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एवरेस्ट पर फतह के बाद पसरा मातम, दो भारतीय पर्वतारोहियों की मौत

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नई दिल्ली, एजेंसी। दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर इस साल जहां कामयाबी के नए रिकॉर्ड बने वहीं दो भारतीय परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। एवरेस्ट फतह करने के बाद नीचे उतरते समय दो भारतीय पर्वतारोहियों अरुण कुमार तिवारी और संदीप आरे की दर्दनाक मौत हो गई। इस सीजन में अत्यधिक भीड़ और खतरनाक Death Zone ने रेस्क्यू टीमों की चुनौतियों को कई गुना बढ़ा दिया है।

जानें कैसे हुई दो भारतीय जांबाजों की मौत?

अरुण कुमार ने 21 मई की शाम को सफलतापूर्वक एवरेस्ट की चोटी पर कदम रखा लेकिन खुशी का यह पल ज्यादा देर नहीं टिक सका। चोटी से नीचे उतरते समय हिलेरी स्टेप (Hillary Step) के पास शेरपाओं की मदद के बावजूद उनकी तबीयत बिगड़ी और उन्होंने दम तोड़ दिया।

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वहीं संदीप ने 20 मई को एवरेस्ट पर तिरंगा फहराया था। चोटी पर तस्वीरें खींचने के लिए उन्होंने कुछ देर के लिए अपना चश्मा (Goggles) हटा दिया, जिससे वह ‘स्नो ब्लाइंडनेस’ (बर्फ की चमक से अंधापन) के शिकार हो गए। नीचे उतरते समय उन्हें हाई-ऑल्टीट्यूड सेरेब्रल एडिमा (दिमाग में सूजन) हो गया।

रेस्क्यू टीम दो दिन की कड़ी मशक्कत के बाद उन्हें कैंप II तक लेकर आई लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका।जानकारी के लिए बता दें कि इस साल एवरेस्ट पर एक ही दिन में रिकॉर्ड 274 लोगों के चोटी पर पहुंचने का नया इतिहास बना लेकिन यही रिकॉर्ड भीड़ पर्वतारोहियों के लिए आफत बन गई।

इस एवरेस्ट सीजन में जहां इन मौतों से शोक की लहर है वहीं भारत के लिए कुछ ऐतिहासिक कामयाबी भी आई। सीमा सुरक्षा बल (BSF) और ITBP के केवल महिलाओं वाले दल (All-women expeditions) ने पहली बार एवरेस्ट फतह कर इतिहास रचा। वहीं 16 वर्षीय निशा ससीकुमार नेपाल की तरफ (साउथ साइड) से एवरेस्ट फतह करने वाली सबसे कम उम्र की महिला बनीं।

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बता दें कि इस सीजन में अब तक 5 मौतें (जिनमें 3 नेपाली पर्वतारोही शामिल हैं) हो चुकी हैं। रिकॉर्ड संख्या में जारी किए जा रहे परमिट और बढ़ती मौतों के बाद अब नेपाल के पर्वतारोहण उद्योग पर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पर्वतारोहियों की सुरक्षा, भीड़ के प्रबंधन और ऊंचे पर्वतों पर मेडिकल सुविधाओं को लेकर अब सख्त नियम बनाने का समय आ गया है।

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कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने किया इस्तीफे का ऐलान, मुख्यमंत्री आवास पहुंचे शिवकुमार

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बेंगलुरु, एजेंसी।  कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने आवास पर आयोजित नाश्ते के दौरान अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों को अपने पद छोड़ने के फैसले की जानकारी दी। नाश्ते की बैठक में उनके वर्तमान उप मुख्यमंत्री और संभावित उत्तराधिकारी डी.के. शिवकुमार और अन्य मंत्रिमंडल के सहयोगी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा साझा की गई एक तस्वीर में, सिद्धारमैया भावुक शिवकुमार को गले लगाते हुए दिखाई दे रहे हैं। एक अन्य तस्वीर में, मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार शिवकुमार सिद्धारमैया के पैर छूते और उनका आशीर्वाद लेते हुए दिखाई दे रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, पार्टी उच्च कमान द्वारा राज्य में नेतृत्व परिवर्तन के लिए रास्ता बनाने के लिए कहे जाने के बाद मुख्यमंत्री ने राज्यपाल से नियुक्ति का अनुरोध किया।

हालांकि, लोक भवन सूत्रों ने बताया कि सिद्धारमैया ने अभी तक राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मिलने का समय नहीं मांगा है, जो निजी कारणों से अपने गृह नगर इंदौर के लिए रवाना हो गए हैं। दक्षिणी राज्य में नए मुख्यमंत्री की प्रतीक्षा में राजनीतिक माहौल गरमा रहा है। बुधवार को कर्नाटक के प्रभारी एआईसीसी महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस ने राज्य में अपने विधायक दल की बैठक नहीं बुलाई है और अभी तक कोई अन्य निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने मीडिया से इस मुद्दे पर अटकलें न लगाने का अनुरोध किया।

