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छत्तीसगढ़

रायपुर : श्रमिक सशक्तीकरण की दिशा में 25 वर्ष की उपलब्धि

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राज्योत्सव में श्रम विभाग की प्रदर्शनी बनी विशेष आकर्षण का केंद्र

  श्रमिक सशक्तीकरण की दिशा में 25 वर्ष की उपलब्धि   राज्योत्सव में श्रम विभाग की प्रदर्शनी बनी विशेष आकर्षण का केंद्र  रायपुर, 03 नवंबर 2025/ छत्तीसगढ़ राज्योत्सव में इस वर्ष श्रम विभाग की प्रदर्शनी ने लोगों में विशेष आकर्षण पैदा किया। राज्य के गठन के बाद बीते 25 वर्षों में श्रमिकों के जीवन में आए बदलावों और जनकल्याणकारी प्रयासों को इस प्रदर्शनी में सजीव रूप से दर्शाया गया है। अटल नगर नवा रायपुर स्थित डॉ. श्यामप्रसाद मुखर्जी उद्योग एवं व्यापार परिसर में आयोजित प्रदर्शनी में श्रम विभाग ने राज्य के औद्योगिक विकास के साथ श्रमिकों के अधिकार और सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी है। असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के पंजीयन से लेकर सामाजिक सुरक्षा से संबंधित योजनाओं तक के कई प्रभावी पहलों की झलक श्रम विभाग की प्रदर्शनी में देखने को मिलती है।  भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, मातृत्व सहायता और पेंशन योजनाओं से राज्य के लाखों श्रमिक परिवारों को राहत पहुंच रही है। राज्य सरकार द्वारा ई-श्रम पोर्टल की शुरुआत से लाभ वितरण में पारदर्शिता और सुविधा बढ़ी है। अब तक लाखों श्रमिक इस पोर्टल से जुड़कर सीधे योजनाओं का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। महिला श्रमिकों के लिए कौशल विकास और सुरक्षा की दिशा में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। इसी कड़ी में, अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना और मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिकों के बच्चों हेतु निःशुल्क कोचिंग सहायता योजना जैसी पहलें श्रमिक परिवारों के भविष्य निर्माण में मील का पत्थर साबित हो रही हैं।  अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के अंतर्गत मंडल में एक वर्ष पूर्व पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के प्रथम दो संतानों को कक्षा 6वीं में प्रवेश देकर कक्षा 12वीं तक श्रेष्ठ आवासीय विद्यालयों में गुणवत्तायुक्त निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जाती है। वहीं, मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिकों के बच्चों हेतु निःशुल्क कोचिंग सहायता योजना के अंतर्गत चयनित कोचिंग संस्थानों के माध्यम से विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की निशुल्क कोचिंग प्रदान की जाती है, जिससे श्रमिकों के बच्चे भी उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त कर सकें।  राज्योत्सव में प्रदर्शनी देखने आए आगंतुकों ने श्रम विभाग की इस पहल को श्रमिकों के आत्मसम्मान और सशक्तीकरण की मिसाल बताया। यह प्रदर्शनी केवल उपलब्धियों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि राज्य के श्रमिकों की मेहनत, आत्मनिर्भरता और सम्मान से भरी 25 वर्ष की विकास यात्रा का सजीव प्रतिबिंब है

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्योत्सव में इस वर्ष श्रम विभाग की प्रदर्शनी ने लोगों में विशेष आकर्षण पैदा किया। राज्य के गठन के बाद बीते 25 वर्षों में श्रमिकों के जीवन में आए बदलावों और जनकल्याणकारी प्रयासों को इस प्रदर्शनी में सजीव रूप से दर्शाया गया है। अटल नगर नवा रायपुर स्थित डॉ. श्यामप्रसाद मुखर्जी उद्योग एवं व्यापार परिसर में आयोजित प्रदर्शनी में श्रम विभाग ने राज्य के औद्योगिक विकास के साथ श्रमिकों के अधिकार और सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी है। असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के पंजीयन से लेकर सामाजिक सुरक्षा से संबंधित योजनाओं तक के कई प्रभावी पहलों की झलक श्रम विभाग की प्रदर्शनी में देखने को मिलती है।

भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, मातृत्व सहायता और पेंशन योजनाओं से राज्य के लाखों श्रमिक परिवारों को राहत पहुंच रही है। राज्य सरकार द्वारा ई-श्रम पोर्टल की शुरुआत से लाभ वितरण में पारदर्शिता और सुविधा बढ़ी है। अब तक लाखों श्रमिक इस पोर्टल से जुड़कर सीधे योजनाओं का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। महिला श्रमिकों के लिए कौशल विकास और सुरक्षा की दिशा में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। इसी कड़ी में, अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना और मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिकों के बच्चों हेतु निःशुल्क कोचिंग सहायता योजना जैसी पहलें श्रमिक परिवारों के भविष्य निर्माण में मील का पत्थर साबित हो रही हैं।

अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के अंतर्गत मंडल में एक वर्ष पूर्व पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के प्रथम दो संतानों को कक्षा 6वीं में प्रवेश देकर कक्षा 12वीं तक श्रेष्ठ आवासीय विद्यालयों में गुणवत्तायुक्त निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जाती है। वहीं, मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिकों के बच्चों हेतु निःशुल्क कोचिंग सहायता योजना के अंतर्गत चयनित कोचिंग संस्थानों के माध्यम से विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की निशुल्क कोचिंग प्रदान की जाती है, जिससे श्रमिकों के बच्चे भी उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त कर सकें।

राज्योत्सव में प्रदर्शनी देखने आए आगंतुकों ने श्रम विभाग की इस पहल को श्रमिकों के आत्मसम्मान और सशक्तीकरण की मिसाल बताया। यह प्रदर्शनी केवल उपलब्धियों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि राज्य के श्रमिकों की मेहनत, आत्मनिर्भरता और सम्मान से भरी 25 वर्ष की विकास यात्रा का सजीव प्रतिबिंब है।

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कोरबा

होली खेलें पर जरा संभलकर, त्वचा और बालों का रखें खास ध्यान- त्वचा रोग विशेषज्ञ

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कोरबा। होली रंगों का त्योहार है। इसे बड़े ही उत्साह और हर्ष के साथ मनाया जाता है। पहले पारंपरिक होली फूलों, सूखे गुलाल, और पानी के साथ मनाई जाती थी, लेकिन अब सिंथेटिक रंगों ने इसकी जगह ले ली है। जिसका दुष्प्रभाव न केवल हमारी त्वचा तथा बाल, आंखों में भी पड़ता हैं यह हमारे स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। होली की मस्ती के साथ-साथ उत्सव के दौरान अपनी त्वचा और बालों की देखभाल करना भी महत्वपूर्ण है। इसलिए इस होली में कुछ बातों का ध्यान रखने की सलाह एनकेएच के त्वचा रोग विशेषज्ञ एवं कॉस्मेटोलॉजिस्ट डॉ. जय बावने देतें हैं।
डॉ. जय बताते हैं कि होली से एक दिन पहले अपनी त्वचा को ढेर सारे मॉइस्चराइजर से हाइड्रेट करें। अच्छी तरह से हाइड्रेटेड त्वचा नाजुक नहीं होती है जो आसानी से क्षतिग्रस्त नहीं होगी। होली के दिन अपने बालों में नारियल का तेल, शरीर पर बेबी ऑयल और होंठों पर लिप बाम लगाएं एवं अपनी त्वचा को सुरक्षित रखें। तेल लगाने के बाद सनस्क्रीन लगाना न भूलें। कपड़े पूरी बाजू के पहनें ताकि त्वचा को नुकसान कम से कम हो। अपने नाखूनों की सुरक्षा के लिए नेल पॉलिश लगाएं। होली के दिन भी खूब पानी पिएं और हाइड्रेटेड रहें।
होली के बाद त्वचा और बालों की देखभाल के टिप्स देते हुए डॉ. जय बतातें हैं कि एक बार जब रंग थोड़ा फीका हो जाए, तो त्वचा को हाइड्रेट और मॉइस्चराइज करने के लिए मेडिकल फेशियल करवाना चाहिए। यह आपको आकर्षक लुक वापस पाने में मदद करेगा। अगर आपको लगता है कि आपकी त्वचा हल्की फट रही है, तो एलोवेरा जेल या लैक्टोकैलेमाइन लोशन लगाएं, लेकिन अगर दाने बने रहते हैं, तो बिना किसी देरी के त्वचा विशेषज्ञ से मिलें। बालों को धोने से पहले सप्ताह में एक बार प्राकृतिक हेयर मास्क का उपयोग करें। डॉ. जय सुझाव देते हैं कि होली खेलने में अधिक पानी, फूलों की पंखुड़ियों और ऑर्गेनिक रंग का उपयोग करना बेहतर है। डॉ. जय बावने त्वचा रोग विशेषज्ञ एवं कॉस्मेटोलॉजिस्ट विशेषज्ञ एडीसी लैब निहारिका और न्यू कोरबा हॉस्पिटल में नियमित रूप से उपलब्ध रहते है।

