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कोरबा

जो संतान माता-पिता का आदेश मानता है, वही कृष्ण भक्त – पंडित विजय शंकर मेहता

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कल श्रीमद्भागवत कथा पर लगेगा विराम
कोरबा। पितृमोक्षार्थ गयाश्राद्धांतर्गत मातनहेलिया परिवार द्वारा जश्न रिसोर्ट कोरबा में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन कथा वाचक पंडित विजय शंकर मेहता ने राजसूय यज्ञ एवं सुदामा चरित्र सहित महाभारत की कथा सुनाई और कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का लक्ष्य था, धर्म की स्थापना। भगवान कृष्ण स्पष्ट वक्ता थे, उन्होंने कुरूक्षेत्र में कौरव और पाण्डवों को आमने-सामने किया, लेकिन युद्ध तय था और महाभारत हुआ। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की हर लीला में एक संदेश छुपा होता है।


इसके पूर्व पंडित श्री मेहता ने सुदामा चरित्र का बड़े ही मार्मिक ढंग से चित्रण किया और कहा कि यदि आपकी सफलता में किसी का थोड़ा सा भी योगदान हो, उसे कभी मत भूलना। सुदामा कुछ आस लेकर अपनी धर्मपत्नी सुशीला के कहने पर भारी मन से कृष्ण के पास गए, ताकि उनके परिवार की दरिद्रता समाप्त हो जाए। सुदामा जीर्ण-शीर्ण वस्त्र पहनकर नंगे पांव कृष्ण के महल गए। सुदामा के आने की खबर सुनकर महल के दरवाजे की ओर नंगे पांव कृष्ण दौड़ पड़े और सुदामा की दरिद्रता देखकर उनकी आंखों से अश्रू बह पड़े। भगवत गीता में वर्णित है कि भगवान ने अपने आंसू से ही सुदामा का पांव धोया था। दूसरे दिन कृष्ण ने सुदामा से कहा- भाभी ने मेरे लिए कुछ भेजा है कि नहीं, भारी मन से सुदामा ने सुशीला के भीख में मिले चीवड़ा की पोटली दी। सुदामा के हाथ से कृष्ण ने पोटली छीन ली, जिससे चीवड़ा बिखर गया। घूटनों के बल पर बिखरे चीवड़े को कृष्ण ने उठाया और खाया। कहा जाता है जब मुट्ठी में रखकर कृष्ण ने चीवड़ा खाया, तो उस दिन पूरा ब्रह्माण्ड तृप्त हो गया था। महल में कुछ दिन समय बीताने के बाद कृष्ण ने सुदामा को विदा किया। जिस भारी मन से सुदामा कृष्ण के पास आए थे, उससे भी बोझिल मन से अपने गांव पोरबंदर गए। खाली हाथ जाते हुए उनके पांव आगे बढ़ते ही नहीं थे, दरिद्रता मिटाने कृष्ण के पास गए थे, खाली हाथ लौटना पड़ा। जब किसी तरह पोरबंदर पहुंचे, तो देखा उनकी झोपड़ी गायब थी और झोपड़ी की जगह महल खड़ा था। उनके पुत्रों ने उन्हें अंदर ले गए, सुशीला को देखकर आंखें चौंधिया गई। रानी की तरह ठाठबाट देखकर आंखों के सामने कृष्ण की तस्वीर आई और मुस्कुरा रहे थे। मन आनंदित हुआ-कृष्ण अनूठे हो… तुम्हारी लीला तुम ही जानो। कथा के माध्यम से कथा वाचक पंडित विजय शंकर मेहता ने कहा कि-यदि तुम्हारी सफलता में किसी का भी थोड़ा सा योगदान हो, उसे कभी मत भूलना। उन्होंने महाभारत की कथा सुनाते हुए कहा कि जो भी संतान माता-पिता के आदेशों को माने, वही कृष्ण को प्यारे हैं, वही कृष्ण का सच्चा भक्त है। उन्होंने कहा कि मित्र बनाना हो तो कृष्ण से सीखें, कि किस तरह उन्होंने अपने बचपन के मित्र को संकट से उबारा, आप भी जब मित्र पर संकट आए, उनके साथ हमेशा खड़े रहो, यही मित्र धर्म है।


