नई दिल्ली,एजेंसी। टेस्ला का पहला शोरूम मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स में खुल गया है। अभी कंपनी ने भारतीय बाजार में अपनी सबसे पॉपुलर कॉम्पैक्ट इलेक्ट्रिक SUV मॉडल Y को उतारा है, जिसकी एक्स-शोरूम कीमत 60 लाख रुपए से शुरू होती है। इसके अलावा कंपनी ने स्टोर से करीब 6 किलोमीटर दूर एक सर्विस सेंटर और गोडाउन भी खोला है।
कंपनी ने स्टोर ओपनिंग के साथ ही मुंबई और दिल्ली में 8 चार्जिंग स्टेशन सेटअप लगाने की घोषणा भी की है। इन स्टेशन्स पर एक बार में 252 इलेक्ट्रिक गाड़ियां चार्ज हो सकेंगी। कंपनी भारत में अन्य मॉडल लॉन्च करने के साथ अन्य प्रमुख शहरों में स्टोर भी खोलेगी।
इसके साथ ही कंपनी ने अपनी अग्रेसिव अप्रोच से भारतीय बाजार में मौजूद बड़े प्लेयर्स को जता दिया है कि वह कड़ी टक्कर देने के लिए तैयार है। इस खबर में हम जानेंगे कि टेस्ला के आने से भारतीय EV मार्केट पर क्या असर होगा, टेस्ला दुनिया में क्यों पॉपुलर है, भारत में उसके सामने क्या-क्या चुनौतियां रहेंगी। साथ ही ये भी जानेंगे कि कौन-सी कंपनियां टेस्ला को टक्कर देंगी…
पहले दिन कंपनी की सबसे पॉपुलर इलेक्ट्रिक SUV को लॉन्च किया गया।
एक्सपीरियंस सेंटर के तौर पर काम करेगा टेस्ला का शोरूम
टेस्ला स्टोर लोगों के लिए एक एक्सपीरियंस सेंटर के तौर पर काम करेगा। यानी यहां न सिर्फ कंपनी की इलेक्ट्रिक गाड़ियां बेची जाएंगी, बल्कि लोग टेस्ला की टेक्नोलॉजी और फीचर्स को भी करीब से देख सकेंगे।
2024 में आई भारत की नई EV पॉलिसी के मुताबिक, अगर टेस्ला 4,150 करोड़ रुपए निवेश करता है, तो इम्पोर्ट ड्यूटी 70% से घटकर 15% जाएगी। इससे भविष्य में कंपनी की कारों की कीमतें कम हो सकती हैं।
कुछ समय पहले खबर आई थी कि टेस्ला गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और तेलंगाना जैसे राज्यों में फैक्ट्री लगाने पर विचार कर रही है, लेकिन फिलहाल कंपनी भारत में सिर्फ इंपोर्टेड कारें बेचने पर ध्यान दे रही है।
टेस्ला के भारत में आने की बड़ी वजहें
1. ग्लोबल सेल्स में कमी से नए मार्केट की तलाश
साल 2024 में ग्लोबल मार्केट में; खासकर अमेरिका, यूरोप और चीन में टेस्ला की सेल्स गिरी हैं। जर्मनी और इटली में तो ये 76% और 55% तक गिर गई। भारत, दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटो मार्केट है और यहां EV का मार्केट शेयर सिर्फ 5% के आसपास है। इसलिए यहां टेस्ला को नए ग्रोथ अवसर नजर आ रहे हैं। भारत में EV डिमांड बढ़ रही है। भारत में 2024 में 19.93% की ग्रोथ के साथ 99,165 इलेक्ट्रिक गाड़ियां बिकीं।
2. भारत की नई EV नीति
नई EV पॉलिसी ने आयात शुल्क को 100% से घटाकर 70% किया, बशर्ते कंपनी EV क्षेत्र में ₹4,150 करोड़ निवेश करे। तीन साल में लोकल लेवल पर मैन्युफैक्चरिंग शुरू करने पर इसे 15% कर दिया जाएगा। इससे टेस्ला को मॉडल Y जैसी इलेक्ट्रिक गाड़ियों को कम टैक्स के साथ इम्पोर्ट करने का मौका मिला।
3. प्रीमियम EV सेगमेंट में डिमांड
भारत में लग्जरी EV की मांग बढ़ रही है। टेस्ला की मॉडल Y (₹59.89-67.89 लाख) इस सेगमेंट को टारगेट करती है, जो BMW iX1 और मर्सिडीज EQA से टक्कर लेगी। भारतीय EV मार्केट को 2030 तक 28 लाख से ज्यादा इलेक्ट्रिक गाड़ियां बिकने की उम्मीद है।
टेस्ला के भारत में आने से ऑटो मार्केट पर क्या असर होगा
