देश
पीएम बोले- TMC सुन ले, CAA मोदी की गारंटी है:ममता घुसपैठियों का स्वागत और हिंदू अल्पसंख्यकों का विरोध करती हैं
बिष्णुपुर, एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार (19 मई) को पश्चिम बंगाल के पुरुलिया, बिष्णुपुर और मेदिनीपुर में जनसभाएं कीं।
मेदिनीपुरी में पीएम ने कहा कि कि TMC घुसपैठियों का स्वागत करती है, लेकिन उन हिंदू अल्पसंख्यकों का विरोध करती है जो दूसरे देशों (पाकिस्तान-बांग्लादेश) से प्रताड़ित होकर भारत आए हैं। अभी 4 दिन पहले 300 से ज्यादा शरणार्थियों को नागरिकता देकर एक नई शुरुआत की गई है। मैं TMC से कहना चाहता हूं, ध्यान से सुन लें… CAA मोदी की गारंटी है।
पीएम ने कहा कि मैंने वादा किया था कि मैं इन शरणार्थी परिवारों को नागरिकता दूंगा। वे हमसे उम्मीद लगाए हुए हैं, लेकिन TMC शरणार्थियों और CAA का विरोध कर रही है। CAA लागू नहीं होने की बात कहते हैं। TMC, कांग्रेस और लेफ्ट दीवार पर लिखकर रख लें, जब तक मोदी जिंदा हैं, वे ऐसा नहीं कर पाएंगे कुछ भी।
पुरुलिया-विष्णुपुर-मेदिनीपुर में मोदी के भाषण की 8 मुख्य बातें
- TMC हो, कांग्रेस या लेफ्ट हो, ये तीनों पार्टियां अलग-अलग दिखती हैं, लेकिन उनके पाप एक जैसे ही हैं। इसलिए इन्होंने मिलकर INDI गठबंधन बनाया है। इन पार्टियों ने गरीब, मजदूर, SC-ST, महिला को हमेशा नारे दिए हैं। जहां भी इन्होंने सरकार चलाई, उन राज्यों को गरीब बनाकर छोड़ दिया।
- TMC, कांग्रेस और लेफ्ट का मॉडल विकास पर आधारित नहीं है। वे कुशासन, भ्रष्टाचार, तुष्टिकरण और वंशवादी राजनीति (परिवारवाद) के मॉडल पर काम करते हैं। मैं अब कह रहा हूं कि भ्रष्टाचारियों को जेल से बाहर नहीं रहने दूंगा। मोदी आपको एक और गारंटी दे रहा है। 4 जून के बाद जब हम नई सरकार बनाएंगे, भ्रष्ट लोगों को अपना पूरा जीवन जेल में बिताना होगा।
- TMC ये कहकर राजनीति में आई थी कि मां, माटी, मानुष की रक्षा करेगी। आज TMC मां, माटी और मानुष का ही भक्षण कर रही है। बंगाल की महिलाओं का भरोसा TMC से टूट गया है।
- TMC के तुष्टीकरण ने बंगाल की जनसांख्यिकी को बिगाड़ दिया है। सामाजिक व्यवस्था को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है। हिंदू कई इलाकों में अल्पसंख्यक हो गए हैं, दलितों और पिछड़ों की जमीन पर कब्जा कर रहे हैं।
- संदेशखाली में जो पाप हुआ है, उसने पूरे बंगाल की बहनों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। शाहजहां शेख को बचाने के लिए टीएमसी संदेशखाली की बहनों के चरित्र पर सवाल उठा रही है। जिस तरह की भाषा TMC के लोग महिलाओं के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। बंगाल की बेटियां अपने वोट से टीएमसी को तबाह करके जवाब देंगी।
- TMC ने पैसे कमाने की भूख में आपके (जनता) बच्चों को भी नहीं छोड़ा है। शिक्षक भर्ती घोटाले ने युवाओं के साथ ही आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी दांव पर लगा दिया है। गरीब मां-बाप ने घर-जमीन बेचकर, कर्ज लेकर TMC के मंत्रियों को घूस दी। आज वे सभी नौजवान सड़कों पर हैं। आखिर इनका क्या कसूर था?
- मोदी को अपने लिए कुछ नहीं करना है। न मुझे अपने किसी भतीजे के लिए कुछ करना है और न ही मुझे किसी भाई के लिए कुछ छोड़ना है। मुझे बांकुरा के जंगलों में रहने वाले लोगों के लिए काम करना है।
- टीएमसी कांप रही है क्योंकि उसे लगता है कि अब उसका समय खत्म हो गया है। अपनी हताशा में TMC नेताओं ने इस्कॉन, रामकृष्ण मिशन और भारत सेवाश्रम संघ जैसे प्रतिष्ठित संगठनों को गालियां देना शुरू कर दिया है।
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Citroen Cars Discount : कार खरीदने का शानदार मौका! Citroen ने इन गाड़ियों पर किया डिस्काउंट का ऐलान
मुंबई, एजेंसी। Citroen ने अपने ग्राहकों के लिए चुनिंगा गाड़ियों पर डिस्काउंट का ऐलान किया है। ये डिस्काउंट मॉडल के आधार पर दिए जाएंगे और ग्राहक इसका फायदा 30 जून तक उठा सकते हैं। डिटेल में जानते हैं इन डिस्काउंट के बारे में-

