वॉशिंगटन डीसी/काराकस, एजेंसी। अमेरिका ने वेनेजुएला के 65 अरब बैरल से ज्यादा तेल भंडार पर कंट्रोल हासिल करने के लिए एक समझौता किया है। यह आंकड़ा इसलिए भी बड़ा है, क्योंकि अमेरिका के पास खुद करीब 46 अरब बैरल तेल है।
भारत से तुलना करें तो देश हर साल करीब 1.6 से 1.7 अरब बैरल कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। इस हिसाब से 65 अरब बैरल तेल भारत के 40 साल के ऑयल इम्पोर्ट के बराबर है।
अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, यह काम वेनेजुएला में काम करने वाली एक निजी कंपनी के साथ मिलकर किया जाएगा। इस साझेदारी से निकलने वाले तेल में अमेरिका को 55% हिस्सा मिलेगा। हालांकि, इस निजी कंपनी का नाम अभी नहीं बताया गया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर इसे दुनिया की सबसे बड़ी डील बताया है। वेनेजुएला की राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने भी इसे ऐतिहासिक समझौता बताया है।
वेनेजुएला में 300 अरब बैरल तेल मौजूद
वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है। वहां 300 अरब बैरल से ज्यादा तेल मौजूद है। ट्रम्प जिस 65 अरब बैरल तेल पर अमेरिकी कंट्रोल की बात कर रहे हैं, वह वेनेजुएला के कुल तेल भंडार का करीब पांचवां हिस्सा है।
वेनेजुएला के पास इतना बड़ा तेल भंडार होने के बावजूद वहां उत्पादन काफी कम है। आर्थिक संकट, निवेश की कमी और अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण उसका तेल उद्योग लंबे समय से मुश्किल में है।
वेनेजुएला के तट पर स्थित एक तेल रिफाइनरी में खड़े टैंकर।
अमेरिका के हिस्से में कितना तेल आएगा
इस डील में सबसे अहम बात अभी भी साफ नहीं है। अमेरिका को वेनेजुएला के 65 अरब बैरल तेल का मालिकाना हक मिलेगा या सिर्फ उसके उत्पादन में बड़ा हिस्सा मिलेगा, यह समझना जरूरी है।
अभी उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अमेरिका को साझेदारी से होने वाले तेल उत्पादन का 55% हिस्सा मिलेगा। लेकिन इस काम में शामिल निजी कंपनी का नाम और समझौते की पूरी शर्तें अभी सामने नहीं आई हैं।
इसलिए 65 अरब बैरल तेल पर अमेरिका का कंट्रोल होने का मतलब यह नहीं है कि पूरा तेल अमेरिका का हो गया है। असल में अमेरिका को कितना अधिकार मिलेगा, यह डील की पूरी शर्तें सामने आने के बाद ही साफ होगा।
100 अरब डॉलर से ज्यादा निवेश
राष्ट्रपति रोड्रिग्ज के मुताबिक, समझौते के तहत वेनेजुएला के 17 तेल क्षेत्रों को दोबारा विकसित किया जाएगा। इसमें 100 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश होने की बात कही गई है।
उनका कहना है कि इस पूरे काम से वेनेजुएला की सरकार को आने वाले समय में करीब 209 अरब डॉलर टैक्स मिल सकता है। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला अपने बड़े तेल भंडार का इस्तेमाल देश के विकास के लिए करना चाहता है।
मादुरो की गिरफ्तारी के बाद बदले रिश्ते
अमेरिका और वेनेजुएला के रिश्ते जनवरी में निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद बदल गए। डेल्सी रोड्रिग्ज के राष्ट्रपति बनने के बाद दोनों देशों में बातचीत बढ़ी और वेनेजुएला का तेल इसका सबसे अहम मुद्दा बन गया।
इसके बाद वेनेजुएला ने तेल उद्योग के नियम बदले। नए नियमों से विदेशी कंपनियों को ज्यादा अधिकार मिले और अमेरिकी कंपनियों के लिए वहां निवेश और तेल उत्पादन बढ़ाने का रास्ता खुल गया।
वेनेजुएला के पास सबसे ज्यादा तेल, फिर भी गरीब
वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था लंबे समय से संकट में है। देश की सरकारी तेल कंपनी कमजोर हुई, तेल उद्योग में निवेश कम हुआ और उत्पादन लगातार गिरा। इसके अलावा अमेरिकी प्रतिबंधों ने भी तेल कारोबार को नुकसान पहुंचाया।
यानी जमीन के नीचे तेल बहुत है, लेकिन उसे निकालने, बेचने और उससे कमाई करने की क्षमता कमजोर हो गई। इसके साथ ही देश में कई साल तक महंगाई, आर्थिक कुप्रबंधन और राजनीतिक अस्थिरता रही। इसका सीधा असर आम लोगों की कमाई और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ा।
