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छत्तीसगढ़

अपराधों में छत्तीसगढ़ देश में 6वें स्थान पर 00कांग्रेस शासन में 4786 मर्डर, 8702 ठगी और 15,511 महिलाओं के साथ अपराध

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रायपुर, एजेंसी। आपराधिक मामलों में छत्तीसगढ़ की रैंकिंग घटने की जगह बढ़ती जा रही है। 2021 में जहां प्रदेश 8वें स्थान पर था वहीं 2022 में छठवें स्थान पर आ गया है। इस बात का खुलासा एनसीआरबी की रिपोर्ट और छत्तीसगढ़ विधानसभा सत्र में डिप्टी सीएम विजय शर्मा के जवाब से हुआ है। ये आंकड़े हत्या, दुष्कर्म, लूट, ठगी और तस्करी जैसे गंभीर अपराधों को लेकर है। विधानसभा सत्र के चौथे दिन विधायक अजय चंद्राकर के सवाल के जवाब पर गृहमंत्री विजय शर्मा ने बताया कि, 2019 से 2023 तक कांग्रेस शासनकाल में हर साल क्राइम का ग्राफ बढ़ा है। शर्मा ने कहा कि, प्रदेश में 2019 से 2023 तक यानी कांग्रेस शासनकाल में प्रदेश में ठगी की 8702, हत्या की 4786, महिलाओं से संबंधित 15,511 अपराधिक घटनाएं हुई है। वहीं 646 पशु तस्करी, शराब और गांजा तस्करी के 5605 केस दर्ज हुए हैं। 2019 से लेकर 2023 तक प्रदेश में हर साल क्राइम का ग्राफ बढ़ा है। बढ़ते अपराध के औसत को कम करने के लिए विजिबल पुलिसिंग पैटर्न पर काम किया जा रहा है।

हत्या के सैकड़ों मामले पेंडिंग

1 अप्रैल 2021 से 31 दिसंबर 2023 तक प्रदेश में हत्या के 2733 मामले हुए हैं। इनमें से 2419 मामलों में गिरफ्तारी कर ली गई है। इसके अलावा 314 मामले अभी भी पेडिंग चल रहे हैं। इन प्रकरणों में जांच विवेचना अधिकारियों की ओर से की जा रही है। मामले में पुलिस अधिकारियों का कहना है, कि आरोपियों को गिरफ्तार करके लंबित प्रकरणों को जल्द खत्म कर दिया जाएगा।

सुसाइड के ग्राफ में भी लगातार बढ़ोतरी

छत्तीसगढ़ में आत्महत्या के मामलों में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। विधानसभा में डिप्टी सीएम की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार 2020 से नवंबर 2023 तक प्रदेश में 31 हजार 197 लोगों ने सुसाइड किया है। इनमें महिलाओं की संख्या 8167 है। आत्महत्या करने वालों किसानों की संख्या 484 है। वहीं युवाओं की संख्या 11620 है। वहीं शासकीय अधिकारियों और कर्मियों की संख्या 310 है।

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छत्तीसगढ़

रायपुर : मुख्यमंत्री साय ने हाटकेश्वर जयंती पर प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाएं

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हाटकेश्वर जयंती के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने संदेश में कहा है कि हाटकेश्वर जयंती आस्था, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक पर्व है, जो हमें धर्म, संस्कृति और लोक परंपराओं से जोड़ता है। यह दिवस समाज में सद्भाव, समरसता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

उन्होंने भगवान हाटकेश्वर से प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हुए कहा कि यह पर्व सभी के जीवन में शांति और प्रगति  लेकर आए।

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कोरबा

राज्यपाल रमेन डेका 1 अप्रैल को रहेंगे कोरबा जिले प्रवास पर

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सामूहिक विवाह हनुमंत कथा में होंगे शामिल

कोरबा। राज्यपाल रमेन डेका कल 1 अप्रैल को कोरबा जिले के दौरे पर रहेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार श्री डेका रायपुर लोकभवन से सवेरे 7.30 बजे सड़क मार्ग द्वारा मुंगेली जिले के चंदखुरी विश्राम गृह के लिए प्रस्थान करेंगे। ततपश्चात राज्यपाल सुबह 9 बजे कोरबा जिले के कटघोरा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम ढपढप बांकीमोंगरा के लिए रवाना होंगे। यहां वे प्रातः 11 बजे आयोजित “दिव्य श्री हनुमंत कथा एवं 108 दिव्यांग एवं निर्धन कन्याओं के सामूहिक विवाह” कार्यक्रम में शामिल होंगे। कार्यक्रम के पश्चात राज्यपाल श्री डेका दोपहर 12:30 बजे रतनपुर (बिलासपुर) स्थित विश्राम गृह के लिए प्रस्थान करेंगे।

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छत्तीसगढ़

रायपुर : नाचा के जनक दाऊ दुलार सिंह मंदराजी की जयंती पर मुख्यमंत्री साय ने किया नमन

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककला परंपरा के संवाहक और ‘नाचा’ के जनक माने जाने वाले स्वर्गीय दाऊ दुलार सिंह मंदराजी की जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि दाऊ मंदराजी ने ‘नाचा’ जैसी लोकविधा को न केवल पुनर्जीवित किया, बल्कि उसे जन-जन तक पहुँचाकर सामाजिक चेतना का सशक्त माध्यम बनाया। उन्होंने गांवों के लोक कलाकारों को संगठित कर ‘नाचा’ को नई पहचान और गरिमा प्रदान की। उनके प्रयासों से यह लोककला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रही, बल्कि समाज में जागरूकता और सकारात्मक बदलाव का प्रभावी मंच बनी।

उन्होंने कहा कि दाऊ मंदराजी ने अपने समर्पण और साधना से छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को जीवंत बनाए रखा और उसके संरक्षण के लिए जीवनपर्यंत कार्य किया। उनका योगदान प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर के रूप में सदैव स्मरणीय रहेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा लोक कला और शिल्प के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कलाकारों को ‘दाऊ दुलार सिंह मंदराजी सम्मान’ प्रदान किया जाता है, जो उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

उन्होंने कहा कि दाऊ मंदराजी का व्यक्तित्व और कृतित्व आज भी नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने और लोकसंस्कृति को आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता है।

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