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रुपया 89.79 तक गिरा, सबसे निचले स्तर पर:विदेशी निवेशक लगातार पैसा निकाल रहे, डॉलर की मजबूती से दबाव बढ़ा
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2 months agoon
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Divya Akashमुंबई, एजेंसी। रुपया डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। कारोबार के दौरान रुपया 34 पैसे गिरकर रू.89.79 के स्तर पर आ गया था। यह 2 हफ्ते पहले के ऑल-टाइम लो (89.66) को पार कर गया। 21 नवंबर को रुपया 98 पैसे गिरा था।
घरेलू शेयर बाजारों में गिरावट और लगातार विदेशी फंड्स की निकासी ने रुपए पर दबाव बनाया है। सुबह रुपया 89.45 प्रति डॉलर के स्तर पर खुला था। वहीं शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 9 पैसे की गिरावट के साथ 89.45 पर बंद हुआ था।
2025 में अब तक रुपया 4.77% कमजोर हुआ
रुपया 2025 में अब तक 4.77% कमजोर हो चुका है। 1 जनवरी को रुपया डॉलर के मुकाबले 85.70 के स्तर पर था, जो अब 89.79 के लेवल पर पहुंच गया है।
रुपए में गिरावट से इम्पोर्ट करना महंगा होगा
मान लीजिए कि जब डॉलर के मुकाबले रुपए की वैल्यू 50 थी, तब अमेरिका में भारतीय छात्रों को 50 रुपए में 1 डॉलर मिल जाता था। अब 1 डॉलर के लिए छात्रों को 89.79 रुपए खर्च करने पड़ेंगे। इससे छात्रों के लिए फीस से लेकर रहना-खाना और अन्य चीजें महंगी हो जाएंगी।
रुपए में गिरावट का मतलब है कि भारत के लिए चीजों का इम्पोर्ट महंगा होना है। इसके अलावा विदेश में घूमना और पढ़ना भी महंगा हो गया है।
रुपया पर क्यों बढ़ा डॉलर का दबाव, क्या हैं वजहें
रुपए की यह गिरावट डॉलर की वैश्विक मजबूती से जुड़ी है। डॉलर इंडेक्स 0.04 फीसदी ऊपर 99.50 पर पहुंच गया। इंटरनेशनल क्रूड ऑयल की कीमतों में भी उछाल आया, ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स में 1.96% की बढ़ोतरी के साथ यह 63.60 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था।
इंपोर्टर्स की ओर से डॉलर की भारी मांग ने भी रुपए को नीचे धकेला। फॉरेन पोर्टफोलियो इनवेस्टर्स (FPIs) हाई वैल्यूएशन के चलते कंपनियों के स्टेक्स बेच रहे हैं, जिससे आउटफ्लो हो रहा है।
ऑयल बायिंग, गोल्ड बायिंग और कॉर्पोरेट्स व सेंट्रल गवर्नमेंट की ओर से री-पेमेंट्स ने भी दबाव बढ़ाया। ट्रेड टेंशंस के चलते US के साथ नेगोशिएशन में रुकावटें आ रही हैं। ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन की तरफ से टैरिफ इंपोजिशन ने बातचीत को मुश्किल बनाया है।
हालांकि कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने कहा है कि 2025 के आखिर तक एक फ्रेमवर्क ट्रेड डील पर सेटलमेंट की उम्मीद है, जो इंडियन एक्सपोर्टर्स को टैरिफ बेनिफिट्स देगी।
बाजार पर दिखा असर, सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट
रुपए में गिरावट का घरेलू इक्विटी मार्केट्स पर भी नेगेटिव असर पड़ा। आज सेंसेक्स 64 गिरकर 85,641.90 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी भी 27 अंक गिरा, ये 26,175.75 के स्तर पर बंद हुआ।
वहीं शुक्रवार को FIIs ने इक्विटीज में 3,795.72 करोड़ रुपए की नेट सेलिंग की थी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह आउटफ्लो वैल्यूएशन प्रेशर और ग्लोबल क्यूज से जुड़ा है।
एक्सपर्ट्स ने कहा- आउटफ्लो ने चिंता बढ़ाई
- मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि रुपया प्रेशर में है, क्योंकि FPIs की हैवी बायिंग से पैसा बाहर जा रहा है।
- हाई वैल्यूएशंस के चलते स्टेक्स सेल, ऑयल-गोल्ड बायिंग और री-पेमेंट्स से आउटफ्लोज हो रहे हैं।
- शॉर्ट टर्म में यह ट्रेंड कंटिन्यू रह सकता है, लेकिन ट्रेड डील पर प्रोग्रेस से राहत मिल सकती है।
करेंसी की कीमत कैसे तय होती है?
