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पीएम मोदी की ‘एक साल तक सोना न खरीदने’ की अपील का असर, सोने की मांग में जबरदस्त गिरावट

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मुंबई, एजेंसी। भारत में सोने की मांग में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई है। सरकार द्वारा आयात शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) में किए गए भारी इजाफे और अन्य वैश्विक एवं घरेलू कारकों के चलते देश के स्वर्ण बाजार में मंदी का माहौल है। सरकार ने 13 मई को सोने पर आयात शुल्क 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया था। इसके परिणामस्वरूप, जीएसटी सहित प्रभावी टैक्स 9.18% से बढ़कर 18.45% हो गया है।

इंडिया बुलियन एंड जूलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, ड्यूटी बढ़ने के बाद मांग में 70% की गिरावट आई है। 27 मई को समाप्त पखवाड़े में मांग केवल 7.5 टन रह गई, जो पिछले साल इसी अवधि में 25 टन थी। मुंबई के स्पॉट मार्केट में 999 शुद्धता वाले सोने का भाव 1.57 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम (बिना जीएसटी) दर्ज किया गया।

मांग घटने के पीछे मुख्य कारण

गिरते रुपए, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक तनाव को देखते हुए आयात कम करने के लिए शुल्क बढ़ाया गया था। जॉयलुक्कास के चेयरमैन जॉय अलुक्कास के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘एक साल तक सोना न खरीदने’ की अपील का भी ग्राहकों पर गहरा असर पड़ा है। पेट्रोल, डीजल और खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों ने उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति और धारणा को प्रभावित किया है।
सांस्कृतिक कारक: ‘अधिक मास’ होने के कारण लोग कीमती वस्तुओं की खरीदारी से परहेज कर रहे हैं।

उद्योग पर प्रभाव

इस मंदी की सबसे ज्यादा मार असंगठित कारोबार पर पड़ी है, जो कुल ट्रेड का लगभग 65% हिस्सा है। जॉयलुक्कास जैसी बड़ी रिटेल चेन ने भी अपनी मांग में 35% से अधिक की गिरावट देखी है। विशेषज्ञों के लिए सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि निवेश के उद्देश्य से होने वाली सोने की मांग (इनवेस्टमेंट डिमांड) में भी कमी आई है, जबकि मार्च तिमाही में बार और कॉइन की मांग 34% बढ़कर 62.3 टन रही थी।
भारत में सोने की कुल वार्षिक खपत 800 से 850 टन के बीच रहती है लेकिन मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए दूसरी तिमाही में मांग के कमजोर रहने के आसार हैं।

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सरकार ने कपास पर 30 अक्टूबर तक आयात शुल्क से छूट दी

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नई दिल्ली, एजेंसी। सरकार ने शनिवार को कपास के आयात पर सीमा शुल्क से पांच महीने यानी 30 अक्टूबर, 2026 तक छूट देने की घोषणा की। वित्त मंत्रालय ने एक अधिसूचना में कहा कि आयात शुल्क में यह छूट एक जून, 2026 से प्रभावी होगी। इस शुल्क छूट से भारतीय वस्त्र क्षेत्र के लिए कपास की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी। इस अस्थायी शुल्क छूट से वस्त्र और परिधान क्षेत्र में कच्चे माल की लागत कम होने की उम्मीद है। इससे विनिर्माताओं और उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। साथ ही घरेलू किसानों के हितों का भी ध्यान रखा गया है। 

मंत्रालय ने कहा कि कुल मिलाकर, इस कदम से घरेलू वस्त्र उद्योग, विशेष रूप से लघु और मध्यम उद्यमों के प्रदर्शन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। इससे बाजार में कपास की बेहतर उपलब्धता सुनिश्चित होगी। 

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SpiceJet GST notice: स्पाइसजेट पर बढ़ा टैक्स संकट, GST विभाग ने भेजा 124 करोड़ रुपए का नोटिस

