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रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए सहायक ग्रेड-02 प्रदीप मिश्रा निलंबित
कोरबा। कार्यालय उप पुलिस अधीक्षक, एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी), बिलासपुर से प्राप्त जानकारी के अनुसार एसीबी/ईओडब्ल्यू इकाई बिलासपुर द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित अधिनियम 2018) के अंतर्गत दर्ज अपराध क्रमांक 0/2026 की कार्रवाई में कार्यालय विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी, पोड़ी उपरोड़ा में पदस्थ सहायक ग्रेड-02 प्रदीप मिश्रा को 29 मई 2026 को प्रार्थी अमृत बघेल से 40,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया।

एसीबी की कार्रवाई के बाद आरोपी मिश्रा को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है। प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा द्वारा यह माना गया कि उनका यह कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के प्रावधानों के विपरीत है।
फलस्वरूप, प्रदीप मिश्रा, सहायक ग्रेड-02, कार्यालय विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी, पोड़ी उपरोड़ा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय कार्यालय विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी, कटघोरा निर्धारित किया गया है। उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शासकीय कार्यों में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाई जा रही है तथा ऐसे मामलों में नियमानुसार कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।
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संस्कृत विषय बचाओ अभियान: घोषणा को अमल में लाने संस्कृत शिक्षकों ने शिक्षा मंत्री को सौंपा ज्ञापन
कोरबा। प्रदेश अध्यक्ष दौलत राम साहू के नेतृत्व में संघ के पदाधिकारी नोयन कुमार बुडेक, मनोज कुमार वर्मा, डॉ नारायण प्रसाद, गंगाराम साहू, हेमंत कुमार हिरवानी, दुर्गेश कुमार साहू, कुलेश्वर प्रसाद, दिनेश मंडावी, सुनील महार, ईश्वरी यदु कामिनी पिल्लई, रेणुका लदेर, शारदा साहू, सुरेखा सेन, सोमप्रभा साहू सहित प्रदेश के पांच शिक्षा संभाग के शिक्षक एवं शिक्षिकाएं भारतीय संविधान में आठवीं अनुसूची की भाषा एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप संस्कृत विषय के संवर्धन एवं संरक्षण हेतु उल्लेख किया गया है को ध्यान में रखते हुए गजेंद्र यादव शिक्षा मंत्री द्वारा 30 अप्रैल को विधानसभा से घोषणा किया गया कि संस्कृत भाषा को अनिवार्य कर रहे हैं, जिनका लघु चलचित्र सोशल मीडिया पर बहुत प्रसारित हैं।

