देश
कलाम की जगह भाजपा वाजपेयी को राष्ट्रपति बनाना चाहती थी:किताब में दावा- BJP ने अटलजी से कहा था, आप आडवाणी को PM बनने दीजिए
नई दिल्ली,एजेंसी। भारत के 11वें राष्ट्रपति के लिए भाजपा ने साल 2002 में डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम से पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को राष्ट्रपति पद ऑफर किया था। पूर्व PM वाजपेयी के करीबी अशोक टंडन ने अपनी किताब ‘अटल संस्मरण’ में इसका खुलासा किया है।
इस किताब के मुताबिक भाजपा ने वाजपेयी से कहा था, ‘पार्टी चाहती है कि आपको राष्ट्रपति भवन चले जाना चाहिए। आप प्रधानमंत्री पद लाल कृष्ण आडवाणी को सौंप दीजिए।’ हालांकि, वाजपेयी ने इस प्रस्ताव को साफ ठुकरा दिया। टंडन के अनुसार, वाजपेयी ने कहा था- मैं इस तरह के किसी कदम के पक्ष में नहीं हूं। मैं इस फैसले का समर्थन नहीं करूंगा।
टंडन ने 17 दिसंबर, 2025 को वाजपेयी की बर्थ एनिवर्सरी पर ‘अटल स्मरण’ किताब लॉन्च की है। टंडन 1998 से 2004 तक वाजपेयी के मीडिया सलाहकार थे। वहीं, वाजपेयी 1999 से 2004 तक, 5 साल का पूरा कार्यकाल पूरा करने वाले देश के पहले गैर-कांग्रेसी PM थे।
NDA ने 2002 में 11वें राष्ट्रपति चुनाव में कलाम को अपना उम्मीदवार बनाया था। कलाम के सामने कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार लक्ष्मी सहगल थीं। हालांकि, कांग्रेस समेत प्रमुख विपक्षी दलों के सांसदों और विधायकों ने कलाम के समर्थन में वोट किया। कलाम ने 25 जुलाई 2002 को राष्ट्रपति पद की शपथ ली।
किताब में दावा- सोनिया-मनमोहन के साथ मीटिंग में कलाम के नाम की घोषणा हुई
टंडन की किताब में बताया गया है कि वाजपेयी चाहते थे कि देश का 11वां राष्ट्रपति पक्ष-विपक्ष की सर्वसम्मति से बने। इसके लिए उन्होंने मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के सीनियर नेताओं को बातचीत के लिए आमंत्रित किया था। इस बैठक में सोनिया गांधी, प्रणब मुखर्जी और डॉ. मनमोहन सिंह शामिल हुए।
इसी बैठक में वाजपेयी ने पहली बार औपचारिक रूप से बताया कि NDA ने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को अपना राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाने का फैसला लिया। टंडन के अनुसार, इस घोषणा के बाद बैठक में कुछ देर के लिए सब मौन हो गए।
सोनिया गांधी ने चुप्पी तोड़ते हुए वाजपेयी से कहा, ‘हम लोग कलाम के नाम के सिलेक्शन को लेकर हैरान हैं। हालांकि, इस पर विचार करने के अलावा हमारे पास कोई ऑप्शन नहीं है। हम आपके प्रस्ताव पर चर्चा करेंगे और फिर फैसला लेंगे।’

भारत के तत्कालीन चीफ जस्टिस बीएन किरपाल (बाएं) ने 25 जुलाई, 2002 को दिल्ली स्थित पुरानी संसद के सेंट्रल हॉल में नवनिर्वाचित राष्ट्रपति कलाम को शपथ दिलाई थी।
‘वाजपेयी-आडवाणी में नीतिगत मतभेद, फिर भी रिश्ते खराब नहीं हुए’
अशोक टंडन ने अपनी किताब में अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी के संबंधों का भी जिक्र किया है। टंडन ने लिखा- कुछ नीतिगत मतभेदों के बावजूद दोनों नेताओं के रिश्ते कभी सार्वजनिक रूप से खराब नहीं हुए।
टंडन के अनुसार, आडवाणी हमेशा वाजपेयी को अपना नेता और प्रेरणा स्रोत बताते थे, जबकि वाजपेयी आडवाणी को अपना ‘अटल साथी’ बताते थे। किताब के अनुसार, वाजपेयी और आडवाणी की साझेदारी भारतीय राजनीति में सहयोग और संतुलन का प्रतीक रही। दोनों ने न केवल भाजपा का निर्माण किया, बल्कि पार्टी और सरकार, दोनों को नई दिशा दी।
संसद हमले के समय सोनिया ने अटल से फोन पर खैरियत पूछी थी
टंडन ने अपनी किताब में 13 दिसंबर 2001 को संसद पर हुए आतंकी हमले का भी जिक्र किया है। उस समय लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष रहीं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और वाजपेयी के बीच फोन पर बातचीत हुई थी। हमले के वक्त वाजपेयी अपने आवास पर थे और सहयोगियों के साथ टीवी पर सुरक्षाबलों की कार्रवाई देख रहे थे।
