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‘मोदी डरपोक, इस मर्द से ज्यादा दम इंदिरा में था’:बिहार में राहुल बोले- हमारा प्रधानमंत्री ट्रंप के फोन करने पर ऑपरेशन सिंदूर रोकता है
नालंदा,एजेंसी। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार (30 अक्टूबर) को नालंदा के नूरसराय में सभा की। उन्होंने कहा, ‘मोदी डरपोक हैं। इस मर्द से ज्यादा दम इंदिरा में था। मोदी जी ट्रम्प से डरते हैं। 50 बार अमेरिकी राष्ट्रपति ने बोला है। मैंने नरेंद्र मोदी को डराकर ऑपरेशन सिंदूर बंद कराया है।
ट्रम्प अलग-अलग देशों में जाकर उनका अपमान कर रहा है। कहता है मैंने मोदी को झुका दिया। उनके मुंह से एक आवाज नहीं निकली। ऐसा आदमी बिहार में कभी विकास नहीं ला सकता। ट्रम्प हमारी सेना के बारे में बोल रहा है। हमारी वायुसेना के बारे में बोल रहा है। मोदी जी चुप हैं।
इंदिरा गांधी ने अमेरिका को चुप करा दिया था। ट्रम्प कहता है मैंने मोदी को फोन लगाया कि ऑपरेशन सिंदूर रोको और फिर ऑपरेशन रुक गया। मैं मोदी जी को चैलेंज करता हूं बिहार आकर कहें कि ट्रम्प झूठ बोल रहा है।’
राहुल गांधी के इस बयान के बाद बीजेपी ने उनके खिलाफ चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज की है। बीजेपी ने राहुल पर PM मोदी के खिलाफ अपमानजनक और व्यक्तिगत टिप्पणी करने का आरोप लगाया है।
पार्टी का कहना है कि 29 अक्टूबर की सभा में राहुल गांधी ने PM मोदी के खिलाफ जो बातें कही, वो चुनाव आयोग के मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट के खिलाफ है।

नीतीश का रिमोट मोदी के हाथ में है
बिहार का युवा सपना देखता है कि इंजीनियर बनूंगा, डॉक्टर बनूंगा। मां-पिता के पास जाता है और कहता है कि मुझे पढ़ाई करनी है। महीनों की मेहनत के बाद परीक्षा के एक दिन पहले पेपर लीक हो जाता है और बिहार का ईमानदार युवा देखता रह जाता है।
राहुल ने कहा- नीतीश कुमार कहते हैं कि 20 साल में बिहार को बदल दिया, लेकिन मैं पूछता हूं कि क्या बिहार में अच्छी शिक्षा, स्वास्थ्य मिल सकता है। बिहार के अस्पतालों में लोग जीने नहीं, मरने जाते हैं।
दूसरी तरफ PM मोदी खड़े हैं। PM के हाथ में नीतीश का रिमोट है। नीतीश से जो करवाना है PM करवा देंगे। बिहार को नीतीश नहीं चलाते हैं। सरकार अमित शाह-मोदी चलाते हैं।

दुबई बना सकते हैं तो बिहार क्यों नहीं
राहुल गांधी ने कहा, मैं बिहार के युवाओं से सवाल पूछना चाहता हूं। मैं देश के किसी भी प्रदेश में जाता हूं तो वहां मुझे बिहार के लोग दिखाई देते हैं। दुबई जैसी जगह को आपने अपने खून पसीने से बनाया है। मेरा आपसे सवाल है कि जब आप दुबई और बेंगलुरु जैसा शहर बना सकते हो तो ये बिहार में क्यों नहीं कर पाते हो।
एक समय होता था जब नालंदा की यूनिवर्सिटी पूरी दुनिया में मशहूर थी। जापान, कोरिया, इंग्लैंड से लोग पढ़ाई करने आते थे। दुनिया की शिक्षा का सेंटर नालंदा था। आज बिहार की यूनिवर्सिटी के बार में दूसरे लोगों से पूछिए। कहते हैं यहां सिर्फ पेपर लीक होता है। जिनकी सेटिंग है उन्हें पेपर मिल जाता है। बिहार के बाकी युवा देखते रह जाते हैं।
राहुल गांधी बोले- वोट के लिए ड्रामा करते हैं मोदी
