छत्तीसगढ़
सुरेश चंद्राकर के अवैध बाड़े पर चला बुलडोजर:सरकारी जमीन पर कब्जा कर बनाया था 11 कमरे, यहीं पत्रकार मुकेश की हुई थी हत्या
बीजापुर,एजेंसी।छत्तीसगढ़ के बीजापुर में पत्रकार मुकेश चंद्राकर हत्याकांड मामले में प्रशासन ने बड़ा एक्शन लिया है। जिस जगह पर मुकेश की हत्या की गई थी, उसे बाड़े में बने 11 कमरों पर बुलडोजर चला दिया गया है। चट्टान पारा स्थित सरकारी जमीन पर बाड़ा बनाकर मुख्य आरोपी सुरेश चंद्राकर ने कब्जा कर रखा था।
दरअसल, हत्या के 8 महीने बाद सोमवार की दोपहर राजस्व विभाग और नगर पालिका की टीम मौके पर पहुंची। प्रशासन ने पहले इस बाड़े को क्राइम सीन के तहत सील भी कर दिया था। यह कार्रवाई नगर पालिका क्षेत्र में राजस्व भूमि पर किए गए अवैध अतिक्रमण के कारण की गई है।

सरकारी जमीन पर कब्जा कर बनाया था 11 कमरे।

प्रशासन ने बाड़े में बने 11 कमरों पर बुलडोजर चला दिया गया है।
बाड़े में पत्रकार मुकेश की हत्या कर शव को दफनाया था
एसडीएम जागेश्वर कौशल ने बताया कि, सुरेश चंद्राकर ने बाड़े में कब्जा कर रखा था। यहीं पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या कर शव को दफनाया गया था। इस बाड़े पर बुलडोजर चला दिया गया है। इससे पहले कई बार नोटिस दिया गया था। सुरेश ने उच्च न्यायालय में भी स्थगन के लिए याचिका लगाई थी। जिसे निरस्त कर दिया गया था।

कब और कैसे ठेकेदार ने पत्रकार मुकेश को मार डाला ?
दरअसल, 1 जनवरी 2025 को बीजापुर के पत्रकार मुकेश चंद्राकर का मर्डर हुआ। हत्यारों ने पहले डिनर पर बुलाया। खाना खिलाकर जमकर पीटा। जब मुकेश अधमरा हो गया, तो उसका गला घोंटा, फिर रॉड से सिर पर मारा, जिससे ढाई इंच घाव हो गया था।
पत्रकार मुकेश चंद्राकर को मारने की साजिश 29-30 दिसंबर 2024 को रची गई थी। दिनेश, रितेश और सुरेश चंद्राकर तीनों मुकेश के चचेरे भाई हैं। रितेश सबसे करीबी दोस्त था। मुकेश के साथ दोनों ने पढ़ाई की थी। इनके बीच रिश्ता काफी गहरा था। दोनों कपड़े तक शेयर करते थे।
3 जनवरी को लाश मिलने के बाद पुलिस ने 4 जनवरी को मुकेश के 2 चचेरे भाई दिनेश, रितेश चंद्राकर और महेंद्र रामटेके को गिरफ्तार किया। वहीं मास्टरमाइंड ठेकेदार सुरेश चंद्राकर को भी अरेस्ट किया था। वारदात के बाद सभी का अलग-अलग लोकेशन पर भागने का रूट पहले से तय था।
आरोपियों ने 50KM दूर तुमनार नदी में फेंका मोबाइल
SIT के मुताबिक मर्डर के बाद लोकेशन भटकाने के लिए मुकेश का मोबाइल मर्डर स्पॉट से 50KM दूर तुमनार नदी में फेंका था। SIT ने बताया था कि आरोपियों को पकड़ने के लिए करीब 100 से ज्यादा CDR निकाले गए। CCTV कैमरे खंगाले गए थे। 50 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की गई।
पुलिस ने आरोपियों को पकड़ने के लिए साइबर टीम ने AI (Artificial intelligence) और OSINT (Open-source intelligence) टूल्स का भी प्रयोग किया। वहीं सुरेश चंद्राकर की कुल 4 लग्जरी गाड़ी, मिक्सर मशीन समेत अन्य वाहन जब्त किए गए हैं।
यह भी पता चला है कि, आरोपियों ने अपने फोन से भी सारा डेटा डिलीट कर दिया है। फोन का डेटा रिकवर करने के लिए लैब भेजा गया है, जिस दिन मुकेश की हत्या की साजिश रची गई उसी दिन सुरेश ने अपने बैंक अकाउंट से एक मोटी रकम निकाल ली थी।

