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कोरबा

एनकेएच की एक नई श्रृंखला, कटघोरा ब्रांच का 18 नवम्बर को शुभारंभ

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आसपास क्षेत्र के लोगों को मिलेगी इलाज की बेहतर सुविधा

कोरबा। कोरबा जिलावासियों को बेहतर और महानगरीय तर्ज पर उपचार सुविधा उपलब्ध करा रहा रहे एनकेएच ग्रुप द्वारा एनकेएच, मल्टीस्पेश्यालिटी हॉस्पिटल (कटघोरा) का शुभारंभ 18 नवंबर से किया जा रहा है।
सोमवार को प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल के हाथों पुराना कटघोरा-बिलासपुर मार्ग (ओल्ड रोड) में कटघोरा ब्रांच मल्टीस्पेश्यालिटी हॉस्पिटल का शुभारंभ किया जाएगा। शुभारम्भ अवसर पर उद्योग व श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन,कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल, पूर्व मंत्री ननकीराम कंवर, तानाखार विधायक तुलेश्वर हीरासिंह मरकाम, पूर्व विधायक रामदयाल उइके, जिलाध्यक्ष भाजपा डॉ. राजीव सिंह, मंडल अध्यक्ष धन्नू दुबे, नगर पालिका कटघोरा अध्यक्ष रतन मित्तल, उपाध्यक्ष बजरंग पटेल सहित कटघोरा क्षेत्र के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहेंगे।
कटघोरा में एनकेएच हॉस्पिटल प्रारम्भ हो जाने से कटघोरा सहित इसके आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को नजदीक में ही हर तरह की बेहतर चिकित्सा सुविधा एक ही छत के नीचे मिल सकेगी।
अक्सर देखा गया है कि कटघोरा से लेकर जिले के दूरस्थ इलाके से मरीजों को जिला मुख्यालय तक आने में काफी समय लग जाता है और इस बीच उन्हें जो त्वरित उपचार लाभ मिलना चाहिए, वह बाधित होता है। इस तरह की समस्या के मद्देनजर कटघोरा जो कि, पाली, पोड़ी-उपरोड़ा व आसपास के लोगों के लिए एक केंद्र बिंदु भी है, इसलिए यहां सर्वसुविधायुक्त मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल की ब्रांच प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया है।
हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. एस. चंदानी ने कहा कि वे पिछले 20 वर्षों से भी अधिक समय से रोगियों की सेवा में लगे हैं। दुर्घटना के दौरान हड्डी के साथ सिर में गंभीर चोट होने पर मरीज को बिलासपुर या रायपुर भेजा जाता था। दिल का दौरा पड़ने से समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण कई मरीज दम तोड़ देते थे, लेकिन अब कोरबा में ही हृदय रोग के उपचार के सुविधा, जांच व ऑपरेशन की सुविधा मिल जाने से काफी लाभ शहर व जिला वासियों को मिल रहा है। मरीजों की इलाज के अभाव में असामयिक मौत न हो, इस उद्देश्य से एनकेएच ग्रुप द्वारा कोरबा सुपरस्पेशलिटी (एनएबीएच से मान्यता प्राप्त) के साथ-साथ चाम्पा, जमनीपाली व बालको के बाद अब कटघोरा में हॉस्पिटल की शुरूआत की जा रही है। एनकेएच, मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल,(कटघोरा) में स्त्री एवं प्रसूति, जनरल सर्जन , जनरल मेडिसिन , शिशु रोग विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेषज्ञ सहित अन्य विशेषज्ञ चिकित्सकों को एक छत के नीचे 24 घंटे सातों दिन रोगियों की सेवा के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। इमरजेंसी सेवा भी यहां उपलब्ध रहेगी। बहुत जल्द ही इस अस्पताल में कई अन्य आधुनिक चिकित्सीय सुविधाएं भी उपलब्ध हो जाएंगी।

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कोरबा

दीपका में 30 अप्रैल को 20वीं राष्ट्रीय संगोष्ठी

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देशभर के विद्वानों का होगा संगम-डॉ गजेंद्र

