मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ आज महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक दौर से गुजर रहा है। मातृशक्ति के सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य सरकार ने इस वर्ष को ‘महतारी गौरव वर्ष’ के रूप में मनाने की घोषणा की है। यह पहल केवल एक औपचारिक घोषणा नहीं है, बल्कि महिलाओं को राज्य की विकास यात्रा के केंद्र में स्थापित करने का सशक्त संकल्प है।
विश्वास से निर्माण और अब गौरव की ओर मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने कार्यकाल के पहले वर्ष को ‘विश्वास वर्ष’ के रूप में शासन-प्रशासन और जनता के बीच भरोसे की पुनर्स्थापना को समर्पित किया। इसके बाद दूसरे वर्ष को भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में ‘अटल निर्माण वर्ष’ के रूप में मनाते हुए अधोसंरचना विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं को नई गति दी गई। अब तीसरा वर्ष ‘महतारी गौरव वर्ष’ के रूप में माताओं और बहनों को समर्पित किया गया है, जिसमें राज्य की अधिकांश योजनाओं का केंद्रबिंदु महिलाएं होंगी। यह क्रम सरकार की संवेदनशील और समावेशी विकास की सोच को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
महतारी वंदन योजना : आत्मसम्मान और आर्थिक सुरक्षा का आधार छत्तीसगढ़ सरकार की महतारी वंदन योजना आज महिला सशक्तिकरण का मजबूत स्तंभ बन चुकी है। इस योजना के तहत प्रदेश की लगभग 70 लाख विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपये की सहायता सीधे उनके बैंक खातों में प्रदान की जा रही है। अब तक 15 हजार 595 करोड़ रुपये से अधिक की राशि डीबीटी के माध्यम से महिलाओं को दी जा चुकी है। हाल ही में 24वीं किस्त के रूप में 68 लाख से अधिक महिलाओं को 641 करोड़ रुपये की राशि प्रदान की गई।यह नियमित आर्थिक सहयोग महिलाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ ही उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बना रहा है। कई महिलाएं इस राशि को केवल घरेलू खर्च तक सीमित न रखकर स्वरोजगार और छोटे व्यवसायों में निवेश कर रही हैं।
संघर्ष से स्वावलंबन तक : रोहनी पटेल की प्रेरक कहानी बालोद जिले के ग्राम खैरडीह की श्रीमती रोहनी पटेल इसका एक प्रेरणादायक उदाहरण हैं। पति की असमय मृत्यु के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। घर में वृद्ध सास की देखभाल और कॉलेज में पढ़ रहे दो बच्चों की पढ़ाई की चिंता उनके लिए बड़ी चुनौती थी।ऐसे कठिन समय में महतारी वंदन योजना उनके लिए उम्मीद की किरण बनकर आई। योजना से मिलने वाली राशि को उन्होंने सावधानीपूर्वक बचत कर अपने खेत में सब्जी उत्पादन का कार्य शुरू किया। बीज, खाद और कृषि सामग्री की व्यवस्था कर उन्होंने पूरी मेहनत से खेती की। आज श्रीमती रोहनी पटेल अपने खेत में उगाई गई ताजी सब्जियों को स्थानीय बाजारों में बेचकर नियमित आय अर्जित कर रही हैं। इस आय से वे अपने परिवार की आवश्यकताओं को पूरा कर रही हैं और बच्चों की पढ़ाई भी निर्बाध रूप से जारी है। उनका यह प्रयास गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन चुका है।
बिहान से बदली जिंदगी : ‘लखपति दीदी’ बनीं श्रीमती माहेश्वरी यादव बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के ग्राम कोरदा की श्रीमती माहेश्वरी यादव भी महिला सशक्तिकरण की एक प्रेरक मिसाल हैं। पहले उनका जीवन सामान्य गृहिणी की तरह घर-परिवार की जिम्मेदारियों तक सीमित था। लेकिन छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ने के बाद उनके जीवन में बड़ा परिवर्तन आया। समूह के सहयोग और परिवार के समर्थन से उन्होंने गांव में एक छोटी किराना दुकान शुरू की। अपनी मेहनत और बेहतर प्रबंधन के बल पर यह दुकान धीरे-धीरे गांव में भरोसेमंद केंद्र बन गई। आज इस दुकान से उन्हें प्रतिवर्ष लगभग 1 से 1.5 लाख रुपये की आय हो रही है और वे ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। इससे उनके बच्चों की शिक्षा और परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