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटो मार्केट है और EV की मांग यहां तेजी से बढ़ रही है। सरकार भी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को बढ़ावा दे रही है। ऐसे में टेस्ला का आना इस सेक्टर में एक नई क्रांति ला सकता है।
शुरू में टेस्ला की ऊंची कीमत और इम्पोर्टेड ड्यूटी के कारण इसका असर प्रीमियम सेगमेंट तक सीमित रहेगा। मास-मार्केट ब्रांड्स टाटा, महिंद्रा जैसी कंपनियों पर तुरंत असर होने की उम्मीद कम है।
टेस्ला के सामने 5 प्रमुख चुनौतियां
1. हाई इम्पोर्ट ड्यूटी और कीमत: टेस्ला की गाड़ियां CBU (कम्प्लीट्ली बिल्ट यूनिट) के रूप में आयात होंगी। इन पर इम्पोर्ट ड्यूटी और GST लगने से कीमतें प्रीमियम सेगमेंट में पहुंच जाती हैं, जो मास-मार्केट ग्राहकों के लिए महंगी होंगी। इस सेगमेंट में सेल्स लिमिटेड हैं।
2. सीमित चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर: टेस्ला ने मुंबई और दिल्ली में 8 सुपरचार्जिंग स्टेशन की योजना बनाई है। ग्रामीण और छोटे शहरों में चार्जिंग की कमी टेस्ला की ज्यादा रेंज का फायदा कम कर सकती है।
3. कस्टमर बिहेवियर: भारतीय ग्राहक सर्विस, लागत और रीसेल वैल्यू को प्राथमिकता देते हैं। यहां टेस्ला को अपनी विश्वसनीयता साबित करनी होगी।
4. सर्विस और डीलरशिप नेटवर्क: टेस्ला की डायरेक्ट-टु-कंज्यूमर सेल्स मॉडल (ऑनलाइन बिक्री) भारत में नई है और इसका सर्विस नेटवर्क अभी सीमित है। BMW, मर्सिडीज, और टाटा जैसे ब्रांड्स का देशभर में मजबूत डीलर और सर्विस नेटवर्क टेस्ला के लिए चुनौती है।
5. लोकल मैन्युफैक्चरिंग में देरी: टेस्ला की गुजरात/कर्नाटक में प्रस्तावित गीगाफैक्ट्री 2026-2027 से पहले शुरू होने की संभावना कम है। तब तक ज्यादा कीमत वाली इम्पोर्टेड गाड़ियों पर निर्भर रहना होगा।
टेस्ला का भारत में किन कारों से कॉम्पिटिशन होगा?
टेस्ला को भारत में टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसी स्थानीय कंपनियों से चुनौती मिलेगी। इनके अलावा BYD, BMW, ऑडी और मर्सिडीज जैसे ब्रांड्स भी टेस्ला को टक्कर देंगे। टेस्ला की टेक्नोलॉजी और ब्रांड वैल्यू इसे अलग बनाती है, लेकिन स्थानीय कंपनियों की कीमत और सर्विस नेटवर्क बड़ी चुनौती होगी।
टाटा मोटर्स: भारत में EV मार्केट के 60% से ज्यादा शेयर के साथ सबसे बड़ा प्लेयर। टाटा नेक्सन EV जैसे मॉडल टेस्ला को टक्कर देंगे।
महिंद्रा एंड महिंद्रा: महिंद्रा की BE6 और XEV 9e मॉडल्स टेस्ला के लिए कॉम्पिटिशन होंगे। महिंद्रा की मजबूत ब्रांड लॉयल्टी और किफायती प्राइसिंग टेस्ला को टक्कर दे सकती है।
MG मोटर्स: विंडसर और साइबस्टर जैसी कारें टेस्ला के प्रीमियम सेगमेंट में चुनौती पेश कर सकती हैं। भारत में इसका 22% मार्केट शेयर भी एक फैक्टर है।
BYD: चीनी कंपनी BYD की ATTO 3, SEAL, और e6 मॉडल्स टेस्ला के प्रीमियम और टेक्नोलॉजी-फोकस्ड सेगमेंट में मुकाबला करेंगे। हालांकि, भारत में इसकी मौजूदगी सीमित है।
हुंडई: इस साउथ कोरियन कंपनी के आयोनिक 5 और क्रेटा इलेक्ट्रिक जैसी कारें टेस्ला के प्रीमियम EV सेगमेंट में टक्कर दे सकती है। इसका विस्तृत डीलरशिप नेटवर्क भी एक फैक्टर है।
BMW, ऑडी, मर्सिडीज: यूरोपियन ब्रांड्स BMW की i4 और iX, ऑडी की e-tron और मर्सिडीज की EQ सीरीज जैसी लग्जरी EVs टेस्ला की कारों से प्रीमियम मार्केट में मुकाबला करेंगी।
