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खरगे और राहुल गांधी ने PM मोदी को लिखा पत्र, राम मंदिर मामले में स्वतंत्र और व्यापक जांच की मांग की

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नई दिल्ली, एजेंसी। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में कथित वित्तीय अनियमितताओं और राम मंदिर से चढ़ावे की कथित चोरी के आरोपों की तत्काल स्वतंत्र एवं व्यापक जांच कराई जाए। कांग्रेस के दोनों शीर्ष नेताओं ने प्रधानमंत्री से ट्रस्ट के वित्तीय मामलों, श्रद्धालुओं से प्राप्त नकदी, सोने और चांदी समेत सभी चढ़ावों के प्रबंधन की जांच कराने तथा जांच के निष्कर्ष और ट्रस्ट के खातों को सार्वजनिक करने का भी आग्रह किया।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने पत्र साझा करते हुए ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”प्रधानमंत्री जी, राम मंदिर में करोड़ों श्रद्धालुओं ने आस्था के साथ अपनी कमाई अर्पित की – वहां हुई चंदा चोरी अब किसी से छुपी नहीं है। ट्रस्ट के हर सदस्य को आपकी सरकार ने चुना था। इस चंदा चोरी पर आपकी चुप्पी अस्वीकार्य है।” उन्होंने कहा, ”तत्काल स्वतंत्र जांच कराइए, पूरा हिसाब सार्वजनिक कीजिए और दोषियों को कानून के कटघरे में लाइए।

आपकी सरकार की विश्वसनीयता अब आपकी कार्रवाई पर निर्भर है।” कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इस पत्र का हवाला देते कहा कि अब प्रधानमंत्री को इस मामले पर अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए। उन्होंने कहा, ”यह उचित ही है कि दोनों सदनों के नेता प्रतिपक्ष ने अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े चंदा चोरी, आस्था धोखा मामले पर प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है। पांच फरवरी, 2020 को लोकसभा में अपनी दुर्लभ उपस्थितियों में से एक के दौरान प्रधानमंत्री ने इस ट्रस्ट की स्थापना की घोषणा करते हुए इसका पूरा श्रेय स्वयं लिया था।”

रमेश का कहना है, ”यही ट्रस्ट आज देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास के साथ विश्वासघात कर चुका है। प्रधानमंत्री जी, चुप्पी तोड़िये।” यह पत्र 18 जुलाई को लिखा गया और इसमें कहा गया, ”लाखों श्रद्धालुओं ने आस्था और विश्वास के साथ अपनी मेहनत की कमाई मंदिर के लिए दान की है और कथित चोरी के आरोपों से वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।”

खरगे और राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने उच्चतम न्यायालय के निर्देश के बाद संसद में ट्रस्ट के गठन की घोषणा की थी, लेकिन इसके सदस्यों की नियुक्ति सरकार द्वारा की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रस्ट के कई सदस्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस), विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और उनसे जुड़े संगठनों से संबद्ध रहे हैं। दोनों नेताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री की चुप्पी स्वीकार्य नहीं है और जवाबदेही सुनिश्चित करना तथा श्रद्धालुओं के विश्वास की रक्षा करना उनकी जिम्मेदारी है।

पत्र में कहा गया है कि जांच में दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों के खिलाफ, उनके पद या प्रभाव की परवाह किए बिना, कार्रवाई की जानी चाहिए। पत्र में कहा गया, ”सरकार और ट्रस्ट की विश्वसनीयता इस बात पर निर्भर करती है कि आप कितनी पारदर्शिता और तत्परता से कार्रवाई करते हैं। देश की जनता देख रही है।”

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संसद का मानसून सत्र: राज्यसभा की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित, अब 21 जुलाई को फिर होगी बैठक

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नई दिल्ली, एजेंसी। राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में हो रहे प्रदर्शन को लेकर विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण राज्यसभा की कार्यवाही को दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई है। अब  21 जुलाई को फिर होगी बैठक होगी। 

