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 RBI का बडा एक्शन, Financial Sector में हलचल, 135 NBFCs के लाइसेंस रद्द

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मुंबई, एजेंसी। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 135 नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (NBFCs) रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट रद्द कर दिए। इस फैसले के बाद वित्तीय क्षेत्र में हलचल बढ़ गई है। रद्द किए गए लाइसेंस वाली कंपनियों में एक्सप्रेस फिनकैप हाउस, अक्षय फिस्कल सर्विसेज, टाइम्स फाइनेंस, जुपिटर प्रोजेक्ट्स, जुपिटर फिनवेस्ट, एस्सेल फाइनेंस बिजनेस लोन्स और सिटीवाइड फाइनेंशियल सर्विसेज शामिल हैं।

RBI के अनुसार, जिन कंपनियों के रजिस्ट्रेशन रद्द किए गए, उनमें से बड़ी संख्या पश्चिम बंगाल में रजिस्टर्ड कंपनियों की है। आरबीआई समय-समय पर NBFCs की गतिविधियों की समीक्षा करता है और नियमों का पालन नहीं करने या अन्य कारणों से जरूरी कार्रवाई करता है।

13 NBFCs ने स्वेच्छा से लौटाया लाइसेंस 

इसके अलावा 13 NBFCs ने अपने रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट स्वेच्छा से RBI को सौंप दिए हैं। इन कंपनियों ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कारोबार (NBFI) से बाहर निकलने, विलय, अधिग्रहण, विघटन या स्वैच्छिक बंदी जैसे कारणों से यह कदम उठाया। लाइसेंस लौटाने वाली कंपनियों में जे. थॉमस फाइनेंस, इकोन-सुपर सेल्स, हितेशा फाइनेंस एंड इन्वेस्टमेंट, टिन्नेवेली तूतीकोरिन इन्वेस्टमेंट्स, कार्नेक्स विनिमय और इम्पैक्ट लीजिंग जैसी कंपनियां शामिल हैं। 

विलय और बंद होने से भी लौटाए गए लाइसेंस

वहीं कुछ कंपनियों ने अपनी कारोबारी संरचना में बदलाव के कारण लाइसेंस वापस किए। जैसे- फोररनर कैपिटल इन्वेस्टमेंट्स अब ऐसी कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) की कैटेगरी में आती है, जिसके लिए RBI से अलग रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं है। वहीं, कैस्पियन इम्पैक्ट इन्वेस्टमेंट्स, हरि दर्शन सेल्स, आइवरी कंसल्टेंट्स, एसकेए कंसल्टेंसी सर्विसेज, त्रिशिता मैनेजमेंट और सुबन ट्रेड्स जैसी कंपनियों ने विलय, विघटन या कंपनी के कानूनी रूप से समाप्त होने के कारण अपना लाइसेंस वापस कर दिया।

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SBI, ICICI-HDFC समेत कई बैंकों ने FCNR जमा पर ब्याज दरें बढ़ाईं

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मुंबई, एजेंसी। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और आईसीआईसीआई बैंक सहित कई बैंकों ने गुरुवार को प्रवासी भारतीयों (NRI) के लिए ऊंची ब्याज दरों वाली एक नई विदेशी मुद्रा प्रवासी (FCNR-B) जमा योजना शुरू की। एनआरआई फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की ब्याज दरों में यह बढ़ोतरी, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा बैंकों के लिए 30 सितंबर तक विदेशी मुद्रा अदला-बदली खिड़की की घोषणा के कुछ ही दिन बाद आई है। 

60-70 अरब डॉलर की विदेशी पूंजी भारत आने की संभावना 

रिजर्व बैंक के इस कदम से बैंकों को इन जमाओं पर वहन की जाने वाली मुद्रा की ‘हेजिंग’ लागत से प्रभावी रूप से राहत मिली है और उनके पास जमा दरों में वृद्धि करने की गुंजाइश बनी है। इस कदम का उद्देश्य प्रवासी भारतीयों से विदेशी मुद्रा जमा आकर्षित करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस जमा योजना के तहत करीब 60 से 70 अरब अमेरिकी डॉलर की विदेशी पूंजी भारत आने की संभावना है। 

