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शराब घोटाला…कारोबारी अनवर ढेबर को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत:मां का स्वास्थ्य खराब, 4 दिन परिवार के साथ रहेंगे, फिर वापस जेल जाना पड़ेगा

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रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के शराब घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कारोबारी अनवर ढेबर को 4 दिन की अंतरिम जमानत दी है। कोर्ट ने मां के खराब स्वास्थ्य के चलते जमानत दी है। ढेबर 4 दिन परिवार के साथ रह सकेंगे। दरअसल, अनवर ढेबर ने अदालत से अपील की थी कि, उनकी मां की तबीयत बहुत खराब है। वह उन्हें देखने जाना चाहते हैं।

सुनवाई के दौरान ढेबर के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि, उनकी मां की हालत गंभीर है। वह अस्पताल में भर्ती हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, परिवार के ऐसे समय में इंसान को अपने करीबियों के साथ रहने का मौका मिलना चाहिए।

कोर्ट ने 4 दिन की अंतरिम जमानत मंजूर की। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि यह राहत सिर्फ उनकी मां की तबीयत को ध्यान में रखते हुए दी गई है। 4 दिन के बाद उन्हें फिर से वापस जेल जाना होगा।

जांच के अनुसार 3 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की बात कही गई है।

जांच के अनुसार 3 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की बात कही गई है।

क्या है छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ED जांच कर रही है। ED ने ACB में FIR दर्ज कराई है। जांच के अनुसार 3 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की बात कही गई है। ED ने अपनी जांच में पाया कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया था।

अनवर ने रिश्तेदारों और CA के नाम से निवेश

सिंडिकेट बनाने वाले कारोबारी अनवर ढेबर को 90 करोड़ से ज्यादा मिले। अनवर ढेबर ने इन पैसों को रिश्तेदारों और CA के नाम कई कंपनियों में इन्वेस्ट किया। EOW की जांच में इस बात का खुलासा हुआ है।

EOW की चालान के अनुसार शराब डिस्टलर्स से कमीशन और बी पार्ट की शराब बिक्री से मिलने वाले पैसे का 15 प्रतिशत कारोबारी अनवर ढेबर को जाता था। अनवर ढेबर इन पैसों को अपने करीबी विकास अग्रवाल और सुब्बू की मदद से लेता था। विकास अग्रवाल और सुब्बू शराब दुकानों से पैसा वसूलने का काम करते थे।

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छत्तीसगढ़

मंत्री गजेंद्र बोले- देशहित में धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा वापस लें:रमन सिंह ने कहा- फैसला जरूरी था, भूपेश बोले- Gen-Z नरसिंह अवतार, मोदी सरकार हिरण्यकश्यप

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रायपुर, एजेंसी। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। NEET पेपर लीक केस में उनके इस्तीफे की मांग करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी पिछले 36 दिन से जंतर-मंतर पर धरना दे रही थी। इस पर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने X पर लिखा- एक प्रधान का इस्तीफा हो गया है। ये भारत के युवाओं की जीत है।

इसके अलावा भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार की तुलना ‘हिरण्यकश्यप’ से की और Gen Z को नरसिंह अवतार बताया। बघेल ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देशभर के छात्रों की जीत है और यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की हार है।

छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने भी प्रधान के इस्तीफे का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन को शांत करने के लिए ये फैसला जरूरी था। वहीं प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा नहीं देना चाहिए था।

यादव ने आगे कहा कि बड़े मंत्रालय में हजारों अधिकारी और कर्मचारी काम करते हैं। ऐसे में अगर कहीं कोई चूक होती है तो उसके लिए सीधे मंत्री को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। देशहित में धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा वापस लेना चाहिए।

इधर, बिलासपुर में छात्रों और युवा संगठनों ने ‘विजय रैली’ निकाली। रैली के दौरान स्टूडेंट्स ने ‘छात्र एकता जिंदाबाद’ और ’एनटीए (NTA) रद्द करो’ के नारे लगाए। वहीं, छात्रों का कहना है कि लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है, लड़ाई अभी भी बाकी है।

भूपेश बघेल ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को युवाओं की जीत बताया।
भूपेश बघेल ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को युवाओं की जीत बताया।

भूपेल बोले- छात्र नरसिंह के अवतार में आए

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि भाजपा की ट्रोल टीम ने सोनम वांगचुक को चीन का ऐजेंट बता दिया था और मंत्री उनको जूस पिला रहे थे। इनकी स्थिति यह है कि जब जरूरत पड़े तो ये किसी को भी अपना बाप बना ले। छात्रों के आगे किसी एजेंसी की नहीं चली। छात्र नरसिंह के अवतार में आए हैं।

रमन सिंह बोले- आंदोलन शांत करने जरूरी था फैसला

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि जिस विषय को लेकर पूरी दुनिया भर में हल्ला मचाया जा रहा था, उसकी इतिश्री हो गई। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह ने कहा है कि इस मामले में सख्त से सख्त कानून बनाया जाएगा। 10 करोड़ और 10 साल की सजा जैसे कठोर कानून आने वाले समय में बनाएंगे जाएंगे ताकि किसी के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं हो।

गजेंद्र यादव बोले- देशहित में इस्तीफा वापस लें प्रधान

डॉ रमन सिंह के बयान के कुछ ही समय बाद प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने इससे बिल्कुल अलग राय रखी। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा नहीं देना चाहिए था। जब एक बार जांच के लिए कमेटी गठित हो गई है, फास्ट ट्रैक कोर्ट बना दिया गया है, तो उसके बाद मुझे ऐसा लगता है कि धर्मेन्द्र प्रधान को इस्तीफा नहीं देना चाहिए। बल्कि देशहित में इस्तीफा वापस ले लेना चाहिए।

12 साल में पहली बार विरोध के बाद मंत्री का इस्तीफा

2014 में पहली बार मोदी सरकार बनने के बाद 12 साल के कार्यकाल में धर्मेंद्र प्रधान पहले मंत्री हैं, जिन्हें विरोध के चलते इस्तीफा देना पड़ा है। हालांकि, इससे पहले 2018 में विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने इस्तीफा दिया था, लेकिन तब दुनियाभर में ‘मी टू’ आंदोलन चल रहा था और अकबर पर पत्रकारिता के दिनों में यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे।

मौजूदा पेपर लीक रोकने का कानून, 4 पॉइंट

जून 2024 तक पेपर लीक के लिए कोई एक सेंट्रल कानून नहीं था। धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और जालसाजी जैसी धाराओं में मुकदमा दर्ज होता था। इनमें जमानत की कोई सख्त शर्तें नहीं हैं।

कुछ राज्यों ने अलग से नकल-विरोधी भी कानून बनाए, मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट भी शामिल किया। उत्तर प्रदेश में कुछ मामलों में गैंगस्टर एक्ट भी लगाया गया।

NEET-UG और UGC के एग्जाम में धांधली के बाद 21 जून 2024 को केंद्र सरकार ने सार्वजानिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम लागू किया। इसमें पेपर लीक, मदद करना, गलत तरीके से OMR शीट हासिल करना, नकल करवाना, एग्जाम से जुड़ी फर्जी वेबसाइट बनाने या परीक्षक को धमकी को सजा के दायरे लाया गया।

ये सभी अपराध गैर-जमानती हैं, इनमें दो कैटेगरी में सजा का प्रावधान है। पहला- पेपर लीक वगैरह करने पर 3 से 5 साल की सजा और 10 लाख तक का जुर्माना हो सकता है। दूसरा- एग्जाम करवाने वाली संस्था या एजेंसी के डायरेक्टर या मैनेजमेंट के ऑफिसर्स ने कोई अपराध किया, तो 3 से 10 साल तक की जेल और एक करोड़ का जुर्माना हो सकता है।

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छत्तीसगढ़

शराब कारोबारी के घर ED-IT की रेड:बलौदाबाजार में राघवेंद्र-रूपेश सराफ के ठिकानों पर छापा, 2 दिन से जारी है कार्रवाई

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बलौदाबाजार, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आयकर विभाग (IT) की संयुक्त टीम ने कारोबारी राजकुमार सराफ के बेटों के घर पर दबिश दी है। राघवेंद्र सराफ और रूपेश सराफ शराब और जमीन कारोबारी है, उनकी पीतल की फैक्ट्री भी है। कार्रवाई के दौरान अफसर दस्तावेज खंगाल रहे हैं।

दरअसल, ईडी अधिकारियों ने 24 जुलाई की रात ही बलौदाबाजार पहुंचकर कारोबारी के घर की निगरानी शुरू कर दी थी। अगले दिन रविवार सुबह टीम ने घर में एंट्री कर तलाशी ली। जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई ED की रेड के बाद आयकर विभाग की टीम ने संयुक्त रूप से की है।

बैंक-संपत्ति समेत कई दस्तावेज खंगाल रही टीम

छापेमारी के दौरान अधिकारी घर के हर कमरे की बारीकी से जांच कर रहे हैं। कई दस्तावेज खंगाले गए, जिनमें डायरी, बैंक खातों के विवरण, संपत्ति से जुड़े कागजात और अन्य महत्वपूर्ण रिकॉर्ड शामिल हैं। परिवार के सदस्यों और कारोबार से जुड़े लोगों से भी पूछताछ की जा रही है।

शहर के बड़े कारोबारी थे राजकुमार सराफ

राजकुमार सराफ शहर के जाने-माने कारोबारी थे। उनके कई व्यापारिक प्रतिष्ठान हैं। राजकुमार के निधन के बाद उनके बेटे राघवेंद्र सराफ और रूपेश सराफ कारोबार चला रहे हैं।

अधिकारियों को बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं की आशंका है, जिसके चलते यह कार्रवाई की जा रही है। शनिवार को ED की टीम को कुछ अहम दस्तावेज मिले थे, जिनके आधार पर IT विभाग ने फिर अतिरिक्त कार्रवाई शुरू की है।

पुलिस जवान तैनात

इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों में काफी चर्चा है। कारोबारी के घर के बाहर अधिकारियों के साथ पुलिस जवान भी तैनात है। आसपास के लोग दूर से ही घटनाक्रम को देख रहे थे। फिलहाल, जांच जारी है और टीम पूरे मामले की गंभीरता से पड़ताल कर रही है।

कोई अधिकारिक बयान नहीं आया

हालांकि, अधिकारियों की ओर से अभी तक छापे के कारणों और जांच के संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है। जांच के दौरान क्या कुछ मिला, इसे लेकर सफाई नहीं दी गई है।

बताया जा रहा है कि छापेमारी में कई अहम दस्तावेज जब्त किए गए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।

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छत्तीसगढ़

पूजा-पाठ से कैंसर ठीक करने का दावा,13 लाख ठगे:टीवी-विज्ञापन से फंसा परिवार, सोना गिरवी रखा, कर्ज लिया, पैसे मांगने पर CBI का डर दिखाया

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बालोद, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बालोद में महिला और उसका परिवार टीवी पर दिखाए गए ज्योतिष के विज्ञापन के झांसे में आ गया। आरोप है कि ठगों ने पूजा-पाठ से चौथे स्टेज का कैंसर ठीक करने का दावा किया और महिला से अलग-अलग खातों में 13 लाख 13 हजार 673 रुपए जमा करा लिए।

जब पति की तबीयत में कोई सुधार नहीं हुआ और पत्नी ने पैसे वापस मांगे। ऐसे में आरोपियों ने पुलिस, सीबीआई और हत्या के मामले में फंसाने की धमकी दी। महिला ने पति के इलाज की उम्मीद में अपना सोना गिरवी रखा और परिचितों से कर्ज लेकर यह रकम जुटाई।

महिला की शिकायत पर पुलिस ने उत्तर प्रदेश के वेद प्रकाश तिवारी, सृजन तिवारी, राहुल तिवारी समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक, ठगी का यह सिलसिला 28 नवंबर 2024 से 30 मई 2026 तक चलता रहा। मामला रनचिरई थाना क्षेत्र के ग्राम सिर्री का है।

पीड़ित महिला का नाम प्रेमलता चंद्राकर (55) है। उनका परिवार खेती-किसानी करता है। उन्होंने पुलिस को बताया कि उनके पति ऋषि चंद्राकर चौथे स्टेज के कैंसर से पीड़ित हैं। धार्मिक चैनल पर पं. वेद प्रकाश तिवारी की लक्ष्मी नारायण ज्योतिष संस्था का विज्ञापन देखने के बाद उन्होंने दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क किया।

आरोप है कि बातचीत के दौरान उन्हें भरोसा दिलाया गया कि पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों से उनके पति पूरी तरह ठीक हो जाएंगे। इसके बाद अलग-अलग पूजा और अनुष्ठानों के नाम पर उनसे पैसे मांगे जाने लगे। आरोपी राहुल तिवारी ने सबसे पहले बारकोड के जरिए 30 हजार रुपए जमा कराए।

इसके बाद 28 नवंबर 2024 को फोन-पे के माध्यम से 18 हजार रुपए और भेजने के लिए कहा गया। पति के स्वस्थ होने की उम्मीद में प्रेमलता चंद्राकर ने अलग-अलग बैंक खातों, फोन-पे, गूगल-पे और अन्य ऑनलाइन माध्यमों से लगातार रकम भेजी।

बेटी और परिचितों के खातों से भी भेजी रकम

प्रेमलता चंद्राकर ने बताया कि बेटी रूही चंद्राकर से 2.30 लाख रुपए, परिचित अमन देवांगन के जरिए 7 लाख 40 हजार 673 रुपए, नेहुल निर्मल से 25 हजार रुपए, तुषार साहू से 40 हजार रुपए, जयंत देशमुख से 73 हजार रुपए और छत्रपाल साहू से 2.05 लाख रुपए आरोपियों के बताए खातों और मोबाइल नंबरों पर ट्रांसफर कराए। इस तरह कुल 13 लाख 13 हजार 673 रुपए भेजे गए।

पैसे लौटाने का झांसा देकर फिर किया संपर्क

आरोप है कि बाद में पं. वेद प्रकाश तिवारी के नाम से फिर फोन आया। कॉल करने वाले ने कहा कि संस्था के कुछ लोगों ने उनके नाम का गलत इस्तेमाल कर ठगी की है। उसने भरोसा दिलाया कि महिला की पूरी रकम 2 महीने के भीतर वापस करा दी जाएगी।

पुलिस और CBI का डर दिखाकर फिर मांगे रुपए

प्रेमलता चंद्राकर का आरोप है कि बाद में उन्हें बताया गया कि राहुल तिवारी के पिता ने आत्महत्या कर ली है और सुसाइड नोट में उसका और वेद प्रकाश तिवारी का नाम लिखा है।

आरोपियों ने कहा कि अगर पैसे नहीं दिए गए तो उत्तर प्रदेश पुलिस उसके घर पहुंचेगी, सीबीआई जांच होगी और उसे हत्या के मामले में फंसा दिया जाएगा। डर दिखाकर उससे फिर ऑनलाइन पैसे मांगे गए।

पति की बीमारी का उठाया फायदा

पीड़िता ने पुलिस को बताया कि उनके पति चौथे स्टेज के कैंसर से पीड़ित हैं। उन्हें बचाने की उम्मीद में उसने सोना गिरवी रखा और कई लोगों से कर्ज लेकर पैसे जुटाए। आरोप है कि ठगों ने उनकी मजबूरी और भावनात्मक स्थिति का फायदा उठाया। इस दौरान उन्होंने महिला का फोटो, आधार कार्ड और पैन कार्ड भी व्हाट्सऐप पर मंगवा लिया।

कई मोबाइल नंबरों पर किए गए ट्रांजेक्शन

एफआईआर में महिला ने नवंबर 2024 से मई 2026 के बीच अलग-अलग मोबाइल नंबरों और यूपीआई आईडी पर किए गए कई ट्रांजेक्शन की जानकारी पुलिस को दी है। सबसे ज्यादा रकम अमन देवांगन के बैंक खातों के जरिए भेजी गई। इसके अलावा बेटी और अन्य परिचितों के माध्यम से भी कई बार पैसे ट्रांसफर किए गए।

ASP बोलीं- केस दर्ज, जांच जारी

एएसपी मोनिका ठाकुर ने बताया कि महिला की शिकायत पर रनचिरई थाने में वेद प्रकाश तिवारी, सृजन तिवारी, राहुल तिवारी और अन्य आरोपियों के खिलाफ BNS की धारा 3(5) और 318(4) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस जांच कर रही है और जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी।

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शराब घोटाला…EOW ने कांग्रेस को भेजा नोटिस:देवेंद्र की मांगी पूरी जानकारी, गैदू बोले-मैंने 3 बार लिखित में जवाब दिया, मुझे 9 घंटे बैठाकर रखा

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रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ACB-EOW ने कांग्रेस के प्रभारी महामंत्री मलकीत सिंह गैदू को नोटिस जारी किया है। पार्टी कार्यालय के अकाउंटेंट देवेंद्र डड़सेना की डिटेल में जानकारी मांगी है। देवेंद्र कोषाध्यक्ष राम गोपाल का करीबी था।

ACB ने नोटिस में पूछा है कि, देवेंद्र डड़सेना पार्टी कार्यालय से किस जिम्मेदारी में जुड़े थे। उनकी नियुक्ति किसने की थी, उसे कितना वेतन मिलता था। जांच एजेंसी ने संगठन से कर्मचारी की नियुक्ति, कार्यकाल और गतिविधियों का पूरा ब्योरा उपलब्ध कराने कहा है।

इस पर मलकीत सिंह गैदू ने कहा कि देश की ऐसी पहली घटना होगी, जहां जांच एजेंसी राजनीतिक दल को प्रताड़ित और तंग कर रही है। राजनीतिक दबाव में कार्रवाई हो रही है। इसके पहले ED को लिखित में जवाब दे चुका हूं। मुझे कार्यालय में 9 घंटे बैठाकर रखा गया था।

9 घंटे तक ED कार्यालय में बैठाया गया

गैदू ने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें तीन बार नोटिस दिया। हर बार उन्होंने लिखित जवाब दिया, लेकिन जवाब देने के समय उन्हें 9-9 घंटे तक ED कार्यालय में बैठाकर रखा गया। इससे साफ जाहिर होता है कि भाजपा किस तरह केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है।

उन्होंने कहा कि यह देश की पहली घटना है, जब किसी राजनीतिक दल को जांच एजेंसी प्रताड़ित कर रही है। राजनीतिक दबाव में कार्रवाई की जा रही है। पहले कभी किसी राजनीतिक दल को निशाना नहीं बनाया गया था, लेकिन यह देश की पहली निंदनीय घटना है, जिसमें पार्टी को प्रताड़ित किया जा रहा है।

गैदू से पूछे गए सवाल

गैदू ने बताया कि ED ने उनसे सुकमा कांग्रेस भवन से जुड़ी जानकारी मांगी थी। एजेंसी ने पूछा था कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी से भवन निर्माण के लिए कितना फंड दिया गया और उसका निर्माण किस तरह हुआ।

उन्होंने कहा कि भवन से जुड़ी पूरी फाइल और दस्तावेज लिखित में ED को उपलब्ध करा दिए गए थे। इसके बावजूद घंटों बैठाकर पूछताछ करना यह दिखाता है कि केंद्रीय एजेंसियां राजनीतिक दबाव में काम कर रही हैं।

पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा और उनके बेटे हरीश कवासी के घर पर छापेमारी की तस्वीर।

पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा और उनके बेटे हरीश कवासी के घर पर छापेमारी की तस्वीर।

पूरा मामला

दरअसल, 28 दिसंबर 2024 को ED ने पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा और उनके बेटे हरीश कवासी के घर पर छापेमारी की थी। टीम रायपुर के धरमपुरा स्थित लखमा के बंगले में पहुंची और वहां से गाड़ियों व दस्तावेजों की तलाशी ली थी।

इसके साथ ही लखमा के करीबी सुशील ओझा के चौबे कॉलोनी स्थित घर, सुकमा में हरीश लखमा के आवास और नगर पालिका अध्यक्ष राजू साहू के घर पर भी दबिश दी गई थी। जांच में सामने आया कि शराब घोटाले की कमाई से सुकमा कांग्रेस भवन का निर्माण किया गया। इस मामले से जुड़े कई अहम दस्तावेज ED ने जब्त किए हैं।

क्यों अटैच किया गया कांग्रेस भवन ?

