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पटना में रनवे टच करके दोबारा उड़ा विमान:4 चक्कर लगाने के बाद दोबारा लैंडिंग हो पाई, 173 यात्रियों की सांसें अटकी रहीं
पटना,एजेंसी। दिल्ली से आने वाली इंडिगो की फ्लाइट 6E2482 मंगलवार को पटना एयरपोर्ट पर लैंड करने के बाद दाेबारा उड़ गई। फिर, तीन-चार चक्कर लगाने के बाद फ्लाइट ने दाेबारा लैंड किया। इस दाैरान दिल्ली से पटना आ रहे 173 यात्रियों की सांसें 5 मिनट तक अटकी रहीं। दाेबारा लैंडिंग के बाद यात्रियों ने राहत महसूस की।
दाेबारा विमान काे ऊपर उठा लिया
सूत्रों के अनुसार मंगलवार की रात करीब 9 बजे दिल्ली से पटना आने के बाद पायलट ने विमान की लैंडिंग कराई। हालांकि विमान टचिंग पॉइंट को थोड़ा ओवरशूट कर गया था।
पटना एयरपोर्ट का रनवे छोटा है। पायलट काे लगा कि रनवे पर विमान काे नहीं रोक पाएंगे ताे उसने दाेबारा विमान काे ऊपर उठा लिया। ऐसा हाेता देख यात्री परेशान हाे गए।
AI की तस्वीरों से समझिए, रनवे पर क्या हुआ…

इंडिगो की फ्लाइट के पहिए रनवे को छू चुके थे। पायलट को फिर से उड़ान भरनी पड़ी।

पायलट ने पटना के आसमान में 4 चक्कर लगाए, इसके बाद फ्लाइट की लैंडिंग हुई।
क्रू मेंबर ने यात्रियों से धैर्य रखने को कहा
यात्रियों को लगा कि काेई विमान रनवे पर हाेगा या फिर काेई इमरजेंसी हाे गई। क्रू मेंबर ने यात्रियों से कहा कि काेई इमरजेंसी नहीं हुई है। तकनीकी कारणों की वजह से विमान काे फिर से टेकऑफ किया गया है। चार-पांच मिनट में लैंडिंग हाे जाएगी। यात्री धैर्य रखें।
2 हजार मीटर है पटना एयरपोर्ट के रनवे की लंबाई
फिलहाल पटना एयरपोर्ट के रनवे की लंबाई 2,072.64 मीटर है। इसे 584.96 मीटर और बढ़ाकर 2657.6 मीटर करने की तैयारी चल रही है। यह कवायद केंद्र सरकार के सर्कुलर के बाद तेज हुई है। दरअसल, केंद्र सरकार ने अहमदाबाद हादसे के बाद देशभर के सभी एयरपोर्ट की सुरक्षा को लेकर एडवाइजरी जारी की है। उसमें रनवे की लंबाई और सुरक्षा को लेकर खास निर्देश दिया गया है।
रनवे बढ़ाने का प्लान क्या है?, कितनी और जमीन की जरूरत होगी?, कहां से जमीन ली जाएगी? रनवे क्यों बढ़ाया जाएगा? सारे सवालों का जवाब स्पेशल रिपोर्ट में पढ़िए…।
रनवे बढ़ाने की जरूरत क्यों है?
पटना एयरपोर्ट के डायरेक्टर रह चुके एक अधिकारी ने बताया, ‘फिलहाल पटना एयरपोर्ट के रनवे की लंबाई अभी 2072 मीटर है। जबकि, कम से कम 2438 मीटर होनी चाहिए। अभी लंबाई कम होने से विमान 3 डिग्री के क्षितिज पर उतरते हैं, जबकि यह 2.5 डिग्री के क्षितिज पर उतरना चाहिए।’
एयरक्राफ्ट के एक इंजीनियर बताते हैं, ‘बड़े विमानों की लैंडिंग के लिए कम से कम 3-5 किलोमीटर का रनवे होना जरूरी है। जबकि, पटना का रनवे दो किलोमीटर से थोड़ा ही अधिक है।’
दो तरह के विमान होते हैं..