राहुल बोले- मोदी छठ पूजा का ड्रामा कर रहे, यमुना के बजाय स्विमिंग पूल में नहाते हैं राहुल गांधी ने छठ पर्व पर यमुना नदी को लेकर प्रधानमंत्री मोदी पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा है कि मोदी जी छठ पूजा का ड्रामा कर रहे हैं और यमुना नदी में नहाने के बजाय एक स्विमिंग पूल में नहाने गए थे।
राहुल ने आरोप लगाया कि यह छठ पूजा वोट हासिल करने के लिए किया गया नाटक है और मोदी वोट के लिए मंच पर नाच भी सकते हैं। उन्होंने कहा कि मोदी को छठ पूजा या बिहार की परंपरा से कोई लेना-देना नहीं है, उनका मकसद केवल वोट लेना है।
राहुल ने यह भी कहा कि मोदी जी जनता की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं रखते, सिर्फ प्रचार और सत्ता में बने रहने में लगे रहते हैं।
राहुल गांधी की स्पीच की 5 बड़ी बातें
- मोदी ने छठ पूजा पर ड्रामा किया: नरेंद्र मोदी को छठ पूजा से कोई लेना देना नहीं है। उन्हें सिर्फ आपका वोट चाहिए। आप वोट के लिए उनसे कोई भी ड्रामा करवा लो वो कर देंगे। वोट के लिए उनसे कहिए स्टेज पर आकर डांस करें वो कर देंगे।
- नीतीश को PM कंट्रोल करते हैं: नीतीश कुमार खुद कोई फैसला नहीं ले रहे हैं। वो रिमोट से चल रहे हैं। बीजेपी वाले उन्हें चला रहे हैं। दिल्ली से उन्हें कंट्रोल किया जा रहा है। उनके आसपास भी अपने लोग रखे जा रहे हैं।
- चीन के लोग ‘मेड इन बिहार’ चीजें इस्तेमाल करें: मुझे बताइए आपके फोन के पीछे क्या लिखा है। मेड इन चाइना। लेकिन मेड इन चाइना नहीं, मेड इन बिहार होना चाहिए। हम चाहते हैं चीन के लोग मेड इन बिहार की चीजें खरीदें। मोबाइल, शर्ट, पैंट, ये सब बिहार में बनने चाहिए और बिहार के युवाओं को उन कारखानों में रोजगार मिलना चाहिए। बिहार के लोग बाहर क्यों जाएं। दूसरे राज्यों के लोगों को बिहार आना चाहिए।
- बिहार में अडाणी को मुफ्त में जमीन दीं: बिहार के भागलपुर में अडाणी को 1 रुपए में जमीन दे दी गई। लेकिन इसकी चर्चा तक नहीं हो रही है। केंद्र की सरकार किसानों के लिए बड़े बड़े उद्योगपतियों के लिए काम करती है। किसानों से जमीनें छिनी जा रही हैं।
- वोट चोरी नहीं करते तो हमारी सरकार होती: हमने अभी 20 दिनों तक SIR को लेकर यात्रा निकाली। ये लोग अपनी मर्जी चला रहे हैं। महाराष्ट्र और हरियाणा में जिस तरह से वोट चोरी की गई वो यहां भी करने जा रहे हैं। अगर ये वोट चोरी नहीं करते तो हमारी सरकार होती।

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भारत 2060 तक वैश्विक GDP हिस्सेदारी में चीन को पछाड़ देगा: रिपोर्ट
नई दिल्ली, एजेंसी। भारत वर्ष 2060 के आसपास क्रय शक्ति समता (पीपीपी) के आधार पर वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में हिस्सेदारी के मामले में चीन को पीछे छोड़ सकता है जबकि सदी के उत्तरार्द्ध में चीन की हिस्सेदारी घटने की संभावना है। शुक्रवार को एक रिपोर्ट में यह अनुमान जताया गया। क्रय शक्ति समता (पीपीपी) उन कुल वस्तुओं एवं सेवाओं की मात्रा को मापती है, जिसे किसी देश की मुद्रा की एक इकाई दूसरे देश में खरीद सकती है। इस रिपोर्ट को शोध संस्थान ‘वर्ल्ड इनइक्वलिटी लैब’ (डब्ल्यूआईएल) से जुड़े शोधकर्ताओं ने तैयार किया है।