ED ने दावा किया है कि, शराब घोटाले में भ्रष्टाचार का पैसा कवासी लखमा को मिला है। लखमा को हर महीने 2 करोड़ रुपए मिलते थे। इस दौरान 36 महीने में लखमा को 72 करोड़ रुपए मिले। यह पैसे बेटे हरीश कवासी के घर निर्माण और सुकमा कांग्रेस भवन निर्माण में लगे।

ED के मुताबिक कमीशन के 72 करोड़ में से 68 लाख रुपए से सुकमा में कांग्रेस भवन तैयार किया गया है। शराब घोटाले से सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ है। इसके बाद ED ने सुकमा में लखमा के मकान और रायपुर के बंगले को भी अटैच किया है। इसके साथ ही कांग्रेस भवन को भी अटैच किया है।

ED ने सुकमा में कांग्रेस भवन को अटैच किया था, जिसके खिलाफ कांग्रेस ने पुतला दहन किया था।

ED ने सुकमा में कांग्रेस भवन को अटैच किया था, जिसके खिलाफ कांग्रेस ने पुतला दहन किया था।

प्रॉपर्टी अटैचमेंट का मतलब क्या ?

अटैचमेंट का मतलब है कि संपत्ति को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया जाता है, लेकिन इसका इस्तेमाल जारी रहता है। आप उस संपत्ति का उपयोग कर सकते हैं, लेकिन आप इसे बेच नहीं सकते या किसी और को ट्रांसफर नहीं कर सकते।

अटैचमेंट एक कानूनी प्रक्रिया है, जो आमतौर पर तब होती है, जब कोई व्यक्ति किसी कानूनी मामले में ऋण चुकाने में विफल रहता है। किसी कांड में भ्रष्टाचार से कमाई गई प्रॉपर्टी होने का आशंका हो तो फैसला आने तक संपत्ति को सुरक्षित रखना जरूरी होता है, इसलिए ये कार्रवाई की जाती है।

कवासी लखमा 16 जनवरी 2025 से जेल में बंद हैं।

कवासी लखमा 16 जनवरी 2025 से जेल में बंद हैं।

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छत्तीसगढ़

मंत्री गजेंद्र बोले- देशहित में धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा वापस लें:रमन सिंह ने कहा- फैसला जरूरी था, भूपेश बोले- Gen-Z नरसिंह अवतार, मोदी सरकार हिरण्यकश्यप

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रायपुर, एजेंसी। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। NEET पेपर लीक केस में उनके इस्तीफे की मांग करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी पिछले 36 दिन से जंतर-मंतर पर धरना दे रही थी। इस पर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने X पर लिखा- एक प्रधान का इस्तीफा हो गया है। ये भारत के युवाओं की जीत है।

इसके अलावा भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार की तुलना ‘हिरण्यकश्यप’ से की और Gen Z को नरसिंह अवतार बताया। बघेल ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देशभर के छात्रों की जीत है और यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की हार है।

छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने भी प्रधान के इस्तीफे का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन को शांत करने के लिए ये फैसला जरूरी था। वहीं प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा नहीं देना चाहिए था।

यादव ने आगे कहा कि बड़े मंत्रालय में हजारों अधिकारी और कर्मचारी काम करते हैं। ऐसे में अगर कहीं कोई चूक होती है तो उसके लिए सीधे मंत्री को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। देशहित में धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा वापस लेना चाहिए।

इधर, बिलासपुर में छात्रों और युवा संगठनों ने ‘विजय रैली’ निकाली। रैली के दौरान स्टूडेंट्स ने ‘छात्र एकता जिंदाबाद’ और ’एनटीए (NTA) रद्द करो’ के नारे लगाए। वहीं, छात्रों का कहना है कि लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है, लड़ाई अभी भी बाकी है।

भूपेश बघेल ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को युवाओं की जीत बताया।
भूपेश बघेल ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को युवाओं की जीत बताया।

भूपेल बोले- छात्र नरसिंह के अवतार में आए

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि भाजपा की ट्रोल टीम ने सोनम वांगचुक को चीन का ऐजेंट बता दिया था और मंत्री उनको जूस पिला रहे थे। इनकी स्थिति यह है कि जब जरूरत पड़े तो ये किसी को भी अपना बाप बना ले। छात्रों के आगे किसी एजेंसी की नहीं चली। छात्र नरसिंह के अवतार में आए हैं।

रमन सिंह बोले- आंदोलन शांत करने जरूरी था फैसला

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि जिस विषय को लेकर पूरी दुनिया भर में हल्ला मचाया जा रहा था, उसकी इतिश्री हो गई। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह ने कहा है कि इस मामले में सख्त से सख्त कानून बनाया जाएगा। 10 करोड़ और 10 साल की सजा जैसे कठोर कानून आने वाले समय में बनाएंगे जाएंगे ताकि किसी के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं हो।

गजेंद्र यादव बोले- देशहित में इस्तीफा वापस लें प्रधान

डॉ रमन सिंह के बयान के कुछ ही समय बाद प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने इससे बिल्कुल अलग राय रखी। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा नहीं देना चाहिए था। जब एक बार जांच के लिए कमेटी गठित हो गई है, फास्ट ट्रैक कोर्ट बना दिया गया है, तो उसके बाद मुझे ऐसा लगता है कि धर्मेन्द्र प्रधान को इस्तीफा नहीं देना चाहिए। बल्कि देशहित में इस्तीफा वापस ले लेना चाहिए।

12 साल में पहली बार विरोध के बाद मंत्री का इस्तीफा

2014 में पहली बार मोदी सरकार बनने के बाद 12 साल के कार्यकाल में धर्मेंद्र प्रधान पहले मंत्री हैं, जिन्हें विरोध के चलते इस्तीफा देना पड़ा है। हालांकि, इससे पहले 2018 में विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने इस्तीफा दिया था, लेकिन तब दुनियाभर में ‘मी टू’ आंदोलन चल रहा था और अकबर पर पत्रकारिता के दिनों में यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे।

मौजूदा पेपर लीक रोकने का कानून, 4 पॉइंट

जून 2024 तक पेपर लीक के लिए कोई एक सेंट्रल कानून नहीं था। धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और जालसाजी जैसी धाराओं में मुकदमा दर्ज होता था। इनमें जमानत की कोई सख्त शर्तें नहीं हैं।

कुछ राज्यों ने अलग से नकल-विरोधी भी कानून बनाए, मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट भी शामिल किया। उत्तर प्रदेश में कुछ मामलों में गैंगस्टर एक्ट भी लगाया गया।

NEET-UG और UGC के एग्जाम में धांधली के बाद 21 जून 2024 को केंद्र सरकार ने सार्वजानिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम लागू किया। इसमें पेपर लीक, मदद करना, गलत तरीके से OMR शीट हासिल करना, नकल करवाना, एग्जाम से जुड़ी फर्जी वेबसाइट बनाने या परीक्षक को धमकी को सजा के दायरे लाया गया।

ये सभी अपराध गैर-जमानती हैं, इनमें दो कैटेगरी में सजा का प्रावधान है। पहला- पेपर लीक वगैरह करने पर 3 से 5 साल की सजा और 10 लाख तक का जुर्माना हो सकता है। दूसरा- एग्जाम करवाने वाली संस्था या एजेंसी के डायरेक्टर या मैनेजमेंट के ऑफिसर्स ने कोई अपराध किया, तो 3 से 10 साल तक की जेल और एक करोड़ का जुर्माना हो सकता है।

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शराब कारोबारी के घर ED-IT की रेड:बलौदाबाजार में राघवेंद्र-रूपेश सराफ के ठिकानों पर छापा, 2 दिन से जारी है कार्रवाई

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बलौदाबाजार, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आयकर विभाग (IT) की संयुक्त टीम ने कारोबारी राजकुमार सराफ के बेटों के घर पर दबिश दी है। राघवेंद्र सराफ और रूपेश सराफ शराब और जमीन कारोबारी है, उनकी पीतल की फैक्ट्री भी है। कार्रवाई के दौरान अफसर दस्तावेज खंगाल रहे हैं।

दरअसल, ईडी अधिकारियों ने 24 जुलाई की रात ही बलौदाबाजार पहुंचकर कारोबारी के घर की निगरानी शुरू कर दी थी। अगले दिन रविवार सुबह टीम ने घर में एंट्री कर तलाशी ली। जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई ED की रेड के बाद आयकर विभाग की टीम ने संयुक्त रूप से की है।

बैंक-संपत्ति समेत कई दस्तावेज खंगाल रही टीम

छापेमारी के दौरान अधिकारी घर के हर कमरे की बारीकी से जांच कर रहे हैं। कई दस्तावेज खंगाले गए, जिनमें डायरी, बैंक खातों के विवरण, संपत्ति से जुड़े कागजात और अन्य महत्वपूर्ण रिकॉर्ड शामिल हैं। परिवार के सदस्यों और कारोबार से जुड़े लोगों से भी पूछताछ की जा रही है।

शहर के बड़े कारोबारी थे राजकुमार सराफ

राजकुमार सराफ शहर के जाने-माने कारोबारी थे। उनके कई व्यापारिक प्रतिष्ठान हैं। राजकुमार के निधन के बाद उनके बेटे राघवेंद्र सराफ और रूपेश सराफ कारोबार चला रहे हैं।

अधिकारियों को बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं की आशंका है, जिसके चलते यह कार्रवाई की जा रही है। शनिवार को ED की टीम को कुछ अहम दस्तावेज मिले थे, जिनके आधार पर IT विभाग ने फिर अतिरिक्त कार्रवाई शुरू की है।

पुलिस जवान तैनात

इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों में काफी चर्चा है। कारोबारी के घर के बाहर अधिकारियों के साथ पुलिस जवान भी तैनात है। आसपास के लोग दूर से ही घटनाक्रम को देख रहे थे। फिलहाल, जांच जारी है और टीम पूरे मामले की गंभीरता से पड़ताल कर रही है।

कोई अधिकारिक बयान नहीं आया

हालांकि, अधिकारियों की ओर से अभी तक छापे के कारणों और जांच के संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है। जांच के दौरान क्या कुछ मिला, इसे लेकर सफाई नहीं दी गई है।

बताया जा रहा है कि छापेमारी में कई अहम दस्तावेज जब्त किए गए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।

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छत्तीसगढ़

पूजा-पाठ से कैंसर ठीक करने का दावा,13 लाख ठगे:टीवी-विज्ञापन से फंसा परिवार, सोना गिरवी रखा, कर्ज लिया, पैसे मांगने पर CBI का डर दिखाया

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बालोद, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बालोद में महिला और उसका परिवार टीवी पर दिखाए गए ज्योतिष के विज्ञापन के झांसे में आ गया। आरोप है कि ठगों ने पूजा-पाठ से चौथे स्टेज का कैंसर ठीक करने का दावा किया और महिला से अलग-अलग खातों में 13 लाख 13 हजार 673 रुपए जमा करा लिए।

जब पति की तबीयत में कोई सुधार नहीं हुआ और पत्नी ने पैसे वापस मांगे। ऐसे में आरोपियों ने पुलिस, सीबीआई और हत्या के मामले में फंसाने की धमकी दी। महिला ने पति के इलाज की उम्मीद में अपना सोना गिरवी रखा और परिचितों से कर्ज लेकर यह रकम जुटाई।

महिला की शिकायत पर पुलिस ने उत्तर प्रदेश के वेद प्रकाश तिवारी, सृजन तिवारी, राहुल तिवारी समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक, ठगी का यह सिलसिला 28 नवंबर 2024 से 30 मई 2026 तक चलता रहा। मामला रनचिरई थाना क्षेत्र के ग्राम सिर्री का है।

पीड़ित महिला का नाम प्रेमलता चंद्राकर (55) है। उनका परिवार खेती-किसानी करता है। उन्होंने पुलिस को बताया कि उनके पति ऋषि चंद्राकर चौथे स्टेज के कैंसर से पीड़ित हैं। धार्मिक चैनल पर पं. वेद प्रकाश तिवारी की लक्ष्मी नारायण ज्योतिष संस्था का विज्ञापन देखने के बाद उन्होंने दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क किया।

आरोप है कि बातचीत के दौरान उन्हें भरोसा दिलाया गया कि पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों से उनके पति पूरी तरह ठीक हो जाएंगे। इसके बाद अलग-अलग पूजा और अनुष्ठानों के नाम पर उनसे पैसे मांगे जाने लगे। आरोपी राहुल तिवारी ने सबसे पहले बारकोड के जरिए 30 हजार रुपए जमा कराए।

इसके बाद 28 नवंबर 2024 को फोन-पे के माध्यम से 18 हजार रुपए और भेजने के लिए कहा गया। पति के स्वस्थ होने की उम्मीद में प्रेमलता चंद्राकर ने अलग-अलग बैंक खातों, फोन-पे, गूगल-पे और अन्य ऑनलाइन माध्यमों से लगातार रकम भेजी।

बेटी और परिचितों के खातों से भी भेजी रकम

प्रेमलता चंद्राकर ने बताया कि बेटी रूही चंद्राकर से 2.30 लाख रुपए, परिचित अमन देवांगन के जरिए 7 लाख 40 हजार 673 रुपए, नेहुल निर्मल से 25 हजार रुपए, तुषार साहू से 40 हजार रुपए, जयंत देशमुख से 73 हजार रुपए और छत्रपाल साहू से 2.05 लाख रुपए आरोपियों के बताए खातों और मोबाइल नंबरों पर ट्रांसफर कराए। इस तरह कुल 13 लाख 13 हजार 673 रुपए भेजे गए।

पैसे लौटाने का झांसा देकर फिर किया संपर्क

आरोप है कि बाद में पं. वेद प्रकाश तिवारी के नाम से फिर फोन आया। कॉल करने वाले ने कहा कि संस्था के कुछ लोगों ने उनके नाम का गलत इस्तेमाल कर ठगी की है। उसने भरोसा दिलाया कि महिला की पूरी रकम 2 महीने के भीतर वापस करा दी जाएगी।

पुलिस और CBI का डर दिखाकर फिर मांगे रुपए

प्रेमलता चंद्राकर का आरोप है कि बाद में उन्हें बताया गया कि राहुल तिवारी के पिता ने आत्महत्या कर ली है और सुसाइड नोट में उसका और वेद प्रकाश तिवारी का नाम लिखा है।

आरोपियों ने कहा कि अगर पैसे नहीं दिए गए तो उत्तर प्रदेश पुलिस उसके घर पहुंचेगी, सीबीआई जांच होगी और उसे हत्या के मामले में फंसा दिया जाएगा। डर दिखाकर उससे फिर ऑनलाइन पैसे मांगे गए।

पति की बीमारी का उठाया फायदा

पीड़िता ने पुलिस को बताया कि उनके पति चौथे स्टेज के कैंसर से पीड़ित हैं। उन्हें बचाने की उम्मीद में उसने सोना गिरवी रखा और कई लोगों से कर्ज लेकर पैसे जुटाए। आरोप है कि ठगों ने उनकी मजबूरी और भावनात्मक स्थिति का फायदा उठाया। इस दौरान उन्होंने महिला का फोटो, आधार कार्ड और पैन कार्ड भी व्हाट्सऐप पर मंगवा लिया।

कई मोबाइल नंबरों पर किए गए ट्रांजेक्शन

एफआईआर में महिला ने नवंबर 2024 से मई 2026 के बीच अलग-अलग मोबाइल नंबरों और यूपीआई आईडी पर किए गए कई ट्रांजेक्शन की जानकारी पुलिस को दी है। सबसे ज्यादा रकम अमन देवांगन के बैंक खातों के जरिए भेजी गई। इसके अलावा बेटी और अन्य परिचितों के माध्यम से भी कई बार पैसे ट्रांसफर किए गए।

ASP बोलीं- केस दर्ज, जांच जारी

एएसपी मोनिका ठाकुर ने बताया कि महिला की शिकायत पर रनचिरई थाने में वेद प्रकाश तिवारी, सृजन तिवारी, राहुल तिवारी और अन्य आरोपियों के खिलाफ BNS की धारा 3(5) और 318(4) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस जांच कर रही है और जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी।

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छत्तीसगढ़

शराब घोटाला केस…रायपुर कोर्ट में चैतन्य की पेशी:बघेल को गिरफ्तार कर सकती है EOW, स्पेशल-कोर्ट में लगाया प्रोडक्शन वारंट का आवेदन

