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कोरबा

पूर्व विधायक केरकेट्टा की कार्यशैली से उपजी एंटीकन्बेंसी पाली-तानाखार में कांग्रेस की हार का प्रमुख कारण

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पाली-तानाखार में कांग्रेस की हार पर समीक्षा, सभी ने एक स्वर में कहा-

कोरबा/ पाली। विधानसभा चुनाव 2023 का परिणाम आने के 12 दिन बाद पाली-तानाखार विधानसभा क्षेत्र में कांगे्रसियों ने हार की समीक्षा की और कांग्रेसियों ने पूर्व विधायक मोहितराम केरकेट्टा पर हार का ठिकरा फोड़ दिया और सभी ने एक स्वर में कहा कि 5 साल तक केरकेट्टा ने क्षेत्र और कांग्रेस कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की, जिसके कारण कांग्रेस के गढ़ में कांग्रेस के खिलाफ एन्टीकंबेंसी पैदा हुई और हम कुछ वोटों से हार गए। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव प्रशांत मिश्रा ने हार के लिए अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि भूपेश सरकार ने पांच साल तक ऐसी योजनाएं प्रारंभ की, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों को आर्थिक रूप से काफी लाभ मिला। बिजली बिल हाफ, किसान न्याय योजना, गोधन न्याय योजना, रीपा ऐसी योजनाएं हैं, जिनसे अंतिम व्यक्ति तक योजना का लाभ पहुंचा, लेकिन क्षेत्र के दावेदार, जिन्हें टिकट नहीं मिली, कुछ लोगों को छोड़कर सभी ने कांग्रेस के खिलाफ काम किया। जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती शिवकला कंवर को कांग्रेस ने सर आंखों पर बिठाया और जिला पंचायत अध्यक्ष बनाया, लेकिन उनके पति छत्रपाल सिंह कंवर ने जोगी कांग्रेस से चुनाव लड़कर कांग्रेस को नुकसान पहुंचाया। हालांकि वे कांग्रेस से निष्कासित कर दिए गए हैं, लेकिन पूर्व विधायक मोहितराम केरकेट्टा ने भी खुलेआम कांग्रेस के खिलाफ प्रचार किया, जिससे भी कांगे्रस को नुकसान हुआ और एक जातिय विशेष का वोट इस बार कांग्रेस को नहीं मिल पाया। उन्होंने कहा ऐसे लोगों को सदा के लिए कांगे्रस से बर्खास्त कर देना चाहिए, जो पार्टी का हित न देखकर स्वार्थ की राजनीति करते हैं। पाली-तानाखार विधानसभा क्षेत्र की कांग्रेस प्रत्याशी श्रीमती दुलेश्वरी सिदार ने सबसे पहले सभी जनता एवं कार्यकर्ताओं का आभार जताया और कहा कि जनता ने हमें भरपूर आशीर्वाद दिया लेकिन हमारी अपनी कमजोरी के कारण पांच सौ वोट से हार गए। हम जनता की सेवा के लिए हमेशा तत्पर रहेंगे और आगे की लड़ाई जारी रखेंगे। पिछली कमजोरी को हम सुधारेंगे और लोकसभा में पाली तानाखार से अच्छा प्रदर्शन करेंगे। पाली ब्लाक अध्यक्ष यशवंत लाल ने हार की समीक्षा में अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कहा कि बीते पांच साल में प्रदेश की भूपेश सरकार ने कई जनहितैषी योजनाएं प्रारंभ की और इसका लाभ सभी जनता को मिल रही थी, लेकिन सिटिंग एमएलए मोहितराम केरकेट्टा ने एकला चलो की नीति अपनायी और क्षेत्र के कार्यकर्ताओं से दूरी बनाने के साथ-साथ क्षेत्र की भी उपेक्षा कर डाली और पांच साल तक अपनी मनमानी चलायी, जिसके कारण पाली-तानाखार में कांग्रेस के प्रति एन्टीकंबेंसी पैदा हुई, जो हार का प्रमुख कारण बना। प्रदेश सचिव एवं श्रम कल्याण मंडल के पूर्व सदस्य नवीन सिंह ने कहा कि हमारे कार्यकर्ता मतदाताओं तक नहीं पहुंच सके और श्रीमती दुलेश्वरी के व्यक्तित्व पर भी हम मतदाताओं को ठीक से नहीं बता पाये और हम एन्टीकंबेंसी का शिकार हो गए। जिला कांगे्रेस कमेटी के महासचिव शैलेष सिंह ने कहा कि हमें हार से सबक लेना चाहिए और हमारे सामने जब दूसरी पार्टी की जीत होती है और पटाके फूटते हैं तो एहसास होता है कि हमने कहां गलती की और क्यों हारे?। हमें अपनी कमजोरी को स्वीकार कर फिर से खड़े होने का वक्त है और आगे की लड़ाई एकता के साथ लड़े और लोकसभा में कांग्रेस को जिताएं। सक्रिय जनपद सदस्य एवं सभापति श्यामा पांडेय ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि इस बार कार्यकर्ताओं ने उपेक्षा के कारण कांग्रेस को जिताने के लिए ईमानदारी से काम नहीं किया, और हम मतदाताओं तक नहीं पहुंच पाए। इसके अलावा नगर पंचायत अध्यक्ष उमेश चंद्रा, पूर्व विधायक प्रतिनिधि मनोज चौहान, छोटू राबिंसन, शंकरदास महंत, गणराज सिंह कंवर , अमित भदौरिया, कयुम बेग सहित जनपद सदस्यों एवं कांग्रेस पदाधिकारियों ने भी अपनी प्रतिक्रिया में हार के कारणों का उल्लेख किया। समीक्षा बैठक में पाली ब्लाक के पदाधिकारी, कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

