विदेश
रूस ने यूक्रेन पर 700 हवाई हमले किए:गलती से अपने शहर पर गिराया 1000kg का बम, जंग रोकने US-यूक्रेन बातचीत बेनतीजा
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Divya Akashकीव/ मास्को,एजेंसी। यूक्रेन में आर्म्ड फोर्सेज डे से पहले रूस ने शनिवार को बड़े पैमाने पर हवाई हमला किया। यूक्रेन एयरफोर्स के मुताबिक रूस ने 29 ठिकानों पर 653 ड्रोन और 51 मिसाइल दागीं। इनमें से 585 ड्रोन और 30 मिसाइल मार गिराई गईं। इससे 8 लोग घायल हुए।
कई एनर्जी स्टेशन और रेलवे ढांचे को नुकसान पहुंचा। जापोरेजिया न्यूक्लियर पावर प्लांट कुछ समय के लिए ऑफ-साइट पावर से कट गया, हालांकि रिएक्टर बंद होने के कारण कोई बड़ा खतरा नहीं हुआ। रूस ने भी यूक्रेन पर हवाई हमले करने का आरोप लगाया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस ने यूक्रेन पर हमले के दौरान गलती से अपने ही एक शहर बेल्गोरोड (यूक्रेन सीमा से करीब 40 किमी दूर) पर FAB-1000 (हाई-एक्सप्लोसिव बम) गिरा दिया। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
बम का कुल वजन लगभग 1000 किलो के करीब था। बम पूरी तरह फटा नहीं, लेकिन जमीन पर जोरदार धमाका हुआ और एक बहुत बड़ा गड्ढा बन गया।

रूस के बेल्गोरोड शहर में बम गिरने के बाद इलाके का जायजा लेते सुरक्षाकर्मी।
हमले के बाद यूक्रेनी और अमेरिकी अधिकारियों के बीच तीन दिनों की वार्ता बिना किसी सफलता के खत्म हो गई। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने ट्रम्प के शांति दूत स्टीव विटकॉफ और अमेरिकी राष्ट्रपति के दामाद जेरेड कुशनर के साथ फोन पर बातचीत की थी।
वहीं, यूरोपीय नेता सोमवार को लंदन में मिलने की तैयारी कर रहे हैं। इससे पहले फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों अमेरिका की नीयत को लेकर आशंका जता चुके हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने चेतावनी दी थी कि अमेरिका, यूक्रेन को धोखा दे सकता है।

यूक्रेनी फायर पॉइंट की फ्लेमिंगो मिसाइलों का निरीक्षण करते सैन्यकर्मी।
यूक्रेन ने रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले बढ़ाए
रूस ने भी दावा किया कि उसने रातभर में 116 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए। साथ ही यूक्रेन ने रूस के रयाजान तेल रिफाइनरी पर लंबी दूरी के ड्रोन से हमला किया।
यूक्रेनी सेना और रूसी क्षेत्रीय अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की। पिछले कुछ महीनों से यूक्रेन रूस के तेल रिफाइनरियों पर लगातार हमले कर रहा है, ताकि रूस का तेल निर्यात आय कम हो।
रूस भारत जैसे देशों को बड़े पैमाने पर तेल बेचता है। यूक्रेन-अमेरिका का आरोप है कि रूस यहीं तेल बेचकर जंग के लिए हथियार और मिसाइल बनाता है।
जेलेंस्की बोले- रूस ने बिजली स्टेशन को निशाना बनाया
राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा कि हमले का टारगेट बिजली स्टेशन और ग्रिड से जुड़े ढांचे थे। हमलों के कारण कई क्षेत्रों में ब्लैकआउट हुए। फास्टिव (कीव के पास) में एक ड्रोन हमले ने रेलवे स्टेशन को पूरी तरह नष्ट कर दिया।
IAEA के अनुसार, जापोरेजिया प्लांट रात में कुछ समय के लिए बाहरी बिजली से कट गया। रिएक्टर बंद हैं, लेकिन ईंधन को ठंडा रखने के लिए पावर जरूरी है। प्लांट पर अभी भी रूसी सेना का कब्ज़ा है।

