देश
75वें जन्मदिन पर हीराबा के नरेंद्र की कहानी:लालचौक में तिरंगा फहराकर पहला फोन मां को क्यों किया, हमेशा CM/PM रहते चुनाव लड़े मोदी
नई दिल्ली,एजेंसी। गुजरात के वडनगर का काला वासुदेव चौक। खपरैल की छत वाला छोटा सा घर। ये घर था चाय की रेहड़ी चलाने वाले दामोदरदास और हीराबा का। 17 सितंबर 1950 यानी आज ही के दिन 75 साल पहले यहां नरेंद्र मोदी का जन्म हुआ।
दामोदरदास, हीराबा, उनके पांच बेटे और एक बेटी। एक कमरे में कुल आठ लोगों का परिवार रहता था। तेज बारिश में छत जगह-जगह टपकने लगती। हीराबा रिस रहे पानी के नीचे बर्तन लगाती जातीं। नरेंद्र अपनी मां को परेशान देख उनकी मदद को दौड़ पड़ते।
दामोदरदास की चाय की दुकान रेलवे स्टेशन के बाहर थी। नरेंद्र अक्सर वहां भी पिता का हाथ बंटाते। इतनी सी आमदनी में परिवार का गुजारा संभव नहीं था, इसलिए हीराबा आस-पास के घरों में बर्तन धोतीं, मजदूरी करतीं। इसे याद कर नरेंद्र मोदी अक्सर भावुक हो जाते हैं।
नरेंद्र मोदी की शुरुआती पढ़ाई वडनगर की कुमारशाला-1 में हुई। 8 साल की उम्र में वे RSS की शाखाओं में जाने लगे।
साल 1958, दीवाली का दिन था। ‘वकील साहब’ के नाम से मशहूर RSS प्रचारक लक्ष्मणराव ईनामदार वडनगर पहुंचे। वहां बाल स्वयंसेवकों को संबोधित किया और शपथ दिलाई। इनमें 8 साल के नरेंद्र मोदी भी थे।
यहीं से नरेंद्र के मन में हिंदू राष्ट्रवाद की विचारधारा के बीज पड़े। उम्र बढ़ने के साथ नरेंद्र का मन घर के दायरे से बाहर जाने लगा। उन्होंने अपना उपनाम ‘अनिकेत’ रख लिया यानी जिसका कोई घर नहीं।
उनके समाज की परंपरा में शादी तीन चरण में होती थी। 3-4 साल की उम्र में सगाई, 13 की उम्र में शादी और 18-20 की उम्र में गौना। 13 साल के नरेंद्र की शादी भी ब्राह्मणवाड़ा गांव की जशोदाबेन के साथ कर दी गई। गौना होना बाकी था।
एक दिन नरेंद्र ने कहा, ‘मां! मेरा मन करता है कि बाहर जाकर देखूं, दुनिया क्या है। मुझे स्वामी विवेकानंद जी की राह पर चलना है।’
पास बैठे पिता बेटे के मन में उभर रहे वैराग्य से परेशान हो गए, लेकिन हीराबा बेटे का मन पहले से भांप गई थीं। उन्होंने पिता को जन्मपत्री देकर कहा- ज्योतिषी को इसकी जन्मपत्री दिखाओ!’
ज्योतिषी ने बताया- ‘इसकी तो राह ही अलग है, ईश्वर ने जहां तय किया है, ये वहीं जाएगा!’
इस तरह पिता भी माने।
घर छोड़कर नरेंद्र पहले रामकृष्ण मिशन के बेलूर मठ गए। इसके बाद दिल्ली, राजस्थान, पूर्वोत्तर और फिर हिमालय। सबसे ज्यादा समय उन्होंने गरुड़चट्टी में बिताया। करीब 2 साल बाद मोदी वापस वडनगर लौटे, लेकिन महज 17 दिनों में फिर घर छोड़ दिया।
संघ प्रचारक वकील साहब ने अहमदाबाद के ‘डॉ. हेडगेवार भवन’ में मोदी के रहने का इंतजाम कर दिया। यहां वे संघ के स्वयंसेवक, फिर शाखाओं के प्रभारी और फिर प्रचारक बन गए। 15 वर्षों तक मोदी ने देश भर में संगठन के विस्तार के लिए जी-तोड़ काम किया।
1985 में सक्रिय राजनीति में आए और जल्द ही BJP की राष्ट्रीय चुनाव समिति के सदस्य बन गए। उनके माइक्रो-मैनेजमेंट की बदौलत 1989 लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने गुजरात की 14 में से 11 सीटें जीतीं।
साल 1990। लालकृष्ण आडवाणी ने राम रथयात्रा निकाली। नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ से मुंबई तक इसका बेहद सफल समन्वय किया और राष्ट्रीय नेताओं के करीब आए।
