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देश

महंगाई का डबल अटैक, कमजोर मानसून और अल-नीनो से बढ़ी चिंता, दालों में तेजी के संकेत

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मुंबई, एजेंसी। देश में महंगाई का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है और अब इसका असर सीधे आम आदमी की रसोई पर दिखाई देने लगा है। आने वाले दिनों में चना और अरहर दाल के दाम और बढ़ सकते हैं। वहीं डीजल-पेट्रोल की महंगाई और माल ढुलाई खर्च बढ़ने से खाने-पीने की चीजों से लेकर रोजमर्रा के सामान तक महंगे होने की आशंका है। अल-नीनो के कारण कमजोर मानसून की चिंता ने भी बाजार का तनाव बढ़ा दिया है। ऐसे में आम लोगों का घरेलू बजट और बिगड़ सकता है।

आखिर दालों के दाम क्यों बढ़ रहे हैं?

इंडिया पल्सेज एंड ग्रेंस एसोसिएशन की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में चना और अरहर की आवक कम हो रही है। वहीं विदेशों से आयात भी घटा है। इसी वजह से बाजार में इन दालों के दाम लगातार ऊपर जा रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि बीते वित्त वर्ष में कुल दाल आयात घटकर 57.76 लाख टन रह गया, जबकि इससे पहले यह 69.3 लाख टन था। चने का आयात करीब पांच लाख टन घट गया। मसूर और मटर के आयात में भी बड़ी गिरावट दर्ज हुई। बाजार विशेषज्ञ राहुल चौहान के मुताबिक, अगर मौसम खराब रहा और उर्वरकों की कमी बनी रही तो आने वाले महीनों में दालों की कीमतें और बढ़ सकती हैं।

किन दालों में कितना बढ़ा भाव?

पिछले एक महीने में कई दालों के दाम तेजी से बढ़े हैं। अरहर, मसूर, उड़द और देसी चना सभी महंगे हुए हैं। मंडियों में पुरानी अरहर का स्टॉक भी काफी कम बचा है। सरकार ने अरहर का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाकर 8450 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया है, जिससे बाजार में तेजी का माहौल और मजबूत हुआ है।

अल-नीनो और मानसून की चिंता क्यों बढ़ी?

मौसम को लेकर भी चिंता बढ़ती जा रही है। अल-नीनो के असर से इस बार सामान्य से कम बारिश होने की आशंका जताई जा रही है। अगर मानसून कमजोर रहा, तो खरीफ सीजन में अरहर जैसी फसलों की बुवाई प्रभावित हो सकती है। इससे उत्पादन घटेगा और बाजार में कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश कम होने का असर सिर्फ दालों पर नहीं, बल्कि सब्जियों और दूसरी कृषि उपज पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि बाजार अभी से महंगाई के नए दौर की आशंका जता रहा है।

माल ढुलाई महंगी होने से क्या असर पड़ेगा?

डीजल की किल्लत और ईंधन की बढ़ती कीमतों ने ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर भी दबाव बढ़ा दिया है। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के मुताबिक, कई राज्यों में करीब 20 फीसदी ट्रक सड़कों से हट गए हैं। इससे माल ढुलाई की लागत 10 से 15 फीसदी तक बढ़ गई है। इसका सीधा असर खाने-पीने के सामान, किराना और जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर पड़ रहा है। यानी अब सिर्फ दाल ही नहीं, बल्कि बाजार की कई चीजें आम लोगों के लिए और महंगी हो सकती हैं।

टायर और वाहन पुर्जों की कीमतें क्यों बढ़ रहीं?

महंगाई का असर ऑटो सेक्टर पर भी दिख रहा है। टायर और वाहन पुर्जा बनाने वाली कंपनियों ने भी कीमतें बढ़ानी शुरू कर दी हैं। कंपनियों का कहना है कि कच्चे माल और ऊर्जा की लागत लगातार बढ़ रही है। सिएट के प्रबंध निदेशक अर्णव बनर्जी ने बताया कि कंपनी मार्च और अप्रैल में टायरों के दाम करीब पांच फीसदी बढ़ा चुकी है और मई-जून में एक और बढ़ोतरी हो सकती है। इससे ट्रांसपोर्ट का खर्च और बढ़ेगा, जिसका असर आखिरकार आम लोगों की जेब पर ही पड़ेगा।

