कीव/ मास्को,एजेंसी। यूक्रेन में आर्म्ड फोर्सेज डे से पहले रूस ने शनिवार को बड़े पैमाने पर हवाई हमला किया। यूक्रेन एयरफोर्स के मुताबिक रूस ने 29 ठिकानों पर 653 ड्रोन और 51 मिसाइल दागीं। इनमें से 585 ड्रोन और 30 मिसाइल मार गिराई गईं। इससे 8 लोग घायल हुए।
कई एनर्जी स्टेशन और रेलवे ढांचे को नुकसान पहुंचा। जापोरेजिया न्यूक्लियर पावर प्लांट कुछ समय के लिए ऑफ-साइट पावर से कट गया, हालांकि रिएक्टर बंद होने के कारण कोई बड़ा खतरा नहीं हुआ। रूस ने भी यूक्रेन पर हवाई हमले करने का आरोप लगाया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस ने यूक्रेन पर हमले के दौरान गलती से अपने ही एक शहर बेल्गोरोड (यूक्रेन सीमा से करीब 40 किमी दूर) पर FAB-1000 (हाई-एक्सप्लोसिव बम) गिरा दिया। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
बम का कुल वजन लगभग 1000 किलो के करीब था। बम पूरी तरह फटा नहीं, लेकिन जमीन पर जोरदार धमाका हुआ और एक बहुत बड़ा गड्ढा बन गया।
रूस के बेल्गोरोड शहर में बम गिरने के बाद इलाके का जायजा लेते सुरक्षाकर्मी।
हमले के बाद यूक्रेनी और अमेरिकी अधिकारियों के बीच तीन दिनों की वार्ता बिना किसी सफलता के खत्म हो गई। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने ट्रम्प के शांति दूत स्टीव विटकॉफ और अमेरिकी राष्ट्रपति के दामाद जेरेड कुशनर के साथ फोन पर बातचीत की थी।
वहीं, यूरोपीय नेता सोमवार को लंदन में मिलने की तैयारी कर रहे हैं। इससे पहले फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों अमेरिका की नीयत को लेकर आशंका जता चुके हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने चेतावनी दी थी कि अमेरिका, यूक्रेन को धोखा दे सकता है।
यूक्रेनी फायर पॉइंट की फ्लेमिंगो मिसाइलों का निरीक्षण करते सैन्यकर्मी।
यूक्रेन ने रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले बढ़ाए
रूस ने भी दावा किया कि उसने रातभर में 116 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए। साथ ही यूक्रेन ने रूस के रयाजान तेल रिफाइनरी पर लंबी दूरी के ड्रोन से हमला किया।
यूक्रेनी सेना और रूसी क्षेत्रीय अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की। पिछले कुछ महीनों से यूक्रेन रूस के तेल रिफाइनरियों पर लगातार हमले कर रहा है, ताकि रूस का तेल निर्यात आय कम हो।
रूस भारत जैसे देशों को बड़े पैमाने पर तेल बेचता है। यूक्रेन-अमेरिका का आरोप है कि रूस यहीं तेल बेचकर जंग के लिए हथियार और मिसाइल बनाता है।
जेलेंस्की बोले- रूस ने बिजली स्टेशन को निशाना बनाया
राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा कि हमले का टारगेट बिजली स्टेशन और ग्रिड से जुड़े ढांचे थे। हमलों के कारण कई क्षेत्रों में ब्लैकआउट हुए। फास्टिव (कीव के पास) में एक ड्रोन हमले ने रेलवे स्टेशन को पूरी तरह नष्ट कर दिया।
IAEA के अनुसार, जापोरेजिया प्लांट रात में कुछ समय के लिए बाहरी बिजली से कट गया। रिएक्टर बंद हैं, लेकिन ईंधन को ठंडा रखने के लिए पावर जरूरी है। प्लांट पर अभी भी रूसी सेना का कब्ज़ा है।
रूस ने अगस्त में यूक्रेन के कई रिहाइशी इलाकों पर हमले किए थे।
यूक्रेन-अमेरिका वार्ता बिना ठोस नतीजा खत्म
हमले के बाद यूक्रेनी और अमेरिकी अधिकारियों के बीच तीन दिनों की वार्ता बिना किसी सफलता के समाप्त हो गई। ये वार्ताएं फ्लोरिडा में हो रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दूत और सलाहकार स्टीव विटकॉफ और ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर भी इसमें शामिल हैं।
