विदेश
ट्रंप की डेडलाइन समाप्ति से पहले ही बड़े अटैक शुरू ! अमेरिका-इजराइल ने ईरान के 3 पुल उड़ाए, कई मौतें व ट्रेन सेवाएं बंद
तेहरान/तेल अवीव/वाशिंगठन, एजेंसी। ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमले तेज हो गए हैं। डोनाल्ड ट्रंप की तय समय-सीमा खत्म होने से पहले ही ईरान में कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, कम से कम तीन बड़े पुलों को निशाना बनाकर उड़ा दिया गया है। उत्तर-पश्चिम ईरान के तबरेज-जांजन हाईवे पर बने एक अहम पुल को पूरी तरह तबाह कर दिया गया। वहीं काशान में एक रेलवे पुल पर हमले में दो लोगों की मौत और तीन के घायल होने की खबर है।मशहद में हालात को देखते हुए ट्रेन सेवाएं अस्थायी रूप से बंद कर दी गई हैं। स्थानीय प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है, क्योंकि रेलवे नेटवर्क पर हमले की आशंका जताई गई थी।

🚨 President Trump gives Iran until Tuesday at 8:00 PM ET to make a deal or he will blow up Iranian power plants and bridges. pic.twitter.com/wm9VdQLJmp
— Global News & Geopolitics 🌍 (@GlobalNewsGeo) April 6, 2026
इसके अलावा तेहरान, कोम और लोरेस्तान समेत कई इलाकों में धमाकों की खबरें सामने आई हैं। मेहराबाद एयरपोर्ट और एक बिजली संयंत्र को भी निशाना बनाए जाने की बात कही गई है। रणनीतिक रूप से अहम खार्ग द्वीप पर भी दोबारा हमला हुआ है, जहां से तेल निर्यात किया जाता है। यहां हमले के बाद धुएं के गुबार उठते देखे गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पारचिन कॉम्प्लेक्स जो मिसाइल और रक्षा उत्पादन से जुड़ा एक संवेदनशील सैन्य ठिकाना है वहां भी बड़ा धमाका हुआ है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, उत्तरी अल्बोर्ज़ प्रांत में हवाई हमले में कम से कम 18 लोगों की मौत हुई है।
वहीं कई रिहायशी इलाकों को भी नुकसान पहुंचने की खबर है। इज़राइल की सेना का दावा है कि हाल के हमलों में 130 से अधिक ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम नष्ट कर दिए गए हैं, जिससे ईरान की रक्षा क्षमता को बड़ा झटका लगा है। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए ईरान को अल्टीमेटम दिया हुआ है। चेतावनी दी गई थी कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो ईरान के पुलों और ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाया जाएगा जो अब होता दिख रहा है। इस बीच, ईरान ने अपने पड़ोसी देशों से अपील की है कि वे अमेरिका को अपने हवाई क्षेत्र या जमीन का इस्तेमाल न करने दें।
विदेश
ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट खोला, कमर्शियल जहाज गुजर सकेंगे
लेबनान में सीजफायर के बाद फैसला, ट्रम्प बोले- शुक्रिया, लेकिन ईरान की नाकाबंदी जारी रहेगी
तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी,एजेंसी। ईरान ने सीजफायर के दौरान होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह खोल दिया है। विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने X पर पोस्ट कर बताया कि सभी कमर्शियल जहाजों को गुजरने की इजाजत होगी। यह फैसला लेबनान में सीजफायर के बाद लिया गया है।

उन्होंने बताया कि जहाज एक सुरक्षित रास्ते से गुजरेंगे, जिसे ईरान के पोर्ट्स और मैरीटाइम ऑर्गेनाइजेशन ने पहले से तय कर रखा है, ताकि सफर के दौरान कोई खतरा न हो। अराघची ने कहा कि इस दौरान जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जाएगी, ताकि समुद्री व्यापार प्रभावित न हो।
इस पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर ईरान को शुक्रिया कहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भले ही होर्मजु स्ट्रेट खुल गया है लेकिन ईरान पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहेगी और यह सिर्फ ईरान पर लागू होगी।