रूस ने अगस्त में यूक्रेन के कई रिहाइशी इलाकों पर हमले किए थे।
यूक्रेन-अमेरिका वार्ता बिना ठोस नतीजा खत्म
हमले के बाद यूक्रेनी और अमेरिकी अधिकारियों के बीच तीन दिनों की वार्ता बिना किसी सफलता के समाप्त हो गई। ये वार्ताएं फ्लोरिडा में हो रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दूत और सलाहकार स्टीव विटकॉफ और ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर भी इसमें शामिल हैं।
जेलेंस्की ने कहा कि विटकॉफ और कुशनर से उन्होंने फोन पर बातचीत की। जेलेंस्की ने बातचीत को सकारात्मक बताया।
दोनों पक्षों ने सुरक्षा गारंटी के ढांचे पर सहमति जताई, लेकिन कोई ठोस समझौता अभी नहीं हुआ। जेलेंस्की ने कहा, “असली शांति तभी होगी, जब रूस गंभीरता दिखाएगा।”
रूस को हत्याएं बंद करनी होगी
अमेरिकी और यूक्रेनी पक्ष ने कहा कि युद्ध खत्म करने के लिए रूस को हत्याएं बंद करनी होगी और डी-एस्केलेशन के कदम उठाने होंगे। अभी तक रूस ने कोई बड़ी रियायत नहीं दी है और लगातार बड़े हमले कर रहा है।
जेलेंस्की ने बताया कि जंग कैसे खत्म किया जाए इस पर बात हुई, संभावित समझौतों पर भी चर्चा हुई। साथ ही जेलेंस्की ने बताया कि वह अमेरिका के साथ काम करना जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
यूरोपीय नेता सोमवार को लंदन में मिलेंगे
यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की, ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों सोमवार को लंदन में मिलने की तैयारी कर रहे हैं।
ये चारों नेता यूक्रेन की सुरक्षा गारंटी और अमेरिका के नेतृत्व वाली शांति प्रक्रिया पर चर्चा करेंगे।

राष्ट्रपति पुतिन ने यूक्रेन युद्ध पर अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ और ट्रम्प के दामाद जैरेड कुशनर से बात की।
फ्रांसीसी राष्ट्रपति बोले- रूस शांति नहीं चाहता
मैक्रों ने रूसी हमलों की कड़ी निंदा की और कहा, ‘रूस शांति नहीं चाहता, वह लगातार उकसावे वाली कार्रवाई कर रहा है। हमें रूस पर और दबाव डालना होगा, ताकि वह शांति के लिए मजबूर हो।’ मैक्रों ने जेलेंस्की से फोन पर बात कर एकजुटता जताई।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री स्टार्मर ने कहा कि यूक्रेन अपना भविष्य खुद तय करेगा और शांति सेना यूक्रेन की सुरक्षा की गारंटी देने में अहम भूमिका निभाएगी। रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने पहले ही कह दिया है कि यूक्रेन में तैनात कोई भी विदेशी सैनिक हमले का शिकार हो सकते हैं।
मैक्रों बोले थे- अमेरिका यूक्रेन को मजबूर कर सकता है
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने चेतावनी दी थी कि अमेरिका, यूक्रेन को धोखा दे सकता है। जर्मन अखबार डेर श्पीगल के मुताबिक 1 दिसंबर को यूरोपीय नेताओं की एक सीक्रेट वीडियो कॉल लीक हो गई थी।
इसमें जर्मनी के चांसलर फेडरिक मर्ज, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब, नाटो के महासचिव मार्क रूटे, पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की शामिल थे।
इस दौरान मैक्रों ने शक जताया था कि अमेरिका बिना मजबूत सुरक्षा गारंटी दिए यूक्रेन को क्षेत्र छोड़ने के लिए मजबूर कर सकता है। इस कॉल की रिकॉर्डिंग अखबार के पास पहुंची थी।
नेताओं ने साफ कहा कि उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दो खास लोगों अमेरिकी राजदूत स्टीव विटकॉफ और ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर पर जरा भी भरोसा नहीं है।
जर्मनी के चांसलर मर्ज ने जेलेंस्की से कहा, ‘आने वाले दिनों में बहुत सावधान रहिए, आपके साथ और हमारे साथ खेल खेला जा रहा है।’ फिनलैंड के राष्ट्रपति स्टब और नाटो चीफ रूटे ने भी यही बात दोहराई कि जेलेंस्की को इन दोनों अमेरिकियों के साथ अकेला नहीं छोड़ा जा सकता।
यूक्रेन के राष्ट्रपति कार्यालय ने इस पूरी खबर को झूठी और गलत जानकारी बताया।

