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कोरबा

रेशम, कृषि मेला में शामिल होंगे उप मुख्यमंत्री साव

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कोरबा। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री अरूण साव 30 अगस्त को पाली ब्लाक मुख्यालय में आयोजित रेशम, कृषि मेला 2025 में शामिल होंगे।
जारी कार्यक्रम के अनुसार उप मुख्यमंत्री साव प्रातः 10 बजे बिलासपुर से प्रस्थान कर 11 बजे पाली पहुंचेंगे। यहां कार्यक्रम में शामिल होने के पश्चात दोपहर 12.30 बजे पाली से बिलासपुर के लिये प्रस्थान करेंगे।

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कोरबा

कोरबा में सजेगा श्री हनुमान जी का दिव्य दरबार— धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के सान्निध्य में श्री हनुमंत कथा, आयोजक स्वयं बजरंग बली

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प्रथम दिन की प्रथम आरती सफाई कर्मीयों द्वारा होगी
कोरबा। अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक, हनुमान जी के अनन्य भक्त संत धीरेंद्र शास्त्री के सान्निध्य में कोरबा की पावन धरा पर आयोजित होने जा रही दिव्य श्री हनुमंत कथा को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। बुधवार को जश्न रिसॉर्ट में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में इस विराट आध्यात्मिक आयोजन की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की गई। बैठक में समाजसेवी राणा मुखर्जी ने भावुक स्वर में बताया कि इस ऐतिहासिक आयोजन के आयोजक स्वयं श्री बजरंग बली होंगे, जबकि समाज की सेवा में समर्पित कोरबा के सफाई कर्मी इस महायज्ञ में मुख्य यजमान की भूमिका निभाएंगे— जो सामाजिक समरसता और सेवा-भाव का अद्भुत संदेश देगा।

बैठक में यह जानकारी दी गई कि 28 मार्च से 1 अप्रैल तक दिव्य श्री हनुमंत कथा का आयोजन किया जाएगा। इसके पूर्व 27 मार्च को 21 हजार माताओं-बहनों के साथ भव्य कलश यात्रा निकालने का संकल्प लिया गया है, जिससे पूरे नगर में भक्ति, श्रद्धा और उत्साह का वातावरण बनेगा।

इस अवसर पर मंच से मार्गदर्शन करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संभागीय सर संघचालक एवं विद्या भारती (मध्य क्षेत्र) के उपाध्यक्ष जुड़ावन सिंह ठाकुर ने कहा कि भगवान श्रीराम के भक्त हनुमान जी ने भक्ति, सेवा और समर्पण का जो आदर्श प्रस्तुत किया है, वही आज के समाज का मार्गदर्शन है। बजरंग बली के अनन्य भक्त धीरेंद्र शास्त्री अपनी वाणी से भारतवर्ष ही नहीं, बल्कि विश्व को सनातन संस्कृति और राष्ट्रभाव की प्रेरणा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि “राम से बड़ा राम का नाम है और हम से बड़ा हमारा संगठन है। हम सब एक ही विचारधारा के यात्री हैं। श्री हनुमंत कथा का उद्देश्य समाज में समरसता, संगठन और राष्ट्रभाव को सुदृढ़ करना है।” उन्होंने इस पावन कार्य के लिए सभी को चुने जाने पर ईश्वर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए आयोजन को भव्य बनाने का आह्वान किया।
समाजसेवी सुबोध सिंह ने कहा कि यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनसहभागिता का महायज्ञ है। कोई समय देगा, कोई आर्थिक सहयोग करेगा, कोई अपने अनुभव और श्रम से योगदान देगा— तभी यह आयोजन ऐतिहासिक बनेगा। बैठक में नगर निगम कोरबा के सभापति नूतन सिंह ठाकुर, ऋतु चौरसिया, सुबोध सिंह शिव कश्यप, विश्व हिंदू परिषद के नगर अध्यक्ष गौरव मोदी सहित अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे और अपने सुझाव दिए।