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रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले मामले में पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को रायपुर की स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया। जेल से पुलिसकर्मी चैतन्य को कोर्ट लेकर पहुंचे। कोर्ट में शराब घोटाला केस में सुनवाई चल रही है। साथ ही EOW को रिमांड देने पर भी सुनवाई चल रही है।

EOW-ACB ने चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी के लिए स्पेशल कोर्ट में प्रोडक्शन वारंट का आवेदन लगाया है। इससे पहले भी EOW ने प्रोडक्शन वारंट दाखिल किया था, लेकिन उस समय चैतन्य बघेल के वकील ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने उन्हें स्पेशल कोर्ट का रुख करने की सलाह दी थी।

बाद में स्पेशल कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। इसके बाद EOW ने दोबारा प्रोडक्शन वारंट एप्लिकेशन दाखिल किया है। ED ने चैतन्य बघेल को 18 जुलाई 2025 को शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था। तब से चैतन्य रायपुर जेल में बंद है।

कोर्ट में पेशी में ले जाते वक्त की तस्वीरें…

शराब घोटाला मामले में चैतन्य बघेल को EOW गिरफ्तार कर रिमांड पर ले सकती है।

शराब घोटाला मामले में चैतन्य बघेल को EOW गिरफ्तार कर रिमांड पर ले सकती है।

छत्तीसगढ़ शराब घोटाले मामले में चैतन्य बघेल को रायपुर कोर्ट में पेश करने ले जाते पुलिसकर्मी।

छत्तीसगढ़ शराब घोटाले मामले में चैतन्य बघेल को रायपुर कोर्ट में पेश करने ले जाते पुलिसकर्मी।

चैतन्य को 16.70 करोड़ रुपए मिले- ED

दरअसल, शराब घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग केस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने चैतन्य बघेल को भी आरोपी बनाया है। आरोप है कि शराब घोटाले की रकम से चैतन्य को 16.70 करोड़ रुपए मिले हैं। शराब घोटाले से मिले ब्लैक मनी को रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में इन्वेस्ट किया गया।

ED के मुताबिक चैतन्य बघेल ने ब्लैक मनी को वाइट करने के लिए फर्जी निवेश दिखाया है। साथ ही सिंडिकेट के साथ मिलकर 1000 करोड़ रुपए की हैंडलिंग (हेराफेरी) की है।

पिछली सुनवाई के दौरान चैतन्य से मुलाकात करने पूर्व सीएम भूपेश बघेल भी कोर्ट पहुंचे थे।

पिछली सुनवाई के दौरान चैतन्य से मुलाकात करने पूर्व सीएम भूपेश बघेल भी कोर्ट पहुंचे थे।

चैतन्य के प्रोजेक्ट में 13-15 करोड़ इन्वेस्ट

ED ने अपनी जांच में पाया कि, चैतन्य बघेल के विट्ठल ग्रीन प्रोजेक्ट (बघेल डेवलपर्स) में घोटाले के पैसे को इन्वेस्ट किया गया है। इस प्रोजेक्ट से जुड़े अकाउंटेंट के ठिकानों पर छापेमारी कर ED ने रिकॉर्ड जब्त किए थे।

प्रोजेक्ट के कंसल्टेंट राजेन्द्र जैन ने बताया कि, इस प्रोजेक्ट में वास्तविक खर्च 13-15 करोड़ था। जबकि रिकॉर्ड में 7.14 करोड़ ही दिखाया गया। जब्त डिजिटल डिवाइसेस से पता चला कि, बघेल की कंपनी ने एक ठेकेदार को 4.2 करोड़ कैश पेमेंट किया, जो रिकॉर्ड में नहीं दिखाया गया।

ED रिमांड खत्म होने के बाद चैतन्य को रायपुर स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया।

ED रिमांड खत्म होने के बाद चैतन्य को रायपुर स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया।

फर्जी फ्लैट खरीदी के जरिए पैसे की हेराफेरी

ED ने अपनी जांच में पाया है कि त्रिलोक सिंह ढिल्लो ने 19 फ्लैट खरीदने के लिए 5 करोड़ बघेल डेवलपर्स को ट्रांसफर किए। ढिल्लन ने ये फ्लैट अपने कर्मचारियों के नाम पर खरीदे लेकिन पेमेंट त्रिलोक ढिल्लो ने खुद दिया।

ED ने जब ढिल्लन के कर्मचारियों से पूछताछ की तो कर्मचारियों ने बताया कि, ये फ्लैट की खरीदी उन्हीं के नाम पर हुई, लेकिन पैसे ढिल्लो ने दिए। ये सारा ट्रांजेक्शन 19 अक्टूबर 2020 को एक ही दिन हुआ।

ED ने कहा कि ब्लैक को लीगल करने के लिए यह एक पूर्व-योजना के तहत किया गया लेन-देन था। इसका मकसद पैसे को छिपाकर चैतन्य बघेल तक पहुंचाना था।

5 करोड़ कैश के बदले फर्जी ट्रांसफर

ED के मुताबिक भिलाई के एक ज्वेलर्स ने चैतन्य बघेल को 5 करोड़ रुपए उधार दिए, लेकिन ED की जांच में सामने आया कि जो 5 करोड़ रुपए चैतन्य की दो कंपनियों को लोन के रूप में दिया गया ।

बाद में इसी ज्वेलर्स ने बघेल की कंपनी से 6 प्लॉट खरीदे, जिसकी कीमत 80 लाख थी। ED ने बताया कि यह पैसा शराब घोटाले से आया हुआ कैश था। यह पैसा बैंक के जरिए ट्रांसफर किया गया। ताकि कैश को लीगल दिखाया जा सके।

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छत्तीसगढ़

मंत्री गजेंद्र बोले- देशहित में धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा वापस लें:रमन सिंह ने कहा- फैसला जरूरी था, भूपेश बोले- Gen-Z नरसिंह अवतार, मोदी सरकार हिरण्यकश्यप

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रायपुर, एजेंसी। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। NEET पेपर लीक केस में उनके इस्तीफे की मांग करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी पिछले 36 दिन से जंतर-मंतर पर धरना दे रही थी। इस पर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने X पर लिखा- एक प्रधान का इस्तीफा हो गया है। ये भारत के युवाओं की जीत है।

इसके अलावा भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार की तुलना ‘हिरण्यकश्यप’ से की और Gen Z को नरसिंह अवतार बताया। बघेल ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देशभर के छात्रों की जीत है और यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की हार है।

छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने भी प्रधान के इस्तीफे का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन को शांत करने के लिए ये फैसला जरूरी था। वहीं प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा नहीं देना चाहिए था।

यादव ने आगे कहा कि बड़े मंत्रालय में हजारों अधिकारी और कर्मचारी काम करते हैं। ऐसे में अगर कहीं कोई चूक होती है तो उसके लिए सीधे मंत्री को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। देशहित में धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा वापस लेना चाहिए।

इधर, बिलासपुर में छात्रों और युवा संगठनों ने ‘विजय रैली’ निकाली। रैली के दौरान स्टूडेंट्स ने ‘छात्र एकता जिंदाबाद’ और ’एनटीए (NTA) रद्द करो’ के नारे लगाए। वहीं, छात्रों का कहना है कि लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है, लड़ाई अभी भी बाकी है।

भूपेश बघेल ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को युवाओं की जीत बताया।
भूपेश बघेल ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को युवाओं की जीत बताया।

भूपेल बोले- छात्र नरसिंह के अवतार में आए

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि भाजपा की ट्रोल टीम ने सोनम वांगचुक को चीन का ऐजेंट बता दिया था और मंत्री उनको जूस पिला रहे थे। इनकी स्थिति यह है कि जब जरूरत पड़े तो ये किसी को भी अपना बाप बना ले। छात्रों के आगे किसी एजेंसी की नहीं चली। छात्र नरसिंह के अवतार में आए हैं।

रमन सिंह बोले- आंदोलन शांत करने जरूरी था फैसला

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि जिस विषय को लेकर पूरी दुनिया भर में हल्ला मचाया जा रहा था, उसकी इतिश्री हो गई। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह ने कहा है कि इस मामले में सख्त से सख्त कानून बनाया जाएगा। 10 करोड़ और 10 साल की सजा जैसे कठोर कानून आने वाले समय में बनाएंगे जाएंगे ताकि किसी के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं हो।

गजेंद्र यादव बोले- देशहित में इस्तीफा वापस लें प्रधान

डॉ रमन सिंह के बयान के कुछ ही समय बाद प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने इससे बिल्कुल अलग राय रखी। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा नहीं देना चाहिए था। जब एक बार जांच के लिए कमेटी गठित हो गई है, फास्ट ट्रैक कोर्ट बना दिया गया है, तो उसके बाद मुझे ऐसा लगता है कि धर्मेन्द्र प्रधान को इस्तीफा नहीं देना चाहिए। बल्कि देशहित में इस्तीफा वापस ले लेना चाहिए।

12 साल में पहली बार विरोध के बाद मंत्री का इस्तीफा

2014 में पहली बार मोदी सरकार बनने के बाद 12 साल के कार्यकाल में धर्मेंद्र प्रधान पहले मंत्री हैं, जिन्हें विरोध के चलते इस्तीफा देना पड़ा है। हालांकि, इससे पहले 2018 में विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने इस्तीफा दिया था, लेकिन तब दुनियाभर में ‘मी टू’ आंदोलन चल रहा था और अकबर पर पत्रकारिता के दिनों में यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे।

मौजूदा पेपर लीक रोकने का कानून, 4 पॉइंट

जून 2024 तक पेपर लीक के लिए कोई एक सेंट्रल कानून नहीं था। धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और जालसाजी जैसी धाराओं में मुकदमा दर्ज होता था। इनमें जमानत की कोई सख्त शर्तें नहीं हैं।

कुछ राज्यों ने अलग से नकल-विरोधी भी कानून बनाए, मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट भी शामिल किया। उत्तर प्रदेश में कुछ मामलों में गैंगस्टर एक्ट भी लगाया गया।

NEET-UG और UGC के एग्जाम में धांधली के बाद 21 जून 2024 को केंद्र सरकार ने सार्वजानिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम लागू किया। इसमें पेपर लीक, मदद करना, गलत तरीके से OMR शीट हासिल करना, नकल करवाना, एग्जाम से जुड़ी फर्जी वेबसाइट बनाने या परीक्षक को धमकी को सजा के दायरे लाया गया।

ये सभी अपराध गैर-जमानती हैं, इनमें दो कैटेगरी में सजा का प्रावधान है। पहला- पेपर लीक वगैरह करने पर 3 से 5 साल की सजा और 10 लाख तक का जुर्माना हो सकता है। दूसरा- एग्जाम करवाने वाली संस्था या एजेंसी के डायरेक्टर या मैनेजमेंट के ऑफिसर्स ने कोई अपराध किया, तो 3 से 10 साल तक की जेल और एक करोड़ का जुर्माना हो सकता है।

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छत्तीसगढ़

शराब कारोबारी के घर ED-IT की रेड:बलौदाबाजार में राघवेंद्र-रूपेश सराफ के ठिकानों पर छापा, 2 दिन से जारी है कार्रवाई

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बलौदाबाजार, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आयकर विभाग (IT) की संयुक्त टीम ने कारोबारी राजकुमार सराफ के बेटों के घर पर दबिश दी है। राघवेंद्र सराफ और रूपेश सराफ शराब और जमीन कारोबारी है, उनकी पीतल की फैक्ट्री भी है। कार्रवाई के दौरान अफसर दस्तावेज खंगाल रहे हैं।

दरअसल, ईडी अधिकारियों ने 24 जुलाई की रात ही बलौदाबाजार पहुंचकर कारोबारी के घर की निगरानी शुरू कर दी थी। अगले दिन रविवार सुबह टीम ने घर में एंट्री कर तलाशी ली। जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई ED की रेड के बाद आयकर विभाग की टीम ने संयुक्त रूप से की है।

बैंक-संपत्ति समेत कई दस्तावेज खंगाल रही टीम

छापेमारी के दौरान अधिकारी घर के हर कमरे की बारीकी से जांच कर रहे हैं। कई दस्तावेज खंगाले गए, जिनमें डायरी, बैंक खातों के विवरण, संपत्ति से जुड़े कागजात और अन्य महत्वपूर्ण रिकॉर्ड शामिल हैं। परिवार के सदस्यों और कारोबार से जुड़े लोगों से भी पूछताछ की जा रही है।

शहर के बड़े कारोबारी थे राजकुमार सराफ

राजकुमार सराफ शहर के जाने-माने कारोबारी थे। उनके कई व्यापारिक प्रतिष्ठान हैं। राजकुमार के निधन के बाद उनके बेटे राघवेंद्र सराफ और रूपेश सराफ कारोबार चला रहे हैं।

अधिकारियों को बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं की आशंका है, जिसके चलते यह कार्रवाई की जा रही है। शनिवार को ED की टीम को कुछ अहम दस्तावेज मिले थे, जिनके आधार पर IT विभाग ने फिर अतिरिक्त कार्रवाई शुरू की है।

पुलिस जवान तैनात

इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों में काफी चर्चा है। कारोबारी के घर के बाहर अधिकारियों के साथ पुलिस जवान भी तैनात है। आसपास के लोग दूर से ही घटनाक्रम को देख रहे थे। फिलहाल, जांच जारी है और टीम पूरे मामले की गंभीरता से पड़ताल कर रही है।

कोई अधिकारिक बयान नहीं आया

हालांकि, अधिकारियों की ओर से अभी तक छापे के कारणों और जांच के संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है। जांच के दौरान क्या कुछ मिला, इसे लेकर सफाई नहीं दी गई है।

बताया जा रहा है कि छापेमारी में कई अहम दस्तावेज जब्त किए गए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।

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छत्तीसगढ़

पूजा-पाठ से कैंसर ठीक करने का दावा,13 लाख ठगे:टीवी-विज्ञापन से फंसा परिवार, सोना गिरवी रखा, कर्ज लिया, पैसे मांगने पर CBI का डर दिखाया

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बालोद, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बालोद में महिला और उसका परिवार टीवी पर दिखाए गए ज्योतिष के विज्ञापन के झांसे में आ गया। आरोप है कि ठगों ने पूजा-पाठ से चौथे स्टेज का कैंसर ठीक करने का दावा किया और महिला से अलग-अलग खातों में 13 लाख 13 हजार 673 रुपए जमा करा लिए।

जब पति की तबीयत में कोई सुधार नहीं हुआ और पत्नी ने पैसे वापस मांगे। ऐसे में आरोपियों ने पुलिस, सीबीआई और हत्या के मामले में फंसाने की धमकी दी। महिला ने पति के इलाज की उम्मीद में अपना सोना गिरवी रखा और परिचितों से कर्ज लेकर यह रकम जुटाई।

महिला की शिकायत पर पुलिस ने उत्तर प्रदेश के वेद प्रकाश तिवारी, सृजन तिवारी, राहुल तिवारी समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक, ठगी का यह सिलसिला 28 नवंबर 2024 से 30 मई 2026 तक चलता रहा। मामला रनचिरई थाना क्षेत्र के ग्राम सिर्री का है।

पीड़ित महिला का नाम प्रेमलता चंद्राकर (55) है। उनका परिवार खेती-किसानी करता है। उन्होंने पुलिस को बताया कि उनके पति ऋषि चंद्राकर चौथे स्टेज के कैंसर से पीड़ित हैं। धार्मिक चैनल पर पं. वेद प्रकाश तिवारी की लक्ष्मी नारायण ज्योतिष संस्था का विज्ञापन देखने के बाद उन्होंने दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क किया।

आरोप है कि बातचीत के दौरान उन्हें भरोसा दिलाया गया कि पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों से उनके पति पूरी तरह ठीक हो जाएंगे। इसके बाद अलग-अलग पूजा और अनुष्ठानों के नाम पर उनसे पैसे मांगे जाने लगे। आरोपी राहुल तिवारी ने सबसे पहले बारकोड के जरिए 30 हजार रुपए जमा कराए।

इसके बाद 28 नवंबर 2024 को फोन-पे के माध्यम से 18 हजार रुपए और भेजने के लिए कहा गया। पति के स्वस्थ होने की उम्मीद में प्रेमलता चंद्राकर ने अलग-अलग बैंक खातों, फोन-पे, गूगल-पे और अन्य ऑनलाइन माध्यमों से लगातार रकम भेजी।

बेटी और परिचितों के खातों से भी भेजी रकम

प्रेमलता चंद्राकर ने बताया कि बेटी रूही चंद्राकर से 2.30 लाख रुपए, परिचित अमन देवांगन के जरिए 7 लाख 40 हजार 673 रुपए, नेहुल निर्मल से 25 हजार रुपए, तुषार साहू से 40 हजार रुपए, जयंत देशमुख से 73 हजार रुपए और छत्रपाल साहू से 2.05 लाख रुपए आरोपियों के बताए खातों और मोबाइल नंबरों पर ट्रांसफर कराए। इस तरह कुल 13 लाख 13 हजार 673 रुपए भेजे गए।

पैसे लौटाने का झांसा देकर फिर किया संपर्क

आरोप है कि बाद में पं. वेद प्रकाश तिवारी के नाम से फिर फोन आया। कॉल करने वाले ने कहा कि संस्था के कुछ लोगों ने उनके नाम का गलत इस्तेमाल कर ठगी की है। उसने भरोसा दिलाया कि महिला की पूरी रकम 2 महीने के भीतर वापस करा दी जाएगी।

पुलिस और CBI का डर दिखाकर फिर मांगे रुपए

प्रेमलता चंद्राकर का आरोप है कि बाद में उन्हें बताया गया कि राहुल तिवारी के पिता ने आत्महत्या कर ली है और सुसाइड नोट में उसका और वेद प्रकाश तिवारी का नाम लिखा है।

आरोपियों ने कहा कि अगर पैसे नहीं दिए गए तो उत्तर प्रदेश पुलिस उसके घर पहुंचेगी, सीबीआई जांच होगी और उसे हत्या के मामले में फंसा दिया जाएगा। डर दिखाकर उससे फिर ऑनलाइन पैसे मांगे गए।