नोएडा, एजेंसी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने नोएडा के मजिस्ट्रेट को फटकार लगाई। बुधवार को CJI सूर्यकांत ने कहा, ‘जब सुप्रीम कोर्ट ने छात्र विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी FIR रद्द कर दी हैं। विरोध प्रदर्शनों को लेकर किसी भी छात्र के खिलाफ भविष्य में जबरदस्ती की कार्रवाई पर रोक लगाई है। ऐसे में एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने छात्र को नोटिस जारी करने की हिम्मत कैसे की? कोई भी मजिस्ट्रेट उस आदेश का उल्लंघन नहीं कर सकता।’
दरअसल, 4 सितंबर को नोएडा कमिश्नरेट के थर्ड एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट आर के सिसोदिया ने दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) प्रदर्शन में शामिल छात्र अक्षत त्रिपाठी के खिलाफ नोटिस जारी किया था। इसमें 5 लाख रुपए का बॉन्ड और इतनी ही रकम के दो जमानतदार पेश करने को कहा गया था। इसके बाद छात्र ने मंगलवार को वीडियो जारी कर कहा था- सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद मुझे विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए धमकाया जा रहा है।
बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट विश्वजीत भट्टाचार्य ने मौखिक रूप से CJI की अध्यक्षता वाली बेंच को यह बात बताई। उन्होंने बताया कि एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने एक छात्र को नोटिस जारी कर पूछा कि शांति बनाए रखने के लिए 5 लाख रुपए का पर्सनल बॉन्ड क्यों न भरवाया जाए। बाद में नोटिस वापस ले लिया गया।
यह वह नोटिस है, जिसे नोएडा कमिश्नरेट के थर्ड एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कार्यालय ने छात्र को जारी किया था।
सुप्रीम कोर्ट बोला- जिला मजिस्ट्रेट से जवाब मांगेंगे
वकील भट्टाचार्य ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- यह भारत के छात्रों के साथ एक प्रयोग किया जा रहा है। इसका असर पूरे देश पर पड़ेगा। पहले अवमानना की गई और फिर उसे वापस लिया गया। इस अवमानना को इस तरह सुधारा नहीं जा सकता।
यह कोर्ट की गरिमा की अवमानना है। नोएडा और यूपी के अधिकारी छात्रों के मन में डर का माहौल नहीं बना सकते हैं। इस पर CJI सूर्यकांत ने भरोसा दिलाते हुए कहा- हम जिला मजिस्ट्रेट से इस पर जवाब मांगेंगे।
तस्वीर छात्र अक्षत त्रिपाठी की है। मंगलवार को उन्होंने वीडियो जारी करके कहा था- मैं छात्र हूं। ऐसे में इतनी बड़ी राशि की शर्त मेरे लिए कैसे व्यावहारिक है
4 सितंबर को नोटिस दिया, अगले दिन रद्द कर दिया
छात्र अक्षत त्रिपाठी प्रयागराज के झूंसी के रहने वाले हैं। वह गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) से BA-LLB कर रहे हैं। अक्षत त्रिपाठी स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ( SFI) की उत्तर प्रदेश स्टेट कमेटी के सदस्य भी हैं। 4 सितंबर 2026 को उनके खिलाफ नोएडा कमिश्नरेट के थर्ड एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कार्यालय की ओर से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 130 के तहत नोटिस जारी किया गया।
कोर्ट ने नोटिस में कहा गया था- यह मानने के पर्याप्त आधार हैं कि त्रिपाठी विश्वविद्यालय के छात्रों को CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित कर रहे थे। वह छात्रों के बीच सरकार विरोधी और भ्रामक सूचनाएं फैला रहे थे। ऐसी गतिविधियों से तनाव पैदा हो सकता है। सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
