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राजस्थान के चूरू में वायुसेना का जगुआर लड़ाकू विमान क्रैश:पायलट और को-पायलट की मौत, शवों के टुकड़े मिले, गांव में बिखरा प्लेन का मलबा

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चूरू,एजेंसी।राजस्थान के चूरू में भारतीय वायु सेना का जगुआर फाइटर जेट क्रैश हो गया है। इस हादसे में विमान के पायलट और को-पायलट शहीद हो गए हैं। जिस जगह प्लेन क्रैश हुआ, वहां बड़े इलाके में फाइटर जेट का मलबा बिखरा पड़ा है।

यह हादसा बुधवार (9 जुलाई) को दोपहर 12 बजकर 40 मिनट पर हुआ। भारतीय वायु सेना ने दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी गठित की है।

चूरू एसपी जय यादव ने बताया- राजलदेसर थाना क्षेत्र के गांव भाणूदा में प्लेन क्रैश हुआ है। इसमें दो लोगों की मौत हुई है। मलबे के पास से बुरी तरह क्षत-विक्षत शव के टुकड़े मिले हैं। बताया जा रहा है कि हादसे से पहले तकनीकी कारणों से पायलट इजेक्ट नहीं कर पाए। पिछले 5 महीनों में देश भर में तीन जगुआर क्रैश हो चुके हैं।

चूरू के राजलदेसर गांव के पास जगह-जगह ऐसे मलबे बिखरे पड़े हैं।

चूरू के राजलदेसर गांव के पास जगह-जगह ऐसे मलबे बिखरे पड़े हैं।

सूरतगढ़ से उड़ा था ट्रेनी जगुआर जेट सेना के सूत्रों के मुताबिक यह जगुआर फाइटर जेट श्रीगंगानगर के पास सूरतगढ़ एयरबेस से उड़ा था। यह जेट टू सीटर था, ट्रेनिंग के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक उन्होंने पहले विमान की गड़गड़ाहट सुनी, फिर जोरदार धमाके की आवाज आई। इसके बाद प्रशासन को घटना की जानकारी दी गई। घटना के ठोस कारणों का पता फिलहाल नहीं चला है। अधिकारियों ने बताया कि जांच पूरी होने के बाद ही विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी। घटनास्थल पर सेना का एक हेलिकॉप्टर भी पहुंचा है, इस हेलिकॉप्टर को सड़क पर लैंड कराया गया।

घटनास्थल पर शव के अलग-अलग टुकड़े मिले हैं।

घटनास्थल पर शव के अलग-अलग टुकड़े मिले हैं।

प्लेन के मलबे पर जगुआर लिखा हुआ दिख रहा है।

प्लेन के मलबे पर जगुआर लिखा हुआ दिख रहा है।

देखिए, घटना से जुड़ी तस्वीरें..

फाइटर जेट जगुआर के टुकड़े पूरे इलाके में बिखर गए। स्थानीय लोगों के मुताबिक उन्हें तेज धमाके की आवाज सुनाई दी थी।

फाइटर जेट जगुआर के टुकड़े पूरे इलाके में बिखर गए। स्थानीय लोगों के मुताबिक उन्हें तेज धमाके की आवाज सुनाई दी थी।

घटना के बाद मौके पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई।

घटना के बाद मौके पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई।

जिस जगह जेट गिरा, वह पूरा इलाका खाली है।

जिस जगह जेट गिरा, वह पूरा इलाका खाली है।

घटना के बाद भारतीय वायु सेना का एक हेलिकॉप्टर मौके पर पहुंचा, आसपास काेई हेलीपैड नहीं होने से इसे सड़क पर ही उतार दिया गया।

घटना के बाद भारतीय वायु सेना का एक हेलिकॉप्टर मौके पर पहुंचा, आसपास काेई हेलीपैड नहीं होने से इसे सड़क पर ही उतार दिया गया।

सीएम भजनलाल शर्मा ने विमान क्रैश हादसे पर जताया शोक

सीएम भजनलाल शर्मा ने विमान क्रैश हादसे पर शोक जताया है। उन्होंने ट्वीट किया- वायुसेना के विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने का दुःखद समाचार प्राप्त हुआ। घटना के तुरंत बाद से प्रशासन अलर्ट मोड पर है और राहत-बचाव कार्य के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं।