पति की बीमारी का उठाया फायदा

पीड़िता ने पुलिस को बताया कि उनके पति चौथे स्टेज के कैंसर से पीड़ित हैं। उन्हें बचाने की उम्मीद में उसने सोना गिरवी रखा और कई लोगों से कर्ज लेकर पैसे जुटाए। आरोप है कि ठगों ने उनकी मजबूरी और भावनात्मक स्थिति का फायदा उठाया। इस दौरान उन्होंने महिला का फोटो, आधार कार्ड और पैन कार्ड भी व्हाट्सऐप पर मंगवा लिया।

कई मोबाइल नंबरों पर किए गए ट्रांजेक्शन

एफआईआर में महिला ने नवंबर 2024 से मई 2026 के बीच अलग-अलग मोबाइल नंबरों और यूपीआई आईडी पर किए गए कई ट्रांजेक्शन की जानकारी पुलिस को दी है। सबसे ज्यादा रकम अमन देवांगन के बैंक खातों के जरिए भेजी गई। इसके अलावा बेटी और अन्य परिचितों के माध्यम से भी कई बार पैसे ट्रांसफर किए गए।

ASP बोलीं- केस दर्ज, जांच जारी

एएसपी मोनिका ठाकुर ने बताया कि महिला की शिकायत पर रनचिरई थाने में वेद प्रकाश तिवारी, सृजन तिवारी, राहुल तिवारी और अन्य आरोपियों के खिलाफ BNS की धारा 3(5) और 318(4) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस जांच कर रही है और जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी।

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छत्तीसगढ़

शराब-घोटाला केस…28 आबकारी अधिकारियों को कोर्ट से बेल:सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर EOW-कोर्ट में पेश, कोल-स्कैम में सौम्या की 8 करोड़ की प्रॉपटी सीज

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रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ शराब घोटाला केस में शामिल 28 आबकारी अधिकारी रायपुर की EOW कोर्ट में पेश हुए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सभी अधिकारी अग्रिम जमानत के कागजात लेकर कोर्ट पहुंचे थे। कोर्ट ने 1-1 लाख रुपए का जमानत पट्टा जमा करने पर जमानत दे दी है।

EOW के मुताबिक ये सभी अधिकारी शराब घोटाले के सिंडिकेट का हिस्सा थे। आरोप है कि इन्होंने मिलकर 88 करोड़ रुपए से ज्यादा की अवैध कमाई की। पिछले महीने राज्य सरकार ने सभी अधिकारियों को निलंबित कर दिया था। अगस्त के अंतिम सप्ताह में सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें अग्रिम जमानत की मंजूरी दी थी।

इस बीच, कोयला घोटाला मामले में EOW ने सौम्या चौरसिया की लगभग 8 करोड़ रुपए की 16 अचल संपत्तियां जब्त की हैं। सौम्या ने अपने रिश्तेदारों (सौरभ मोदी, अनुराग चौरसिया और अन्य) के नाम पर लगभग 47 करोड़ की 45 अचल संपत्तियां खरीदी थीं। इससे पहले, ED ने 39 करोड़ की 29 अचल संपत्तियां जब्त की थी।

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला केस में शामिल 28 आबकारी अधिकारी EOW कोर्ट में पेश हुए।

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला केस में शामिल 28 आबकारी अधिकारी EOW कोर्ट में पेश हुए।

क्या है पूरा मामला ?

EOW के अनुसार, छत्तीसगढ़ में 3200 करोड़ रुपए का शराब घोटाला हुआ है। घोटाले में शामिल आबकारी विभाग के 28 अधिकारियों के खिलाफ चालान पेश किया गया, जिनमें से 7 रिटायर हो चुके हैं और 22 निलंबित किए गए हैं। इन पर 2019-2023 के बीच 80 करोड़ रुपए की वसूली का आरोप है।

हाईकोर्ट से 18 अगस्त को अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद सभी अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद सभी 28 अफसरों को शर्तों के साथ जमानत दी थी। इसी आदेश के तहत आज सभी रायपुर की EOW कोर्ट में पेश हुए।

रायपुर की EOW कोर्ट में पेश होने के लिए आए आबकारी अधिकारियों की तस्वीर।

रायपुर की EOW कोर्ट में पेश होने के लिए आए आबकारी अधिकारियों की तस्वीर।

क्या है ‘बी-पार्ट शराब’ घोटाला ?

वर्ष 2019 से 2023 के बीच राज्य के 15 बड़े जिलों में पदस्थ आबकारी अधिकारियों ने देसी शराब (B-Part शराब) की अवैध बिक्री कराई। बस्तर और सरगुजा संभाग को छोड़कर बाकी चयनित जिलों में अधिक खपत वाली दुकानों को डिस्टलरी से सीधे अतिरिक्त अवैध शराब भेजी जाती थी, जिसे वैध शराब के साथ बेचा जाता था।

इस नेटवर्क में डिस्टलरी, ट्रांसपोर्टर, सेल्समैन, सुपरवाइजर, आबकारी विभाग के जिला प्रभारी अधिकारी, मैन पावर एजेंसी के अधिकारी-कर्मचारी शामिल थे। इस अवैध शराब को ‘बी-पार्ट शराब’ कहा जाता था। इससे होने वाली रकम सीधे सिंडिकेट तक पहुंचती थी।

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छत्तीसगढ़

मंत्री गजेंद्र बोले- देशहित में धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा वापस लें:रमन सिंह ने कहा- फैसला जरूरी था, भूपेश बोले- Gen-Z नरसिंह अवतार, मोदी सरकार हिरण्यकश्यप

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रायपुर, एजेंसी। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। NEET पेपर लीक केस में उनके इस्तीफे की मांग करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी पिछले 36 दिन से जंतर-मंतर पर धरना दे रही थी। इस पर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने X पर लिखा- एक प्रधान का इस्तीफा हो गया है। ये भारत के युवाओं की जीत है।

इसके अलावा भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार की तुलना ‘हिरण्यकश्यप’ से की और Gen Z को नरसिंह अवतार बताया। बघेल ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देशभर के छात्रों की जीत है और यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की हार है।

छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने भी प्रधान के इस्तीफे का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन को शांत करने के लिए ये फैसला जरूरी था। वहीं प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा नहीं देना चाहिए था।

यादव ने आगे कहा कि बड़े मंत्रालय में हजारों अधिकारी और कर्मचारी काम करते हैं। ऐसे में अगर कहीं कोई चूक होती है तो उसके लिए सीधे मंत्री को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। देशहित में धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा वापस लेना चाहिए।

इधर, बिलासपुर में छात्रों और युवा संगठनों ने ‘विजय रैली’ निकाली। रैली के दौरान स्टूडेंट्स ने ‘छात्र एकता जिंदाबाद’ और ’एनटीए (NTA) रद्द करो’ के नारे लगाए। वहीं, छात्रों का कहना है कि लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है, लड़ाई अभी भी बाकी है।

भूपेश बघेल ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को युवाओं की जीत बताया।
भूपेश बघेल ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को युवाओं की जीत बताया।

भूपेल बोले- छात्र नरसिंह के अवतार में आए

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि भाजपा की ट्रोल टीम ने सोनम वांगचुक को चीन का ऐजेंट बता दिया था और मंत्री उनको जूस पिला रहे थे। इनकी स्थिति यह है कि जब जरूरत पड़े तो ये किसी को भी अपना बाप बना ले। छात्रों के आगे किसी एजेंसी की नहीं चली। छात्र नरसिंह के अवतार में आए हैं।

रमन सिंह बोले- आंदोलन शांत करने जरूरी था फैसला

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि जिस विषय को लेकर पूरी दुनिया भर में हल्ला मचाया जा रहा था, उसकी इतिश्री हो गई। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह ने कहा है कि इस मामले में सख्त से सख्त कानून बनाया जाएगा। 10 करोड़ और 10 साल की सजा जैसे कठोर कानून आने वाले समय में बनाएंगे जाएंगे ताकि किसी के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं हो।

गजेंद्र यादव बोले- देशहित में इस्तीफा वापस लें प्रधान

डॉ रमन सिंह के बयान के कुछ ही समय बाद प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने इससे बिल्कुल अलग राय रखी। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा नहीं देना चाहिए था। जब एक बार जांच के लिए कमेटी गठित हो गई है, फास्ट ट्रैक कोर्ट बना दिया गया है, तो उसके बाद मुझे ऐसा लगता है कि धर्मेन्द्र प्रधान को इस्तीफा नहीं देना चाहिए। बल्कि देशहित में इस्तीफा वापस ले लेना चाहिए।

12 साल में पहली बार विरोध के बाद मंत्री का इस्तीफा

2014 में पहली बार मोदी सरकार बनने के बाद 12 साल के कार्यकाल में धर्मेंद्र प्रधान पहले मंत्री हैं, जिन्हें विरोध के चलते इस्तीफा देना पड़ा है। हालांकि, इससे पहले 2018 में विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने इस्तीफा दिया था, लेकिन तब दुनियाभर में ‘मी टू’ आंदोलन चल रहा था और अकबर पर पत्रकारिता के दिनों में यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे।

मौजूदा पेपर लीक रोकने का कानून, 4 पॉइंट

जून 2024 तक पेपर लीक के लिए कोई एक सेंट्रल कानून नहीं था। धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और जालसाजी जैसी धाराओं में मुकदमा दर्ज होता था। इनमें जमानत की कोई सख्त शर्तें नहीं हैं।

कुछ राज्यों ने अलग से नकल-विरोधी भी कानून बनाए, मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट भी शामिल किया। उत्तर प्रदेश में कुछ मामलों में गैंगस्टर एक्ट भी लगाया गया।

NEET-UG और UGC के एग्जाम में धांधली के बाद 21 जून 2024 को केंद्र सरकार ने सार्वजानिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम लागू किया। इसमें पेपर लीक, मदद करना, गलत तरीके से OMR शीट हासिल करना, नकल करवाना, एग्जाम से जुड़ी फर्जी वेबसाइट बनाने या परीक्षक को धमकी को सजा के दायरे लाया गया।

ये सभी अपराध गैर-जमानती हैं, इनमें दो कैटेगरी में सजा का प्रावधान है। पहला- पेपर लीक वगैरह करने पर 3 से 5 साल की सजा और 10 लाख तक का जुर्माना हो सकता है। दूसरा- एग्जाम करवाने वाली संस्था या एजेंसी के डायरेक्टर या मैनेजमेंट के ऑफिसर्स ने कोई अपराध किया, तो 3 से 10 साल तक की जेल और एक करोड़ का जुर्माना हो सकता है।

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छत्तीसगढ़

शराब कारोबारी के घर ED-IT की रेड:बलौदाबाजार में राघवेंद्र-रूपेश सराफ के ठिकानों पर छापा, 2 दिन से जारी है कार्रवाई

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बलौदाबाजार, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आयकर विभाग (IT) की संयुक्त टीम ने कारोबारी राजकुमार सराफ के बेटों के घर पर दबिश दी है। राघवेंद्र सराफ और रूपेश सराफ शराब और जमीन कारोबारी है, उनकी पीतल की फैक्ट्री भी है। कार्रवाई के दौरान अफसर दस्तावेज खंगाल रहे हैं।

दरअसल, ईडी अधिकारियों ने 24 जुलाई की रात ही बलौदाबाजार पहुंचकर कारोबारी के घर की निगरानी शुरू कर दी थी। अगले दिन रविवार सुबह टीम ने घर में एंट्री कर तलाशी ली। जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई ED की रेड के बाद आयकर विभाग की टीम ने संयुक्त रूप से की है।

बैंक-संपत्ति समेत कई दस्तावेज खंगाल रही टीम

छापेमारी के दौरान अधिकारी घर के हर कमरे की बारीकी से जांच कर रहे हैं। कई दस्तावेज खंगाले गए, जिनमें डायरी, बैंक खातों के विवरण, संपत्ति से जुड़े कागजात और अन्य महत्वपूर्ण रिकॉर्ड शामिल हैं। परिवार के सदस्यों और कारोबार से जुड़े लोगों से भी पूछताछ की जा रही है।

शहर के बड़े कारोबारी थे राजकुमार सराफ

राजकुमार सराफ शहर के जाने-माने कारोबारी थे। उनके कई व्यापारिक प्रतिष्ठान हैं। राजकुमार के निधन के बाद उनके बेटे राघवेंद्र सराफ और रूपेश सराफ कारोबार चला रहे हैं।

अधिकारियों को बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं की आशंका है, जिसके चलते यह कार्रवाई की जा रही है। शनिवार को ED की टीम को कुछ अहम दस्तावेज मिले थे, जिनके आधार पर IT विभाग ने फिर अतिरिक्त कार्रवाई शुरू की है।

पुलिस जवान तैनात

इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों में काफी चर्चा है। कारोबारी के घर के बाहर अधिकारियों के साथ पुलिस जवान भी तैनात है। आसपास के लोग दूर से ही घटनाक्रम को देख रहे थे। फिलहाल, जांच जारी है और टीम पूरे मामले की गंभीरता से पड़ताल कर रही है।

कोई अधिकारिक बयान नहीं आया

हालांकि, अधिकारियों की ओर से अभी तक छापे के कारणों और जांच के संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है। जांच के दौरान क्या कुछ मिला, इसे लेकर सफाई नहीं दी गई है।

बताया जा रहा है कि छापेमारी में कई अहम दस्तावेज जब्त किए गए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।

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छत्तीसगढ़

पूजा-पाठ से कैंसर ठीक करने का दावा,13 लाख ठगे:टीवी-विज्ञापन से फंसा परिवार, सोना गिरवी रखा, कर्ज लिया, पैसे मांगने पर CBI का डर दिखाया

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बालोद, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बालोद में महिला और उसका परिवार टीवी पर दिखाए गए ज्योतिष के विज्ञापन के झांसे में आ गया। आरोप है कि ठगों ने पूजा-पाठ से चौथे स्टेज का कैंसर ठीक करने का दावा किया और महिला से अलग-अलग खातों में 13 लाख 13 हजार 673 रुपए जमा करा लिए।

जब पति की तबीयत में कोई सुधार नहीं हुआ और पत्नी ने पैसे वापस मांगे। ऐसे में आरोपियों ने पुलिस, सीबीआई और हत्या के मामले में फंसाने की धमकी दी। महिला ने पति के इलाज की उम्मीद में अपना सोना गिरवी रखा और परिचितों से कर्ज लेकर यह रकम जुटाई।

महिला की शिकायत पर पुलिस ने उत्तर प्रदेश के वेद प्रकाश तिवारी, सृजन तिवारी, राहुल तिवारी समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक, ठगी का यह सिलसिला 28 नवंबर 2024 से 30 मई 2026 तक चलता रहा। मामला रनचिरई थाना क्षेत्र के ग्राम सिर्री का है।

पीड़ित महिला का नाम प्रेमलता चंद्राकर (55) है। उनका परिवार खेती-किसानी करता है। उन्होंने पुलिस को बताया कि उनके पति ऋषि चंद्राकर चौथे स्टेज के कैंसर से पीड़ित हैं। धार्मिक चैनल पर पं. वेद प्रकाश तिवारी की लक्ष्मी नारायण ज्योतिष संस्था का विज्ञापन देखने के बाद उन्होंने दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क किया।

आरोप है कि बातचीत के दौरान उन्हें भरोसा दिलाया गया कि पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों से उनके पति पूरी तरह ठीक हो जाएंगे। इसके बाद अलग-अलग पूजा और अनुष्ठानों के नाम पर उनसे पैसे मांगे जाने लगे। आरोपी राहुल तिवारी ने सबसे पहले बारकोड के जरिए 30 हजार रुपए जमा कराए।

इसके बाद 28 नवंबर 2024 को फोन-पे के माध्यम से 18 हजार रुपए और भेजने के लिए कहा गया। पति के स्वस्थ होने की उम्मीद में प्रेमलता चंद्राकर ने अलग-अलग बैंक खातों, फोन-पे, गूगल-पे और अन्य ऑनलाइन माध्यमों से लगातार रकम भेजी।

बेटी और परिचितों के खातों से भी भेजी रकम

प्रेमलता चंद्राकर ने बताया कि बेटी रूही चंद्राकर से 2.30 लाख रुपए, परिचित अमन देवांगन के जरिए 7 लाख 40 हजार 673 रुपए, नेहुल निर्मल से 25 हजार रुपए, तुषार साहू से 40 हजार रुपए, जयंत देशमुख से 73 हजार रुपए और छत्रपाल साहू से 2.05 लाख रुपए आरोपियों के बताए खातों और मोबाइल नंबरों पर ट्रांसफर कराए। इस तरह कुल 13 लाख 13 हजार 673 रुपए भेजे गए।

पैसे लौटाने का झांसा देकर फिर किया संपर्क

आरोप है कि बाद में पं. वेद प्रकाश तिवारी के नाम से फिर फोन आया। कॉल करने वाले ने कहा कि संस्था के कुछ लोगों ने उनके नाम का गलत इस्तेमाल कर ठगी की है। उसने भरोसा दिलाया कि महिला की पूरी रकम 2 महीने के भीतर वापस करा दी जाएगी।

पुलिस और CBI का डर दिखाकर फिर मांगे रुपए

प्रेमलता चंद्राकर का आरोप है कि बाद में उन्हें बताया गया कि राहुल तिवारी के पिता ने आत्महत्या कर ली है और सुसाइड नोट में उसका और वेद प्रकाश तिवारी का नाम लिखा है।

आरोपियों ने कहा कि अगर पैसे नहीं दिए गए तो उत्तर प्रदेश पुलिस उसके घर पहुंचेगी, सीबीआई जांच होगी और उसे हत्या के मामले में फंसा दिया जाएगा। डर दिखाकर उससे फिर ऑनलाइन पैसे मांगे गए।

पति की बीमारी का उठाया फायदा

पीड़िता ने पुलिस को बताया कि उनके पति चौथे स्टेज के कैंसर से पीड़ित हैं। उन्हें बचाने की उम्मीद में उसने सोना गिरवी रखा और कई लोगों से कर्ज लेकर पैसे जुटाए। आरोप है कि ठगों ने उनकी मजबूरी और भावनात्मक स्थिति का फायदा उठाया। इस दौरान उन्होंने महिला का फोटो, आधार कार्ड और पैन कार्ड भी व्हाट्सऐप पर मंगवा लिया।

