देश
महाराष्ट्र में भाजपा विधायक दल की बैठक 4 दिसंबर को:पार्टी ने निर्मला और विजय रूपाणी को पर्यवेक्षक बनाया, अजित पवार दिल्ली पहुंचे
मुंबई , एजेंसी। महाराष्ट्र विधानसभा का रिजल्ट आने के 10 दिन बाद भी मुख्यमंत्री का नाम तय नहीं हो पाया है। महायुति यानी भाजपा, शिवसेना शिंदे और NCP में एक सीएम और दो डिप्टी सीएम का फॉर्मूला तय किया गया है।
भाजपा ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी को पर्यवेक्षक बनाया है। विजय रूपाणी मंगलवार शाम मुंबई पहुंचेंगे, जबकि निर्मला सीतारमण 4 दिसंबर को सुबह मुंबई पहुंचेंगी।
बीजेपी विधायक दल की बैठक 4 दिसंबर को सुबह 10 बजे विधान भवन के सेंट्रल हॉल में होगी। इसमें सीएम का नाम तय होगा। 5 दिसंबर को शाम 5 बजे मुंबई के आजाद मैदान में सीएम का शपथ समारोह होगा।
भाजपा की ओर से देवेंद्र फडणवीस का सीएम बनना तय माना जा रहा है। दिल्ली में देर रात तक अजित पवार और अमित शाह की मुलाकात हो सकती है। पवार दिल्ली पहुंच गए हैं। इसमें फडणवीस वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए मीटिंग में जुड़ेंगे।
विधानसभा चुनाव में महायुति को 230 सीटें मिली हैं। बहुमत के लिए जरूरी 145 विधायकों से 85 सीटें ज्यादा। भाजपा को 132, शिवसेना शिंदे को 57 और NCP अजित पवार को 41 सीटें मिली हैं।
आज के अपडेट
- भाजपा प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने आजाद मैदान में शपथ समारोह की तैयारियों का जायजा लिया।
- विधायकों के साथ शिंदे की बैठक रद्द। डॉक्टर्स ने शिंदे को अभी आराम की सलाह दी है।
- एकनाथ शिंदे के घर जाकर विधायक संजय शिरसाट ने उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली।
- श्रीकांत शिंदे ने शिरसाट से कहा- वह महाराष्ट्र की राजनीति में शामिल नहीं होंगे।

शिंदे बोले- जनता मुझे मुख्यमंत्री बनाना चाहती है महाराष्ट्र के कार्यवाहक मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में कहा, “जनता चाहती है कि CM मैं ही रहूं। मैं आम लोगों के लिए काम करता हूं। मैं जनता का मुख्यमंत्री हूं। इसी वजह से लोग मानते हैं कि मुझे ही मुख्यमंत्री बनना चाहिए।’
5 दिसंबर को मुंबई के आजाद मैदान में होगा शपथ समारोह भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने 30 नवंबर को नागपुर में कहा था कि नई सरकार का शपथ ग्रहण 5 दिसंबर को मुंबई के आजाद मैदान में होगा। प्रधानमंत्री मोदी कार्यक्रम में शामिल होंगे।
23 नवंबर: महाराष्ट्र विधानसभा का रिजल्ट आया। महायुति को 230 सीटों पर जीत हासिल हुई। भाजपा ने 132, शिवसेना (एकनाथ शिंदे) ने 57 और NCP (अजित पवार) ने 41 सीटें जीतीं। शिंदे बोले थे- CM तीनों पार्टियां मिलकर तय करेंगी। फडणवीस ने कहा था, एक हैं तो सेफ हैं।
25 नवंबर: 1 मुख्यमंत्री और 2 डिप्टी CM का फॉर्मूला तय हुआ। महायुति की पार्टियों में हर 6-7 विधायक पर एक मंत्री पद के फॉर्मूला की बात सामने आई। इस हिसाब से भाजपा के 22-24, शिंदे गुट के 10-12 और अजित गुट के 8-10 विधायकों को मंत्री बन सकते हैं।
27 नवंबर: ठाणे में कार्यवाहक सीएम एकनाथ शिंदे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि भाजपा का सीएम हमें मंजूर है। मुझे पद की लालसा नहीं। जब मैं मुख्यमंत्री था तब मोदी जी मेरे साथ खड़े रहे। अब वो जो फैसला लेंगे स्वीकार होगा।
28 नवंबर: एकनाथ शिंदे, देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार ने दिल्ली में करीब ढाई घंटे तक गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ मीटिंग की। शिंदे ने आधे घंटे तक शाह से अकेले मुलाकात की। हाईकमान ने शिंदे को डिप्टी सीएम या केंद्र में मंत्री पद का ऑफर किया है।
29 नवंबर: महायुति की बैठक टाल दी गई। एकनाथ शिंदे अचानक सातारा चले गए। शिवसेना मुख्यमंत्री पद के बदले गृह और वित्त मंत्रालय मांग रही है। शिवसेना नेता संजय शिरसाट ने कहा- अगर शिंदे डिप्टी सीएम का पद स्वीकार नहीं करते हैं तो पार्टी से ही दूसरा चेहरा ये पद संभालेगा।
30 नवंबर: शपथ ग्रहण समारोह की तारीख सामने आई। अजित पवार ने साफ कर दिया कि CM भाजपा से होगा और शिवसेना-NCP के डिप्टी CM होंगे।
1 दिसंबर: शिंदे दो दिन अपने पैतृक गांव सातारा में रहे। 30 नवंबर को उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। मुंबई से आए डॉक्टरों ने उनका इलाज किया। रविवार को वे सातारा के एक मंदिर गए। कुछ देर बाद मीडिया से बातचीत में कहा- व्यस्त चुनावी कार्यक्रम के बाद मैं यहां आराम करने आया था। प्रधानमंत्री मोदी और शाह जिसे CM तय करेंगे वो मुझे स्वीकार होगा।
गृह और वित्त मंत्रालय पर बात अटकी