प्रश्नपत्र लीक के मुद्दे को लेकर विपक्ष का हंगामा 
सदन की कार्यवाही पहली बार आवश्यक दस्तावेज पटल पर रखे जाने, नवनिर्वाचित सदस्यों के शपथ ग्रहण और शोक-संदर्भों के बाद करीब साढ़े ग्यारह बजे तक स्थगित की गई थी। इसके बाद दोपहर 12 बजे तक, फिर बारह बज कर 50 मिनट तक और फिर दोपहर दो बजे तक कार्यवाही स्थगित की गई। सदन में आवश्यक दस्तावेज पटल पर रखे जाने के बाद विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने नीट-यूजी 2026 प्रश्नपत्र लीक के मुद्दे को उठाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि यह लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा मामला है। खरगे ने कहा, ”हजारों छात्र जंतर-मंतर पहुंचे हैं और उन पर लाठीचार्ज किया गया है।

नौ सदस्यों को सदन की सदस्यता की शपथ दिलाई
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस मुद्दे को दबाने की कोशिश कर रही है। खरगे जब अपनी बात रख रहे थे तभी विपक्षी सदस्य अपनी स्थानों पर खड़े होकर ”शर्म करो, शर्म करो” के नारे लगाने लगे। हंगामे के बीच सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी। इससे पहले पूर्वाह्न 11 बजे राष्ट्रगान के साथ उच्च सदन में मॉनसून सत्र की शुरूआत हुई। सभापति राधाकृष्णन ने बैठक शुरू होने के बाद उच्च सदन के लिए निर्वाचित हुए नौ सदस्यों को सदन की सदस्यता की शपथ दिलाई। 

दिवंगत पूर्व सदस्यों को दी श्रद्धांजलि 
गुजरात से भाजपा के मुकेश भाई जे राठवा, कर्नाटक से कांग्रेस के पवन खेड़ा, मध्यप्रदेश से भाजपा के महेश केवट, मेघालय से एनपीपी के जेम्स पगसाग कोंकल संगमा, मिजोरम से खियांग्टे लालत्लुआंगकीमा, राजस्थान से भाजपा के डॉ सतीश पूनिया, पश्चिम बंगाल से भाजपा के प्रकाश चिक बड़ाइक, सुष्मिता देव और सुखेंदु शेखर राय ने राज्यसभा की सदस्यता की शपथ ली। सभापति ने नए सदस्यों का सदन में स्वागत किया। सदन में दिवंगत पूर्व सदस्यों को श्रद्धांजलि भी दी गई। इस दौरान विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने आसन की अनुमति से अपनी बात रखते हुए कहा कि नीट-यूजी 2026 प्रश्नपत्र लीक का मुद्दा बेहद गंभीर है। उन्होंने कहा कि यह लाखों बच्चों के भविष्य का मामला है। उन्होंने कहा कि हजारों बच्चे जंतर मंतर पर आए, और वहां लाठीचार्ज हो गया। 

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में विपक्ष 
खरगे ने सरकार पर बच्चों को और पेपर लीक के मुद्दे को दबाने का आरोप लगाया। इसी बीच विपक्षी सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया और सभापति ने बैठक 11 बज कर 33 मिनट पर दोपहर बारह बजे तक के लिए स्थगित कर दी। एक बार के स्थगन के बाद दोपहर बारह बजे बैठक शुरू होने पर सदन में वही नजारा था। सभापति ने प्रश्नकाल शुरू कराना चाहा लेकिन विपक्षी सदस्यों ने नीट-यूजी 2026 प्रश्नपत्र लीक मुद्दे पर हंगामा शुरू कर दिया। हंगामा रुकते न देख सभापति ने बैठक साढ़े बारह बजे तक के लिए स्थगित कर दी। दोपहर 12:30 बजे सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर विपक्षी सदस्य जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन और उनके खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में नारेबाजी करने लगे। वे उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी के मुद्दे को लेकर भी नारे लगा रहे थे।