जब 2 साल बाद मुरली मनोहर जोशी ने लाल चौक पर तिरंगा फहराने के लिए एकता यात्रा निकाली तो उसमें नरेंद्र मोदी दूसरे नंबर के नेता थे। 24 जनवरी 1992 को एकता यात्रा के दौरान जम्मू में दिया उनका भाषण खूब चर्चित हुआ।
पंजाब के फगवाड़ा में एकता यात्रा पर अटैक हुआ। गोलियां चलीं। कई लोग मारे गए। नरेंद्र मोदी जानते थे, मां ये सुनकर परेशान होगी। लाल चौक पर तिरंगा फहराने के बाद जम्मू लौटे नरेंद्र मोदी ने पहला फोन अपनी मां को किया।
अहमदाबाद लौटने पर मोदी के सम्मान में एक कार्यक्रम रखा गया। यहां पहली बार मां हीराबा सार्वजनिक मंच पर मोदी की सराहना के लिए सामने आईं।
गुजरात बीजेपी तब दो खेमों में बंटी थी- शंकर सिंह वाघेला और केशुभाई पटेल। केशुभाई को मोदी अपना राजनीतिक गुरु मानते थे। 1995 में दोनों खेमों में खींचतान मची। पार्टी आलाकमान ने मोदी को दिल्ली बुला लिया और राष्ट्रीय सचिव बनाया। अगले कुछ साल तक नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में रहकर काम किया।
1 अक्टूबर 2001, नरेंद्र मोदी एक टीवी पत्रकार के दाह संस्कार में गए थे। तभी तब के पीएम अटल बिहारी का बुलावा आ गया।
मोदी पीएम आवास पहुंचे, तो अटल ने कहा, ‘दिल्ली में पंजाबी खाना खाकर तुम काफी मोटे हो गए हो। फिर से गुजरात लौट जाओ।’
एक इंटरव्यू में मोदी बताते हैं कि मुझे तब तक ये अंदाजा नहीं था कि अटल जी मुझे गुजरात का मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं।
हालांकि मोदी आदेश टाल नहीं सके और अगली सुबह दिल्ली से अहमदाबाद की फ्लाइट पकड़ी। एयरपोर्ट से सीधे मां के पास गए। मोदी ने अपने ब्लॉग में लिखा… ‘खुशी से भरी हुई मां का पहला सवाल यही था कि क्या तुम अब यहीं रहा करोगे? मां मेरा उत्तर जानती थीं।’
7 अक्टूबर 2001। नरेंद्र मोदी ने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। हीराबा दूसरी बार सार्वजनिक मंच पर बेटे को आशीर्वाद देने पहुंचीं।
मोदी को मुख्यमंत्री बने सालभर भी नहीं हुआ था कि 2002 में गुजरात में दंगे हो गए। सरकार पर दंगे प्रायोजित करने के आरोप लगे। तब मोदी ने एक इंटरव्यू में कहा- ‘क्रिया और प्रतिक्रिया की चेन चल रही है। हम चाहते हैं कि न क्रिया हो न प्रतिक्रिया।’
गुजरात दंगों पर नरेंद्र मोदी को पहले मजिस्टीरियल कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट से क्लीन चिट मिल गई। इन आरोपों पर वो कभी डिफेंसिव भी नजर नहीं आए।
मोदी की ‘हिंदू हृदय सम्राट’ की छवि के साथ जुड़ा आर्थिक तरक्की का ‘गुजरात मॉडल’ और बीजेपी ने 2014 लोकसभा चुनाव से पहले मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बना दिया।
मोदी युग से पहले 1999 में बीजेपी अधिकतम 182 सीटें जीत सकी थी, लेकिन 2014 चुनाव में पहली बार 282 सीटों के साथ पूर्ण बहुमत हासिल किया। नरेंद्र मोदी बने भारत के 16वें प्रधानमंत्री।
पहली बार प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी संसद पहुंचे, तो सीढ़ियों को माथे से लगाया।
मोदी के पहली बार प्रधानमंत्री बनने के बाद हीराबा प्रधानमंत्री आवास आईं। वो तस्वीरें मोदी और हीराबा के लिए बेशक महत्वपूर्ण थीं, लेकिन भारतीय लोकतंत्र के लिए उससे भी ज्यादा। दूसरे के घरों में बर्तन धोने वाली एक महिला का बेटा दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का प्रधानमंत्री बन गया था।