शिंदे सरकार में गृह मंत्रालय देवेंद्र फडणवीस और वित्त मंत्रालय अजित पवार के पास था।
शिंदे सरकार में डिप्टी CM देवेंद्र फडणवीस के पास ही गृह मंत्रालय था। वो इस मंत्रालय को छोड़ना नहीं चाहते हैं। वहीं शिंदे गुट का तर्क है कि अगर डिप्टी CM का पद हमें मिल रहा है तो गृह मंत्रालय भी उन्हें ही मिलना चाहिए। शाह के साथ बैठक में भी इसका हल नहीं निकल पाया।
पहले गृह मंत्रालय देवेंद्र फडणवीस के पास था। माना जा रहा है कि इस विवाद के चलते शाह की बैठक में कैबिनेट गठन पर कोई समाधान नहीं निकल सका। एक्सपर्ट्स भी मानते हैं कि बीजेपी गृह मंत्री का पद कभी हाथ से नहीं जाने देगी।
सूत्रों के मुताबिक, शाह से चर्चा के बाद भी विभागों को लेकर गठबंधन में खींचतान मची हुई है। भाजपा गृह, राजस्व, उच्च शिक्षा, कानून, ऊर्जा, ग्रामीण विकास अपने पास रखना चाहती है। उन्होंने शिवसेना को हेल्थ, शहरी विकास, सार्वजनिक कार्य, उद्योग ऑफर किया है। वहीं NCP अजित गुट को वित्त, योजना, सहयोग, कृषि जैसे विभाग देने की पेशकश की है।
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पेट्रोल-डीजल के नए रेट जारी, टंकी फुल करवाने से पहले जान लें आज के भाव?
मुंबई, एजेंसी। वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट का दौर जारी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आई इस मंदी के बीच भारतीय तेल कंपनियों ने आज रविवार (21 जून 2026) के लिए पेट्रोल और डीजल के नए रेट जारी कर दिए हैं। हालांकि वैश्विक मंदी का फायदा फिलहाल भारतीय उपभोक्ताओं की जेब को मिलता नहीं दिख रहा है। देश के प्रमुख शहरों में आज भी ईंधन की कीमतें पुरानी दरों पर ही स्थिर हैं। इस बीच केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने तेल के दाम न घटने की असली वजह और भविष्य में मिलने वाली राहत को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण बयान दिया है।

वहीं देश के अलग-अलग राज्यों में टैक्स और वैट (VAT) की दरें अलग होने के कारण कीमतें भिन्न हैं:

शहर, पेट्रोल का भाव (रू.), शहर, पेट्रोल का भाव (रू.)
मुंबई, रू.111.21, हैदराबाद, रू.115.69
तिरुवनंतपुरम, रू.115.49, कोलकाता, रू.113.47
पटना, रू.113.54, जयपुर, रू.113.35
बैंगलोर, रू.110.61, भुवनेश्वर, रू.109.03
चेन्नई, रू.107.87, गुड़गांव, रू.102.80
नई दिल्ली, रू.102.12, नोएडा, रू.102.09
लखनऊ, रू.101.92, चंडीगढ़, रू.101.54 (डीजल: रू.89.47)

आखिर जनता को राहत क्यों नहीं?
जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल लगातार सस्ता हो रहा है तो भारत में रेट कम क्यों नहीं हो रहे? केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इसके पीछे का गणित समझाया है। मंत्री ने साफ किया कि तेल कंपनियों के पास पहले से खरीदा हुआ महंगा कच्चा तेल स्टॉक में मौजूद होता है। जब तक यह पुराना और महंगा स्टॉक पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता तब तक कंपनियां नए और सस्ते कच्चे तेल का सीधा फायदा ग्राहकों को नहीं दे सकतीं।

जैसे ही तेल कंपनियों का यह पुराना महंगा स्टॉक (Inventory) खाली होगा अंतरराष्ट्रीय बाजार की कम कीमतों का असर घरेलू बाजार पर दिखेगा और पेट्रोल-डीजल के दाम घटाए जाएंगे। मंत्री ने यह भी कहा कि दुनिया भर में जारी भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बावजूद सरकार और सरकारी तेल कंपनियों के बेहतर तालमेल के कारण भारत में तेल की कीमतों को काबू में रखा गया है और आम जनता पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ने दिया गया।

घर बैठे जानें अपने शहर का Live Rate
भले ही राष्ट्रीय स्तर पर आज तेल की कीमतें स्थिर हैं लेकिन स्थानीय स्तर पर मामूली बदलाव देखने को मिल सकते हैं। आप अपने मोबाइल से एक साधारण एसएमएस (SMS) भेजकर हर रोज सुबह अपने शहर का ताजा रेट जान सकते हैं। सबसे पहले अपने मोबाइल के मैसेज बॉक्स में टाइप करें ‘RSP <स्पेस> अपने शहर का कोड’ और इसे 9224992249 पर भेज दें। फिर मैसेज में ‘RSP <स्पेस> अपने शहर का कोड’ लिखकर 9223112222 पर सेंड करें।
देश
तमिलनाडु में बड़ा सियासी उलटफेर, फेमस डायरेक्टर उदयकुमार समेत इन दिग्गज नेताओं ने थामा TVK का दामन
चेन्नई, एजेंसी। फिल्म निर्देशक आर वी उदयकुमार और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) की पूर्व मंत्री गोमती श्रीनिवासन सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के कई पदाधिकारी शनिवार को यहां तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) में शामिल हो गए।
अन्नाद्रमुक में करीब 25 साल तक रहे उदयकुमार ने 16 जून को पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। वर्ष 1990 के दशक में मुख्यधारा के व्यावसायिक सिनेमा में अहम भूमिका निभाने वाले उदयकुमार ने ‘चिन्ना गौंडर’, ‘यजमान’, ‘सिंगारवेलन’ और ‘किझक्कू वासल’ जैसी कई सुपरहिट फिल्में दी हैं। वह अन्नाद्रमुक के कला प्रकोष्ठ के अध्यक्ष थे। तमिलनाडु के इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम में टीवीके का दामन थामने वाले अन्य प्रमुख चेहरों में गोमती श्रीनिवासन शामिल हैं, जिन्होंने पूर्व में एमजीआर के मंत्रिमंडल में कार्य किया था।

