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कोरबा

डीएमएफ से होगा कोरबा जिला का अतिरिक्त विकास : मंत्री लखनलाल देवांगन

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डीएमएफ शासी परिषद की बैठक में विकास कार्यों की विस्तृत समीक्षा

खनन प्रभावित क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए प्राथमिकता से होंगे कार्य

कोरबा। छत्तीसगढ़ शासन के वाणिज्य, उद्योग, आबकारी, सार्वजनिक उपक्रम एवं श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन के मुख्य आतिथ्य में आज कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जिला खनिज संस्थान न्यास कोरबा की शासी परिषद की बैठक आयोजित हुई।

बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के स्वीकृत कार्यों की प्रगति, पूर्ण कार्यों की कार्योत्तर स्वीकृति तथा आगामी वर्ष की कार्ययोजना को अनुमोदन हेतु प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर कोरबा की सांसद श्रीमती ज्योत्सना महंत, कटघोरा के विधायक प्रेमचंद पटेल, पाली-तानाखार विधायक तुलेश्वर सिंह मरकाम, रामपुर विधायक फूल सिंह राठिया, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन कुमार सिंह, महापौर श्रीमती संजू देवी राजपूत सहित शासी परिषद के सदस्यगण अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

बैठक की अध्यक्षता कलेक्टर एवं पदेन अध्यक्ष कुणाल दुदावत ने की। पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी, वनमंडलाधिकारी श्रीमती प्रेमलता यादव, कुमार निशांत, पदेन सचिव जिला पंचायत सीईओ दिनेश नाग समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी बैठक में शामिल हुए।

बैठक के दौरान डीएमएफ मद से संचालित कार्यों पर विस्तृत चर्चा की गई। अपने उद्बोधन में मंत्री श्री देवांगन ने कहा कि जनप्रतिनिधियों के सहयोग और जनता की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए जिले में विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। अन्य योजनाओं के साथ-साथ डीएमएफ मद से भी कोरबा जिले में अतिरिक्त विकास सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज अनुमोदित कार्यों में स्कूल, आंगनबाड़ी भवन, स्वास्थ्य सेवाएँ, पेयजल आपूर्ति, सड़क निर्माण तथा पुल-पुलियों के निर्माण जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं। मंत्री ने यह भी कहा कि स्वीकृत कार्यों का समय-सीमा में पूर्ण होना आवश्यक है, ताकि आमजन को शीघ्र लाभ मिल सके। उन्होंने डीएमएफ के माध्यम से पीवीटीजी समुदाय के लिए प्राथमिकता से विकास कार्य संचालित किए जाने पर संतोष व्यक्त किया।

मंत्री श्री देवांगन ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि स्वीकृत कार्यों की नियमित समीक्षा करें, निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करें तथा नए प्रस्तावों को बजट प्रावधान के अनुरूप स्वीकृति के लिए प्रस्तुत करें।  मंत्री ने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से समन्वयपूर्वक कार्य कर जिले के सर्वांगीण विकास में योगदान देने की अपील की।

सांसद श्रीमती ज्योत्सना महंत ने कहा कि डीएमएफ मद से कोरबा जिले को विकास की नई पहचान मिलेगी। उन्होंने खनन प्रभावित क्षेत्र होने के कारण प्रदूषण नियंत्रण, राखड़ बांधों से उत्पन्न समस्याओं के समाधान तथा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रभावी कदम उठाने पर जोर दिया। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रीष्म ऋतु के दौरान पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित करने, बारिश से पहले स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक दवाओं की उपलब्धता तथा जर्जर स्कूल भवनों को सुधारने की आवश्यकता बताई।

विधायक कटघोरा प्रेमचंद पटेल ने कहा कि डीएमएफ राशि से जिले में महत्वपूर्ण विकास कार्य हो रहे हैं। उन्होंने आकांक्षी जिला होने के कारण कौशल विकास, आजीविका संवर्धन, रोजगार सृजन तथा कृषि क्षेत्र में दलहन-तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देने पर बल दिया। पाली-तानाखार विधायक तुलेश्वर मरकाम ने डीएमएफ के तहत बनाए गए निर्माण पोर्टल को जनहित में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह कंवर ने जिले में निर्माण कार्यों के मूल्यांकन के लिए इंजीनियरों की भर्ती को उपयोगी कदम बताया। महापौर श्रीमती संजू देवी राजपूत ने शिक्षा, स्वास्थ्य, अधोसंरचना और जनसुविधाओं के विस्तार से आमजन को हो रहे लाभों का उल्लेख किया।