आवेदन लेना कांग्रेस को महंगा पड़ गया

विधायक प्रतिनिधि रहे मनोज चौहान ने कहा कि इस बार कांग्रेस ने नया प्रयोग किया और ब्लाक अध्यक्षों के नाम से दावेदारों का आवेदन मांगा गया। पाली तानाखार विधानसभा क्षेत्र से 30 से अधिक आवेदन मिले, लेकिन टिकट सिर्फ श्रीमती दुलेश्वरी सिदार को मिली, बाकी लोग नाराज हो गए और कुछ लोगों को छोड़कर 29 लोगों ने कांग्रेस के खिलाफ काम किया। उन्होंने कहा कि आवेदन लेना अब बंद होना चाहिए और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को सबक लेना चाहिए कि सरकार जाने और कांग्रेस प्रत्याशी की हार से कैसा महसूस होता है।

मोहित केरकेट्टा को कांग्रेस से बर्खास्त करने का प्रस्ताव ध्वनिमत से पास

पाली-तानाखार विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस प्रत्याशी की हार का प्रमुख कारण पूर्व विधायक मोहितराम केरकेट्टा ही है। पांच साल तक उसकी मनमानी और कार्यकर्ताओं की उपेक्षा से पूरे क्षेत्र में कांग्रेस के प्रति एन्टीकंबेंसी पैदा हुई और हम कांग्रेस के गढ़ में हार गए। पांच साल तक केरकेट्टा ने जमकर भ्रष्टाचार किया और अपनी जेब भरी तथा करोड़ों कमाया, इसका खामियाजा कांग्रेस को भुगतना पड़ा। इतना ही नहीं केरकेट्टा ने कांग्रेस प्रत्याशी के खिलाफ खुलकर प्रचार भी किया और एक जातीय विशेष को कांग्रेस के खिलाफ उकसाया और दूसरे दल को वोट दिलाया। सभी ने हार का प्रमुख कारण केरकेट्टा को ही बताया और कांग्रेस से केरकेट्टा को बर्खास्त करने का प्रस्ताव ध्वनिमत से पास किया गया। ब्लाक अध्यक्ष यशवंत लाल ने कहा कि केरकेट्टा जैसे व्यक्ति की जरूरत कांग्रेस को नहीं है और हम प्रदेश अध्यक्ष को इस बाबत जानकारी उपलब्ध करायेंगे। कुछ कांग्रेसियों ने केरकेट्टा के खुलाघात का सबूत होने का भी दावा किया है।