डॉलर की तुलना में किसी भी अन्य करेंसी की वैल्यू घटे तो उसे मुद्रा का गिरना, टूटना, कमजोर होना कहते हैं। अंग्रेजी में करेंसी डेप्रिसिएशन कहते हैं। हर देश के पास फॉरेन करेंसी रिजर्व होता है, जिससे वह इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन करता है। फॉरेन रिजर्व के घटने और बढ़ने का असर करेंसी की कीमत पर दिखता है।
अगर भारत के फॉरेन रिजर्व में डॉलर, अमेरिका के रुपए के भंडार के बराबर होगा तो रुपए की कीमत स्थिर रहेगी। हमारे पास डॉलर घटे तो रुपया कमजोर होगा, बढ़े तो रुपया मजबूत होगा। इसे फ्लोटिंग रेट सिस्टम कहते हैं।
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जन गण मन से पहले गाया जाएगा वंदे मातरम:सभी 6 पैरा गाना जरूरी, स्कूलों में राष्ट्रगीत के बाद शुरू होगी पढ़ाई, सिनेमाघरों को छूट
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5 hours agoon
February 11, 2026By
Divya Akashनई दिल्ली,एजेंसी। केंद्र सरकार ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। गृह मंत्रालय ने आदेश में कहा है कि अब सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों या अन्य औपचारिक आयोजनों में ‘वंदे मातरम’ बजाया जाएगा। इस दौरान हर व्यक्ति का खड़ा होना अनिवार्य होगा। यह आदेश 28 जनवरी को जारी हुआ, लेकिन मीडिया में इसकी जानकारी 11 फरवरी को आई।
न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, आदेश में साफ लिखा है कि अगर राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ साथ में गाए या बजाए जाएं, तो पहले वंदे मातरम गाया जाएगा। इस दौरान गाने या सुनने वालों को सावधान मुद्रा में खड़ा रहना होगा।
आदेश के मुताबिक सभी स्कूलों में दिन की शुरुआत राष्ट्रगीत बजाने के बाद ही होगी। नए नियमों के अनुसार, राष्ट्रगीत के सभी 6 अंतरे गाए जाएंगे, जिनकी कुल अवधि 3 मिनट 10 सेकेंड है। अब तक मूल गीत के पहले दो अंतरे ही गाए जाते थे।
हालांकि, आदेश में यह भी कहा गया है किन-किन मौकों पर राष्ट्रगीत गाया जा सकता है, इसकी पूरी लिस्ट देना संभव नहीं है। यह पहली बार है जब राष्ट्रगीत के गायन को लेकर डिटेल में प्रोटोकॉल जारी किए गए हैं। केंद्र इस समय वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में कार्यक्रम मना रहा है।
राष्ट्रपति के आगमन और झंडारोहण जैसे कार्यक्रमों में गाया जाएगा
नई गाइडलाइन के अनुसार, तिरंगा फहराने, किसी कार्यक्रमों में राष्ट्रपति के आगमन, राष्ट्र के नाम उनके भाषणों और संबोधनों से पहले और बाद में, और राज्यपालों के आगमन और भाषणों से पहले और बाद में सहित कई आधिकारिक अवसरों पर वंदे मातरम बजाना अनिवार्य होगा।
मंत्रियों या अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तियों की मौजूदगी वाले गैर-औपचारिक लेकिन जरूरी कार्यक्रमों में भी राष्ट्रगीत सामूहिक रूप से गाया जा सकता है, बशर्ते इसे पूरा सम्मान और शिष्टाचार के साथ पेश किया जाए।
10 पेजों के आदेश में, सिविलियन पुरस्कार समारोहों, जैसे कि पद्म पुरस्कार समारोह या ऐसे किसी भी कार्यक्रम में जहां राष्ट्रपति उपस्थित हों, वहां भी वन्दे मातरम बजाया जाएगा।
