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एयर इंडिया के सीईओ ने दिया इस्तीफा, जानें कौन हैं कैंपबेल विल्सन?

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नई दिल्ली,एजेंसी।  Air India के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) कैंपबेल विल्सन ने अपना कार्यकाल समाप्त होने से पहले ही इस्तीफा दे दिया है। एयरलाइन ने अभी तक इस घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।

खबरों के मुताबिक, विल्सन फिलहाल नोटिस पीरियड पर हैं। Tata Group की एयरलाइन ने अभी तक कोई सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया है। एयरलाइन को भेजे गए इस प्रश्न का तत्काल कोई उत्तर नहीं मिला। यह भी स्पष्ट नहीं है कि कंपनी को उनका उत्तराधिकारी मिल गया है या नहीं।

बोर्ड पिछले साल से ही विल्सन के स्थान पर नए CEO की तलाश कर रहा था। अहमदाबाद विमान दुर्घटना के बाद से एयर इंडिया उथल-पुथल भरे दौर से गुजर रही है और निजीकरण प्रक्रिया के तहत सरकार से अधिग्रहण के बाद अपेक्षित गति से वित्तीय सुधार करने में सक्षम नहीं रही है, ऐसे में टाटा समूह ने एयर इंडिया के लिए एक नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी की तलाश शुरू की थी।

खबरों के अनुसार, पिछले सप्ताह हुई बोर्ड की बैठक में विल्सन का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया था, लेकिन उत्तराधिकारी मिलने तक वे कंपनी में बने रहेंगे। सरकार द्वारा टाटा समूह को एयर इंडिया बेचने के बाद, उन्हें 2022 में पांच साल के अनुबंध पर एयर इंडिया के सीईओ और प्रबंध निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया था। उनका कार्यकाल जुलाई 2027 में समाप्त होना था। एयरलाइन में शामिल होने से पहले, उन्होंने सिंगापुर एयरलाइंस की पूर्ण स्वामित्व वाली कम लागत वाली सहायक कंपनी स्कूट के CEO के रूप में कार्य किया था।

इस बीच, पिछले साल जून में अहमदाबाद में हुए विमान हादसे के बाद से एयर इंडिया नियामकीय जांच के दायरे में है, जिसमें 260 लोगों की जान चली गई थी। ईंधन की उच्च लागत और नए विमानों की देरी से भी परिचालन प्रभावित हुआ है। एयर इंडिया में नेतृत्व परिवर्तन प्रतिद्वंद्वी इंडिगो द्वारा पीटर एल्बर्स के इस्तीफे के बाद विलियम वॉल्श को नया सीईओ नियुक्त करने की घोषणा के कुछ ही दिनों बाद हुआ है। वॉल्श 3 अगस्त से कार्यभार संभालेंगे।

कौन हैं कैंपबेल विल्सन?

Campbell Wilson ने अपने करियर की शुरुआत 1996 में Singapore Airlines में मैनेजमेंट ट्रेनी के रूप में की थी। शुरुआती दौर में ही उन्होंने अपने काम और समझ से अलग पहचान बना ली, जिसके चलते उन्हें अलग-अलग देशों में काम करने का मौका मिला। उन्होंने कनाडा, हांगकांग और जापान जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी सेवाएं दीं, जिससे उन्हें ग्लोबल एविएशन का गहरा अनुभव मिला।

न्यूजीलैंड के University of Canterbury से मास्टर ऑफ कॉमर्स (फर्स्ट क्लास ऑनर्स) की पढ़ाई करने वाले विल्सन ने बाद में एक नई पहचान तब बनाई जब उन्होंने लो-कॉस्ट एयरलाइन Scoot की कमान संभाली। वह इसके फाउंडिंग सीईओ रहे और 2011 से 2016 तक इसे खड़ा करने और आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।

उनकी नेतृत्व क्षमता पर भरोसा जताते हुए 2020 में उन्हें दोबारा स्कूट का सीईओ बनाया गया। इसके बाद 2022 में उन्होंने Air India की कमान संभाली, जहां वे कंपनी को नई दिशा देने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। कैंपबेल विल्सन का करियर इस बात का उदाहरण है कि कैसे एक साधारण शुरुआत से भी वैश्विक स्तर पर बड़ी जिम्मेदारियां हासिल की जा सकती हैं।