विमान क्रैश हादसे पर राज्यपाल ने व्यक्त किया शोक

राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने चूरू जिले के रतनगढ़ क्षेत्र में हुए भारतीय वायुसेना के विमान क्रैश हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने ईश्वर से मृतकों की पुण्यात्मा की शांति और शोक संतप्त परिजनों को यह दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की है।

पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने अर्पित की श्रद्धांजलि

पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने विमान क्रैश में शहीद हुए पायलट और को-पायलट को श्रद्धांजलि अर्पित की।

दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी गठित

भारतीय वायु सेना ने ट्वीट किया, IAF का जगुआर ट्रेनर विमान आज राजस्थान के चूरू के पास एक नियमित प्रशिक्षण मिशन के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी गठित की गई है।

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अमेरिकी रिपोर्ट में दावा- भारत के पास 190 परमाणु बम:35 और बनाने लायक प्लूटोनियम भी, समुद्र में बना रहा ‘न्यूक्लियर कवच’

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नई दिल्ली, एजेंसी। भारत के पास 190 परमाणु हथियार हैं। अगले कुछ सालों में यह 35 और बना सकता है, इस तरह यह संख्या 225 तक पहुंच सकती है। यह जानकारी अमेरिकी थिंक टैंक फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स (FAS) की नई रिपोर्ट में सामने आई है।

इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत समुद्र से परमाणु हमला करने की क्षमता को भी लगातार मजबूत कर रहा है। परमाणु ऊर्जा से चलने वाली बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों के बेड़े के जरिए भारत समुद्र में अपना ‘न्यूक्लियर कवच’ बना रहा है।

इन 190 परमाणु हथियारों में से 160 से ज्यादा मौजूदा मिसाइलों के लिए हैं, बाकी नई मिसाइलों के लिए तैयार रखे गए हैं। FAS का अनुमान है कि आने वाले समय में भारत के परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ सकती है।

भारत के पास 730 किलो प्लूटोनियम

भारत लगातार अपनी परमाणु ताकत को आधुनिक बना रहा है। पिछले कुछ वर्षों में कई नए परमाणु सक्षम हथियार सेना में शामिल किए गए हैं। वहीं, कुछ नए हथियार सिस्टम अभी तैयार किए जा रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की शुरुआत तक भारत के पास करीब 730 किलो हथियार बनाने वाला प्लूटोनियम होने का अनुमान है। इतने प्लूटोनियम से 225 तक वॉरहेड बनाए जा सकते हैं। हालांकि रिपोर्ट खुद साफ करती है कि यह सिर्फ अनुमान है, वास्तविक संख्या वॉरहेड के डिजाइन और रिजर्व में रखी सामग्री पर निर्भर करती है।

रिपोर्ट में अग्नि-V का भी जिक्र: एक मिसाइल, कई निशाने

FAS की रिपोर्ट में अग्नि-V बेहतर बनाने का भी जिक्र है। कहा गया है कि इस मिसाइल में MIRV तकनीक का परीक्षण किया गया है। इसका मतलब एक मिसाइल में कई ऐसे वॉरहेड ले जाने की क्षमता विकसित करना है, जिन्हें अलग-अलग लक्ष्यों की ओर भेजा जा सकता है।

2024 के बाद मई 2026 में भी कई पेलोड के साथ परीक्षण हुआ। FAS का अनुमान है कि अग्नि-V संभवतः तीन वॉरहेड ले जा सकती है, हालांकि ऐसा करने पर इसकी अधिकतम रेंज प्रभावित हो सकती है।

नया रिएक्टर भी गेमचेंजर

अप्रैल 2026 में भारत के 500 मेगावाट प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने पहली बार क्रिटिकलिटी हासिल की। FAS के अनुमान के मुताबिक 80% क्षमता पर चलने पर यह सालाना करीब 140 किलो प्लूटोनियम-239 पैदा कर सकता है। इससे करीब 35 वॉरहेड बन सकते हैं। आगे ऐसे और फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों की योजना है।

मार्च, 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर के नियंत्रण कक्ष का दौरा किया था।

मार्च, 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर के नियंत्रण कक्ष का दौरा किया था।

जमीन के साथ समुद्र में भी बढ़ रही ताकत

FAS के मुताबिक, भारत अपनी न्यूक्लियर ट्रायड को भी मजबूत कर रहा है। इसका मतलब है कि देश जमीन, हवा और समुद्र तीनों माध्यमों से परमाणु हथियार इस्तेमाल करने की क्षमता विकसित कर रहा है।