मोदी युग में 2018 तक बीजेपी 21 राज्यों की सत्ता में आ गई।
इलेक्टोरल पॉलिटिक्स में आने के बाद से नरेंद्र मोदी ने अब तक कुल 7 चुनाव लड़े हैं। सभी मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री रहते हुए लड़े और सभी चुनावों में एकतरफा जीत हासिल की है। 2019 और 2024 चुनाव जीतकर मोदी लगातार सबसे ज्यादा समय तक पद पर रहने वाले देश के दूसरे प्रधानमंत्री बन गए हैं। उनसे आगे अब सिर्फ नेहरू हैं।
30 दिसंबर 2022 को हीराबा का 100 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। 75 वर्ष के हो चले नरेंद्र मोदी का मां के बगैर आज तीसरा जन्मदिन है। उनके सक्रिय राजनीतिक जीवन का सिलसिला अनवरत जारी है।

देश
‘महिला आरक्षण बिल का समर्थन न करना विपक्ष की बड़ी राजनीतिक गलती है’: कैबिनेट बैठक में पीएम मोदी बोले
नई दिल्ली,एजेंसी। संसद में महिला आरक्षण बिल पर सत्ता पक्ष और विपक्ष में टकराव जारी है। प्रियंका गांधी ने महिला आरक्षण बिल को परिसीमन का धोखा बताया है। पीएम मोदी ने कैबिनेट बैठक में विपक्ष पर कड़ा प्रहार किया है। सूत्रों के मुताबिक, पीएम ने कहा है कि महिला आरक्षण बिल का समर्थन का इनकार विपक्ष की एक बड़ी राजनीतिक गलती है और इसके लिए उन्हें भविष्य में गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे।


देश
महिला आरक्षण से जुड़ा बिल 54 वोट से गिरा:पास होने के लिए चाहिए थे 352, मिले 298; मोदी सरकार बिल पास कराने में पहली बार नाकाम
नई दिल्ली,एजेंसी। महिला आरक्षण बिल से जुड़ा संविधान (131वां) संशोधन बिल सरकार लोकसभा में पास नहीं करा पाई। इसमें संसद की 543 सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान था। 21 घंटे की चर्चा के बाद वोटिंग हुई। लोकसभा में मौजूद 528 सांसदों ने वोट डाले। पक्ष में 298, विपक्ष में 230 वोट पड़े। बिल पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी। 528 का दो तिहाई 352 होता है। इस तरह ये बिल 54 वोट से गिर गया। लोकसभा में कुल 543 सीटें हैं, लेकिन 3 सीटें खाली होने की वजह से मौजूदा सांसद 540 है।

सरकार ने दो बिल वोटिंग के लिए पेश ही नहीं किए
पहला- परिसीमन संशोधन संविधान बिल 2026
दूसरा- केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल 2026
सरकार ने इन पर वोटिंग से इनकार किया। कहा कि ये बिल एक-दूसरे से लिंक है इसलिए वोटिंग की जरूरत नहीं है।
12 साल के शासन में यह पहला मौका जब मोदी सरकार सदन में कोई बिल पास नहीं करा पाई। इससे पहले अमित शाह ने एक घंटा स्पीच दी थी। कहा कि अगर ये बिल पास नहीं होते हैं तो जिम्मेदारी विपक्ष की होगी। देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनकी राह का रोड़ा कौन है।
बिल गिरने के बाद विपक्ष ने कहा- हमने हरा दिया
- राहुल गांधी ने कहा- हमने संविधान पर हुए हमले को हरा दिया है। हमने साफ कहा है कि यह महिला आरक्षण बिल नहीं है, बल्कि यह भारत की राजनीतिक संरचना को बदलने का एक तरीका है।
- प्रियंका ने कहा– यह हमारे लोकतंत्र और देश की एकता के लिए एक बड़ी जीत है। जैसा कि मैंने अंदर कहा, यह संविधान पर हमला था, और हमने इसे विफल कर दिया है, जो कि एक अच्छी बात है।
- शशि थरूर ने कहा– हमने हमेशा कहा है कि हम महिला आरक्षण का पूर्ण समर्थन करते हैं और आज भी इसके पक्ष में मतदान करने को तैयार हैं। हालांकि, इसे परिसीमन से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
- एमके स्टालिन ने कहा- 23 अप्रैल को हम दिल्ली का अहंकार और उस अहंकार का समर्थन करने वाले गुलामों को हराएंगे।
संसद के बाहर भाजपा महिला सांसदों के प्रदर्शन की तस्वीरें…

बिल गिरने के बाद एनडीए की महिला सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया।

महिला सांसदों ने ‘महिला का अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान’ के नारे लगाए।
सरकार को पता था बिल पास नहीं होगा, मोदी ने 3, शाह ने एक अपील की
सरकार जानती थी कि उसके पक्ष में लोकसभा में नंबर नहीं है, इसीलिए सरकार बार-बार सभी सांसदों से समर्थन की मांग कर रही थी। पीएम नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू समेत बीजेपी और NDA नेताओं ने विपक्ष से बिल को सपोर्ट करने की अपील की।
पीएम की 3 अपील
- 13 अप्रैल एक कार्यक्रम में: मैं आपसे आग्रह करता हूं कि अपने स्थानीय सांसदों को पत्र लिखें और इस ऐतिहासिक संसद सत्र में हिस्सा लेते समय उनका हौसला बढ़ाएं।
- 16 अप्रैल लोकसभा में: ‘हमें क्रेडिट नहीं चाहिए, जैसे ही पारित हो जाए तो मैं एड देकर सबको धन्यवाद देने को तैयार हूं। सामने से क्रेडिट का ब्लैंक चेक आपको दे रहा हूं।’
- 17 अप्रैल सोशल मीडिया में: सभी सांसद वोटिंग से पहले अपनी अंतर्रात्मा की आवाज सुनें।