इससे पहले Indigo की मूल कंपनी इंटरग्लोब एविएशन लिमिटेड ने पिछले महीने वॉल्श को मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया था, जो नियामकीय अनुमोदन के अधीन है, क्योंकि एल्बर्स ने मार्च की शुरुआत में कम लागत वाली एयरलाइन के सीईओ पद से इस्तीफा दे दिया था। एयरलाइन ने एक बयान में कहा कि वाल्श का आईएटीए (अंतरराष्ट्रीय हवाई परिवहन संघ) में कार्यकाल 31 जुलाई, 2026 को समाप्त हो रहा है और उनके 3 अगस्त, 2026 तक कार्यभार संभालने की उम्मीद है।

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‘महिला आरक्षण बिल का समर्थन न करना विपक्ष की बड़ी राजनीतिक गलती है’: कैबिनेट बैठक में पीएम मोदी बोले

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नई दिल्ली,एजेंसी। संसद में महिला आरक्षण बिल पर सत्ता पक्ष और विपक्ष में टकराव जारी है। प्रियंका गांधी ने महिला आरक्षण बिल को परिसीमन का धोखा बताया है। पीएम मोदी ने  कैबिनेट बैठक में विपक्ष पर कड़ा प्रहार किया है। सूत्रों के मुताबिक, पीएम ने कहा है कि महिला आरक्षण बिल का समर्थन का इनकार विपक्ष की एक बड़ी  राजनीतिक गलती है और इसके लिए उन्हें भविष्य में  गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे।

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महिला आरक्षण से जुड़ा बिल 54 वोट से गिरा:पास होने के लिए चाहिए थे 352, मिले 298; मोदी सरकार बिल पास कराने में पहली बार नाकाम

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नई दिल्ली,एजेंसी। महिला आरक्षण बिल से जुड़ा संविधान (131वां) संशोधन बिल सरकार लोकसभा में पास नहीं करा पाई। इसमें संसद की 543 सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान था। 21 घंटे की चर्चा के बाद वोटिंग हुई। लोकसभा में मौजूद 528 सांसदों ने वोट डाले। पक्ष में 298, विपक्ष में 230 वोट पड़े। बिल पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी। 528 का दो तिहाई 352 होता है। इस तरह ये बिल 54 वोट से गिर गया। लोकसभा में कुल 543 सीटें हैं, लेकिन 3 सीटें खाली होने की वजह से मौजूदा सांसद 540 है।

सरकार ने दो बिल वोटिंग के लिए पेश ही नहीं किए

पहला- परिसीमन संशोधन संविधान बिल 2026

दूसरा- केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल 2026

सरकार ने इन पर वोटिंग से इनकार किया। कहा कि ये बिल एक-दूसरे से लिंक है इसलिए वोटिंग की जरूरत नहीं है।

12 साल के शासन में यह पहला मौका जब मोदी सरकार सदन में कोई बिल पास नहीं करा पाई। इससे पहले अमित शाह ने एक घंटा स्पीच दी थी। कहा कि अगर ये बिल पास नहीं होते हैं तो जिम्मेदारी विपक्ष की होगी। देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनकी राह का रोड़ा कौन है।

बिल गिरने के बाद विपक्ष ने कहा- हमने हरा दिया

  • राहुल गांधी ने कहा- हमने संविधान पर हुए हमले को हरा दिया है। हमने साफ कहा है कि यह महिला आरक्षण बिल नहीं है, बल्कि यह भारत की राजनीतिक संरचना को बदलने का एक तरीका है।
  • प्रियंका ने कहा– यह हमारे लोकतंत्र और देश की एकता के लिए एक बड़ी जीत है। जैसा कि मैंने अंदर कहा, यह संविधान पर हमला था, और हमने इसे विफल कर दिया है, जो कि एक अच्छी बात है।
  • शशि थरूर ने कहा– हमने हमेशा कहा है कि हम महिला आरक्षण का पूर्ण समर्थन करते हैं और आज भी इसके पक्ष में मतदान करने को तैयार हैं। हालांकि, इसे परिसीमन से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
  • एमके स्टालिन ने कहा- 23 अप्रैल को हम दिल्ली का अहंकार और उस अहंकार का समर्थन करने वाले गुलामों को हराएंगे।