इसे देख सुनकर प्रदेश भर के संस्कृत शिक्षकों में शासन की सौहार्द्रपूर्ण निर्णय से हर्ष की लहर है। संस्कृत भारतीय ज्ञान परंपरा, सभ्यता और संस्कार परक एक राष्ट्रभाषा है, जिनमें सनातन संस्कृति पूर्ण रूप से समाहित है। संघ के पदाधिकारियों द्वारा 10 मई एवं 26 मई 2026 को नवा रायपुर स्थित एम -14 आवास में शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर घोषणा के धरातल पर क्रियान्वयन के लिए शीघ्र अति शीघ्र शासकीय आदेश जारी करवाने हेतु मांग पत्र सौपा, जिससे शिक्षक आश्वस्त हो जावे तथा मंत्री द्वारा संस्कृत विषय को अनिवार्य करने विभागीय अधिकारी को निर्देश दिए यह शिक्षकों के लिए बहुत बड़ा पुरस्कार है, किन्तु आज पर्यन्त कोई कार्यवाही नहीं हुई है। पदाधिकारियों ने आगे बताया कि इस पावन कार्य के लिए निरंतर प्रदेश के जिला शिक्षा अधिकारी, जिला कलेक्टर, विधायकगण, वित्त मंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष डॉक्टर रमन सिंह, उपमुख्यमंत्री अरूण साव, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय , राज्यपाल रमेन डेका , संचालक लोक शिक्षण संचालनालय, मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन, सचिव स्कूल शिक्षा विभाग, संचालक राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद, सचिव छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल, सचिव सहायक संचालक छत्तीसगढ़ संस्कृत विद्या मण्डलम्, प्रदेश संयोजक व अध्यक्ष अधिकारी कर्मचारी फेड़रेशन कमल वर्मा, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, डॉ अतुल कोठारी राष्ट्रीय सचिव शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास नई दिल्ली, आयुक्त राज्य परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा सहित 50 से भी अधिक आवेदन बारंबार संस्कृत विषय को पूर्व की भांति अनिवार्य करने तथा नवीन व्यावसायिक शिक्षा को सातवें विषय के रूप में रखने के लिए मांग पत्र ज्ञापन सौपा गया था। 25 अगस्त 2025 को शिक्षा मंत्री की समीक्षा बैठक में एससीईआरटी रायपुर को कक्षा छठवीं से लेकर कक्षा दसवीं का संस्कृत विषय को अनिवार्य करने निर्देशित भी किया गया था। इसी क्रम में 07 सितंबर 2025 को सरयू पारिण भवन मठपुरेना में आयोजित विराट संस्कृत विद्वत सम्मेलन में उपस्थित मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह को भी मांग पत्र सौपा गया था। वहां पर अध्यक्ष ने अपने उद्बोधन में कहा कि संस्कृत संकल्प का विषय है विकल्प का नहीं। संस्कृत भाषा के साथ अन्याय नहीं होगा। एक तरफ पूरा विश्व संस्कृत भाषा के महत्व को अपना रहा है। अपने देश के विद्यालय, महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालयों में संस्कृत भाषा को अनिवार्य शिक्षा कर रहे हैं तथा अनुच्छेद 351 आठवीं अनुसूची की भाषाओं के सम्मान के लिए बनाया गया है।
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सुशासन तिहार में जनमन सहित अन्य प्रचार समाग्री का किया गया वितरण
कोरबा। सुशासन तिहार के उपलक्ष्य में जनसंपर्क विभाग द्वारा राज्य शासन की जन कल्याणकारी और महत्वकांक्षी योजनाओं के क्रियान्वयन से संबंधित तथा जिले के विकास कार्यों, उपलब्धियों एवं नवाचारों पर आधारित प्रदर्शनी के साथ ही जिले के सभी पांच ब्लाक में आयोजित महत्वपूर्ण शिविर स्थल-ग्राम पिपरिया, जल्के, बसीबार, बैरा, चोढ़ा, चुईया, गिधौरी, केराकछार, सिरमिना, लमना, नगोई, मोरगा, निरधी, जटगा, छिंदपुर आदि स्थानों में शिविर के माध्यम से जनमन सहित अन्य पत्रिका का वितरण भी किया गया।

ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में शिविर का अवलोकन किया। शिविर के माध्यम से केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों के जीवन मे हुए सकारात्मक बदलाव सहित जिले के अनेक विकास कार्यों, उपलब्धियों, नवाचार के संबंध में प्रचार सामग्री सुशासन के नवीन आयाम, तब और अब, विकसित भारत के बढ़ते कदम, बिल्डिंग टूमारो छ.ग.टूडे, अटल निर्माण वर्ष 2 साल (रिपोर्ट कार्ड) आदि का वितरण किया गया।
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‘PM को बच्चों के भविष्य की नहीं, अपनी सरकार के अस्तित्व की चिंता है’ : राहुल गांधी
नई दिल्ली, एजेंसी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की गड़बड़ी पर चुप्पी और शिक्षा मंत्री के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं किया जाना यह दर्शाता है कि उन्हें केवल अपनी सरकार के अस्तित्व की चिंता है, लाखों छात्रों के भविष्य की नहीं। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि वह पहले दिन से ही सीबीएसई की 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' (ओएसएम) और 'सीओईएमपीटी' को अनुबंध दिए जाने के मामले में स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग कर रहे हैं, क्योंकि देश के युवाओं को सच जानने का अधिकार है। गांधी ने मीडिया की खबरों को साझा किया और लोगों से उन्हें ध्यानपूर्वक पढ़ने का आह्वान किया।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया, ”सीबीएसई ने ओएसएम निविदाएं तीन बार आमंत्रित कीं। पहली बार एक भी बोली नहीं लगी। दूसरी बार कोई भी बोलीदाता पात्र नहीं पाया गया। और अंततः, तकनीकी मानकों को तब तक कमतर किया गया जब तक कि ‘सीओईएमपीटी’ उन्हें पार नहीं कर गई। स्कैनिंग रेजोल्यूशन कम कर दिया गया। रोबोटिक स्कैनर की अनिवार्यता हटा दी गई। सीएमएमआई प्रमाणन स्तर-5 से घटाकर स्तर-3 कर दिया गया। उत्तर पुस्तिकाओं में त्रुटियों के लिए जुर्माने के प्रावधान भी हटा दिये गए।” राहुल गांधी ने कहा, ”भारत की सबसे बड़ी आईटी सेवा कंपनी टीसीएस ने भी तीसरे दौर के लिए अर्हता प्राप्त की थी। लेकिन टीसीएस दौड़ में हार गई और सीओईएमपीटी-एक ऐसी कंपनी जिसका रिकॉर्ड विफलताओं से भरा रहा है-वह जीत गई। और आज सीबीएसई के छात्र किस बात की शिकायत कर रहे हैं? खराब तरीके से स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएं, गायब पन्ने और एक खराब मूल्यांकन पोर्टल।”

गांधी ने कहा कि शिक्षकों ने सीबीएसई को चेतावनी दी थी कि ओएसएम प्रणाली को राष्ट्रव्यापी क्रियान्वयन से पहले कम से कम एक या दो साल की अतिरिक्त तैयारी की आवश्यकता है, फिर भी इसे जल्दबाजी में आगे बढ़ा दिया गया। लोकसभा में विपक्ष के नेता गांधी ने कहा, ”तो मैं फिर से पूछता हूं – कौन चाहता था कि सीओईएमपीटी जीते? किसने धीरे-धीरे मानकों को इतना कम किया कि यह कंपनी इसे पार कर सके?” उन्होंने कहा, “प्रधान जी और सीबीएसई का कहना है कि ‘कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया’। यह कोई जवाब नहीं है, यह जवाबदेही नहीं है। सवाल यह है कि क्या अनुबंध ईमानदारी से उस सर्वश्रेष्ठ कंपनी को दिया गया था जो काम को सही ढंग से कर सकती थी?”

गांधी ने कहा कि 18.5 लाख बच्चों का भविष्य एक ऐसी कंपनी के हाथों में सौंप दिया गया, जो केवल तब अर्हता प्राप्त कर सकी जब उसके लिए नियमों में ”ढील दी गई।” उन्होंने कहा, ”सवाल पूछने के कारण मुझ पर हमला करने वाले भाजपा मंत्रियों के लिए – मैंने पहले दिन से ही स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग की। इसे (जांच को) सीबीएसई से लेकर सीओईएमपीटी को दिए गए हर अनुबंध तक विस्तारित करें। हमारे युवाओं को सच्चाई जानने का हक है।” गांधी ने कहा, “मोदी जी, सीबीएसई की गड़बड़ी पर आपकी चुप्पी और शिक्षा मंत्री के खिलाफ आपकी निष्क्रियता देश को बताती है कि आपको वास्तव में किसकी परवाह है – लाखों छात्रों के भविष्य की नहीं, बल्कि सिर्फ अपनी सरकार के अस्तित्व की।”