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कोरबा

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 का उद्देश्य कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन से पर्यावरण प्रदूषण रोकना है – सीईओ

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जिला पंचायत में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 पर हुई कार्यशाला

कोरबा। भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा 27 जनवरी 2026 को अधिसूचित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026, वर्ष 2016 के पुराने नियमों का स्थान लेंगे। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन के माध्यम से पर्यावरण प्रदूषण को रोकना तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उक्त बातें जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री दिनेश कुमार नाग ने बुधवार को जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 संबंधी कार्यशाला में कही।

सीईओ श्री नाग ने बताया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार यह नियम 01 अप्रैल 2026 से शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों सहित पूरे देश में लागू हो चुका है। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत स्तर पर इन नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे कचरे का वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित निपटान हो सके। इसके लिए ग्राम पंचायतों में कचरा संग्रहण शुल्क, शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली लागू की जाएगी। साथ ही नियमों के उल्लंघन पर दंडात्मक प्रावधान भी सुनिश्चित किए जाएंगे।

उन्होंने बताया कि ग्राम एवं जनपद स्तर पर उत्पन्न होने वाले कचरे की रिपोर्ट प्रत्येक 15 दिवस में तैयार कर प्रस्तुत करनी होगी। राज्य शासन द्वारा निर्धारित लक्ष्य की पूर्ति हेतु जून माह तक जिले की 25 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को वैज्ञानिक तरीके से कचरा मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

श्री नाग ने कहा कि स्वच्छता अभियान की शुरुआत स्वयं से करनी होगी। जिला, जनपद एवं ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं कर्मचारी अपने घरों में वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन अपनाएं तथा कचरे के पृथक्करण के लिए नीले, हरे, लाल एवं पीले रंग के डस्टबिन का उपयोग करें, ताकि विभिन्न प्रकार के कचरे का पृथक-पृथक निपटान किया जा सके।

कार्यशाला में स्वच्छ भारत मिशन के श्री दीप सरकार द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के उद्देश्य, महत्वपूर्ण विशेषताओं एवं मुख्य प्रावधानों की जानकारी पॉवर प्वाइंट प्रस्तुति के माध्यम से दी गई।

कार्यक्रम में लेखा अधिकारी श्री राजेंद्र यादव, सहायक परियोजना अधिकारी श्रीमती इंदिरा भगत, श्रीमती अमिता साहू, जनपद पंचायतों के सीईओ, स्वच्छ भारत मिशन, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अधिकारी-कर्मचारी, सहायक विकास विस्तार अधिकारी, कार्यक्रम अधिकारी एवं तकनीकी सहायक उपस्थित रहे।

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कोरबा

अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन का दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन हेतु अशोक मोदी सहित 13 पदाधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल इंदौर रवाना

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कोरबा। अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन के दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन में सम्मिलित होने हेतु छत्तीसगढ़ संगठन के प्रांतीय चेयरमैन अशोक मोदी, प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. अशोक अग्रवाल, बाबूलाल अग्रवाल, जयदेव सिंघल, महेन्द्र सक्सेरिया, आशीष सक्सेरिया एवं डाॅ. अनिता मोहनलाल सहित अन्य पदाधिकारी आज इंदौर के लिए रवाना हो गए।

