छत्तीसगढ़
सरगुजा में टूटा 35 साल पुराने बांध का मेड़:कई दिनों से रिस रहा था पानी, 10 एकड़ में लगी फसल बर्बाद,मौके पर पहुंचे अधिकारी
सरगुजा,एजेंसी।सरगुजा जिले के लुण्ड्रा ब्लॉक में करीब 35 साल पुराने गेरसा बांध का मेड़ शनिवार को टूट गया। मेड़ टूटने से बांध का पानी नीचे तेजी से बहने लगा। इससे बांध के नीचे करीब 10 एकड़ में लगी फसल बर्बाद हो गई है। बांध का मेड़ बहने की सूचना पर कलेक्टर विलास भोस्कर के साथ जल संसाधन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। बांध के मेड़ का किनारे का हिस्सा टूटा है, जिसकी मरम्मत शुरू करा दी गई है। बांध लबालब भरा हुआ है।
जानकारी के मुताबिक, लुण्ड्रा ब्लॉक के ग्राम पंचायत गेरसा का सिंचाई बांध बारिश में लबालब भरा हुआ था। बांध के मेड़ से पानी का लगातार रिसाव हो रहा था। शनिवार सुबह करीब 9 बजे बांध के मेड़ का 11 फुट हिस्सा बह गया पानी तेजी से निचले इलाकों में भरने लगा। मेड़ की मिट्टी के साथ पानी से करीब 10 एकड़ में लगी धान की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है।

गेरसा बांध का मेड़ टूटने से पानी तेज बहाव से बह रहा है।

बांध का पानी खेतों में लबालब भर गया है।

मौके पर पहुंचे स्थानीय लोगों वीडियो बनाते नजर आए।
मौके पर पहुंचे कलेक्टर और अधिकारी, शुरू कराई गई मरम्मत
घटना की सूचना पर कलेक्टर विलास भोस्कर के साथ प्रशासनिक अधिकारी और जल संसाधन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। बांध में पानी लबालब भरा था। मेड़ टूटने से करीब 2 मीटर पानी बह गया है। बांध से पानी का फोर्स कम हुआ, तो प्रशासन ने मरम्मत शुरू करा दिया है।
जल संसाधन के EE अशोक निरंजन ने बताया कि बांध के मेड़ में कटाव रुक गया है, जिसके बाद विभाग ने मरम्मत शुरू करा दिया है। बांध के किनारे का हिस्सा टूटा था, जिसके कारण ज्यादा क्षति नहीं हुई। बांध में करीब 10 मीटर पानी अब भी भरा हुआ है।

मौके पर कलेक्टर और अधिकारी पहुंचे।
लगातार रिस रहा था पानी, टूटा मेड़
गेरसा बांध साल 1990 में बनकर तैयार हुआ था। इस बांध की सिंचाई क्षमता 84 हेक्टेयर है। यह छोटा बांध है। करीब 35 साल पुराने इस बांध में इस साल हुई भारी बारिश के कारण पानी लबालब भर गया था। बांध के मेड़ के उपरी हिस्से से पानी लगातार रिस रहा था। ग्रामीणों के अनुसार, विभाग ने सालों से इस बांध की मरम्मत नहीं की है और न ही निरीक्षण किया गया।
ग्राम पंचायत गेरसा उमेश जगते ने बताया कि विभाग के अधिकारियों को पहले सूचना दी गई थी, लेकिन विभाग ने इस पर ध्यान नहीं दिया। भारी बारिश के कारण पानी लबालब भरा हुआ था और अंततः बांध टूट गया।