भारत ने अप्रैल 2026 में अपनी तीसरी स्वदेशी परमाणु ऊर्जा से चलने वाली बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी INS अरिधमान को कमीशन किया। FAS के मुताबिक इस पनडुब्बी में 8 मिसाइल ट्यूब हैं, यह क्षमता INS अरिहंत और INS अरिघात में मौजूद संख्या से दोगुनी है। अरिहंत- क्लास पनडुब्बी, INS अरिसुदन पनडुब्बियों को 2027 में कमीशन किए जाने की योजना है।

भारत का फोकस अब लंबी दूरी की मिसाइलों पर

FAS के मुताबिक, भारत की परमाणु नीति लंबे समय से पाकिस्तान को ध्यान में रखकर बनाई गई है। लेकिन अब भारत लंबी दूरी की मिसाइलें और समुद्र से परमाणु हमला करने की क्षमता भी बढ़ा रहा है। इससे भारत की परमाणु ताकत का फोकस चीन तक भी बढ़ रहा है। भारत की घोषित नीति ‘नो फर्स्ट यूज’ की है। यानी भारत पहले परमाणु हथियार इस्तेमाल नहीं करने की बात कहता है। इसके बावजूद, नए मिसाइल सिस्टम और परमाणु हथियारों के आधुनिकीकरण से दक्षिण एशिया में परमाणु ताकत का संतुलन बदल रहा है।

दुनिया के 9 देशों के पास कुल 12,187 परमाणु हथियार

SIPRI इयरबुक 2026 के अनुसार फ्रांस, चीन, भारत,पाकिस्तान,उत्तर कोरिया और इजराइल के पास कुल 12,187 परमाणु हथियार हैं। इसमें से 9,745 इस्तेमाल के लिए तैयार हैं।

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BRICS में जिनपिंग-पुतिन दोनों आएंगे:चीनी राष्ट्रपति का गलवान झड़प के बाद पहला भारत दौरा, PM मोदी से बैठक संभव

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नई दिल्ली, एजेंसी। BRICS समिट में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दोनों भारत आएंगे। चीन के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को जिनपिंग के भारत दौरे की पुष्टि की। इससे दो दिन पहले रूस ने भी पुतिन के भारत आने की पुष्टि की थी।

जिनपिंग का यह 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद भारत का पहला दौरा होगा। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक होने की भी उम्मीद है।

15 जून 2020 को पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हुई झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। चीन ने बाद में अपने चार सैनिकों के मारे जाने की बात मानी थी।

नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को BRICS समिट आयोजित होगा। इसमें चीन और रूस समेत 11 सदस्य देशों के नेता शामिल होंगे।

जिनपिंग ने आखिरी बार अक्टूबर 2019 में भारत का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने तमिलनाडु के महाबलीपुरम में मोदी से मुलाकात की थी।

जिनपिंग ने आखिरी बार अक्टूबर 2019 में भारत का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने तमिलनाडु के महाबलीपुरम में मोदी से मुलाकात की थी।

गलवान हिंसा के बाद बिगड़े थे भारत-चीन के रिश्ते

भारत और चीन के रिश्ते 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद बुरी तरह बिगड़ गए थे। इस झड़प में दोनों देशों के सैनिक मारे गए थे। इसके बाद दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को लेकर तनाव काफी बढ़ गया।

हालांकि, इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी की कई मौकों पर मुलाकात हुई है। दोनों नेता दूसरे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के दौरान आमने-सामने आए हैं। पिछले साल चीन में हुई शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO की बैठक के दौरान भी दोनों नेताओं की मुलाकात हुई थी।

इस बार नई दिल्ली में होने वाले BRICS समिट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग के बीच अलग से द्विपक्षीय बैठक होने की उम्मीद है।

भारत और चीन के अधिकारी पिछले कई महीनों से दोनों देशों के रिश्तों को स्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल 24 अगस्त को चीन गए थे।

NSA अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच 25 अगस्त को सीमा विवाद समेत कई मुद्दों पर बातचीत हुई थी।

NSA अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच 25 अगस्त को सीमा विवाद समेत कई मुद्दों पर बातचीत हुई थी।

सीमा विवाद समेत कई मुद्दे भारत के एजेंडे में

भारत और चीन के बीच सिर्फ सीमा विवाद ही नहीं, बल्कि व्यापार और आर्थिक रिश्ते भी बातचीत का हिस्सा हैं। भारत चीन के साथ अपने बड़े व्यापार घाटे को कम करना चाहता है।