जेलेंस्की ने कहा कि विटकॉफ और कुशनर से उन्होंने फोन पर बातचीत की। जेलेंस्की ने बातचीत को सकारात्मक बताया।
दोनों पक्षों ने सुरक्षा गारंटी के ढांचे पर सहमति जताई, लेकिन कोई ठोस समझौता अभी नहीं हुआ। जेलेंस्की ने कहा, “असली शांति तभी होगी, जब रूस गंभीरता दिखाएगा।”
रूस को हत्याएं बंद करनी होगी
अमेरिकी और यूक्रेनी पक्ष ने कहा कि युद्ध खत्म करने के लिए रूस को हत्याएं बंद करनी होगी और डी-एस्केलेशन के कदम उठाने होंगे। अभी तक रूस ने कोई बड़ी रियायत नहीं दी है और लगातार बड़े हमले कर रहा है।
जेलेंस्की ने बताया कि जंग कैसे खत्म किया जाए इस पर बात हुई, संभावित समझौतों पर भी चर्चा हुई। साथ ही जेलेंस्की ने बताया कि वह अमेरिका के साथ काम करना जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
यूरोपीय नेता सोमवार को लंदन में मिलेंगे
यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की, ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों सोमवार को लंदन में मिलने की तैयारी कर रहे हैं।
ये चारों नेता यूक्रेन की सुरक्षा गारंटी और अमेरिका के नेतृत्व वाली शांति प्रक्रिया पर चर्चा करेंगे।
राष्ट्रपति पुतिन ने यूक्रेन युद्ध पर अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ और ट्रम्प के दामाद जैरेड कुशनर से बात की।
फ्रांसीसी राष्ट्रपति बोले- रूस शांति नहीं चाहता
मैक्रों ने रूसी हमलों की कड़ी निंदा की और कहा, ‘रूस शांति नहीं चाहता, वह लगातार उकसावे वाली कार्रवाई कर रहा है। हमें रूस पर और दबाव डालना होगा, ताकि वह शांति के लिए मजबूर हो।’ मैक्रों ने जेलेंस्की से फोन पर बात कर एकजुटता जताई।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री स्टार्मर ने कहा कि यूक्रेन अपना भविष्य खुद तय करेगा और शांति सेना यूक्रेन की सुरक्षा की गारंटी देने में अहम भूमिका निभाएगी। रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने पहले ही कह दिया है कि यूक्रेन में तैनात कोई भी विदेशी सैनिक हमले का शिकार हो सकते हैं।
मैक्रों बोले थे- अमेरिका यूक्रेन को मजबूर कर सकता है
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने चेतावनी दी थी कि अमेरिका, यूक्रेन को धोखा दे सकता है। जर्मन अखबार डेर श्पीगल के मुताबिक 1 दिसंबर को यूरोपीय नेताओं की एक सीक्रेट वीडियो कॉल लीक हो गई थी।
इसमें जर्मनी के चांसलर फेडरिक मर्ज, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब, नाटो के महासचिव मार्क रूटे, पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की शामिल थे।
इस दौरान मैक्रों ने शक जताया था कि अमेरिका बिना मजबूत सुरक्षा गारंटी दिए यूक्रेन को क्षेत्र छोड़ने के लिए मजबूर कर सकता है। इस कॉल की रिकॉर्डिंग अखबार के पास पहुंची थी।
नेताओं ने साफ कहा कि उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दो खास लोगों अमेरिकी राजदूत स्टीव विटकॉफ और ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर पर जरा भी भरोसा नहीं है।
जर्मनी के चांसलर मर्ज ने जेलेंस्की से कहा, ‘आने वाले दिनों में बहुत सावधान रहिए, आपके साथ और हमारे साथ खेल खेला जा रहा है।’ फिनलैंड के राष्ट्रपति स्टब और नाटो चीफ रूटे ने भी यही बात दोहराई कि जेलेंस्की को इन दोनों अमेरिकियों के साथ अकेला नहीं छोड़ा जा सकता।
यूक्रेन के राष्ट्रपति कार्यालय ने इस पूरी खबर को झूठी और गलत जानकारी बताया।
ट्रम्प, जेलेंस्की और यूरोपीय नेताओं ने 18 अगस्त को अमेरिका में बैठक की थी।
पुतिन बोले थे- हम यूरोप से जंग के लिए तैयार
