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विदेश

रूस का नया ‘ड्रोन शिकारी’ मैदान मेंः पुतिन की सुरक्षा से युद्धभूमि तक पहुंचा ‘योल्का’, लॉन्च होते ही मचाता है तबाही

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मॉस्को, एजेंसी। रूस ने आधुनिक युद्ध में तेजी से बढ़ते ड्रोन खतरे का मुकाबला करने के लिए एक नया पोर्टेबल एंटी-ड्रोन सिस्टम “योल्का” (Yolka) तैनात किया है। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में रूसी सैनिक पिस्तौल जैसी दिखने वाली लॉन्चर डिवाइस से एक छोटे इंटरसेप्टर ड्रोन को लॉन्च करता दिखाई देता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, लॉन्च होने के बाद यह इंटरसेप्टर ड्रोन स्वतः लक्ष्य की पहचान करता है, उसका पीछा करता है और हवा में ही टक्कर मारकर उसे नष्ट कर देता है।

विक्ट्री डे पर पहली बार दिखा था सिस्टम
यह सिस्टम पहली बार मई 2025 में रूस के विक्ट्री डे परेड के दौरान चर्चा में आया था, जब राष्ट्रपति Vladimir Putin के पास तैनात एक सुरक्षा अधिकारी के हाथ में यह कॉम्पैक्ट डिवाइस दिखाई दी थी। बाद में अधिकारियों ने इसकी पहचान “योल्का” एंटी-ड्रोन सिस्टम के रूप में की।

कैसे काम करता है योल्का?
योल्का एक छोटे इंटरसेप्टर ड्रोन को गन जैसी लॉन्चर से छोड़ता है। यह ड्रोन आसमान में जाकर दुश्मन ड्रोन की तलाश करता है और उसे ट्रैक करते हुए पीछा करता है। सबसे खास बात यह है कि इसमें कोई विस्फोटक वारहेड नहीं होता। यह दुश्मन ड्रोन से तेज रफ्तार में सीधी टक्कर मारकर उसे गिरा देता है। बताया जा रहा है कि इसमें कैमरे, सेंसर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित ट्रैकिंग सिस्टम लगे हैं, जो लॉन्च के बाद इसे स्वायत्त रूप से लक्ष्य तक पहुंचाते हैं।

क्या हैं इसकी क्षमताएं?

  • रेंज: लगभग 3 किलोमीटर
  • गति: 200 से 250 किलोमीटर प्रति घंटा
  • वजन: हल्का और पोर्टेबल
  • अनुमानित लागत: लगभग 500 अमेरिकी डॉलर प्रति इंटरसेप्टर

यूक्रेन युद्ध से मिली सीख
रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध ने दिखाया है कि छोटे निगरानी ड्रोन और एफपीवी (FPV) कामिकाज़े ड्रोन युद्ध के स्वरूप को बदल रहे हैं। ऐसे में योल्का जैसे सिस्टम सैनिकों को अग्रिम मोर्चे पर कम लागत में तत्काल ड्रोन सुरक्षा उपलब्ध करा सकते हैं। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रणाली दावों के अनुरूप प्रदर्शन करती है, तो भविष्य में एंटी-ड्रोन तकनीक के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकती है।

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कोलंबिया चुनाव में ट्रंप समर्थक उम्मीदवार को बढ़त, सत्ता पक्ष ने परिणामों पर उठाए सवाल

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बोगोटा, एजेंसी। दक्षिण अमेरिकी देश Colombia में राष्ट्रपति चुनाव के पहले दौर के नतीजों ने सियासी मुकाबले को और रोमांचक बना दिया है। अपराध के खिलाफ सख्त रुख और दक्षिणपंथी विचारधारा के लिए जाने जाने वाले Abelardo de la Espriella ने पहले दौर में बढ़त हासिल की है। हालांकि किसी भी उम्मीदवार को 50 प्रतिशत से अधिक वोट नहीं मिले, इसलिए चुनाव अब दूसरे दौर में जाएगा। जून में होने वाले रनऑफ चुनाव में दे ला एस्प्रीएला का मुकाबला सत्तारूढ़ गठबंधन हिस्टोरिक पैक्ट के उम्मीदवार Ivan Cepeda से होगा।

