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सभी देशों को रूसी तेल खरीदने की इजाजत:अमेरिका ने 30 दिन की छूट दी, ईरान ने क्रूड ऑयल 200 डॉलर पहुंचने की चेतावनी दी थी
नई दिल्ली,एजेंसी। अमेरिका-इजराइल की ईरान से चल रही जंग की वजह से दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 100 डॉलर के पार चली गई हैं। इसे काबू में करने के लिए ट्रम्प प्रशासन ने दूसरे देशों को भी रूस से तेल खरीदने की अस्थाई मंजूरी दे दी है। रूस के कई ऑयल टैंकर समुद्र में फंसे हैं।
इससे पहले अमेरिका ने भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए प्रतिबंधों में ढील देने की बात कही थी। हालांकि, इस पर भारतीय अधिकारी कह चुके हैं कि भारत तेल खरीदने के लिए किसी भी देश की इजाजत पर निर्भर नहीं है।
वहीं, ईरान चेतावनी दे चुका है कि कच्चे तेल की कीमतें 200 डॉलर के पार पहुंच सकती हैं।

सिर्फ समुद्र में फंसे जहाजों से तेल खरीदने की मंजूरी
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग (वित्त मंत्रालय) ने गुरुवार को एक लाइसेंस जारी किया। इसके तहत उन रूसी कच्चे तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की डिलीवरी और बिक्री की जा सकती है, जो 12 मार्च की रात 12:01 बजे से पहले जहाजों पर लोड हो चुके थे।
यह छूट सिर्फ 11 अप्रैल तक के लिए दी गई है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने बताया कि इसका मकसद दुनियाभर में तेल की सप्लाई बढ़ाना है, ताकि बढ़ती कीमतों पर लगाम लग सके।

कार्गो शिप्स रूस से कच्चा तेल टैंकरों में भरकर एशियाई देशों के आसपास वेटिंग मोड में खड़े हैं।
अमेरिका ने कहा- रूस को ज्यादा फायदा नहीं होगा
अमेरिका के ट्रेजरी मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि राष्ट्रपति ट्रम्प वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता लाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि यह एक शॉर्ट-टर्म फैसला है और इससे रूस को कोई बहुत बड़ा आर्थिक फायदा नहीं होगा।
बेसेंट के मुताबिक रूस की कमाई का बड़ा हिस्सा तेल निकालने के वक्त लगने वाले टैक्स से आता है, जबकि यह छूट सिर्फ उस तेल के लिए है, जो पहले से ही ट्रांजिट (रास्ते) में है।

क्यों बदला अमेरिका का मन? 2 मुख्य वजहें
1. होर्मुज रूट से सप्लाई ठप: ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जंग से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में सप्लाई ठप हो गई है। यहां से दुनिया का करीब 20% तेल गुजरता है। भारत जैसे देश अपनी जरूरत का करीब आधा तेल इसी रास्ते से मंगाते हैं।
2. 200 डॉलर पहुंच सकता है कच्चा तेल: पिछले कुछ दिनों में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई थीं। ईरान ने चेतावनी दी है कि कीमतें 200 डॉलर तक पहुंच सकती है। ऐसे में रूसी तेल बाजार में आने से सप्लाई बढ़ेगी, जिससे कीमतों में गिरावट आएगी।
2022 में अमेरिका ने लगाई थी रूसी तेल पर रोक
जब फरवरी 2022 में रूस ने यूक्रेन पर हमला किया, तो पश्चिमी देशों का मानना था कि युद्ध के लिए पैसा रूस को तेल और गैस बेचकर मिल रहा है। इसी ‘फंडिंग’ को रोकने के लिए अमेरिका और यूरोप ने रूस से तेल खरीदने पर पाबंदी लगानी शुरू की थी।
कच्चा तेल 101 डॉलर प्रति बैरल पार
मिडिल ईस्ट में एनर्जी सप्लाई और इंफ्रास्ट्रक्चर पर हाल ही में हुए हमलों के बाद फिर से कच्चे तेल की कीमतों में 9% से ज्यादा की तेजी आई है। इस उछाल के साथ ही तेल का दाम एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार हो गया है।
बाजारों को सामान्य रखने के लिए स्ट्रैटजिक रिजर्व यानी आपातकालीन भंडार से रिकॉर्ड मात्रा में तेल निकालने का फैसला किया गया है, लेकिन इस फैसले पर भी सप्लाई रुकने का डर भारी पड़ गया है।
167 किमी लंबा जलमार्ग है होर्मुज
ये करीब 167 किमी लंबा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। खतरे को देखते हुए कोई भी तेल टैंकर वहां से नहीं गुजर रहा। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी अपने निर्यात के लिए इसी पर निर्भर हैं। भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है। ईरान खुद इसी रूट से एक्सपोर्ट करता है।
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Exit Poll 2026: असम में NDA 100 सीटों के पार, केरल में दिखी कांटे की टक्कर, जानें क्या कहते हैं नए आंकड़े?
नई दिल्ली, एजेंसी। देश के 5 बड़े राज्यों में मतदान की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।अब सबकी निगाहें नतीजों पर टिकी हुई हैं। हाल ही में Today’s Chanakya ने अपने एग्जिट पोल के आंकड़े जारी किए हैं। इन आंकड़ों के अनुसार, असम में NDA भारी बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करता दिख रहा है, जबकि केरल में मुकाबला बेहद दिलचस्प और बराबरी का बना हुआ है।