अक्षत त्रिपाठी से पूछा गया था कि क्यों न उन्हें 6 महीने तक शांति बनाए रखने के लिए पाबंद किया जाए। इसके लिए उनसे 5 लाख रुपए का निजी मुचलका और इतनी ही राशि के दो जमानतदार पेश करने को कहा जाए। मामले में सुनवाई के लिए 5 सितंबर की तारीख तय की गई थी।
ACP रवि शंकर ने बताया-
जांच के दौरान अक्षत त्रिपाठी का नाम सामने आया था। पता चला था कि वह जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट में शामिल होने गया था। पुलिस ने वॉट्सऐप के जरिए छात्र को नोटिस भेजा था। 5 सितंबर को नोटिस कैंसिल कर दिया गया। छानबीन में पता चला कि छात्र उस दौरान वहां मौजूद नहीं था।
ACP ने बताया कि इससे पहले नवंबर में छात्र ने आत्महत्या करने की बात कहते हुए वीडियो बनाया था, जो वायरल हो गया था। वीडियो वायरल होने के बाद वह गायब हो गया था, जिसके बाद पुलिस ने उसे तलाशा था।
छात्र ने वीडियो जारी करके कहा- क्या सरकार की नीतियों के खिलाफ बोलना जुर्म
छात्र ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट किया। इसमें कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद CJP प्रदर्शन में शामिल होने के लिए धमकाया जा रहा है। क्या लोकतंत्र में सरकार की नीतियों के खिलाफ बोलना या पेपर लीक जैसे मुद्दों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना अपराध है? इसी मामले में ग्रेटर नोएडा मजिस्ट्रेट की तरफ से मुझे नोटिस मिला है। इसमें 5 लाख रुपए का निजी बॉन्ड देने को कहा गया है। मैं छात्र हूं और मेरी कोई व्यक्तिगत आय नहीं है। ऐसे में इतनी बड़ी राशि की शर्त मेरे लिए कैसे व्यावहारिक है?
नोटिस में आरोप है कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन में शामिल होकर मैंने विश्वविद्यालय के छात्रों को सरकार के खिलाफ भड़काया। सवाल है कि सरकार की नीति की आलोचना करना, सरकार से सवाल पूछना या पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठाना भड़काना कैसे हो गया? मुझ पर लगाए गए आरोपों का आधार और प्रमाण क्या है?
मैं 3 महीने से विश्वविद्यालय गया ही नहीं हूं। 20 जुलाई के प्रदर्शन से करीब डेढ़ महीने पहले ही अपने घर इलाहाबाद आ चुका था। ऐसे में मैंने विश्वविद्यालय के छात्रों को भड़काया कैसे? मैं इस कार्रवाई की निंदा करता हूं और निष्पक्ष जांच की मांग करता हूं।
9 दिन पहले SC जंतर-मंतर प्रोटेस्ट की सभी FIR रद्द की थीं
सुप्रीम कोर्ट ने 9 दिन पहले कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन से जुड़ी सभी FIR को रद्द कर दिया। यह आदेश देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज मामलों पर लागू होगा। कोर्ट ने साफ किया था कि जिन प्रदर्शनकारियों का आपराधिक रिकॉर्ड है, उन पर केस चलता रहेगा। ये FIR 20 से 25 जुलाई के बीच जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पों के बाद दर्ज की गई थीं।
रायबरेली, एजेंसी। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने रायबरेली में बुधवार को बैठक में कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय को अपने मोबाइल पर टूटी सड़कें दिखाईं। राहुल ने डिस्ट्रिक्ट डेवलपमेंट कोऑर्डिनेटिंग कमेटी (दिशा) की मीटिंग में जर्जर सड़कों और गड्ढों की तस्वीरें दिखाकर PWD अधिकारियों और डीएम से पूछा कि सड़कों की हालत ऐसी क्यों है?
