देश
NDA गठबंधन:मोदी को NDA का नेता चुना गया, बैठक में 16 पार्टियों के 21 नेता शामिल; राष्ट्रपति ने लोकसभा भंग की
नई दिल्ली, एजेंसी। लोकसभा चुनाव के बाद अब सरकार बनाने की कवायद शुरू हो गई है। इसी सिलसिले में बुधवार को NDA की पहली बैठक पीएम आवास में शाम 4 बजे हुई। एक घंटे चली बैठक में मोदी को एनडीए का नेता चुना गया।
बैठक में 16 पार्टियों के 21 नेता शामिल हुए। सूत्रों के मुताबिक, 7 जून को एनडीए के सांसदों की बैठक के बाद राष्ट्रपति को सरकार बनाने का दावा पेश किया जाएगा। राजनाथ सिंह, अमित शाह और जेपी नड्डा को सभी सहयोगी दलों के साथ वन-टू-वन बात करने और नई सरकार के स्वरूप पर चर्चा करने की जिम्मेदारी दी गई है।
इस बीच पीएम मोदी के इस्तीफे और कैबिनेट को भंग करने की सिफारिश के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने लोकसभा को भंग कर दिया।
NDA के साथियों ने मंत्रालयों की लिस्ट सौंपी, टीडीपी ने 6 मंत्रालय और स्पीकर पद मांगा
सूत्रों के मुताबिक, टीडीपी ने 6 मंत्रालयों समेत स्पीकर पद की मांग की। वहीं, JDU ने 3, चिराग ने 2 (एक कैबिनेट, एक स्वतंत्र प्रभार), मांझी ने एक, शिंदे ने 2 ( एक कैबिनेट, एक स्वतंत्र प्रभार) मंत्रालयों की मांग की है। वहीं, जयंत ने कहा है कि हमें इलेक्शन के पहले एक मंत्री पद देने का वादा किया गया था। इसी तरह अनुप्रिया पटेल भी एक मंत्री पद चाहती हैं।
लोकसभा चुनाव में भाजपा को 240 सीटें मिली हैं। यह बहुमत के आंकड़े (272) से 32 सीटें कम हैं। हालांकि NDA ने 292 सीटों के साथ बहुमत के आंकड़े को पार कर लिया।
चंद्रबाबू की TDP 16 सीटों के साथ दूसरी और नीतीश की JDU 12 सीटों के साथ NDA में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई है। दोनों ही पार्टियां इस वक्त भाजपा के लिए जरूरी हैं। इनके बिना भाजपा का सरकार बनाना मुश्किल है।

पीएम मोदी बुधवार दोपहर 2 बजे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिले।
देश
बंगाल में 5% वोट बढ़े, तो बीजेपी नंबर-1 बनेगी:मुस्लिम एकजुट हुए, तो असम फिसल जाएगा, 5 राज्यों में बीजेपी का दांव पर क्या लगा
नई दिल्ली,एजेंसी। अगर पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के 5% वोटर खिसके, तो बीजेपी नंबर-1 पार्टी बन सकती है। लेकिन अगर असम के 34% मुस्लिम एकजुट हो गए, तो हिमंता बिस्व सरमा की सरकार का लौटना मुश्किल हो जाएगा।
अगले 30 दिनों में भारत के 4 राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। आखिर इन पांचों प्रदेशों में बीजेपी का दांव पर क्या लगा है…

- 2015 में मध्यप्रदेश के नेता कैलाश विजयवर्गीय को बीजेपी ने महासचिव बनाया और जिम्मेदारी दी पश्चिम बंगाल की। उस वक्त बंगाल में बीजेपी के सिर्फ 2 सांसद थे और विधायक जीरो।
- 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 42 में से 18 सीटें जीत लीं। 2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 38% वोटों के साथ रिकॉर्ड 77 सीटें जीती। TMC को 48% वोटों के साथ 215 सीटें मिलीं। बीजेपी विपक्ष में बैठी।
- 2026 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी सरकार बनाने के सबसे करीब है। पश्चिम बंगाल में मुकाबला दो पार्टियों के बीच है। अगर बीजेपी ने TMC का 5% वोट भी अपने पाले में कर लिया, तो वह नंबर-1 बन सकती है।
- 2021 के चुनाव में बीजेपी ने 38 सीटें 5% के मार्जिन से और 75 सीटें 10% के मार्जिन से हारी थीं। ऐसे में बीजेपी इन्हीं सीटों पर टारगेट करेगी।

