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छत्तीसगढ़

SRC NGO स्कैम…CBI ने समाज-कल्याण विभाग में दी दबिश:अफसरों ने डिप्टी डायरेक्टर से मांगे दस्तावेज, 3 बंडल डॉक्यूमेंट की फोटो-कॉपी ले गए

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रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े SRC NGO स्कैम की जांच सीबीआई ने शुरू कर दी है। सोमवार की दोपहर सीबीआई के अफसर दो गाड़ियों में माना स्थित समाज कल्याण विभाग कार्यालय पहुंचे। अफसरों ने डिप्टी डायरेक्टर से मुलाकात की और स्टेट रिसोर्स सेंटर (SRC) एनजीओ से संबंधित दस्तावेज मांगे।

सीबीआई सूत्रों के अनुसार, एनजीओ से संबंधित 3 बंडल के दस्तावेजों की फोटो कॉपी ली गई है। इन दस्तावेजों की जांच की जाएगी। उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस घोटाले में एक मंत्री और 7 IAS समेत कुल 14 लोगों का नाम आया है। सीबीआई के अधिकारियों का कहना है, कि दस्तावेजों की विवेचना की जाएगी और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

सीबीआई के अफसर इन गाड़ियों में बैठकर समाज कल्याण विभाग के ऑफिस पहुंचे थे।

सीबीआई के अफसर इन गाड़ियों में बैठकर समाज कल्याण विभाग के ऑफिस पहुंचे थे।

NGO क्यों बनाया गया और कौन-कौन इसमें कौन थे फाउंडर ?

दरअसल, 2004 में समाज कल्याण मंत्री रहीं रेणुका सिंह, रिटायर्ड IAS विवेक ढांढ, MK राउत, डॉ. आलोक शुक्ला, सुनील कुजूर, BL अग्रवाल, सतीश पांडे और पीपी श्रोती ने मिलकर 2 NGO बनाए। NGO के करप्शन में राज्य प्रशासनिक सेवा के 6 अधिकारियों को भी शामिल किया।

NGO को दिव्यांगों की भलाई के लिए बनाया था, जिसके तहत सुनने की मशीनें, व्हील चेयर, ट्राई साइकिल, कैलिपर और कृत्रिम अंग जैसी चीजें वितरण करना, अवेयर करना, उनकी देख-रेख करना था, लेकिन NGO को सिर्फ कागजों पर कर दिया। जमीन पर NGO गायब था।

बिना मान्यता के चल रहा था NGO

मंत्री और IAS ने ऐसा सिस्टम बनाया था कि NGO को समाज कल्याण विभाग से मान्यता भी नहीं मिली, लेकिन केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के तहत NGO के खाते में करोड़ों रुपए ट्रांसफर हुए। ये सिलसिला करीब 14 साल तक चला।

नियम कहता कोई भी सरकारी कर्मचारी NGO में मेंबर नहीं हो सकता है, वह अवैध है, लेकिन मंत्री के साथ अधिकारियों ने मिलकर ये संस्था बना ली। NGO बनने के 45 दिन में चुनाव होना चाहिए था, लेकिन 17 साल तक कोई चुनाव नहीं हुआ। प्रबंधकारिणी की कोई बैठक नहीं हुई। इसका कोई ऑडिट नहीं किया गया।

दैनिक भास्कर की टीम उस शख्स के पास पहुंची थी, जिसने सबसे पहले इस घोटाले का सच उजागर किया।

दैनिक भास्कर की टीम उस शख्स के पास पहुंची थी, जिसने सबसे पहले इस घोटाले का सच उजागर किया।

कैसे खुला NGO घोटाले का राज

एनजीओ के घोटाले की जानकारी 2016 में हुई थी। संविदा कर्मचारी कुंदन ठाकुर 2008 से मठपुरैना स्वावलंबन केंद्र (PRRC) में संविदा पर नौकरी कर रहे थे। इसी दौरान पता चला कि साथ में काम करने वाले कुछ कर्मचारी रेगुलर हो रहे हैं, तो वह भी अपनी नौकरी रेगुलर कराने के लिए समाज कल्याण विभाग में आवेदन देने पहुंचे।

इस दौरान कुंदन को पता चला कि वह पहले से सहायक ग्रेड-2 के पद पर पदस्थ हैं। उनके नाम पर दूसरी जगह से 2012 से वेतन निकल रहा है। ये सुनकर कुंदन सकते में आ गए। इसके बाद कुंदन ने RTI लगाई और पूरी जानकारी जुटाई।