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छत्तीसगढ़

रायपुर : रंगों में घुले प्रेम और सौहार्द का त्योहार है होली : मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने दी होली की शुभकामनाएँ

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रायपुर। महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने रंगों के पावन पर्व होली के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं।

मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने अपने संदेश में कहा है कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। यह पर्व हमारे जीवन में नई ऊर्जा, उल्लास और सकारात्मकता का संचार करता है तथा भेदभाव मिटाकर सभी को एक सूत्र में पिरोने का संदेश देता है।उन्होंने कामना की कि यह होली सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली लेकर आए। साथ ही उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि त्योहार मनाते समय प्राकृतिक रंगों का उपयोग करें, जल संरक्षण का ध्यान रखें तथा पर्यावरण को स्वच्छ और सुरक्षित बनाए रखने में अपना सक्रिय सहयोग दें।

मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि पारंपरिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ मनाई गई होली ही सच्चे अर्थों में आनंद और सौहार्द का उत्सव बनती है तथा समाज में प्रेम, भाईचारे और आपसी विश्वास को और अधिक मजबूत करती है।

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छत्तीसगढ़

रायपुर : प्रकृति संरक्षण और सामाजिक समरसता का संदेश देता है होली का पर्व : मंत्री केदार कश्यप

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प्रदेशवासियों से प्राकृतिक रंगों के उपयोग और जल संरक्षण की अपील

रायपुर। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने रंगों के पावन पर्व होली के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं। मंत्री श्री कश्यप ने अपने संदेश में कहा है कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि प्रेम, भाईचारे और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। यह पर्व जीवन में नई ऊर्जा, उत्साह और सकारात्मकता का संचार करता है तथा सभी भेदभावों को भुलाकर एक-दूसरे के साथ मिलकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कामना की कि यह होली सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली लेकर आए।

वन मंत्री श्री कश्यप ने प्रदेशवासियों से अपील की कि होली का पर्व प्राकृतिक एवं हर्बल रंगों के साथ मनाएँ, जल संरक्षण का विशेष ध्यान रखें तथा पर्यावरण को स्वच्छ और सुरक्षित बनाए रखने में अपना सक्रिय योगदान दें। उन्होंने कहा कि पारंपरिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ मनाई गई होली ही सच्चे अर्थों में आनंद और सौहार्द का पर्व बनती है। साथ ही उन्होंने सभी से प्रकृति संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया, ताकि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और हरित वातावरण मिल सके।

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