पहला- नैरो बॉडी एयरक्राफ्ट। इसमें 250 या 250 से कम सवारी की क्षमता होती है। पटना या अन्य छोटे एयरपोर्ट पर ऐसे ही प्लेन का संचालन किया जाता है।
दूसरा- वाइड बॉडी एयरक्राफ्ट। इसमें 300 से ज्यादा यात्री की क्षमता होती है। इसका इस्तेमाल इंटरनेशनल फ्लाइट में किया जाता है। इस विमान का संचालन पटना एयरपोर्ट से नहीं होता है।
दरअसल, पटना एयरपोर्ट पर लार्जर बॉडी प्लेन को लैंड कराने में दिक्कत आती है। इसलिए यहां छोटे विमान ही आते-जाते हैं।
केंद्र के आदेश के बाद क्या हुआः केंद्र के सर्कुलर के बाद पटना कमिश्नर चंद्रशेखर सिंह ने पटना DM की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई। कमेटी में एयरपोर्ट से जुडे़ अधिकारी भी शामिल थे। कमेटी ने रनवे की लंबाई को बढ़ाने की सिफारिश की है।
कमेटी ने जमीन की मापी, स्थल निरीक्षण और जगह चिह्नित करने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। इसकी रिपोर्ट भी सौंप दी गई है। अब समीक्षा के बाद रिपोर्ट सरकार को भेजी जाएगी। फिर सरकार के मुहर लगते ही काम शुरू हो जाएगा।
कहां से जमीन लाएगी सरकारः पटना एयरपोर्ट घनी आबादी के बीच है। ऐसे में रनवे को बढ़ाने के लिए सरकार को जमीन चाहिए।
जमीन मापी के बाद तय हुआ कि एयरपोर्ट के पूर्वी हिस्से में पटना जू की 15 एकड़ जमीन ली जाएगी। वहीं, पश्चिमी हिस्से में फुलवारी शरीफ गुमटी के पास भी 14 एकड़ जमीन अधिग्रहीत की जाएगी।
रनवे विस्तार के 2 संभावित प्लान
- पटना एयरपोर्ट के पूरब तरफ लंबाई बढ़ाने के लिए पटेल गोलंबर वाली सड़क को अंडर ग्राउंड किया जाएगा। वहीं, पश्चिम की तरफ लंबाई बढ़ाने के लिए फुलवारी शरीफ गुमटी से जगदेव पथ वाली सड़क अंडर ग्राउंड होगी। इन अंडर ग्राउंड सड़कों के ऊपर रनवे बनेगा। जिला प्रशासन की तरफ से रनवे के पूर्वी हिस्से में टेलर रोड और सर्कुलर रोड को जोड़ने वाली जगह तक जमीन की मापी की गई है।
- पश्चिमी हिस्से में कब्रिस्तान की 15 डिसमिल जमीन ली जाएगी। यह जमीन एयरपोर्ट की बाउंड्री से सटी है। पूरब की ओर है। कब्रिस्तान के उत्तर-पश्चिम भाग का अधिग्रहण होगा। यहां से सड़क और पटना जू की जमीन को मिलाकर रनवे का हिस्सा बनाया जाएगा।
- बड़ा रनवे से खराब मौसम में भी लैंड हो सकेगा विमान
- एविएशन एक्सपर्ट की मानें तो छोटा रनवे होने के कारण बारिश और ठंड के सीजन में पटना एयरपोर्ट से पायलट को प्लेन उड़ाने में काफी दिक्कत होती है। दो तरह की खास परेशानी आती है…
- पहला- जब विजिबिलिटी कम होती है तो टेक ऑफ और लैंडिंग में दिक्कत होती है। ऐसे में बड़ा रनवे होने पर फायदा मिलता है।
- दूसरा- जब तेज हवाएं चलती है तो लैंडिंग में दिक्कत होती है। ऐसे में हवा का दबाव कम करने के लिए विमान को ज्यादा रोल करने की जरूरत होती है। इस स्थिति में बड़ा रनवे होना ज्यादा जरूरी होता है।
- सचिवालय का घंटाघर 51 फीट छोटा होगा
- कमेटी ने सचिवालय के क्लॉक टावर की ऊंचाई को भी कम करने की सिफारिश की है। एयरपोर्ट से क्लॉक टावर की दूरी करीब एक किलोमीटर है। अभी क्लॉक टावर की ऊंचाई 49.5 मीटर है।
- एक्सपर्ट के मुताबिक, विमान को 2.5 डिग्री के क्षितिज पर लैंड करना चाहिए, लेकिन क्लॉक टावर की अधिक ऊंचाई रहने के कारण 3 डिग्री पर लैंड करना पड़ता है। यह बहुत सेफ सिचुएशन नहीं है। विमानों की सुरक्षित लैंडिंग के लिए क्लॉक टावर की ऊंचाई को 17.5 मीटर यानी 51 फीट घटाने की जरूरत है।