RTI से पता चला कि उनके ही जैसे रायपुर में 14 और बिलासपुर में 16 कर्मचारी हैं, जिन्हें 2 जगहों पर पदस्थ दिखाया गया। हर महीने उनके नाम पर सैलरी निकाली जा रही है। कुंदन ने NGO स्कैम के शिकार दूसरे कर्मचारियों से संपर्क किया, लेकिन किसी ने साथ नहीं दिया। मामला कोर्ट पहुंचने पर कुंदन को नौकरी से निकाल दिया गया।

केन्द्र की योजनाओं का पैसा भी एक मुश्त निकालकर NGO को सौंपने का आदेश

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योजना, नियुक्ति, सैलरी पर कैसे हुआ स्कैम

कुंदन जब फाइलों के पन्ने पलटते हैं तो सबसे बड़ा राज सामने आता है। नामों की लिस्ट लंबी है, लेकिन कई नाम ऐसे हैं जो असल में कहीं काम ही नहीं कर रहे थे। दस्तावेज बताते हैं कि एक ही आदमी को 2 से 3 जगह पदस्थ दिखाया गया। यानी कुर्सी एक थी, लेकिन सैलरी 2 जगह से निकाली जा रही थी।

दस्तावेजों के मुताबिक NGO ने कागजों पर नई-नई नियुक्तियां की, लेकिन जमीन पर इन कर्मचारियों का कोई अस्तित्व ही नहीं था। नकली नियुक्तियां हुईं और फिर उनकी आड़ में फर्जी सैलरी निकाली गई। करीब 30 कर्मचारियों का सालाना वेतन 34 लाख रुपए दिखाया गया।

RTI से मिली जानकारी के मुताबिक केवल 5 साल में ये रकम बढ़कर 1 करोड़ 70 लाख रुपए से ज्यादा हो गई। 2004 से 2018 तक इस NGO के खाते में समाज कल्याण विभाग और उसकी शाखाओं से सीधा पैसा भेजा जाता रहा। योजनाओं का पैसा भी सीधे NGO के खाते में ट्रांसफर होता रहा।

हाईकोर्ट के आदेश पर जांच में क्या-क्या मिला

हाईकोर्ट के निर्देश के बाद तत्कालीन मुख्य सचिव अजय सिंह ने डॉ. कमलप्रीत सिंह को जांच सौंपी। यह जांच रिपोर्ट अब कोर्ट में शासन की ओर से पेश की गई है। भास्कर के पास इसकी कॉपी मौजूद है।

जांच में क्या मिला- SRC के रजिस्ट्रेशन के बाद से एक भी ऑडिट नहीं हुआ। फर्जी नियुक्तियां की गईं और कर्मचारियों को नकद में वेतन दिया गया।

सरकार का कोर्ट में जवाब- सेंटर माना भौतिक रूप से संचालित है। यहां 2012-2018 के बीच 4000 मरीजों को कृत्रिम अंग लगाए गए। 2014-15 में ऑडिट कराया गया था। भुगतानों में अस्पष्टता को स्वीकारा गया।

जांच में क्या मिला- याचिकाकर्ता कुंदन ठाकुर समेत अन्य कर्मचारियों का वेतन दूसरी शाखाओं से भी निकाला गया। खुद कर्मचारियों को इसकी जानकारी नहीं थी।

सरकार का कोर्ट में जवाब- सेंटर कुंदन ठाकुर की नियुक्ति का मूल विभाग स्वावलंबन केंद्र, मठपुरैना है। मार्च 2015 के सरकारी दस्तावेजों में दर्ज है कि उन्हें दो जगहों से मानदेय मिल रहा था। शेष भुगतान चेक के जरिए किया गया।

जांच में क्या मिला- NGO SRC में फर्जी नियुक्तियां की गईं।

सरकार का कोर्ट में जवाब- कार्यालय अवधि में 21 कर्मचारी नियमित सेवाएं दे रहे थे। 2017 से 11 कर्मचारियों को आउटसोर्सिंग के जरिए निराश्रित निधि से भुगतान हुआ। बाकी 11 कर्मचारियों का भुगतान शासन से PRRC के जरिए किया जाता रहा। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद CBI ने पुराने FIR पर दोबारा जांच शुरू कर दी है। इस जांच में जब बाकी जिलों का हिसाब सामने आएगा, तो कई और बड़े नाम एक्सपोज हो सकते हैं।