इसके अलावा रेयर अर्थ मैगनेट और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट जैसे जरूरी सामान की सप्लाई को लेकर भी भारत अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है।

BRICS समिट की अध्यक्षता कर रहा है भारत

इस साल BRICS की कमान भारत के पास है। BRICS दुनिया की बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह है। इसमें भारत, रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के साथ मिस्र, ईरान, इथियोपिया, UAE और इंडोनेशिया भी शामिल हैं।

भारत की अध्यक्षता में पूरे साल अलग-अलग शहरों में बैठकें, मंत्रीस्तरीय सम्मेलन और कई स्तर की चर्चाएं हो रही हैं।

भारत का फोकस ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने, आर्थिक सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल तकनीक, आतंकवाद से निपटने और सप्लाई चेन मजबूत करने पर है। यानी BRICS को सिर्फ राजनीतिक मंच नहीं, बल्कि व्यापार, निवेश और विकास के बड़े मंच के तौर पर आगे बढ़ाने की कोशिश है।

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CJI की नोएडा मजिस्ट्रेट को फटकार, बोले- हिम्मत कैसे हुई:CJP प्रदर्शन से जुड़ी FIR रद्द करने का आदेश दे चुके, फिर भी नोटिस क्यों

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नोएडा, एजेंसी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने नोएडा के मजिस्ट्रेट को फटकार लगाई। बुधवार को CJI सूर्यकांत ने कहा, ‘जब सुप्रीम कोर्ट ने छात्र विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी FIR रद्द कर दी हैं। विरोध प्रदर्शनों को लेकर किसी भी छात्र के खिलाफ भविष्य में जबरदस्ती की कार्रवाई पर रोक लगाई है। ऐसे में एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने छात्र को नोटिस जारी करने की हिम्मत कैसे की? कोई भी मजिस्ट्रेट उस आदेश का उल्लंघन नहीं कर सकता।’

दरअसल, 4 सितंबर को नोएडा कमिश्नरेट के थर्ड एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट आर के सिसोदिया ने दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) प्रदर्शन में शामिल छात्र अक्षत त्रिपाठी के खिलाफ नोटिस जारी किया था। इसमें 5 लाख रुपए का बॉन्ड और इतनी ही रकम के दो जमानतदार पेश करने को कहा गया था। इसके बाद छात्र ने मंगलवार को वीडियो जारी कर कहा था- सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद मुझे विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए धमकाया जा रहा है।

बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट विश्वजीत भट्टाचार्य ने मौखिक रूप से CJI की अध्यक्षता वाली बेंच को यह बात बताई। उन्होंने बताया कि एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने एक छात्र को नोटिस जारी कर पूछा कि शांति बनाए रखने के लिए 5 लाख रुपए का पर्सनल बॉन्ड क्यों न भरवाया जाए। बाद में नोटिस वापस ले लिया गया।

यह वह नोटिस है, जिसे नोएडा कमिश्नरेट के थर्ड एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कार्यालय ने छात्र को जारी किया था।

यह वह नोटिस है, जिसे नोएडा कमिश्नरेट के थर्ड एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कार्यालय ने छात्र को जारी किया था।

सुप्रीम कोर्ट बोला- जिला मजिस्ट्रेट से जवाब मांगेंगे

वकील भट्टाचार्य ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- यह भारत के छात्रों के साथ एक प्रयोग किया जा रहा है। इसका असर पूरे देश पर पड़ेगा। पहले अवमानना की गई और फिर उसे वापस लिया गया। इस अवमानना को इस तरह सुधारा नहीं जा सकता।

यह कोर्ट की गरिमा की अवमानना है। नोएडा और यूपी के अधिकारी छात्रों के मन में डर का माहौल नहीं बना सकते हैं। इस पर CJI सूर्यकांत ने भरोसा दिलाते हुए कहा- हम जिला मजिस्ट्रेट से इस पर जवाब मांगेंगे।

तस्वीर छात्र अक्षत त्रिपाठी की है। मंगलवार को उन्होंने वीडियो जारी करके कहा था- मैं छात्र हूं। ऐसे में इतनी बड़ी राशि की शर्त मेरे लिए कैसे व्यावहारिक है

तस्वीर छात्र अक्षत त्रिपाठी की है। मंगलवार को उन्होंने वीडियो जारी करके कहा था- मैं छात्र हूं। ऐसे में इतनी बड़ी राशि की शर्त मेरे लिए कैसे व्यावहारिक है