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मीडिया की खबरों का हवाला देते हुए कहा कि उनसे यह खुलासा हुआ है कि सीबीएसई ने इस साल की कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं के लिए ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ (ओएसएम) प्रणाली प्रदान करने वाले ठेकेदारों के लिए प्रस्तावों के वास्ते अपने अनुरोध में तकनीकी शर्तों को लगातार नरम किया। रमेश ने अन्य चिंताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि न्यूनतम ‘स्कैनिंग रेजोल्यूशन’ को 300 डीपीआई से घटाकर 200 डीपीआई कर दिया गया और अनिवार्य ‘कैपेबिलिटी मैच्योरिटी मॉडल इंटीग्रेशन’ (सीएमएमआई) प्रमाणन को स्तर-5 से घटाकर स्तर-3 कर दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जुर्माना के प्रावधानों को इस तरह बदला गया कि उनका ध्यान त्रुटियों के बजाय गति पर केंद्रित हो गया। उन्होंने कहा कि साथ ही, उत्तर पुस्तिकाओं की ‘स्पाइन’ (बाइंडिंग) काटे बिना स्कैन करने की शर्त हटा दी गई और रोबोटिक स्कैनर के प्रावधान को भी खत्म कर दिया गया।

जयराम रमेश ने शेयर किया पोस्ट
रमेश ने अपने पोस्ट में कहा, “अंतिम ‘आरएफपी’ अगस्त 2025 में जारी किया गया था, जो सीबीएसई कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं से केवल छह महीने पहले था। हम पहले से ही जानते हैं कि ओएसएम को लागू करने की जल्दबाजी में क्षेत्रीय केंद्रों पर प्रायोगिक परियोजना आयोजित करने के सीबीएसई बोर्ड के समझदारी भरे सुझाव को नजरअंदाज कर दिया गया था।” उन्होंने आरोप लगाया कि स्पष्ट रूप से, सीबीएसई की कार्रवाई में अनावश्यक जल्दबाजी तथा गुणवत्ता एवं छात्र-केंद्रित प्रावधानों को कमजोर करने की झलक मिलती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस वर्ष से ही ओएसएम को अपना लिया जाए। कांग्रेस नेता ने अपनी पोस्ट में प्रश्न किया, ”कई सवाल उठते हैं- ‘आरएफपी’ में तकनीकी शर्तों को क्यों कमजोर किया गया? क्या यह निविदा के लिए बोली लगाने वाले ठेकेदारों के कहने पर किया गया था? सीबीएसई ने उन प्रावधानों (उच्च स्कैनिंग रिज़ॉल्यूशन, गलत तरीके से स्कैन की गई प्रतियों के लिए जुर्माना आदि) को क्यों कमजोर किया जो त्रुटियों को कम कर सकते थे और छात्रों व मूल्यांकनकर्ताओं की सहायता कर सकते थे? किस तरह का दबाव था?”

