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ब्रिटेन में खिलेगा ‘मेड इन इंडिया’ ज्वेलरी का जलवा, FTA से मिलेगा बड़ा फायदा

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नई दिल्ली/लंदन,एजेंसी। हाल ही में हस्ताक्षरित भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता (FTA) जिसे व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA) भी कहा जाता है भारतीय रत्न और आभूषण निर्यात के लिए एक नए युग की शुरुआत कर सकता है। रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (GJEPC) के कार्यकारी निदेशक सब्यसाची रे का मानना है कि यह समझौता भारत से आभूषण निर्यात को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा देगा।

FTA से निर्यात में जबरदस्त उछाल की उम्मीद

2024 में भारत ने ब्रिटेन को 941 मिलियन डॉलर मूल्य के रत्न और आभूषण निर्यात किए थे जबकि ब्रिटेन से आयात 2.7 बिलियन डॉलर था जिससे इस क्षेत्र में कुल द्विपक्षीय व्यापार 3.6 बिलियन डॉलर हो गया।

FTA लागू होने के साथ ब्रिटेन को भारतीय रत्न और आभूषण निर्यात बढ़कर 2.5 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है और अगले दो वर्षों में इस क्षेत्र में कुल व्यापार 6 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। यह भारतीय आभूषण उद्योग के लिए एक बड़ी छलांग होगी।

ब्रिटेन में भारतीय आभूषणों की बढ़ती मांग

रे ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि ब्रिटेन में एक बड़ी दक्षिण एशियाई आबादी है जिसमें भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल के लोग शामिल हैं जो पारंपरिक रूप से जातीय आभूषण पसंद करते हैं। यह प्रवृत्ति भारतीय निर्यात के साथ पूरी तरह से मेल खाती है। इसी मांग को पूरा करने के लिए मालाबार गोल्ड और कल्याण ज्वैलर्स जैसे भारतीय खुदरा विक्रेताओं ने पहले ही ब्रिटेन में अपने स्टोर खोल दिए हैं।

FTA के तहत आयात शुल्क शून्य हो जाने से भारतीय ज्वैलर्स अब हांगकांग और चीन के मौजूदा खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने की एक मजबूत स्थिति में होंगे। विशेष रूप से चांदी के आभूषणों से निर्यात को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है क्योंकि ब्रिटेन में इसकी मांग काफी अधिक है जबकि वर्तमान में उस श्रेणी में भारतीय निर्यात सीमित है।

कपड़ा और फुटवियर क्षेत्र को भी मिलेगा लाभ

उद्योग जगत के नेताओं का मानना है कि भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते से केवल आभूषण ही नहीं बल्कि कपड़ा और फुटवियर क्षेत्रों के निर्यात में भी महत्वपूर्ण वृद्धि होगी जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को समग्र रूप से लाभ मिलेगा।

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर सतर्क आशावाद

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता के बारे में पूछे जाने पर सब्यसाची रे ने सतर्क आशावाद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ वार्ता अच्छी तरह से आगे बढ़ रही है और भारत सरकार एक व्यापक समझौते पर पहुँचने को लेकर आशान्वित और आश्वस्त है।

रे ने यह भी बताया कि विभिन्न देशों के साथ व्यापार समझौतों की कई घोषणाएँ तो हुई हैं लेकिन आयात शुल्क और मूल्य संवर्धन जैसे विवरण अक्सर अंतिम रूप नहीं दिए जाते। उन्होंने अमेरिका के साथ एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते के महत्व पर ज़ोर दिया जिसमें भारत के लिए एक निष्पक्ष और लाभकारी समझौता सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक विवरण शामिल होने चाहिए।

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मिडिल ईस्ट में उबाल, दुनियाभर के बाजारों में भूचाल, कमजोर खुल सकते हैं सेंसेक्स-निफ्टी

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मुंबई, एजेंसी। मिडिल ईस्ट में संकट गहराने व होर्मुज स्ट्रेड के रास्ते कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने तथा डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दिए गए बयान के बाद दुनियाभर के बाजार 3 मार्च को क्रैश हो गए। एशियाई बाजार 11 महीनों के अपने सबसे खराब दौर के ट्रेक पर नजर आ रहे हैं। साउथ कोरिया के बाजार में सबसे ज्यादा कमजोरी दिख रही है। छुट्टी से लौटने के बाद यह 5 फीसदी गिर गया और प्रोग्राम ट्रेडिंग के लिए कुछ समय के लिए सेल ऑर्डर रोक दिए गए। होली की छुट्टी के बाद बुधवार को घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत कमजोर रहने के संकेत हैं। फ्यूचर्स से जुड़े संकेतक GIFT Nifty में करीब 600 अंकों से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई और यह 24,355 के आसपास लगभग 2.55% नीचे ट्रेड करता दिखा। इससे संकेत मिल रहे हैं कि BSE Sensex और NIFTY 50 दबाव में खुल सकते हैं।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े घटनाक्रमों ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया है। ऊर्जा आपूर्ति को लेकर आशंकाओं के चलते बाजार में सतर्कता बढ़ गई है। उल्लेखनिय है कि ट्रंप ने कहा कि यह वॉर करीब 1 महीने तक चल सकती है। 