कोरबा। शासकीय महाविद्यालय दीपका, जिला कोरबा (छत्तीसगढ़) एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर के बौद्धिक आयोजन का साक्षी बनने जा रहा है। महाविद्यालय एवं अखिल भारतीय विकलांग चेतना परिषद बिलासपुर के संयुक्त तत्वावधान में ‘भारतीय ज्ञान परंपरा की कसौटी पर विकलांग-विमर्श का पुनर्मूल्यांकनÓ विषय पर 20वीं एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन 30 अप्रैल 2026, गुरुवार को किया जाएगा।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रात: 9:30 बजे महाविद्यालय परिसर में होगा। इस संगोष्ठी में देशभर से विद्वान, शिक्षाविद, शोधार्थी एवं विषय विशेषज्ञ सहभागी बनेंगे, जिससे विचारों का एक व्यापक और सार्थक आदान-प्रदान संभव होगा।

इस गरिमामयी आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ शासन के वाणिज्य एवं उद्योग, श्रम, आबकारी एवं सार्वजनिक उपक्रम विभाग के मंत्री लखनलाल देवांगन उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व अध्यक्ष (राज्यमंत्री दर्जा) छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग एवं कुलपति, थावे विद्यापीठ, गोपालगंज (बिहार) डॉ. विनय कुमार पाठक करेंगे।
संगोष्ठी में विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व न्यायाधीश उच्च न्यायालय न्यायमूर्ति चंद्रभूषण बाजपेयी, अखिल भारतीय विकलांग चेतना परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री मदनमोहन अग्रवाल, तथा गेवरा प्रोजेक्ट के जनरल मैनेजर अरुण त्यागी अपनी गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम को समृद्ध करेंगे। इसके साथ ही कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल समारोह भूषण विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।
इस अवसर पर ‘विकलांग-विमर्श : विविध संदर्भÓ शीर्षक पुस्तक का विमोचन भी किया जाएगा, जिसके संपादन का कार्य डॉ. पायल लिल्हारे (निवाड़ी, मध्यप्रदेश) द्वारा किया गया है। यह पुस्तक विकलांग-विमर्श के विभिन्न आयामों को उजागर करते हुए समकालीन संदर्भों में महत्वपूर्ण दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है।
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. ममता ठाकुर ने बताया कि यह संगोष्ठी भारतीय ज्ञान परंपरा के संदर्भ में विकलांग-विमर्श के पुनर्मूल्यांकन का एक महत्वपूर्ण प्रयास है, जो समाज में समावेशी दृष्टिकोण को सुदृढ़ करेगा। वहीं 20वी राष्ट्रीय संगोष्ठी के संयोजक डॉ. गजेंद्र तिवारी ने सभी शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं जागरूक नागरिकों से इस आयोजन में अधिकाधिक संख्या में सहभागिता कर इसे सफल बनाने का आह्वान किया है।
यह संगोष्ठी न केवल अकादमिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होगी, बल्कि सामाजिक समरसता एवं समावेशिता के नए आयाम स्थापित करने में भी सहायक सिद्ध होगी।

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कोरबा

औद्योगिक प्रतिष्ठान एवं पावर प्लांट सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करेंकलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देशन में जिले के सभी औद्योगिक प्रतिष्ठानों एवं पावर प्लांट की बैठक आयोजित

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भविष्य में हादसे एवं दुर्घटनाएँ न हों, इसके लिए सभी औद्योगिक प्रतिष्ठान आवश्यक सावधानी एवं सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था रखें

कोरबा। कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देशन में आज कलेक्टोरेट सभाकक्ष में जिले के सभी औद्योगिक प्रतिष्ठानों की बैठक आयोजित की गई। अपर कलेक्टर ओंकार यादव ने सक्ती जिले के ग्राम सिंघीतरई में हुई दुर्घटना के मद्देनज़र सभी प्रतिष्ठानों को सतर्क रहने तथा औद्योगिक एवं पावर प्लांट सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कलेक्टर के स्पष्ट निर्देश हैं कि कोरबा एक औद्योगिक जिला है, यहाँ सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसलिए सुरक्षा नियमों के प्रति कठोरता आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि औद्योगिक प्रतिष्ठानों में श्रमिकों की सुरक्षा हेतु निर्धारित मापदंडों के अनुरूप सभी आवश्यक उपकरण एवं मशीनें उपलब्ध और सुचारू रूप से कार्यरत होनी चाहिए। भविष्य में किसी भी प्रकार की दुर्घटना न हो, इसके लिए सभी उद्योग आवश्यक सावधानियाँ एवं सुरक्षा व्यवस्थाएँ सुनिश्चित करें।