आधुनिक तकनीक से नई पहचान : ‘ड्रोन दीदी’ सुश्री सीमा वर्मा बिलासपुर जिले के मस्तूरी क्षेत्र की सुश्री सीमा वर्मा ने भी यह साबित किया है कि अवसर और प्रशिक्षण मिलने पर महिलाएं आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में भी नई पहचान बना सकती हैं। स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने पहले मशरूम उत्पादन का कार्य शुरू किया और बाद में ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण प्राप्त किया। शासन की सहायता से उन्हें ड्रोन सेट, जनरेटर और ई-वाहन उपलब्ध कराया गया। आज सीमा वर्मा किसानों के खेतों में ड्रोन के माध्यम से कीटनाशक छिड़काव कर रही हैं और इस कार्य से उन्हें सम्मानजनक आय प्राप्त हो रही है। गांव में लोग उन्हें स्नेहपूर्वक ‘ड्रोन दीदी’ के नाम से जानते हैं।
बजट में महिला कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता राज्य सरकार ने महिला एवं बाल विकास विभाग के लिए 8 हजार 245 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है। आंगनबाड़ी एवं पोषण योजनाओं के लिए 2 हजार 320 करोड़ रुपये, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के लिए 120 करोड़ रुपये, मिशन वात्सल्य के लिए 80 करोड़ रुपये तथा रानी दुर्गावती योजना के लिए 15 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त 750 नए आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण के लिए 42 करोड़ रुपये और 250 महतारी सदनों के निर्माण के लिए 75 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। यह बजटीय प्रावधान महिलाओं और बच्चों के समग्र विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
सुरक्षा, स्वास्थ्य और गरिमा की सुदृढ़ व्यवस्था महिला सुरक्षा के क्षेत्र में भी राज्य ने प्रभावी तंत्र विकसित किया है। वन स्टॉप सेंटर, 181 महिला हेल्पलाइन और डायल 112 के माध्यम से संकट की स्थिति में त्वरित सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। सुखद सहारा योजना के अंतर्गत 2 लाख 18 हजार से अधिक विधवा एवं परित्यक्ता महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।
स्वावलंबन से नेतृत्व तक प्रदेश में 42 हजार से अधिक महिला स्व-सहायता समूहों को रियायती ऋण प्रदान कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाया गया है। रेडी-टू-ईट कार्य महिला समूहों को सौंपे जाने से उन्हें स्थायी आय का स्रोत मिला है। इसके साथ ही डिजिटल सखी, दीदी ई-रिक्शा, सिलाई मशीन सहायता, मिनीमाता महतारी जतन योजना और लखपति दीदी जैसी पहलें महिलाओं को नए आजीविका अवसर प्रदान कर रही हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के अनुसार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें सुरक्षित तथा सम्मानजनक वातावरण प्रदान करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
विकसित छत्तीसगढ़ की सशक्त आधारशिला मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप ‘छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047’ के माध्यम से राज्य को समावेशी विकास की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है, जिसमें महिलाओं की सक्रिय भागीदारी को अनिवार्य तत्व माना गया है। ‘महतारी गौरव वर्ष’ केवल एक प्रशासनिक पहल नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का व्यापक अभियान है। यह वर्ष छत्तीसगढ़ में मातृशक्ति के सम्मान, आत्मविश्वास और नेतृत्व को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का संकल्प लेकर आया है। आज प्रदेश की महिलाएं आत्मनिर्भरता, नवाचार और नेतृत्व के साथ विकास की नई कहानी लिख रही हैं। यही सशक्त मातृशक्ति विकसित और समृद्ध छत्तीसगढ़ की सबसे मजबूत आधारशिला बनेगी।