लोकेशन भटकाने के लिए आरोपियों ने मुकेश के फोन को चकनाचूर कर घटनास्थल से 40-50 किमी दूर तुमनार नदी में फेंक दिया।
खबर से नाराजगी थी, इसलिए हत्या की
SIT के मुताबिक पूछताछ में आरोपियों ने बताया था कि मुकेश चंद्राकर इनका रिश्तेदार था और उनके ठेका काम के खिलाफ लगातार न्यूज कवर कर रहा था। इनके ठेका कार्य की जांच भी शुरू हो गई थी। इस बात से नाराज होकर सुरेश चंद्राकर ने अपने भाइयों के साथ मिलकर उसकी हत्या की साजिश रची।
1 जनवरी को रितेश चंद्राकर और महेंद्र रामटेक इन दोनों ने मिलकर बाड़े के कमरा नंबर 11 में रॉड से पीट-पीटकर मुकेश की हत्या की। दिनेश चंद्राकर ने घटना के बाद रात में ही आकर सबूत मिटाने और आरोपियों को फरार करने में साथ दिया।

6 जनवरी 205 को सुरेश चंद्राकर को हैदराबाद से गिरफ्तार किया गया।
दिनेश ने मिटाए सबूत
सुरेश चंद्राकर ने खुद को घटना के समय बाहर रखने की योजना बना रखी थी, ताकि उस पर संदेह न हो। 3 जनवरी को दोपहर 12 बजे दिनेश चंद्राकर अस्पताल में खुद बीमार होकर भर्ती हो गया था। जब पुलिस को शक हुआ तो उसे अस्पताल से ही हिरासत में लेकर पूछताछ की। 3 घंटे की पूछताछ के बाद दिनेश ने हत्या का सारा राज खोला।
इसके बाद इस वारदात में शामिल महेंद्र रामटेक के बारे में बताया। पुलिस ने बीजापुर बस स्टैंड से महेंद्र रामटेक को गिरफ्तार किया। जब शव के बारे में जानकारी मिली तो 3 जनवरी की शाम 5 बजे सेप्टिक टैंक को तोड़कर शव निकाला गया। 6 जनवरी 205 को सुरेश चंद्राकर को हैदराबाद से गिरफ्तार किया गया। सभी आरोपियों को 8 जनवरी को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया था।
कैसे 4 लोगों को मिला टेंडर, और घोटाला हुआ ?
बता दें कि, 2009 में केंद्र सरकार ने सड़क आवश्यकता योजना स्पेशल प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी। 2009 के प्रोजेक्ट का 2015 में एग्रीमेंट हुआ था। गंगालूर से मिरतुर तक सड़क के लिए लगभग 56 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए थे।
15 साल में सड़क की दूरी उतनी ही है, जितनी पहले थी, लेकिन 56 करोड़ रुपए में बनने वाली सड़क 120 करोड़ रुपए पहुंच गई। सड़क निर्माण का ठेका 4 फर्मों को मिला था। हर 2 किमी की सड़क निर्माण के लिए अलग-अलग टेंडर जारी किया गया। 32 किलो मीटर सड़क के काम को 16 भागों में बांटा गया और एग्रीमेंट किया गया।
सड़क निर्माण का काम ठेकेदार सुरेश चंद्राकर कर रहा था। 52 किलोमीटर की सड़क को टुकड़ों में बनाया गया। लगभग 12 से 15 किमी तक डामर बिछाया गया, लेकिन क्वालिटी इतनी घटिया थी कि कुछ ही दिन में सड़क उखड़ने लगी। इसके अलावा बीच-बीच में गिट्टी और मुरुम डाल दिया गया था, जो चलने लायक भी नहीं थी।

कोरबा
महिला स्व-सहायता समूहों ने बदली पोषण आहार आपूर्ति की तस्वीर”
कोरबा। छत्तीसगढ़ शासन की दूरदर्शी पहल के तहत जब आंगनबाड़ी केंद्रों में वितरित किए जाने वाले पोषण आहार के स्थानीय निर्माण और वितरण की जिम्मेदारी महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपी गई, तब किसी ने नहीं सोचा था कि यह कदम महिलाओं के जीवन में इतना बड़ा परिवर्तन ला देगा। पहले यह कार्य बीज विकास निगम के माध्यम से किया जाता था, लेकिन महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसर बढ़ाने के लिए यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी महिला स्व-सहायता समूहों को दी गई। यही बदलाव उनकी सफलता की कहानी का आधार बना।