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मुंबई, एजेंसी। विमानन कंपनी स्पाइसजेट की वित्तीय मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अब कंपनी पर जीएसटी नियमों के पालन में कथित चूक को लेकर 124.65 करोड़ रुपए की कर देनदारी का मामला सामने आया है। जीएसटी विभाग ने एयरलाइन को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए यह स्पष्ट करने को कहा है कि उसका जीएसटी रजिस्ट्रेशन क्यों न रद्द कर दिया जाए।

रिपोर्ट्स के अनुसार, स्पाइसजेट ने कई महीनों से जीएसटी रिटर्न दाखिल नहीं किए हैं। इसी वजह से विभाग ने सीजीएसटी और एसजीएसटी अधिनियम, 2017 की धारा 62 के तहत कंपनी की कर देनदारी का अस्थायी आकलन किया है। 25 मई 2026 को जारी नोटिस में कंपनी को जवाब देने के लिए कहा गया है।

विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, नवंबर 2025 के लिए 44.44 करोड़ रुपए, दिसंबर 2025 के लिए 43.79 करोड़ रुपए, जनवरी 2026 के लिए 12.19 करोड़ रुपए, फरवरी 2026 के लिए 12.10 करोड़ रुपए और मार्च 2026 के लिए 12.12 करोड़ रुपए की कर मांग निर्धारित की गई है। बताया जा रहा है कि नोटिस जारी होने के बाद भी लंबित रिटर्न दाखिल नहीं किए गए हैं।

शेयर बाजार पर दिख सकता है असर

इस घटनाक्रम का असर शेयर बाजार में भी देखने को मिल सकता है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सोमवार को कारोबार शुरू होने पर निवेशकों की प्रतिक्रिया नकारात्मक रह सकती है। शुक्रवार को बीएसई पर स्पाइसजेट का शेयर 12.75 रुपए पर बंद हुआ था। वर्ष 2026 में अब तक कंपनी का शेयर करीब 60 प्रतिशत गिर चुका है, जबकि पिछले एक वर्ष में इसमें 70 प्रतिशत से अधिक की कमजोरी दर्ज की गई है।

कंपनी की वित्तीय स्थिति भी दबाव में बनी हुई है। दिसंबर 2025 तिमाही में स्पाइसजेट को 261.38 करोड़ रुपये का समेकित शुद्ध घाटा हुआ था, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में कंपनी लाभ में थी। हालांकि, परिचालन से होने वाली आय में वृद्धि दर्ज की गई और यह 1,237 करोड़ रुपए से बढ़कर 1,408 करोड़ रुपए तक पहुंच गई।

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पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीद से Crude Oil में सात हफ्तों की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट

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मुंबई, एजेंसी। पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीदों और होर्मुज की खाड़ी (Hormuz Strait) के फिर से खुलने की संभावना के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को थोड़ी राहत मिली है।

कीमतों में रिकॉर्ड गिरावट

इस सप्ताह ब्रेंट क्रूड की कीमत में 11% की गिरावट दर्ज की गई, जो पिछले सात हफ्तों में सबसे अधिक है। शुक्रवार को जुलाई डिलीवरी का ब्रेंट क्रूड फ्यूचर 1.66 डॉलर यानी 1.8 फीसदी गिरावट के साथ 92.05 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। डब्ल्यूटीआई भी 1.7 फीसदी गिरावट के साथ $87.36 प्रति बैरल रह गया। दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल होर्मुज की खाड़ी से गुजरता है, इसलिए वहां तनाव कम होना बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है। 

भारत पर प्रभाव 

भारत अपनी तेल जरूरतों का 90% आयात करता है, इसलिए कीमतों में यह कमी देश के लिए बड़ी राहत है। हालांकि, सरकारी तेल कंपनियों को अभी भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है; उदाहरण के लिए, उन्हें हर गैस सिलेंडर पर लगभग 700 रुपए का नुकसान हो रहा है।

भविष्य की अनिश्चितता और चेतावनियां

मोर्गन स्टेनली ने चेतावनी दी है कि यदि जून में होर्मुज स्ट्रेट बंद रहता है, तो तेल की कीमतें एक बार फिर उबाल मार सकती हैं। सऊदी अरामको के सीईओ के अनुसार, वैश्विक तेल बाजार में यह उथल-पुथल 2027 के अंत तक बनी रह सकती है।

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