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने मंगलवार को यूरोपीय देशों को कड़ी चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा कि अगर यूरोप ने रूस के खिलाफ युद्ध शुरू किया, तो रूस पूरी तरह से जवाब देने के लिए तैयार है।
पुतिन ने कहा कि रूस यूरोप से युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अगर यूरोप युद्ध शुरू करता है तो मामला इतना जल्दी खत्म होगा कि बातचीत करने वाला कोई नहीं बचेगा।
पुतिन ने दावा किया कि यूक्रेन में रूस पूरी तरह युद्ध नहीं लड़ रहा है, बल्कि सर्जिकल ऑपरेशन जैसी सीमित कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने कहा कि अगर यूरोप के साथ सीधा युद्ध हुआ तो हालात अलग होंगे और रूस पूरी ताकत से जवाब देगा।
2022 से जारी रूस-यूक्रेन जंग
रूस-यूक्रेन जंग फरवरी, 2022 में शुरू हुआ था। दोनों देशों के बीच जंग की बड़ी वजह रूस का यूक्रेनी जमीन पर कब्जा है।
रूस ने यूक्रेन के लगभग 20% क्षेत्र पर कब्जा कर रखा है। युद्ध के कारण हजारों नागरिक और सैनिक मारे गए हैं और लाखों यूक्रेनियन विस्थापित हुए हैं। जून 2023 तक, करीब 80 लाख यूक्रेनी लोग देश छोड़कर भाग चुके हैं।
ट्रम्प ने युद्ध को समाप्त करने के लिए दोनों देशों के नेताओं के साथ बैठक की थी। हाल ही में, उन्होंने पुतिन के साथ अलास्का में बैठक की, जो 80 वर्षों में किसी रूसी नेता की पहली अलास्का यात्रा थी।
दमिश्क, एजेंसी। सीरिया की एक अदालत ने मंगलवार को देश के पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद और उनके छोटे भाई माहेर अल-असद को फांसी की सजा सुनाई। दोनों को गृहयुद्ध के दौरान लाखों लोगों की हत्या और अत्याचार के मामलों में दोषी ठहराया गया।
इसी मामले में बशर अल-असद के मामा के बेटे अतीफ नजीब को भी फांसी की सजा सुनाई गई। बशर और माहेर दिसंबर 2024 में सरकार गिरने के बाद रूस भाग गए थे। पुतिन सरकार ने उन्हें शरण दी हुई है। दोनों की गैरमौजूदगी में सजा सुनाई गई।
अतीफ नजीब को जनवरी 2025 में गिरफ्तार किया गया था। उन्हें मंगलवार को कैदी की वर्दी पहनाकर पिंजरे में कोर्ट लाया गया।
बशर अल असद के ममेरे भाई अतीफ नजीब को पिंजरे में कोर्ट लाया गया था।
अतीफ के आदेश के बाद सीरिया में गृहयुद्ध भड़का
अतीफ नजीब सीरियाई सेना में ब्रिगेडियर जनरल रह चुके हैं। 2011 में वे दारा प्रांत में राजनीतिक सुरक्षा शाखा के प्रमुख थे। वह असद सरकार के सबसे बड़े अधिकारियों में से एक हैं, जिन पर अदालत में मुकदमा चला।
अतीफ पर आरोप है कि उन्होंने प्रदर्शनकारियों से सख्ती से निपटने का आदेश दिया था। आदेश के बाद सीरिया में विरोध प्रदर्शन और उग्र हो गया। देश में गृहयुद्ध शुरू हो गया जो 2024 तक चलता रहा। इसमें करीब 5 लाख लोगों की मौत हुई।
सीरिया के इदलिब के एक रिफ्यूजी कैंप में गृहयुद्ध के दौरान घायल हुआ एक बच्चा। मार्च 2011 से 2024 तक सीरिया में 30 हजार से ज्यादा बच्चों की मौत हुई थी।
दिसंबर 2024 में 53 साल पुराना राज खत्म हुआ
यह बशर अल-असद के खिलाफ किसी आपराधिक मामले में आया पहला फैसला है। दिसंबर 2024 में विद्रोहियों ने दमिश्क पर कब्जा कर उनकी सरकार गिरा दी थी। इसके साथ ही 1971 से सीरिया पर शासन कर रहे असद परिवार का 53 साल पुराना राज भी खत्म हो गया था।
सरकार गिरने से ठीक पहले बशर अल-असद ने देश छोड़ दिया था। इसके बाद सीरिया पर विद्रोही नेता अहमद अल-शरा का कब्जा हो गया। उनकी सरकार ने उनके शासन के दौरान लोगों पर हुए अत्याचार और हत्याओं के मामलों की जांच शुरू की।
दिसंबर 2024 में दारा शहर पर कब्जे के बाद विद्रोही लड़ाके सीरिया का झंडा लहराते हुए।
रूस और ईरान के साथ के बावजूद कैसे गिरी असद सरकार?