रमेश ने यह सवाल भी उठाया कि क्षेत्रीय स्तर पर प्रायोगिक परियोजना के जरिए गहन जांच किए बिना और तकनीकी बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता से समझौता करके ‘ओएसएम’ को अपनाने में इतनी जल्दबाजी दिखाने के पीछे क्या कारण था। उन्होंने सवाल किया, “क्या सीओईएमपीटी की पृष्ठभूमि की जांच की गई थी, जिसे अंततः सीबीएसई ने अनुबंध दिया? क्या सीबीएसई ने इस तथ्य पर विचार किया कि सीओईएमपीटी का नाम पहले ‘ग्लोबारेना’ था और वह विवादों में घिरी रही थी? क्या मोदी सरकार के राजनीतिक आकाओं की ओर से यह सुनिश्चित करने का दबाव था कि ठेका सीओईएमपीटी को ही मिले?”
कांग्रेस नेता रमेश ने कहा, ”सीबीएसई को पाक साफ होना चाहिए और वेंडर के चयन, आरएफपी में किए गए संशोधनों, ओएसएम को अपनाने में दिखाई गई जल्दबाजी के कारणों और परीक्षाओं से पहले आयोजित बोर्ड बैठकों के विवरण से संबंधित सभी दस्तावेज सार्वजनिक करने चाहिए। शायद मंत्री प्रधान कीचड़ उछालने और राजनीति करने के बजाय इन सवालों के जवाब दे सकते हैं।”
नगर पालिका परिषद बांकीमोंगरा
डेली मार्केट पहुंची तोडू दस्ता, जमकर हुआ हंगामा, दो हिस्सों में होगा नव निर्माण कार्य,,,,देखे पूरी खबर
संवाददाता साबीर अंसारी
बांकीमोंगरा :– नगर पालिका परिषद बांकीमोंगरा द्वारा डेली मार्केट के नव निर्माण के लिए अब तक चार नोटिस दी जा चुकी थी, जिसमें डेली मार्केट के सौंदर्यीकरण और सुविधायुक्त चबूतरा और शेड निर्माण किया जाना है। पर लगातार सब्जी विक्रेताओं द्वारा वहां से न हटने को लेकर विरोध कर रहे थे जो प्रशासन से मार्केट निर्माण का लिखित में मांग कर रहे थे पर प्रशासन द्वारा मौखिक रूप से कहे जाने पर कोई भी संतुष्ट नहीं थे।
आज दिनांक 26/05 की दोपहर डेली मार्केट के सौंदर्यीकरण एवं व्यवस्थित विकास के लिए अतिक्रमण हटाने नगर पालिका परिषद प्रशासन दल बल और जेसीबी लेकर पहुंचे साथ में पालिका सीएमओ, और तहसीलदार के उपस्थिति में अपनी कार्रवाई शुरू की जहां सब्जी विक्रेताओं ने और स्थानीय व्यापारियों ने जमकर विरोध किया।

व्यापारियों और सब्जी व्यवसायियों का कहना था कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के दुकानों और ढांचों को हटाना उनके रोजगार पर असर डालेगा। विरोध बढ़ने पर प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला और सब्जी व्यवसायियों के मांग को मान कर उनको पहले 70 प्रतिशत जगह में निर्माण कार्य और बाद में 30 प्रतिशत जगह में निर्माण कार्य पर सहमति बनी और शुरू के 70 प्रतिशत निर्माण के लिए जगह में जेसीबी चलाई।

• लंबे समय के बाद प्रशासन और व्यवसायियों के बीच सहमति बनी।
• सब्जी विक्रेताओं ने पहले 70 और बाद में 30 प्रतिशत निर्माण पर सहमति दी।

आज की कार्यवाही के दौरान एक भावुक दृश्य देखने को मिला डेली मार्केट के कोने में भेजा कब्जा कर पिछले 25 वर्षो से एक बुजुर्ग महिला जानकी बाई केवट निवास करती थी और वही पर समोसा बेच अपना जीवन यापन करती थी, जो रोते रोते अपने दुख बयां करते हुए कहा कि मेरे इस घर को बिना नोटिस के प्रशासन ने तोड़ दिया, जबकि डेली मार्केट वालो को नोटिस दिया गया था साथ ही बहुत बड़ी और कड़वी सच्चाई कहती हुई कहा कि मेरे मकान के आस पास बड़े बड़े पक्के के अवैध निर्माण है जिस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, क्योंकि वो सब बड़े आदमी है।

बुजुर्ग महिला के इस बयान के बाद स्थानीय नागरिकों ने भी कहा कि यदि अतिक्रमण हटाया जा रहा है तो सभी पर निष्पक्षता से समान कार्रवाई होनी चाहिए। फिलहाल बुजुर्ग महिला को प्रशासन द्वारा आश्वासन दिया गया है कि नव निर्माण के बाद उनको बाकी सभी किं तरह जगह दिया जाएगा।