रायपुर, एजेंसी। रायपुर के हीरापुर में बंद पड़ी इस्पात फैक्ट्री में बदमाशों ने लूट की वारदात को अंजाम दिया। रात में 7-8 बदमाश फैक्ट्री में पहुंचे और सबसे पहले चौकीदार को रस्सी से बांध दिया। इसके बाद ऑफिस और फैक्ट्री में रखा एल्युमिनियम, कॉपर और दूसरे कीमती सामान लूटकर फरार हो गए। मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से करीब 17 लाख रुपए का सामान बरामद किया है। वारदात में इस्तेमाल टाटा एस वाहन, स्कूटी और दूसरे औजार भी जब्त किए गए हैं। घटना में शामिल बाकी आरोपी अभी फरार हैं, जिनकी तलाश की जा रही है।
एक हफ्ते तक फैक्ट्री की रेकी, फिर रात में वारदात
घटना 22 अक्टूबर की रात करीब 1:30 बजे की है। हीरापुर के तेंदुआ रोड पर स्थित अमरनाथ इस्पात फैक्ट्री साल 2020 से बंद है। यहां दिलीप कुमार वर्मा चौकीदारी करते हैं।
घटना के समय वे ऑफिस के पोर्च में बैठे थे। तभी उन्हें बाउंड्रीवॉल के अंधेरे हिस्से से एक व्यक्ति आता दिखाई दिया। चौकीदार ने उसे आवाज देकर रोकने की कोशिश की, तो वह पत्थर फेंकने लगा। इसी दौरान चेहरे पर कपड़ा बांधे 7-8 और लोग वहां पहुंच गए।
चौकीदार के हाथ बांधकर फैक्ट्री से 17 लाख का सामान लूटा
बदमाशों ने चौकीदार के दोनों हाथ पीछे की ओर रस्सी से बांध दिए। इसके बाद ऑफिस में घुसकर एल्युमिनियम वायर के बंडल, कॉपर का सामान, एल्युमिनियम प्लेट, हैलोजन लाइट, नकदी, पैनल कार्ड और कॉपर कॉइल लूट लिया।
वे सारा सामान टाटा एस वाहन में लोडकर ले गए। भागने के लिए बदमाशों ने फैक्ट्री की दीवार तोड़ी और खेत के रास्ते रिंग रोड की ओर फरार हो गए।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने वारदात से पहले करीब एक सप्ताह तक फैक्ट्री की रेकी की थी। वे वहां की गतिविधियों और सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रख रहे थे। योजना के तहत टाटा एस और स्कूटी से फैक्ट्री पहुंचे थे।
CCTV फुटेज और मुखबिर की मदद से पकड़ में आए आरोपी
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने फैक्ट्री और आसपास के रास्तों पर लगे CCTV कैमरों के फुटेज खंगाले। संदिग्धों की आवाजाही का पता लगाने के लिए घटना से पहले और बाद के फुटेज का मिलान किया गया। पुलिस ने तकनीकी जांच और मुखबिरों की मदद से सरोना के संदीप नेताम को पकड़ा। पूछताछ और मिले सबूतों के आधार पर अजीत भारती और उमेन्द्र ठाकुर उर्फ उमेन को भी गिरफ्तार किया गया।
पुलिस के मुताबिक, तीनों ने साथियों के साथ मिलकर वारदात को अंजाम देना स्वीकार किया है। उनके कब्जे से एलुमिनियम वायर, एल्युमिनियम और कॉपर के सामान, प्लेट, हैलोजन लाइट, पैनल कार्ड और कॉपर कॉइल सहित करीब 17 लाख रुपए का सामान जब्त किया गया। वारदात में इस्तेमाल टाटा एस, स्कूटी, कटर मशीन और ड्रिल मशीन भी जब्त की गई है।
पहले भी आपराधिक मामलों में जेल जा चुके हैं आरोपी
पुलिस के अनुसार, संदीप नेताम पहले गुढ़ियारी थाने के चोरी और मारपीट के मामले में, उमेन्द्र ठाकुर उर्फ उमेन टिकरापारा के नकबजनी के मामले में और अजीत भारती डीडी नगर के प्रतिबंधात्मक मामले में जेल जा चुका है।
गिरफ्तार आरोपियों में संदीप नेताम (35), अजीत भारती (30) और उमेन्द्र ठाकुर उर्फ उमेन (27) शामिल हैं। पुलिस अब वारदात में शामिल बाकी आरोपियों की तलाश कर रही है।
पुलिस की संयुक्त कार्रवाई
यह कार्रवाई पुलिस उपायुक्त (क्राइम एवं साइबर) स्मृति रजनाला और पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) रॉबिन्सन गुरिया की निगरानी में एंटी क्राइम एवं साइबर यूनिट और कबीर नगर पुलिस ने की।