- अगर बीजेपी ने TMC के 5% वोट खींच लिए तो 10% के मार्जिन से हारी सीटें बीजेपी जीत सकती है। इस हिसाब से उसकी कुल सीटें 75+77 यानी 152 हो जाएंगी और इसी के साथ नंबर-1 पार्टी बन जाएगी।
- इलेक्शन एनालिस्ट अमिताभ तिवारी मानते हैं कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी ममता बनर्जी को चुनौती दे सकती हैं। एंटी-इनकम्बेंसी, बेरोजगारी और स्थानीय असंतोष से ममता की TMC के लिए मुकाबला और कठिन बन सकता है।

- 2015 में कांग्रेस के पॉपुलर लीडर हिमंता बिस्व सरमा ने बीजेपी जॉइन की। अगले साल हुए असम विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट और असम गण परिषद से गठबंधन किया। नतीजे आए तो NDA को 126 में से 86 सीटें मिलीं।
- बीजेपी ने अकेले 60 सीटें जीतीं। पहली बार नॉर्थ-ईस्ट के किसी राज्य में बीजेपी की सरकार बनी। वरिष्ठता के हिसाब से सर्बानंद सोनोवाल मुख्यमंत्री बने।
- बीजेपी ने नॉर्थ-ईस्ट में पैर जमाने और बाहरी पार्टी का टैग हटाने के लिए मई 2016 में रीजनल पार्टियों के साथ नया गठबंधन ‘नॉर्थ-ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस’ यानी NEDA बनाया। हिमंता इसके संयोजक बने।
- 2021 में बीजेपी को लगातार दूसरी बार बहुमत मिला। इस बार हिमंता सीएम बने। आज हिमंता नॉर्थ-ईस्ट में बीजेपी का सबसे बड़ा चेहरा हैं और पार्टी आलाकमान के नजदीकी माने जाते हैं।
- 2026 के चुनाव में बीजेपी हिमंता के चेहरे पर हैट्रिक की तैयारी में है। यहां हार का मतलब होगा- नॉर्थ-ईस्ट में बीजेपी की पकड़ ढीली पड़ना। क्योंकि असम ही नॉर्थ-ईस्ट का प्रवेश द्वार और सबसे बड़ा राज्य है। यहीं बीजेपी सबसे ज्यादा मजबूत है।
- 2011 की जनगणना के मुताबिक असम में 34% मुस्लिम हैं। अगर मुस्लिमों का वोट कांग्रेस और बदरुद्दीन अजमल की AIUDF की पार्टी में बंट गया, तो इससे बीजेपी को फायदा होगा। लेकिन अगर ये वोटर्स एकजुट होकर कांग्रेस के साथ चले गए तो मुकाबला कड़ा हो जाएगा।
- इसके लिए बीजेपी बांग्लादेश घुसपैठ का मुद्दा उठा रही है। हिमंता ने भी एग्रेसिव हिंदू लीडर की छवि बनाई है।

