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Exit Poll 2026: असम में NDA 100 सीटों के पार, केरल में दिखी कांटे की टक्कर, जानें क्या कहते हैं नए आंकड़े?
नई दिल्ली, एजेंसी। देश के 5 बड़े राज्यों में मतदान की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।अब सबकी निगाहें नतीजों पर टिकी हुई हैं। हाल ही में Today’s Chanakya ने अपने एग्जिट पोल के आंकड़े जारी किए हैं। इन आंकड़ों के अनुसार, असम में NDA भारी बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करता दिख रहा है, जबकि केरल में मुकाबला बेहद दिलचस्प और बराबरी का बना हुआ है।

1. असम में NDA की जीत का अनुमान
असम की 126 सीटों वाली विधानसभा के लिए चाणक्य के आंकड़े एकतरफा जीत की ओर इशारा कर रहे हैं।
- NDA को102 सीटें मिलने का अनुमान (± 9 सीटों के मार्जिन के साथ)। यानी यह आंकड़ा 93 से 111 सीटों के बीच रह सकता है।
- कांग्रेस गठबंधन पिछड़ता हुआ दिख रहा है, जिसे केवल 14 से 32 सीटें मिलने का अनुमान है।
- AIUDF+ और अन्य: अन्य दलों का अकाउंट खुलना मुश्किल दिख रहा है, उन्हें 0 से 2 सीटें मिल सकती हैं।
2. केरल में UDF और LDF के बीच मुकाबला
केरल में सत्ता किसके हाथ जाएगी, फिलहाल यह कहना मुश्किल है क्योंकि दोनों बड़े गठबंधनों के बीच अंतर बहुत कम है:
- UDF (कांग्रेस गठबंधन): 40% वोट शेयर के साथ 69 ± 9 सीटें मिलने की उम्मीद है, जिससे उसे मामूली बढ़त मिलती दिख रही है।
- LDF (वामपंथी गठबंधन): 38% वोट शेयर के साथ 64 ± 9 सीटें मिलने का अनुमान है।
- भाजपा+: केरल में भाजपा अपनी पैठ बढ़ाती दिख रही है, जिसे 20% वोट शेयर के साथ 7 ± 4 सीटें मिल सकती हैं।
इस दिन आएंगे नतीजे
असल परिणाम क्या फिलहाल यह देखना बाकी है। एग्जिट पोल के नतीजों को असल नहीं माना जा सकता। जानकारी के लिए बता दें कि 5 राज्यों-पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी के चुनाव परिणाम 4 मई, 2026 (सोमवार) को घोषित किए जाएंगे।
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एग्जिट पोल के अनुमान TMC कार्यकर्ताओं का मनोबल गिराने के लिए है, ममता बनर्जी का बड़ा दावा
कोलकाता, एजेंसी। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि टीएमसी कार्यकर्ताओं का मनोबल गिराने के लिए “भाजपा के निर्देश पर” एग्जिट पोल के पूर्वानुमान प्रसारित किए जा रहे हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि सत्तारूढ़ पार्टी राज्य चुनावों में 294 विधानसभा सीटों में से 226 से अधिक सीटें जीतेगी।

चार मई को होने वाली मतगणना से पहले ‘एक्स’ पर पोस्ट एक वीडियो संदेश में, बनर्जी ने दावा किया कि टेलीविजन चैनल ”भाजपा कार्यालय से प्रसारित” चुनावी परिणामों के अनुमानों को प्रसारित कर रहे। उन्होंने आरोप लगाया, ”टेलीविजन पर जो दिखाया जा रहा है, उसे दोपहर एक बजकर आठ मिनट पर भाजपा कार्यालय से प्रसारित किया गया था। इसे प्रसारित करवाने के लिए पैसे दिए गए थे। मेरे पास इसकी पुख्ता जानकारी है।”
अपनी पार्टी की जीत का भरोसा जताते हुए बनर्जी ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस 294 सदस्यीय विधानसभा में आराम से दो-तिहाई का आंकड़ा पार कर लेगी। उन्होंने कहा, “हम 226 सीटों का आंकड़ा पार कर लेंगे। हम शायद 230 सीटें भी पार कर लें। मुझे भारी जनादेश पर पूरा भरोसा है।”
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पूरी मतदान प्रक्रिया के दौरान केंद्रीय सुरक्षा बल ”भाजपा के एजेंट” के रूप में काम कर रहे थे। उन्होंने दावा किया, “अमित शाह के सीधे निर्देशों पर, चुनाव प्रक्रिया में केंद्रीय बल पश्चिम बंगाल में भाजपा के एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं।”