कौन-सा बैंक कितना देगा रिटर्न

  • आरबीआई के इस कदम के बाद, ICICI बैंक ने अपनी वेबसाइट पर कहा कि वह 11 जून से एनआरआई एफडी पर 6.50 प्रतिशत ब्याज की पेशकश कर रहा है। 
  • SBI ने अमेरिकी डॉलर में 3 से 5 वर्ष की अवधि वाली नई ‘एसबीआई एडवांटेज एफसीएनआर (बी)’ जमा योजना शुरू की है। इस योजना में एक वर्ष की लॉक-इन अवधि होगी। एसबीआई के अनुसार, 10 लाख अमेरिकी डॉलर से अधिक की तीन से चार वर्ष की जमा पर 5.50 प्रतिशत, 4 से 5 वर्ष की जमा पर 5.75 प्रतिशत और 5 वर्ष की जमा पर 6 प्रतिशत ब्याज मिलेगा। 
  • बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda)ने भी अपनी नई एफसीएनआर (बी) योजना के तहत अमेरिकी डॉलर, ब्रिटिश पाउंड, यूरो, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और कनाडाई डॉलर में 3 से 5 वर्ष की अवधि वाली जमाओं पर ब्याज दरें बढ़ाई हैं। नई दरों के तहत अमेरिकी डॉलर जमा पर अधिकतम 6 प्रतिशत, ब्रिटिश पाउंड और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर जमा पर 4.75 प्रतिशत, कनाडाई डॉलर जमा पर 5.15 प्रतिशत तथा यूरो जमा पर 3.75 प्रतिशत ब्याज दिया जाएगा। 
  • कोटक महिंद्रा बैंक (Kotak Mahindra Bank) ने कहा कि 11 जून से 3 से 5 वर्ष की एफसीएनआर (बी) जमा पर 10 लाख अमेरिकी डॉलर से कम की जमा के लिए 6 प्रतिशत और इससे अधिक की जमा के लिए 6.15 प्रतिशत ब्याज मिलेगा। 
  • एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) ने भी 10 जून से 3 से 5 वर्ष की एफसीएनआर (बी) जमा पर ब्याज दर बढ़ाकर 6 प्रतिशत कर दी है। यह दर 10 जून से 30 सितंबर, 2026 के बीच खोली गई जमाओं पर लागू होगी। 
  • एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक (AU Small Finance Bank) ने अमेरिकी डॉलर में एफसीएनआर (बी) जमा पर अधिकतम ब्याज दर 5.15 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.10 प्रतिशत सालाना कर दी है। नई दरें 10 जून, 2026 से प्रभावी हैं। 

एफसीएनआर (बी) खाते एनआरआई को विदेशी मुद्रा में भारत में धन जमा करने की सुविधा देते हैं। इन खातों पर मिलने वाला ब्याज और मूलधन विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव से सुरक्षित रहता है, इसलिए ये एनआरआई निवेशकों के बीच लोकप्रिय माने जाते हैं। 

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एलजी का भारत समेत तीन प्रमुख ‘ग्लोबल साउथ’ बाजारों से 2030 तक राजस्व दोगुना करने का लक्ष्य

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नई दिल्ली, एजेंसी। दक्षिण कोरिया की इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की दिग्गज कंपनी एलजी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) ल्यू जे-चोल ने कहा कि कंपनी भारत सहित तीन उच्च संभावनाओं वाले ‘ग्लोबल साउथ’ बाजारों से अपना कुल राजस्व साल 2030 तक दोगुना करने की योजना बना रही है। उन्होंने कहा कि भारत में मजबूत वृहद आर्थिक वृद्धि, ब्रांड के प्रति उपभोक्ताओं की पसंद तथा रेफ्रिजरेटर, वॉशिंग मशीन और एयर कंडीशनर जैसी प्रमुख श्रेणियों में घरेलू उपकरणों की अपेक्षाकृत कम पहुंच के कारण बड़े अवसर मौजूद हैं। 

एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स के सीईओ ने कहा कि भारत, सऊदी अरब और ब्राजील कंपनी की दीर्घकालिक वृद्धि की रणनीति के केंद्र में हैं। कंपनी का लक्ष्य 2030 तक इन तीनों बाजारों से संयुक्त राजस्व को दोगुना करना है और इसके लिए वह इन उच्च संभावनाओं वाले बाजारों में अपने कारोबार का तेजी से विस्तार कर रही है। जे-चोल ने कहा, ”2025 में इन क्षेत्रों से हमारा संयुक्त राजस्व 6.2 लाख करोड़ कोरियाई वॉन रहा, जो 2023 की तुलना में 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्शाता है। यह कंपनी की वैश्विक वृद्धि से दोगुना से भी अधिक है।” 

एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स का 2025 में एकीकृत राजस्व 89.2 लाख करोड़ कोरियाई वॉन रहा। उन्होंने कहा कि भारत जैसे प्रमुख उभरते बाजारों में तेज वृद्धि केवल कारोबार का विस्तार नहीं, बल्कि दक्षिण कोरिया, उत्तरी अमेरिका और यूरोप में कंपनी की मजबूत उपस्थिति के पूरक के रूप में संतुलित और मजबूत क्षेत्रीय पोर्टफोलियो तैयार करने की रणनीति का हिस्सा है। कंपनी की ‘ग्लोबल साउथ’ रणनीति के तहत अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के जरिये उत्पाद नेतृत्व को मजबूत करने तथा सह-विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला के अनुकूलन के माध्यम से लागत प्रतिस्पर्धा बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। 

कंपनी की मध्यम से दीर्घावधि की रणनीति के बारे में विस्तार से बताते हुए, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स की निवेशक संबंध (आईआर) संचार टीम के प्रमुख एयरोन किम ने कहा कि कंपनी अपने मुख्य कारोबार को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है, जिसमें घरेलू उपकरण, वाहन तथा मीडिया एवं मनोरंजन समाधान शामिल हैं। भारत में योजनाओं के बारे में किम ने कहा कि कंपनी यहां अपनी उत्पादन क्षमता दोगुनी करेगी और अतिरिक्त क्षमता का उपयोग निर्यात बढ़ाने के लिए किया जाएगा। 

वर्तमान में एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया के कुल राजस्व में निर्यात की हिस्सेदारी छह से सात प्रतिशत है और कंपनी एशिया तथा अफ्रीका के बाजारों को सेवाएं दे रही है। कंपनी दोहरे बाजार और दोहरे खंड वाले निर्यात मॉडल पर काम कर रही है, जिसके तहत विकसित देशों को प्रीमियम उत्पाद तथा उभरते बाजारों को भारत में डिजाइन किए गए ‘एसेंशियल सीरीज’ उत्पाद भेजे जाएंगे। 

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ग्लोबलफाउंड्रीज ने फर्मियोनिक के साथ साझेदारी की, भारतीय कंपनी के लिए बनाएगी पहला चिप

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नई दिल्ली, एजेंसी। सेमीकंडक्टर विनिर्माण कंपनी ग्लोबलफाउंड्रीज एक साझेदारी के तहत सरकारी समर्थन प्राप्त फर्मियोनिक के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी (आरएफ) चिप बनाएगी। बृहस्पतिवार को जारी एक संयुक्त बयान में यह जानकारी दी गई। फर्मियोनिक के आरएफ चिप ग्लोबलफाउंड्रीज द्वारा बनाए जाने वाले पहले भारतीय सेमीकंडक्टर होंगे। कंपनी पहले से क्वालकॉम, मीडियाटेक, ब्रॉडकॉम जैसी वैश्विक कंपनियों के लिए चिप बना रही है। बयान में कहा गया, ”ग्लोबलफाउंड्रीज इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड (जीएफ इंडिया) और उन्नत रेडियो फ्रीक्वेंसी (आरएफ) समाधान पर केंद्रित भारतीय फैब्लेस सेमीकंडक्टर स्टार्टअप फर्मियोनिक ने एक वाणिज्यिक साझेदारी की घोषणा की है। जीएफ इसके तहत फर्मियोनिक के आरएफ चिप का विनिर्माण करेगी।” 

फर्मियोनिक सरकार की डिजाइन से जुड़ी प्रोत्साहन (डीएलआई) योजना के तहत भारतीय ‘फैब्लेस’ कंपनियों के शुरुआती समूह का हिस्सा है। भारतीय ‘फैब्लेस’ कंपनियों से तात्पर्य उन स्टार्टअप व भारतीय कंपनियों से है जो इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों एवं माइक्रोप्रोसेसर (चिप) के लिए डिजाइन एवं सॉफ्टवेयर (आईपी) तो खुद बनाती हैं लेकिन उनके विनिर्माण या उत्पादन का काम विदेशों में स्थित कंपनियों से करवाती हैं। 

फर्मियोनिक के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) गौतम कुमार सिंह ने कहा, ”ग्लोबलफाउंड्रीज इंडिया के साथ हमारा सहयोग हमें जटिल, उत्पादन-स्तर के आरएफ सिलिकॉन (केवल ‘प्रोटोटाइप’ नहीं) उपलब्ध कराने में सक्षम बनाता है। हमारी यात्रा के इस चरण में हमें केवल एक विनिर्माण प्रदाता नहीं, बल्कि ऐसे भागीदार की आवश्यकता थी जो आरएफ की जटिलता को समझे और उत्पादन-स्तर के निष्पादन में सहयोग कर सके। ग्लोबलफाउंड्रीज की आरएफ विशेषज्ञता और जीएफ इंडिया की सक्रिय भागीदारी ने इसे संभव बनाया।” 

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