हो सके। इसके लिए ग्राम पंचायतों में कचरा संग्रहण शुल्क, शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली लागू की जाएगी। साथ ही नियमों के उल्लंघन पर दंडात्मक प्रावधान भी सुनिश्चित किए जाएंगे।

उन्होंने बताया कि ग्राम एवं जनपद स्तर पर उत्पन्न होने वाले कचरे की रिपोर्ट प्रत्येक 15 दिवस में तैयार कर प्रस्तुत करनी होगी। राज्य शासन द्वारा निर्धारित लक्ष्य की पूर्ति हेतु जून माह तक जिले की 25 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को वैज्ञानिक तरीके से कचरा मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
श्री नाग ने कहा कि स्वच्छता अभियान की शुरुआत स्वयं से करनी होगी। जिला, जनपद एवं ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं कर्मचारी अपने घरों में वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन अपनाएं तथा कचरे के पृथक्करण के लिए नीले, हरे, लाल एवं पीले रंग के डस्टबिन का उपयोग करें, ताकि विभिन्न प्रकार के कचरे का पृथक-पृथक निपटान किया जा सके।
कार्यशाला में स्वच्छ भारत मिशन के श्री दीप सरकार द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के उद्देश्य, महत्वपूर्ण विशेषताओं एवं मुख्य प्रावधानों की जानकारी पॉवर प्वाइंट प्रस्तुति के माध्यम से दी गई।
कार्यक्रम में लेखा अधिकारी श्री राजेंद्र यादव, सहायक परियोजना अधिकारी श्रीमती इंदिरा भगत, श्रीमती अमिता साहू, जनपद पंचायतों के सीईओ, स्वच्छ भारत मिशन, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अधिकारी-कर्मचारी, सहायक विकास विस्तार अधिकारी, कार्यक्रम अधिकारी एवं तकनीकी सहायक उपस्थित रहे।
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