- तमिलनाडु की राजनीति दशकों से दो द्रविड़ ध्रुवों- DMK और AIADMK के इर्द-गिर्द घूमती रही है। ‘हिंदी भाषी’ और ‘उत्तर भारतीय पार्टी’ की छवि के कारण बीजेपी की राह हमेशा कठिन रही।
- बीजेपी ने 2001 में DMK के साथ चुनाव लड़ा, तो 4 सीटें जीतीं। लेकिन सरकार AIADMK की जे. जयललिता ने बनाई।
- कुछ साल बाद बीजेपी और AIADMK का गठजोड़ हुआ। इसके चलते 2021 में बीजेपी को फिर से 4 सीटें मिलीं, लेकिन सत्ता DMK के एमके स्टालिन ने संभाली।
- चुनाव के बाद बीजेपी ने पूर्व IPS अधिकारी के. अन्नामलाई को प्रदेश अध्यक्ष बनाया। उन्होंने एग्रेसिव स्ट्रैटजी अपनाई। कुछ समय बाद बीजेपी और AIADMK अलग हो गए।
- वहीं अन्नामलाई ने ‘एन मन, एन मक्कल’ यानी ‘मेरी भूमि, मेरे लोग’ पदयात्रा से हर जिले में बीजेपी का झंडा पहुंचाया। द्रविड़ पार्टियों को भ्रष्टाचार और परिवारवाद के मुद्दे पर घेरा।
- 2024 का लोकसभा चुनाव बीजेपी ने छोटे क्षेत्रीय दलों से अलायंस किया और 19 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन खाता तक नहीं खुला। अन्नामलाई खुद कोयंबटूर की सीट हार गए।
- हालांकि बीजेपी को 11.2% वोट मिले, जबकि 2021 के विधानसभा चुनाव में 2.6% वोट मिले थे। 9 सीट पर बीजेपी दूसरे नंबर पर रही। इसने बीजेपी को द्रविड़ पार्टियों के विकल्प के तौर पर पेश किया।
- 2026 के चुनाव में बीजेपी ने AIADMK और छोटे क्षेत्रीय दलों से गठबंधन किया है। बीजेपी 27 और AIADMK 178 सीटों पर चुनाव लड़ रही है।
- बीजेपी का लक्ष्य केवल सीटें जीतना नहीं, बल्कि खुद को पॉलिटिकल ऑप्शन के तौर पर पेश करना है। बीजेपी द्रविड़ पार्टियों से नाराज वोटर्स को साधना चाहती है।
- प्रोफेसर और इलेक्शन एनालिस्ट संजय कुमार मानते हैं कि बीजेपी ने धीरे-धीरे उन राज्यों में जड़े जमाई हैं, जहां उसकी मौजूदगी पहले काफी कम थी। खासकर उन राज्यों में जहां क्षेत्रीय पार्टियां हावी हैं। अगर तमिलनाडु में अच्छी साझेदारी हुई तो बीजेपी अपना परफॉर्मेंस सुधार सकती है और मजबूत हो सकती है।