- 51 फीट घटाने पर फ्लाइट की लैंडिंग सुरक्षित होगी। इसको लेकर एयरपोर्ट प्रशासन ने जिला प्रशासन को पत्र भी भेजा है।
- पटना एयरपोर्ट का हाल में बना है नया टर्मिनल
- 29 मई को PM नरेंद्र मोदी ने पटना एयरपोर्ट के नए टर्मिनल का इनॉगरेशन किया। 3 जून से इसे आम यात्रियों के लिए खोल दिया गया। नया टर्मिनल भवन 10 साल में 1200 करोड़ रुपए की लागत से बनकर तैयार हुआ है।
- वर्ल्ड क्लास टर्मिनल बनाने के लिए सिंगापुर की मेनहार्ट कंपनी ने आर्किटेक्चर तैयार किया। यहां मल्टी लेवल कार पार्किंग, एयर ट्रैफिक कंट्रोल कम टेक्निकल बिल्डिंग, फायर स्टेशन, कार्गो कॉम्पलेक्स, फ्लाइंग क्लब भी बनाए गए हैं।
- अराइवल और डिपार्चर के न केवल रास्ते अलग किए गए हैं, बल्कि फ्लोर ही सेपरेट कर दिए गए हैं।
- चेक इन काउंटर्स की संख्या बढ़ाकर 64 कर दी गई है। सिक्योरिटी चेकिंग पॉइंट्स तीन गुना बढ़ा दिए गए हैं। एयरो ब्रिज की संख्या बढ़ाकर 5 कर दी गई है।
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‘भारतीय हवाई या जमीनी रास्ते से ईरान की न करें यात्रा…’ विदेश मंत्रालय ने जारी की नई एडवाइजरी
तेहरान/नई दिल्ली, एजेंसी। क्षेत्रीय तनाव और अनिश्चितता के बीच भारत सरकार ने अपने नागरिकों के लिए एक नई और सख्त एडवाइजरी जारी की है। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने भारतीय नागरिकों को स्पष्ट रूप से ईरान की यात्रा न करने की सलाह दी है।

हवाई और जमीनी यात्रा पर रोक
दूतावास द्वारा जारी बयान के अनुसार, हालांकि भारत और ईरान के बीच कुछ सीमित उड़ानें फिर से शुरू होने की खबरें हैं, लेकिन नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे हवाई या जमीनी मार्ग से ईरान की यात्रा न करें। दूतावास ने चेतावनी दी है कि क्षेत्रीय तनाव के कारण हवाई क्षेत्र (Airspace) पर प्रतिबंध और परिचालन संबंधी अनिश्चितताएं अभी भी बनी हुई हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय उड़ानें प्रभावित हो रही हैं।
ईरान में मौजूद भारतीयों के लिए निर्देश
जो भारतीय नागरिक वर्तमान में ईरान में हैं, उन्हें दूतावास ने सख्त निर्देश दिए हैं कि वे दूतावास के साथ समन्वय करते हुए निर्धारित जमीनी सीमा मार्गों (land border routes) के माध्यम से देश छोड़ दें। सरकार ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे मार्गदर्शन और सहायता के लिए दूतावास के निरंतर संपर्क में रहें।
वर्तमान स्थिति
ईरान ने हाल ही में इमाम खुमैनी और मेहराबाद जैसे अपने प्रमुख हवाई अड्डों को फिर से खोलना शुरू किया है और मशहद हवाई अड्डे से भी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की अनुमति दी गई है। हालांकि, यह स्थिति 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद पैदा हुए क्षेत्रीय संघर्ष के कारण अस्थिर बनी हुई है। भले ही वर्तमान में एक नाजुक संघर्ष विराम (ceasefire) है, लेकिन यात्रा और सुरक्षा स्थितियों को लेकर अभी भी गहरा संशय बना हुआ है।
मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर किसी भी सहायता या आपात स्थिति के लिए, भारतीय दूतावास ने निम्नलिखित मोबाइल नंबर साझा किए हैं, जिन पर भारतीय नागरिक संपर्क कर सकते हैं:
- +989128109115
- +989128109109
- +989128109102
- +989932179359
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जुलाई में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर जाएंगे PM मोदी, मेलबर्न में भारतीय समुदाय को करेंगे संबोधित
नई दिल्ली,एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस साल जुलाई में ऑस्ट्रेलिया की आधिकारिक यात्रा पर जा सकते हैं। शुक्रवार को राजनयिक सूत्रों और स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से यह जानकारी सामने आई है। पीएम मोदी का यह दौरा उनके क्षेत्रीय प्रवास का हिस्सा होगा, जिसमें वे इंडोनेशिया और न्यूजीलैंड की यात्रा भी करेंगे।

दौरे का संभावित कार्यक्रम
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी सबसे पहले इंडोनेशिया जाएंगे। 7 और 8 जुलाई को वे न्यूजीलैंड के दौरे पर रहेंगे। इसके बाद 9 और 10 जुलाई को दो दिवसीय यात्रा के लिए प्रधानमंत्री ऑस्ट्रेलिया पहुँचेंगे।
मेलबर्न में होगा भव्य ‘प्रवासी कार्यक्रम’
इस यात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण भारतीय समुदाय (Diaspora) के साथ होने वाला सार्वजनिक कार्यक्रम होगा। सूत्रों के मुताबिक, सिडनी के बजाय इस बार मेलबर्न को एक बड़े सामुदायिक जमावड़े के लिए चुना गया है। अधिकारियों ने मेलबर्न में दो बड़े इनडोर स्टेडियमों का निरीक्षण किया है, जिनकी क्षमता 14,000 से 35,000 के बीच है। जुलाई में ऑस्ट्रेलिया की ठंड और बारिश को देखते हुए इनडोर वेन्यू (छत वाले स्टेडियम) को प्राथमिकता दी जा रही है।

सिडनी में होगी आधिकारिक द्विपक्षीय वार्ता
जहाँ एक ओर मेलबर्न में मेगा कम्युनिटी इवेंट होगा, वहीं दूसरी ओर ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथोनी अल्बनीस का कार्यालय सिडनी में पीएम मोदी की मेजबानी के लिए उत्सुक है। यहाँ दोनों देशों के बीच व्यापारिक, आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को लेकर उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठकें होने की संभावना है।
व्यापारिक संगठनों में मची होड़
प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान कई बड़े बिजनेस इवेंट्स के लिए भी होड़ मची है। ऑस्ट्रेलिया इंडिया बिजनेस काउंसिल (AIBC) अपनी 40वीं वर्षगांठ मना रहा है और वे पीएम मोदी की मेजबानी करना चाहते हैं। साथ ही ‘ऑस्ट्रेलिया-इंडिया सीईओ फोरम’ भी एक हाई-प्रोफाइल मीटिंग की रेस में है। हालांकि, माना जा रहा है कि आधिकारिक तौर पर केवल एक ही संगठन को कार्यक्रम की अनुमति मिलेगी।

भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों में बढ़ती गर्मजोशी
इससे पहले पीएम मोदी मई 2023 में सिडनी गए थे, जहाँ उन्होंने ‘क्वाड’ सम्मेलन में हिस्सा लिया था। उस यात्रा के दौरान ब्रिस्बेन में नए भारतीय वाणिज्य दूतावास और बेंगलुरु में ऑस्ट्रेलियाई वाणिज्य दूतावास खोलने जैसी महत्वपूर्ण घोषणाएं हुई थीं। एबीसी (ABC) के विदेश मामलों के संवाददाता स्टीफन डज़ेडज़िक ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि यह दौरा तय होता है, तो यह ऑस्ट्रेलिया के लिए कूटनीतिक रूप से एक बड़ा साल होगा, जिसमें कारने, वॉन डेर लेयेन और ताकाइची के बाद अब मोदी भी शिरकत करेंगे।