Citroen Basalt
Basalt कूप-SUV पर इस महीने 1.4 लाख रुपये तक का डिस्काउंट मिल रहा है। इसमें 82hp, 115Nm वाला 1.2-लीटर नैचुरली एस्पिरेटेड (NA) पेट्रोल इंजन या 110hp, 190Nm वाला 1.2-लीटर टर्बोचार्ज्ड पेट्रोल इंजन मिलता है। NA इंजन के साथ 5-स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन मिलता है, जबकि टर्बो-पेट्रोल इंजन 6-स्पीड मैनुअल या 6-स्पीड ऑटोमैटिक गियरबॉक्स के साथ आता है। ऑटोमैटिक गियरबॉक्स के साथ, टर्बो-पेट्रोल इंजन 205Nm का ज़्यादा टॉर्क देता है। मार्केट में इसकी कीमत 8.55 लाख रुपये से 13.75 लाख रुपये की के बीच है।

Citroen Aircross
Citroen Aircross पर कंपनी इस महीने 1.4 लाख रुपये तक का डिस्काउंट दे रही है। अपने सेगमेंट में यह एकमात्र 7 सीटर एसयूवी है। इसकी कीमत 8.89 लाख रुपये से 13.99 लाख रुपये तक जाती है।
Citroen C3
Citroen C3 की खरीदी करने पर आप 1.1 लाख रुपए तक की बचत कर सकते हैं। इसकी कीमत 4.99 लाख रुपये से 9.60 लाख रुपये के बीच की है।
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Tata के iPhone प्लांट पर पर्यावरण नियमों के उल्लंघन का आरोप, बंद हो सकती है फैक्ट्री
मुंबई, एजेंसी। भारत में iPhone निर्माण से जुड़े एक प्रमुख संयंत्र को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। तमिलनाडु के होसुर स्थित टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के प्लांट पर आसपास की कृषि भूमि और भूजल को प्रदूषित करने के आरोप लगे हैं। मामले की जांच के बाद राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कंपनी से जवाब मांगा है और संतोषजनक स्पष्टीकरण न मिलने पर फैक्ट्री बंद करने तक की चेतावनी दी है।
यह प्लांट Apple के iPhone के लिए बैक पैनल और अन्य महत्वपूर्ण पुर्जों का निर्माण करता है। पिछले कई महीनों से प्लांट के आसपास के किसानों ने शिकायत की थी कि फैक्ट्री से निकलने वाला अपशिष्ट जल के कारण उनकी खेती और जल स्रोत को प्रभावित कर रहा है। किसानों की शिकायत के बाद राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जांच शुरू की और अब मामला गंभीर रूप ले चुका है।

जांच के दौरान बोर्ड ने नोटिस में कहा कि फैक्ट्री परिसर के एक तालाब से निकला पानी आसपास के कृषि क्षेत्रों तक पहुंचा, जिससे भूजल प्रदूषण की आशंका पैदा हुई। बोर्ड ने यह भी आरोप लगाया कि दिसंबर 2025 में जारी निर्देशों के बावजूद कंपनी ने जरूरी सुधारात्मक कदम नहीं उठाए। इसी वजह से मई में जारी नोटिस में पूछा गया कि आखिर क्यों न यूनिट की बिजली आपूर्ति काट दी जाए और संचालन बंद कर दिया जाए। यह चेतावनी टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है।
टाटा ने आरोपों को किया खारिज
वहीं, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने इन सभी आरोपों को खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि उसने एक मान्यता प्राप्त स्वतंत्र प्रयोगशाला द्वारा कराई गई जांच में संयंत्र को सभी पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप पाया गया है। कंपनी ने दावा किया है कि वह पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों के हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है तथा प्रदूषण नियंत्रण अधिकारियों को अपना जवाब सौंप चुकी है।
पर्यावरण और उद्योग के बीच संतुलन की चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। एक तरफ भारत वैश्विक कंपनियों के लिए उत्पादन केंद्र बनने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय समुदायों और किसानों की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अब सभी की नजर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के बीच होने वाली आगे की कार्रवाई पर टिकी है।
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स्मार्टफोन की बिक्री में 35% की बड़ी गिरावट, कीमत बढ़ने से मांग पर दबाव
नई दिल्ली, एजेंसी। देश में स्मार्टफोन की बढ़ती कीमतों का असर अब बिक्री पर साफ दिखाई देने लगा है। रिटेलरों का कहना है कि मई में मोबाइल की बिक्री में सालाना आधार पर रिकॉर्ड 30-35 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसकी वजह यह है कि मेमरी चिप की बढ़ती लागत की भरपाई के लिए कंपनियां नवंबर 2025 से लगातार कीमतों में बढ़ोतरी कर रही हैं। अभी कुल बिक्री में से 60 प्रतिशत हिस्सा ऑफलाइन का है, जबकि 40 प्रतिशत बिक्री ऑफलाइन के जरिए होती है। कुल मिलाकर ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह की बिक्री में भारी गिरावट आएगी।

काउंटरपॉइंट रिसर्च के अनुसार मई में शिपमेंट में सालाना आधार पर 15-20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। जून में भी इसी तरह की कमजोरी बने रहने की संभावना जताई गई है। साल 2026 की पहली तिमाही में मोबाइल शिपमेंट में गिरावट 3 प्रतिशत रही थी लेकिन दूसरी तिमाही में यह गिरावट 15 प्रतिशत से ज्यादा रहने का अनुमान है।
रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी और मई के बीच स्मार्टफोन की औसत कीमत में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह बढ़ोतरी पिछले साल हुई कीमतों में वृद्धि के अलावा है। रिटेलरों का कहना है कि कीमतें बढ़ने के बाद से कुछ मामलों में कुल असर 40-45 प्रतिशत तक रहा है।
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