- केरलम को बीजेपी के लिए ‘फाइनल फ्रंट’ माना जाता है। क्योंकि दशकों से बीजेपी और संघ यहां जमीन तैयार कर रहे हैं, लेकिन चुनावी सफलता से कोसों दूर हैं।
- बीते कुछ दशकों में सत्ता की बागडोर या तो CPIM के लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट ने संभाली या फिर कांग्रेस के यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट ने।
- 2016 के चुनाव में बीजेपी की बोहनी हुई। तिरुवनंतपुरम की नेमोम विधानसभा सीट जीती। दशकों से संघ-बीजेपी के लिए जमीन बना रहे 86 साल के ओ. राजगोपाल ने यहां कमल खिलाया।
- 2021 में बीजेपी अपनी इस इकलौती सीट को बचा नहीं पाई और फिर से शून्य पर पहुंच गई। हालांकि पलक्कड़ सीट बीजेपी जीतते-जीतते रह गई। यहां मेट्रो मैन ई. श्रीधरन करीब 4 हजार वोट से हार गए।
- 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की फिर किस्मत खुली। मलयालम सुपरस्टार सुरेश गोपी ने त्रिशूर सीट पर कमल खिलाया। सुरेश केरलम से बीजेपी के पहले और इकलौते सांसद हैं।
- वहीं बीजेपी का वोट शेयर 16.8% हो गया, जो 2019 में 13% था। इस चुनाव से माना जाने लगा कि बीजेपी केरलम में तीसरा ऑप्शन बन सकती है।
- फिर दिसंबर 2025 में निकाय चुनाव हुए। बीजेपी ने चार दशकों से तिरुवनंतपुरम नगर निगम पर काबिज लेफ्ट को हरा दिया। इस जीत से पार्टी को उम्मीद है कि 2026 के विधानसभा चुनाव में बड़ी भूमिका निभाएगी।
- लेफ्ट के गढ़ में इन कामयाबियों के बावजूद बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती है यहां का सामाजिक ढांचा। केरलम की करीब 45% आबादी मुस्लिम और ईसाई है, जो पारंपरिक रूप से बीजेपी के वोटर नहीं माने जाते हैं। वहीं केवल हिंदू वोटर्स को एकजुट कर उनके सहारे सत्ता पाना बीजेपी के लिए मुश्किल है।
- ऐसे में 2026 के चुनाव में बीजेपी ईसाइयों को लामबंद करना चाहती है। इसके लिए उसने 7 ईसाई उम्मीदवार उतारे हैं। वहीं ट्वेंटी-20 पार्टी समेत कुछ स्थानीय दलों के साथ अलायंस किया। 19 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली ट्वेंटी-20 को ईसाई समुदाय का समर्थन है।
- इस चुनाव में बीजेपी की कोशिश है कि कुछ सीट जीतने के साथ वह मुकाबले को त्रिकोणीय बनाए और वोट काटने वाली पार्टी से ऊपर उठाकर ‘किंगमेकर’ बने। साथ ही अपना मजबूत वोटबेस तैयार करे।
- अमिताभ तिवारी कहते हैं, केरलम में राजनीति पर लंबे समय से UDF और LDF का वर्चस्व रहा है, जिससे तीसरे मोर्चे की गुंजाइश कम बची है। ऐसे में बीजेपी तुरंत सत्ता हासिल करने की बजाय अपने वोट शेयर और सीटें बढ़ाने की कोशिश करेगी।

- दक्षिण भारत के छोटे से केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी की राजनीति एक दौर में द्रविड़ पार्टियों और कांग्रेस के इर्द-गिर्द थी। लेकिन हाल में बीजेपी ने साबित किया है कि वह दक्षिण में भी बेहतर तरीके से गठबंधन सरकार चला सकती है।
- 2014 में बीजेपी ने पूर्व सीएम एन. रंगास्वामी की पार्टी AINRC के साथ गठजोड़ किया। हालांकि दो चुनावों में बीजेपी का खाता तक नहीं खुला।
- आखिरकार 2021 में बीजेपी ने 9 सीटों पर लड़कर 6 पर जीत दर्ज की। वहीं AINRC को 10 सीटें मिलीं। एन. रंगास्वामी सीएम बने।
- यहां 3 विधायक केंद्र सरकार नॉमिनेट करती है। इस प्रावधान का फायदा बीजेपी को मिला और उसके पास कुल 6 विधायक हो गए। इसी के साथ बीजेपी, AINRC के लगभग बराबर हो गई।
- 2026 के चुनाव में पुडुचेरी में बीजेपी सत्ता बरकरार रखने की कोशिश करेगी। साथ ही नई सीट जीतना चाहेगी। दक्षिण भारत में एक मैसेज भी देना चाहेगी कि हम AINRC जैसे क्षेत्रीय दलों के साथ मिलकर लंबे समय तक सरकार चला सकते हैं।