इस डील से OPEC को चुनौती
OPEC तेल उत्पादक देशों का समूह है। इसके सदस्य तेल का उत्पादन घटाकर या बढ़ाकर बाजार में सप्लाई को प्रभावित करते हैं। सप्लाई कम हो तो कीमत बढ़ सकती है और ज्यादा तेल आने पर कीमत घट सकती है।
वेनेजुएला भी OPEC का सदस्य है। अगर वेनेजुएला का उत्पादन बढ़ा और बाजार में ज्यादा तेल आया, तो तेल की कीमतों पर गिरावट का दबाव बन सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि डील के तुरंत बाद पेट्रोल-डीजल सस्ता हो जाएगा।
वेनेजुएला में तेल उत्पादन बढ़ाने में समय लगेगा। इसके अलावा ईरान युद्ध, OPEC के फैसले, दुनिया में तेल की मांग और दूसरे देशों का उत्पादन भी कीमत तय करने में बड़ी भूमिका निभाएंगे।
न्यूयॉर्क, एजेंसी। RSS प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में शनिवार रात करीब 42 मिनट स्पीच दी। उन्होंने कहा कि एकता और विविधता भारत के DNA में है। लोग अलग दिखते हैं, उनके रहने के तरीके हैं, लेकिन सभी के बीच एक जन्मजात जुड़ाव है।
भागवत ने कहा- विविधता में एकता भारत की पारंपरिक सोच है और देश समय-समय पर पूरी दुनिया को इसका एहसास कराता रहा है। उन्होंने आगे कहा- सोचने की क्षमता इंसान के लिए एक वरदान है। सही सोच इंसान को भगवान के करीब ले जाती है, जबकि गलत सोच उसे जानवरों के करीब ले जाती है।
न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ कार्यक्रम में 5,000 से ज्यादा भारतीय मूल के अमेरिकी शामिल हुए। इसका आयोजन अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग (AHEAD) ने किया। कार्यक्रम में 30 देशों के 180 धार्मिक नेता पहुंचे थे।
भागवत के भाषण की बड़ी बातें…
धर्म सिर्फ पूजा नहीं, जीवन को संतुलित रखने का नियम
भागवत ने कहा कि भारत में जिस सिद्धांत को धर्म कहा जाता है, उसे सिर्फ धर्म या पूजा के तौर पर नहीं समझना चाहिए। धर्म वह व्यवस्था है जो ब्रह्मांड और जीवन को संभालती है। यह जीवन की अलग-अलग स्थितियों के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद करती है।
सिर्फ भौतिक सुख से जिंदगी में संतुष्टि नहीं मिलती
भागवत ने कहा कि पैसा, सामान और दूसरी भौतिक सुविधाएं हमेशा खुशी नहीं दे सकतीं। भौतिक सुख अस्थायी होता है और बहुत ज्यादा सुविधाएं होने के बावजूद संतुष्टि की कमी रह सकती है।
अमेरिका कर्मभूमि है, उसके प्रति सच्चे रहें
अमेरिका में रहने वाले भारतीयों से भागवत ने कहा कि आपकी पहली जिम्मेदारी अपनी कर्मभूमि के प्रति है, उसके प्रति वफादार रहना चाहिए।
जीवन में सीधे संन्यास नहीं, हर पड़ाव की अपनी जिम्मेदारी
भागवत ने कहा कि इंसान के जीवन में चार चरण होते हैं- ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास। पहले सीखना, फिर परिवार और समाज को संभालना और बाद में अपने अनुभव अगली पीढ़ी को देना जरूरी है।
व्यक्ति, समाज और पर्यावरण साथ आगे बढ़ें
भागवत ने कहा कि प्रगति के लिए न व्यक्ति को दबाना चाहिए और न समाज को। व्यक्ति, समाज और पर्यावरण की भलाई साथ-साथ होनी चाहिए।
कार्यक्रम से जुड़ी तस्वीरें…
भागवत के लिए भारतीय प्रवासियों ने पारंपरिक लोकगीत गाए।
मैडिसन स्क्वायर गार्डन में RSS चीफ भागवत के संबोधन से पहले बड़ी संख्या में लोग जुटे।
मैडिसन स्क्वायर गार्डन के बाहर भारतीय महिलाओं ने पुरुषों को राखी बांधी।
मैडिसन में संबोधन से पहले टाइम्स स्क्वायर के बिलबोर्ड पर भागवत की तस्वीरें दिखाई गईं।
बिश्केक/नई दिल्ली, एजेंसी। उज्बेकिस्तान के दौरे पर गए पीएम मोदी को रविवार को राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव ने अपने देश के सर्वोच्च राज्य सम्मान ‘ओली दाराजली दोस्लिक’ से सम्मानित किया।
उज्बेक भाषा के इस शब्द का मतलब है- उच्च स्तरीय मित्रता। यह पीएम मोदी को मिला 36वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान है।