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जंग के बीच रुपए पर दबाव: फिर भी RBI की रणनीति से बची 14,000 करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा
मुंबई, एजेंसी। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर साफ दिख रहा है। रुपए की कीमत में गिरावट आई है और डॉलर के मुकाबले यह 95 के पार पहुंच गया। हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक (आर.बी.आई.) के हस्तक्षेप से स्थिति और बिगड़ने से बच गई।
आर.बी.आई. की 2022 में शुरू की गई एक दीर्घकालिक रणनीति अब असर दिखाने लगी है। इसके तहत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में रुपए के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया गया। इसी का नतीजा है कि फरवरी 2026 में भारत ने 14,000 करोड़ रुपए से ज्यादा के आयात का भुगतान रुपए में किया।

फरवरी में 1.5 अरब डॉलर की बचत
रुपए में व्यापार से फरवरी महीने में ही करीब 1.5 अरब डॉलर (करीब 14,057 करोड़ रुपए) की विदेशी मुद्रा बची। ऐसे समय में जब विदेशी निवेशक लगातार पैसा निकाल रहे हैं, यह राहत बेहद अहम मानी जा रही है।
आंकड़ों के मुताबिक 2025-26 के पहले 11 महीनों में 1.39 लाख करोड़ रुपए के आयात रुपए में किए गए, जो पिछले साल के मुकाबले 45 प्रतिशत ज्यादा है। हालांकि, कुल आयात में इसकी हिस्सेदारी अभी भी सिर्फ 2.35 प्रतिशत ही है, यानी इस दिशा में अभी काफी काम बाकी है।
30 देशों से जुड़ा भारत का नैटवर्क
दिलचस्प बात यह है कि निर्यात का भुगतान भी तेजी से रुपए में हो रहा है। पहले जहां आयात और निर्यात के बीच बड़ा अंतर था, अब यह अंतर काफी कम हो गया है, जिससे रुपए की स्थिति मजबूत हो रही है। भारत ने जर्मनी, रूस, यू.के., सिंगापुर समेत 30 देशों के बैंकों को भारतीय बैंकों में खाते खोलने की अनुमति दी है। इसके अलावा यू.ए.ई., इंडोनेशिया और मालदीव के साथ स्थानीय मुद्रा में व्यापार के लिए समझौते भी किए गए हैं।
ट्रेड डैफिसिट पर पड़ेगा असर
भारत एक बड़ा आयातक देश है और 2025-26 में उसका व्यापार घाटा 119 अरब डॉलर रहा। ऐसे में अगर आयात रुपए में होता है तो डॉलर की मांग घटेगी और इससे चालू खाते के घाटे पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।
दुनिया के कई देश अब डॉलर पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे ‘डी-डॉलराइजेशन’ कहा जा रहा है। चीन इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, जबकि भारत का फोकस सिर्फ जोखिम कम करने पर है, न कि रुपए को वैश्विक रिजर्व करंसी बनाने पर।
क्या है आगे की राह
विशेषज्ञों के मुताबिक रुपए में व्यापार भारत के लिए एक मजबूत रणनीति साबित हो सकता है लेकिन इसे बड़े स्तर पर लागू करने के लिए और देशों को इस सिस्टम से जोड़ना होगा। रुपए में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार अभी शुरूआती दौर में है लेकिन इससे मिलने वाले फायदे साफ दिखने लगे हैं। मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच यह रणनीति भारत को आर्थिक स्थिरता देने में अहम भूमिका निभा सकती है।
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सरकार का बड़ा फैसला: 10% तक चीनी हिस्सेदारी वाली कंपनियों के लिए FDI आसान