इसी दौरान डेली मार्केट की कार्यवाही पूरी होने के बाद प्रशासन अपना जेसीबी लेकर पहुंची मेन चौक साड़ा कॉम्प्लेक्स की ओर जहां दुकानदारों द्वारा बोर्ड लगाकर जाम लगाने वाले के बोर्डों और खंभों को ध्वस्त किया गया वही कुछ व्यापारियों ने एक दिन का समय मांगा जीने प्रशासन द्वारा एक दिन का समय दिया गया।
नगर पालिका परिषद बांकीमोंगरा
बाँकी – थाने के 200 मीटर की दूरी पर घर से हुई लाखों की चोरी,, पुलिस के गश्त पर उठे सवाल, चोरों ने दी चुनौती,,,देखे पूरी खबर
संवाददाता साबीर अंसारी
बांकी मोगरा :– इस क्षेत्र के थाने में तो वैसे चोरी के मामले सैकड़ों मामले दर्ज है जिसका आरोपी पकड़ में आना तो दूर की बात है सुराग तक नहीं लग पाया है, सूचना या शिकायत के बाद प्रार्थियों को बस आश्वासन देकर विदा कर दिया जाता है मानो जैसे ये एक औपचारिकता हो।
यही चोरी का एक ताजा मामला सामने आया है जो बांकी मोगरा थाना के सामने इंदिरा नगर में लगभग 200 मीटर की दूरी पर एक सुने मकान में अज्ञात चोरों ने सामने का ताला तोड़ लाखों का जेवरात और एक मोटर सायकल चोरी कर ले गए।

• थाने के सामने चोरी की इस घटना से स्पष्ट है कि चोरों के हिम्मत और हौसले बुलंद है, जो पुलिस को खुली चुनौती देने जैसा है।
• पुलिस के गश्त पर भी उठ रहे सवाल।
• दरवाजे का ताला टूटा और खुला देख पड़ोसियों ने मकान स्वामी को जानकारी दी।

मामला इस प्रकार है कि प्रार्थी सलीम खान निवासी इंदिरा नगर ने दिनांक 24/05 को थाना पहुंच शिकायत दर्ज कराई कि मैं अपने परिवार के साथ दिनांक 21/05 को अपने गृह ग्राम गया था जिसके दूसरे दिन पड़ोसियों द्वारा जानकारी दिया गया कि आपके घर का सामने का ताला टूटा है और पीछे का दरवाजा भी खुला है, जिसके बाद मेरे द्वारा उनको अंदर जाकर देखने को कहा गया। जब पड़ोसीयो ने अंदर जाकर देखा तो बताया कि आपका अलमारी खुला है और पूरी तरह से खाली है और बाइक भी गायब है।
“आखिर इतनी बेखौफी से चोरी को आजम देने के बाद हर बार अज्ञात चोर होते है पुलिस के गिरफ्त से दूर क्यों ?”
जिसके बाद प्रार्थी अपने गांव से वापस आया और थाने में शिकायत दर्ज कराया जिसमें चोरी की घटना के बारे में बताया और जानकारी दी कि अलमारी में लगभग 1.50 लाख का जेवरात और मोटर सायकल सीजी 12 ए आर 6381 होंडा शाइन चोरी होना बताया।

शिकायत पर थाना बाकी मोगरा पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के विरुद्ध अपराध क्रमांक 112/26 धारा 331 (4), 305 बी एन एस दर्ज कर अज्ञात चोरों की पतासाजी शुरू कर दी है और प्रार्थी सलीम को आश्वासन दिया है कि जल्द ही चोरों को हिरासत में लिया जाएगा।
फिलहाल एक और चोरी का घटना की शिकायत दर्ज हुई और अब देखना ये है कि क्या इस बार चोर पुलिस के गिरफ्त के आते है या इस बार भी प्रार्थी को सिर्फ आश्वासन पर उम्मीद कायम रखना पड़ेगा।
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