1. असम में NDA की जीत का अनुमान
असम की 126 सीटों वाली विधानसभा के लिए चाणक्य के आंकड़े एकतरफा जीत की ओर इशारा कर रहे हैं।
- NDA को102 सीटें मिलने का अनुमान (± 9 सीटों के मार्जिन के साथ)। यानी यह आंकड़ा 93 से 111 सीटों के बीच रह सकता है।
- कांग्रेस गठबंधन पिछड़ता हुआ दिख रहा है, जिसे केवल 14 से 32 सीटें मिलने का अनुमान है।
- AIUDF+ और अन्य: अन्य दलों का अकाउंट खुलना मुश्किल दिख रहा है, उन्हें 0 से 2 सीटें मिल सकती हैं।
2. केरल में UDF और LDF के बीच मुकाबला
केरल में सत्ता किसके हाथ जाएगी, फिलहाल यह कहना मुश्किल है क्योंकि दोनों बड़े गठबंधनों के बीच अंतर बहुत कम है:
- UDF (कांग्रेस गठबंधन): 40% वोट शेयर के साथ 69 ± 9 सीटें मिलने की उम्मीद है, जिससे उसे मामूली बढ़त मिलती दिख रही है।
- LDF (वामपंथी गठबंधन): 38% वोट शेयर के साथ 64 ± 9 सीटें मिलने का अनुमान है।
- भाजपा+: केरल में भाजपा अपनी पैठ बढ़ाती दिख रही है, जिसे 20% वोट शेयर के साथ 7 ± 4 सीटें मिल सकती हैं।
इस दिन आएंगे नतीजे
असल परिणाम क्या फिलहाल यह देखना बाकी है। एग्जिट पोल के नतीजों को असल नहीं माना जा सकता। जानकारी के लिए बता दें कि 5 राज्यों-पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी के चुनाव परिणाम 4 मई, 2026 (सोमवार) को घोषित किए जाएंगे।
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एग्जिट पोल के अनुमान TMC कार्यकर्ताओं का मनोबल गिराने के लिए है, ममता बनर्जी का बड़ा दावा
कोलकाता, एजेंसी। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि टीएमसी कार्यकर्ताओं का मनोबल गिराने के लिए “भाजपा के निर्देश पर” एग्जिट पोल के पूर्वानुमान प्रसारित किए जा रहे हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि सत्तारूढ़ पार्टी राज्य चुनावों में 294 विधानसभा सीटों में से 226 से अधिक सीटें जीतेगी।