कई मोबाइल नंबरों पर किए गए ट्रांजेक्शन

एफआईआर में महिला ने नवंबर 2024 से मई 2026 के बीच अलग-अलग मोबाइल नंबरों और यूपीआई आईडी पर किए गए कई ट्रांजेक्शन की जानकारी पुलिस को दी है। सबसे ज्यादा रकम अमन देवांगन के बैंक खातों के जरिए भेजी गई। इसके अलावा बेटी और अन्य परिचितों के माध्यम से भी कई बार पैसे ट्रांसफर किए गए।

ASP बोलीं- केस दर्ज, जांच जारी

एएसपी मोनिका ठाकुर ने बताया कि महिला की शिकायत पर रनचिरई थाने में वेद प्रकाश तिवारी, सृजन तिवारी, राहुल तिवारी और अन्य आरोपियों के खिलाफ BNS की धारा 3(5) और 318(4) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस जांच कर रही है और जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी।

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छत्तीसगढ़

शराब घोटाला…भूपेश के बेटे चैतन्य बघेल की अग्रिम-जमानत याचिका खारिज:गिरफ्तारी की तैयारी में EOW, प्रोडक्शन वारंट के लिए कोर्ट में लगाएगी

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रायपुर,एजेंसी। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल ने अग्रिम जमानत याचिका सोमवार को ACB-EOW कोर्ट ने खारिज कर दी है। याचिका खारिज होने के बाद EOW ने अब चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी की तैयारी तेज कर दी है।

EOW ने इससे पहले ही चैतन्य की गिरफ्तारी के लिए प्रोडक्शन वारंट लगाया था। लेकिन उस दौरान चैतन्य के वकील की ओर से हाईकोर्ट में गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत अर्जी लगाई थी। लेकिन कोर्ट से अग्रिम जमानत याचिका के बाद अब EOW की ओर से जल्द ही कोर्ट में प्रोडक्शन वारंट एप्लिकेशन लगाया जाएगा।

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छत्तीसगढ़

मंत्री गजेंद्र बोले- देशहित में धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा वापस लें:रमन सिंह ने कहा- फैसला जरूरी था, भूपेश बोले- Gen-Z नरसिंह अवतार, मोदी सरकार हिरण्यकश्यप

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रायपुर, एजेंसी। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। NEET पेपर लीक केस में उनके इस्तीफे की मांग करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी पिछले 36 दिन से जंतर-मंतर पर धरना दे रही थी। इस पर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने X पर लिखा- एक प्रधान का इस्तीफा हो गया है। ये भारत के युवाओं की जीत है।

इसके अलावा भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार की तुलना ‘हिरण्यकश्यप’ से की और Gen Z को नरसिंह अवतार बताया। बघेल ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देशभर के छात्रों की जीत है और यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की हार है।

छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने भी प्रधान के इस्तीफे का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन को शांत करने के लिए ये फैसला जरूरी था। वहीं प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा नहीं देना चाहिए था।

यादव ने आगे कहा कि बड़े मंत्रालय में हजारों अधिकारी और कर्मचारी काम करते हैं। ऐसे में अगर कहीं कोई चूक होती है तो उसके लिए सीधे मंत्री को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। देशहित में धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा वापस लेना चाहिए।

इधर, बिलासपुर में छात्रों और युवा संगठनों ने ‘विजय रैली’ निकाली। रैली के दौरान स्टूडेंट्स ने ‘छात्र एकता जिंदाबाद’ और ’एनटीए (NTA) रद्द करो’ के नारे लगाए। वहीं, छात्रों का कहना है कि लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है, लड़ाई अभी भी बाकी है।

भूपेश बघेल ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को युवाओं की जीत बताया।
भूपेश बघेल ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को युवाओं की जीत बताया।

भूपेल बोले- छात्र नरसिंह के अवतार में आए

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि भाजपा की ट्रोल टीम ने सोनम वांगचुक को चीन का ऐजेंट बता दिया था और मंत्री उनको जूस पिला रहे थे। इनकी स्थिति यह है कि जब जरूरत पड़े तो ये किसी को भी अपना बाप बना ले। छात्रों के आगे किसी एजेंसी की नहीं चली। छात्र नरसिंह के अवतार में आए हैं।

रमन सिंह बोले- आंदोलन शांत करने जरूरी था फैसला

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि जिस विषय को लेकर पूरी दुनिया भर में हल्ला मचाया जा रहा था, उसकी इतिश्री हो गई। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह ने कहा है कि इस मामले में सख्त से सख्त कानून बनाया जाएगा। 10 करोड़ और 10 साल की सजा जैसे कठोर कानून आने वाले समय में बनाएंगे जाएंगे ताकि किसी के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं हो।

गजेंद्र यादव बोले- देशहित में इस्तीफा वापस लें प्रधान

डॉ रमन सिंह के बयान के कुछ ही समय बाद प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने इससे बिल्कुल अलग राय रखी। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा नहीं देना चाहिए था। जब एक बार जांच के लिए कमेटी गठित हो गई है, फास्ट ट्रैक कोर्ट बना दिया गया है, तो उसके बाद मुझे ऐसा लगता है कि धर्मेन्द्र प्रधान को इस्तीफा नहीं देना चाहिए। बल्कि देशहित में इस्तीफा वापस ले लेना चाहिए।

12 साल में पहली बार विरोध के बाद मंत्री का इस्तीफा

2014 में पहली बार मोदी सरकार बनने के बाद 12 साल के कार्यकाल में धर्मेंद्र प्रधान पहले मंत्री हैं, जिन्हें विरोध के चलते इस्तीफा देना पड़ा है। हालांकि, इससे पहले 2018 में विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने इस्तीफा दिया था, लेकिन तब दुनियाभर में ‘मी टू’ आंदोलन चल रहा था और अकबर पर पत्रकारिता के दिनों में यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे।

मौजूदा पेपर लीक रोकने का कानून, 4 पॉइंट

जून 2024 तक पेपर लीक के लिए कोई एक सेंट्रल कानून नहीं था। धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और जालसाजी जैसी धाराओं में मुकदमा दर्ज होता था। इनमें जमानत की कोई सख्त शर्तें नहीं हैं।

कुछ राज्यों ने अलग से नकल-विरोधी भी कानून बनाए, मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट भी शामिल किया। उत्तर प्रदेश में कुछ मामलों में गैंगस्टर एक्ट भी लगाया गया।

NEET-UG और UGC के एग्जाम में धांधली के बाद 21 जून 2024 को केंद्र सरकार ने सार्वजानिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम लागू किया। इसमें पेपर लीक, मदद करना, गलत तरीके से OMR शीट हासिल करना, नकल करवाना, एग्जाम से जुड़ी फर्जी वेबसाइट बनाने या परीक्षक को धमकी को सजा के दायरे लाया गया।

ये सभी अपराध गैर-जमानती हैं, इनमें दो कैटेगरी में सजा का प्रावधान है। पहला- पेपर लीक वगैरह करने पर 3 से 5 साल की सजा और 10 लाख तक का जुर्माना हो सकता है। दूसरा- एग्जाम करवाने वाली संस्था या एजेंसी के डायरेक्टर या मैनेजमेंट के ऑफिसर्स ने कोई अपराध किया, तो 3 से 10 साल तक की जेल और एक करोड़ का जुर्माना हो सकता है।

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शराब कारोबारी के घर ED-IT की रेड:बलौदाबाजार में राघवेंद्र-रूपेश सराफ के ठिकानों पर छापा, 2 दिन से जारी है कार्रवाई

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बलौदाबाजार, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आयकर विभाग (IT) की संयुक्त टीम ने कारोबारी राजकुमार सराफ के बेटों के घर पर दबिश दी है। राघवेंद्र सराफ और रूपेश सराफ शराब और जमीन कारोबारी है, उनकी पीतल की फैक्ट्री भी है। कार्रवाई के दौरान अफसर दस्तावेज खंगाल रहे हैं।

दरअसल, ईडी अधिकारियों ने 24 जुलाई की रात ही बलौदाबाजार पहुंचकर कारोबारी के घर की निगरानी शुरू कर दी थी। अगले दिन रविवार सुबह टीम ने घर में एंट्री कर तलाशी ली। जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई ED की रेड के बाद आयकर विभाग की टीम ने संयुक्त रूप से की है।

बैंक-संपत्ति समेत कई दस्तावेज खंगाल रही टीम

छापेमारी के दौरान अधिकारी घर के हर कमरे की बारीकी से जांच कर रहे हैं। कई दस्तावेज खंगाले गए, जिनमें डायरी, बैंक खातों के विवरण, संपत्ति से जुड़े कागजात और अन्य महत्वपूर्ण रिकॉर्ड शामिल हैं। परिवार के सदस्यों और कारोबार से जुड़े लोगों से भी पूछताछ की जा रही है।

शहर के बड़े कारोबारी थे राजकुमार सराफ

राजकुमार सराफ शहर के जाने-माने कारोबारी थे। उनके कई व्यापारिक प्रतिष्ठान हैं। राजकुमार के निधन के बाद उनके बेटे राघवेंद्र सराफ और रूपेश सराफ कारोबार चला रहे हैं।

अधिकारियों को बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं की आशंका है, जिसके चलते यह कार्रवाई की जा रही है। शनिवार को ED की टीम को कुछ अहम दस्तावेज मिले थे, जिनके आधार पर IT विभाग ने फिर अतिरिक्त कार्रवाई शुरू की है।

पुलिस जवान तैनात

इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों में काफी चर्चा है। कारोबारी के घर के बाहर अधिकारियों के साथ पुलिस जवान भी तैनात है। आसपास के लोग दूर से ही घटनाक्रम को देख रहे थे। फिलहाल, जांच जारी है और टीम पूरे मामले की गंभीरता से पड़ताल कर रही है।

कोई अधिकारिक बयान नहीं आया

हालांकि, अधिकारियों की ओर से अभी तक छापे के कारणों और जांच के संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है। जांच के दौरान क्या कुछ मिला, इसे लेकर सफाई नहीं दी गई है।

बताया जा रहा है कि छापेमारी में कई अहम दस्तावेज जब्त किए गए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।

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छत्तीसगढ़

पूजा-पाठ से कैंसर ठीक करने का दावा,13 लाख ठगे:टीवी-विज्ञापन से फंसा परिवार, सोना गिरवी रखा, कर्ज लिया, पैसे मांगने पर CBI का डर दिखाया

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बालोद, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बालोद में महिला और उसका परिवार टीवी पर दिखाए गए ज्योतिष के विज्ञापन के झांसे में आ गया। आरोप है कि ठगों ने पूजा-पाठ से चौथे स्टेज का कैंसर ठीक करने का दावा किया और महिला से अलग-अलग खातों में 13 लाख 13 हजार 673 रुपए जमा करा लिए।

जब पति की तबीयत में कोई सुधार नहीं हुआ और पत्नी ने पैसे वापस मांगे। ऐसे में आरोपियों ने पुलिस, सीबीआई और हत्या के मामले में फंसाने की धमकी दी। महिला ने पति के इलाज की उम्मीद में अपना सोना गिरवी रखा और परिचितों से कर्ज लेकर यह रकम जुटाई।

महिला की शिकायत पर पुलिस ने उत्तर प्रदेश के वेद प्रकाश तिवारी, सृजन तिवारी, राहुल तिवारी समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक, ठगी का यह सिलसिला 28 नवंबर 2024 से 30 मई 2026 तक चलता रहा। मामला रनचिरई थाना क्षेत्र के ग्राम सिर्री का है।

पीड़ित महिला का नाम प्रेमलता चंद्राकर (55) है। उनका परिवार खेती-किसानी करता है। उन्होंने पुलिस को बताया कि उनके पति ऋषि चंद्राकर चौथे स्टेज के कैंसर से पीड़ित हैं। धार्मिक चैनल पर पं. वेद प्रकाश तिवारी की लक्ष्मी नारायण ज्योतिष संस्था का विज्ञापन देखने के बाद उन्होंने दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क किया।

आरोप है कि बातचीत के दौरान उन्हें भरोसा दिलाया गया कि पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों से उनके पति पूरी तरह ठीक हो जाएंगे। इसके बाद अलग-अलग पूजा और अनुष्ठानों के नाम पर उनसे पैसे मांगे जाने लगे। आरोपी राहुल तिवारी ने सबसे पहले बारकोड के जरिए 30 हजार रुपए जमा कराए।

इसके बाद 28 नवंबर 2024 को फोन-पे के माध्यम से 18 हजार रुपए और भेजने के लिए कहा गया। पति के स्वस्थ होने की उम्मीद में प्रेमलता चंद्राकर ने अलग-अलग बैंक खातों, फोन-पे, गूगल-पे और अन्य ऑनलाइन माध्यमों से लगातार रकम भेजी।

बेटी और परिचितों के खातों से भी भेजी रकम

प्रेमलता चंद्राकर ने बताया कि बेटी रूही चंद्राकर से 2.30 लाख रुपए, परिचित अमन देवांगन के जरिए 7 लाख 40 हजार 673 रुपए, नेहुल निर्मल से 25 हजार रुपए, तुषार साहू से 40 हजार रुपए, जयंत देशमुख से 73 हजार रुपए और छत्रपाल साहू से 2.05 लाख रुपए आरोपियों के बताए खातों और मोबाइल नंबरों पर ट्रांसफर कराए। इस तरह कुल 13 लाख 13 हजार 673 रुपए भेजे गए।

पैसे लौटाने का झांसा देकर फिर किया संपर्क

आरोप है कि बाद में पं. वेद प्रकाश तिवारी के नाम से फिर फोन आया। कॉल करने वाले ने कहा कि संस्था के कुछ लोगों ने उनके नाम का गलत इस्तेमाल कर ठगी की है। उसने भरोसा दिलाया कि महिला की पूरी रकम 2 महीने के भीतर वापस करा दी जाएगी।

पुलिस और CBI का डर दिखाकर फिर मांगे रुपए

प्रेमलता चंद्राकर का आरोप है कि बाद में उन्हें बताया गया कि राहुल तिवारी के पिता ने आत्महत्या कर ली है और सुसाइड नोट में उसका और वेद प्रकाश तिवारी का नाम लिखा है।

आरोपियों ने कहा कि अगर पैसे नहीं दिए गए तो उत्तर प्रदेश पुलिस उसके घर पहुंचेगी, सीबीआई जांच होगी और उसे हत्या के मामले में फंसा दिया जाएगा। डर दिखाकर उससे फिर ऑनलाइन पैसे मांगे गए।

पति की बीमारी का उठाया फायदा

पीड़िता ने पुलिस को बताया कि उनके पति चौथे स्टेज के कैंसर से पीड़ित हैं। उन्हें बचाने की उम्मीद में उसने सोना गिरवी रखा और कई लोगों से कर्ज लेकर पैसे जुटाए। आरोप है कि ठगों ने उनकी मजबूरी और भावनात्मक स्थिति का फायदा उठाया। इस दौरान उन्होंने महिला का फोटो, आधार कार्ड और पैन कार्ड भी व्हाट्सऐप पर मंगवा लिया।

कई मोबाइल नंबरों पर किए गए ट्रांजेक्शन

एफआईआर में महिला ने नवंबर 2024 से मई 2026 के बीच अलग-अलग मोबाइल नंबरों और यूपीआई आईडी पर किए गए कई ट्रांजेक्शन की जानकारी पुलिस को दी है। सबसे ज्यादा रकम अमन देवांगन के बैंक खातों के जरिए भेजी गई। इसके अलावा बेटी और अन्य परिचितों के माध्यम से भी कई बार पैसे ट्रांसफर किए गए।

ASP बोलीं- केस दर्ज, जांच जारी

एएसपी मोनिका ठाकुर ने बताया कि महिला की शिकायत पर रनचिरई थाने में वेद प्रकाश तिवारी, सृजन तिवारी, राहुल तिवारी और अन्य आरोपियों के खिलाफ BNS की धारा 3(5) और 318(4) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस जांच कर रही है और जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी।

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छत्तीसगढ़

शराब घोटाला…भूपेश-चैतन्य को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं:हाईकोर्ट जाने की दी सलाह, कहा- बाकी अदालतें किस लिए, बेटे की 14 दिन बढ़ी रिमांड

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रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनके बेटे चैतन्य बघेल को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। ED के मामलों को लेकर लगाई अग्रिम जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें हाईकोर्ट जाने की सलाह दी है। सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका को सुनने से इनकार कर दिया, वहीं दूसरी याचिका पर सुनवाई 6 अगस्त को होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि दोनों ने एक ही याचिका में PMLA के कई सेक्शन को चुनौती देने के साथ-साथ जमानत जैसी व्यक्तिगत राहत की मांग भी की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि- ‘जब किसी मामले में कोई प्रभावशाली व्यक्ति शामिल होता है तो वो सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख करता है।

यदि हम ही सब केस सुनेंगे तो बाकी अदालतें किस लिए हैं। अगर ऐसा ही होता रहा तो फिर आम आदमी कहां जाएंगे। एक साधारण आदमी और वकील के पास पैरवी के लिए सुप्रीम कोर्ट में कोई स्पेस ही नहीं बचेगा।’

सुप्रीम कोर्ट ने भूपेश बघेल और चैतन्य बघेल को हाईकोर्ट जाने की सलाह दी है।

सुप्रीम कोर्ट ने भूपेश बघेल और चैतन्य बघेल को हाईकोर्ट जाने की सलाह दी है।

बेटे चैतन्य की रिमांड 14 दिन बढ़ी

वहीं शराब घोटाला केस में रायपुर जेल में बंद भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की रिमांड फिर बढ़ गई है। चैतन्य को 18 अगस्त तक 14 दिन की न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। 14 दिन की रिमांड खत्म होने के बाद चैतन्य को सोमवार को ED की विशेष कोर्ट में पेश किया गया था।

बता दें कि छत्तीसगढ़ के शराब, कोयला घोटाला और महादेव सट्टा ऐप मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी जांच के दायरे में हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED), आर्थिक अपराध शाखा (EOW) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) मामले की जांच कर रही है।

गिरफ्तारी से बचने भूपेश बघेल ने सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका लगाई थी। इस मामले की सुनवाई जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉय-माल्या बागची की बेंच में सुनवाई हुई। भूपेश बघेल की ओर 2 अलग-अलग अग्रिम जमानत याचिका लगाई गई थी। जिसमें एक ED और उसके उप निदेशक के खिलाफ है। वहीं, दूसरी याचिका CBI, छत्तीसगढ़ राज्य और उत्तर प्रदेश राज्य के खिलाफ है।

इसके अलावा शराब घोटाला केस में जेल में बंद भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य ने भी सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका लगाई है। उन्होंने ED की गिरफ्तारी को चुनौती दी है। वहीं EOW की गिरफ्तारी से बचने अग्रिम जमानत याचिका भी लगाई है।

राजनीतिक द्वेष में फंसाकर हुई गिरफ्तारी- बघेल

दायर याचिका में पूर्व सीएम बघेल ने कहा कि, जैसे उनके बेटे चैतन्य बघेल को राजनीतिक द्वेष में फंसाकर गिरफ्तार किया गया, वैसे ही उन्हें भी टारगेट किया जा सकता है। बघेल का कहना है कि उनके खिलाफ बदले की भावना से कार्रवाई हो सकती है।

जानिए सुप्रीम कोर्ट में क्या-क्या हुआ

भूपेश बघेल की ED के मामलों को लेकर लगाई 2 याचिकाओं में से याचिका क्रमांक 303 को सुप्रीम कोर्ट ने सुनने से इनकार कर दिया, जिसके बाद वकील अभिषेक मनु सिंघवी यह याचिका वापस ली। वहीं, याचिका क्रमांक 301 पर अब 6 अगस्त को सुनवाई होगी।

क्या है मामला?