टंडन ने किताब में लिखा- हमले के दौरान वाजपेयी को सोनिया गांधी का फोन आया। उन्होंने वाजपेयी से कहा कि मैं आपकी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। इसके जवाब में वाजपेयी ने कहा- मैं सुरक्षित हूं। मुझे चिंता थी कि कहीं आप (सोनिया गांधी) संसद भवन में तो नहीं हैं। अपना ध्यान रखिएगा।
देश
राहुल गांधी मानहानि केस: क्या लिया जाएगा आवाज का नमूना? MP-MLA कोर्ट में बहस पूरी, 2 मई को आएगा फैसला
रायबरेली,एजेंसी। लोकसभा में विपक्ष के नेता एवं रायबरेली से सांसद राहुल गांधी से जुड़े मानहानि मामले में बुधवार को एमपी-एमएलए अदालत में दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के बीच दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 311 से संबंधित आवेदन पर बहस हुई। अदालत ने सुनवाई पूरी होने के बाद आदेश सुरक्षित रखते हुए 2 मई को फैसला सुनाने की तिथि निर्धारित की है। राहुल गांधी के अधिवक्ता काशी प्रसाद शुक्ला ने बताया कि वादी पक्ष के अधिवक्ता संतोष कुमार पांडेय द्वारा दायर धारा 311 के आवेदन पर अदालत में बहस हुई। अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद निर्णय के लिए अगली तारीख 2 मई तय की।

मिली जानकारी के मुताबिक, पिछली सुनवाई 17 अप्रैल को हुई थी। इससे पूर्व 28 मार्च की सुनवाई में वादी पक्ष ने राहुल गांधी की आवाज का नमूना लेने और उसकी फोरेंसिक जांच कराने की मांग की थी। इसके लिए सीआरपीसी की धारा 311 सहपठित धारा 91 के तहत आवेदन प्रस्तुत किया गया था, जिसमें आवाज के नमूने का मिलान पहले से दाखिल सीडी से, विधि विज्ञान प्रयोगशाला (फॉरेन्सिक लैब) में कराने का अनुरोध किया गया था। इस मांग का राहुल गांधी के अधिवक्ताओं ने विरोध किया था।
यह मामला भाजपा नेता विजय मिश्रा द्वारा अक्टूबर 2018 में दर्ज कराया गया था। इस प्रकरण में राहुल गांधी ने 20 फरवरी 2024 को अदालत में आत्मसमर्पण किया था, जिसके बाद विशेष मजिस्ट्रेट ने उन्हें 25-25 हजार रुपए के 2 मुचलकों पर जमानत प्रदान की थी। इसके बाद 26 जुलाई 2024 को राहुल गांधी ने अदालत में उपस्थित होकर अपना बयान दर्ज कराया और स्वयं को निर्दोष बताते हुए मामले को राजनीतिक साजिश करार दिया।
अदालत ने उनके बयान के बाद वादी पक्ष को साक्ष्य प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था, जिसके तहत गवाह पेश किए जाते रहे हैं। इससे पहले 20 फरवरी को भी राहुल गांधी ने सीआरपीसी की धारा 313 के तहत अपना बयान दर्ज कराया था, जिसमें अदालत ने उनसे आरोपों के संबंध में स्पष्टीकरण और साक्ष्य प्रस्तुत करने को कहा था। हालांकि, उनके अधिवक्ता द्वारा कोई अतिरिक्त साक्ष्य या स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं किया गया।
देश
फर्जी बैंक गारंटी से 136 करोड़ का खेल: रिलायंस पावर के CFO समेत 3 गिरफ्तार
नई दिल्ली,एजेंसी। राजधानी में आर्थिक अपराध शाखा ने एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश करते हुए सोलर प्रोजेक्ट से जुड़े टेंडर में धांधली के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में एक प्रमुख कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी का नाम भी सामने आया है।

क्या है पूरा मामला
Delhi Police Economic Offences Wing की जांच में सामने आया कि आरोपियों ने Solar Energy Corporation of India से टेंडर हासिल करने के लिए 136 करोड़ रुपये से अधिक की जाली बैंक गारंटी जमा की थी। इस साजिश में Reliance Power Limited के मुख्य वित्तीय अधिकारी अशोक कुमार पाल भी शामिल बताए जा रहे हैं।
फर्जी दस्तावेजों का जाल
जांच एजेंसियों के मुताबिक, आरोपियों ने जाली दस्तावेजों को असली दिखाने के लिए नकली ईमेल संवाद तैयार किए। इतना ही नहीं, State Bank of India के नाम से फर्जी पुष्टि पत्र भी बनाए गए, जिससे टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित किया जा सके।
गिरफ्तारी और कार्रवाई