राहुल ने कहा कि जब सरकार फंड दे रही है तो काम क्यों नहीं हो रहा है? आप लोग क्या कर रहे हैं? इस मीटिंग में ऊंचाहार से BJP विधायक मनोज पांडेय, एमएलसी और राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह भी मौजूद थे।
कलेक्ट्रेट में करीब ढाई घंटे बैठक से पहले राहुल ने सुबह जनता दरबार लगाया, जहां महिला कांग्रेस नेता ने उन्हें राखी बांधी। राहुल ने यहां सपा नेताओं ने भी मुलाकात की।
कार्यक्रमों के बाद राहुल लखनऊ रवाना हो गए, जहां से वे दिल्ली जाएंगे। 2024 में सांसद बनने के बाद राहुल का यह 8वां रायबरेली दौरा था। इससे पहले वे 19-20 मई को दो दिवसीय दौरे पर आए थे।
राहुल मंगलवार दोपहर दिल्ली से एयर इंडिया की फ्लाइट से लखनऊ पहुंचे थे। पहली बार में विमान लैंड नहीं कर पाया था। 25 मिनट हवा में चक्कर लगाने के बाद दूसरे प्रयास में विमान ने लैंडिंग की थी।
रायबरेली में सर्राफा कारोबारी के घर बैठक के दौरान राहुल ने बच्ची से हाथ मिलाया। महिलाओं ने उन्हें बुके दिया।
रायबरेली में राहुल गांधी के जनता दरबार के दौरान भुएमऊ गेस्ट हाउस पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ी।
रायबरेली में राहुल गांधी ने 3 करोड़ की योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इनमें बारात घर, ट्रांसफॉर्मर और सड़कें शामिल हैं।
सपा विधायकों ने प्रदर्शन किया, पोस्टर लहराए
रायबरेली में सपा विधायक राहुल लोधी, श्याम सुंदर भारती ने दिशा की मीटिंग के दौरान हॉल के बाहर प्रदर्शन किया। हालांकि, राहुल के पहुंचने से पहले पुलिस ने उनसे पोस्टर और बैनर छीन लिए।
पोस्टर पर लिखा था- स्कूल बंद, फर्जी मुकदमे लिखे जा रहे, जमीनों पर कब्जे हो रहे हैं। जिले में आम लोगों की समस्याएं जस की तस हैं, तो ऐसे में दिशा की बैठक का क्या औचित्य है?
रायबरेली में हरचंदपुर से सपा विधायक राहुल लोधी और बछरावां से सपा विधायक श्याम सुंदर भारती ने पोस्टर-बैनर लेकर दिशा बैठक हॉल के बाहर प्रदर्शन किया।
सांसद-जनप्रतिनिधि अफसरों से सरकारी योजनाओं को लेकर सवाल करते हैं। जनता को योजनाओं का फायदा मिल रहा है या नहीं, काम में देरी को लेकर जवाब मांगते हैं।
‘दिशा’ (DISHA) बैठक की अध्यक्षता क्षेत्र के सांसद करते हैं। इसमें जिले के सभी विधायक, डीएम, एसपी और सभी सरकारी विभागों के बड़े अफसर एक साथ बैठते हैं।
राहुल ने मंत्री के सामने दिखाए खराब सड़कों के वीडियो
दिशा बैठक के दौरान अपने मोबाइल में राहुल गांधी ने रायबरेली की सड़कों के गड्ढे दिखाए। इस दौरान कैबिनेट मंत्री मनोज पांडे भी वीडियो देखते रहे। राहुल गांधी ने PWD विभाग के अधिकारियों और डीएम से इन सड़कों की बदहाली को लेकर सवाल पूछा। राहुल ने पूछा कि जिले की सड़कें इतनी खराब क्यों हैं? जब सरकार फंड दे रही है तो सड़कों पर काम क्यों नहीं हो रहा है। पूरे जिले के मुख्स मार्ग और ग्रामीण लिंक रोड बहुत खराब हैं। इसे लेकर क्या कर रहे हैं?