एशियाई बाजारों में भारी गिरावट

वैश्विक बाजारों में भी बिकवाली हावी रही। दक्षिण कोरिया का KOSPI 7% से ज्यादा टूट गया, जो 2024 के बाद की बड़ी गिरावट मानी जा रही है। टेक दिग्गज Samsung Electronics और SK Hynix में करीब 10% तक की कमजोरी आई।

जापान का Nikkei 225 3% से अधिक फिसला, जबकि हांगकांग का Hang Seng Index और चीन का SSE Composite Index भी 1% से ज्यादा नीचे रहे। यूरोप में Stoxx Europe 600 लगभग 2.5% गिरा, वहीं अमेरिकी फ्यूचर्स में भी 2% तक की कमजोरी दिखी।

कच्चे तेल में तेजी से बढ़ी चिंता

तनाव के बीच Brent Crude 85 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। आज इसमें 7% से अधिक की तेजी दर्ज हुई थी। Strait of Hormuz को लेकर बढ़ते जोखिम ने तेल और गैस आपूर्ति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

तेल की बढ़ती कीमतें एशियाई कंपनियों की लागत बढ़ा सकती हैं, जिससे मुनाफे पर दबाव और महंगाई में तेजी की आशंका है। भारत जैसे आयात-निर्भर देश पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।

सोमवार को भी दिखा भारी उतार-चढ़ाव

सोमवार को भी बाजार में तेज गिरावट देखी गई थी। सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 2,700 अंकों से ज्यादा टूटा, हालांकि बाद में कुछ रिकवरी के साथ करीब 1,048 अंकों की गिरावट पर बंद हुआ। निफ्टी भी दिन में 575 अंक फिसलकर अंत में 312 अंक नीचे बंद हुआ।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता, बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। ऊंची ऊर्जा कीमतों से रुपये पर दबाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ सकती है। ऐसे में निवेशकों को घबराहट में फैसले लेने के बजाय संतुलित और लंबी अवधि की रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।

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गैस की कीमतों में जबरदस्त उछाल, तीन साल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे दाम

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मुंबई, एजेंसी। गैस की कीमतों में एक बार फिर भारी बढ़ोतरी देखी गई है, जिससे यह तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। आज थोक गैस की कीमतों में 32% की सीधी वृद्धि दर्ज की गई, जिससे दाम थोड़े समय के लिए 151 पेंस प्रति थर्म तक जा पहुंचे। यह फरवरी 2023 के बाद का सबसे उच्च स्तर है।

एक हफ्ते में करीब 93% की वृद्धि 

बाजार में गैस की कीमतों का बढ़ना जारी है। कल कीमतों में हुई 50% की वृद्धि के बाद, इस सप्ताह अब तक गैस के दाम 93% तक बढ़ चुके हैं। हालांकि, शुरुआती उछाल के बाद कीमतों में मामूली राहत देखी गई और यह 148 पेंस प्रति थर्म पर आकर रुकी।

आम आदमी पर क्या होगा असर? 

गैस की कीमतों में इस उछाल का सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ने की संभावना है। बिजली की कीमतें अभी भी थोक गैस की लागत से जुड़ी हुई हैं, इसलिए गैस महंगी होने से बिजली भी महंगी हो सकती है। दूसरी ओर ‘एनर्जी प्राइस कैप’ (जो ऊर्जा की प्रति यूनिट अधिकतम शुल्क को सीमित करती है) काफी हद तक थोक लागतों के आधार पर ही तय की जाती है। 

यदि थोक कीमतें इसी उच्च स्तर पर बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में घरेलू बिलों (Household bills) में भारी बढ़ोतरी हो सकती है।

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Gold-Silver Drop: औंधे मुंह गिरे सोने-चांदी के भाव, कीमतों में आई बड़ी गिरावट

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मुंबई, एजेंसी। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ईरान युद्ध के कारण सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। MCX पर शाम के कारोबार में दोनों कीमती धातुएं औंधे मुंह गिरी है। MCX पर खबर लिख जाने के समय सोने का वायदा भाव 2.45% यानि 3760 रुपए की गिरावट के साथ 1,62,314 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था। वहीं चांदी में 16653 रुपए (6.21%) टूटकर 2,61,828 रुपए प्रति किलोग्राम पर था। आपको बता दें कि आज MCX पर होली के कारण सुबह का कारोबार बंद था। इंटरनैशनल मार्केट में भी सोने-चांदी में बड़ी गिरावट आई है।

इंटरनेशनल मार्केट में सोने-चांदी की कीमत

इंटरनेशनल मार्केट में सोने की कीमतें $5400 के पार चली गईं, जिसके बाद देर शाम के ट्रेडिंग में गिरावट देखी गई। शाम के कारोबार में Comex पर सोना 159 डॉलर की गिरावट के साथ 5,159.10 डॉलर प्रति औंस के भाव पर कारोबार कर रहा था। सोने के भाव ने इस साल 5,586.20 डॉलर के भाव पर सर्वोच्च स्तर छू लिया। Comex पर चांदी के वायदा भाव 7.44 डॉलर की गिरावट के साथ 81.50 डॉलर प्रति औंस के भाव पर कारोबार कर रहा था। इसके भाव ने इस साल 121.79 डॉलर का उच्चतम स्तर छू लिया।

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