कलेक्टर कुणाल दुदावत ने बैठक के विषयों पर विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि यह वित्तीय वर्ष 2026-27 की प्रथम बैठक है। शासन द्वारा डीएमएफ नियमों में संशोधन कर उन्हें इस वित्तीय वर्ष से लागू किया गया है। उन्होंने बैठक के उद्देश्यों को रेखांकित करते हुए बताया कि योजना का मुख्य उद्देश्य खनन के दुष्प्रभावों को कम करना और प्रभावित लोगों की आजीविका एवं जीवन स्तर में सुधार लाना है। उन्होंने डीएमएफ के कार्यों को पारदर्शिता के साथ करने, निर्माण पोर्टल के माध्यम से डीएमएफ सहित अन्य विकास कार्यों की जानकारी मिलने के संबंध में बताया। डीएमएफ नियमों के तहत 70 प्रतिशत राशि उच्च प्राथमिकता वाले कार्यों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और पर्यावरण संरक्षण पर व्यय किया जाएगा तथा 30 प्रतिशत राशि अन्य आधारभूत संरचनाओं पर व्यय की जाएगी। जिले में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रभावित गांवों का चिन्हांकन किया जा चुका है, जिसके अनुसार 5 विकासखंडों के 564 गांव प्रत्यक्ष प्रभावित श्रेणी में आते हैं। उन्होंने बताया कि खनन क्षेत्र से 15 किलोमीटर तक के क्षेत्र को प्रत्यक्ष प्रभावित क्षेत्र और 25 किलोमीटर तक के क्षेत्र को अप्रत्यक्ष प्रभावित क्षेत्र माना जाएगा। इससे डीएमएफ की बड़ी राशि कोरबा जिले के प्रभावित क्षेत्रों में व्यय होगी।

उन्होंने बताया कि गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर के सहयोग से खनन प्रभावित परिवारों का विस्तृत बेसलाइन सर्वे किया जा रहा है, जिसके आधार पर एक वर्ष की पर्सपेक्टिव योजना तैयार होगी। आंकड़ों के अनुसार एसईसीएल की विभिन्न खदानों से प्रभावित 20,069 परिवारों और 4,102 विस्थापित परिवारों के कल्याण हेतु योजनाएँ बनाई जा रही हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 519.11 करोड़ रुपये की प्राप्ति के विरुद्ध 1498 कार्यों के लिए 529.24 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई।

कलेक्टर ने बताया कि प्रभावित क्षेत्र, जनसंख्या और क्षेत्रफल के आधार पर शासन को विस्तृत जानकारी भेज दी गई है तथा स्वीकृत होने के बाद कार्य प्रारंभ किए जाएंगे। उन्होंने गौण खनिज राजस्व के उपयोग, प्रभावित व्यक्तियों एवं परिवारों के चिन्हांकन तथा शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, ग्रामीण एवं नगरीय विकास और अधोसंरचना को दी गई प्राथमिकता के संबंध में भी जानकारी दी।
डीएमएफ शासी परिषद की बैठक में विभिन्न प्रस्तावों को मिली मंजूरी

बैठक में डीएमएफ अंतर्गत विशेष निधियों के अनुमोदन के साथ-साथ खनन प्रभावित प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष क्षेत्रों के निर्धारण, प्रभावित परिवारों एवं विस्थापित परिवारों की सूची के अनुमोदन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर निर्णय लिए गए। इसके अलावा एंडोमेंट फंड के गठन तथा पंचवर्षीय कार्ययोजना तैयार करने के प्रस्ताव, शासी परिषद ने डीएमएफ अंतर्गत परियोजना प्रबंधन इकाई  के चयन, प्रशासनिक व्यय के अनुमोदन तथा वर्ष 2025-26 में किए गए कार्यों की स्वीकृति, खनन प्रभावित क्षेत्रों में व्यक्तियों के चिन्हांकन एवं संबंधित विभागीय कार्यों के अनुमोदन, वार्षिक प्रतिवेदन (वित्तीय वर्ष 2016-17 से 2023-24 तथा 2025-26) के अनुमोदन का प्रस्ताव भी पारित किया गया।

बैठक में डिजिटल सशक्तिकरण को बढ़ावा देते हुए वेबसाइट, वेब पोर्टल, डाटा प्रबंधन प्रणाली, डॉक्यूमेंट्री एवं वेबपेज निर्माण से संबंधित प्रस्तावों को स्वीकृति, जीजीवी के साथ एमओयू, वीसी रूम एवं स्टोरेज संरचना निर्माण, थर्ड पार्टी ऑडिट तथा टोल-फ्री नंबर स्थापित करने जैसे महत्वपूर्ण प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई।