आयोजन की संगठनात्मक रूपरेखा भी घोषित की गई। संयोजक के रूप में अमरजीत सिंह, सचिव डॉ. पवन सिंह तथा कोर टीम में ऋषभ केशरवानी, तपिश, रवि गिडवानी, नवल गुप्ता, ऋषभ शुक्ला को जिम्मेदारी सौंपी गई। श्रद्धालुओं के लिए “भारत मां की रसोई” को सतत एवं निर्बाध रूप से संचालित रखने की जिम्मेदारी समाजसेवी प्रेम मदान ने ग्रहण की।
नगर निगम कोरबा के सभापति नूतन सिंह ठाकुर ने भावुक अपील करते हुए कहा कि कोरबा में श्री हनुमान जी का दिव्य दरबार सजने जा रहा है और वे प्रतिदिन अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने कहा कि आयोजन के लिए अनुमानित बजट लगभग 2 करोड़ 80 लाख रुपये है। यदि एक लाख धर्मपरायण श्रद्धालु मात्र 280 रुपये का सहयोग दें, तो यह महायज्ञ सहज रूप से सफल हो सकता है। उन्होंने स्वयं जन-जन तक पहुंचकर सहयोग जुटाने का संकल्प लिया।

इस महाआयोजन के प्रमुख समन्वयक अपना घर सेवा आश्रम के अध्यक्ष राणा मुखर्जी ने बताया कि पूरी समय-सारणी तय कर ली गई है और आयोजन को ऐतिहासिक स्वरूप देने के लिए सभी विभागों में जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं। वरिष्ठ पत्रकार एवं कमला नेहरू महाविद्यालय समिति के अध्यक्ष किशोर शर्मा ने सुझाव दिया कि सहयोग के सभी मार्ग खुले रखे जाएं— बड़ी राशि देने वालों से लेकर सामान्य श्रद्धालु तक अपनी सामर्थ्य अनुसार सहयोग कर सकें। इसके लिए डिजिटल माध्यम (क्यूआर कोड) जैसी सुविधा भी उपलब्ध कराई जा सकती है।
पूर्व पार्षद एवं वरिष्ठ भाजपा नेत्री श्रीमती वैशाली रत्नपारखी ने महिलाओं से संबंधित व्यवस्थाओं की संपूर्ण जिम्मेदारी संभालने का दायित्व लेते हुए हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।
बैठक के समापन पर यह संकल्प लिया गया कि दिव्य श्री हनुमंत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सेवा, समरसता और सनातन चेतना का विराट अभियान बनेगी— जिसमें कोरबा का हर श्रद्धालु सहभागी बनेगा और यह आयोजन आने वाले वर्षों तक याद रखा जाएगा।

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कोरबा

SECL’s ‘DigiCOAL’ Showcased as a Model for Transparent Governance at Central Vigilance Commission’s National Workshop

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Bilaspur/Korba. At the National Workshop on “Digital Initiatives for Increasing Transparency in Governance” organised by the Central Vigilance Commission on 11 February 2026 at the SCOPE Convention Centre, New Delhi, South Eastern Coalfields Limited (SECL) presented its digital transformation initiative, DigiCOAL, as a model digital practice enhancing transparency, efficiency, and accountability in public sector operations.

Representing SECL, Chief Vigilance Officer Shri Himanshu Jain delivered a comprehensive presentation highlighting how DigiCOAL has strengthened digital surveillance and data-driven management systems across critical mining operations. He emphasized that the initiative has significantly enhanced operational transparency and institutional accountability through integrated digital interventions.

Strengthening Operations Through Digital Monitoring

The presentation detailed several key technological initiatives under DigiCOAL:

  • HEMM Fleet Monitoring System: Real-time tracking of heavy earth moving machinery such as shovels, dumpers, and dozers through sensor-based systems. The system monitors equipment location, operating hours, and fuel consumption, enabling automatic detection of abnormal fuel drops, excessive idle time, and route deviations.
  • Video Analytics & Connected Worker System: These tools have reinforced safety management, operational control, and emergency response mechanisms, ensuring quicker and more effective interventions.
  • Drone-Based Surveys: Drones are being deployed for identifying encroachments, monitoring haul roads and mine slopes, and assessing drainage systems during the monsoon, thereby improving accuracy and preventive oversight.
  • Data-Driven Mine Planning & Optimised Drilling-Blasting: Scientific and data-backed planning has improved precision and efficiency in the production process.
  • Integrated Digital Ecosystem: Initiatives such as digital land records, online training platforms, spare parts management systems, and a digital war room have created a unified, tamper-proof digital ecosystem across operations.

Live Webcast at SECL Headquarters

The workshop proceedings were collectively viewed through a live webcast at SECL Headquarters in Bilaspur. CMD SECL Shri Harish Duhan participated in the session via video conferencing. He was joined by Director (Technical–Operations) Shri N. Franklin Jayakumar, Director (Personnel) Shri Biranchi Das, Director (Finance) Shri D. Sunil Kumar, Director (Technical–Projects & Planning) Shri Ramesh Chandra Mohapatra, along with General Managers, Departmental Heads, officers, and employees from Headquarters and all operational areas.