ट्रम्प, जेलेंस्की और यूरोपीय नेताओं ने 18 अगस्त को अमेरिका में बैठक की थी।
पुतिन बोले थे- हम यूरोप से जंग के लिए तैयार
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने मंगलवार को यूरोपीय देशों को कड़ी चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा कि अगर यूरोप ने रूस के खिलाफ युद्ध शुरू किया, तो रूस पूरी तरह से जवाब देने के लिए तैयार है।
पुतिन ने कहा कि रूस यूरोप से युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अगर यूरोप युद्ध शुरू करता है तो मामला इतना जल्दी खत्म होगा कि बातचीत करने वाला कोई नहीं बचेगा।
पुतिन ने दावा किया कि यूक्रेन में रूस पूरी तरह युद्ध नहीं लड़ रहा है, बल्कि सर्जिकल ऑपरेशन जैसी सीमित कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने कहा कि अगर यूरोप के साथ सीधा युद्ध हुआ तो हालात अलग होंगे और रूस पूरी ताकत से जवाब देगा।
2022 से जारी रूस-यूक्रेन जंग
रूस-यूक्रेन जंग फरवरी, 2022 में शुरू हुआ था। दोनों देशों के बीच जंग की बड़ी वजह रूस का यूक्रेनी जमीन पर कब्जा है।
रूस ने यूक्रेन के लगभग 20% क्षेत्र पर कब्जा कर रखा है। युद्ध के कारण हजारों नागरिक और सैनिक मारे गए हैं और लाखों यूक्रेनियन विस्थापित हुए हैं। जून 2023 तक, करीब 80 लाख यूक्रेनी लोग देश छोड़कर भाग चुके हैं।
ट्रम्प ने युद्ध को समाप्त करने के लिए दोनों देशों के नेताओं के साथ बैठक की थी। हाल ही में, उन्होंने पुतिन के साथ अलास्का में बैठक की, जो 80 वर्षों में किसी रूसी नेता की पहली अलास्का यात्रा थी।
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पहला विमान कल तेहरान से दिल्ली आएगा, स्टूडेंट्स का रजिस्ट्रेशन पूरा, पासपोर्ट जमा किए
नई दिल्ली,एजेंसी। ईरान में जारी सरकार विरोधी हिंसक प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार ने वहां से भारतीयों को एयरलिफ्ट करने की तैयारी कर ली है। पहला विमान कल तेहरान से नई दिल्ली के लिए रवाना होगा।
जम्मू और कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (JKSA) ने एक बयान में कहा, सभी छात्रों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है। भारतीय दूतावास ने उनकी पर्सनल डिटेल और पासपोर्ट इकट्ठा कर लिए हैं। पहले बैच को सुबह 8 बजे तक तैयार रहने की जानकारी दे दी गई है।
पहले बैच में गोलेस्तान यूनिवर्सिटी, शाहिद बहेश्ती यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज और तेहरान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज के कुछ स्टूडेंट्स शामिल हैं। फाइनल लिस्ट देर रात शेयर की जाएगी।
ईरान में करीब 10000 भारतीय रहते हैं। इसमें से 2500-3000 स्टूडेंट हैं, जो मेडिकल की पढ़ाई के लिए वहां गए थे।

यह तस्वीर कश्मीर की है, जिनके बच्चे ईरान में फंसे हुए हैं। उनके पेरेंट्स चिंता कर रहे हैं।