विधानसभा दल अपने नेता का चयन करता है, जो मुख्यमंत्री पद के लिए स्वाभाविक पसंद होता है। बुधवार को यहां पहुंचे सुरजेवाला ने सिद्धारमैया और अन्य वरिष्ठ नेताओं से भी मुलाकात की। यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब कांग्रेस हाई कमांड ने कथित तौर पर सिद्धारमैया को राज्य में नेतृत्व परिवर्तन के लिए रास्ता बनाने को कहा और उन्हें राज्यसभा सीट के साथ पार्टी में एक केंद्रीय भूमिका की पेशकश की। खबरों के अनुसार, सिद्धारमैया ने तुरंत केंद्रीय भूमिका स्वीकार नहीं की है।

कुछ सूत्रों का कहना है कि सिद्धारमैया ने पार्टी के शीर्ष नेता राहुल गांधी से सीधे संदेश मिलने के कारण पद छोड़ने का फैसला किया होगा। मुख्यमंत्री ने बार-बार कहा है कि यदि लोकसभा में विपक्ष के नेता उनसे ऐसा करने को कहेंगे तो वे पद छोड़ देंगे। मंगलवार को पार्टी द्वारा सिद्धारमैया और शिवकुमार को दिल्ली बुलाया गया, जहां कांग्रेस मुख्यालय में राहुल गांधी, एआईसीसी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खर्गे, पार्टी के महासचिव के सी वेणुगोपाल और सुरजेवाला के साथ लगातार बैठकें हुईं।  

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PM मोदी और मायावती ने दी बकरीद की मुबारकबाद, BSP सुप्रीमो बोलीं-‘हमारी सरकार में रहा कानून का राज’

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लखनऊ, एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को ईद उल-अजहा के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और आशा जताई कि यह पर्व समाज में भाईचारे एवं खुशी की भावना को और गहरा करेगा। ईद उल-अजहा यानी बकरीद गुरुवार को देश के अधिकांश हिस्सों में मनाई जा रही है। मोदी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि ईद उल-अजहा की बधाई ! यह पर्व हमारे समाज में भाईचारे व खुशी की भावना को और गहरा करे। सभी की सफलता और अच्छे स्वास्थ्य के लिए कामना करता हूं।

मायावती ने दी बकरीद की मुबारकबाद, शांति और भाईचारे से त्योहार मनाने की अपील 
बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने गुरुवार को ईद-उल-अजहा (बकरीद) पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। मायावती ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि ईद-उल-अजहा, अर्थात आम बोलचाल की जुबान में बकरीद पर्व की दुनिया भर में रहने वाले सभी भारतीय मुस्लिम भाई-बहनों व उनके परिवार वालों को दिली मुबारकबाद। साथ ही समस्त देशवासियों के खुश व खुशहाल जिन्दगी की शुभकामनाएं।” उन्होंने अपील की कि सभी, पर्व व त्योहार पूरी शान्ति, आपसी सौहार्द और भाईचारे के साथ मनाए जाएं।

मायावती ने कहा कि यह देश व जनहित में हमेशा बेहतर रहेगा, ताकि देश-प्रदेश के विकास और यहां के लोगों की तरक्की पर पूरी ऊर्जा, शक्ति व संसाधन लग सकें।” पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में रही बसपा की चारों सरकारों में हमेशा ‘कानून द्वारा कानून का राज’ रहा। उन्होंने कहा कि उनकी सरकारें पूरी तरह से सर्वसमाज-हितैषी और ‘सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की नीति पर चलने वाली बेहतरीन सरकारें थीं।

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स्पेस में ISRO की बड़ी खोज, Chandrayaan-2 ने चांद के साउथ पोल पर खोज डाली ‘बर्फ’

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नई दिल्ली, एजेंसी। एक नए अध्ययन में चंद्रमा के south polar क्षेत्र के कुछ सबसे ठंडे गड्ढों (crater) के नीचे बर्फ मौजूद होने के मजबूत संकेत मिलने का दावा किया गया है। अध्ययन में Double Shadowed Craters पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया, जो चंद्रमा के स्थायी रूप से छायायुक्त क्षेत्रों (psr) के भीतर स्थित विशेष प्रकार के गड्ढे हैं।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने बुधवार को जारी एक बयान में कहा कि इस अध्ययन के निष्कर्ष भविष्य के चंद्र अभियानों के लिए महत्वपूर्ण हैं। इससे भविष्य में, पृथ्वी के एकमात्र उपग्रह की सतह पर उतरने के संभावित स्थलों और स्थानीय संसाधन उपयोग गतिविधियों के लिए बर्फ युक्त क्षेत्रों की पहचान में मदद मिल सकती है। यह अध्ययन अहमदाबाद स्थित फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी (PRL) के वैज्ञानिकों ने किया है।

विश्लेषण के लिए वैज्ञानिकों ने Chandrayaan-2 Orbiter के ‘Dual Frequency Synthetic Aperture Radar’ (DFSAR) से प्राप्त आंकड़ों का अध्ययन किया। यह एक प्रकार की मानचित्रण तकनीक है, जिसमें दो अलग-अलग रेडियो तरंग आवृत्तियों का उपयोग कर सतह की विस्तृत तस्वीरें ली जाती हैं। इसरो ने कहा कि स्थायी रूप से छायायुक्त क्षेत्र लगातार सूर्य के प्रकाश और ऊष्मीय विकिरण से सुरक्षित रहने के कारण अत्यधिक ठंडे बने रहते हैं। यही वजह है कि इन्हें लंबे भू-वैज्ञानिक कालखंड तक जल-बर्फ को सुरक्षित रखने के लिए अनुकूल माना जाता है।

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