मोदी-शावकत के बीच द्विपक्षीय बैठक, यूरेनियम पर बातचीत
मोदी-शावकत के बीच ताशकंद में द्विपक्षीय बैठक हुई। बैठक में भारत-उज्बेकिस्तान के बीच यूरेनियम सप्लाई पर चर्चा हुई।
दोनों देशों ने 2030 तक सालाना द्विपक्षीय व्यापार को 5 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। अभी दोनों देशों के बीच व्यापार 1 अरब डॉलर से ज्यादा है। बैठक के बाद पीएम ने मीडिया को संबोधन किया।
पीएम के संबोधन की बड़ी बातें…
दोनों देश रक्षा क्षेत्र में सीधा सहयोग, मिलकर हथियारों का उत्पादन और नई तकनीक विकसित करेंगे।
आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद को दोनों देश क्षेत्र के लिए गंभीर खतरा मानते हैं।
इन खतरों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति जारी रखने पर दोनों की सहमति है।
भारत और उज्बेकिस्तान के रिश्तों की मजबूत नींव साझी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत है।
मोदी का उज्बेकिस्तान दौरा
30 अगस्त- दूसरा दिन
राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव ने पीएम का स्वागत किया। जिसके बाद दोनों देशों के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत शुरू हुई।
मोदी और शावकत मिर्जियोयेव के बीच यूरेनियम सप्लाई समेत कई मुद्दों पर बातचीत हुई।
पीएम मोदी ने ताशकंद में योग फेडरेशन ऑफ उज्बेकिस्तान की ओर से आयोजित योग सत्र में हिस्सा लिया।
पीएम मोदी ने योग सेशन के दौरान एक शख्स को योग करने का सही तरीका बताया।
पीएम मोदी ने योग सेशन के बाद पार्टिसिपेंट के साथ एक सेल्फी वीडियो भी रिकॉर्ड किया।
29 अगस्त- पहला दिन
ताशकंद में पीएम नरेंद्र मोदी भारतीय समुदाय के लोगों से मिले। इस दौरान कुछ महिलाओं ने पीएम मोदी की कलाई पर राखी बांधी।
पीएम मोदी को एयरपोर्ट पर गॉर्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
पीएम मोदी ताशकंद एयरपोर्ट से राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के साथ एक ही कार में बैठकर निकले।
मोदी उज्बेकिस्तान के सबसे मशहूर यांगी उज्बेकिस्तान पार्क पहुंचे। उन्होंने स्मारक स्तंभ के बाहर तस्वीर खिंचवाई।
31 अगस्त को पीएम किर्गिस्तान जाएंगे: SCO समिट में शामिल होंगे
उज्बेकिस्तान दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर तक किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में रहेंगे। यहां वे SCO की 26वीं समिट में हिस्सा लेंगे।
भारत 2017 से SCO का पूर्ण सदस्य है। समिट में सुरक्षा, आतंकवाद, व्यापार, कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।
समिट के दौरान मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य देशों के नेताओं से मुलाकात हो सकती है।
मोदी बिश्केक में होने वाले 6वें वर्ल्ड नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में भी शामिल होंगे।
किर्गिस्तान में मोदी के लिए गुजराती खाना, थेपला, खिचड़ी और कढ़ी बनेगी
किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में गांधी रेस्टोरेंट के हेड शेफ चिन्मय बडोदेकर ने बताया कि PM मोदी का स्वागत करते हुए कहा कि उनके लिए घर जैसा ताजा गुजराती खाना तैयार किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि नाश्ते में पोहा, उपमा और इडली-सांभर रखा जाएगा। लंच में थेपला, दाल-चावल और गुजराती सब्जियां परोसी जाएंगी। वहीं डिनर में PM मोदी के लिए खिचड़ी-कढ़ी बनाई जाएगी।
भारत के लिए क्यों अहम है यह दौरा
1. खनिजों का भंडार: भारत लंबे समय से मध्य एशिया के देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। मध्य एशिया तेल, गैस, यूरेनियम और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों का बड़ा भंडार है।
2. ऊर्जा जरूरत: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए इस क्षेत्र के देशों के साथ सहयोग बढ़ाना चाहता है।
