देश
त्योहारी सीजन में जॉब्स की बहार, जानें किस सेक्टर में सबसे ज्यादा हायरिंग
मुंबई, एजेंसी। भारत में त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ ही नौकरियों का बाजार भी गर्म होने लगा है। कंपनियां इस साल पिछले साल के मुकाबले 20-25% ज्यादा कर्मचारियों की भर्ती की योजना बना रही हैं। ज्यादातर भर्तियां अस्थायी (टेम्परेरी) होंगी लेकिन इनसे हजारों युवाओं को रोजगार के मौके मिलेंगे।
ई-कॉमर्स सेक्टर बना हायरिंग का केंद्र
स्टाफिंग फर्म Adecco India के अनुसार, एक प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनी अकेले 75,000 से ज्यादा लोगों को काम पर रखने की तैयारी में है। ई-कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में 30-35% तक हायरिंग बढ़ने का अनुमान है। खुदरा, कंज्यूमर गुड्स, होटल और टूरिज्म सेक्टर भी इसमें पीछे नहीं हैं।
सैमसंग, शाओमी, ओप्पो, वीवो, हायर और गोदरेज जैसी कंपनियां भी अपने रिटेल स्टोर्स पर अधिक स्टाफ रखने की तैयारी कर रही हैं।
गिग वर्कर्स की डिमांड में उछाल
Randstad India के अनुसार, इस साल भारत में गिग वर्कर्स यानी प्रोजेक्ट आधारित काम करने वालों की संख्या 1.1 करोड़ के पार जा सकती है। क्विक कॉमर्स में 35-40% और ई-कॉमर्स में 25-30% हायरिंग बढ़ सकती है। गिग वर्कर्स की सबसे ज्यादा मांग डिलीवरी, वेयरहाउस, कस्टमर सपोर्ट और डिजिटल सेवाओं में है।
Randstad के चीफ कमर्शियल ऑफिसर येशब गिरी ने कहा, “त्योहारी सीजन में कंपनियां पहले से तैयारी कर रही हैं और बड़ी संख्या में अस्थायी कर्मचारियों को जोड़ रही हैं। गर्मी के सीजन में कमजोर बिक्री के बाद उन्हें इस बार डिमांड में बूम की उम्मीद है।”
क्यों खास है फेस्टिव सीजन?
त्योहारों के दौरान कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, एफएमसीजी और ऑटोमोबाइल जैसे प्रोडक्ट्स की सालाना बिक्री का 30-40% हिस्सा आता है। यही वजह है कि कंपनियां रक्षा बंधन से लेकर दिवाली और क्रिसमस तक का पूरा फायदा उठाना चाहती हैं।
Adecco India के डायरेक्टर दीपेश गुप्ता के अनुसार, “इस बार कंपनियों को लास्ट माइल डिलीवरी, कस्टमर सर्विस और वेयरहाउस ऑपरेशन के लिए बड़ी संख्या में कर्मचारियों की जरूरत है।”
Flipkart ने बढ़ाई तैयारी
Flipkart की वाइस प्रेसिडेंट आकृति चंद्रा ने बताया कि कंपनी ने पहले ही सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स में भर्ती शुरू कर दी है। उन्होंने कहा, “त्योहार इस बार अगस्त से शुरू हो रहे हैं, इसलिए हमने पहले ही कर्मचारियों की संख्या बढ़ा दी है।”
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नेस्ले इंडिया का चौथी तिमाही में मुनाफा 27% बढ़कर 1,110 करोड़ रुपए
नई दिल्ली,एजेंसी। चॉकलेट, कॉफी, मैगी जैसे दैनिक उपयोग की चीजें बनाने वाली कंपनी नेस्ले इंडिया का 2025-26 की चौथी तिमाही में एकीकृत शुद्ध लाभ 27.18 प्रतिशत बढ़कर 1,110.9 करोड़ रुपए रहा। कंपनी का वित्त वर्ष 2024-25 की चौथी (जनवरी-मार्च) तिमाही में शुद्ध लाभ 873.46 करोड़ रुपए था। नेस्ले इंडिया ने मंगलवार को शेयर बाजार को दी सूचना में बताया कि जनवरी-मार्च तिमाही में उत्पादों की बिक्री से नेस्ले इंडिया का राजस्व 6,723.75 करोड़ रुपए रहा जो सालाना आधार पर 23.42 प्रतिशत अधिक है। चौथी तिमाही में परिचालन आय 6,747.79 करोड़ रुपए रही जबकि एक वर्ष पहले इसी तिमाही में यह 5,503.88 करोड़ रुपए थी।