सीबीआई के अफसर इन गाड़ियों से पहुंचे थे।

सीबीआई के अफसर इन गाड़ियों से पहुंचे थे।

CBI की नजर अब इन पर

CBI की जांच अभी शुरुआती स्टेज में है। 15 दिन के भीतर सभी दस्तावेज जब्त करने का काम जारी है। अब जांच की आंच NGO के फाउंडर, RAS अफसर, जिला स्तर के अधिकारी, ऑडिट रोकने वाले अधिकारियों पर पड़ सकती है।

  • पूर्व मंत्री और NGO के फाउंडर IAS अफसर, जिनके नाम पंजीयन में दर्ज हैं।
  • वित्त और समाज कल्याण विभाग के RAS अफसर, जिनके हस्ताक्षर फंड ट्रांसफर में मिले हैं।
  • जिला स्तर के अधिकारी, जिनके जरिए केंद्र की स्कीम्स का पैसा NGO तक पहुंचा।
  • SRC में दस्तावेजों में नियुक्त कर्मचारी, जिनके नाम पर डबल सैलरी निकाली गई।
  • ऑडिट रोकने वाले अधिकारी, जिन्होंने 14 साल तक चुनाव और ऑडिट नहीं होने दिया।
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कोरबा

रामनवमी की शुभकामनाएं दी पीएमजेएफ लायन राजकुमार अग्रवाल ने

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कोरबा। कोरबा के लब्ध प्रतिष्ठित समाज सेवी, लायंस क्लब कोरबा गुरूकुल के संचालक, नितेश कुमार मेमोरियल लायंस पब्लिक स्कूल खरहरकुड़ा के डायरेक्टर, द इंटरनेशनल एसोसिएशन आफ लायंस क्लब्स एमडि 3233 के पूर्व वाईस चेयरमेन एवं पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पीएमजेएफ लायन डॉ. राजकुमार अग्रवाल ने कोरबा सहित पूरे प्रदेशवासियों को रामनवमी की शुभकामनाएं प्रेषित की है।

लायन अग्रवाल ने रामनवमी पर शुभता का संदेश देते हुए कहा है कि रामनवमी वह एतिहासिक दिन है, जब समाज में आदर्श स्थापना एवं जनता के प्रति राजा के कर्त्तव्यों का संदेश देने के लिए भगवान बिष्णु ने सातवें अवतार के रूप में भगवान राम के रूप में इस धरा पर अवतरित हुए और किस तरह भगवान राम ने अपने माता-पिता के वचनों को पूरा करने के लिए सत्ता त्याग कर 14 वर्ष वनवास काटा। राम त्याग, परोपकार और मानव कल्याण के प्रतीक थे। भगवान राम का सम्पूर्ण जीवन मानव कल्याण के लिए था और वे भारत की संस्कृति थे। भगवान राम का जन्म ही समस्त चर-अचर और विश्व कल्याण के लिए था। रामनवमी उस महापर्व का नाम है, जब हम भगवान राम के आदर्शों का कुछ अंश अपने जीवन में उतारें और क्षमता एवं सामर्थ्य के अनुसार समाज निर्माण में अपना योगदान दें। इसी में ही रामनवमी की सार्थकता है।

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छत्तीसगढ़

LIC को आयकर विभाग का बड़ा झटका, ₹7,000 करोड़ से ज्यादा की डिमांड

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मुंबई, एजेंसी। भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) को आयकर विभाग की ओर से वित्त वर्ष 2021-22 के लिए बड़ा डिमांड ऑर्डर मिला है। इसमें टैक्स और ब्याज शामिल है। इस आदेश के तहत कंपनी से रू.6,146.71 करोड़ आयकर और रू.953.25 करोड़ ब्याज सहित कुल रू.7,099 करोड़ से अधिक की मांग की गई है। 

किन कारणों से बनी इतनी बड़ी डिमांड?

