कोरबा
उपभोक्ता जागरूकता ही शोषण से बचाव का प्रभावी माध्यम
कटघोरा विकासखंड के ग्राम पंचायत सलोरा में उपभोक्ता आयोग ने लगाया जागरूकता शिविर
ग्रामीणो को उपभोक्ता कानूनो की दी गई जानकारी
कोरबा। छग राज्य उपभोक्ता आयोग के निर्देशानुसार प्रत्येक जिले के ग्रामीण क्षेत्रो में उपभोक्ता जागरूकता शिविर का आयोजन किया जा रहा है। कोरबा जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा भी लगातार उर्जाधानी के विभिन्न ग्राम पंचायत मे ग्रामीणो को उपभोक्ता कानून की जानकारी देते हुए उन्हे उनके अधिकारो से अवगत कराया जा रहा है। इसी क्रम में सात फरवरी को कटघोरा विकासखंड के ग्राम पंचायत सलोरा में कोरबा जिला उपभोक्ता आयोग की अध्यक्षा श्रीमती रंजना दत्ता, सदस्यगण- सुश्री ममता दास एवं पंकज कुमार देवड़ा ने ग्रामवासियों को उनके अधिकारों व हितों की विस्तृत जानकारी दी।

ग्राम पंचायत सलोरा के सभागृह में आयोजित कार्यक्रम का प्रारंभ दीप प्रज्वलन एवं माँ सरस्वती के तैल्य चित्र पर माल्यार्पण कर किया गया। इसके पश्चात् उपस्थित अतिथियो का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया। इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए जिला उपभोक्ता आयोग कोरबा की अध्यक्ष श्रीमती रंजना दत्ता, सदस्यगण- सुश्री ममता दास एवं पंकज कुमार देवड़ा ने संयुक्त रूप से बताया कि शिविर का उद्देश्य ग्रामीण उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों, कर्तव्यों तथा उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों से अवगत कराना है। उपभोक्ता जागरूकता ही शोषण से बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम है। उनके द्वारा उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की जानकारी देते हुए बताया कि उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण वस्तु एवं सेवाएं प्राप्त करना उनका कानूनी अधिकार है। उपभोक्ताओं को किसी वस्तु की कीमत, गुणवत्ता की जांच, मात्रा की जांच, सेवा व संविदा शर्तें, बीमा, मेडिकल क्लेम फाइनेंस कंपनियां, बैंक, यातायात वाहन, आनलाइन खरीददारी सोच समझकर करनी चाहिए। किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी, मिलावट, अधिक मूल्य वसूली या सेवा में कमी की स्थिति में उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। ग्रामीणों को ई-जागृति पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया तथा ई-हियरिंग प्रणाली की विस्तृत जानकारी दी गई। ई जागृति एवं ई हियरिंग से अब उपभोक्ता घर बैठे ही डिजिटल माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं तथा सुनवाई में भी ऑनलाइन शामिल हो सकते हैं, जिससे समय और संसाधनों की बचत होती है।
शिविर में ग्रामीणों को दैनिक जीवन में सतर्कता बरतने की अपील करते हुए यह भी बताया गया कि किसी भी वस्तु को क्रय करते समय उसकी अवसान तिथि/एक्सपायरी डेट, एमआरपी, गुणवत्ता चिन्ह (आईएसआई, एगमार्क आदि) का अवलोकन अवश्य करें। क्रय की गई प्रत्येक वस्तु का पक्का बिल लेना अनिवार्य बताया गया, ताकि आवश्यकता पड़ने पर उपभोक्ता अपने अधिकारों का संरक्षण कर सके। जिला आयोग में शिकायत दायर करने के लिए वाद मूल्य के आधार पर पंजीयन शुल्क 5 लाख तक शून्य, 5 लाख से अधिक और 10 लाख से कम पर 200 रू फीस, 10 लाख से अधिक 20 लाख से कम की फीस 400 रू, 20 लाख से अधिक और 50 लाख से कम की फीस 1000 रू होगी। उपभोक्ताओं को अपने अधिकारों एवं हितों के लिए सतर्क रहना होगा एवं स्वयं जागरूक होना होगा, तभी जागो ग्राहक जागो की सार्थकता सिद्ध होगी। इस दौरान उपस्थित शिक्षिका, महिलाएं एवं अन्य ग्रामीणों के प्रश्रों के उत्तर देकर उनकी जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। शिविर मे अधिवक्ता संघ कटघोरा के पूर्व अध्यक्ष सुनील वर्मा ने उपभोक्ता आयेग द्वारा लगाये जा रहे जागरूकता शिविर की सराहना करते हुए उपस्थितजनो से उपभोक्ता संरक्षरण कानून का लाभ लेने की अपील की। कार्यक्रम का संचालन महिला अधिवक्ता संतोषी निषाद ने किया। उपभोक्ता जागरूकता शिविर के दौरान आयोग के कर्मचारीगण संजय शर्मा, नूतन राजपूत, राजेश्वर इंग्ले, दुर्गा चौबे, ग्राम पंचायत सलोरा के सरपंच उमेश तंवर लाल, अधिवक्तागण पवन कुमार नेटी, विभा गोस्वामी, हेमचंद रात्रे, रामकुमार निषाद,छतराम केंवट, ऋषभ कुमार मंहत, उपसरपंच धीरज कुमार, पंचगण बलराम, प्रदीप कुमार, शिक्षिका माया कल्याणी, फत्तेराम केंवट, शकुनतला कैवर्त, बचन बाई, सीता आदिले, दर्रीभांठा की सरपंच प्रेमलता कंवर, कमल देवांगन, शांति बाई, देहुती केंवटा, गायत्री बाई, गिरजा कंवर, लता कंवर, सरस्वती केंवट, शिवकुमारी, रजमत बाई गांव के वरिष्ठ नागरिकगण मितानिन सहित सैकड़ों की संख्या में महिलाएं, बच्चे व ग्रामीण जन उपस्थित रहे।