बांध का मेड़ टूटने से बहा करीब दो मीटर पानी।
कई पुराने बांध खतरनाक
सरगुजा संभाग में भारी बारिश के कारण पुराने बांधों में लबालब पानी भर गया है। मंगलवार की रात साल 1982 में बना लुत्ती बांध बह गया था, जिसमें 8 लोग बह गए थे। अब तक छह की लाश मिल चुकी है। संभाग के पुराने बांधों में सरगुजा का रजाखार बांध, गोपालपुर बांध पूरी तरह से लबालब है। वहीं बलरामपुर में राजपुर, सूरजपुर और जशपुर जिलों में भी पुराने बांध खतरनाक स्तर तक भरे हुए हैं।

कोरबा
रेशम उद्योग सहाकारी समिति मर्यादित करतला का मतदाता सूची प्रकाशित
दावा-आपत्ति 11 अप्रैल तक आमंत्रित
कोरबा। रजिस्ट्रीकरण अधिकारी रेशम उद्योग सहाकारी समिति मर्यादित करतला पंजीयन क्रमांक 3163 एस.के.कंवर द्वारा सोसायटी के सदस्यों का मतदाता सूची का प्रकाशन 02 अप्रैल 2026 को किया जाकर दावा-आपत्ति 11 अप्रैल तक आमंत्रित किया गया है। दावा-आपत्ति लिखित में मय प्रमाण के टी.पी.हंस सचिव के पास 11 अप्रैल तक कार्यालयीन समय पर सोसायटी के कार्यालय में प्रस्तुत किया जा सकता है। दावा-आपत्तियों का निराकरण सोसायटी कार्यालय में 11 अप्रैल 2026 को दोपहर 12 बजे से किया जायेगा तथा इस प्रकार उपांतरित सूची को अंतिम मतदाता सूची के रूप में प्रकाशित किया जायेगा।
कोरबा
मछुआ सहाकारी समिति मर्यादित रिंगनिया का मतदाता सूची प्रकाशित
दावा-आपत्ति 09 अप्रैल तक आमंत्रित
कोरबा। रजिस्ट्रीकरण अधिकारी मछुआ सहाकारी समिति मर्यादित रिंगनिया पंजीयन क्रमांक 39 जी.आर. भतरा द्वारा सोसायटी के सदस्यों का मतदाता सूची का प्रकाशन 02 अप्रैल 2026 को किया जाकर दावा-आपत्ति 09 अप्रैल तक आमंत्रित किया गया है। दावा-आपत्ति लिखित में मय प्रमाण के हरिलाल/सदस्य के पास 09 अप्रैल तक कार्यालयीन समय पर सोसायटी के कार्यालय में प्रस्तुत किया जा सकता है। दावा-आपत्तियों का निराकरण सोसायटी कार्यालय में 10 अप्रैल 2026 को प्रातः 11.30 बजे से किया जायेगा तथा इस प्रकार उपांतरित सूची को अंतिम मतदाता सूची के रूप में प्रकाशित किया जायेगा।
कोरबा
स्वास्थ्य विभाग द्वारा लू से बचाव हेतु एडवाइजरी जारी
भीषण गर्मी में लू से बचाव हेतु आवश्यक उपाय अपनाने हेतु किया गया आग्रह
कोरबा। ग्रीष्म कालीन मौसम प्रारंभ होने पर तथा अधिक गर्मी पड़ने से शुष्क वातावरण में लू (तापाघात) की संभावना अधिक होती है। जो घातक या जानलेवा हो सकती है। जिले में बढ़ रही गर्मी को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग द्वारा लू से बचाव हेतु आवश्यक उपाय अपनाने के लिए एडवाइजरी जारी की है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि जिले में लगातार मौसम परिवर्तन के बाद तेज धूप एवं गर्मी प्रारंभ हो गया है। जिसके कारण लू लगने की संभावना बढ़ गई है। सूर्य की तेज गर्मी के दुष्प्रभाव से शरीर के तापमान में विपरीत प्रभाव पड़ता है जिससे शरीर में पानी और खनिज लवण नमक की कमी हो जाती है इसे लू लगना या हीट-स्ट्रोक कहा जाता है। वर्तमान में घर से बाहर जाकर ऑफिस वर्क करने वाले, खेती कार्य मे लगे आमजन तथा बाजार में खरीददारी आदि कार्य करने वाले व्यक्ति पर्याप्त मात्रा में पानी एवं पेय पदार्थो का सेवन नहीं कर पाते हैं। इस कारण वे निर्जलीकरण के शिकार हो जाते हैं, जिसका समय पर उपचार ना मिलने के कारण मरीज की हालत गंभीर हो जाती है।