किसे कितने वोट मिले? 
निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार 99.98 प्रतिशत मतों की गिनती पूरी होने तक एबेलार्डो डे ला एस्प्रिएला को 44%  तथा इवान सेपेडाको 41% वोट मिले ।यह नतीजा कई राजनीतिक विश्लेषकों के लिए चौंकाने वाला रहा, क्योंकि मतदान से पहले अधिकांश जनमत सर्वेक्षणों में सेपेदा को बढ़त दिखाई जा रही थी।

सत्तारूढ़ दल ने नतीजों पर उठाए सवाल 
सेपेदा और उनके सहयोगी, वर्तमान राष्ट्रपति Gustavo Petro ने चुनाव परिणामों पर सवाल उठाए हैं। दोनों नेताओं ने दावा किया कि लाखों वोटों में गड़बड़ी हुई हो सकती है और विदेशी तत्वों ने चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित किया है। हालांकि, अब तक इन आरोपों के समर्थन में कोई सार्वजनिक सबूत पेश नहीं किया गया है।
सेपेदा ने कहा कि वे अंतिम रूप से परिणाम स्वीकार करने से पहले चुनाव आयोग की जांच रिपोर्ट का इंतजार करेंगे।

‘द टाइगर’ की बढ़ती लोकप्रियता 
दे ला एस्प्रीएला को उनके समर्थक “एल टिग्रे” (The Tiger) के नाम से जानते हैं। उन्होंने चुनाव अभियान के दौरान अपराधी गिरोहों और सशस्त्र समूहों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का वादा किया। उन्होंने खुद को अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की नीतियों का समर्थक बताते हुए कानून-व्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा और कठोर प्रशासन को अपनी प्राथमिकता बनाया।

जहां सेपेदा ने देश में सक्रिय गुरिल्ला संगठनों और आपराधिक गिरोहों के साथ बातचीत कर “पूर्ण शांति” स्थापित करने की नीति का समर्थन किया है, वहीं दे ला एस्प्रीएला का कहना है कि हिंसक समूहों के खिलाफ सैन्य और कानूनी कार्रवाई ही देश में स्थिरता ला सकती है। इस वजह से दूसरा दौर केवल दो उम्मीदवारों के बीच मुकाबला नहीं, बल्कि कोलंबिया की भविष्य की दिशा तय करने वाली वैचारिक लड़ाई भी माना जा रहा है।

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ब्रिटेन में भारतीय युवक ने सिखाया सबकः वादा तोड़ने वाली कंपनी पर ठोका मुकद्दमा, मिला लाखों का मोटा मुआवजा

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लंदन, एजेंसी। ब्रिटेन में रहने वाले केरल के युवक शाबिन शाजी  (Shabin Shaji) को रोजगार विवाद में बड़ी कानूनी जीत मिली है। ब्रिटेन के एक रोजगार न्यायाधिकरण (Employment Tribunal) ने उनकी पूर्व नियोक्ता कंपनी Swan Care Solutions Ltd को लगभग 30,000 पाउंड (करीब 38 लाख रुपए) मुआवजा देने का आदेश दिया है। शाबिन शाजी पोस्ट-ब्रेक्जिट वीजा योजना के तहत केयर वर्कर के रूप में भारत से ब्रिटेन गए थे। इस योजना के तहत नियोक्ता पर यह कानूनी जिम्मेदारी होती है कि वह कर्मचारी को वास्तविक रोजगार उपलब्ध कराए। हालांकि, न्यायाधिकरण के अनुसार कंपनी ने अनुबंध पर हस्ताक्षर करने के बावजूद शाजी को वादा किया गया काम नहीं दिया। इससे उनकी आय का कोई स्रोत नहीं बचा और वे गंभीर आर्थिक संकट में फंस गए।