3. नए बिजनेस रूट: भारत मध्य एशिया के देशों के साथ व्यापार भी बढ़ाना चाहता है। इसके लिए वह नए व्यापार और परिवहन मार्ग विकसित करने पर काम कर रहा है।
4. आतंकवाद के खिलाफ मुहिम: अफगानिस्तान की स्थिति और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर भी भारत इन देशों के साथ सहयोग बढ़ा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी के पिछले 3 उज्बेकिस्तान दौरे
यह तस्वीर पीएम मोदी के 2022 के उज्बेकिस्तान दौरे की है। तब समरकंद में SCO समिट का आयोजन किया गया था।
2015: प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी पहली बार उज्बेकिस्तान पहुंचे थे। इस दौरे में दोनों देशों ने व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया था।
2016: मोदी ताशकंद में SCO समिट में शामिल हुए थे। इसी सम्मेलन के दौरान भारत को संगठन की पूर्ण सदस्यता देने की प्रक्रिया आगे बढ़ी थी। भारत 2017 में SCO का पूर्ण सदस्य बना।
2022: मोदी समरकंद में SCO समिट में शामिल हुए थे। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच उन्होंने रूसी राष्ट्रपति पुतिन से कहा था, ‘आज का युग युद्ध का नहीं है।’ उनका यह बयान दुनियाभर में चर्चा का विषय बना था।
अब SCO के बारे में जानिए, 2001 में हुई थी इसकी स्थापना
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक क्षेत्रीय अंतरराष्ट्रीय संगठन है जिसकी स्थापना 2001 में चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गीजस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने मिलकर की थी। बाद में भारत और पाकिस्तान 2017 में इससे जुड़े। 2023 में ईरान भी इसका सदस्य बना।
SCO का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सुरक्षा, आर्थिक और राजनीतिक सहयोग को बढ़ाना है। संगठन आतंकवाद, उग्रवाद, ड्रग तस्करी और साइबर अपराध जैसे मुद्दों पर साझा रणनीति बनाता है।
काठमांडू/नई दिल्ली, एजेंसी। नेपाल में बाढ़ के बाद हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में फंसे कर्मचारियों को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन तेज कर दिया गया है। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 898 कर्मचारी अब भी फंसे हैं, जबकि 361 कर्मचारियों को अब तक बचाया जा चुका है।
त्रिशूली-3 ‘ए’ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन में कुछ कामयाबी मिली है। बचावकर्मी मशीनों की मदद से मिट्टी और गाद हटा रहे हैं। सुरंग में 6 इंच का छेद कर पाइप के जरिए हवा पहुंचाई जा रही है।
अब इसे बड़ा कर मैनहोल बनाने की तैयारी है, ताकि बचाव दल सुरंग के अंदर जाकर लोगों की तलाश कर सके।
26 अगस्त को नेपाल की भोटेकोशी और त्रिशुली नदी में अचानक बाढ़ आ गई थी। इस आपदा में नेपाल में अब तक 788 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, तिब्बत में मरने वालों का आंकड़ा 16 पहुंच गया है।
बाढ़ के बाद तबाही का मंजर
नेपाल के देवीघाट में त्रिशूली नदी के किनारे बाढ़ में तबाह हुए घरों का एरियल व्यू।
नुवाकोट में घरों की छतों के ऊपर से बाढ़ का पानी और मलबा गुजरने के निशान दिखाई दे रहे हैं।
रसुवा से रेस्क्यू लोगों को एयरलिफ्ट करने वाले बैरक के बाहर लापता परिजन का इंतजार करती महिला रो पड़ी।
नुवाकोट के देविघाट में बाढ़ से तबाह घर में सामान तलाशने के बाद बच्ची का पैर कीचड़ से सना नजर आया।
नेपाल बाढ़ में मरने वालों की संख्या 788 पहुंची
नेपाल पुलिस के मुताबिक, रविवार शाम तक 788 शव बरामद किए जा चुके हैं। इसके अलावा 2,502 लोग लापता हैं।
NDRRMA के मुताबिक, लापता लोगों में 933 क्षेत्रीय जलविद्युत प्रोजेक्ट्स के कर्मचारी शामिल हैं। इसके अलावा 592 विदेशी नागरिक और विदेशी समूहों के साथ यात्रा कर रहे 127 नेपाली नागरिकों का भी अब तक पता नहीं चल पाया है।
20 साल की युवती ने 17 परिजनों को खोया