कोरबा
पेड़ की डाल नहीं, पूरा विशाल धौरा वृक्ष गिरा था, वन विभाग के दावे पर उठे सवाल
कोरबा/पाली। पाली थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम चोरका डांड में शनिवार शाम आंधी-तूफान और बारिश के दौरान हुई दर्दनाक घटना में तीन युवकों की मौत के मामले में अब कई सवाल खड़े होने लगे हैं। प्रारंभिक जानकारी में बताया गया था कि तीनों युवक बारिश से बचने के लिए पेड़ के नीचे रुके हुए थे, तभी पेड़ की भारी डाल टूटकर उन पर गिर गई। लेकिन मीडिया टीम के मौके पर पहुंचने पर सामने आए तथ्यों ने मामले को नया मोड़ दे दिया है।


घटनास्थल पर देखा गया कि कोई डाल नहीं टूटी थी, बल्कि एक विशाल धौरा का पेड़ जड़ सहित गिरा हुआ था। वहीं ग्रामीणों, मृतक दिनेशु तिर्की के परिजनों तथा निर्माण कार्य में लगी महिलाओं ने बताया कि घटनास्थल पर वन समिति के माध्यम से सूअर पालन के लिए कोठा निर्माण का कार्य चल रहा था। उनके अनुसार दिनेशु तिर्की और कमलेश बड़ा निर्माण कार्य में लगे हुए थे।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक अचानक तेज आंधी-तूफान शुरू हुआ। इसी दौरान धौरा वृक्ष से आवाज आई और कुछ ही क्षणों में वह घूमकर निर्माण स्थल पर गिर पड़ा। पेड़ के नीचे काम कर रहे युवक उसकी चपेट में आ गए। घटना में एक महिला को भी सिर और हाथ में हल्की चोटें आईं, जिसने शोर मचाकर ग्रामीणों को बुलाया। इसके बाद लोगों ने किसी तरह दबे हुए लोगों को बाहर निकाला और घायल युवकों को वाहन की व्यवस्था कर पाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया। जहां जांच उपरांत दो युवकों को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि एक गंभीर रूप से घायल युवक को रेफर किया गया, जिसकी रास्ते में मौत हो गई। ग्रामीणों के अनुसार जंगल क्षेत्र होने के कारण तत्काल वाहन उपलब्ध नहीं हो पाया और अस्पताल पहुंचने में करीब ढाई घंटे का विलंब हुआ।
इधर जब इस संबंध में वन विभाग से जानकारी ली गई तो विभागीय अधिकारियों ने निर्माण कार्य में युवकों को लगाए जाने से इनकार किया। यहीं से कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि निर्माण कार्य में युवक शामिल नहीं थे तो वे घटनास्थल पर क्या कर रहे थे? ग्रामीण, परिजन और वहां मौजूद महिलाएं निर्माण कार्य में लगे होने की बात क्यों कह रही हैं? यदि वन समिति के अंतर्गत निर्माण कार्य चल रहा था तो वहां कार्यरत लोगों की निगरानी कौन कर रहा था? निर्माण स्थल पर सुरक्षा के क्या इंतजाम थे? क्या कार्य शुरू करने से पहले संभावित जोखिमों का आकलन किया गया था? यदि नाबालिग मौके पर मौजूद थे तो उनकी उपस्थिति किन परिस्थितियों में थी? क्या निर्माण कार्य के लिए मजदूरों का कोई पंजीयन या उपस्थिति रजिस्टर रखा गया था? दुर्घटना के समय वहां कितने लोग काम कर रहे थे और उन्हें किसके निर्देश पर लगाया गया था? आखिर घटना के संबंध में सामने आ रहे अलग-अलग दावों में सच्चाई क्या है?