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Railway News: भारतीय रेल का बड़ा ऐलान: 15 अप्रैल से 15 जुलाई के बीच Rail चलाएगा 18,262 समर स्पेशल ट्रेन फेरे
नई दिल्ली,एजेंसी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को अधिकारियों के साथ एक बैठक कर गर्मी के मौसम के दौरान चलाई जाने वाली विशेष ट्रेनों के परिचालन की प्रगति की समीक्षा की। गौरतलब है कि रेलवे अधिक मांग वाले मार्गों और गलियारों पर बड़े पैमाने पर विशेष ट्रेनों को चलाकर यात्रियों की आवाजाही को आसान बनाने की कोशिश कर रहा है।
गर्मियों में यात्रा के सबसे व्यस्त समय (15 अप्रैल-15 जुलाई) के दौरान रेलवे कनेक्टिविटी बढ़ाने और भीड़भाड़ कम करने के लिए ‘summer special’ trains 18,262 फेरे चलाने की योजना बनाई है। अब तक, 11,878 ट्रेन फेरों की घोषणा की जा चुकी है और यात्रियों के लाभ के लिए शेष ट्रेनों की घोषणा भी की जा रही है। यह बड़े पैमाने पर ट्रेनों को चलाना एक सुनियोजित द्दष्टिकोण को दर्शाता है, जिसे बेहतर ‘रेक’ (ट्रेन के डिब्बों) की उपलब्धता, बेहतर समय-सारिणी और लगातार निगरानी का समर्थन प्राप्त है।

रेलवे की ओर से गुरुवार को जारी विज्ञप्ति से अनुसार नयी दिल्ली, मुंबई (LTT, GSAT, Pune सहित), सूरत (उधना सहित), अहमदाबाद, बेंगलुरु आदि जैसे स्टेशनों पर यात्रियों की सुचारू आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। इन प्रयासों के तहत, उधना स्टेशन पर पश्चिम रेलवे द्वारा किए गए सक्रिय उपाय-जैसे कि भीड़ का ‘रियल-टाइम’ प्रबंधन, ज़मीन पर बेहतर सहायता और ट्रेनों का कुशल संचालन यह दर्शाते हैं कि कैसे क्षेत्रीय स्तर की पहलें यात्रियों को सुरक्षित, सुविधाजनक और परेशानी-मुक्त यात्रा का अनुभव प्रदान करने के प्रयास को प्रभावी ढंग से पूरा कर रही हैं। गृह नगरों की यात्रा करने वाले यात्रियों पर विशेष ध्यान दिया गया और ट्रेन में चढ़ने की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए ज़मीन पर बेहतर व्यवस्थाएं की गईं।
रेलवे के अनुसार इन्हीं प्रयासों के अनुरूप अपने गृह नगरों की यात्रा करने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए स्टेशन पर बेहतर और सुव्यवस्थित व्यवस्थाएं लागू की गईं। ट्रेन संख्या 19045 ‘उधना-थावे ताप्ती गंगा एक्सप्रेस’ में, रेलवे सुरक्षा बल (RPF) कर्मियों ने यात्रियों को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से ट्रेन में चढ़ने में सहायता की।
भीड़ को नियंत्रित करने और यात्रा का सुगम अनुभव सुनिश्चित करने के लिए ट्रेन में चढ़ने और बैठने की पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित ढंग से प्रबंधित किया गया। रेलवे ने बताया है कि भारतीय रेल सक्रिय योजना और तत्परतापूर्ण संचालन के माध्यम से यात्रा के व्यस्त समय के दौरान यात्रियों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। ये प्रयास सेवा वितरण में सुधार करने और गर्मियों की भीड़ के दौरान सुगम, सुरक्षित और परेशानी-मुक्त यात्राएं सुनिश्चित करने में लक्षित हस्तक्षेपों की प्रभावशीलता को उजागर करते हैं।
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