नेपाल के रसुवा जिले की 20 वर्षीय कोपिला तामांग ने बाढ़ में अपने परिवार के 17 सदस्यों को खो दिया। 2015 के भूकंप में उनका घर तबाह हुआ था, लेकिन इस बार बाढ़ उनके नए घर के साथ मां, बहन, दादी और एक महीने के भतीजे समेत कई परिजनों को भी बहा ले गई।
कोपिला ने CNN से कहा, “मैं खुद को बिल्कुल अकेला और खोया हुआ महसूस करती हूं।” उनका 7 साल का भाई अब भी मानता है कि उनकी मां वापस आएंगी।
नेपाल में 26 अगस्त को बाढ़ आई थी तब कोपिला तामांग काठमांडू में थी।
त्रिशूली-3 ‘ए’ सुरंग के अंदर जाने का रास्ता मिला
त्रिशूली-3 ‘ए’ प्रोजेक्ट की सुरंग में फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए बचाव अभियान जारी है। रेस्क्यू टीम सुरंग के एक दूसरे रास्ते से अंदर जाने की कोशिश कर रही है।
टीम को सुरंग का ऊपरी हिस्सा मिल गया है। उसे खोलने के लिए मशीनों से खुदाई की जा रही है। रास्ता साफ और सुरक्षित होने के बाद रेस्क्यू टीम सुरंग के अंदर जाएगी और तलाश अभियान आगे बढ़ाएगी।
त्रिशूली-3 ‘ए’ सुरंग में फंसे लोगों तक पहुंचने की उम्मीद बढ़ी, चार छेद किए गए
त्रिशूली-3 ‘ए’ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में चल रहे बचाव अभियान में कुछ सफलता मिली है।
अब तक सुरंग के सामने वाले हिस्से में चार छेद किए जा चुके हैं। अब इसी रास्ते से सुरंग के अंदर जाकर फंसे लोगों की तलाश और उन्हें बाहर निकालने का काम आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।
नेपाल की मदद के लिए कई देश आगे आए
नेपाल के विदेश मंत्री ने कहा है कि भीषण बाढ़ से हुए नुकसान का आंकड़ा अरबों डॉलर तक पहुंच सकता है। हालांकि, उन्होंने कहा कि इस स्तर पर नुकसान का अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी। इस बीच कई देशों ने नेपाल के लिए आर्थिक और मानवीय मदद का ऐलान किया है।
भारत: विदेश मंत्री एस. जयशंकर के मुताबिक, भारत से राहत सामग्री लेकर तीसरी उड़ान शुक्रवार को काठमांडू पहुंची। इसमें 10 टन मानवीय सहायता के साथ 11 सदस्यीय मेडिकल और सुरंग बचाव टीम भी शामिल थी।
ब्रिटेन: प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने 50 लाख पाउंड की मदद का ऐलान किया है। उन्होंने नेपाल की स्थिति को बेहद चिंताजनक और भयावह बताया।
यूरोपीय संघ: यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने 20 लाख यूरो की तत्काल मानवीय सहायता देने की घोषणा की है। इस मदद का इस्तेमाल लोगों तक जरूरी राहत सामग्री पहुंचाने में किया जाएगा।
कनाडा: विदेश मंत्री अनिता आनंद ने 50 लाख कनाडाई डॉलर की मदद का ऐलान किया है। यह राशि संयुक्त राष्ट्र, रेड क्रॉस और अन्य गैर-सरकारी संगठनों के जरिए राहत कार्यों में खर्च की जाएगी।
अमेरिका: अमेरिकी विदेश विभाग ने 5 लाख डॉलर की मदद देने की घोषणा की है। इससे आपातकालीन आश्रय, पानी, स्वच्छता और दूसरी जरूरी राहत सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।
चीन: नेपाल में चीन के राजदूत के मुताबिक, चीन ने भी आपातकालीन राहत सामग्री और आर्थिक मदद उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है।
तिब्बत सीमा के पास बनी झील का पानी निकला
नेपाल-चीन सीमा के पास बाढ़ के बाद बनी झील का ज्यादातर पानी प्राकृतिक रास्ते से निकल गया है। चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने रविवार को कहा कि इससे निचले इलाकों में अचानक बड़ी बाढ़ आने का खतरा फिलहाल कम हो गया है।
यह झील पिछले बुधवार को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद बनी थी। लांगटांग री पर्वत क्षेत्र में ग्लेशियर और चट्टानों का बड़ा हिस्सा टूटकर नदी में गिर गया था, जिससे नदी का बहाव रुक गया और वहां पानी जमा होकर झील बन गई।
चीन के मुताबिक, झील में करीब 20 लाख घन मीटर पानी जमा था। आशंका थी कि प्राकृतिक बांध टूटने पर नेपाल और चीन के निचले इलाकों में फिर बड़ी बाढ़ आ सकती है। इसी वजह से दोनों देशों की एजेंसियां लगातार झील की निगरानी कर रही थीं।
तिब्बत में क्या हो रहा है, इसकी जानकारी मिलना इतना मुश्किल क्यों है?