पेरिस स्कूल ऑफ इकॉनमिक्स (पीएसई) में स्थित डब्ल्यूआईएल वैश्विक असमानताओं के अध्ययन पर काम करता है। रिपोर्ट कहती है कि वर्तमान में चीन की पीपीपी के संदर्भ में वैश्विक जीडीपी में लगभग 20 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो अमेरिका की तुलना में लगभग एक-तिहाई अधिक है। इसमें वर्ष 2035 तक चीन की अर्थव्यवस्था के अमेरिका से लगभग दोगुनी होने का अनुमान भी जताया गया है। हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन की जनसंख्या हिस्सेदारी तेजी से घट रही है। वर्ष 1945 में जहां यह दुनिया की जनसंख्या का लगभग 23 प्रतिशत थी, वहीं 2025 में यह घटकर करीब 17 प्रतिशत रह गई है और वर्ष 2100 तक इसके आठ प्रतिशत से भी कम रह जाने का अनुमान है।
रिपोर्ट कहती है, ”इसी वजह से 21वीं सदी के दूसरे हिस्से में चीन की वैश्विक जीडीपी में हिस्सेदारी स्थिर होने के बाद घटने का अनुमान है। लगभग वर्ष 2060 तक भारत के चीन को पीछे छोड़ देने की संभावना है।” इसके मुताबिक, इस बात की संभावना बहुत कम है कि चीन कभी उस तरह का वैश्विक प्रभुत्व हासिल कर सकता है जैसा अमेरिका ने लगभग 1950 के आसपास या यूरोप ने 1900–1910 के बीच हासिल किया था। इसके चलते भविष्य में वैश्विक अर्थव्यवस्था के बहुध्रुवीय बने रहने की संभावना जताई गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा समय में भारत में असमानता चीन की तुलना में कहीं अधिक है लेकिन उत्पादकता वृद्धि अपेक्षाकृत कम है। मानव पूंजी में चीन के अधिक और बेहतर निवेश को इसका कारण बताया गया है। नवीनतम विश्व आर्थिक परिदृश्य के मुताबिक, वर्ष 2026 में भारत का जीडीपी 4.15 लाख करोड़ डॉलर रहने का अनुमान है जबकि ब्रिटेन का जीडीपी 4.27 लाख करोड़ डॉलर और जापान का 4.38 लाख करोड़ डॉलर रह सकता है। अमेरिका 32.38 लाख करोड़ डॉलर के साथ सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा, जबकि चीन 20.85 लाख करोड़ डॉलर के साथ दूसरे स्थान पर रहेगा।
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RBI के 12 अरब डॉलर का सोना बेचने की खबर का सच आया सामने, ब्लूमबर्ग ने सुधारी रिपोर्ट
मुंबई, एजेंसी। न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा 12 अरब डॉलर (करीब 1.14 लाख करोड़ रुपए) मूल्य का सोना बेचने संबंधी अपनी रिपोर्ट वापस ले ली है। एजेंसी ने स्वीकार किया कि यह रिपोर्ट गलत विश्लेषण पर आधारित थी।
ब्लूमबर्ग ने बताया कि 2 जून को प्रकाशित रिपोर्ट में आरबीआई के गोल्ड रिजर्व का आकलन करते समय तकनीकी गलती हुई थी। सोने के भंडार का मूल्यांकन करने के लिए गलती से उसी दिन की घरेलू सोने की कीमतों का इस्तेमाल किया गया था। बाद में सही मानकों के अनुसार गणना करने पर पता चला कि मई 2026 के दौरान आरबीआई की सोने की होल्डिंग में कोई बदलाव नहीं हुआ था।

केंद्र सरकार को देनी पड़ी थी सफाई
इससे पहले रिपोर्ट में दावा किया गया था कि आरबीआई ने 22 मई को समाप्त हुए दो सप्ताह के दौरान लगभग 12 अरब डॉलर का सोना बेचा है। खबर सामने आने के बाद इस पर विवाद खड़ा हो गया था और केंद्र सरकार को सफाई देनी पड़ी थी।
सरकार ने स्पष्ट किया था कि आरबीआई द्वारा सोना बेचने की खबर पूरी तरह गलत और भ्रामक है। आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, देश के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी सितंबर 2025 के अंत में 13.92 प्रतिशत थी, जो 31 मार्च 2026 तक बढ़कर 16.70 प्रतिशत और 22 मई 2026 तक 16.85 प्रतिशत हो गई।
RBI ने बताया कितना है सोने का भंडार