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खेल

शोक में डूबा खेल जगत… नहीं रहे Olympian राजा रणधीर सिंह, 79 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

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नई दिल्ली, एजेंसी। भारतीय खेल जगत के लिए आज का दिन एक अपूरणीय क्षति और गहरे शोक का है। देश के अनुभवी खेल प्रशासक और एशियाई खेलों में निशानेबाजी (Shooting) का पहला स्वर्ण पदक जीतने वाले दिग्गज ओलंपियन राजा रणधीर सिंह का आज निधन हो गया। वह 79 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से उम्र से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे थे। 

कई दिनों तक अस्पताल में इलाज कराने के बाद उन्होंने अपने दिल्ली स्थित आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन से भारतीय खेलों के उस स्वर्णिम अध्याय का अंत हो गया है जिसे उन्होंने खिलाड़ी और प्रशासक दोनों रूपों में संवारा था। राजा रणधीर सिंह के परिवार में उनकी पत्नी विनीता और तीन बेटियां महिमा, सुनैना और राजेश्वरी हैं।

राजेश्वरी भी एक निशानेबाज हैं। स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं के कारण सिंह ने हाल में एशियाई ओलंपिक परिषद (ओसीए) के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्हें 2024 में चार साल के कार्यकाल के लिए चुना गया था जबकि वह 1991 से 2015 तक इस संस्था में महासचिव रह चुके थे। 

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भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) के सचिव राजीव भाटिया ने कहा, ”गहरे दुख के साथ हम राजा रणधीर सिंह के निधन की दुखद खबर साझा कर रहे हैं जो आज 27 मई 2026 को स्वर्ग सिधार गए। उन्होंने कहा, एक विशिष्ट ओलंपियन, अर्जुन पुरस्कार विजेता और भारत, एशिया और अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति में सबसे सम्मानित खेल प्रशासकों में से एक राजा रणधीर सिंह ने निशानेबाजी खेल और ओलंपिक आंदोलन के विकास में अमूल्य योगदान दिया।

भाटिया ने कहा, एनआरएआई और पूरा निशानेबाजी समुदाय इस अपूरणीय क्षति पर शोक व्यक्त करता है और उनके परिवार तथा प्रियजनों के प्रति हार्दिक संवेदना व्यक्त करता है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे। सिंह के शानदार खेल करियर में पांच ओलंपिक में भागीदारी और 1978 के बैंकॉक एशियाई खेलों में ऐतिहासिक ट्रैप स्वर्ण पदक शामिल था जिससे उन्हें 1979 में अर्जुन पुरस्कार से नवाजा गया था। 

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उन्होंने तोक्यो 1964 (रिजर्व निशानेबाज), मेक्सिको 1968, म्यूनिख 1972, मॉन्ट्रियल 1976, मॉस्को 1980 और लॉस एंजिल्स 1984 में ओलंपिक में हिस्सा लिया। खेलों की तरह ही अपने सफल प्रशासनिक करियर में उन्होंने 1987 से 2010 तक भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के महासचिव के तौर पर तथा 2001 से 2014 तक अलग अलग भूमिकाओं में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) के सदस्य के रूप में कार्य किया। वह 2003 में दो साल के लिए विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (वाडा) में आईओसी के प्रतिनिधि बन गए। 

पटियाला के पूर्व महाराजा और क्रिकेटर भूपिंदर सिंह के वंशज रणधीर सिंह भारत के सबसे जाने-माने खेल प्रशासकों में से एक थे। भारतीय खेलों की अक्सर बिखरी हुई प्रशासनिक व्यवस्था में आम सहमति बनाने की अपनी काबिलियत के लिए उनकी प्रशंसा की जाती थी। देश में ओलंपिक आंदोलन को बढ़ावा देने का श्रेय भी बड़े पैमाने पर उन्हें ही दिया जाता था। 

उनकी बेटी राजेश्वरी ने उनकी निशानेबाजी की विरासत को बरकरार रखा और वह भी ट्रैप निशानेबाज हैं। राजेश्वरी ने 2022 के एशियाई खेलों में रजत पदक जीतने के अलावा 2016 की एशियाई चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक भी जीता था। वहीं उनकी बेटी सुनैना ने 2018 में आईओए की उपाध्यक्ष बनकर खेल प्रशासन में अपनी एक अलग जगह बनाई। वह आईओए की अंतरराष्ट्रीय संबंधों और शिक्षा समिति की सदस्य भी हैं। 