कंपनी के अनुसार, आयकर विभाग की असेसमेंट यूनिट ने आकलन के दौरान कुछ मदों को आय में शामिल किया और कई दावों को अस्वीकार कर दिया, जिससे टैक्स देनदारी बढ़ गई। इसमें अंतरिम बोनस को आय में जोड़ना, ‘जीवन सुरक्षा फंड’ से हुए नुकसान को शामिल करना, निगेटिव रिजर्व को आय मानना, धारा 80M के तहत क्लेम किए गए डिडक्शन को खारिज करना और TDS देरी से जमा करने पर ब्याज को अस्वीकार करना जैसे कारण शामिल हैं।

आदेश को चुनौती दे सकती है LIC

LIC ने संकेत दिया है कि वह इस डिमांड ऑर्डर को आयकर आयुक्त (अपील) के समक्ष चुनौती दे सकती है। कंपनी का कहना है कि इस आदेश का असर केवल बताई गई टैक्स और ब्याज राशि तक सीमित है और इसके नियमित कारोबार पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा। 

शेयर पर रहेगी नजर

बाजार की नजर अब कंपनी के शेयर पर बनी हुई है, जो 25 मार्च को बीएसई पर रू.780.60 पर बंद हुआ था, जबकि 26 मार्च को रामनवमी के कारण बाजार बंद रहा।

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कोरबा

दिव्यांग महोत्सव: प्रतिभा, सम्मान और समावेशन का उत्सव 9 एवं 10 मई को बिलासपुर में

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कोरबा/बिलासपुर। बिलासपुर में आगामी 9 और 10 मई को दिव्यांग महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। यह महोत्सव समाज में समावेशन और संवेदनशीलता का एक सशक्त उदाहरण बनने जा रहा है। इस विशेष आयोजन का उद्देश्य दिव्यांगजनों की प्रतिभा, क्षमता और उनके बहुमूल्य योगदान को पहचानना तथा उन्हें सम्मानित करना है।

दिव्यांग विमर्श के संयोजक डॉ. गजेंद्र तिवारी ने बताया कि यह कार्यक्रम दिव्यांग व्यक्तियों के लिए एक ऐसा मंच प्रदान करेगा, जहां वे अपनी विविध प्रतिभाओं का प्रदर्शन कर सकेंगे। इसमें संगीत, नृत्य, खेल, कला सहित कई विधाओं में प्रतिभागी हिस्सा लेंगे और अपनी क्षमताओं का परिचय देंगे। यह महोत्सव न केवल दिव्यांगजनों के आत्मविश्वास को बढ़ाने का कार्य करेगा, बल्कि समाज के अन्य वर्गों को भी उनके प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करेगा। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य यह है कि दिव्यांगजनों को समाज में एक गरिमामय स्थान मिले और उनकी क्षमताओं को सही पहचान मिल सके। समाज के सभी वर्गों से इस महोत्सव में भाग लेने और दिव्यांगजनों का उत्साहवर्धन करने की अपील की है। उनका मानना है कि ऐसे आयोजनों से समाज में समावेशी सोच को बढ़ावा मिलता है और हर व्यक्ति को आगे बढ़ने का समान अवसर मिलता है।
राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष डॉ विनय कुमार पाठक ने कहा कि परिषद् का लक्ष्य दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा में लाना है। दिव्यांग महोत्सव के माध्यम से हम उनकी प्रतिभा, आत्मविश्वास और क्षमता को पूरे देश के सामने लाएंगे। यह आयोजन एक नई सोच और नई ऊर्जा का प्रतीक बनेगा।
राष्ट्रीय महामंत्री मदनमोहन अग्रवाल ने अपने वक्तव्य में कहा कि सेवा कार्यों को अब और व्यापक स्तर पर ले जाने का समय आ गया है। परिषद् हर उस दिव्यांग तक पहुंचेगी, जिसे सहयोग और मंच की आवश्यकता है।
दिव्यांग विमर्श के संयोजक डॉ गजेंद्र तिवारी ने बताया कि दिव्यांग महोत्सव एक ऐसा आयोजन है, जो दिव्यांग व्यक्तियों की प्रतिभा, क्षमता और योगदान को पहचानता है और उनका सम्मान करता है। इस महोत्सव में दिव्यांगों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है, जैसे कि संगीत- नृत्य, खेल, कला और अलग-अलग विधाओं में भाग ले सकते हैं।
यह महोत्सव दिव्यांगों को अपने आप को व्यक्त करने और अपनी प्रतिभा को दिखाने का एक मंच प्रदान करता है। यह आयोजन न केवल दिव्यांगों के लिए है, बल्कि यह समाज के सभी वर्गों के लोगों को एक साथ लाने और दिव्यांगों की प्रतिभा को पहचानने का एक अवसर भी है। यह महोत्सव निश्चित रूप से प्रतिभा, सम्मान और समानता का एक प्रेरणादायक संगम साबित होगा।

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