कोरबा
एस डी साहू बने निर्विरोध साहू संघ के तहसील अध्यक्ष, ईश्वरी साहू सचिव
कोरबा/पाली। जिले की पाली ब्लाक अंतर्गत ग्राम पोड़ी में गत 5 अक्टूबर को तहसील साहू संघ का चुनाव सम्पन्न हुआ। चुनाव अधिकारी बलभद्र साहू की उपस्थिति में पदधिकारियों की चयन प्रक्रिया प्रारंभ हुई, जिसमें पोड़ी, पाली, नुनेरा, लाफा, पोलमी सहित तहसील पाली अंतर्गत आने वाले ग्रामों से स्वजातीय बंधुओं ने भाग लिया। चुनाव प्रक्रिया की जरूरत ही नहीं पड़ी और एसडी साहू को निर्विरोध अध्यक्ष चुन लिया गया, वहीं श्रीमती ईश्वरी को सचिव घोषित किया गया। लक्ष्मी प्रसाद साहू एवं श्रीमती अनूपा साहू को उपाध्यक्ष, लव साहू को संगठन सचिव बनाया गया।
जिला अध्यक्ष एवं चुनाव अधिकारी ने टीम के नए सदस्यों को बधाई देते हुए कहा कि एसडी साहू के नेतृत्व में समाज एकजुट होगा और संगठन को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि महिलाएं भी समाजसेवा क्षेत्र में आगे आए और समाज को नई दिशा दें।
नवनिर्वाचित अध्यक्ष एसडी साहू ने उपस्थित लोगों का अभिवादन किया और कहा कि उनका जो भरोसा जताया गया है, वे अपने पद की गरीमा को बढ़ाएंगे और सामाजिक संगठन को और मजबूती प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयास करेंगे और हम सब मिलकर समाज को नए शिखर पर पहुंचाएंगे।
कोरबा
लेट लतीफ़ स्टाफ और इलाज देख कर बिफरे पार्षद:दीपका स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर-स्टाफ नदारद, गर्भवती-इमरजेंसी मरीज घंटों इंतजार को मजबूर, लोगों में आक्रोश
कोरबा। कोरबा के दीपका के एक बड़े स्वास्थ्य केंद्र में शनिवार सुबह गंभीर लापरवाही सामने आई। इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचे मरीजों को घंटों तक डॉक्टर और स्टाफ का इंतजार करना पड़ा, लेकिन तय समय पर कोई भी जिम्मेदार कर्मचारी मौजूद नहीं था। इस अव्यवस्था के कारण मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सुबह करीब 11:30 बजे एक युवक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचा तो वहां कोई स्टाफ मौजूद नहीं था। जब संबंधित कर्मचारी से फोन पर संपर्क किया गया, तो उन्होंने बताया कि वे सुबह 10 बजे से पहले नहीं आ सकतीं। इससे मरीजों में नाराजगी और बढ़ गई।

इलाज के लिए डॉक्टर नर्स का घंटों इंतज़ार करते मरीज
मरीजों को समय पर नहीं मिल पा रहा इलाज
इसी दौरान एक मरीज ने बताया कि उसे शुक्रवार रात कुत्ते ने काट लिया था। वह रात में भी इंजेक्शन लगवाने स्वास्थ्य केंद्र आया था, लेकिन तब भी इलाज नहीं मिल सका। शनिवार सुबह 8 बजे से वह फिर से इंतजार कर रहा था, लेकिन लंबे समय तक कोई स्टाफ नहीं पहुंचा। दीपका बस्ती की एक महिला अपनी गर्भवती बहू को जांच के लिए स्वास्थ्य केंद्र लेकर आई थी। बहू को सर्दी, खांसी और बुखार की शिकायत थी, लेकिन जिस डॉक्टर को दिखाना था वे भी अनुपस्थित थे। मजबूरन उन्हें भी काफ देर तक इंतजार करना पड़ा।

आक्रोशित मरीज और पार्षद
अचानक खुद के इलाज को पहुंचे पार्षद तो देखा
इसी बीच पार्षद अविनाश यादव भी इलाज के लिए स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य केंद्र का निर्धारित समय सुबह 9 बजे है, लेकिन 11 बजे तक भी रिसेप्शनिस्ट नहीं पहुंची थी। उनके अलावा कई अन्य मरीज भी आधे घंटे से अधिक समय से डॉक्टर का इंतजार कर रहे थे।
पूछने पर कहा गया “आ रहे होंगे”
पार्षद ने इस लापरवाही पर कड़ा आक्रोश जताया। उन्होंने मौके पर मौजूद एक डॉक्टर से पूछा कि डॉक्टर समय पर क्यों नहीं आ रहे हैं। इस पर डॉक्टर ने जवाब दिया कि “आ रहे होंगे।” यह सुनकर पार्षद ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए नाराजगी व्यक्त की।

फार्मेसी, पैथोलॉजी कक्ष, प्रसव कक्ष और औषधि कक्ष भी बंद पाए गए
अधिकतर रूम्स में ताले जड़े थे
स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति और भी चिंताजनक थी। एंट्री कक्ष पर ताला लगा मिला, जबकि फार्मेसी, पैथोलॉजी कक्ष, प्रसव कक्ष और औषधि कक्ष भी बंद पाए गए। इस अव्यवस्था के कारण इलाज के लिए आए मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। इस पूरे मामले में स्वास्थ्य केंद्र की प्रभारी से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।