अपर कलेक्टर श्री यादव ने निर्देशित किया कि औद्योगिक प्रतिष्ठानों और पावर प्लांट में सुरक्षा संबंधी जो भी कमियाँ हैं, उन्हें तुरंत सुधारें। उन्होंने अग्निशामक यंत्र, फायर अलार्म, मशीनों का उचित संचालन, उपकरणों का रखरखाव, बॉयलर, सीसीटीवी कैमरे, सुरक्षा मापदंड तथा कचरा प्रबंधन आदि के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने दुर्घटना की स्थिति में रेड, ग्रीन और येलो जोन निर्धारित करने का सुझाव दिया। साथ ही आपात स्थिति के दौरान संपर्क किए जाने वाले अधिकारियों, अस्पताल तथा अन्य आवश्यक नंबरों को कार्यस्थल पर प्रदर्शित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी औद्योगिक प्रतिष्ठानों एवं पावर प्लांट में तकनीकी प्रक्रियाओं एवं कार्यों का सतत निरीक्षण अनिवार्य है। वायु प्रदूषणकारी उद्योगों में प्रदूषण नियंत्रण हेतु एएसपी, डस्ट कलेक्शन सिस्टम, फिल्टर, जल छिड़काव व्यवस्था होनी चाहिए।

अपर कलेक्टर ने बताया कि कलेक्टर ने वाहन चालकों सहित अन्य जिम्मेदारी निभाने वाले कर्मचारियों की आँखों की जाँच कराने के निर्देश दिए हैं, ताकि दुर्घटनाओं की संभावना को कम किया जा सके। इसके लिए औद्योगिक प्रतिष्ठानों को शिविर लगाकर आँखों एवं अन्य बीमारियों की नियमित जाँच करानी होगी। सभी प्रतिष्ठानों को जल संरक्षण के लिए वाटर स्ट्रक्चर निर्माण, रेन वाटर हार्वेस्टिंग तथा पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन के लिए पौधरोपण करने के निर्देश भी दिए गए।

उप संचालक, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, विजय सिंह पोटाई ने पीपीटी प्रस्तुति के माध्यम से औद्योगिक सुरक्षा के विभिन्न मापदंडों पर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि देश में समय-समय पर बड़ी दुर्घटनाएँ हुई हैं, जिनसे सीख लेते हुए भविष्य की घटनाओं को रोकने हेतु सजग रहना होगा। मॉकड्रिल का उद्देश्य भी यही है कि हम दुर्घटना से बचाव एवं राहत कार्यों के लिए कितने तैयार हैं।

उन्होंने औद्योगिक एसओपी, टूल बॉक्स, पीपीई किट, हेलमेट, सुरक्षा जूते, ऊंचाई पर कार्य के दौरान सुरक्षा उपकरण, मैनुअल हैंडलिंग, लिफ्टिंग मशीनों का उपयोग, फायर सेफ्टी, हाउस कीपिंग, इलेक्ट्रिकल सेफ्टी, केमिकल सेफ्टी, ड्राइवर सेफ्टी, मोटर सेफ्टी, हीट स्ट्रेस, आपातकालीन नियंत्रण, ओवरहेड क्रेन सेफ्टी, प्रशिक्षण मॉड्यूल, खुले गड्ढों की बेरिकेडिंग, चिकित्सक की उपस्थिति तथा सेफ्टी ऑफिसर की नियुक्ति सहित सभी सुरक्षा मानकों की विस्तार से जानकारी दी।
आपदा प्रबंधन नोडल अधिकारी एवं डिप्टी कलेक्टर तुलाराम भारद्वाज ने जिले में डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान तैयार करने, आपदा की स्थिति में बचाव कार्य, कम्युनिकेशन प्लान तथा स्वयं की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए दूसरों को राहत पहुंचाने के उपायों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने उद्योगों को सुरक्षा मानकों पर किसी भी प्रकार का समझौता न करने के निर्देश दिए।
उद्योग विभाग के अधिकारी विजय कारे ने नई उद्योग नीति के तहत उद्योग स्थापित करने पर शासन द्वारा प्रदत्त सब्सिडी की जानकारी देते हुए सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता देने को कहा।
श्रम अधिकारी नितीश विश्वकर्मा ने मजदूरों के वेतन भुगतान, सुविधाओं, ईपीएफ, ईएसआईसी लाभ एवं आपात स्थिति में मुआवजा भुगतान से संबंधित दिशा-निर्देश उद्योगों को प्रदान किए।
बैठक में कोरबा जिले के एनटीपीसी, बालको, एसईसीएल, अडानी, सीएसईबी, इंडियन ऑयल, मारुति सहित जिले के सभी औद्योगिक प्रतिष्ठानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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कोरबा