विदित हो कि अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन का दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन दिनांक 30 एवं 31 मई 2026 को इंदौर में आयोजित है। इस अधिवेशन में संगठन के देशभर के प्रदेशाध्यक्ष, प्रदेश महामंत्री, राष्ट्रीय पदाधिकारीगण एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य सम्मिलित होंगे।
अधिवेशन में उपस्थित पदाधिकारीगणों के द्वारा राष्ट्रहित एवं समाजहित से जुड़े विभिन्न विषयों पर गहन चर्चा की जायेगी। साथ ही समाजसेवा, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सामाजिक समरसता एवं राजनीतिक भागीदारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विचार-विमर्श कर आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे एवं संगठन की सदस्यता को बढ़ाने एवं इसको 1 करोड तक पहुॅचाने का लक्ष्य रखा जायेगा जिस पर कार्य करने पर भी विचार किया जायेगा।
उक्त कार्यक्रम राष्ट्रीय चेयरमैन प्रदीप मित्तल के सानिध्य में तथा नवनिर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष कुलभूषण मित्तल की अध्यक्षता में संपन्न होगा।
अशोक मोदी ने बताया कि छत्तीसगढ़ प्रांतीय अग्रवाल संगठन के कार्यक्रम सराहनीय रहे हैं तथा सामाजिक सेवा, धार्मिक सेवा, व्यापार एवं उद्योग में छत्तीसगढ़ अग्रवाल समाज की बड़ी भूमिका रही है और राष्ट्रीय नेतृत्व के मार्गदर्शन में जो ठोस निर्णय लिए जाएंगे, उसे छत्तीसगढ़ में भी लागू किया जाएगा।

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कोरबा

कोरबा दीपका में उपचुनाव, हाईकोर्ट पहुंचा मामला, क्या पावर का हुआ गलत इस्तेमाल

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प्रत्याशी को चुनाव लड़ने से रोकने मनमाना नियम थोपने का आरोप

हाईकोर्ट के निर्णय पर टिकी शोभा तिग्गा की उम्मीदें

बिलासपुर//कोरबा। कोरबा जिले के नगर पालिका परिषद दीपका अंतर्गत वार्ड क्रमांक 15 में हो रहे उपचुनाव को लेकर मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है इस उपचुनाव में भाग लेने की इच्छुक अभ्यर्थी का नामांकन पत्र मनमाना नियम थोप कर लेने से अस्वीकार कर कर दिया गया इससे क्षुब्ध हो कर शोभा तिग्ग ने उच्च न्यायालय की शरण ली है अपने अधिवक्ता अंशुल तिवारी के माध्यम से याचिका दायर कर राहत देने की गुहार लगाई है इसमें छत्तीसगढ़ राज्य के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव छत्तीसगढ़ निर्वाचन आयोग के साचिव/कमिश्नर, रायपुर, जिला निर्वाचन अधिकारी कोरबा, मुख्य नगर पालिका अधिकारी दीपका व रिटर्निंग ऑफिसर, वार्ड नंबर 15 को प्रतिवादी बनाया गया है ।

याचिकाकर्ता शोभा तिग्गा वार्ड 15 दीपका की निवासी है, उसने दीपका के वार्ड नंबर 15 के काउंसलर/पार्षद के पद के लिए उसकी उम्मीदवारी में रुकावट डालने के लिए नगर पालिका अधिकारियों की मनमानी कार्रवाई को चुनौती दी है। 11.05.2026 के इलेक्शन नोटिफिकेशन के मुताबिक वह पालिका चुनाव लड़ना चाहती थी और उसने कानून के मुताबिक अपने नामांकन पत्र तैयार किए थे। इलेक्शन शेड्यूल में नॉमिनेशन पेपर फाइल करने की आखिरी तारीख 18.05.2026 तय की गई थी, जिसमें 01.06.2026 को पोलिंग और 04.06.2026 को काउंटिंग तय है ।