शाह ने कहा- महिलाएं माफ नहीं करेंगी
17 अप्रैल लोकसभा में अमित शाह ने कहा कि देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनके रास्ते का रोड़ा कौन है। यहां पर तो शोर-शराबा करके बच जाओगे लेकिन माताओं-बहनों का आक्रोश बाहर पता चलेगा। चुनाव में वोट मांगने जाएंगे तो मातृशक्ति हिसाब मांगेगी।

देश
‘परिसीमन एक ‘राजनीतिक नोटबंदी’ साबित होगा’- शशि थरुर का केंद्र सरकार पर तीखा हमला
नई दिल्ली,एजेंसी। लोकसभा में शुक्रवार को ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ और ‘परिसीमन’ (Delimitation) पर चल रही बहस के दौरान कांग्रेस नेता शशि थरूर ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया की तुलना ‘नोटबंदी’ से करते हुए इसे भारतीय लोकतंत्र की आत्मा के लिए खतरा बताया।

थरुर ने अपने भाषण में कहा
शशि थरूर ने कहा कि दशकों से महिला आरक्षण का वादा किया गया और इसे टाला गया। आज जब इस पर राजनीतिक सहमति बनी है, तब सरकार ने इसे परिसीमन जैसी जटिल प्रक्रिया से बांधकर महिलाओं की आकांक्षाओं को ‘बंधक’ बना लिया है। थरूर ने सरकार की जल्दबाजी पर सवाल उठाते हुए कहा, “आपने परिसीमन का प्रस्ताव वैसी ही जल्दबाजी में पेश किया है जैसी नोटबंदी के समय दिखाई थी। हम सब जानते हैं कि नोटबंदी ने देश का क्या हाल किया था। परिसीमन भी एक ‘राजनीतिक नोटबंदी’ साबित होगा, इसे मत कीजिए।”


थरूर ने उत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों के बीच शक्ति संतुलन बिगड़ने की आशंका जताई। उन्होंने तर्क दिया कि केरल और तमिलनाडु जैसे दक्षिणी राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण और मानव विकास में बेहतरीन काम किया है। यदि परिसीमन जनसंख्या के आधार पर हुआ, तो जनसंख्या नियंत्रण में विफल रहने वाले राज्यों को अधिक राजनीतिक ताकत मिलेगी और अच्छा काम करने वाले राज्य हाशिए पर चले जाएंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आर्थिक रूप से समृद्ध और विकासशील राज्यों की आवाज को दबाया गया, तो इससे देश के संघीय ढांचे पर बुरा असर पड़ेगा। उनके अनुसार, यह “बहुसंख्यकवाद की तानाशाही” (Tyranny of the democratic majority) पैदा करने जैसा होगा।

-
कोरबा2 years agoकटघोरा विधायक पुरूषोत्तम कंवर के गुर्गों द्वारा दिव्य आकाश कर्मियों पर हमला की कोशिश
-
Uncategorized7 months agoसुमेधा पुल पर लुट कांड सहित तीन अलग अलग जगह पर लुटकांड करने वाले आरोपी पुलिस के गिरफ्त में,,,दो आरोपी नाबालिक,,,देखे पूरी खबर
-
कोरबा2 years agoग्राम पंचायत पोड़ी के पूर्व सरपंच सचिव पर गबन के आधार पर अधिरोपित राशि 3341972/- रुपये शीघ्र वसूल हो- कय्युम बेग
-
कोरबा2 years agoकुसमुंडा खदान में डंपर पलट कर लगी आग, सरकारी गाड़ी में कोयला और डीजल चोर सवार थे, जलने से दोनों गंभीर
-
कोरबा2 years agoश्रीमती स्वाति दुबे का निधन
-
छत्तीसगढ़2 years agoबिलासपुर में अपोलो अस्पताल के 4 सीनियर डॉक्टर अरेस्ट
-
कोरबा2 years agoकटघोरा जनपद की 25 करोड़ की जमीन उनके करीबी कांग्रेसियों की 25 लाख में कैसे हो गई?
-
कोरबा2 years agoदर्री में 1320 मेगावाट विद्युत परियोजना के लिए नई सरकार गठन के बाद होगी पर्यावरणीय जनसुनवाई