भूपेश बघेल ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की कुछ धाराओं की संवैधानिकता को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं। याचिका क्रमांक 303 में उन्होंने मुख्य रूप से धारा 45 की व्याख्या को चुनौती दी थी।

इस पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि, ‘हर बार ऐसे अपवाद केवल प्रभावशाली लोगों के मामलों में क्यों आते हैं? आम नागरिक और वकीलों के लिए फिर इस कोर्ट में क्या जगह बचेगी?”

टीम के जाने के बाद भूपेश बघेल ने बताया था कि 32-33 लाख रुपए और दस्तावेज टीम ले गई है।

टीम के जाने के बाद भूपेश बघेल ने बताया था कि 32-33 लाख रुपए और दस्तावेज टीम ले गई है।

भूपेश बघेल के घर पड़ा था ED का छापा

बता दें कि, शराब घोटाला मामले में 5 महीने पहले ED ने पूर्व CM भूपेश बघेल के घर छापेमारी की थी। यह जांच करीब 10 घंटे तक चली। टीम के जाने के बाद खुद पूर्व सीएम ने बताया था कि, 32-33 लाख रुपए और दस्तावेज टीम ले गई थी।

सुबह 8 बजे भूपेश और उनके बेटे चैतन्य के भिलाई-3 पदुमनगर स्थित घर पर 4 गाड़ियों में ED की टीम पहुंची थी। दोपहर में कार्रवाई के बीच नोट गिनने और सोना जांचने की मशीनें भी मंगाई गई। इस बीच ED की कार पर बाहर कुछ लोगों ने पथराव कर दिया। कार्यकर्ताओं और पुलिस की झड़प भी हुई थी।

इसी दिन भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल से जुड़े कई ठिकानों समेत 14 जगहों पर छापे पड़े थे। 2100 करोड़ रुपए के शराब घोटाले में चैतन्य बघेल को भी लाभ पहुंचाने का दावा किया गया। चैतन्य के करीबी और सहयोगी लक्ष्मीनारायण बंसल और ​पप्पू बंसल के ठिकानों पर भी कार्रवाई हुई थी।

इसके अलावा भिलाई के नेहरू नगर में मनोज राजपूत, चरोदा में अभिषेक ठाकुर और संदीप सिंह, कमल अग्रवाल किशोर राइस मिल दुर्ग, सुनील अग्रवाल सहेली ज्वेलर्स दुर्ग और बिल्डर अजय चौहान के यहां भी ED की कार्रवाई हुई थी।

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छत्तीसगढ़

मंत्री गजेंद्र बोले- देशहित में धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा वापस लें:रमन सिंह ने कहा- फैसला जरूरी था, भूपेश बोले- Gen-Z नरसिंह अवतार, मोदी सरकार हिरण्यकश्यप

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रायपुर, एजेंसी। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। NEET पेपर लीक केस में उनके इस्तीफे की मांग करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी पिछले 36 दिन से जंतर-मंतर पर धरना दे रही थी। इस पर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने X पर लिखा- एक प्रधान का इस्तीफा हो गया है। ये भारत के युवाओं की जीत है।

इसके अलावा भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार की तुलना ‘हिरण्यकश्यप’ से की और Gen Z को नरसिंह अवतार बताया। बघेल ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देशभर के छात्रों की जीत है और यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की हार है।

छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने भी प्रधान के इस्तीफे का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन को शांत करने के लिए ये फैसला जरूरी था। वहीं प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा नहीं देना चाहिए था।

यादव ने आगे कहा कि बड़े मंत्रालय में हजारों अधिकारी और कर्मचारी काम करते हैं। ऐसे में अगर कहीं कोई चूक होती है तो उसके लिए सीधे मंत्री को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। देशहित में धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा वापस लेना चाहिए।

इधर, बिलासपुर में छात्रों और युवा संगठनों ने ‘विजय रैली’ निकाली। रैली के दौरान स्टूडेंट्स ने ‘छात्र एकता जिंदाबाद’ और ’एनटीए (NTA) रद्द करो’ के नारे लगाए। वहीं, छात्रों का कहना है कि लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है, लड़ाई अभी भी बाकी है।

भूपेश बघेल ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को युवाओं की जीत बताया।
भूपेश बघेल ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को युवाओं की जीत बताया।

भूपेल बोले- छात्र नरसिंह के अवतार में आए

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि भाजपा की ट्रोल टीम ने सोनम वांगचुक को चीन का ऐजेंट बता दिया था और मंत्री उनको जूस पिला रहे थे। इनकी स्थिति यह है कि जब जरूरत पड़े तो ये किसी को भी अपना बाप बना ले। छात्रों के आगे किसी एजेंसी की नहीं चली। छात्र नरसिंह के अवतार में आए हैं।

रमन सिंह बोले- आंदोलन शांत करने जरूरी था फैसला

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि जिस विषय को लेकर पूरी दुनिया भर में हल्ला मचाया जा रहा था, उसकी इतिश्री हो गई। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह ने कहा है कि इस मामले में सख्त से सख्त कानून बनाया जाएगा। 10 करोड़ और 10 साल की सजा जैसे कठोर कानून आने वाले समय में बनाएंगे जाएंगे ताकि किसी के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं हो।

गजेंद्र यादव बोले- देशहित में इस्तीफा वापस लें प्रधान

डॉ रमन सिंह के बयान के कुछ ही समय बाद प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने इससे बिल्कुल अलग राय रखी। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा नहीं देना चाहिए था। जब एक बार जांच के लिए कमेटी गठित हो गई है, फास्ट ट्रैक कोर्ट बना दिया गया है, तो उसके बाद मुझे ऐसा लगता है कि धर्मेन्द्र प्रधान को इस्तीफा नहीं देना चाहिए। बल्कि देशहित में इस्तीफा वापस ले लेना चाहिए।

12 साल में पहली बार विरोध के बाद मंत्री का इस्तीफा

2014 में पहली बार मोदी सरकार बनने के बाद 12 साल के कार्यकाल में धर्मेंद्र प्रधान पहले मंत्री हैं, जिन्हें विरोध के चलते इस्तीफा देना पड़ा है। हालांकि, इससे पहले 2018 में विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने इस्तीफा दिया था, लेकिन तब दुनियाभर में ‘मी टू’ आंदोलन चल रहा था और अकबर पर पत्रकारिता के दिनों में यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे।

मौजूदा पेपर लीक रोकने का कानून, 4 पॉइंट

जून 2024 तक पेपर लीक के लिए कोई एक सेंट्रल कानून नहीं था। धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और जालसाजी जैसी धाराओं में मुकदमा दर्ज होता था। इनमें जमानत की कोई सख्त शर्तें नहीं हैं।

कुछ राज्यों ने अलग से नकल-विरोधी भी कानून बनाए, मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट भी शामिल किया। उत्तर प्रदेश में कुछ मामलों में गैंगस्टर एक्ट भी लगाया गया।

NEET-UG और UGC के एग्जाम में धांधली के बाद 21 जून 2024 को केंद्र सरकार ने सार्वजानिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम लागू किया। इसमें पेपर लीक, मदद करना, गलत तरीके से OMR शीट हासिल करना, नकल करवाना, एग्जाम से जुड़ी फर्जी वेबसाइट बनाने या परीक्षक को धमकी को सजा के दायरे लाया गया।

ये सभी अपराध गैर-जमानती हैं, इनमें दो कैटेगरी में सजा का प्रावधान है। पहला- पेपर लीक वगैरह करने पर 3 से 5 साल की सजा और 10 लाख तक का जुर्माना हो सकता है। दूसरा- एग्जाम करवाने वाली संस्था या एजेंसी के डायरेक्टर या मैनेजमेंट के ऑफिसर्स ने कोई अपराध किया, तो 3 से 10 साल तक की जेल और एक करोड़ का जुर्माना हो सकता है।

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छत्तीसगढ़

शराब कारोबारी के घर ED-IT की रेड:बलौदाबाजार में राघवेंद्र-रूपेश सराफ के ठिकानों पर छापा, 2 दिन से जारी है कार्रवाई

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बलौदाबाजार, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आयकर विभाग (IT) की संयुक्त टीम ने कारोबारी राजकुमार सराफ के बेटों के घर पर दबिश दी है। राघवेंद्र सराफ और रूपेश सराफ शराब और जमीन कारोबारी है, उनकी पीतल की फैक्ट्री भी है। कार्रवाई के दौरान अफसर दस्तावेज खंगाल रहे हैं।

दरअसल, ईडी अधिकारियों ने 24 जुलाई की रात ही बलौदाबाजार पहुंचकर कारोबारी के घर की निगरानी शुरू कर दी थी। अगले दिन रविवार सुबह टीम ने घर में एंट्री कर तलाशी ली। जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई ED की रेड के बाद आयकर विभाग की टीम ने संयुक्त रूप से की है।

बैंक-संपत्ति समेत कई दस्तावेज खंगाल रही टीम

छापेमारी के दौरान अधिकारी घर के हर कमरे की बारीकी से जांच कर रहे हैं। कई दस्तावेज खंगाले गए, जिनमें डायरी, बैंक खातों के विवरण, संपत्ति से जुड़े कागजात और अन्य महत्वपूर्ण रिकॉर्ड शामिल हैं। परिवार के सदस्यों और कारोबार से जुड़े लोगों से भी पूछताछ की जा रही है।

शहर के बड़े कारोबारी थे राजकुमार सराफ

राजकुमार सराफ शहर के जाने-माने कारोबारी थे। उनके कई व्यापारिक प्रतिष्ठान हैं। राजकुमार के निधन के बाद उनके बेटे राघवेंद्र सराफ और रूपेश सराफ कारोबार चला रहे हैं।

अधिकारियों को बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं की आशंका है, जिसके चलते यह कार्रवाई की जा रही है। शनिवार को ED की टीम को कुछ अहम दस्तावेज मिले थे, जिनके आधार पर IT विभाग ने फिर अतिरिक्त कार्रवाई शुरू की है।

पुलिस जवान तैनात

इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों में काफी चर्चा है। कारोबारी के घर के बाहर अधिकारियों के साथ पुलिस जवान भी तैनात है। आसपास के लोग दूर से ही घटनाक्रम को देख रहे थे। फिलहाल, जांच जारी है और टीम पूरे मामले की गंभीरता से पड़ताल कर रही है।

कोई अधिकारिक बयान नहीं आया

हालांकि, अधिकारियों की ओर से अभी तक छापे के कारणों और जांच के संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है। जांच के दौरान क्या कुछ मिला, इसे लेकर सफाई नहीं दी गई है।

बताया जा रहा है कि छापेमारी में कई अहम दस्तावेज जब्त किए गए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।

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छत्तीसगढ़

पूजा-पाठ से कैंसर ठीक करने का दावा,13 लाख ठगे:टीवी-विज्ञापन से फंसा परिवार, सोना गिरवी रखा, कर्ज लिया, पैसे मांगने पर CBI का डर दिखाया

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बालोद, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बालोद में महिला और उसका परिवार टीवी पर दिखाए गए ज्योतिष के विज्ञापन के झांसे में आ गया। आरोप है कि ठगों ने पूजा-पाठ से चौथे स्टेज का कैंसर ठीक करने का दावा किया और महिला से अलग-अलग खातों में 13 लाख 13 हजार 673 रुपए जमा करा लिए।

जब पति की तबीयत में कोई सुधार नहीं हुआ और पत्नी ने पैसे वापस मांगे। ऐसे में आरोपियों ने पुलिस, सीबीआई और हत्या के मामले में फंसाने की धमकी दी। महिला ने पति के इलाज की उम्मीद में अपना सोना गिरवी रखा और परिचितों से कर्ज लेकर यह रकम जुटाई।

महिला की शिकायत पर पुलिस ने उत्तर प्रदेश के वेद प्रकाश तिवारी, सृजन तिवारी, राहुल तिवारी समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक, ठगी का यह सिलसिला 28 नवंबर 2024 से 30 मई 2026 तक चलता रहा। मामला रनचिरई थाना क्षेत्र के ग्राम सिर्री का है।

पीड़ित महिला का नाम प्रेमलता चंद्राकर (55) है। उनका परिवार खेती-किसानी करता है। उन्होंने पुलिस को बताया कि उनके पति ऋषि चंद्राकर चौथे स्टेज के कैंसर से पीड़ित हैं। धार्मिक चैनल पर पं. वेद प्रकाश तिवारी की लक्ष्मी नारायण ज्योतिष संस्था का विज्ञापन देखने के बाद उन्होंने दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क किया।

आरोप है कि बातचीत के दौरान उन्हें भरोसा दिलाया गया कि पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों से उनके पति पूरी तरह ठीक हो जाएंगे। इसके बाद अलग-अलग पूजा और अनुष्ठानों के नाम पर उनसे पैसे मांगे जाने लगे। आरोपी राहुल तिवारी ने सबसे पहले बारकोड के जरिए 30 हजार रुपए जमा कराए।

इसके बाद 28 नवंबर 2024 को फोन-पे के माध्यम से 18 हजार रुपए और भेजने के लिए कहा गया। पति के स्वस्थ होने की उम्मीद में प्रेमलता चंद्राकर ने अलग-अलग बैंक खातों, फोन-पे, गूगल-पे और अन्य ऑनलाइन माध्यमों से लगातार रकम भेजी।

बेटी और परिचितों के खातों से भी भेजी रकम

प्रेमलता चंद्राकर ने बताया कि बेटी रूही चंद्राकर से 2.30 लाख रुपए, परिचित अमन देवांगन के जरिए 7 लाख 40 हजार 673 रुपए, नेहुल निर्मल से 25 हजार रुपए, तुषार साहू से 40 हजार रुपए, जयंत देशमुख से 73 हजार रुपए और छत्रपाल साहू से 2.05 लाख रुपए आरोपियों के बताए खातों और मोबाइल नंबरों पर ट्रांसफर कराए। इस तरह कुल 13 लाख 13 हजार 673 रुपए भेजे गए।

पैसे लौटाने का झांसा देकर फिर किया संपर्क

आरोप है कि बाद में पं. वेद प्रकाश तिवारी के नाम से फिर फोन आया। कॉल करने वाले ने कहा कि संस्था के कुछ लोगों ने उनके नाम का गलत इस्तेमाल कर ठगी की है। उसने भरोसा दिलाया कि महिला की पूरी रकम 2 महीने के भीतर वापस करा दी जाएगी।

पुलिस और CBI का डर दिखाकर फिर मांगे रुपए

प्रेमलता चंद्राकर का आरोप है कि बाद में उन्हें बताया गया कि राहुल तिवारी के पिता ने आत्महत्या कर ली है और सुसाइड नोट में उसका और वेद प्रकाश तिवारी का नाम लिखा है।

आरोपियों ने कहा कि अगर पैसे नहीं दिए गए तो उत्तर प्रदेश पुलिस उसके घर पहुंचेगी, सीबीआई जांच होगी और उसे हत्या के मामले में फंसा दिया जाएगा। डर दिखाकर उससे फिर ऑनलाइन पैसे मांगे गए।

पति की बीमारी का उठाया फायदा

पीड़िता ने पुलिस को बताया कि उनके पति चौथे स्टेज के कैंसर से पीड़ित हैं। उन्हें बचाने की उम्मीद में उसने सोना गिरवी रखा और कई लोगों से कर्ज लेकर पैसे जुटाए। आरोप है कि ठगों ने उनकी मजबूरी और भावनात्मक स्थिति का फायदा उठाया। इस दौरान उन्होंने महिला का फोटो, आधार कार्ड और पैन कार्ड भी व्हाट्सऐप पर मंगवा लिया।

कई मोबाइल नंबरों पर किए गए ट्रांजेक्शन

एफआईआर में महिला ने नवंबर 2024 से मई 2026 के बीच अलग-अलग मोबाइल नंबरों और यूपीआई आईडी पर किए गए कई ट्रांजेक्शन की जानकारी पुलिस को दी है। सबसे ज्यादा रकम अमन देवांगन के बैंक खातों के जरिए भेजी गई। इसके अलावा बेटी और अन्य परिचितों के माध्यम से भी कई बार पैसे ट्रांसफर किए गए।

ASP बोलीं- केस दर्ज, जांच जारी

एएसपी मोनिका ठाकुर ने बताया कि महिला की शिकायत पर रनचिरई थाने में वेद प्रकाश तिवारी, सृजन तिवारी, राहुल तिवारी और अन्य आरोपियों के खिलाफ BNS की धारा 3(5) और 318(4) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस जांच कर रही है और जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी।

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छत्तीसगढ़

शराब घोटाला…विजय भाटिया दिल्ली से गिरफ्तार:दुर्ग में 6 ठिकानों पर चल रही EOW-ACB की छापेमारी, ED की रेड के बाद से फरार था कारोबारी

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रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ACB-EOW की टीम ने शराब कारोबारी विजय भाटिया को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है। भाटिया को रायपुर लाया जा रहा है। इसके साथ ही EOW की टीम ने दुर्ग-भिलाई में भाटिया के 6 ज्यादा ठिकानों पर छापेमार कार्रवाई चल रही है।