गृहयुद्ध के दौरान बशर अल-असद की सरकार को रूस, ईरान और हिजबुल्लाह का समर्थन मिलता था। इसी वजह से वह कई साल तक सत्ता में बने रहे।
साल 2024 में हालात बदल गए। इजराइल के लगातार हमलों से हिजबुल्लाह और ईरान समर्थित गुट कमजोर पड़ गए। दूसरी ओर, रूस यूक्रेन युद्ध में उलझा हुआ था, इसलिए वह भी पहले जैसी सैन्य मदद नहीं कर सका।
इसी मौके का फायदा उठाकर तुर्किये के समर्थन वाले विद्रोही गुटों ने उत्तर-पश्चिमी प्रांत इदलिब से बड़ा हमला शुरू किया। कुछ ही दिनों में उन्होंने कई शहरों पर कब्जा कर लिया और 8 दिसंबर 2024 को राजधानी दमिश्क पहुंच गए।
विद्रोहियों के दमिश्क पहुंचते ही बशर अल-असद अपने परिवार के साथ रूस भाग गए। उनकी सरकार गिर गई और असद परिवार का 53 साल से ज्यादा पुराना शासन खत्म हो गया।
वॉशिंगटन, एजेंसी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ईरान के साथ बिना परमाणु समझौते के भी जंग खत्म करने पर विचार कर रहे हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, अमेरिका की एक बड़ी शर्त होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोलना है। अगर ईरान वहां से गुजरने वाले कारोबारी जहाजों को बिना किसी रुकावट के आने-जाने देता है, तो अमेरिका जंग से पीछे हट सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रम्प पिछले कुछ हफ्तों से इस योजना पर काम कर रहे हैं। उन्होंने अपने सीनियर अफसरों से कहा है कि अगर ईरान होर्मुज स्ट्रेट खोल देता है तो अमेरिका औपचारिक परमाणु समझौते के बिना भी संघर्ष खत्म करने को तैयार हो सकता है।
अब परमाणु समझौता नहीं, होर्मुज खोलना अमेरिका की नई प्राथमिकता
पहले अमेरिका की सबसे बड़ी शर्त ईरान के साथ नया परमाणु समझौता करना थी। लेकिन जंग लंबी खिंचने के बाद उसका फोकस बदलता दिख रहा है।
अब होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही शुरू कराना जंग खत्म करने की अहम शर्त बन सकता है। यह रास्ता दुनिया के लिए बेहद अहम है, क्योंकि यहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की सप्लाई होती है।
ईरान ने रखीं 7 बड़ी शर्तें
होर्मुज स्ट्रेट खोलने के बदले ईरान ने भी अमेरिका के सामने कई शर्तें रखी हैं। सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहम्मद बाघेर जोलघदार के मुताबिक, अमेरिका को…
ईरान के सहयोगी गुटों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई बंद करनी होगी।
जंग हमेशा के लिए खत्म करनी होगी।
ईरान की समुद्री नाकाबंदी हटानी होगी।
क्षेत्र से अपने सैनिक वापस बुलाने होंगे।
ईरान पर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंध हटाने होंगे।
विदेशों में रोकी गई ईरानी संपत्ति लौटानी होगी।
जंग में हुए नुकसान का मुआवजा देना होगा।
अमेरिका में बढ़ रहा जंग खत्म करने का दबाव
ईरान के साथ जंग लंबी खिंचने का असर अमेरिका में भी दिखने लगा है। पेट्रोल की कीमतें बढ़ने लगी हैं, जिससे आम लोगों पर असर पड़ रहा है। अगले साल होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले यह ट्रम्प प्रशासन के लिए राजनीतिक चुनौती बन सकता है।
ऐसे में ट्रम्प पर जल्द से जल्द संघर्ष खत्म करने का दबाव बढ़ रहा है। यही वजह है कि वे पिछले कुछ समय से लगातार कह रहे हैं कि ईरान के साथ समझौता जल्द हो सकता है। हाल ही में उन्होंने सोशल मीडिया पर यह संकेत भी दिया था कि अमेरिका इस जंग में अपना मकसद हासिल कर चुका है।
परमाणु समझौते के बिना भी ट्रम्प क्यों तैयार?