समीक्षाधीन तिमाही में कुल खर्च सालाना आधार पर 21 प्रतिशत बढ़कर 5,217.48 करोड़ रुपए हो गया। कुल आय (जिसमें अन्य आय भी शामिल है) 22.73 प्रतिशत बढ़कर 6,766.24 करोड़ रुपए रही। वित्त वर्ष 2025-26 की जनवरी-मार्च तिमाही में घरेलू बिक्री 23.11 प्रतिशत बढ़कर 6,445.07 करोड़ रुपए रही। कंपनी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक मनीष तिवारी ने कहा, ”नेस्ले इंडिया ने दहाई अंकों की मजबूत वृद्धि दर्ज की और 6,445 करोड़ रुपए की अपनी अब तक की सबसे अधिक घरेलू बिक्री हासिल की…।”
निर्यात से राजस्व 31 प्रतिशत बढ़कर 278.68 करोड़ रुपए रहा। तिवारी ने कहा कि इस प्रदर्शन में सभी उत्पाद समूहों का योगदान रहा और प्रीमियम उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़ाने के साथ-साथ संसाधनों का अनुशासित उपयोग और मजबूत क्रियान्वयन वृद्धि के प्रमुख कारक रहे। पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में नेस्ले इंडिया का लाभ सालाना आधार पर नौ प्रतिशत बढ़कर 3,499.08 करोड़ रुपए रहा। कुल आय 14.46 प्रतिशत बढ़कर 23,194.95 करोड़ रुपए हो गई। तिवारी ने कहा कि पिछले पांच वर्ष में कंपनी के प्रमुख ब्रांड मैगी नूडल्स ने बाजार में अपनी अग्रणी स्थिति बनाए रखी जबकि किटकैट तथा नेस्कैफे की बाजार हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है।
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Crude Oil Import: अमेरिका-ईरान युद्ध का असर, कच्चे तेल इंपोर्ट में बड़ी गिरावट
मुंबई, एजेंसी। अमेरिका-ईरान युद्ध का असर अब भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर साफ दिखाई देने लगा है। हालिया शिपिंग आंकड़ों के मुताबिक, मार्च महीने में भारत के कच्चे तेल के आयात में फरवरी के मुकाबले करीब 13% की गिरावट दर्ज की गई है।
इस गिरावट की बड़ी वजह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ा तनाव है, जो दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक है। इस रूट से आने वाली सप्लाई में भारी कमी आई है और खाड़ी देशों से तेल आयात 61% तक गिरकर लगभग 1.18 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गया है। हालात इतने गंभीर हैं कि हाल के दिनों में इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की संख्या बेहद कम हो गई है।

रूस बना नंबर-1 सप्लायर
खाड़ी क्षेत्र से आपूर्ति प्रभावित होने के बाद भारत ने वैकल्पिक स्रोतों की ओर रुख किया है। रूस अब भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बनकर उभरा है। रूस से आयात लगभग दोगुना होकर 2.25 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया है और कुल आयात में उसकी हिस्सेदारी करीब 50% हो गई है।
सऊदी अरब दूसरे नंबर पर
वहीं सऊदी अरब अब दूसरे स्थान पर पहुंच गया है, जबकि अंगोला से आयात बढ़ने के कारण वह तीसरे नंबर पर आ गया है। यूएई और इराक क्रमशः चौथे और पांचवें स्थान पर खिसक गए हैं। इस बदलाव का असर ओपेक पर भी पड़ा है। भारत के कुल तेल आयात में ओपेक देशों की हिस्सेदारी घटकर करीब 29% रह गई है, जो अब तक का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है।
वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव ने भारत की तेल आपूर्ति रणनीति को बदल दिया है, जहां खाड़ी देशों पर निर्भरता कम होकर रूस और अन्य विकल्पों की भूमिका तेजी से बढ़ रही है।
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शेयर बाजार में रौनक, हरे निशान पर बाजार बंद, सेंसेक्स 753 अंक उछला
मुंबई, एजेंसी। शेयर बाजार में आज दिनभर तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स 753.03 अंक की तेजी के साथ 79,273.33 के स्तर पर पहुंच गया। निफ्टी में 215.75 अंक की बढ़त रही, ये 24,576.60 के स्तर पर बंद हुआ। रियल्टी और ऑटो शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली। एशियाई बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत और अमेरिका-ईरान तनाव में संभावित नरमी की उम्मीद ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया।

तेजी के कारण
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट क्रूड की कीमतों में कमी आई है। भारत तेल का बड़ा आयातक है, इसलिए तेल सस्ता होने से इकोनॉमी और कंपनियों के मार्जिन को फायदा मिलता है।
ग्लोबल मार्केट से अच्छे संकेत
अमेरिकी बाजारों में मजबूती और एशियाई बाजारों (निक्केई और कोस्पी) में बढ़त का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ा।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी
अमेरिका में 10 साल के ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में गिरावट आई है। जब बॉन्ड यील्ड गिरती है, तो विदेशी निवेशक (FIIs) भारतीय जैसे उभरते बाजारों में पैसा लगाना पसंद करते हैं।
सोमवार को मामूली बढ़त
शेयर बाजार में सोमवार, 20 अप्रैल को मामूली बढ़त रही। सेंसेक्स 27 अंक की तेजी के साथ 78,520 पर बंद हुआ। निफ्टी में 11 अंक की बढ़त रही, ये 24,365 के स्तर पर बंद हुआ।
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