सिनेमा हॉल में लागू नहीं होंगे नए नियम
हालांकि, सिनेमा हॉल को नए नियमों से दूर रखा गया है। यानी सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले ‘वंदे मातरम’ बजाना और खड़ा रहना अनिवार्य नहीं होगा।
वहीं अगर किसी न्यूजरील या डॉक्यूमेंट्री फिल्म के हिस्से के रूप में राष्ट्रगीत बजाया जाता है, तो दर्शकों के लिए खड़ा होना जरूरी नहीं होगा। मंत्रालय ने कहा कि ऐसी स्थिति में खड़े होने से प्रदर्शन में व्यवधान और अव्यवस्था हो सकती है।
मंत्रालय ने कहा है कि अब से राष्ट्रगीत का आधिकारिक संस्करण ही गाया या बजाया जाएगा और इसे सामूहिक गायन के साथ प्रस्तुत किया जाएगा।
बंकिम चंद्र ने 1875 में लिखा था, आनंदमठ में छपा था
भारत के राष्ट्रगीत वंदे मातरम को बंकिम चंद्र चटर्जी ने 7 नवंबर 1875 को अक्षय नवमी के पावन अवसर पर लिखा था। यह 1882 में पहली बार उनकी पत्रिका बंगदर्शन में उनके उपन्यास आनंदमठ के हिस्से के रूप में छपा था।
1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने मंच पर वंदे मातरम गाया। यह पहला मौका था जब यह गीत सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय स्तर पर गाया गया। सभा में मौजूद हजारों लोगों की आंखें नम हो गई थीं।
‘वंदे मातरम’ एक संस्कृत वाक्यांश है, जिसका मतलब है- हे मां, मैं तुम्हें नमन करता हूं। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ‘वंदे मातरम’ भारत को औपनिवेशिक शासन से मुक्त कराने के लिए संघर्ष कर रहे स्वतंत्रता सेनानियों का नारा बन गया था।
गणतंत्र दिवस परेड में वंदे मातरम की झांकी निकली थी
दिल्ली में कर्तव्य पथ पर मुख्य परेड में इस साल 77वें गणतंत्र दिवस पर मुख्य परेड की थीम वंदे मातरम रखी गई थी। परेड में संस्कृति मंत्रालय ने वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने का जश्न मनाने वाली झांकी निकाली थी। इस झांकी को मंत्रालयों और विभागों की कैटेगरी में बेस्ट झांकी का अवॉर्ड मिला।
संस्कृति मंत्रालय की ‘वंदे मातरम: एक राष्ट्र की आत्मा की पुकार’ थीम पर आधारित झांकी में बंकिम चंद्र चटर्जी के गीत की रचना, एक प्रसिद्ध मराठी गायक द्वारा औपनिवेशिक काल की रिकॉर्डिंग और Gen Z का प्रतिनिधित्व करने वाले एक समूह द्वारा इसका गायन दिखाया गया था।
झांकी के आगे के भाग में वंदे मातरम की पांडुलिपि बनाते हुए दिखाया गया था। इसके निचले हिस्से में एक पैनल पर चटर्जी की एक छवि दिखाई गई थी। मध्य भाग में पारंपरिक वेशभूषा में कलाकारों का एक समूह था जिसने भारत की लोक विविधता को दर्शाया।

26 जनवरी 2026 को दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित 77वें गणतंत्र दिवस परेड के दौरान संस्कृति मंत्रालय की झांकी की तस्वीर।
शीतकालीन सत्र के दौरान हुआ था विवाद
केंद्र सरकार ने पिछले साल वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने पर संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान विशेष चर्चा का आयोजन किया था। लोकसभा और राज्यसभा में इस मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी चुनावों को लेकर राष्ट्रगीत को मुद्दा बना रही है।