इसके अलावा तिरुवैयारु के पूर्व विधायक एम जी एम सुब्रमणियन, ‘तमिलनाडु पॉटर्स एंड अनऑर्गनाइज्ड वर्कर्स यूनियन’ के प्रदेश अध्यक्ष सेमा नारायणन और पूर्व में टीवीके से जुड़े रहे नेता जगन्नाथ मिश्रा भी पार्टी में शामिल हुए हैं। पार्टी नेताओं के मुताबिक, अन्नाद्रमुक साहित्य प्रकोष्ठ के प्रदेश उप सचिव आई.सी. सेकर तथा 2021 के विधानसभा चुनाव में नाथम सीट से चुनाव लड़ चुके अम्मा मक्कल मुनेत्र कषगम (एएमएमके) के ए.एन. राजा भी टीवीके से जुड़ गए हैं। इन सभी प्रमुख नेताओं ने पार्टी के महासचिव ‘बुस्सी’ एन. आनंद, आधव अर्जुन तथा अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों की मौजूदगी में टीवीके की सदस्यता ग्रहण की।
देश
60 Kg Silver Missing: राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के दौरान भेंट की गई 60 किलो चांदी गायब, SIT जांच तेज
अयोध्या, एजेंसी। अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े दान विवाद में एक नया मोड़ सामने आया है। जांच के दौरान पता चला है कि मंदिर को दान में मिली करीब 60 किलो चांदी का कोई साफ रिकॉर्ड नहीं मिल रहा है। इस मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) अब दान में मिले नकद, सोना-चांदी और अन्य कीमती वस्तुओं के रिकॉर्ड की गहन पड़ताल कर रही है।

प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान भेंट की गई 60 किलो चांदी गायब
जानकारी के अनुसार, यह चांदी रामलला की प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान भेंट की गई थी। दानदाताओं का दावा है कि इस चांदी का उपयोग मंदिर की नींव से जुड़े कार्यों में किया जाना था, लेकिन जांच एजेंसियों को अब तक इसके इस्तेमाल या सुरक्षित रखे जाने से संबंधित कोई ठोस दस्तावेज नहीं मिले हैं।
सूत्रों के मुताबिक, SIT पिछले कई दिनों से मंदिर में प्राप्त दान, उनके भंडारण और उपयोग से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है। अब तक जांच में 60 किलो चांदी की प्राप्ति, रखरखाव और उपयोग से जुड़ी कोई स्पष्ट ऑडिट ट्रेल सामने नहीं आई है।
ज्वेलर्स एसोसिएशन का दान का दावा
इस बीच, ज्वेलर्स एसोसिएशन ने दावा किया है कि उनके पास चांदी मंदिर ट्रस्ट को सौंपने की आधिकारिक रसीद मौजूद है। एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि यह चांदी देशभर के सर्राफा व्यापारियों के सहयोग से दान की गई थी। हालांकि, सवाल यह उठ रहे हैं कि यदि चांदी मंदिर को सौंपी गई थी तो उसका उल्लेख मंदिर के रिकॉर्ड में क्यों नहीं है और नींव निर्माण में इसके उपयोग के प्रमाण क्यों नहीं मिल रहे हैं।
जांच के दौरान दान और भेंट प्रबंधन से जुड़े कई लोगों से पूछताछ की गई है। इनमें कुछ पुजारी और मंदिर प्रशासन से जुड़े कर्मचारी भी शामिल हैं। जांच अधिकारियों ने उन व्यक्तियों से भी सवाल किए हैं जो मंदिर में आने वाली भेंट और कीमती वस्तुओं के प्रबंधन से जुड़े रहे हैं।
बताया जा रहा है कि जांच केवल चांदी तक सीमित नहीं है। सोना, चांदी, हीरे के आभूषण, हार और चरण पादुका समेत कई अन्य दान की गई वस्तुओं की भी जांच की जा रही है। कुछ आरोपों में यह भी कहा गया है कि मूल दान की गई वस्तुओं की जगह दूसरी वस्तुएं रखी गईं या रिकॉर्ड में गड़बड़ी हुई।
SIT खंगाल रही दस्तावेज और रिकॉर्ड
यह विवाद तब सामने आया जब मंदिर को मिले करोड़ों रुपये के दान और कीमती सामानों के गायब होने को लेकर राजनीतिक बयानबाजी शुरू हुई। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को तीन सदस्यीय SIT का गठन कर मामले की जांच के आदेश दिए थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि जांच मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर शुरू की गई है और पूरी जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। उन्होंने लोगों से जांच पूरी होने तक धैर्य रखने की अपील की है। फिलहाल SIT दस्तावेजों, गवाहों के बयानों और दान से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित रूप से गायब 60 किलो चांदी और अन्य कीमती दान की गई वस्तुओं का वास्तविक स्थिति क्या है।
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