मृतकों में 14 वर्षीय शिवराम टेकाम और 17 वर्षीय दिनेश तिर्की भी शामिल हैं। ऐसे में नाबालिगों से कार्य कराए जाने की आशंका को लेकर मामला और गंभीर हो जाता है। अब आवश्यकता इस बात की है कि पूरे घटनाक्रम की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि दुर्घटना के समय वहां वास्तव में क्या कार्य चल रहा था और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।फिलहाल यह मामला केवल प्राकृतिक दुर्घटना तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि कई ऐसे सवाल छोड़ गया है जिनके जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे।
चोरकाडांड निवासी हीरा सिंह ने बताया कि वन विभाग द्वारा पशुपालन के लिए भवन निर्माण कराया जा रहा था, जिसमें युवक कार्य कर रहे थे। उनके अनुसार मौसम सामान्य था और केवल हल्की हवा चल रही थी। इसी दौरान अचानक एक विशाल धौरा पेड़ गिर गया, जिसकी चपेट में आने से तीनों युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में उनकी मौत हो गई।

मृतक दिनेशु तिर्की की मां हीरामणि ने बताया कि उनका बेटा पिछले तीन दिनों से वहां काम पर जा रहा था। घटना की जानकारी गांव के एक युवक ने आकर दी, जिसके बाद वह तत्काल घटनास्थल पहुंचीं। ग्रामीणों की मदद से वाहन की व्यवस्था कर घायल युवकों को पाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत की खबर मिली।

काम करने वाली राधाबाई बाइसेम्हर ने बताया कि वह एक अन्य महिला के साथ दो दिनों से निर्माण कार्य में लगी थीं। हादसे के समय वह बालू उठा रही थीं, जबकि दूसरी महिला बालू छान रही थी। तभी कटने जैसी तेज आवाज सुनाई दी। जान बचाने के लिए भागते समय विशाल धौरा वृक्ष गिर पड़ा, जिसकी चपेट में आकर तीन युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। राधाबाई ने बताया कि तीनों युवक पिछले दो दिनों से पानी ढुलाई और मसाला बनाने का काम कर रहे थे।





कोरबा
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत कोरबा जिले में एक लाख से अधिक आवास पूर्ण
मनरेगा के माध्यम से हितग्राहियों को मिल रहा 90 दिवस का रोजगार
कोरबा। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत कोरबा जिले ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए एक लाख से अधिक पक्के आवासों का निर्माण पूर्ण कर लिया है। वर्ष 2016 से अब तक जिले में कुल 1,00,013 आवासों का निर्माण सफलतापूर्वक पूर्ण किया जा चुका है, जिससे हजारों ग्रामीण परिवारों का अपने पक्के घर का सपना साकार हुआ है।

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के आवासहीन एवं वंचित परिवारों को सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराया जा रहा है। योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को आवास निर्माण के लिए चरणबद्ध तरीके से 1.20 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाती है। इसके साथ ही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत आवास निर्माण कार्य हेतु 90 दिवस का रोजगार उपलब्ध कराया जाता है, जिससे हितग्राहियों को मजदूरी भुगतान का लाभ भी प्राप्त होता है।