कोरबा
1 अप्रैल को नम: सामूहिक विवाह:राज्यपाल रमेन डेका के मुख्य आतिथ्य एवं पंडित धीरेंद्र शास्त्री के सानिध्य में 108 दिव्यांग/निर्धन कन्याएं बंधेंगी परिणय सूत्र में
माँ सर्वमंगला देवी मंदिर प्रबंधन की पुण्य पहल
कोरबा। माँ सर्वमंगला देवी मंदिर दुरपा कोरबा प्रबंधन द्वारा 01 अप्रैल को ढपढप में चल रही श्रीहनुमंत कथा के पांच दिवसीय दिव्य आयोजन के पंचम एवं अंतिम दिन अपना घर सेवा आश्रम समिति के आयोजकत्व में दिव्यता और भव्यता के साथ सम्पन्न होगा। इस दिव्य आयोजन में बतौर मुख्य अतिथि प्रदेश के महामहिम राज्यपाल रमेन डेका जहां मुख्य साक्षी बनेंगे, वहीं अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक एवं सनातन धर्म के संवाहक, बागेश्वर धाम के पीठाधीश पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का आशीर्वाद प्राप्त होगा और इस पुण्य और सेवा कार्य के लिए उनका सानिध्य प्राप्त होगा।
पांच दिवसीय श्रीहनुमंत कथा से जिले ही नहीं पूरे प्रदेश में हिन्दुत्व की जो विचार क्रांति की लहर ढपढप से चली है, उसका बड़ा संदेश आने वाले दिनों में दिखेगा। इस महान और पुण्य धार्मिक आयोजन के बीच 108 उन दिव्यांग और निर्धन कन्याओं का घर भी बसने जा रहा है और नवदाम्पत्य जीवन में प्रवेश के लिए पंडित धीरेंद्र शास्त्री का जहां सानिध्य मिलने से नम: सामूहिक की दिव्यता और बढ़ेगी और मा. राज्यपाल रमेन डेका की उपस्थिति से कार्यक्रम की गरिमा बढ़ेगी। कार्यक्रम की विशालता और महानता को देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित केबिनेट के सदस्य एवं कई विधायक, राजनीतिज्ञ, लब्धप्रतिष्ठित समाजसेवक एवं विद्वतजनों की उपस्थिति इस पुण्य कर्म की गरिमा बढ़ाएंगे।
माँ सर्वमंगला देवी मंदिर प्रबंधन ने नम: सामूहिक विवाह को इस बार विशालता प्रदान करने के लिए पूरी तैयारी कर ली है और अपना घर सेवा आश्रम के आयोजकत्व में ढपढप की पुण्यधरा इस महान पुण्य कर्म का साक्षी बनेगी।

पंडित शास्त्री के कार्यक्रम में पहली बार सामूहिक विवाह का आयोजन
पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भारत सहित कई देशों में सनातन धर्म को बढ़ाने के लिए कई दिव्य आयोजनों में अपने श्रीमुख से लोगों को हिन्दुत्व की महिमा बता रहे हैं। कोरबा की पुण्य धरा में उनका यह विशाल आयोजन पहली बार हो रहा है और आज हनुमंत कथा का दूसरा दिन है। विशाल समुद्र सा जनसैलाब उन्हें सुनने के लिए ढपढप की पुण्य धरा पर खड़ा रहा और सरल, सहज वाणी को सुनने एक अद्भूत और विशाल श्रद्धा देखने को मिली।
हनुमंत कथा 01 अप्रैल तक चलेगी और कथा के अंतिम दिन ढपढप में श्रद्धा, आध्यात्म के साथ मानवीय सेवा का अद्भूत संगम देखने को मिलेगा और वह क्षण काफी रोमांचित होगा, जब 108 निर्धन एवं दिव्यांग जोड़े एक-दूसरे के जीवनसाथी बनेंगे और जमीन से लेकर आसमां भी इस अद्भूत समागम में फूल बरसाएंगे।

देश
बंगाल के लिए कांग्रेस की पहली लिस्ट, 284 नाम:लोकसभा चुनाव हारे अधीर रंजन को बहरामपुर से टिकट, पीएम केरल में बोले- LDF-UFD दोनों भ्रष्टाचारी
नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम/गुवाहाटी/कोलकाता/चेन्नई,एजेंसी। कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए रविवार शाम 284 नामों की लिस्ट जारी की। राज्य में विधानसभा की कुल 294 सीटें हैं। लोकसभा चुनाव हारे अधीर रंजन चौधरी को बहरामपुर से प्रत्याशी बनाया गया है। मालातीपुर से मौसम नूर को टिकट दिया गया है।
इधर, पीएम मोदी ने रविवार को केरल पहुंचे। उन्होंने यहां भाजपा के चुनाव प्रचार की शुरुआत की। पलक्कड़ में पहली रैली की। इसके बाद वे त्रिशूर पहुंचे थे। यहां उनकी रैली 34 मिनट की थी।