जानकारी के मुताबिक EOW के अधिकारी भिलाई नेहरू नगर स्थित भाटिया के घर पर सुबह 6 बजे छानबीन कर रही है। 2 अलग अलग गाड़ियों में ACB-EOW के 7 अधिकारी पहुंचे हैं। उन्होंने आते ही पूरे घर को चारों तरफ से देखा। इसके बाद घर में रह रहे लोगों से पूछताछ शुरू की।

बताया जा रहा है कि घर के नौकरों को काम करने की छूट दी गई है, लेकिन उनसे भी पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों के साथ महिला पुलिस भी मौजूद है। भाटिया के घर पर 2 साल पहले ED ने छापेमारी की थी, तब से वह फरार चल रहा था। लंबे समय बाद EOW की गिरफ्त में आया है।

ACB-EOW की टीम ने शराब कारोबारी विजय भाटिया को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है। उसके घर पर छापेमारी चल रही है।

ACB-EOW की टीम ने शराब कारोबारी विजय भाटिया को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है। उसके घर पर छापेमारी चल रही है।

दुर्ग-भिलाई में 6 ठिकानों पर ACB-EOW की टीम छापेमारी कर रही है। पुलिस की टीम भी मौके पर मौजूद है।

दुर्ग-भिलाई में 6 ठिकानों पर ACB-EOW की टीम छापेमारी कर रही है। पुलिस की टीम भी मौके पर मौजूद है।

शराब कारोबारी विजय भाटिया के घर सुबह से चल रही है EOW-ACB की छापेमारी।

शराब कारोबारी विजय भाटिया के घर सुबह से चल रही है EOW-ACB की छापेमारी।

एक साथ 4 जगहों पर ED ने की थी छापेमारी

2 साल पहले ED ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बर्थडे के दिन उनके राजनीतिक सलाहकार विनोद वर्मा, ओएसडी आशीष वर्मा, मनीष बंछोर और कारोबारी विजय भाटिया के घर छापेमारी की थी। रेड को लेकर बीजेपी कांग्रेस में खूब बयानबाजी हुई थी।

पूर्व सीएम भूपेश ने इस कार्रवाई को पीएम मोदी की ओर से दिया गया बर्थडे गिफ्ट बताया था। उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री जी और अमित शाह जी। मेरे जन्मदिन के दिन आपने मेरे राजनीतिक सलाहकार और मेरे OSD सहित करीबियों के यहां ED भेजकर जो अमूल्य तोहफा दिया है, इसके लिए बहुत आभार।

भिलाई में कारोबारी अशोक अग्रवाल का घर जहां पड़ा छापा।

भिलाई में कारोबारी अशोक अग्रवाल का घर जहां पड़ा छापा।

12 दिन पहले 39 जगहों पर छापेमारी

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में 12 दिन पहले ACB और EOW ने 39 जगहों पर छापेमारी की थी। इसमें दुर्ग-भिलाई के अलावा धमतरी और महासमुंद में ये कार्रवाई की गई। छापेमारी में 90 लाख रुपए की राशि, सोना-चांदी और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी बरामद किए गए।

ACB और EOW की कई टीमें चार गाड़ियों में सुबह 4 बजे भिलाई पहुंची। एक टीम हाउसिंग बोर्ड स्थित आम्रपाली अपार्टमेंट में अशोक अग्रवाल के घर पहुंची। दूसरी टीम नेहरू नगर में बंसी अग्रवाल और विशाल केजरीवाल के यहां दबिश दी। वहीं खुर्सीपार में विनय अग्रवाल के यहां दस्तावेजों की जांच हुई।

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छत्तीसगढ़

मंत्री गजेंद्र बोले- देशहित में धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा वापस लें:रमन सिंह ने कहा- फैसला जरूरी था, भूपेश बोले- Gen-Z नरसिंह अवतार, मोदी सरकार हिरण्यकश्यप

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रायपुर, एजेंसी। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। NEET पेपर लीक केस में उनके इस्तीफे की मांग करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी पिछले 36 दिन से जंतर-मंतर पर धरना दे रही थी। इस पर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने X पर लिखा- एक प्रधान का इस्तीफा हो गया है। ये भारत के युवाओं की जीत है।

इसके अलावा भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार की तुलना ‘हिरण्यकश्यप’ से की और Gen Z को नरसिंह अवतार बताया। बघेल ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देशभर के छात्रों की जीत है और यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की हार है।

छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने भी प्रधान के इस्तीफे का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन को शांत करने के लिए ये फैसला जरूरी था। वहीं प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा नहीं देना चाहिए था।

यादव ने आगे कहा कि बड़े मंत्रालय में हजारों अधिकारी और कर्मचारी काम करते हैं। ऐसे में अगर कहीं कोई चूक होती है तो उसके लिए सीधे मंत्री को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। देशहित में धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा वापस लेना चाहिए।

इधर, बिलासपुर में छात्रों और युवा संगठनों ने ‘विजय रैली’ निकाली। रैली के दौरान स्टूडेंट्स ने ‘छात्र एकता जिंदाबाद’ और ’एनटीए (NTA) रद्द करो’ के नारे लगाए। वहीं, छात्रों का कहना है कि लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है, लड़ाई अभी भी बाकी है।

भूपेश बघेल ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को युवाओं की जीत बताया।
भूपेश बघेल ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को युवाओं की जीत बताया।

भूपेल बोले- छात्र नरसिंह के अवतार में आए

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि भाजपा की ट्रोल टीम ने सोनम वांगचुक को चीन का ऐजेंट बता दिया था और मंत्री उनको जूस पिला रहे थे। इनकी स्थिति यह है कि जब जरूरत पड़े तो ये किसी को भी अपना बाप बना ले। छात्रों के आगे किसी एजेंसी की नहीं चली। छात्र नरसिंह के अवतार में आए हैं।

रमन सिंह बोले- आंदोलन शांत करने जरूरी था फैसला

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि जिस विषय को लेकर पूरी दुनिया भर में हल्ला मचाया जा रहा था, उसकी इतिश्री हो गई। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह ने कहा है कि इस मामले में सख्त से सख्त कानून बनाया जाएगा। 10 करोड़ और 10 साल की सजा जैसे कठोर कानून आने वाले समय में बनाएंगे जाएंगे ताकि किसी के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं हो।

गजेंद्र यादव बोले- देशहित में इस्तीफा वापस लें प्रधान

डॉ रमन सिंह के बयान के कुछ ही समय बाद प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने इससे बिल्कुल अलग राय रखी। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा नहीं देना चाहिए था। जब एक बार जांच के लिए कमेटी गठित हो गई है, फास्ट ट्रैक कोर्ट बना दिया गया है, तो उसके बाद मुझे ऐसा लगता है कि धर्मेन्द्र प्रधान को इस्तीफा नहीं देना चाहिए। बल्कि देशहित में इस्तीफा वापस ले लेना चाहिए।

12 साल में पहली बार विरोध के बाद मंत्री का इस्तीफा

2014 में पहली बार मोदी सरकार बनने के बाद 12 साल के कार्यकाल में धर्मेंद्र प्रधान पहले मंत्री हैं, जिन्हें विरोध के चलते इस्तीफा देना पड़ा है। हालांकि, इससे पहले 2018 में विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने इस्तीफा दिया था, लेकिन तब दुनियाभर में ‘मी टू’ आंदोलन चल रहा था और अकबर पर पत्रकारिता के दिनों में यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे।

मौजूदा पेपर लीक रोकने का कानून, 4 पॉइंट

जून 2024 तक पेपर लीक के लिए कोई एक सेंट्रल कानून नहीं था। धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और जालसाजी जैसी धाराओं में मुकदमा दर्ज होता था। इनमें जमानत की कोई सख्त शर्तें नहीं हैं।

कुछ राज्यों ने अलग से नकल-विरोधी भी कानून बनाए, मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट भी शामिल किया। उत्तर प्रदेश में कुछ मामलों में गैंगस्टर एक्ट भी लगाया गया।

NEET-UG और UGC के एग्जाम में धांधली के बाद 21 जून 2024 को केंद्र सरकार ने सार्वजानिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम लागू किया। इसमें पेपर लीक, मदद करना, गलत तरीके से OMR शीट हासिल करना, नकल करवाना, एग्जाम से जुड़ी फर्जी वेबसाइट बनाने या परीक्षक को धमकी को सजा के दायरे लाया गया।

ये सभी अपराध गैर-जमानती हैं, इनमें दो कैटेगरी में सजा का प्रावधान है। पहला- पेपर लीक वगैरह करने पर 3 से 5 साल की सजा और 10 लाख तक का जुर्माना हो सकता है। दूसरा- एग्जाम करवाने वाली संस्था या एजेंसी के डायरेक्टर या मैनेजमेंट के ऑफिसर्स ने कोई अपराध किया, तो 3 से 10 साल तक की जेल और एक करोड़ का जुर्माना हो सकता है।

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छत्तीसगढ़

शराब कारोबारी के घर ED-IT की रेड:बलौदाबाजार में राघवेंद्र-रूपेश सराफ के ठिकानों पर छापा, 2 दिन से जारी है कार्रवाई

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बलौदाबाजार, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आयकर विभाग (IT) की संयुक्त टीम ने कारोबारी राजकुमार सराफ के बेटों के घर पर दबिश दी है। राघवेंद्र सराफ और रूपेश सराफ शराब और जमीन कारोबारी है, उनकी पीतल की फैक्ट्री भी है। कार्रवाई के दौरान अफसर दस्तावेज खंगाल रहे हैं।

दरअसल, ईडी अधिकारियों ने 24 जुलाई की रात ही बलौदाबाजार पहुंचकर कारोबारी के घर की निगरानी शुरू कर दी थी। अगले दिन रविवार सुबह टीम ने घर में एंट्री कर तलाशी ली। जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई ED की रेड के बाद आयकर विभाग की टीम ने संयुक्त रूप से की है।

बैंक-संपत्ति समेत कई दस्तावेज खंगाल रही टीम

छापेमारी के दौरान अधिकारी घर के हर कमरे की बारीकी से जांच कर रहे हैं। कई दस्तावेज खंगाले गए, जिनमें डायरी, बैंक खातों के विवरण, संपत्ति से जुड़े कागजात और अन्य महत्वपूर्ण रिकॉर्ड शामिल हैं। परिवार के सदस्यों और कारोबार से जुड़े लोगों से भी पूछताछ की जा रही है।

शहर के बड़े कारोबारी थे राजकुमार सराफ

राजकुमार सराफ शहर के जाने-माने कारोबारी थे। उनके कई व्यापारिक प्रतिष्ठान हैं। राजकुमार के निधन के बाद उनके बेटे राघवेंद्र सराफ और रूपेश सराफ कारोबार चला रहे हैं।

अधिकारियों को बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं की आशंका है, जिसके चलते यह कार्रवाई की जा रही है। शनिवार को ED की टीम को कुछ अहम दस्तावेज मिले थे, जिनके आधार पर IT विभाग ने फिर अतिरिक्त कार्रवाई शुरू की है।

पुलिस जवान तैनात

इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों में काफी चर्चा है। कारोबारी के घर के बाहर अधिकारियों के साथ पुलिस जवान भी तैनात है। आसपास के लोग दूर से ही घटनाक्रम को देख रहे थे। फिलहाल, जांच जारी है और टीम पूरे मामले की गंभीरता से पड़ताल कर रही है।

कोई अधिकारिक बयान नहीं आया

हालांकि, अधिकारियों की ओर से अभी तक छापे के कारणों और जांच के संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है। जांच के दौरान क्या कुछ मिला, इसे लेकर सफाई नहीं दी गई है।

बताया जा रहा है कि छापेमारी में कई अहम दस्तावेज जब्त किए गए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।

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छत्तीसगढ़

पूजा-पाठ से कैंसर ठीक करने का दावा,13 लाख ठगे:टीवी-विज्ञापन से फंसा परिवार, सोना गिरवी रखा, कर्ज लिया, पैसे मांगने पर CBI का डर दिखाया

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बालोद, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बालोद में महिला और उसका परिवार टीवी पर दिखाए गए ज्योतिष के विज्ञापन के झांसे में आ गया। आरोप है कि ठगों ने पूजा-पाठ से चौथे स्टेज का कैंसर ठीक करने का दावा किया और महिला से अलग-अलग खातों में 13 लाख 13 हजार 673 रुपए जमा करा लिए।

जब पति की तबीयत में कोई सुधार नहीं हुआ और पत्नी ने पैसे वापस मांगे। ऐसे में आरोपियों ने पुलिस, सीबीआई और हत्या के मामले में फंसाने की धमकी दी। महिला ने पति के इलाज की उम्मीद में अपना सोना गिरवी रखा और परिचितों से कर्ज लेकर यह रकम जुटाई।

महिला की शिकायत पर पुलिस ने उत्तर प्रदेश के वेद प्रकाश तिवारी, सृजन तिवारी, राहुल तिवारी समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक, ठगी का यह सिलसिला 28 नवंबर 2024 से 30 मई 2026 तक चलता रहा। मामला रनचिरई थाना क्षेत्र के ग्राम सिर्री का है।

पीड़ित महिला का नाम प्रेमलता चंद्राकर (55) है। उनका परिवार खेती-किसानी करता है। उन्होंने पुलिस को बताया कि उनके पति ऋषि चंद्राकर चौथे स्टेज के कैंसर से पीड़ित हैं। धार्मिक चैनल पर पं. वेद प्रकाश तिवारी की लक्ष्मी नारायण ज्योतिष संस्था का विज्ञापन देखने के बाद उन्होंने दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क किया।

आरोप है कि बातचीत के दौरान उन्हें भरोसा दिलाया गया कि पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों से उनके पति पूरी तरह ठीक हो जाएंगे। इसके बाद अलग-अलग पूजा और अनुष्ठानों के नाम पर उनसे पैसे मांगे जाने लगे। आरोपी राहुल तिवारी ने सबसे पहले बारकोड के जरिए 30 हजार रुपए जमा कराए।

इसके बाद 28 नवंबर 2024 को फोन-पे के माध्यम से 18 हजार रुपए और भेजने के लिए कहा गया। पति के स्वस्थ होने की उम्मीद में प्रेमलता चंद्राकर ने अलग-अलग बैंक खातों, फोन-पे, गूगल-पे और अन्य ऑनलाइन माध्यमों से लगातार रकम भेजी।

बेटी और परिचितों के खातों से भी भेजी रकम

प्रेमलता चंद्राकर ने बताया कि बेटी रूही चंद्राकर से 2.30 लाख रुपए, परिचित अमन देवांगन के जरिए 7 लाख 40 हजार 673 रुपए, नेहुल निर्मल से 25 हजार रुपए, तुषार साहू से 40 हजार रुपए, जयंत देशमुख से 73 हजार रुपए और छत्रपाल साहू से 2.05 लाख रुपए आरोपियों के बताए खातों और मोबाइल नंबरों पर ट्रांसफर कराए। इस तरह कुल 13 लाख 13 हजार 673 रुपए भेजे गए।

पैसे लौटाने का झांसा देकर फिर किया संपर्क

आरोप है कि बाद में पं. वेद प्रकाश तिवारी के नाम से फिर फोन आया। कॉल करने वाले ने कहा कि संस्था के कुछ लोगों ने उनके नाम का गलत इस्तेमाल कर ठगी की है। उसने भरोसा दिलाया कि महिला की पूरी रकम 2 महीने के भीतर वापस करा दी जाएगी।

पुलिस और CBI का डर दिखाकर फिर मांगे रुपए

प्रेमलता चंद्राकर का आरोप है कि बाद में उन्हें बताया गया कि राहुल तिवारी के पिता ने आत्महत्या कर ली है और सुसाइड नोट में उसका और वेद प्रकाश तिवारी का नाम लिखा है।

आरोपियों ने कहा कि अगर पैसे नहीं दिए गए तो उत्तर प्रदेश पुलिस उसके घर पहुंचेगी, सीबीआई जांच होगी और उसे हत्या के मामले में फंसा दिया जाएगा। डर दिखाकर उससे फिर ऑनलाइन पैसे मांगे गए।

पति की बीमारी का उठाया फायदा

पीड़िता ने पुलिस को बताया कि उनके पति चौथे स्टेज के कैंसर से पीड़ित हैं। उन्हें बचाने की उम्मीद में उसने सोना गिरवी रखा और कई लोगों से कर्ज लेकर पैसे जुटाए। आरोप है कि ठगों ने उनकी मजबूरी और भावनात्मक स्थिति का फायदा उठाया। इस दौरान उन्होंने महिला का फोटो, आधार कार्ड और पैन कार्ड भी व्हाट्सऐप पर मंगवा लिया।

कई मोबाइल नंबरों पर किए गए ट्रांजेक्शन

एफआईआर में महिला ने नवंबर 2024 से मई 2026 के बीच अलग-अलग मोबाइल नंबरों और यूपीआई आईडी पर किए गए कई ट्रांजेक्शन की जानकारी पुलिस को दी है। सबसे ज्यादा रकम अमन देवांगन के बैंक खातों के जरिए भेजी गई। इसके अलावा बेटी और अन्य परिचितों के माध्यम से भी कई बार पैसे ट्रांसफर किए गए।

ASP बोलीं- केस दर्ज, जांच जारी

एएसपी मोनिका ठाकुर ने बताया कि महिला की शिकायत पर रनचिरई थाने में वेद प्रकाश तिवारी, सृजन तिवारी, राहुल तिवारी और अन्य आरोपियों के खिलाफ BNS की धारा 3(5) और 318(4) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस जांच कर रही है और जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी।

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छत्तीसगढ़

शराब घोटाला केस…7 अप्रैल तक रिमांड पर कवासी लखमा:वकील बोले- कल जमानत पर हाईकोर्ट में सुनवाई थी, इसलिए EOW ने सुनियोजित गिरफ्तारी की

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रायपुर ,एजेंसी। छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में अब EOW पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा से पूछताछ करना चाहती है। इसलिए राज्य अन्वेषण ब्यूरो की ओर विशेष कोर्ट में प्रोडक्शन वारंट की मांग को लेकर आवेदन लगाया गया। जिस पर कोर्ट ने सुनवाई के बाद लखमा को 7 अप्रैल तक रिमांड पर भेज दिया है।