योजना के अंतर्गत एसईसीसी-2011 सर्वे तथा वर्ष 2018 में आयोजित आवास प्लस सर्वे में पात्र पाए गए परिवारों को क्रमबद्ध रूप से आवास स्वीकृत किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन द्वारा सतत निगरानी एवं प्रभावी क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप आवास निर्माण कार्यों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है।
जिले में वर्ष 2016 से 2023 के दौरान 61,223 आवास पूर्ण किए गए, जबकि वर्ष 2024 से 2026 के बीच 37,804 आवासों का निर्माण पूरा हुआ। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत 478 आवास तथा प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के अंतर्गत 508 आवास पूर्ण किए गए हैं।

इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी दिनेश कुमार नाग ने कहा कि शासन के निर्देशानुसार पात्र ग्रामीण हितग्राहियों को गुणवत्तापूर्ण पक्के आवास उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिले में एक लाख से अधिक आवासों का पूर्ण होना ग्रामीण विकास एवं जनकल्याण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है, जिससे हजारों परिवारों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया है।
कोरबा
05 जून पर्यावरण दिवस: छत्तीसगढ़ पब्लिक हायर सेकेण्डरी स्कूल छत्तीसगढ़ पर्यावरण रत्न सम्मान से होगी सम्मानित
बिलासपुर/पाली। पर्यावरण एवं पर्यटन विकास समिति बिलासपुर, छत्तीसगढ़ी राजभाषा परिषद, वन विभाग एवं छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मण्डल बिलासपुर के संयुक्त तत्वावधान में 05 जून 2026 को विश्व पर्यावरण दिवस पर सरस्वती शिशु मंदिर सभागार तिलक भवन बिलासपुर में पर्यावरण सुरक्षा एवं संवर्धन विषय पर प्रतियोगिताएं, कार्यशाला, काव्य गोष्ठी, नृत्य, गीत-संगीत, फैंसी ड्रेस, बच्चों के लिए चित्रकला प्रतियोगिता सहित पर्यावरण क्षेत्र में अह्म भूमिका निभाने वाली प्रतिभाओं एवं संस्थाओं को सम्मानित किया जाएगा। बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला के मुख्य आतिथ्य में यह समारोह सम्पन्न होगा, जिसकी अध्यक्षता विनय पाठक करेंगे।इनके अलावा कई शिक्षाविद, पर्यावरणविद कार्यक्रम का गौरव बढ़ाएंगे। आईएफएस एस एस डी बड़गैया, समाजसेवी शैलेन्द्र सिंह कछवाहा, वरिष्ठ साहित्यकार विष्णु कुमार तिवारी, आईएफएस नीरज जी, डॉ. अभिलाषा बेहार, आईएसएस रमेशचंद्र श्रीवास्तव, समाजसेवी राजीव नयन शर्मा, क्षेत्रीय पर्यावरण संरक्षण अधिकारी श्रीमती रश्मि श्रीवास्तव, पर्यावरणविद हेमंत कुमार गौर सहित अन्य विभूतियां उपस्थित रहेंगी।

इस सम्मान समारोह में पाली स्थित छत्तीसगढ़ पब्लिक हायर सेकेण्डरी स्कूल को भी छत्तीसगढ़ पर्यावरण रत्न सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। विद्यालय के डायरेक्टर डॉ. गजेन्द्र तिवारी ने बताया कि विद्यालय परिसर को स्वच्छ, सुंदर एवं हरितिमा बनाने के साथ-साथ जल संरक्षण और वर्षा जलसंचयन, प्लास्टिक मुक्त अभियान एवं बच्चों द्वारा पर्यावरण जागरूकता रैलियों के माध्यम से समाज को पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन का संदेश देना एवं पौध रोपण जैसे विविध कार्यक्रम के लिए छत्तीसगढ़ पर्यावरण रत्न सम्मान से सम्मानित किया जाएगा।
डॉ. गजेन्द्र तिवारी ने बताया कि यह विद्यालय के लिए गौरव की बात है और एक बड़ी उपलब्धि भी।




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