आरबीआई ने अपने मासिक बुलेटिन में भी बताया है कि उसके पास कुल 880.52 टन सोने का भंडार मौजूद है और इसमें कोई कमी नहीं आई है।
ब्लूमबर्ग की शुरुआती रिपोर्ट में दावा किया गया था कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों की सुरक्षा के लिए आरबीआई ने अपने सोने के भंडार का कुछ हिस्सा बेचा है। हालांकि, बाद में एजेंसी ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए रिपोर्ट वापस ले ली।
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Repo Rate: पहली बार घर खरीदने वालों के लिए खुशखबरी, RBI के इस फैसले से रियल एस्टेट इंडस्ट्री हुई खुश
नई दिल्ली, एजेंसी। भारतीय रिजर्व बैंक के नीतिगत दर रेपो को बरकरार रखने से रियल एस्टेट क्षेत्र में स्थिरता बनी रहेगी, उपभोक्ता विश्वास मजबूत होगा और आवासीय मांग को समर्थन मिलेगा। रियल एस्टेट उद्योग और विशेषज्ञों ने शुक्रवार को यह कहा। हालांकि उनका यह भी कहना है कि किफायती आवास क्षेत्र में मांग और आपूर्ति के बीच अंतर को कम करने के लिए आगे भी सरकार और नीतिगत स्तर पर सहयोग की जरूरत होगी।

रियल एस्टेट सेक्टर के लिए अच्छा संकेत
आरबीआई ने वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चितता के बीच महंगाई बढ़ने के जोखिम को देखते हुए शुक्रवार को नीतिगत दर रेपो को उम्मीद के मुताबिक 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा। रियल एस्टेट कंपनियों का निकाय क्रेडाई (कन्फेडरेशन ऑफ रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया) के अध्यक्ष शेखर जी पटेल ने कहा, ”RBI ने repo rate को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखने का फैसला सोच-समझकर लिया है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब दुनिया भर में आर्थिक चुनौतियां बनी हुई हैं…। ऐसे माहौल में आरबीआई का यह फैसला रियल एस्टेट सेक्टर के लिए अच्छा संकेत है और इससे बाजार में स्थिरता बनी रहने में मदद मिलेगी।” उन्होंने कहा, ”ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होने से आवास ऋण लेने वालों को राहत मिलेगी और उनकी EMI पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा…। साथ ही आरबीआई का यह फैसला विकास को गति देने और महंगाई को नियंत्रण में रखने के बीच संतुलन बनाने की कोशिश को भी दर्शाता है।”
पटेल ने कहा, ”हालांकि किफायती आवास क्षेत्र में मांग और आपूर्ति के बीच जो अंतर है, उसे कम करने के लिए आगे भी सरकार और नीतिगत स्तर पर सहयोग की जरूरत होगी।” नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल (नारेडको) के अध्यक्ष प्रवीण जैन ने कहा कि RBI का Repo Rate को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का निर्णय अर्थव्यवस्था और रियल एस्टेट सेक्टर के लिए सकारात्मक है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच यह कदम बाजार में स्थिरता बनाए रखने और उपभोक्ता विश्वास को मजबूत करने में सहायक होगा।
उन्होंने कहा, ” ब्याज दरों में कोई बदलाव न होने से मकान खरीदारों पर Home loan की लागत का अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा, जिससे आवासीय मांग को समर्थन मिलेगा। यह निर्णय डेवलपर को भी बेहतर वित्तीय योजना और परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन में मदद करेगा।” कोलियर्स इंडिया में राष्ट्रीय निदेशक एवं अनुसंधान प्रमुख विमल नादर ने कहा, ”RBI ने फैसला लेते समय पश्चिम एशिया संकट के लंबे खिंचने से उत्पन्न संभावित महंगाई दबाव और supply chain पर इसके प्रभाव को ध्यान में रखा है।
कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और कमजोर होता रुपया रियल एस्टेट सहित विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों के लिए जोखिम बढ़ा रहे हैं। हालांकि वृद्धि मजबूत बनी हुई है, लेकिन लागत के दबाव का असर अब दिखाई देने लगा है और आगे इसका प्रभाव पड़ने की संभावना है।” नादर ने कहा, ” आने वाली कुछ तिमाहियों में रेपो दर और इसके साथ ही Home loan की ब्याज दरों में संभावित वृद्धि की संभावना को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता। जहां घर खरीदार कोई भी फैसला लेने से पहले अपनी आय की स्थिरता का अधिक सख्ती से आकलन कर सकते हैं। वहीं डेवलपर निकट एवं मध्यम अवधि में निर्माण सामग्री की उपलब्धता, नकदी प्रवाह प्रबंधन और परियोजना क्रियान्वयन को प्राथमिकता दे सकते हैं।”
सिग्नेचर ग्लोबल (INDIA) लि. के संस्थापक एवं चेयरमैन प्रदीप अग्रवाल ने कहा, ” वैश्विक अनिश्चितताओं और असंतुलित वैश्विक वृद्धि के माहौल में नीतिगत निरंतरता से व्यापार एवं उपभोक्ता दोनों को आवश्यक स्थिरता मिलती है। रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए ब्याज दरों में स्थिरता मांग बढ़ाने वाला एक अहम कदम है, क्योंकि यह सीधे तौर पर घर खरीदने वालों की सोच, खरीदने की क्षमता और लंबे समय के निवेश की योजना पर असर डालती है। ” एसकेए ग्रुप के निदेशक संजय शर्मा ने कहा, ”यह वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए एक संतुलित और सोच-समझकर लिया गया फैसला है।
पहली बार घर खरीदने वालों के लिए आरबीआई का तोहफा
रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए यह निर्णय डेवलपर और घर खरीदने वालों दोनों को वित्तीय स्थिरता एवं भरोसा देता है…। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में संतुलित नीतिगत रुख अपनाना सही कदम है। ” MRG Group के प्रबंध निदेशक रजत गोयल ने कहा, ”पहली बार घर खरीदने वालों के लिए आरबीआई का रेपो दर में कोई बदलाव न करना स्थिरता और वित्तीय स्पष्टता लेकर आया है। ब्याज दरों के फिलहाल स्थिर रहने की उम्मीद है, जिससे खरीदार लंबे समय के लिए घर खरीदने का फैसला अधिक भरोसे के साथ ले सकेंगे।”
उन्होंने कहा, ”नीतिगत स्तर पर स्थिरता रियल एस्टेट क्षेत्र को वास्तविक घर खरीदारों की मांग पर ध्यान देने और आवास क्षेत्र में संतुलित विकास को आगे बढ़ाने में मदद करेगी।” इमामी रियल्टी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी नितेश कुमार ने कहा, ”आरबीआई का रेपो दर को यथावत रखने का निर्णय एक संतुलित और दूरदर्शी कदम है।”
उन्होंने कहा, ”ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान और मुद्रा पर दबाव जैसी वैश्विक चुनौतियों के बीच मौद्रिक नीति समिति द्वारा तटस्थ रुख बनाए रखना घरेलू अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान करेगा। यह निर्णय भारत की मजबूत व्यापक आर्थिक बुनियादों में विश्वास को और मजबूत करता है तथा कॉरपोरेट जगत को वैश्विक चुनौतियों का सामना करने का भरोसा देता है।”
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