समृद्धि और सफलता मिले तो अहम मत करना
यदि आप अपने पुरूषार्थ से धन कमा कर बड़े आदमी बन जाओ और समृद्धि तथा सफलता मिल जाए, तो कभी अहम मत करना। परिवार और मित्र तो कभी बिसरा मत देना, क्योंकि आपकी सफलता और समृद्धि में परिवार तथा मित्रों का कुछ न कुछ योगदान अवश्य होता है।
कथा आप सुनो, भोजन मिलेगा पितरों को
श्रीमद्भागवत कथा पितरों के लिए भोजन है। कथा आप सुन रहे हैं, लेकिन भगवत रूपी कथा का भोजन कर आपके पितर तृप्त हो रहे हैं। श्रीमद्भागवत कथा सुनने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है, ऐसा श्रीमद्भागवत में वर्णित है।
कथा वाचक पंडित विजय शंकर मेहता ने कहा कि कृष्ण की लीला को समझने के लिए आध्यात्मिक दृष्टि चाहिए, संसारिक दृष्टि से तो कई सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने सुभद्रा अपहरण की कथा भी सुनाई और कहा कि विवाह एक ऐसा बंधन है, जिसे लड़के और ससुराल के भविष्य को देखते हुए तय करना चाहिए, ताकि लड़की का जीवन भी सुखमय हो।
ध्यान से जीवन जीने की कला सिखाई


कथा के छठवें दिन प्रात: विजय शंकर मेहता ने जीवन प्रबंधन गुरू के रूप में कथा स्थल की दूसरी ओर ध्यान की क्लास ली और उपस्थित जनों को करीब एक घंटे तक हनुमान चालीसा मंत्र पर ध्यान करना सिखाया। ध्यान से किस तरह नकारात्मक विचार को हटाया जाता है और मन पर नियंत्रण पाया जाता है, इसकी क्रिया बताई।
कल का प्रसंग
कथा वाचक एवं जीवन प्रबंधन गुरू पंडित विजय शंकर मेहता कल 30 अगस्त शनिवार को उद्धाव गीता, भगवान का स्वधाम गमन एवं परीक्षित मोक्ष की कथा सुनाएंगे। कल श्रीमद्भागवत कथा पर विराम लगेगा और कल देर रात्रि जांजगीर में आयोजित 31 अगस्त से प्रारंभ होने वाले श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में बतौर कथा वाचक अपनी उपस्थिति देगें।

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कोरबा

1 अप्रैल को नम: सामूहिक विवाह:राज्यपाल रमेन डेका के मुख्य आतिथ्य एवं पंडित धीरेंद्र शास्त्री के सानिध्य में 108 दिव्यांग/निर्धन कन्याएं बंधेंगी परिणय सूत्र में

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माँ सर्वमंगला देवी मंदिर प्रबंधन की पुण्य पहल
कोरबा। माँ सर्वमंगला देवी मंदिर दुरपा कोरबा प्रबंधन द्वारा 01 अप्रैल को ढपढप में चल रही श्रीहनुमंत कथा के पांच दिवसीय दिव्य आयोजन के पंचम एवं अंतिम दिन अपना घर सेवा आश्रम समिति के आयोजकत्व में दिव्यता और भव्यता के साथ सम्पन्न होगा। इस दिव्य आयोजन में बतौर मुख्य अतिथि प्रदेश के महामहिम राज्यपाल रमेन डेका जहां मुख्य साक्षी बनेंगे, वहीं अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक एवं सनातन धर्म के संवाहक, बागेश्वर धाम के पीठाधीश पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का आशीर्वाद प्राप्त होगा और इस पुण्य और सेवा कार्य के लिए उनका सानिध्य प्राप्त होगा।
पांच दिवसीय श्रीहनुमंत कथा से जिले ही नहीं पूरे प्रदेश में हिन्दुत्व की जो विचार क्रांति की लहर ढपढप से चली है, उसका बड़ा संदेश आने वाले दिनों में दिखेगा। इस महान और पुण्य धार्मिक आयोजन के बीच 108 उन दिव्यांग और निर्धन कन्याओं का घर भी बसने जा रहा है और नवदाम्पत्य जीवन में प्रवेश के लिए पंडित धीरेंद्र शास्त्री का जहां सानिध्य मिलने से नम: सामूहिक की दिव्यता और बढ़ेगी और मा. राज्यपाल रमेन डेका की उपस्थिति से कार्यक्रम की गरिमा बढ़ेगी। कार्यक्रम की विशालता और महानता को देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित केबिनेट के सदस्य एवं कई विधायक, राजनीतिज्ञ, लब्धप्रतिष्ठित समाजसेवक एवं विद्वतजनों की उपस्थिति इस पुण्य कर्म की गरिमा बढ़ाएंगे।
माँ सर्वमंगला देवी मंदिर प्रबंधन ने नम: सामूहिक विवाह को इस बार विशालता प्रदान करने के लिए पूरी तैयारी कर ली है और अपना घर सेवा आश्रम के आयोजकत्व में ढपढप की पुण्यधरा इस महान पुण्य कर्म का साक्षी बनेगी।