नई दिल्ली, एजेंसी। सरकार चीनी कंपनियों में 10 प्रतिशत तक हिस्सेदारी रखने वाली विदेशी कंपनियों के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नियमों में ढील से जुड़े फैसले को जल्द अधिसूचित करेगी। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बृहस्पतिवार को कहा कि यह अधिसूचना विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत जारी की जाएगी, जिसके बाद संशोधित प्रावधान लागू हो जाएंगे। मार्च में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2020 में जारी प्रेस नोट-3 को संशोधित करने की मंजूरी दी थी। इस संशोधन के तहत 10 प्रतिशत तक चीनी हिस्सेदारी वाली विदेशी कंपनियां को विभिन्न क्षेत्रों में स्वचालित मार्ग के तहत भारत में निवेश की अनुमति होगी।

हालांकि यह राहत उन संस्थाओं पर लागू नहीं होगी जो चीन/हांगकांग या भारत से भूमि सीमा साझा करने वाले अन्य देशों में पंजीकृत हैं। सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि पूंजीगत वस्तुओं, इलेक्ट्रॉनिक पूंजीगत वस्तुओं, इलेक्ट्रॉनिक घटकों, पॉलिसिलिकॉन और इंगट-वाफर जैसे विनिर्माण क्षेत्रों में आने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्रस्तावों का निपटान 60 दिनों के भीतर किया जाएगा। सरकार के मुताबिक, मंत्रिमंडलीय सचिव की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा जिन अन्य क्षेत्रों या गतिविधियों को जोड़ा जाएगा, वे भी इस दायरे में आएंगे। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने इन बदलावों को अधिसूचित कर दिया है लेकिन आर्थिक मामलों के विभाग (डीईए) ने अभी तक फेमा कानून के तहत अधिसूचना जारी नहीं की है।
डीपीआईआईटी में संयुक्त सचिव जय प्रकाश शिवहरे ने कहा कि यह अधिसूचना जल्द जारी होगी और इस पर तकनीकी स्तर पर काम जारी है। उन्होंने बताया कि विभाग उन उप-क्षेत्रों की पहचान कर रहा है जिनके प्रस्ताव 60 दिनों में निपटाए जाएंगे। इसके साथ ही शिवहरे ने कहा कि इस बीच कुल एफडीआई वित्त वर्ष 2025-26 की अप्रैल से फरवरी अवधि के दौरान बढ़कर 88.29 अरब डॉलर हो गया जो 2024-25 में इसी समय 80.61 अरब डॉलर था। देश में शुद्ध एफडीआई भी बढ़कर 6.26 अरब डॉलर हो गया जो 2024-25 में 95.9 करोड़ डॉलर था।
डीपीआईआईटी के सचिव अमरदीप सिंह भाटिया ने कहा कि समूचे वित्त वर्ष 2025-26 में इसके 90 अरब डॉलर के पार पहुंच जाने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि सुधारात्मक उपाय, मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) और तेजी से बढ़ती आर्थिक वृद्धि देश को अच्छा निवेश आकर्षित करने में मदद कर रही है। सरकार ने साथ ही बताया कि इन्वेस्ट इंडिया ने 2025-26 के दौरान 6.1 अरब डॉलर से अधिक के 60 परियोजनाओं को जमीन पर उतारने में सहायता की जिससे 31,000 से अधिक संभावित रोजगार सृजित होने का अनुमान है। इन निवेशों में लगभग 42 प्रतिशत हिस्सा यूरोपीय देशों से आया है जबकि अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रमुख देशों की भागीदारी भी बनी हुई है।
ब्राजील, न्यूजीलैंड और कनाडा जैसे उभरते स्रोत देशों से निवेश आने से देश के निवेश आधार में विविधता दिखाई दे रही है। ‘इन्वेस्ट इंडिया’ की प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) निवृत्ति राय ने कहा कि रसायन, दवा, जैव प्रौद्योगिकी और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रों में लगभग 65 प्रतिशत निवेश हुआ जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स, वैमानिकी एवं रक्षा तथा मोटर वाहन/ इलेक्ट्रिक वाहन जैसे उभरते क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय गतिविधि देखी गई है। उन्होंने कहा कि एजेंसी अधिक निवेश आकर्षित करने के लिए 11 देशों पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
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