कश्मीर में रहने वाले लोगों ने सरकार से मांग की है कि पढ़ाई करने ईरान गए बच्चों को वापस लाया जाए।

भारत सरकार ने 14 जनवरी को एडवाइजरी जारी की थी।
विदेश मंत्रालय ने हेल्पलाइन नंबर और ईमेल जारी किया
एडवाइजरी में कहा गया है कि ईरान में मौजूद सभी भारतीय नागरिकों अपने पासपोर्ट,वीजा और अन्य जरूरी डॉक्यूमेंट्स हमेशा अपने पास तैयार रखें। इस संबंध में किसी भी मदद के लिए वे भारतीय दूतावास से संपर्क करें।
दूतावास ने आपातकालीन संपर्क हेल्पलाइन भी जारी की हैं। मोबाइल नंबर: +989128109115; +989128109109; +989128109102; +989932179359। ईमेल: cons.tehran@mea.gov.in
ईरान में मौजूद वे सभी भारतीय नागरिक जिन्होंने अभी तक भारतीय दूतावास में रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है, उनसे अनुरोध है कि वे इस लिंक (https://www.meaers.com/request/home) के माध्यम से रजिस्टर्ड करें।
यह लिंक दूतावास की वेबसाइट पर भी उपलब्ध है। यदि ईरान में इंटरनेट बाधित होने के कारण कोई भारतीय नागरिक पंजीकरण करने में असमर्थ है, तो भारत में उनके परिवार के सदस्यों से अनुरोध है कि वे उनकी ओर से रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।
जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री के बीच बातचीत हुई
बुधवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर को ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची का फोन आया। उन्होंने ईरान के हालातों पर चर्चा की। विदेश मंत्रालय (MEA) ने भारतीय नागरिकों को ईरान ना जाने की सलाह दी है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, ईरान में लगभग 10,000 भारतीय नागरिक मौजूद हैं।
भारत सरकार की यह एडवाइजरी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ट ट्रम्प की उस धमकी के बाद आई है, जिसमें कहा गया है कि अगर ईरान देशभर में हो रहे प्रदर्शनों का हिंसा से जवाब देना जारी रखता है, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई कर सकता है।
दावा- ईरान में 12 हजार लोगों की मौत