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प का मानना है कि उनके कार्यकाल में ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को दोबारा आसानी से शुरू नहीं कर पाएगा। उनका भरोसा है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियां ईरान की हर गतिविधि पर नजर रख सकती हैं।
ट्रम्प यह भी मानते हैं कि अगर ईरान फिर से परमाणु हथियार बनाने की कोशिश करता है, तो अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई कर सकता है। इसलिए उनके लिए औपचारिक परमाणु समझौते से ज्यादा अहम होर्मुज स्ट्रेट को फिर से पूरी तरह खुलवाना है।
ईरान होर्मुज स्ट्रेट खोलने के बदले अमेरिकी सैनिकों की वापसी, सभी प्रतिबंध हटाने, विदेशों में जमा अपनी संपत्ति लौटाने और युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा जैसी बड़ी मांगें कर रहा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच समझौता होना आसान नहीं माना जा रहा।
अमेरिकी खुफिया एजेंसी ODNI के मुताबिक, युद्ध से पहले ईरान के पास 3,000 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें थीं, जिनकी मारक क्षमता 2,000 किमी तक है। इन मिसाइलों का बड़ा हिस्सा पहाड़ों के नीचे बने अंडरग्राउंड ठिकानों में रखा गया है। यहां मिसाइलें, लॉन्चर और कंट्रोल सेंटर सुरंगों के अंदर होते हैं, इसलिए हवाई हमलों में इन्हें पूरी तरह नष्ट करना आसान नहीं माना जाता।
दुनिया के 20% तेल का रास्ता ईरान के पास
हॉर्मुज स्ट्रेट से दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का करीब 20% और LNG का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इसका उत्तरी तट ईरान के पास है। इसलिए यहां तनाव बढ़ने और हॉर्मुज बंद होने का असर सीधे वैश्विक तेल कीमतों और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ता है।
हजारों ड्रोन का बेड़ा
ईरान ने पिछले एक दशक में शाहेद जैसे हजारों ड्रोन विकसित किए हैं। इनका इस्तेमाल लंबी दूरी के हमलों और निगरानी के लिए किया जाता है। रूस-यूक्रेन युद्ध में भी ईरानी ड्रोन के इस्तेमाल ने इसकी क्षमता को वैश्विक स्तर पर चर्चा में ला दिया।
पश्चिम एशिया में सहयोगी सशस्त्र नेटवर्क
ईरान के समर्थन वाले समूह हिजबुल्लाह (लेबनान), हूती (यमन) और इराक के कई शिया सशस्त्र गुट पश्चिम एशिया में एक्टिव हैं। अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञ इन्हें ईरान की फॉरवर्ड डिफेंस स्ट्रटजी का हिस्सा मानते हैं, जिससे वह अपने सीमावर्ती क्षेत्र से बाहर भी दबाव बना सकता है।
होर्मुज पर ईरान दावा क्यों करता है?