चीन ने 1950 के दशक में तिब्बत को अपने नियंत्रण में ले लिया था। तब से तिब्बत चीन के सबसे ज्यादा निगरानी वाले और कड़े नियंत्रण वाले इलाकों में शामिल है।
बाढ़ की इस आपदा को चीन सरकार कितनी गंभीरता से ले रही है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने खुद राहत और बचाव के लिए निर्देश दिए हैं। प्रधानमंत्री ली छियांग भी गुरुवार को घटनास्थल पर पहुंचे। किसी बड़ी आपदा के तुरंत बाद उनका इस तरह मौके पर पहुंचना काफी दुर्लभ माना जाता है।
तिब्बत में पहुंचना विदेशी लोगों के लिए आसान नहीं है। वहां जाने के लिए विशेष वीजा की जरूरत होती है और विदेशी मीडिया के लिए वहां प्रवेश करना बेहद मुश्किल है। वहां मौजूद लोगों से सीधे संपर्क करना भी आसान नहीं है।
नेपाल से तिब्बत होते हुए पवित्र कैलाश पर्वत की यात्रा करने वाले तीर्थयात्रियों के लिए भी कई तरह की मंजूरियां जरूरी होती हैं। उन्हें कुल चार अलग-अलग परमिट लेने पड़ते हैं। यही वजह है कि तिब्बत में इस समय वास्तव में क्या हो रहा है, इसकी स्वतंत्र जानकारी जुटाना मुश्किल है।
भारत ने नेपाल के लिए 68.5 टन राहत सामग्री भेजी
नेपाल ने बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों को दोबारा जोड़ने के लिए भारत और चीन से कुल 42 बेली ब्रिज बनाने में मदद मांगी है।
भारत ने अब तक 68.5 टन राहत सामग्री भेजी है। इसके साथ ही सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए टनल विशेषज्ञों, फोरेंसिक एक्सपर्ट्स और तकनीकी टीमों को भी नेपाल भेजा गया है।
भारत ने कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, हाइजीन किट समेत राहत सामग्री उपलब्ध कराई है। इसके अलावा 230 फीट लंबे बेली ब्रिज बनाने के लिए सामान भी नेपाल पहुंचाए गए हैं। भारत जल्द ही 7 और बेली ब्रिज के लिए सामान और टेक्निकल टीम भेजेगा।
‘चाय के लिए नहीं रुकते तो जान जा सकती थी’
तीर्थयात्री गडा एलावेनी ने ANI को बताया कि वे तीन बसों में काठमांडू से सफर कर रहे थे। रास्ते में सभी लोग चाय पीने के लिए कुछ देर के लिए रुक गए। यह रुकना बाद में उनकी जिंदगी का सबसे अहम फैसला साबित हुआ। उन्हें बाद में पता चला कि उनसे करीब आधे घंटे पहले निकली दो बसें बाढ़ की तेज धारा में बह गईं और उनका कोई पता नहीं चला।
एलावेनी ने कहा कि उन्हें बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि रास्ते में इतनी बड़ी आपदा आने वाली है। उन्होंने कहा, “हमने कभी नहीं सोचा था कि हमारे साथ ऐसा होगा। खैर, हमें दर्शन नहीं मिले, लेकिन भगवान हमें सुरक्षित घर ले आए।” उन्होंने बताया कि उन्होंने काठमांडू से करीब 80 किलोमीटर का सफर तय किया था और तीनों बसों में सवार सभी लोग सुरक्षित हैं।
नेपाल में बाढ़ के बाद मलबे में दबा सोलर पावर प्लांट