नागोया/नई दिल्ली, एजेंसी। एशियन गेम्स की शुरुआत से 10 दिन पहले जापान के नागोया में बाढ़ आ गई। स्थिति यह बनी की एशियन गेम्स में भाग लेने आए 400 खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ को सुरक्षित जगहों पर ले जाया गया।
बाढ़ में नागोया शहर की सड़कें और घर डूब गए। मेयर इचिरो हिरोसावा ने दावा किया कि एशियन गेम्स के लिए कोई चिंता की बात नहीं है। टूर्नामेंट का आयोजन तय समय पर होगा।
नागोया में 19 सितंबर को एशियन गेम्स की ओपनिंग सेरेमनी होनी है।
नागोया बाढ़ की तस्वीरें…
बाढ़ के पानी में सड़कें डूब गई हैं।
बाढ़ में फंसी गाड़ी को धक्का मारते लोग।
नागोया में बाढ़ के पानी में गाडियों के टायर डूब गए।
3500 लोगों ने इमरजेंसी शेल्टर में शरण ली
बस और मेट्रो सेवाएं कुछ समय के लिए प्रभावित रहीं। करीब 3,500 लोगों ने इमरजेंसी शेल्टर में शरण ली। नागोया और इची में एशियन गेम्स 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक होने हैं।
रिपोर्ट- वेन्यू में कुछ जगह छतों से पानी टपक रहा
जापानी मीडिया में शहर की सड़कों और मेट्रो स्टेशनों में भरे पानी की तस्वीरें दिखाई गईं। न्यूज एजेंसी AP की रिपोर्ट के मुताबिक, वेन्यू की कुछ जगहों पर छतों से पानी टपकने की घटनाएं भी हुईं। हालांकि मेयर हिरोसावा ने कहा कि एशियन गेम्स के दर्जनों वेन्यू को गंभीर नुकसान नहीं हुआ है।
भारत गेम्स में 768 सदस्यीय दल भेज रहा
खेल मंत्रालय ने जापान के आइची और नागोया में होने वाले 20वें एशियन गेम्स के लिए 503 खिलाड़ी और 255 सपोर्ट स्टाफ भेजने की जानकारी दी है। सपोर्ट स्टाफ में कोच, मैनेजर, फिजियो और मेडिकल टीम आदि शामिल है।
36 खेलों में उतरेगा भारत: पहले 35 खेलों के 492 एथलीटों को मंजूरी दी गई थी, लेकिन 4 सर्फर्स सहित नए नाम जुड़ने से अब भारत 36 खेलों में हिस्सा लेगा।
एथलेटिक्स दल में सबसे बड़ी बढ़ोतरी: एथलेटिक्स टीम के खिलाड़ियों की संख्या 73 से बढ़ाकर 79 कर दी गई है। एथलेटिक्स और क्रिकेट को सबसे ज्यादा सपोर्ट स्टाफ दिया गया है।
दल के प्रमुख अधिकारी: दल प्रमुख के रूप में सहदेव यादव और मुख्य मेडिकल अधिकारी के रूप में डॉ. दिनशॉ पार्डीवाला भारतीय दल का नेतृत्व करेंगे।
भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम 19 सितंबर को रवाना होगी
डिफेंडिंग चैंपियन भारत एशियन गेम्स के लिए टीम घोषित कर चुका है। श्रेयस अय्यर की कप्तानी वाली टीम में युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी भी शामिल हैं। भारतीय टीम 19 सितंबर को सानो के लिए रवाना होगी। इसगे अगले दिन टीम प्रैक्टिस सेशन में हिस्सा लेगी।
महिला क्रिकेट टीम पहले पहुंचेगी
हरमनप्रीत कौर की कप्तानी वाली भारतीय महिला क्रिकेट टीम दुबई में एशिया कप खेलने के बाद 13 सितंबर को भारत लौटेगी और 14 सितंबर को नागोया के लिए रवाना होगी।
महिला टीम एशियन गेम्स में सीधे क्वार्टर फाइनल से अभियान शुरू करेगी। उसका पहला मुकाबला 18 सितंबर को होगा। महिलाओं का यह टूर्नामेंट 22 सितंबर तक चलेगा।
गेम्स में ठहरने की व्यवस्थाओं पर भी विवाद था
इससे पहले खबर आई थी कि BCCI और PCB गेम्स के आयोजकों से नाराज है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि खिलाड़ियों को स्टेडियम से 20 किमी दूर छोटे होटल कमरों में ठहराया गया है, जहां बैग खोलने तक की जगह नहीं है। वहीं ड्रेसिंग रूम पक्के मकान की जगह टेंट में बने हैं और वॉशरूम 500 मीटर दूर है।
इसपर JCA के CEO नाओकी एलेक्स मियाजी ने कहा था- ‘हमने क्रिकेट टीम को होटल का विकल्प दिया है। जबकि कई अन्य खेलों के खिलाड़ियों के लिए क्रूज शिप या कंटेनर होटल जैसी सीमित सुविधाएं हैं।’
प्लेयर एरिया में टॉयलेट की सुविधा उपलब्ध रहेगी। मैदान पर बने ड्रेसिंग रूम भले ही अस्थाई हों, लेकिन इन्हें इस तरह तैयार किया गया है कि खिलाड़ियों और अधिकारियों को पूरा आराम मिले।
पिच और आउटफील्ड कम समय में सीमित संसाधनों के बीच तैयार की गई है। यह एशियन गेम्स के इतिहास में क्रिकेट की सबसे बेहतरीन प्लेइंग सरफेस होगी। श्रीलंकाई क्यूरेटर्स की मदद से यहां टर्फ और हाइब्रिड पिच तैयार की जा रही है।