दुकान का एनओसी मांगा गया,इसी पर सवाल

शोभा तिग्गा ने हाईकोर्ट को बताया कि उसने पहले साल 2021 में नगर पालिका दीपका के अंतर्गत चौपाटी में दुकान नंबर 06 चलाने के लिए एक एग्रीमेंट किया था और उसी साल उस दुकान से जुड़े सभी ड्यूज़ (बकाया) भी क्लियर कर दिए थे लेकिन जब उसने 18 मई 2026 को अपना नॉमिनेशन पेपर जमा करने के लिए ऑफिस गई तो चीफ म्युनिसिपल ऑफिसर ने एक विवादित लेटर जारी किया जिसमें उसे उस दुकान के संबंध में म्युनिसिपल काउंसिल से एक NOC या पंचनामा पेश करने का निर्देश दिया गया था इसके तुरंत बाद 18 मई को ही शोभा तिग्गा ने एक रिक्वेस्ट दी जिसमें उसी ऑफिस से NOC जारी करने की मांग की गई क्योंकि CMO खुद ही वह अथॉरिटी थे जो ऐसे NOC पर ज़ोर दे रहे थे और किसी भी बकाया का स्टेटस साफ़ करने और NOC जारी करने के लिए भी वही अथॉरिटी थे याचिकाकर्ता ने कहा है कि ऐसे डॉक्यूमेंट पर ज़ोर देना पूरी तरह से मनमाना था और किसी भी कानूनी नियम से सपोर्टेड नहीं था पिटीशनर का कहना है कि 2021 के बाद से उसके खिलाफ कभी कोर्ड बकाया नोटिस डिमांड या रिकवरी की कार्रवाई शुरू नहीं की गई है।

न्याय सिद्धान्तों का उल्लंघन

पिटीशनर शोभा तिग्गा का कहना है कि विवादित कार्रवाई गैर-कानूनी मनमाना और नेचुरल जस्टिस के सिद्धांतों का उल्लंघन है क्योंकि रेस्पोंडेंट्स ने नॉमिनेशन पेपर स्वीकार करने के लिए एक गैर-कानूनी शर्त लगाने की कोशिश की है यह खास तौर पर कहा गया है कि पिटीशनर छत्तीसगढ़ म्युनिसिपैलिटीज एक्ट 1961 के सेक्शन 35 के तहत किसी भी तरह की डिसक्वालिफिकेशन के दायरे में नहीं आती है क्योंकि उसके खिलाफ कोई मौजूदा म्युनिसिपल बकाया नहीं है और डिसक्वालिफिकेशन लिए कानूनी शर्तें नहीं हैं रेस्पोंडेंट बिना इजाज़त NOC की ज़रूरत पर ज़ोर देकर कानूनी तौर पर अयोग्य ठहराए जाने का दायरा नहीं बढ़ा सकते। पिटीशनर ने 18.05.2026 के विवादित लेटर को रद्द करने और रेस्पोंडेंट को यह निर्देश देने की मांग की है कि वे कानून के तहत तय नहीं किए गए किसी भी डॉक्यूमेंट पर ज़ोर दिए बिना उसका नॉमिनेशन पेपर स्वीकार करें और प्रोसेस करें ।

मनमानी, बेमतलब और पावर का गलत इस्तेमाल

शोभा तिग्गा ने याचिका में कहा है कि यह पूरी प्रक्रिया मनमानी बेमतलब और सही प्रक्रिया की बुनियादी ज़रूरतों के खिलाफ है उसको ऐसा कोई कानूनी नियम नहीं दिखाया गया जिसके तहत काउंसिलर/पार्षद के ऑफिस के लिए नॉमिनेशन स्वीकार करने की शर्त के तौर पर नगर निगम से पहले किराए पर ली गई दुकान के संबंध में कोई NOC जमा करने की ज़रूरत हो शोभा का कहना है कि जिस लेटर पर सवाल उठाया गया है वह उसे उसका नॉमिनेशन पेपर दाखिल करने से रोकने का एक साफ तरीका है जिससे चुनाव लड़ने के उसके डेमोक्रेटिक (लोकतांत्रिक) अधिकार को बहुत बड़ा नुकसान हुआ है आरोप है कि यह सब जानबूझकर रुकावट डालने के मतलब में गलत इरादे से की गई है भले ही किसी भी अधिकारी के खिलाफ कोई निजी गलत इरादे न बताए गए हों बार-बार कहने के बावजूद नॉमिनेशन स्टेज पर एक गैर-कानूनी डॉक्यूमेंट पर ज़ोर देना, पावर का मनमाना इस्तेमाल दिखाता है ।

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