वहीं भाजपा ने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति के तहत वंदे मातरम के हिस्से काटने का आरोप लगाया था। भाजपा ने 1937 में देश के पहले PM जवाहरलाल नेहरू की एक चिट्ठी शेयर की थी, जो उन्होंने सुभाष चंद्र बोस को लिखी थी।
भाजपा ने आरोप लगाया था कि चिट्ठी में नेहरू ने संकेत दिया था कि वंदे मातरम की कुछ लाइनें मुसलमानों को असहज कर सकती हैं। संसद में बहस के दौरान भाजपा के पूर्व अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा था कि राष्ट्रगीत को भी राष्ट्रीय गान और राष्ट्रीय ध्वज के समान दर्जा दिया जाना चाहिए।
8 दिंसबर 2025: PM बोले- कांग्रेस ने वंदे मातरम के टुकड़े किए
पीएम मोदी ने लोकसभा में वंदे मातरम पर बहस की शुरुआत की थी। उन्होंने अपनी एक घंटे की स्पीच में कहा था, ‘कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के आगे घुटने टेक दिए और वंदे मातरम के टुकड़े कर दिए। नेहरू को लगता था कि इससे मुसलमानों को चोट पहुंच सकती है।’
पीएम ने कहा, ‘वंदे मातरम के साथ विश्वासघात क्यों हुआ। वो कौन सी ताकत थी, जिसकी इच्छा पूज्य बापू की भावनाओं पर भी भारी पड़ी। पीएम मोदी ने एक घंटे की स्पीच में 121 बार वंदे मातरम कहा था।’
वंदे मातरम के चार छंद क्यों हटाए गए थे?
सव्यसाची भट्टाचार्य की किताब ‘वंदे मातरम: द बायोग्राफी ऑफ ए सॉन्ग’ के मुताबिक, 20 अक्टूबर 1937 को सुभाष चंद्र बोस को लिखी चिट्ठी में नेहरू ने लिखा था कि वंदे मातरम् की पृष्ठभूमि और भाषा मुसलमानों को असहज करती है और इसकी भाषा इतनी कठिन है कि बिना डिक्शनरी के समझना मुश्किल है।
उस समय वंदे मातरम को लेकर देश में सांप्रदायिक तनाव बढ़ रहा था। जवाहरलाल नेहरू को यह विवाद एक संगठित साजिश का हिस्सा लगता था। इसी मुद्दे पर उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर से सलाह लेने की बात भी लिखी।
22 अक्टूबर 1937 को कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने मूल गीत के छह पैरा में चार पैरा हटाने का फैसला लिया था। इस बैठक में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, सुभाष चंद्र बोस, राजेंद्र प्रसाद, मौलाना अबुल कलाम आजाद, सरोजनी नायडू सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल थे।

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अब रूस नहीं, अमेरिका से ज्यादा तेल खरीदेगा भारत:दावा- सरकारी कंपनियों को अमेरिकी क्रूड लेने को कहा, ट्रेड डील के बाद फैसला
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5 hours agoon
February 11, 2026By
Divya Akashनई दिल्ली,एजेंसी। भारत सरकार ने देश की सरकारी तेल रिफाइनरी कंपनियों से कहा है कि वे अब अमेरिका और वेनेजुएला से ज्यादा कच्चा तेल खरीदने पर विचार करें। अमेरिकी मीडिया ब्लूमबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में यह दावा किया है।
ब्लूमबर्ग के मुताबिक, अमेरिका के साथ हुई हालिया ट्रेड डील के बाद भारत सरकार ने यह अनुरोध किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ट्रेड डील के ऐलान के दौरान कहा था कि भारत ने रूसी तेल का आयात पूरी तरह बंद करने का वादा किया है।