हॉर्मुज स्ट्रेट ईरान और ओमान के बीच स्थित है। इसका उत्तरी किनारा ईरान के पास है, जबकि दक्षिणी किनारा ओमान के पास है। सबसे संकरी जगह पर इसकी चौड़ाई सिर्फ 21 नॉटिकल मील (करीब 39 किलोमीटर) है।
शुरुआत में दोनों देशों का समुद्री क्षेत्र सिर्फ 3 नॉटिकल मील तक माना जाता था। लेकिन बाद में समुद्री कानूनों में बदलाव के बाद ईरान ने 1959 में और ओमान ने 1972 में अपने-अपने समुद्री क्षेत्र की सीमा बढ़ाकर 12-12 नॉटिकल मील (करीब 22-22 किलोमीटर) कर दी।
इस फैसले के बाद हॉर्मुज स्ट्रेट का सबसे संकरा हिस्सा पूरी तरह ईरान और ओमान के समुद्री क्षेत्रों में आ गया। हालांकि समुद्री आवाजाही जारी रहे इसके 2-2 नॉटिकल मील का चौड़ा ट्रांजिट लेन बनाया गया।
तेहरान, एजेंसी। ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई का जंग के बाद पहली बार वीडियो सामने आया है। ईरानी न्यूज एजेंसी मेहर ने यह वीडियो जारी किया है। इसमें मुजतबा जमीन पर बैठे लोगों के बीच उनसे बातचीत करते नजर आ रहे हैं।
सुप्रीम लीडर बनने के बाद यह उनका पहला वीडियो है। हालांकि, वीडियो कब रिकॉर्ड किया गया, इसकी जानकारी नहीं दी गई है। पिछले कुछ दिनों से मुजतबा की सेहत को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे थे। इजराइली चैनल 14 ने उनकी हालत गंभीर होने और अस्पताल में भर्ती होने का दावा किया था। यहां तक कहा गया था कि उनकी जल्द मौत हो सकती है।
अब वीडियो सामने आने के बाद इन दावों पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, मुजतबा की मौजूदा सेहत को लेकर अभी भी पूरी तस्वीर साफ नहीं है।
सऊदी मीडिया का दावा- ईरान में नहीं थे मुजतबा
सऊदी मीडिया अल-हदथ ने इजराइली सुरक्षा सूत्र के हवाले से दावा किया था कि मुजतबा ईरान में नहीं थे। सूत्र ने यह भी कहा था कि मुजतबा के नाम से जारी सरकारी संदेश IRGC प्रमुख अहमद वाहिदी और दूसरे वरिष्ठ अधिकारी तैयार कर रहे थे।
सुप्रीम लीडर बनने के बाद से मुजतबा सार्वजनिक तौर पर नजर नहीं आए थे। उन्होंने कोई भाषण भी नहीं दिया था। सरकारी मीडिया ने उनके नाम से सिर्फ लिखित संदेश जारी किए थे।
ईरानी मीडिया के मुताबिक, पिता अली खामेनेई की मौत के बाद भी मुजतबा किसी मंत्री से नहीं मिले थे और पिता के अंतिम संस्कार में भी नजर नहीं आए। राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने भी कहा था कि मुजतबा से सीधे संपर्क करना मुश्किल है।
पहले भी गंभीर चोट की खबरें आई थीं
मुजतबा की सेहत को लेकर पहले भी कई दावे सामने आ चुके हैं। द न्यूयॉर्क टाइम्स ने रिपोर्ट किया था कि 28 फरवरी को अमेरिका-इजराइल के हमले के बाद मुजतबा एक गुप्त ठिकाने पर थे और डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही थी।
रिपोर्ट में दावा किया गया था कि उनके एक पैर की तीन बार सर्जरी हुई और एक हाथ का भी ऑपरेशन किया गया। चेहरे और होंठ पर चोट के कारण उन्हें बोलने में परेशानी होने की बात भी कही गई थी। हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने इन दावों को खारिज किया था।
अमेरिका-इजराइल ने 28 फरवरी को पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के घर को निशाना बनाया था।
पिता की मौत के बाद बने सुप्रीम लीडर
अमेरिकी-इजराइली हमले में अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद 56 साल के मुजतबा खामेनेई ईरान के नए सुप्रीम लीडर बने। वह लंबे समय से ईरान की सत्ता में पर्दे के पीछे प्रभावशाली माने जाते रहे हैं।
मुजतबा ने कभी चुनाव नहीं लड़ा और सरकार में कोई औपचारिक पद भी नहीं संभाला। इसके बावजूद उनके पिता के कार्यालय, IRGC और सुरक्षा तंत्र में मजबूत संपर्क माने जाते थे।
उन्होंने ईरान-इराक युद्ध के आखिरी दौर में IRGC में सेवा की थी। बाद में कोम में शिया धर्मशास्त्र और इस्लामी कानून की पढ़ाई की। 2009 के राष्ट्रपति चुनाव के बाद हुए प्रदर्शनों के दौरान भी उनका नाम सत्ता के भीतर प्रभाव रखने वाले नेताओं में सामने आया था। अमेरिका ने 2019 में उन पर प्रतिबंध लगाया था।