4 सितंबर को नोटिस दिया, अगले दिन रद्द कर दिया

छात्र अक्षत त्रिपाठी प्रयागराज के झूंसी के रहने वाले हैं। वह गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) से BA-LLB कर रहे हैं। अक्षत त्रिपाठी स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ( SFI) की उत्तर प्रदेश स्टेट कमेटी के सदस्य भी हैं। 4 सितंबर 2026 को उनके खिलाफ नोएडा कमिश्नरेट के थर्ड एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कार्यालय की ओर से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 130 के तहत नोटिस जारी किया गया।

कोर्ट ने नोटिस में कहा गया था- यह मानने के पर्याप्त आधार हैं कि त्रिपाठी विश्वविद्यालय के छात्रों को CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित कर रहे थे। वह छात्रों के बीच सरकार विरोधी और भ्रामक सूचनाएं फैला रहे थे। ऐसी गतिविधियों से तनाव पैदा हो सकता है। सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

अक्षत त्रिपाठी से पूछा गया था कि क्यों न उन्हें 6 महीने तक शांति बनाए रखने के लिए पाबंद किया जाए। इसके लिए उनसे 5 लाख रुपए का निजी मुचलका और इतनी ही राशि के दो जमानतदार पेश करने को कहा जाए। मामले में सुनवाई के लिए 5 सितंबर की तारीख तय की गई थी।

ACP रवि शंकर ने बताया-

जांच के दौरान अक्षत त्रिपाठी का नाम सामने आया था। पता चला था कि वह जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट में शामिल होने गया था। पुलिस ने वॉट्सऐप के जरिए छात्र को नोटिस भेजा था। 5 सितंबर को नोटिस कैंसिल कर दिया गया। छानबीन में पता चला कि छात्र उस दौरान वहां मौजूद नहीं था।

ACP ने बताया कि इससे पहले नवंबर में छात्र ने आत्महत्या करने की बात कहते हुए वीडियो बनाया था, जो वायरल हो गया था। वीडियो वायरल होने के बाद वह गायब हो गया था, जिसके बाद पुलिस ने उसे तलाशा था।

छात्र ने वीडियो जारी करके कहा- क्या सरकार की नीतियों के खिलाफ बोलना जुर्म

  • छात्र ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट किया। इसमें कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद CJP प्रदर्शन में शामिल होने के लिए धमकाया जा रहा है। क्या लोकतंत्र में सरकार की नीतियों के खिलाफ बोलना या पेपर लीक जैसे मुद्दों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना अपराध है? इसी मामले में ग्रेटर नोएडा मजिस्ट्रेट की तरफ से मुझे नोटिस मिला है। इसमें 5 लाख रुपए का निजी बॉन्ड देने को कहा गया है। मैं छात्र हूं और मेरी कोई व्यक्तिगत आय नहीं है। ऐसे में इतनी बड़ी राशि की शर्त मेरे लिए कैसे व्यावहारिक है?
  • नोटिस में आरोप है कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन में शामिल होकर मैंने विश्वविद्यालय के छात्रों को सरकार के खिलाफ भड़काया। सवाल है कि सरकार की नीति की आलोचना करना, सरकार से सवाल पूछना या पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठाना भड़काना कैसे हो गया? मुझ पर लगाए गए आरोपों का आधार और प्रमाण क्या है?
  • मैं 3 महीने से विश्वविद्यालय गया ही नहीं हूं। 20 जुलाई के प्रदर्शन से करीब डेढ़ महीने पहले ही अपने घर इलाहाबाद आ चुका था। ऐसे में मैंने विश्वविद्यालय के छात्रों को भड़काया कैसे? मैं इस कार्रवाई की निंदा करता हूं और निष्पक्ष जांच की मांग करता हूं।

9 दिन पहले SC जंतर-मंतर प्रोटेस्ट की सभी FIR रद्द की थीं

सुप्रीम कोर्ट ने 9 दिन पहले कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन से जुड़ी सभी FIR को रद्द कर दिया। यह आदेश देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज मामलों पर लागू होगा। कोर्ट ने साफ किया था कि जिन प्रदर्शनकारियों का आपराधिक रिकॉर्ड है, उन पर केस चलता रहेगा। ये FIR 20 से 25 जुलाई के बीच जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पों के बाद दर्ज की गई थीं।

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