ग्रीष्म ऋतु में लू एवं तापघात से बचाव हेतु शासन द्वारा विस्तृत दिशा-निर्देश जारी

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कोरबा। छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग तथा कलेक्टर कार्यालय कोरबा द्वारा वर्ष 2026 की ग्रीष्म ऋतु को ध्यान में रखते हुए लू (हीट वेव) से बचाव और तैयारी को मजबूत बनाने के उद्देश्य से विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के अनुरूप तैयार इन उपायों का मुख्य लक्ष्य भीषण गर्मी के दुष्प्रभावों से आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
निर्देशों के अनुसार राज्य, जिला, तहसील और विकासखण्ड स्तर पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है, जो सभी संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित करेंगे और आवश्यक चेतावनी एवं सूचना प्रसारित करेंगे। लू से बचाव के उपायों का व्यापक प्रचार-प्रसार रेडियो, टेलीविजन, व्हाट्सएप सहित स्थानीय भाषा के पोस्टर एवं पैम्पलेट के माध्यम से किया जाएगा। गर्मी की तीव्रता को देखते हुए विद्यालयों, शिक्षण संस्थानों एवं मनरेगा श्रमिकों के कार्य समय में आवश्यकतानुसार परिवर्तन करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
तापघात के लक्षणों में तेज सिरदर्द, सिर में भारीपन, तेज बुखार, मुंह का सूखना, शरीर का तापमान बढ़ने पर भी पसीना न आना, चक्कर आना, उल्टी, कमजोरी, शरीर में दर्द, अत्यधिक प्यास लगना और पेशाब कम होना प्रमुख रूप से शामिल हैं।
लू से बचाव के लिए लोगों को पर्याप्त पानी पीने, ओआरएस घोल, लस्सी, छाछ, नींबू पानी और चावल के पानी (बोरे बासी) का सेवन करने की सलाह दी गई है। हल्के रंग के ढीले और सूती कपड़े पहनने तथा बाहर निकलते समय सिर को कपड़े, टोपी या छाते से ढकने की अपील की गई है। यदि किसी व्यक्ति को लू लगने के लक्षण दिखाई दें, तो उसे तुरंत छायादार जगह पर लिटाकर ठंडे पानी का छिड़काव करना, सिर पर ठंडी पट्टी रखना और तत्काल चिकित्सा सलाह लेना आवश्यक बताया गया है। प्रारंभिक परामर्श के लिए 104 आरोग्य सेवा केंद्र से निःशुल्क संपर्क किया जा सकता है।
जनता को दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच अनावश्यक रूप से बाहर न निकलने, नंगे पैर बाहर न जाने और शराब, चाय, कॉफी व कार्बोनेटेड सॉफ्ट ड्रिंक्स के सेवन से बचने की सलाह दी गई है, क्योंकि ये शरीर को निर्जलित करते हैं। उच्च प्रोटीन, मसालेदार, तैलीय और बासी भोजन का सेवन भी हानिकारक माना गया है।
विभिन्न विभागों को भी विशेष जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। स्वास्थ्य विभाग को सभी स्वास्थ्य केंद्रों में ओआरएस का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित करने, श्रम विभाग को कार्यस्थलों पर छाया और पीने के पानी की व्यवस्था करने तथा गर्भवती महिलाओं और बीमार श्रमिकों का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं। नगरीय प्रशासन को सार्वजनिक स्थानों पर वाटर एटीएम और प्याऊ की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। पशु चिकित्सा विभाग को भी पशुओं के लिए छाया और पीने के पानी की पर्याप्त उपलब्धता पर ध्यान देने के लिए कहा गया है।
कलेक्टर कुणाल दुदावत ने नागरिकों से अपील की है कि वे इन निर्देशों का पालन करें, सतर्क रहें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।

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