पुलिस के मुताबिक, रायपुर कमिश्नरेट में अब तक चोरी, नकबजनी, मोबाइल छिनतई, लूट और डकैती के 150 मामलों में 237 आरोपियों को गिरफ्तार कर करीब 4.66 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की गई है।
सुकमा, एजेंसी। सुकमा जिले के भेज्जी थाना क्षेत्र में सीआरपीएफ की 219वीं बटालियन की सी कंपनी ने अभियान चलाकर 79 जिलेटिन स्टिक और नक्सली उपयोग की अन्य सामग्री बरामद की है। जवानों ने ग्राम मोसलमुडगु के बाहरी जंगल में छिपाकर रखे गए सामान को जब्त किया। सीआरपीएफ के अनुसार, इस कार्रवाई से विस्फोटक सामग्री के संभावित इस्तेमाल का खतरा टालने में मदद मिली।
सीआरपीएफ की 219वीं बटालियन को 24 अक्टूबर को सूचना मिली थी कि मोसलमुडगु के बाहरी इलाके में नक्सलियों ने विस्फोटक और अन्य सामान छिपाकर रखा है। इसके आधार पर 25 अक्टूबर को शाम 4 बजे एरिया डोमिनेशन अभियान शुरू किया गया।
डॉग स्क्वॉड की मदद से की तलाशी
अभियान के दौरान शाम करीब 5:35 बजे जवान संदिग्ध स्थान पर पहुंचे। यहां DSMD और K9 डॉग स्क्वॉड की मदद से सघन तलाशी ली गई। इस दौरान एक छोटा नीला कंटेनर मिला, जिसमें विस्फोटक सामग्री और नक्सली गतिविधियों से जुड़ा सामान रखा था।
बम निरोधक दस्ते ने सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए सामग्री को सुरक्षित तरीके से बरामद किया। इसके बाद आसपास के इलाके में अन्य डंप की तलाश भी की गई।
डंप से ये सामग्री मिली
79 जिलेटिन स्टिक
पीले रंग के इलेक्ट्रिक वायर के 4 बंडल
हरे रंग के इलेक्ट्रिक वायर के 3 बंडल
7 हरे सिंथेटिक कॉम्बैट बेल्ट
नक्सली वर्दी के काले कपड़े के 3 बंडल
1 छोटा नीला कंटेनर
7 पेन
1 छोटा कैलकुलेटर
1 पॉकेट डायरी
शाम 7:20 बजे कैंप लौटे जवान
सर्च ऑपरेशन पूरा करने के बाद जवान शाम 7:20 बजे बरामद सामग्री के साथ सुरक्षित भेज्जी कैंप लौट आए। सीआरपीएफ के अनुसार, इलाके में नक्सली गतिविधियों पर नियंत्रण और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अभियान लगातार चलाए जा रहे हैं।
धमतरी, एजेंसी। धमतरी जिले के करका वन क्षेत्र में पेड़ों की छाल काटकर उन्हें नुकसान पहुंचाया गया है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व ने ऐसे 3500 क्षतिग्रस्त पेड़ों को बचाने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है।
पेड़ों की स्थिति की जांच कर वैज्ञानिक तरीके से उनका उपचार किया जा रहा है। इस काम में बेंगलुरु के वृक्ष संरक्षण विशेषज्ञ विजय निशांत भी मदद कर रहे हैं। उनकी संस्था प्रोजेक्ट वृक्ष फाउंडेशन इस अभियान में तकनीकी सहयोग दे रही है।
पेड़ों के तने के चारों ओर छाल काटने की प्रक्रिया को ‘गर्डलिंग’ कहते हैं। इससे पेड़ों में भोजन और पोषक तत्वों के परिवहन पर असर पड़ता है। नुकसान अधिक होने पर पेड़ सूखकर मर सकते हैं। करका वन क्षेत्र में इसी तरह क्षतिग्रस्त हुए पेड़ों को बचाने के लिए वन विभाग और विशेषज्ञों की टीम काम कर रही है।
पेड़ों की स्थिति के आधार पर तय होगा उपचार
वन विभाग और विशेषज्ञों की टीम ने चिह्नित 3500 पेड़ों को उनकी स्थिति और जीवित रहने की संभावना के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में बांटा है। जिन पेड़ों को तत्काल उपचार की जरूरत है, उन्हें प्राथमिकता दी जा रही है। गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त पेड़ों के लिए विशेष तकनीकों और नियमित निगरानी की व्यवस्था की जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ पेड़ों के बचने की संभावना बेहतर है, जबकि कुछ को लंबे समय तक उपचार और देखभाल की जरूरत होगी। पूरी तरह मृत पेड़ों के संबंध में भी विशेषज्ञों की जांच के बाद ही जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
उपचार की योजना बनाते समय पेड़ की प्रजाति, उम्र, तने की मोटाई, क्षति की गंभीरता और छाल काटे जाने के बाद बीते समय को ध्यान में रखा जा रहा है। प्रत्येक पेड़ को एक क्रमांक दिया गया है। उसका रिकॉर्ड तैयार किया गया है, ताकि उपचार के बाद उसकी स्थिति में होने वाले बदलावों पर नजर रखी जा सके।