ईरानी मुद्रा रियाल के ऐतिहासिक रूप से गिरने के बाद पिछले महीने ईरान में प्रदर्शन शुरू हुए थे। तब से देश के सभी 31 प्रांतों में फैल गए हैं।
प्रदर्शन में मरने वालों की संख्या पर नजर रखने वाली अमेरिकी संस्था ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी ने बताया कि अब तक 2,550 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। इनमें 2,403 प्रदर्शनकारी और 147 सरकार से जुड़े लोग शामिल हैं।
हालांकि ईरान से जुड़े मामलों को कवर करने वाली वेबसाइट ईरान इंटरनेशनल ने दावा किया है कि देशभर में कम से कम 12 हजार लोगों की मौत हुई है। ज्यादातर लोग गोली लगने से मारे गए हैं।
देश
लश्कर के आतंकी की हिंदुओं का गला काटने की धमकी:वायरल वीडियो में कहा- कश्मीर को आजादी भीख मांगने से नहीं, जिहाद से मिलेगी
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2 days agoon
January 14, 2026By
Divya Akashइस्लामाबाद,एजेंसी। आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी अबू मूसा कश्मीरी ने हिंदुओं की गर्दन काटने की धमकी दी है। उसने यह बयान पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में दिया। इसका वीडियो भी सामने आया है, हालांकि ये कब का है, इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है।
वीडियो में अबू मूसा कहता है- कश्मीर मुद्दे का हल सिर्फ आतंकवाद और जिहाद से ही हो सकता है। आजादी भीख मांगने से नहीं, हिंदुओं की गर्दन काटने से मिलेगी। हमें जिहाद का झंडा उठाना होगा।
अबू मूसा कश्मीरी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े संगठन जम्मू कश्मीर यूनाइटेड मूवमेंट का मेंबर है। उसका नाम अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले से भी जुड़ा था।
पाकिस्तानी नेताओं पर इस्लामी सिद्धांतों से भटकने का आरोप
अपने भाषण में अबू मूसा ने पाकिस्तानी नेताओं पर भी गंभीर आरोप लगाए। उसने कहा कि पाकिस्तान के नेता इस्लामी सिद्धांतों से भटक चुके हैं और जिहाद के रास्ते पर नहीं चल रहे हैं।
उसने कहा जो नेता जिहाद के लिए प्रतिबद्ध नहीं है, उसे पाकिस्तान पर हुकूमत करने का कोई अधिकार नहीं है। मूसा ने दावा किया कि वह पहले भी ऐसे ही बयान मुजफ्फराबाद में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ हुई एक बैठक में दे चुका है।
अबू मूसा पहलगाम हमले में भी शामिल था
अबू मूसा पिछले साल 22 अप्रैल को हुए पहलगाम हमले में भी शामिल था। दैनिक भास्कर ने तब पड़ताल की थी कि आखिर पहलगाम अटैक के दौरान पाकिस्तान से आतंकियों को कौन आदेश दे रहा था। इस दौरान दो पाकिस्तानी हैंडलर के नाम मिले थे।
पहला अबू मूसा और दूसरा रिजवान हनीफ। दोनों पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में लश्कर-ए-तैयबा के ऑपरेटिंग कमांडर हैं। इन्हीं दोनों ने मुरीदके में अफगान को ट्रेनिंग भी दी थी। हालांकि सूत्रों का दावा था कि पहलगाम अटैक का मास्टरमाइंड अबू मूसा ही है। ये सैफुल्लाह कसूरी का करीबी भी है।
अबू मूसा ने पहले भी हिंदुओं को मारने की बात कही थी
पहलगाम हमले से 4 दिन पहले 18 अप्रैल को लश्कर के एक कार्यक्रम में अबू मूसा ने कश्मीर में हिंदुओं को मारने का जिक्र किया था। इसका वीडियो भी सामने आया था। इसमें मूसा ने कहा था, ’गाजा और कश्मीर का एक ही मसला है और दोनों मसलों का एक ही हल है, वो है जिहाद। उसने कहा था- हमें भीख नहीं, आजादी चाहिए। फिलिस्तीन और कश्मीर के जो दुश्मन हैं, वो हमारे दुश्मन हैं। जब इजराइल को घुटने पर ले आए, तो कश्मीर में भी करेंगे।’

अबू मूसा कथित तौर पर ‘जम्मू-कश्मीर यूनाइटेड मूवमेंट’ (JKUM) का नेतृत्व करता है। ये तस्वीर पिछले साल 18 अप्रैल को हुए उसी आयोजन की है, जिसमें उसने कश्मीर की तुलना गाजा-फिलिस्तीन से की थी।
लश्कर के एक और आतंकी ने पाकिस्तानी नेताओं पर तंज किया था
लश्कर-ए-तैयबा के एक अन्य कमांडर मोहम्मद अशफाक राणा ने भी कुछ दिन पहले इसी तरह पाकिस्तानी नेताओं पर तंज किया था। अशफाक राणा ने सीधे शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की आलोचना करते हुए उन पर देश को सही तरीके से न चलाने और अंतरराष्ट्रीय कर्ज को बर्बाद करने का आरोप लगाया था।
उसने दावा किया था कि अगर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से मिले पैसों का सही इस्तेमाल किया गया होता, तो पाकिस्तान आज सऊदी अरब से भी ज्यादा खूबसूरत और ब्रिटेन व स्पेन से ज्यादा विकसित होता।
उसने आगे कहा कि इसके बावजूद देश की हालत लगातार खराब होती जा रही है। उसने कहा कि पाकिस्तान में पैदा होने वाला हर बच्चा भारी कर्ज के बोझ के साथ जन्म ले रहा है। अगर यह पैसा देश के भीतर लगाया गया होता तो पाकिस्तान आज कई विकसित देशों से आगे होता।
विदेश
थाइलैंड में पैसेंजर ट्रेन पर क्रेन गिरी, 30 की मौत:67 घायल, ज्यादातर स्कूली छात्र, 65 फीट ऊंचाई से मलबा गिरा, डिब्बे पटरी से उतरे
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2 days agoon
January 14, 2026By
Divya Akashथाईलैंड,एजेंसी। थाईलैंड में बुधवार को तेज रफ्तार से चल रही पैसेंजर ट्रेन पर 65 फीट ऊंचाई से एक क्रेन गिर गई। इसके चलते ट्रेन के कई डिब्बे क्षतिग्रस्त हो गए। न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक हादसे में 30 लोगों की मौत हो गई है। वहीं, 67 यात्री घायल हुए हैं, जिनमें से कई की हालत गंभीर बताई जा रही है।
क्रेन का इस्तेमाल रेल ब्रिज के निर्माण में हो रहा था। हादसे के समय ट्रेन में 195 लोग सवार थे। अधिकारियों के मुताबिक, इनमें ज्यादातर यात्री स्कूल के छात्र थे। दुर्घटना के समय ट्रेन लगभग 120 किमी/घंटा की रफ्तार से चल रही थी।