प्राइवेट डील के जरिए क्रूड मंगाने की तैयारी
सरकार ने कंपनियों से कहा है कि जब भी टेंडर के जरिए स्पॉट मार्केट से तेल खरीदें, तो अमेरिकी तेल को प्राथमिकता दें। सरकार ने वेनेजुएला के कच्चे तेल को लेकर भी ऐसा अनुरोध किया है। हालांकि वेनेजुएला का तेल व्यापारियों के साथ प्राइवेट बातचीत से मंगाया जाएगा।
सरकार बोली- देश की ऊर्जा सुरक्षा पहले
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा था कि भारत व्यापार समझौते के हिस्से के रूप में रूसी कच्चा तेल लेना बंद करने पर सहमत हो गया है। हालांकि, भारत ने अब तक सार्वजनिक रूप से इस दावे पर सीधा कोई जवाब नहीं दिया है। भारत का कहना रहा है कि वह अपने तेल के स्रोतों में विविधता ला रहा है और देश की ऊर्जा सुरक्षा उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
अमेरिकी तेल मंगाने में 2 बड़ी चुनौतियां
विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय रिफाइनरीज के लिए अमेरिकी और वेनेजुएला का तेल बड़े पैमाने पर लेना इतना आसान नहीं है। इसकी दो मुख्य वजहें हैं:
- रिफाइनिंग क्षमता: भारत की ज्यादातर रिफाइनरीज ‘मीडियम क्रूड’ के हिसाब से बनी हैं, जबकि अमेरिकी तेल ‘लाइट और स्वीट’ यानी कम सल्फर वाला होता है। इसे प्रोसेस करना भारतीय यूनिट्स के लिए पूरी तरह अनुकूल नहीं है।
- लागत और मालभाड़ा: अमेरिका से भारत की दूरी बहुत ज्यादा है। बढ़ते फ्रेट रेट्स (मालभाड़ा) के कारण वहां से तेल मंगाना महंगा पड़ता है। इसकी तुलना में कजाकिस्तान और पश्चिम अफ्रीका से तेल मंगाना सस्ता और नजदीक पड़ता है।
सरकारी कंपनियों ने 40 लाख बैरल क्रूड मंगाया
हाल ही में सरकारी कंपनियों जैसे IOC, BPCL और HPCL ने वेनेजुएला से करीब 40 लाख बैरल तेल खरीदा है। निकोलस मादुरो सरकार पर अमेरिकी नियंत्रण के बाद अब विटोल और ट्रेफिगुरा जैसी बड़ी कंपनियां वेनेजुएला के तेल की मार्केटिंग कर रही हैं। निजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी रिलायंस ने भी 2025 के मध्य के बाद पहली बार वेनेजुएला से तेल की खेप खरीदी है।
अमेरिका से तेल का आयात लगभग दोगुना करने का लक्ष्य
भारतीय रिफाइनर हर साल अमेरिका से करीब 4 लाख बैरल प्रतिदिन तेल ले सकते हैं। यह पिछले साल के 2.25 लाख बैरल प्रतिदिन के मुकाबले काफी ज्यादा होगा।
हालांकि, ये कीमत और रूस के साथ कूटनीतिक संबंधों पर टिका है। फिलहाल पेट्रोलियम मंत्रालय और सरकारी तेल कंपनियों ने इस मामले में आधिकारिक टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।
भारत ने 2019 के बाद वेनेजुएला से तेल लेना बंद कर दिया था
अमेरिका ने 2019 में वेनेजुएला पर सेंक्शंस लगा दिए थे। इस वजह से भारत समेत कई देशों ने वेनेजुएला का तेल खरीदना बंद कर दिया था। वेनेजुएला पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज (OPEC) का सदस्य है। उसके पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है, लेकिन वह वैश्विक सप्लाई का करीब 1% ही देता है।
भारत ने 2024 में दोबारा वेनेजुएलाई तेल खरीदना शुरू किया