ब्रिज ग्राफ्टिंग तकनीक से बचाने की कोशिश
क्षतिग्रस्त पेड़ों के उपचार में ‘ब्रिज ग्राफ्टिंग’ जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें तने के प्रभावित हिस्से के ऊपर जीवित ऊतकों के बीच दोबारा संपर्क स्थापित करने की कोशिश की जाती है। इससे पेड़ में पोषक तत्वों का परिवहन बहाल करने में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा ट्री बैंडेजिंग, घावों की देखभाल और जड़ों को मजबूत करने के उपाय भी किए जा रहे हैं। उपचार का तरीका प्रत्येक पेड़ की स्थिति के अनुसार तय किया जा रहा है, ताकि जहां संभव हो, वहां पेड़ प्राकृतिक रूप से दोबारा स्वस्थ हो सकें।
100 से ज्यादा वनकर्मी अभियान में जुटे
इस अभियान में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के 100 से अधिक मैदानी वनकर्मी जुटे हैं। इनके साथ ट्री डॉक्टर विजय निशांत, उद्यानिकी विशेषज्ञ और ग्राफ्टिंग के जानकार भी काम कर रहे हैं।
अभियान का उद्देश्य क्षतिग्रस्त पेड़ों को बचाने के साथ वनकर्मियों को वैज्ञानिक उपचार का व्यावहारिक प्रशिक्षण देना भी है। इससे भविष्य में ऐसे मामलों में समय पर उपचार किया जा सकेगा। उपचार के बाद प्रत्येक पेड़ की नियमित निगरानी होगी और उसकी स्थिति में होने वाले बदलावों का रिकॉर्ड रखा जाएगा।
कुछ पेड़ों में नए ऊतक विकसित होने के संकेत
मैदानी निरीक्षण के दौरान कुछ ऐसे पेड़ भी मिले हैं, जिनके क्षतिग्रस्त तनों पर नए ऊतक विकसित होते दिखाई दिए हैं। यह संकेत है कि कुछ पेड़ों में घाव भरने की प्रक्रिया प्राकृतिक रूप से शुरू हो चुकी है।
विशेषज्ञ इन पेड़ों का अध्ययन करेंगे, ताकि यह समझा जा सके कि किन परिस्थितियों में पेड़ अपने आप स्वस्थ हो सकते हैं और किन मामलों में सर्जरी या अतिरिक्त उपचार की जरूरत पड़ती है। इस अध्ययन के आधार पर भविष्य में वृक्ष संरक्षण की रणनीति को और प्रभावी बनाने का प्रयास किया जाएगा।
एक दशक में 1.25 लाख से ज्यादा पेड़ नष्ट होने का दावा
ड्रोन और सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण से पता चला है कि पिछले एक दशक में करका वन क्षेत्र में 1.25 लाख से ज्यादा पेड़ नष्ट हुए हैं। अतिक्रमण बढ़ने से जंगल और जैव विविधता को नुकसान पहुंचने की चिंता बढ़ी है।
करका वन क्षेत्र पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यह पैरी नदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र का हिस्सा है। ऐसे में यहां पेड़ों को होने वाला नुकसान केवल वन्यजीवों के आवास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर मिट्टी के संरक्षण, जैव विविधता और जलग्रहण क्षेत्र पर भी पड़ सकता है।
क्षतिग्रस्त पेड़ों को बचाने के साथ अतिक्रमण पर नियंत्रण, शेष वन क्षेत्र का संरक्षण और लगातार निगरानी करना भी जरूरी है।
डिप्टी डायरेक्टर बोले- पेड़ों के उपचार के बाद होगी नियमित निगरानी
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर वरुण जैन ने बताया कि करका क्षेत्र में क्षतिग्रस्त पेड़ों को बचाने के लिए वैज्ञानिक तरीके से उपचार किया जा रहा है। विशेषज्ञों की मदद से पेड़ की स्थिति का आकलन कर उसके अनुसार उपचार की योजना बनाई गई है।
उन्होंने बताया कि अभियान में वनकर्मियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है, ताकि उपचार के साथ उनकी तकनीकी क्षमता भी बढ़ाई जा सके। उपचार के बाद पेड़ों की नियमित निगरानी की जाएगी और परिणामों का रिकॉर्ड रखा जाएगा।
इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि कौन-सी तकनीक किस तरह के पेड़ों के लिए अधिक प्रभावी है। वन विभाग का प्रयास है कि अधिक से अधिक क्षतिग्रस्त पेड़ों को बचाकर करका क्षेत्र की प्राकृतिक विरासत का संरक्षण किया जा सके।