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छत्तीसगढ़

कोयला खान भविष्य निधि संगठन के द्वारा संशोधित पेंशन पेमेंट ऑर्डर जारी करने की प्रक्रिया प्रारंभ

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संशोधन के बाद पेंशन भुगतान प्रक्रिया होगी सरल, एसईसीएल के पेंशनभोगी कर्मियों व उनको परिजनों को होगी सहूलियत

कोयला खान भविष्य निधि संगठन (सीएमपीएफ़ओ) द्वारा दिवंगत सेवानिवृत कर्मियों के आश्रित विधवा/विधुर को पेंशन भुगतान की प्रक्रिया को सरल करते हुए संशोधित पेंशन पेमेंट ऑर्डर जारी करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गयी है।

बिलासपुरI सेवानिवृत कर्मियों के विधवा/विधुर पेंशन भुगतान प्रक्रिया के सरलीकरण तथा परेशानी मुक्त पेंशन प्राप्त करने के उद्देश्य से सीएमपीएफओ द्वारा संशोधित पेंशन पेमेंट ऑर्डर (PPO) जारी किये जाने की प्रक्रिया अपनायी जा रही है Iसंशोधित पेंशन पेमेंट ऑर्डर (PPO) प्राप्त करने के लिए पेंशन भोगी जिनके जीवनसाथी (पति / पत्नी ) जीवित है उन्हें एसईसीएल के उस क्षेत्र में सम्पर्क कर निर्धारित फॉर्म में अपनी एवं अपने जीवनसाथी (पति / पत्नी) की जानकारी देना होगा Iफॉर्म को पूर्णत: भरकर स्वयं एवं जीवनसाथी के आधार कार्ड, पैनकार्ड, संयुक्त बैंक बचत खाता पासबुक (जीवनसाथी के साथ फार्मर एवं सर्वाइवर मोड़ में ) जिसमे पेंशन प्राप्त हो रही है की स्वसत्यापित प्रतिलिपि, सेवानिवृत्त के समय जारी पेंशन पेमेंट आर्डर की प्रतिलिपि एवं पेंशनर तथा जीवनसाथी के 3 संयुक्त छायाचित्र के साथ उस क्षेत्र के क्षेत्रीय कार्मिक प्रबंधक के पास जमा करना होगा जहाँ से पेंशन भोगी सेवानिवृत्त हुआ है I

यदि सेवानिवृत्त एसईसीएल मुख्यालय बिलासपुर से हुई थी तो इसे पीएफ – पेंशन सेल, एसईसीएल मुख्यालय में जमा करना होगा I दूर – दराज क्षेत्रों में निवास करने वाले पेंशन भोगी रजिस्टर्ड डाक के द्वारा भी अपना आवेदन निर्धारित प्रोफार्मा में पूर्णत: भरकर उपरोक्त दस्तावेजों की स्वस्त्यापित प्रतिलिपि एवं फोटोग्राफ के साथ संबधित क्षेत्र के क्षेत्रीय कार्मिक प्रबंधक को भेज सकते है I संशोधित PPO हेतु निर्धारित प्रोफार्मा एसईसीएल के वेबसाइट https://www.secl-cil.in/pension.php में उपलब्ध है I

सेवानिवृत्त होने के पश्चात कोयला खान पेंशन योजना 1998 के तहत मासिक पेंशन का भुगतान कोयला खान भविष्य निधि संगठन के द्वारा किया जाता है I पेंशन भोगी की मृत्यु के उपरान्त विधवा / विधुर पेंशन भुगतान का प्रावधान है, जिसके लिए विधवा / विधुर को उस इकाई / खान में जाकर अपना पेंशन दावा एवं दस्तावेज जमा करना होता है जहाँ से पेंशन भोगी सेवानिवृत हुआ था I विधवा / विधुर के उम्र – दराज होने के कारण इसमें काफी असुविधा होती हैI

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छत्तीसगढ़

रायपुर : मुख्यमंत्री साय ने हाटकेश्वर जयंती पर प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाएं

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हाटकेश्वर जयंती के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने संदेश में कहा है कि हाटकेश्वर जयंती आस्था, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक पर्व है, जो हमें धर्म, संस्कृति और लोक परंपराओं से जोड़ता है। यह दिवस समाज में सद्भाव, समरसता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

उन्होंने भगवान हाटकेश्वर से प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हुए कहा कि यह पर्व सभी के जीवन में शांति और प्रगति  लेकर आए।

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कोरबा

राज्यपाल रमेन डेका 1 अप्रैल को रहेंगे कोरबा जिले प्रवास पर

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सामूहिक विवाह हनुमंत कथा में होंगे शामिल

कोरबा। राज्यपाल रमेन डेका कल 1 अप्रैल को कोरबा जिले के दौरे पर रहेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार श्री डेका रायपुर लोकभवन से सवेरे 7.30 बजे सड़क मार्ग द्वारा मुंगेली जिले के चंदखुरी विश्राम गृह के लिए प्रस्थान करेंगे। ततपश्चात राज्यपाल सुबह 9 बजे कोरबा जिले के कटघोरा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम ढपढप बांकीमोंगरा के लिए रवाना होंगे। यहां वे प्रातः 11 बजे आयोजित “दिव्य श्री हनुमंत कथा एवं 108 दिव्यांग एवं निर्धन कन्याओं के सामूहिक विवाह” कार्यक्रम में शामिल होंगे। कार्यक्रम के पश्चात राज्यपाल श्री डेका दोपहर 12:30 बजे रतनपुर (बिलासपुर) स्थित विश्राम गृह के लिए प्रस्थान करेंगे।

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छत्तीसगढ़

रायपुर : नाचा के जनक दाऊ दुलार सिंह मंदराजी की जयंती पर मुख्यमंत्री साय ने किया नमन

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककला परंपरा के संवाहक और ‘नाचा’ के जनक माने जाने वाले स्वर्गीय दाऊ दुलार सिंह मंदराजी की जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि दाऊ मंदराजी ने ‘नाचा’ जैसी लोकविधा को न केवल पुनर्जीवित किया, बल्कि उसे जन-जन तक पहुँचाकर सामाजिक चेतना का सशक्त माध्यम बनाया। उन्होंने गांवों के लोक कलाकारों को संगठित कर ‘नाचा’ को नई पहचान और गरिमा प्रदान की। उनके प्रयासों से यह लोककला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रही, बल्कि समाज में जागरूकता और सकारात्मक बदलाव का प्रभावी मंच बनी।

उन्होंने कहा कि दाऊ मंदराजी ने अपने समर्पण और साधना से छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को जीवंत बनाए रखा और उसके संरक्षण के लिए जीवनपर्यंत कार्य किया। उनका योगदान प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर के रूप में सदैव स्मरणीय रहेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा लोक कला और शिल्प के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कलाकारों को ‘दाऊ दुलार सिंह मंदराजी सम्मान’ प्रदान किया जाता है, जो उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

उन्होंने कहा कि दाऊ मंदराजी का व्यक्तित्व और कृतित्व आज भी नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने और लोकसंस्कृति को आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता है।

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