बैठक दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित
द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के सदस्यों ने तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच जल बंटवारे का मुद्दा भी उठाने की कोशिश की तथा सदन के बीच (वेल) में आने का प्रयास किया। हालांकि, सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया। विपक्षी सदस्यों के लगातार हंगामे के बीच सभापति ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बज कर 50 मिनट तक के लिए स्थगित कर दी। बैठक के फिर शुरू होने पर सदन में वही नजारा देखने को मिला। हंगामे के कारण सभापति ने बैठक दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी। साथ ही उन्होंने कहा कि गतिरोध के मुद्दे पर कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में चर्चा होगी। 

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राम मंदिर दान विवाद केस: सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, नई SIT और अनुभवी IPS अधिकारी से कराई जाय जांच

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नई दिल्ली, एजेंसी। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए मिले दान में कथित हेराफेरी और वित्तीय अनियमितताओं के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में एक बेहद महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने शीर्ष अदालत में अपनी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर दी है। यह रिपोर्ट जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ के समक्ष सीलबंद लिफाफे में पेश की गई है। 

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह श्री राम जन्मभूमि मंदिर में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रही SIT के पुनर्गठन के बारे में निर्देश ले। CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि वह चाहेगी कि इस जांच का नेतृत्व कोई ऐसा वरिष्ठ IPS अधिकारी करे जिसे इस तरह की जांच संभालने का अनुभव हो।

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त्रिपुरा के DGP की संदिग्ध मौत, ऑफिस के शौचालय में मिला शव; पुलिस महकमे में मची खलब‍ली

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अगरतला, एजेंसी। भारतीय पुलिस सेवा के वरिष्ठ अधिकारी और त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक (DGP) अनुराग धनखड़ सोमवार को यहां पुलिस मुख्यालय में अपने कार्यालय के शौचालय में मृत मिले। शुरुआती तौर पर इसे आत्महत्या का मामला माना जा रहा है। 

DGP की स्वास्थ्य जांच करने वाले अगरतला सरकारी मेडिकल कॉलेज के प्रो. प्रदीप भौमिक ने बताया कि 48 मिनट तक उन्हें होश में लाने के प्रयासों के बावजूद वे विफल रहे। मौत के कारणों का पता लगाने के लिए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। प्रारंभिक रिपोर्ट से संकेत मिला है कि असामान्य रूप से देर होने के कारण जब उनके अर्दली ने शौचालय जाकर देखा तो उसने धनखड़ को फंदे से लटका पाया। 

मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा वरिष्ठ अधिकारियों के साथ तुरंत पुलिस मुख्यालय और फिर अस्पताल पहुंचे, जहां आगे की मेडिको-लीगल प्रक्रियाएं चल रही हैं। घटना के कारणों और परिस्थितियों की जांच शुरू होने के साथ ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने इलाके को सुरक्षित कर लिया है। मौत के सही कारणों का पता पोस्टमार्टम के बाद ही चलेगा। त्रिपुरा कैडर के 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी अनुराग धनखड़ ने मई 2025 में डीजीपी का पदभार संभाला था। 

डीजीपी के दो वर्ष के तय कार्यकाल के बाद सरकार ने उनके सेवाकाल को एक वर्ष का विस्तार दिया था। वह अगरतला में अपनी पत्नी के साथ रहते थे, जबकि उनका इकलौता बेटा कनाडा में बसा हुआ है। अपने पूरे करियर के दौरान उन्होंने तीन दशकों से अधिक समय तक त्रिपुरा पुलिस में अनुमंडल पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) से लेकर महानिदेशक (खुफिया) तक के विभिन्न पदों पर अपनी सेवाएं दीं। इसके अलावा, उन्होंने कोसोवो में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में भी भाग लिया था और सीबीआई एवं बीएसएफ में भी सेवाएं दी थीं। 

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