पुलिस ने तीनों आरोपियों को 15 अप्रैल को गिरफ्तार किया। अदालत ने उन्हें 23 अप्रैल तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की तलाश कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में वित्तीय धोखाधड़ी के कई और पहलुओं की जांच की जा रही है। यदि और सबूत सामने आते हैं, तो मामले में और गिरफ्तारी भी हो सकती है। फिलहाल ये मामला बड़े स्तर पर वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए किस तरह जाली दस्तावेजों और तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिस पर अब एजेंसियों ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।
देश
PM मोदी पर विवादित टिप्पणी करना कांग्रेस को पड़ा भारी, चुनाव आयोग ने मल्लिकार्जुन को भेजा नोटिस
नई दिल्ली,एजेंसी। पीएम मोदी को लेकर विविवाद बयान देकर बुरे फंसे कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की मुश्किलें बढ़ गई है। दरअसल, भारत के चुनाव आयोग ने बुधवार को कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए उनके “आतंकवादी” कमेंट पर नोटिस जारी किया। भारतीय चुनाव आयोग ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा है।
आप को बता दें कि यह कार्रवाई केंद्रीय मंत्रियों – निर्मला सीतारमण, किरेन रिजिजू, अर्जुन राम मेघवाल – और अन्य BJP नेताओं वाले एक डेलीगेशन के चुनाव आयोग की फुल बेंच से मिलने और PM मोदी के खिलाफ खड़गे के “आतंकवादी” कमेंट के बारे में शिकायत करने के कुछ घंटों बाद हुई। हालांकि मल्लिकार्जुन खड़गे ने पीएम मोदी को लेकर दिए गए बयान पर अपनी सफाई दी थी। उन्होंने प्रेसवार्ता कर कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि उनका मतलब था कि प्रधानमंत्री देश के लोकतांत्रिक ताने-बाने को ‘आतंकित’ कर रहे हैं। खरगे ने कहा, ”वह लोगों और राजनीतिक दलों को आतंकित कर रहे हैं। मैंने कभी नहीं कहा कि वह (शब्दश:) आतंकवादी हैं। इसे आतंकित करना… वह अपनी सत्ता और सरकारी मशीनरी का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं और विपक्षी पार्टियों को गाली दे रहे हैं, बदनाम कर रहे हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ”भाजपा कार्यालय का एक्सटेंशन” बन गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री पर चुनाव प्रचार के आखिरी चरण में आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि सीबीआई, ईडी और आयकर विभाग जैसी केंद्रीय एजेंसियों को राजनीतिक लोगों को डराने-धमकाने के औजार के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। खरगे ने महिला आरक्षण से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक को लेकर भी केंद्र पर निशाना साधा।
उन्होंने प्रधानमंत्री पर यह दावा करके जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया कि विपक्ष ने महिला आरक्षण से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक को पारित नहीं होने दिया। उन्होंने तर्क दिया, ”अगर वह सच में इसे लागू करना चाहते हैं, तो वह मौजूदा 543 लोकसभा सीटों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दे सकते हैं। वह इसे क्यों नहीं दे रहे हैं?’
-
कोरबा2 years agoकटघोरा विधायक पुरूषोत्तम कंवर के गुर्गों द्वारा दिव्य आकाश कर्मियों पर हमला की कोशिश
-
Uncategorized7 months agoसुमेधा पुल पर लुट कांड सहित तीन अलग अलग जगह पर लुटकांड करने वाले आरोपी पुलिस के गिरफ्त में,,,दो आरोपी नाबालिक,,,देखे पूरी खबर
-
कोरबा2 years agoग्राम पंचायत पोड़ी के पूर्व सरपंच सचिव पर गबन के आधार पर अधिरोपित राशि 3341972/- रुपये शीघ्र वसूल हो- कय्युम बेग
-
कोरबा2 years agoकुसमुंडा खदान में डंपर पलट कर लगी आग, सरकारी गाड़ी में कोयला और डीजल चोर सवार थे, जलने से दोनों गंभीर
-
कोरबा2 years agoश्रीमती स्वाति दुबे का निधन
-
छत्तीसगढ़2 years agoबिलासपुर में अपोलो अस्पताल के 4 सीनियर डॉक्टर अरेस्ट
-
कोरबा2 years agoकटघोरा जनपद की 25 करोड़ की जमीन उनके करीबी कांग्रेसियों की 25 लाख में कैसे हो गई?
-
कोरबा2 years agoदर्री में 1320 मेगावाट विद्युत परियोजना के लिए नई सरकार गठन के बाद होगी पर्यावरणीय जनसुनवाई