पलक्कड़ में पीएम ने कहा- दशकों से केरल मतलबी पॉलिटिक्स के दो मुखौटों के बीच फंसा हुआ है। एक तरफ LDF, दूसरी तरफ UDF; एक तरफ कम्युनिस्ट, दूसरी कांग्रेस। एक करप्ट, दूसरा महा-करप्ट। एक कम्युनल, दूसरा महा-कम्युनल। LDF और UDF की सारी पॉलिसी सिर्फ वोट-बैंक पॉलिटिक्स के लिए हैं।
पीएम ने कहा कि इन भ्रष्टाचारी पार्टियों को बीजेपी से डर लगता है। अगर हम सत्ता में आ गए तो इनके सारे काले कारनामों की पोल खुल जाएगी।

त्रिशूर में पीएम मोदी की रैली निकाली गई। उनके साथ भाजपा सांसद सुरेश गोपी नजर आए।

केरल के पलक्कड़ में रैली के दौरान पीएम ने स्थानीय वाद्य यंत्र भी बजाया।
5 राज्यों के चुनाव से जुड़े अपडेट्स
तमिलनाडु: DMK ने कांग्रेस को 28 सीटें दी हैं, DMDK को 10 व वीसीके को 8 सीटें मिली हैं। माकपा-भाकपा को 5-5 सीटें मिली हैं।
पश्चिम बंगाल के बीरभूम के लाभपुर में शनिवार को टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी की चुनावी रैली खत्म होने के मंच के एक हिस्से में आग लग गई। हालांकि घटना में कोई घायल नहीं हुआ।
पीएम मोदी 30 मार्च को असम और पुडुचेरी के एनडीए कार्यकर्ताओं से वर्चुअली संवाद करेंगे। यह बातचीत ‘मेरा बूथ, सबसे मजबूत संवाद’ अभियान के तहत होगी।
टीवीके चीफ विजय 30 मार्च से अपने चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत करेंगे। चेन्नई के पेरंबूर में उनका कार्यक्रम होगा, जिसमें भीड़ की जगह केवल 100 लोगों को ही बुलाया जाएगा।
कांग्रेस की पश्चिम बंगाल चुनाव के लिए 284 प्रत्याशियों की लिस्ट




धमेंद्र प्रधान बोले- नंदीग्राम से मेरा 20 साल पुराना रिश्ता
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम में ‘मन की बात’ कार्यक्रम के मौके पर पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ समय बिताया। उन्होंने कार्यकर्ताओं को खाना परोसा। उन्होंने कहा कि नंदीग्राम से मेरा 20 साल से कनेक्शन है। नंदीग्राम की यह धरती बंगाली अस्मिता और परिवर्तन की चेतना का एक सशक्त प्रतीक रही है। यहां से जो आवाज उठी है, उसने समय-समय पर पूरे बंगाल की राजनीति की दिशा और दशा को प्रभावित किया है।
एलडीएफ उम्मीदवार बोलीं- हम विकास पर चर्चा कर रहे
केरल के कोच्चि में एलडीएफ उम्मीदवार एडवोकेट पुष्पा दास ने कहा- हम वाम लोकतांत्रिक सरकार की विकास पहलों के साथ-साथ थ्रिक्काकारा क्षेत्र के मुद्दों पर भी चर्चा कर रहे हैं। 25 सालों तक इस क्षेत्र पर यूडीएफ का शासन रहा, लेकिन अब लोग उन सालों से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर कर रहे हैं।
कांग्रेस नेता बोलीं- हमारे कार्यकर्ता चुनाव के लिए एकजुट
केरल के तिरुवनंतपुरम पहुंची कांग्रेस नेता दीपा दासमुंशी ने कहा- हमारे सभी कार्यकर्ता और नेता चुनाव के लिए एकजुट हैं। हम अपने गारंटी कार्डों के साथ घर-घर जाकर प्रचार कर रहे हैं।

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