पंडित शास्त्री के कार्यक्रम में पहली बार सामूहिक विवाह का आयोजन
पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भारत सहित कई देशों में सनातन धर्म को बढ़ाने के लिए कई दिव्य आयोजनों में अपने श्रीमुख से लोगों को हिन्दुत्व की महिमा बता रहे हैं। कोरबा की पुण्य धरा में उनका यह विशाल आयोजन पहली बार हो रहा है और आज हनुमंत कथा का दूसरा दिन है। विशाल समुद्र सा जनसैलाब उन्हें सुनने के लिए ढपढप की पुण्य धरा पर खड़ा रहा और सरल, सहज वाणी को सुनने एक अद्भूत और विशाल श्रद्धा देखने को मिली।
हनुमंत कथा 01 अप्रैल तक चलेगी और कथा के अंतिम दिन ढपढप में श्रद्धा, आध्यात्म के साथ मानवीय सेवा का अद्भूत संगम देखने को मिलेगा और वह क्षण काफी रोमांचित होगा, जब 108 निर्धन एवं दिव्यांग जोड़े एक-दूसरे के जीवनसाथी बनेंगे और जमीन से लेकर आसमां भी इस अद्भूत समागम में फूल बरसाएंगे।

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कोरबा

जवारा विसर्जन के साथ माँ सर्वमंगला देवी मंदिर दुरपा कोरबा में उल्लास, उमंग एवं आध्यात्म के साथ चैत्र नवरात्रि सम्पन्न

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राजपुरोहित नमन पाण्डेय ने सपरिवार जवारा कलश उठाने वाली नारीशक्ति की पूजा अर्चना की


कोरबा। 19 मार्च से 27 मार्च तक माँ सर्वमंगला देवी मंदिर दुरपा कोरबा में 9 दिन तक माँ आदिशक्ति के 9 रूपों की पूजा-अर्चना की गई और 9 दिन तक माँ का दरबार धार्मिक समागम के साथ सनातन एवं सांस्कृतिक, धार्मिक आस्था एवं परंपरा के संगम के रूप में लघु भारत का स्वरूप लिया हुआ था और रामनवमी को गोधूली बेला में दिव्य मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान के साथ जवारा कलशों की पूजा-अर्चना करने के बाद आह्वानित देवी-देवताओं की शांति करने के बाद जवारा विसर्जन हसदेव के पवित्र घाट में किया गया। इसके साथ माँ सर्वमंगला देवी मंदिर में 9 दिन की चैत्र नवरात्रि सम्पन्न हो गई।

जवारा कलश विसर्जन के लिए कलश उठाने वाली नारीशक्ति की पूजा-अर्चना मंदिर के प्रबंधक/पुजारी एवं राजपुरोहित नमन पाण्डेय (नन्हा महराज) ने सपरिवार की और बैगाओं को शांत किया। मंदिर परिसर से हसदेव घाट के बीच ढोल-ताशों की आवाज से पूरा परिसर गुंजायमान था और पवित्र हसदेव नदी में पूजा-अर्चना के बाद विश्व कल्याण की भावना लिए जवारा कलशों का विसर्जन कर दिया गया।
नवमी पर माँ सिद्धिदात्रि का दर्शन करने उमड़ा आस्था का सैलाब

चैत्र शुक्ल नवमी को जहां भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव मनाया गया, वहीं माँ सर्वमंगला देवी मंदिर दुरपा कोरबा पहुंचकर माँ सिद्धिदात्रि स्वरूपा का दर्शन कर श्रद्धालु तृप्त हुए और माँ सिद्धिदात्रि से मनोवांछित फल प्राप्ति के लिए आशीर्वाद मांगा। माँ सिद्धिदात्रि नाम के अनुरूप हर कार्यों में सिद्धि प्रदान करती हैं और भक्तों ने अपने कार्यों की सिद्धि के लिए आशीर्वाद मांगा। माँ को भोग के रूप में धान, तिल, लाई एवं फल अतिप्रिय हैं। भक्तों ने उनके प्रिय भोग समर्पित किए।