कोरबा
ऊर्जाधानी भू-विस्थापित किसान कल्याण समिति ने उठाई आवाज, एसईसीएल गेवरा क्षेत्र में भू-विस्थापितों को टेंडरों में मिले आरक्षण और बढ़े मूल्य सीमा
कोरबा। ऊर्जाधानी भू-विस्थापित किसान कल्याण समिति (UBKKS) ने एसईसीएल गेवरा क्षेत्र के मुख्य महाप्रबंधक को पत्र सौंपकर कोयला खनन के कारण विस्थापित हुए हजारों किसान परिवारों के लिए वैकल्पिक रोजगार और निविदाओं (Tenders) में उचित भागीदारी की मांग की है । समिति ने स्पष्ट किया है कि पैतृक भूमि छिन जाने से किसानों के पास आजीविका का संकट खड़ा हो गया है, जिसे दूर करना प्रबंधन की नैतिक जिम्मेदारी है ।

समिति की प्रमुख मांगें:-
टेंडर मूल्य सीमा में वृद्धि
वर्तमान में विस्थापितों और उनकी सहकारी समितियों के लिए सुरक्षित टेंडर की अनुमानित राशि मात्र 5 लाख रुपये है । समिति ने इसे बढ़ाकर न्यूनतम 20 लाख रुपये करने और वार्षिक टेंडर सीमा को 5 करोड़ रुपये तक करने की मांग की है ।
20% आरक्षण की बहाली
वर्ष 2018 के पत्र (SECL/BSP/CAD/642/FD) का हवाला देते हुए समिति ने मांग की है कि कोल ट्रांसपोर्टेशन और अन्य सभी कार्यों के निविदाओं में स्थानीय भू-विस्थापित सहकारी समितियों के लिए 20% आरक्षण फिर से लागू किया जाए ।
भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े पर रोक
पत्र में चिंता जताई गई है कि कुछ बाहरी लोग भू-विस्थापितों के प्रमाणपत्रों का दुरुपयोग कर निविदाओं में हिस्सा ले रहे हैं । समिति ने मांग की है कि ऐसे लोगों को ब्लैक लिस्ट किया जाए और केवल वास्तविक परियोजना प्रभावितों को ही प्राथमिकता दी जाए ।
अत्यधिक कम रेट (Low Rates) की जांच
समिति ने प्रबंधन का ध्यान इस ओर खींचा है कि कुछ टेंडर अनुमानित लागत से 60% से 73% नीचे की दरों पर डाले जा रहे हैं । इतनी कम राशि में कार्य की गुणवत्ता और विस्थापितों के लाभ पर सवाल उठाते हुए इसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई है ।
CSR के तहत अवसर भू-विस्थापितों को कंपनी के सीएसआर (CSR) मद से विभागीय कॉलोनियों और कार्यालयों में स्थायी आजीविका व स्वरोजगार के अवसर प्रदान किए जाएं ।

समिति के अध्यक्ष सपुरन कुलदीप ने बताया कि समिति ने विस्थापितों के रोजगार की समस्या को दूर कराने के लिए लम्बा संघर्ष किया है और कई महत्वपूर्ण फैसले लेने के लिए एसईसीएल को मजबूर किया है । जिसमे रोजगार की वैकल्पिक व्यवस्था के लिए विस्थापित परिवार के बेरोजगारों के टेंडर में भागीदारी के लिए अहम रास्ते निकाले गए हैं, किंतु पूर्व में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों को प्रबंधन द्वारा धीरे-धीरे वापस लिया जा रहा है, या बड़े टेंडर जारी कर छोटे विस्थापितों को बाहर किया जा रहा है । यदि इन मांगों पर विचार नहीं किया गया तो विस्थापित परिवारों के पास अपने अधिकारों के लिए संघर्ष के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा ।
इस पत्र की प्रतिलिपि कोयला मंत्री (भारत सरकार) स्थानीय सांसद विधायकों और एसईसीएल के शीर्ष अधिकारियों को भी उचित कार्रवाई हेतु प्रेषित की गई है ।




कोरबा
उपभोक्ता आयोग कोरबा में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन, पाँच प्रकरण आपसी सहमति से निराकृत
कोरबा। राज्य उपभोक्ता आयोग छत्तीसगढ़ के निर्देशानुसार दिनांक 14 मार्च 2026 को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग कोरबा में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस लोक अदालत में आयोग की अध्यक्ष श्रीमती रंजना दत्ता एवं सदस्य पंकज कुमार देवड़ा द्वारा प्रकरणों की सुनवाई की गई।
जिला उपभोक्ता आयोग कोरबा में बैंकिंग, बीमा तथा स्वास्थ्य से संबंधित कुल 14 प्रकरण आपसी राजीनामा हेतु सूचीबद्ध थे, जिनमें से 5 प्रकरणों का निराकरण पक्षकारों की आपसी सहमति से किया गया। सहमति से निराकृत इन प्रकरणों में कुल 12,60,000 रुपये (बारह लाख साठ हजार रुपये) की क्षतिपूर्ति राशि पक्षकारों को प्रदान की गई।
कार्यक्रम के दौरान उपभोक्ता आयोग कोरबा के मिडिएशन सदस्य श्रीराम श्रीवास एवं महेंद्र राजवाड़े, कर्मचारी नाजीर रामनारायण पटेल, डाटा एंट्री ऑपरेटर मनीराम श्रीवास, आदेशिका वाहक संजय शर्मा, भृत्य नूतन राजपूत, वाहन चालक राजेश्वर इंग्ले सहित विभिन्न प्रकरणों के पक्षकार एवं अधिवक्ता उपस्थित रहे।


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