चार मई को होने वाली मतगणना से पहले ‘एक्स’ पर पोस्ट एक वीडियो संदेश में, बनर्जी ने दावा किया कि टेलीविजन चैनल ”भाजपा कार्यालय से प्रसारित” चुनावी परिणामों के अनुमानों को प्रसारित कर रहे। उन्होंने आरोप लगाया, ”टेलीविजन पर जो दिखाया जा रहा है, उसे दोपहर एक बजकर आठ मिनट पर भाजपा कार्यालय से प्रसारित किया गया था। इसे प्रसारित करवाने के लिए पैसे दिए गए थे। मेरे पास इसकी पुख्ता जानकारी है।”
अपनी पार्टी की जीत का भरोसा जताते हुए बनर्जी ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस 294 सदस्यीय विधानसभा में आराम से दो-तिहाई का आंकड़ा पार कर लेगी। उन्होंने कहा, “हम 226 सीटों का आंकड़ा पार कर लेंगे। हम शायद 230 सीटें भी पार कर लें। मुझे भारी जनादेश पर पूरा भरोसा है।”
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पूरी मतदान प्रक्रिया के दौरान केंद्रीय सुरक्षा बल ”भाजपा के एजेंट” के रूप में काम कर रहे थे। उन्होंने दावा किया, “अमित शाह के सीधे निर्देशों पर, चुनाव प्रक्रिया में केंद्रीय बल पश्चिम बंगाल में भाजपा के एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं।”
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जंग के बीच रुपए पर दबाव: फिर भी RBI की रणनीति से बची 14,000 करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा
मुंबई, एजेंसी। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर साफ दिख रहा है। रुपए की कीमत में गिरावट आई है और डॉलर के मुकाबले यह 95 के पार पहुंच गया। हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक (आर.बी.आई.) के हस्तक्षेप से स्थिति और बिगड़ने से बच गई।
आर.बी.आई. की 2022 में शुरू की गई एक दीर्घकालिक रणनीति अब असर दिखाने लगी है। इसके तहत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में रुपए के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया गया। इसी का नतीजा है कि फरवरी 2026 में भारत ने 14,000 करोड़ रुपए से ज्यादा के आयात का भुगतान रुपए में किया।

फरवरी में 1.5 अरब डॉलर की बचत
रुपए में व्यापार से फरवरी महीने में ही करीब 1.5 अरब डॉलर (करीब 14,057 करोड़ रुपए) की विदेशी मुद्रा बची। ऐसे समय में जब विदेशी निवेशक लगातार पैसा निकाल रहे हैं, यह राहत बेहद अहम मानी जा रही है।
आंकड़ों के मुताबिक 2025-26 के पहले 11 महीनों में 1.39 लाख करोड़ रुपए के आयात रुपए में किए गए, जो पिछले साल के मुकाबले 45 प्रतिशत ज्यादा है। हालांकि, कुल आयात में इसकी हिस्सेदारी अभी भी सिर्फ 2.35 प्रतिशत ही है, यानी इस दिशा में अभी काफी काम बाकी है।
30 देशों से जुड़ा भारत का नैटवर्क
दिलचस्प बात यह है कि निर्यात का भुगतान भी तेजी से रुपए में हो रहा है। पहले जहां आयात और निर्यात के बीच बड़ा अंतर था, अब यह अंतर काफी कम हो गया है, जिससे रुपए की स्थिति मजबूत हो रही है। भारत ने जर्मनी, रूस, यू.के., सिंगापुर समेत 30 देशों के बैंकों को भारतीय बैंकों में खाते खोलने की अनुमति दी है। इसके अलावा यू.ए.ई., इंडोनेशिया और मालदीव के साथ स्थानीय मुद्रा में व्यापार के लिए समझौते भी किए गए हैं।
ट्रेड डैफिसिट पर पड़ेगा असर
भारत एक बड़ा आयातक देश है और 2025-26 में उसका व्यापार घाटा 119 अरब डॉलर रहा। ऐसे में अगर आयात रुपए में होता है तो डॉलर की मांग घटेगी और इससे चालू खाते के घाटे पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।
दुनिया के कई देश अब डॉलर पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे ‘डी-डॉलराइजेशन’ कहा जा रहा है। चीन इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, जबकि भारत का फोकस सिर्फ जोखिम कम करने पर है, न कि रुपए को वैश्विक रिजर्व करंसी बनाने पर।
क्या है आगे की राह
विशेषज्ञों के मुताबिक रुपए में व्यापार भारत के लिए एक मजबूत रणनीति साबित हो सकता है लेकिन इसे बड़े स्तर पर लागू करने के लिए और देशों को इस सिस्टम से जोड़ना होगा। रुपए में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार अभी शुरूआती दौर में है लेकिन इससे मिलने वाले फायदे साफ दिखने लगे हैं। मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच यह रणनीति भारत को आर्थिक स्थिरता देने में अहम भूमिका निभा सकती है।
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