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देश

फिल्म जगत को बड़ा झटका ! मशहूर फिल्ममेकर Anik Dutta का हुआ निधन…छत से गिरकर हुई मौत

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कोलकाता, एजेंसी। एक बार फिर से इंडस्ट्री में शौक की लहर छा गई है। बंगाली फिल्म इंडस्ट्री के फिल्ममेकर अनिक दत्ता ने दुनिया को अलविदा कह दिया है। 66 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली है। खबरों के अनुसार उनका निधन अपनी पत्नी के घर की छत से गिरने की वजह से हुआ। इस बात की जानकारी मिलते ही कोलकाता पुलिस जांच में जुट गई है। 

Filmmaker Anik Dutta Death

पुलिस कर रही है जांच 
इस घटना के बाद अनिक दत्ता के रिश्तेदार और परिवार वाले साथ में ही हॉस्पिटल पहुंच गए। इसी के साथ जहां पर यह घटना हुई है, उसकी भी जांच शुरू कर दी है। 

आपको बता दें कि अनिक दत्ता हमेशा से ही अपने काम और अपनी फिल्मों के लिए जाने जाते हैं। 2012 में भूतेर भविष्यत मूवी से उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की थी। इस फिल्म के बाद उनको इंडस्ट्री में पहचान मिलनी शुरू हुई। इसके बाद उन्होंने इंडस्ट्री को बहुत ही हिट फिल्में दी जैसे कि अश्चोरज्यो प्रदीप, बोरुनबाबुर बंधु, अपराजितो। 

Filmmaker Anik Dutta Death

टल गई अपराजितो 2
बुधवार दोपहर Anik Dutta के दर्दनाक हादसे की खबर सामने आते ही बंगाली एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में मायूसी छा गई। इस खबर ने फिल्म जगत को गहरे सदमे में डाल दिया। घटना की जानकारी मिलते ही मशहूर निर्देशक Srijit Mukherji और अभिनेता Jeetu Kamal तुरंत अस्पताल पहुंचे। बताया जा रहा है कि अनिक दत्ता पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे और इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती भी रहे थे। वहीं, वह अपनी चर्चित फिल्म Aparajito के सीक्वल ‘अपराजितो 2’ पर काम करने की तैयारी कर रहे थे।

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देश

LPG ग्राहकों के लिए जरूरी अपडेट, नहीं कराया eKYC तो बंद हो सकती है गैस सब्सिडी

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मुंबई, एजेंसी। भारत पेट्रोलियम (BPCL) ने एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए बड़ा अपडेट जारी किया है। कंपनी के मुताबिक, जिन ग्राहकों ने अभी तक eKYC पूरा नहीं कराया है, उन्हें 30 जून 2026 तक यह प्रक्रिया पूरी करनी होगी। तय समय तक eKYC नहीं कराने पर LPG सब्सिडी बंद हो सकती है।

कंपनी ने बताया कि अब गैस कनेक्शन को आधार आधारित बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन से जोड़ा जा रहा है, ताकि सब्सिडी केवल पात्र उपभोक्ताओं तक पहुंचे और फर्जी कनेक्शनों पर रोक लगाई जा सके।

घर बैठे करें eKYC

BPCL ने अपने ग्राहकों से HelloBPCL ऐप के जरिए घर बैठे eKYC पूरा करने की अपील की है। इसके लिए उपभोक्ताओं को ऐप डाउनलोड कर LPG सेक्शन में जाकर आधार आधारित ऑथेंटिकेशन प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

अगर ग्राहक तय समय तक eKYC नहीं कराते हैं, तो उन्हें बाजार कीमत पर गैस सिलेंडर खरीदना पड़ सकता है क्योंकि सब्सिडी खाते में नहीं आएगी।

ग्राहकों को सलाह

कंपनी ने यह भी सलाह दी है कि ग्राहक केवल आधिकारिक ऐप या अधिकृत माध्यम से ही eKYC करें और किसी अनजान लिंक या थर्ड पार्टी ऐप से बचें।

समय पर eKYC पूरा करने से उपभोक्ताओं को बिना रुकावट सब्सिडी मिलती रहेगी और भविष्य में दस्तावेज सत्यापन से जुड़ी परेशानियों से भी राहत मिलेगी।

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