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सड़क पर दुकान सजाने वालों को प्रशासन ने हटवाया

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कोरबा/छुरीकला। नगर पंचायत छुरी बस स्टैंड की मुख्य सड़क पर दुकान लगाकर सामान फैलाकर रखने वाले दुकानदारों के खिलाफ शुक्रवार को विशेष अभियान चलाया गया। अभियान के तहत मुख्य नगरपालिका अधिकारी दीपांकर यादव, पुलिस प्रशासन और पंचायत टीम ने सड़क को कब्जामुक्त कराया।

नगर की मुख्य सड़क पर ठेला-गुमटी लगाने व सड़क तक सामान फैलाने से यातायात व्यवस्था बिगड़ रही थी। मुख्य सड़क होने से बड़े वाहनों का दबाव बना रहता है। सड़क पर दुकान लगाने से यातायात बाधित होता है। दुकान के सामान फैलाने से पैदल चलने व छोटे वाहन चालकों को वाहन खड़े करने में असुविधा होती है। सीएमओ यादव हिदायत दी है कि आगे ऐसा करने पर उनका सामान जब्त कर कार्यवाही की जाएगी। मुख्य नगरपालिका अधिकारी ने दुकानदारों से नगर को स्वच्छ, सुंदर और व्यथित बनाने में प्रशासन की मदद करने कहा।

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लिटियाखार में चलाया गांव चलो-बस्ती चलो अभियान

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कोरबा/गेवरा-दीपका। भारतीय जनता पार्टी के गांव चलो, बस्ती चलो’ अभियान के तहत दीपका मंडल के ग्राम पंचायत लिटियाखार के बिरसा मुंडा शक्ति केंद्र में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान जनप्रतिनिधियों व कार्यकर्ताओं ने घर-घर पहुंचकर आमजन से संपर्क किया और केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं की जानकारी दी।

नगर पालिका अध्यक्ष राजेंद्र राजपूत ने ग्रामीणों से संवाद स्थापित करते हुए कहा कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचाना प्राथमिकता है। उन्होंने हितग्राहियों से मुलाकात कर उनका सम्मान भी किया। राजपूत ने कहा कि जनता का विश्वास और सहयोग ही जनप्रतिनिधियों के लिए ऊर्जा का स्रोत है, जो उन्हें निरंतर जनसेवा के लिए प्रेरित करता है। इस दौरान क्षेत्र के विभिन्न मोहल्लों में जाकर कार्यकर्ताओं ने लोगों से सीधे संवाद किया और उनकी समस्याएं भी सुनीं। अभियान के तहत योजनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।

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प्रगति नगर दीक्षा महिला समिति ने शुरू की प्याऊ सेवा

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कोरबा/गेवरा/दीपका। भीषण गर्मी के बीच सामाजिक सरोकार निभाते हुए दीक्षा महिला समिति दीपका इकाई ने प्रगतिनगर में दो प्याऊ जल सेवा केंद्र की शुरुआत की है। भारतीय स्टेट बैंक परिसर व व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स परिसर में आम लोगों एवं राहगीरों के लिए इस सेवा का शुभारंभ किया गया, जिससे क्षेत्रवासियों को गर्मी में राहत मिलेगी।

समिति की यह पहल एसईसीएल के श्रद्धा महिला मंडल के सामाजिक कार्यों से प्रेरित होकर की गई है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग बैंकिंग एवं अन्य कार्यों के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में गर्मी के मौसम में शुद्ध पेयजल की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था लोगों के लिए काफी उपयोगी साबित होगी। समिति ने भीषण गर्मी को देखते हुए पेड़ों पर मिट्टी के बर्तनों में पक्षियों के लिए पानी और दाने की व्यवस्था की है।

वहीं पशुओं के लिए भी एक स्थान पर जल की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। कार्यक्रम के दौरान लोगों को गुड़-चना, फल, जलजीरा, आम पना, गुलाब शरबत, लस्सी और नींबू पानी का वितरण किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे और समिति के इस प्रयास की सराहना की। समिति की अध्यक्ष रंभा मिश्रा ने कहा कि भीषण गर्मी में राहगीरों को पानी के लिए भटकना न पड़े, इसी उद्देश्य से स्वच्छ, ठंडा और निर्मल पेयजल की व्यवस्था की गई है।

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