नमन पाण्डेय ने महायज्ञ रूपी चैत्र नवरात्रि के निर्विघ्न सम्पन्न होने पर जताया आभार

माँ सर्वमंगला देवी मंदिर दुरपा कोरबा के प्रबंधक/पुजारी एवं राजपुरोहित नमन पाण्डेय ने चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रम संवत् 2083, 19 मार्च 2026 से लेकर चैत्र शुक्ल नवमी विक्रम संवत् 2083, 27 मार्च 2026 तक नौ दिवसीय चैत्र नवरात्रि में विभिन्न धार्मिक आयोजनों, भोग-भंडारा सहित अन्य धार्मिक अनुष्ठान निर्विघ्न एवं शांति पूर्ण ढंग से सम्पन्न होने पर सभी धर्मानुरागियों, श्रद्धालुओं, भक्तों का अभिनंदन करते हुए आभार जताया। उन्होंने कार्यक्रम के सुचारू संचालन के लिए जिला प्रशासन, सुरक्षा व्यवस्था के बेहतर क्रियान्वयन के लिए पुलिस प्रशासन, सभी धार्मिक आयोजनों के अनुष्ठानों को सम्पन्न कराने वाले धर्माचारियों, विद्वान पंडितों, कार्यक्रमों के सहयोगी, सेवादारों का ह्दय से आभार जताया और कहा कि माँ सर्वमंगला देवी की छत्रछाया, कृपा विश्व कल्याण के लिए हम सब पर बनी रहे और विश्व में शांति की स्थापना हो, कोरबा, छत्तीसगढ़ समृद्धि एवं खुशहाली का नया आयाम स्थापित करे और माँ भारती का ललाट विश्व गगन पर दमकता रहे और हम अपने गौरवशाली सनातन धर्म की स्थापना के लिए सदैव निरंतर प्रयास करते रहें और इस पुण्य कर्म के लिए माँ सर्वमंगला हमें निरंतर नई ऊर्जा देती रहे।

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कोरबा

मालगाड़ी से कोयला चोरी करते मजदूर को लगा करंट:कोरबा में गंभीर रूप से झुलसा, कोरबा मेडिकल कॉलेज रेफर, गैस खत्म होने पर कर रहा था चोरी

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कोरबा। कोरबा-चांपा सड़क मार्ग पर उरगा थाना क्षेत्र के पताड़ी के पास एक निजी पावर प्लांट के समीप एक मजदूर चलती मालगाड़ी से कोयला चोरी करते समय करंट की चपेट में आ गया। गंभीर रूप से झुलसे मजदूर की हालत नाजुक बनी हुई है।

जानकारी के अनुसार, पावर प्लांट के आसपास अस्थायी रूप से रहने वाले बाहरी राज्यों के मजदूर अक्सर रसोई गैस जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी का सामना करते हैं। बताया गया है कि गैस खत्म होने के कारण मजदूर खाना बनाने में परेशानी महसूस कर रहे थे।

झुलसा हुआ युवक

झुलसा हुआ युवक

11 हजार वोल्ट हाई टेंशन लाइन से लगा करंट

इसी दौरान एक मजदूर ने पास से गुजर रही कोयला मालगाड़ी से कोयला निकालने का जोखिम भरा कदम उठाया। वह चलती मालगाड़ी के ऊपर चढ़कर कोयला निकालने लगा, तभी ऊपर से गुजर रही 11 हजार वोल्ट की हाई टेंशन लाइन के संपर्क में आ गया।

तार छूते ही उसे जोरदार करंट लगा और वह बुरी तरह झुलस गया। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद लोगों ने घायल मजदूर को तुरंत नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया।

मेडिकल कॉलेज, कोरबा रेफर किया गया

प्राथमिक उपचार के बाद, उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने उसे मेडिकल कॉलेज, कोरबा रेफर कर दिया। चिकित्सकों के अनुसार, मजदूर लगभग 70 प्रतिशत तक झुलस चुका है और उसकी हालत नाजुक बनी हुई है।

घायल मजदूर की पहचान ओमप्रकाश ( 28-30) के रूप में की गई है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। फिलहाल मजदूर का इलाज जारी है और उसकी स्थिति पर चिकित्सकों की पैनी नजर बनी हुई है।

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