लू से बचाव हेतु आवश्यक उपाय –
आम लोगों के द्वारा आवश्यक उपाय अपनाकर लू (तापाघात ) से बचाव किया जा सकता है। जिसके अंतर्गत गर्मी के दिनों में हमेशा घर से बाहर जाते समय सफेद, सूती या हल्के रंग के कपड़े पहनना, भोजन करके तथा पानी पीकर ही घर से बाहर निकलना, घर से बाहर जाते समय गर्दन के पिछले भाग कान एवं सिर को कपड़े/ गमछे से ढककर ही निकलना, छतरी एवं रंगीन चश्मे का प्रयोग करना, गर्मी के दिनों में अधिक मात्रा में पानी पिना तथा ज्यादातर पेय पदार्थों का सेवन करना सहित अन्य उपाय अपना सकते है। इसी प्रकार बाहर जाते समय पानी साथ रखें, धूप में बेवजह बाहर जाने से बचें, बच्चों बुजुर्गों व गर्भवती महिलाओं का विशेष ध्यान रखें, साथ ही उन्हें समय-समय पर पानी पीने के लिए प्रेरित करें एवं सुपाच्य भोजन एवं तरल पदार्थों का सेवन कराएं। गर्मी के दिनों में तीव्र धूप को घर के अंदर आने से रोकें तथा जहाँ तक संभव हो अधिक से अधिक समय तक धूप में रहकर व्यायाम तथा मेहनत का काम ना करें, धूप में नंगे पांव ना चलें। इन सावधानियों को अपनाकर स्वयं को लू (तापघात) से बचा जा सकता है।
लू (तापाघात) के लक्षण-
लू का शिकार होने पर व्यक्ति में सिर दर्द, बुखार, उल्टी एवं अत्यधिक पसीना आना, बेहोशी, चक्कर आना, सांस फूलना, दिल की धड़कन तेज होना, कमजोरी महसूस होना, शरीर में ऐंठन तथा त्वचा लाल एवं सूखी होना जैसे अन्य लक्षण शामिल है।
लू से बचाव हेतु प्राथमिकी उपचार –
लू (तापाघात) होने पर रोगी को छायादार स्थान पर कपड़े गीले कर लिटायें एवं हवा करें। रोगी को बेहोशी की स्थिती में कोई भी भोज्य/पेय पदार्थ का सेवन नहीं कराएं एवं उसे तत्काल चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराएं। रोगी के होश में आने की स्थिति में उसे ठंडे पेय पदार्थ, जीवन रक्षक घोल, कच्चा आम का पना आदि पेय पदार्थों का सेवन कराएं। रोगी के शरीर के तापमान को कम करने के लिए उसके शरीर पर ठंडे पानी की पट्टियाँ रखें, प्रभावित व्यक्ति को शीघ्र ही नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र उपचार के लिए ले जाए।
सीएमएचओ ने बताया कि जिले के मेडिकल कॉलेज, सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों तथा शहरी स्वास्थ्य केन्द्रों में लू (तापघात) से बचाव हेतु पर्याप्त मात्रा में आवश्यक जीवन रक्षक दवाइयां एवं ओ. आर. एस. की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।
कलेक्टर श्री दुदावत तथा सीएमएचओ ने जिले के नागरिकों से गर्मी के मौसम में लू (तापाघात) से बचाव हेतु आवश्यक उपाय को अपनाने का आग्रह किया है। जिससे स्वयं और अपने परिवार को सुरक्षित रख सकें।
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