सुनवाई के दौरान शाजी ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि उनके पास खाने तक के पैसे नहीं बचे थे। उन्होंने कहा कि जीवित रहने के लिए उन्हें नल का पानी पीना पड़ता था और एक्सपायरी डेट के करीब पहुंच चुकी सस्ती ब्रेड खरीदनी पड़ती थी। शाजी के अनुसार, वे स्थानीय दुकानों में उन मुफ्त केले और ब्रेड की तलाश करते थे जो जरूरतमंदों के लिए रखे जाते थे। रविवार को चर्च जाने पर वहां मिलने वाली चाय और स्नैक्स भी उनके लिए सहारा बनते थे।

शाजी ने बताया कि इस पूरे घटनाक्रम का उनके और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ा। उनके शब्दों में “मुझे लगा था कि यह मेरे जीवन का बड़ा अवसर होगा, लेकिन ब्रिटेन पहुंचने के बाद मैं बेहद कठिन हालात में फंस गया। ऐसा महसूस होता था कि किसी को इस बात की परवाह नहीं है कि मैं जीवित हूं या नहीं।” रोजगार न्यायाधिकरण ने माना कि शाजी काम करने के लिए तैयार, सक्षम और इच्छुक थे, लेकिन कंपनी ने उन्हें रोजगार उपलब्ध नहीं कराया। इसी आधार पर अदालत ने कंपनी को उनके बकाया वेतन और मुआवजे का भुगतान करने का आदेश दिया। 

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हनीमून बना मौत का सफरः शादी के चंद घंटे बाद ही भारतवंशी पायलट की मौत, दुल्हन की गोद में तोड़ा दम

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वाशिंगठन, एजेंसी। अमेरिका के जॉर्जिया राज्य में एक दर्दनाक हेलीकॉप्टर हादसे में भारतीय मूल के 26 वर्षीय पायलट Dave Fiji की मौत हो गई। यह हादसा उनकी शादी के कुछ ही घंटों बाद हुआ, जब वे अपनी पत्नी Jessni के साथ हनीमून के लिए रवाना हुए थे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, डेल्टा एयर लाइंस में फर्स्ट ऑफिसर के रूप में कार्यरत डेव फिजी का परिवार मूल रूप से भारतीय राज्य Kerala से जुड़ा है। शुक्रवार को डेव और जेस्नी का विवाह जॉर्जिया के डॉसनविल में हुआ था, जिसमें लगभग 400 मेहमान शामिल हुए थे।

शादी समारोह के बाद नवविवाहित जोड़ा एक Robinson R66 हेलीकॉप्टर में सवार होकर DeKalb-Peachtree Airport के लिए रवाना हुआ था। यह उड़ान उनके लिए एक विशेष विदाई व्यवस्था का हिस्सा थी। लेकिन हेलीकॉप्टर अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच सका और डॉसन काउंटी के जंगलों में दुर्घटनाग्रस्त हो गया।डेव के पिता George Fiji ने बताया कि दुर्घटना के बाद बचाव दल को हेलीकॉप्टर का पता लगाने में काफी समय लगा। इस दौरान जेस्नी घायल अवस्था में लगभग छह घंटे तक मलबे में फंसी रहीं।

उन्होंने बताया कि होश आने पर जेस्नी ने डेव को अपनी गोद में पाया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। “वह नर्स हैं, इसलिए उन्हें तुरंत समझ आ गया कि डेव अब नहीं रहे,” डेव के पिता ने कहा। मौसम को लेकर थी चिंता परिजनों के अनुसार, स्वयं पायलट होने के कारण डेव ने उड़ान से पहले खराब मौसम और कम दृश्यता को लेकर चिंता जताई थी। उनके पिता ने दावा किया कि डेव ने हेलीकॉप्टर पायलट से कहा था कि “जीरो विजिबिलिटी” की स्थिति में उड़ान नहीं भरनी चाहिए। हालांकि पायलट ने कथित तौर पर कहा कि वह अधिक ऊंचाई पर उड़ान भरेंगे।

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