अमेरिका ने कुछ समय के लिए (2023-2024 में) वेनेजुएला पर आंशिक रूप से सेंक्शंस ढीले किए, जिससे भारत ने फिर से वेनेजुएला से तेल खरीदा।
- 2024 में भारत का आयात औसतन 63,000 से 1 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया।
- 2025 में वेनेजुएला से भारत का तेल आयात बढ़कर करीब 1.41 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
- मई 2025 में अमेरिका ने एक बार फिर से वेनेजुएला के तेल पर सख्ती बढ़ा दी।

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लोकसभा में रिजिजू बोले-PM पर आरोप लगाया, सबूत दें:राहुल ने कहा- अभी दे रहा, स्पीकर ने रोका, नेता विपक्ष के खिलाफ नोटिस देगी सरकार
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5 hours agoon
February 11, 2026By
Divya Akashनई दिल्ली,एजेंसी। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को बजट सत्र के दौरान भाषण दिया। राहुल ने एपस्टीन फाइल्स और अडाणी पर अमेरिका में चल रहे केस का जिक्र किया। राहुल ने कहा कि अडाणी पर चल रहा केस, दरअसल मोदी पर दबाव बनाने का तरीका है। इसके जरिए भाजपा का फाइनेंसियल स्ट्रक्चर टूटेगा।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल को तुरंत टोका। उन्होंने कहा- आपने जो भी कहा है उसे साबित करिए, नहीं तो आपकी बात सदन के रिकॉर्ड पर नहीं जानी चाहिए।
इस पर कांग्रेस नेता ने जवाब दिया- अभी देता हूं। तुरंत सारे सबूत देता हूं। हालांकि, स्पीकर ने राहुल को टोक दिया। उन्होंने कहा- मैंने तो सबूत मांगा ही नहीं है। आप बोलते रहिए। बाद में साबित कर दीजिएगा।
वहीं, किरेन रिजिजू ने कहा कि हम राहुल गांधी के खिलाफ संसद में विशेषाधिकार का नोटिस पेश करेंगे। इसपर राहुल गांधी को जवाब देना होगा। रिजिजू ने कहा कि राहुल को 5 बजे वित्त मंत्री का जवाब जरूर सुनना चाहिए।
राहुल गांधी के भाषण की खास बातें…

- आपने (केंद्र सरकार) भारत को बेच दिया है। आपने हमारी मां, भारत माता को बेच दिया है। अब अमेरिका तय करेगा कि हम किससे तेल खरीदेंगे. हमारा फैसला प्रधानमंत्री नहीं करेंगे।
- दुनिया में जियोपॉलिटिकल टकराव बढ़ रहा है। यह युद्ध का दौर है। गाजा, यूक्रेन को देख लीजिए। ऑपरेशन सिंदूर भी चल रहा है। भारत की सभी IT कंपनियां संघर्ष कर रही हैं।
- अनिल अंबानी को जेल क्यों नहीं हुई? क्योंकि उनका नाम एपस्टीन फाइल्स में है। मैं जानता हूं कि उनको एपस्टीन से किसने मिलवाया था। हरदीप पुरी भी जानते हैं कि किसने मिलवाया था।
- अमेरिका और चीन की नजर भारत के डेटा पर है। AI के दौर में डेटा पेट्रोल की तरह है। हमारी सरकार ने बजट में डेटा पर विदेशी कंपनियों को 20 साल का टैक्स हॉलीडे दे दिया है।
- अगर हम अमेरिका से डील करते तो ट्रम्प से कहते कि आप भारतीयों के डेटा चाहते हैं तो बराबरी पर बात होगी। हम आपके नौकर नहीं हैं। अमेरिका तय नहीं करेगा कि हमें क्या करना है।


एक हाथ में लाश,दूसरे में सिगरेट और गुनगुनाता रहा गाना:न्यूज एंकर मर्डर-केस में चश्मदीद ने खोले राज,वारदात के पांच साल बाद मिली थी लाश
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