थाईलैंड में बुधवार को रेल ब्रिज में इस्तेमाल हो रही क्रेन 65 फीट की ऊंचाई से एक पैसेंजर ट्रेन पर गिरी।

क्रेन गिरने के कारण थाईलैंड में बुधवार को पैसेंजर ट्रेन पटरी से उतर गई।

क्रेन गिरने के कारण ड्राइवर को ब्रेक लगाने का मौका नहीं मिला, जिससे यह हादसा हुआ।

टक्कर इतनी तेज थी कि ट्रेन के शीशे टूट गए और ट्रेन क्षतिग्रस्त हो गई।

पटरी से उतरते ही ट्रेन के डिब्बों में आग लग गई।

रेस्क्यू टीम ने घायल यात्रियों को निकालकर उन्हें पास के अस्पतालों में पहुंचाया।
ड्राइवर को ब्रेक लगाने का मौका नहीं मिला
यह दुर्घटना नाखोन राचासिमा प्रांत के सिखियो जिले में हुई। हादसे के वक्त ट्रेन राजधानी बैंकॉक से उबोन राचाथानी जा रही थी। क्रेन ट्रेन के तीन डिब्बों पर गिरा, जिनमें से दो डिब्बों में सबसे ज्यादा लोग सवार थे। इन्हीं डिब्बों में जानमाल का सबसे ज्यादा नुकसान हुआ।
न्यूज वेबसाइट ‘नेशन थाईलैंड’ के मुताबिक क्रेन गिरने के कारण ड्राइवर को ब्रेक लगाने का मौका नहीं मिला। टक्कर के बाद क्रेन का मलबा कोच पर गिरा, जिससे कई डिब्बे पटरी से उतर गए। पटरी से उतरते ही डिब्बों में आग लग गई।
बचाव दल ने अब तक 12 शव बरामद किए
हादसे के कुछ मिनट बाद रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। बचाव दल ने बताया कि आग पर काबू पा लिया गया है।
कई यात्री डिब्बों में फंसे हुए थे, जिन्हें कटिंग और स्प्रेडिंग उपकरणों की मदद से बाहर निकाला गया। अब तक 12 शव बरामद कर लिए गए हैं।
प्रशासन और रेलवे अधिकारी जांच कर रहे हैं कि क्रेन क्यों गिरी और सुरक्षा नियमों का पालन हुआ या नहीं। स्थानीय लोग और परिवार इस दुखद घटना से सदमे में हैं।
ट्रेन का डिब्बा दो हिस्सों में कटा
घटनास्थल पर मौजूद स्थानीय निवासी ने AFP समाचार एजेंसी को बताया कि उन्होंने एक तेज आवाज सुनी, जिसके बाद दो विस्फोट हुए।
निवासी ने कहा , “जब मैं यह देखने गया कि क्या हुआ है, तो मैंने पाया कि क्रेन एक यात्री ट्रेन पर पड़ी हुई थी। क्रेन से निकला मेटल का टुकड़ा ट्रेन के बीचों-बीच जा टकराया, जिससे वह दो हिस्सों में कट गया।”

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