लखमा के वकील फैजल रिजवी ने बताया कि, गुरुवार को हाईकोर्ट में लखमा की जमानत याचिका पर सुनवाई होनी थी। इससे पहले ही सुनियोजित तरीके से EOW ने पूछताछ के लिए एप्लिकेशन लगाया और कोर्ट ने डिमांड पर भेज दिया।

कवासी लखमा ने मीडिया से कहा कि, मैं गरीब आदमी हूं। बस्तर की आवाज विधानसभा में उठाया तो सरकार मुझे परेशान कर रही है। मैं निर्दोष हूं। गरीब आदमी हूं। बता दें कि, ED ने 16 जनवरी 2025 को लखमा को गिरफ्तार किया था। वे 21 जनवरी से रायपुर की सेंट्रल जेल में बंद हैं।

कोर्ट ने सुनवाई के बाद कवासी लखमा को 7 अप्रैल तक रिमांड पर भेज दिया है।

कोर्ट ने सुनवाई के बाद कवासी लखमा को 7 अप्रैल तक रिमांड पर भेज दिया है।

पूर्व मुख्यमंत्री के घर भी पड़ा था छापा

छत्तीसगढ़ के 2161 करोड़ के शराब घोटाले में पूर्व मंत्री कवासी लखमा के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 10 मार्च को पूर्व सीएम भूपेश बघेल, उनके करीबी नेताओं और कारोबारियों के 14 ठिकानों पर छापेमारी की थी।

सुबह 7 बजे से शुरू हुई जांच शाम 6 बजे तक 11 घंटे चली। करीब 20 ईडी अफसरों की टीम सीआरपीएफ के जवानों के साथ सीधे पदुम नगर स्थित पूर्व मुख्यमंत्री के निवास में कार्रवाई चली और टीम शाम 6 बजे टीम लौट गई।

ED का आरोप- लखमा सिंडिकेट का अहम हिस्सा थे

ED का आरोप है कि, पूर्व मंत्री और मौजूदा विधायक कवासी लखमा सिंडिकेट के अहम हिस्सा थे। लखमा के निर्देश पर ही सिंडिकेट काम करता था। इनसे शराब सिंडिकेट को मदद मिलती थी। वहीं, शराब नीति बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे छत्तीसगढ़ में FL-10 लाइसेंस की शुरुआत हुई।

ED का दावा है कि लखमा को आबकारी विभाग में हो रही गड़बड़ियों की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने उसे रोकने के लिए कुछ नहीं किया।

कमीशन के पैसे से बेटे का घर बना, कांग्रेस भवन निर्माण भी

ED के वकील सौरभ पांडेय ने बताया कि, 3 साल शराब घोटाला चला। लखमा को हर महीने 2 करोड़ रुपए मिलते थे। इस दौरान 36 महीने में लखमा को 72 करोड़ रुपये मिले। ये राशि उनके बेटे हरीश कवासी के घर के निर्माण और कांग्रेस भवन सुकमा के निर्माण में लगे।

ED ने कहा था कि छत्तीसगढ़ में शराब घोटाले से सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ है। शराब सिंडिकेट के लोगों की जेबों में 2,100 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध कमाई भरी गई।

FL-10 लाइसेंस क्या है ?

FL-10 का फुल फॉर्म है, फॉरेन लिकर-10। इस लाइसेंस को छत्तीसगढ़ में विदेशी शराब की खरीदी की लिए राज्य सरकार ने ही जारी किया था। जिन कंपनियों को ये लाइसेंस मिला है, वे मैन्युफैक्चर्स यानी निर्माताओं से शराब लेकर सरकार को सप्लाई करते थे। इन्हें थर्ड पार्टी भी कह सकते हैं।

खरीदी के अलावा भंडारण और ट्रांसपोर्टेशन का काम भी इसी लाइसेंस के तहत मिलता है। हालांकि इन कंपनियों ने भंडारण और ट्रांसपोर्टेशन का काम नहीं किया। इसे बेवरेज कॉर्पोरेशन को ही दिया गया था। इस लाइसेंस में भी A और B कैटेगरी के लाइसेंस धारक होते थे।

FL-10 B राज्य के शराब निर्माताओं से विदेशी ब्रांड की शराब लेकर विभाग को बेच सकते हैं।

FL-10 A इस कैटेगरी के लाइसेंस-धारक देश के किसी भी राज्य के निर्माताओं से इंडियन मेड विदेशी शराब लेकर विभाग को बेच सकते हैं।

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छत्तीसगढ़

मंत्री गजेंद्र बोले- देशहित में धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा वापस लें:रमन सिंह ने कहा- फैसला जरूरी था, भूपेश बोले- Gen-Z नरसिंह अवतार, मोदी सरकार हिरण्यकश्यप

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रायपुर, एजेंसी। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। NEET पेपर लीक केस में उनके इस्तीफे की मांग करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी पिछले 36 दिन से जंतर-मंतर पर धरना दे रही थी। इस पर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने X पर लिखा- एक प्रधान का इस्तीफा हो गया है। ये भारत के युवाओं की जीत है।

इसके अलावा भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार की तुलना ‘हिरण्यकश्यप’ से की और Gen Z को नरसिंह अवतार बताया। बघेल ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देशभर के छात्रों की जीत है और यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की हार है।

छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने भी प्रधान के इस्तीफे का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन को शांत करने के लिए ये फैसला जरूरी था। वहीं प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा नहीं देना चाहिए था।

यादव ने आगे कहा कि बड़े मंत्रालय में हजारों अधिकारी और कर्मचारी काम करते हैं। ऐसे में अगर कहीं कोई चूक होती है तो उसके लिए सीधे मंत्री को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। देशहित में धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा वापस लेना चाहिए।

इधर, बिलासपुर में छात्रों और युवा संगठनों ने ‘विजय रैली’ निकाली। रैली के दौरान स्टूडेंट्स ने ‘छात्र एकता जिंदाबाद’ और ’एनटीए (NTA) रद्द करो’ के नारे लगाए। वहीं, छात्रों का कहना है कि लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है, लड़ाई अभी भी बाकी है।

भूपेश बघेल ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को युवाओं की जीत बताया।
भूपेश बघेल ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को युवाओं की जीत बताया।

भूपेल बोले- छात्र नरसिंह के अवतार में आए

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि भाजपा की ट्रोल टीम ने सोनम वांगचुक को चीन का ऐजेंट बता दिया था और मंत्री उनको जूस पिला रहे थे। इनकी स्थिति यह है कि जब जरूरत पड़े तो ये किसी को भी अपना बाप बना ले। छात्रों के आगे किसी एजेंसी की नहीं चली। छात्र नरसिंह के अवतार में आए हैं।

रमन सिंह बोले- आंदोलन शांत करने जरूरी था फैसला

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि जिस विषय को लेकर पूरी दुनिया भर में हल्ला मचाया जा रहा था, उसकी इतिश्री हो गई। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह ने कहा है कि इस मामले में सख्त से सख्त कानून बनाया जाएगा। 10 करोड़ और 10 साल की सजा जैसे कठोर कानून आने वाले समय में बनाएंगे जाएंगे ताकि किसी के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं हो।

गजेंद्र यादव बोले- देशहित में इस्तीफा वापस लें प्रधान

डॉ रमन सिंह के बयान के कुछ ही समय बाद प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने इससे बिल्कुल अलग राय रखी। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा नहीं देना चाहिए था। जब एक बार जांच के लिए कमेटी गठित हो गई है, फास्ट ट्रैक कोर्ट बना दिया गया है, तो उसके बाद मुझे ऐसा लगता है कि धर्मेन्द्र प्रधान को इस्तीफा नहीं देना चाहिए। बल्कि देशहित में इस्तीफा वापस ले लेना चाहिए।

12 साल में पहली बार विरोध के बाद मंत्री का इस्तीफा

2014 में पहली बार मोदी सरकार बनने के बाद 12 साल के कार्यकाल में धर्मेंद्र प्रधान पहले मंत्री हैं, जिन्हें विरोध के चलते इस्तीफा देना पड़ा है। हालांकि, इससे पहले 2018 में विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने इस्तीफा दिया था, लेकिन तब दुनियाभर में ‘मी टू’ आंदोलन चल रहा था और अकबर पर पत्रकारिता के दिनों में यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे।

मौजूदा पेपर लीक रोकने का कानून, 4 पॉइंट

जून 2024 तक पेपर लीक के लिए कोई एक सेंट्रल कानून नहीं था। धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और जालसाजी जैसी धाराओं में मुकदमा दर्ज होता था। इनमें जमानत की कोई सख्त शर्तें नहीं हैं।

कुछ राज्यों ने अलग से नकल-विरोधी भी कानून बनाए, मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट भी शामिल किया। उत्तर प्रदेश में कुछ मामलों में गैंगस्टर एक्ट भी लगाया गया।

NEET-UG और UGC के एग्जाम में धांधली के बाद 21 जून 2024 को केंद्र सरकार ने सार्वजानिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम लागू किया। इसमें पेपर लीक, मदद करना, गलत तरीके से OMR शीट हासिल करना, नकल करवाना, एग्जाम से जुड़ी फर्जी वेबसाइट बनाने या परीक्षक को धमकी को सजा के दायरे लाया गया।

ये सभी अपराध गैर-जमानती हैं, इनमें दो कैटेगरी में सजा का प्रावधान है। पहला- पेपर लीक वगैरह करने पर 3 से 5 साल की सजा और 10 लाख तक का जुर्माना हो सकता है। दूसरा- एग्जाम करवाने वाली संस्था या एजेंसी के डायरेक्टर या मैनेजमेंट के ऑफिसर्स ने कोई अपराध किया, तो 3 से 10 साल तक की जेल और एक करोड़ का जुर्माना हो सकता है।

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छत्तीसगढ़

शराब कारोबारी के घर ED-IT की रेड:बलौदाबाजार में राघवेंद्र-रूपेश सराफ के ठिकानों पर छापा, 2 दिन से जारी है कार्रवाई

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बलौदाबाजार, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आयकर विभाग (IT) की संयुक्त टीम ने कारोबारी राजकुमार सराफ के बेटों के घर पर दबिश दी है। राघवेंद्र सराफ और रूपेश सराफ शराब और जमीन कारोबारी है, उनकी पीतल की फैक्ट्री भी है। कार्रवाई के दौरान अफसर दस्तावेज खंगाल रहे हैं।

दरअसल, ईडी अधिकारियों ने 24 जुलाई की रात ही बलौदाबाजार पहुंचकर कारोबारी के घर की निगरानी शुरू कर दी थी। अगले दिन रविवार सुबह टीम ने घर में एंट्री कर तलाशी ली। जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई ED की रेड के बाद आयकर विभाग की टीम ने संयुक्त रूप से की है।

बैंक-संपत्ति समेत कई दस्तावेज खंगाल रही टीम

छापेमारी के दौरान अधिकारी घर के हर कमरे की बारीकी से जांच कर रहे हैं। कई दस्तावेज खंगाले गए, जिनमें डायरी, बैंक खातों के विवरण, संपत्ति से जुड़े कागजात और अन्य महत्वपूर्ण रिकॉर्ड शामिल हैं। परिवार के सदस्यों और कारोबार से जुड़े लोगों से भी पूछताछ की जा रही है।

शहर के बड़े कारोबारी थे राजकुमार सराफ

राजकुमार सराफ शहर के जाने-माने कारोबारी थे। उनके कई व्यापारिक प्रतिष्ठान हैं। राजकुमार के निधन के बाद उनके बेटे राघवेंद्र सराफ और रूपेश सराफ कारोबार चला रहे हैं।

अधिकारियों को बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं की आशंका है, जिसके चलते यह कार्रवाई की जा रही है। शनिवार को ED की टीम को कुछ अहम दस्तावेज मिले थे, जिनके आधार पर IT विभाग ने फिर अतिरिक्त कार्रवाई शुरू की है।

पुलिस जवान तैनात

इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों में काफी चर्चा है। कारोबारी के घर के बाहर अधिकारियों के साथ पुलिस जवान भी तैनात है। आसपास के लोग दूर से ही घटनाक्रम को देख रहे थे। फिलहाल, जांच जारी है और टीम पूरे मामले की गंभीरता से पड़ताल कर रही है।

कोई अधिकारिक बयान नहीं आया

हालांकि, अधिकारियों की ओर से अभी तक छापे के कारणों और जांच के संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है। जांच के दौरान क्या कुछ मिला, इसे लेकर सफाई नहीं दी गई है।

बताया जा रहा है कि छापेमारी में कई अहम दस्तावेज जब्त किए गए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।

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छत्तीसगढ़

पूजा-पाठ से कैंसर ठीक करने का दावा,13 लाख ठगे:टीवी-विज्ञापन से फंसा परिवार, सोना गिरवी रखा, कर्ज लिया, पैसे मांगने पर CBI का डर दिखाया

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बालोद, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बालोद में महिला और उसका परिवार टीवी पर दिखाए गए ज्योतिष के विज्ञापन के झांसे में आ गया। आरोप है कि ठगों ने पूजा-पाठ से चौथे स्टेज का कैंसर ठीक करने का दावा किया और महिला से अलग-अलग खातों में 13 लाख 13 हजार 673 रुपए जमा करा लिए।

जब पति की तबीयत में कोई सुधार नहीं हुआ और पत्नी ने पैसे वापस मांगे। ऐसे में आरोपियों ने पुलिस, सीबीआई और हत्या के मामले में फंसाने की धमकी दी। महिला ने पति के इलाज की उम्मीद में अपना सोना गिरवी रखा और परिचितों से कर्ज लेकर यह रकम जुटाई।

महिला की शिकायत पर पुलिस ने उत्तर प्रदेश के वेद प्रकाश तिवारी, सृजन तिवारी, राहुल तिवारी समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक, ठगी का यह सिलसिला 28 नवंबर 2024 से 30 मई 2026 तक चलता रहा। मामला रनचिरई थाना क्षेत्र के ग्राम सिर्री का है।

पीड़ित महिला का नाम प्रेमलता चंद्राकर (55) है। उनका परिवार खेती-किसानी करता है। उन्होंने पुलिस को बताया कि उनके पति ऋषि चंद्राकर चौथे स्टेज के कैंसर से पीड़ित हैं। धार्मिक चैनल पर पं. वेद प्रकाश तिवारी की लक्ष्मी नारायण ज्योतिष संस्था का विज्ञापन देखने के बाद उन्होंने दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क किया।

आरोप है कि बातचीत के दौरान उन्हें भरोसा दिलाया गया कि पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों से उनके पति पूरी तरह ठीक हो जाएंगे। इसके बाद अलग-अलग पूजा और अनुष्ठानों के नाम पर उनसे पैसे मांगे जाने लगे। आरोपी राहुल तिवारी ने सबसे पहले बारकोड के जरिए 30 हजार रुपए जमा कराए।

इसके बाद 28 नवंबर 2024 को फोन-पे के माध्यम से 18 हजार रुपए और भेजने के लिए कहा गया। पति के स्वस्थ होने की उम्मीद में प्रेमलता चंद्राकर ने अलग-अलग बैंक खातों, फोन-पे, गूगल-पे और अन्य ऑनलाइन माध्यमों से लगातार रकम भेजी।

बेटी और परिचितों के खातों से भी भेजी रकम

प्रेमलता चंद्राकर ने बताया कि बेटी रूही चंद्राकर से 2.30 लाख रुपए, परिचित अमन देवांगन के जरिए 7 लाख 40 हजार 673 रुपए, नेहुल निर्मल से 25 हजार रुपए, तुषार साहू से 40 हजार रुपए, जयंत देशमुख से 73 हजार रुपए और छत्रपाल साहू से 2.05 लाख रुपए आरोपियों के बताए खातों और मोबाइल नंबरों पर ट्रांसफर कराए। इस तरह कुल 13 लाख 13 हजार 673 रुपए भेजे गए।

पैसे लौटाने का झांसा देकर फिर किया संपर्क

आरोप है कि बाद में पं. वेद प्रकाश तिवारी के नाम से फिर फोन आया। कॉल करने वाले ने कहा कि संस्था के कुछ लोगों ने उनके नाम का गलत इस्तेमाल कर ठगी की है। उसने भरोसा दिलाया कि महिला की पूरी रकम 2 महीने के भीतर वापस करा दी जाएगी।

पुलिस और CBI का डर दिखाकर फिर मांगे रुपए

प्रेमलता चंद्राकर का आरोप है कि बाद में उन्हें बताया गया कि राहुल तिवारी के पिता ने आत्महत्या कर ली है और सुसाइड नोट में उसका और वेद प्रकाश तिवारी का नाम लिखा है।

आरोपियों ने कहा कि अगर पैसे नहीं दिए गए तो उत्तर प्रदेश पुलिस उसके घर पहुंचेगी, सीबीआई जांच होगी और उसे हत्या के मामले में फंसा दिया जाएगा। डर दिखाकर उससे फिर ऑनलाइन पैसे मांगे गए।

पति की बीमारी का उठाया फायदा

पीड़िता ने पुलिस को बताया कि उनके पति चौथे स्टेज के कैंसर से पीड़ित हैं। उन्हें बचाने की उम्मीद में उसने सोना गिरवी रखा और कई लोगों से कर्ज लेकर पैसे जुटाए। आरोप है कि ठगों ने उनकी मजबूरी और भावनात्मक स्थिति का फायदा उठाया। इस दौरान उन्होंने महिला का फोटो, आधार कार्ड और पैन कार्ड भी व्हाट्सऐप पर मंगवा लिया।

कई मोबाइल नंबरों पर किए गए ट्रांजेक्शन

एफआईआर में महिला ने नवंबर 2024 से मई 2026 के बीच अलग-अलग मोबाइल नंबरों और यूपीआई आईडी पर किए गए कई ट्रांजेक्शन की जानकारी पुलिस को दी है। सबसे ज्यादा रकम अमन देवांगन के बैंक खातों के जरिए भेजी गई। इसके अलावा बेटी और अन्य परिचितों के माध्यम से भी कई बार पैसे ट्रांसफर किए गए।

ASP बोलीं- केस दर्ज, जांच जारी

एएसपी मोनिका ठाकुर ने बताया कि महिला की शिकायत पर रनचिरई थाने में वेद प्रकाश तिवारी, सृजन तिवारी, राहुल तिवारी और अन्य आरोपियों के खिलाफ BNS की धारा 3(5) और 318(4) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस जांच कर रही है और जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी।

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