बिज़नस
आर्थिक स्थिति के सामान्य होने में अधिक समय लग सकता है: मुख्य आर्थिक सलाहकार अनंत नागेश्वरन
वाशिंगटन,एजेंसी। भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार अनंत नागेश्वरन ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर तेल की बढ़ती कीमतों के प्रभाव के बारे में बुधवार को चेताया और कहा कि स्थिति के सामान्य होने में अधिक समय लग सकता है। नागेश्वरन ने यहां ‘यूएस-इंडिया स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप फोरम’ द्वारा आयोजित एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि वैश्विक संघर्ष का प्रभाव चार व्यापक क्षेत्रों में महसूस किया जा सकता है – ऊर्जा की उच्च कीमतें, अन्य वस्तुओं की आपूर्ति में व्यवधान, रसद और बीमा लागत में वृद्धि तथा आपूर्ति प्रवाह में गिरावट।

नागेश्वरन ने यूएस-इंडिया इकोनॉमिक फोरम 2026 को संबोधित करते हुए कहा, ”इसलिए मुझे लगता है कि हमें संघर्ष की समाप्ति और आर्थिक गतिविधियों की सामान्य बहाली के लिए अधिक धैर्य रखने की आवश्यकता है।” उन्होंने कहा कि संघर्ष से उत्पन्न अनिश्चितता के व्यापक दायरे को समझना आवश्यक है, विशेष रूप से दक्षिण एशिया में और सामान्य तौर पर एशिया-प्रशांत क्षेत्र में। नागेश्वरन ने कहा, ”यह केवल तेल की कीमत का मामला नहीं है… यह उन वस्तुओं के बारे में है जो मायने रखती हैं।”

बिज़नस
IEA प्रमुख की चेतावनी, यूरोप के पास बचा सिर्फ 6 हफ्ते का ईंधन, फ्लाइट्स पर खतरा
पेरिस, एजेंसी। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के प्रमुख फातिह बिरोल ने बृहस्पतिवार को कहा कि यूरोप के पास ”संभवत: करीब छह हफ्ते का विमान ईंधन ही बचा है” और यदि ईरान युद्ध के कारण तेल आपूर्ति बाधित रहती है तो जल्द ही उड़ानें रद्द हो सकती हैं। आईईए के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने ‘एसोसिएटेड प्रेस’ (एपी) के साथ साक्षात्कार में पश्चिम संकट के वैश्विक प्रभावों की गंभीर स्थिति बयां करते हुए इसे ”अब तक का सबसे बड़ा ऊर्जा संकट” करार दिया।

होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिये तेल, गैस एवं अन्य महत्वपूर्ण आपूर्ति के बाधित होने से यह ऊर्जा संकट” उत्पन्न हुआ है। उन्होंने कहा, ”पहले ‘डायर (भयानक) स्ट्रेट्स’ नाम का एक समूह था। अब यह सचमुच एक ‘डायर स्ट्रेट’ बन गया है और इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ेगा। यह जितना लंबा चलेगा, वैश्विक आर्थिक वृद्धि और महंगाई के लिए उतना ही खराब होगा।”
महंगा हो सकता है तेल-गैस
बिरोल ने कहा कि इसका प्रभाव “पेट्रोल (गैसोलीन) की ऊंची कीमतें, गैस की बढ़ती कीमतें और बिजली की महंगी दरों” के रूप में दिखाई देगा जबकि दुनिया के कुछ हिस्से दूसरों की तुलना में अधिक प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा, ”सबसे ज्यादा असर एशियाई देशों पर पड़ेगा” जो पश्चिम एशिया से ऊर्जा पर निर्भर हैं जिनमें जापान, दक्षिण कोरिया, भारत, चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश शामिल हैं।
बिरोल ने कहा, ”इसके बाद इसका प्रभाव यूरोप और अमेरिका पर पड़ेगा।” उन्होंने आगाह किया कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य दोबारा नहीं खुलता है, तो ‘जल्द ही हम यह खबर सुन सकते हैं कि विमान ईंधन की कमी के कारण एक शहर से दूसरे शहर के लिए उड़ानें रद्द की जा सकती हैं।’

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