संसद के बाहर भाजपा महिला सांसदों के प्रदर्शन की तस्वीरें…

बिल गिरने के बाद एनडीए की महिला सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया।

बिल गिरने के बाद एनडीए की महिला सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया।

महिला सांसदों ने ‘महिला का अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान’ के नारे लगाए।

महिला सांसदों ने ‘महिला का अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान’ के नारे लगाए।

सरकार को पता था बिल पास नहीं होगा, मोदी ने 3, शाह ने एक अपील की

सरकार जानती थी कि उसके पक्ष में लोकसभा में नंबर नहीं है, इसीलिए सरकार बार-बार सभी सांसदों से समर्थन की मांग कर रही थी। पीएम नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू समेत बीजेपी और NDA नेताओं ने विपक्ष से बिल को सपोर्ट करने की अपील की।

पीएम की 3 अपील

  • 13 अप्रैल एक कार्यक्रम में: मैं आपसे आग्रह करता हूं कि अपने स्थानीय सांसदों को पत्र लिखें और इस ऐतिहासिक संसद सत्र में हिस्सा लेते समय उनका हौसला बढ़ाएं।
  • 16 अप्रैल लोकसभा में: ‘हमें क्रेडिट नहीं चाहिए, जैसे ही पारित हो जाए तो मैं एड देकर सबको धन्यवाद देने को तैयार हूं। सामने से क्रेडिट का ब्लैंक चेक आपको दे रहा हूं।’
  • 17 अप्रैल सोशल मीडिया में: सभी सांसद वोटिंग से पहले अपनी अंतर्रात्मा की आवाज सुनें।

शाह ने कहा- महिलाएं माफ नहीं करेंगी

17 अप्रैल लोकसभा में अमित शाह ने कहा कि देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनके रास्ते का रोड़ा कौन है। यहां पर तो शोर-शराबा करके बच जाओगे लेकिन माताओं-बहनों का आक्रोश बाहर पता चलेगा। चुनाव में वोट मांगने जाएंगे तो मातृशक्ति हिसाब मांगेगी।

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‘परिसीमन एक ‘राजनीतिक नोटबंदी’ साबित होगा’- शशि थरुर का केंद्र सरकार पर तीखा हमला

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नई दिल्ली,एजेंसी। लोकसभा में शुक्रवार को ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ और ‘परिसीमन’ (Delimitation) पर चल रही बहस के दौरान कांग्रेस नेता शशि थरूर ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया की तुलना ‘नोटबंदी’ से करते हुए इसे भारतीय लोकतंत्र की आत्मा के लिए खतरा बताया।

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थरुर ने अपने भाषण में कहा

शशि थरूर ने कहा कि दशकों से महिला आरक्षण का वादा किया गया और इसे टाला गया। आज जब इस पर राजनीतिक सहमति बनी है, तब सरकार ने इसे परिसीमन जैसी जटिल प्रक्रिया से बांधकर महिलाओं की आकांक्षाओं को ‘बंधक’ बना लिया है। थरूर ने सरकार की जल्दबाजी पर सवाल उठाते हुए कहा, “आपने परिसीमन का प्रस्ताव वैसी ही जल्दबाजी में पेश किया है जैसी नोटबंदी के समय दिखाई थी। हम सब जानते हैं कि नोटबंदी ने देश का क्या हाल किया था। परिसीमन भी एक ‘राजनीतिक नोटबंदी’ साबित होगा, इसे मत कीजिए।”

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थरूर ने उत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों के बीच शक्ति संतुलन बिगड़ने की आशंका जताई। उन्होंने तर्क दिया कि केरल और तमिलनाडु जैसे दक्षिणी राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण और मानव विकास में बेहतरीन काम किया है। यदि परिसीमन जनसंख्या के आधार पर हुआ, तो जनसंख्या नियंत्रण में विफल रहने वाले राज्यों को अधिक राजनीतिक ताकत मिलेगी और अच्छा काम करने वाले राज्य हाशिए पर चले जाएंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आर्थिक रूप से समृद्ध और विकासशील राज्यों की आवाज को दबाया गया, तो इससे देश के संघीय ढांचे पर बुरा असर पड़ेगा। उनके अनुसार, यह “बहुसंख्यकवाद की तानाशाही” (Tyranny of the democratic majority) पैदा करने जैसा होगा।

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