National Recognition for SECL’s Digital Transformation

The presentation of DigiCOAL at a national forum marks significant recognition of SECL’s digital transformation journey. This achievement not only underscores SECL’s leadership in the coal sector but also demonstrates how technology-driven transparency can responsibly and efficiently support the nation’s growing energy needs.

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कोरबा

केन्द्रीय सतर्कता आयोग के राष्ट्रीय कार्यशाला में SECL की ‘डिजीकोल’ पहल बनी पारदर्शी सुशासन का मॉडल

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बिलासपुर/कोरबा। केन्द्रीय सतर्कता आयोग द्वारा 11 फरवरी 2026 को नई दिल्ली स्थित स्कोप कन्वेंशन सेंटर में “डिजिटल इनिशिएटिव्स फॉर इंक्रीजिंग ट्रांसपेरेंसी इन गवर्नेंस” विषय पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पहल ‘डिजीकोल (DigiCOAL)’ को सार्वजनिक उपक्रमों में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही बढ़ाने वाली एक आदर्श डिजिटल पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया।
कार्यशाला में SECL की ओर से मुख्य सतर्कता अधिकारी (CVO) हिमांशु जैन ने विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि डिजीकोल पहल के माध्यम से खनन कार्यों के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में डिजिटल निगरानी और डेटा आधारित प्रबंधन प्रणाली को सुदृढ़ रूप से लागू किया गया है, जिससे संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो रही है।


डिजिटल निगरानी से मजबूत हुआ संचालन तंत्र
प्रस्तुति के दौरान विभिन्न तकनीकी पहलों की जानकारी दी गई—
• HEMM फ्लीट मॉनिटरिंग सिस्टम के माध्यम से शॉवेल, डंपर एवं डोजर जैसे भारी खनन उपकरणों की रियल-टाइम ट्रैकिंग की जा रही है। सेंसर आधारित प्रणाली से उपकरणों की लोकेशन, ऑपरेटिंग ऑवर्स और ईंधन खपत की निगरानी होती है। ईंधन में असामान्य गिरावट, अनावश्यक निष्क्रिय समय (Idle Time) तथा निर्धारित मार्ग से विचलन की स्वतः पहचान संभव हो पाई है।
• वीडियो एनालिटिक्स एवं कनेक्टेड वर्कर सिस्टम के जरिए सुरक्षा प्रबंधन, परिचालन नियंत्रण तथा आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाया गया है।
• ड्रोन आधारित सर्वेक्षण से अतिक्रमण की पहचान, हॉल रोड एवं ढलानों की निगरानी तथा मानसून के दौरान जल निकासी व्यवस्था के आकलन में सटीकता आई है।
• डेटा-ड्रिवन माइन प्लानिंग एवं अनुकूलित ड्रिलिंग-ब्लास्टिंग प्रणाली ने उत्पादन प्रक्रिया को अधिक वैज्ञानिक एवं सटीक बनाया है।
• इसके साथ ही डिजिटल भूमि अभिलेख, ऑनलाइन प्रशिक्षण प्लेटफॉर्म, स्पेयर प्रबंधन प्रणाली एवं डिजिटल वॉर रूम जैसी पहलों ने एक एकीकृत एवं छेड़छाड़-रोधी (टैम्पर-प्रूफ) डिजिटल इकोसिस्टम तैयार किया है।
मुख्यालय में हुआ लाइव वेबकास्ट
इस अवसर पर SECL मुख्यालय, बिलासपुर में कार्यशाला के वेबकास्ट का सामूहिक अवलोकन किया गया। CMD SECL हरीश दुहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रस्तुति में सहभागिता की। उनके साथ निदेशक (तकनीकी-संचालन) एन. फ्रैंकलिन जयकुमार, निदेशक (कार्मिक) बिरांची दास, निदेशक (वित्त) डी. सुनील कुमार, निदेशक (तकनीकी-परियोजना एवं योजना) रमेश चंद्र मोहापात्रा सहित मुख्यालय एवं सभी क्षेत्रों के महाप्रबंधक, विभागाध्यक्ष, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान
राष्ट्रीय मंच पर डिजीकोल की प्रस्तुति SECL की डिजिटल परिवर्तन यात्रा को मिली महत्वपूर्ण मान्यता है। यह उपलब्धि न केवल कोयला क्षेत्र में SECL की अग्रणी भूमिका को रेखांकित करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि तकनीक के माध्यम से पारदर्शिता को सुदृढ़ करते हुए राष्ट्र की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति किस प्रकार जिम्मेदारी और दक्षता के साथ की जा सकती है।

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