जिले में चयनित महिला स्व-सहायता समूहों को उत्पादन तकनीक, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग और प्रबंधन का विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इसके बाद परियोजनाओं में आधुनिक उत्पादन इकाइयाँ स्थापित की गईं। मशीनरी, पैकेजिंग उपकरण और भंडारण सुविधाओं से लैस इन इकाइयों ने ग्रामीण महिलाओं के लिए नया कार्यस्थल और नया दृष्टिकोण दोनों दिया। जब उत्पादन शुरू हुआ, तब कच्चे माल की तैयारी, उत्पादन, पैकेजिंग, भंडारण, गुणवत्ता परीक्षण और परिवहन, इन सभी जिम्मेदारियों को महिला समूहों ने अद्भुत दक्षता के साथ संभाल लिया। सिर्फ समूह सदस्य ही नहीं, बल्कि सहायक स्टाफ में भी महिलाओं को प्राथमिकता मिली, जिससे रोजगार के अवसर और बढ़े।

प्रतिदिन इकाइयों में काम करते हुए महिलाओं के कौशल में तेजी से वृद्धि हुई। वे सहभागी नहीं रहीं, बल्कि निर्णयकर्ता बन गईं। उनके प्रबंधन कौशल में सुधार हुआ, नेतृत्व क्षमता निखरी और सामूहिक निर्णय लेने की शक्ति मजबूत हुई। सबसे बड़ी बात, अब वे अपने परिवार की आर्थिक गतिविधियों में अग्रणी भूमिका निभाने लगीं। पोषण आहार निर्माण से प्राप्त नियमित आय ने महिलाओं के जीवन में स्थिरता ला दी। आर्थिक रूप से सशक्त होने से उनकी पारिवारिक स्थिति मजबूत हुई और आत्मविश्वास कई गुना बढ़ा।

महिला समूह अब लगभग 72,000 हितग्राहियों को गुणवत्तापूर्ण ‘टेक-होम राशन’ उपलब्ध कराने जा रही हैं। इससे न केवल आंगनबाड़ी केंद्रों को समय पर आपूर्ति सुनिश्चित होगी, बल्कि यह भी सिद्ध होगा कि गाँव की महिलाएं किसी भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को उत्कृष्टता से निभाने में सक्षम हैं।

कोरबा
ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान में जुटेंगे कोरबा के सैकड़ों युवा
ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान के सुचारु क्रियान्वयन के लिए कोरबा जिले के महाविद्यालयों के प्राचार्य, सहायक प्राध्यापकों की बैठक संपन्न
कोरबा। कलेक्टर कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन में तथा अपर कलेक्टर ओंकार यादव, डिप्टी कलेक्टर टी.आर. भारद्वाज के निर्देशन में कोरबा जिले में व्यापक रूप से संचालित किये जा रहे ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान के सुचारु क्रियान्वयन के लिए कोरबा जिले के सभी शासकीय एवं अशासकीय महाविद्यालयों के सैकड़ों युवा छात्र-छात्राएं जुटेंगे और जिले की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर रूपी प्राचीन पाण्डुलिपियों के डिजिटल संरक्षण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

सोमवार,27 अप्रैल को शासकीय ई. व्ही. पी. जी. कॉलेज कोरबा में ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान के जिला समन्वयक सतीश प्रकाश सिंह की उपस्थिति में सभी शासकीय- अशासकीय महाविद्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों के प्राचार्य एवं सहायक प्राध्यापकों की बैठक संपन्न हुई।

बैठक में जिला समन्वयक सतीश प्रकाश सिंह ने में व्यापक रूप से चलाये जा रहें पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान के बारें में विस्तार से बताया तथा प्राचार्यगणों, सहायक प्राध्यापकों की जिज्ञासा का समाधान किये।
बैठक में ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पाण्डुलिपि सर्वेक्षण मिशन के जिला समन्वयक सतीश प्रकाश सिंह ने उपस्थित सभी प्राचार्य, प्राध्यापक, सहा. प्राध्यापकों को भारत की शाश्वत पाण्डुलिपि विरासत को डिजिटल संरक्षण कर बचाने के महाभियान ज्ञानभारतम मिशन में महाविद्यालयों के छात्र -छात्राओं को जोड़कर युवाशक्ति का प्राचीन धरोहर रूपी पाण्डुलिपियों को डिजिटल संरक्षित करने में योगदान देने के लिए प्रेरित करने को कहा। उन्होंने इसके लिए सभी महाविद्यालय में एक सहायक प्राध्यापक को प्रभारी नियुक्त कर, प्रत्येक महाविद्यालय से एनएसएस, एनसीसी विंग सहित जिज्ञासु एवं रूचि रखने वाले 50 युवा छात्र-छात्राओं को ज्ञानभारतम यूथ टीम कोरबा में जोड़ने के लिए कहा।
बैठक में श्री सिंह ने प्राचीन पाण्डुलिपियों को ज्ञानभारतम एप के माध्यम से डिजिटल संरक्षण किए जाने के सभी स्टेप्स को बताया तथा प्राचार्यगणों से अपने महाविद्यालयों के युवा छात्र -छात्राओं को ऑनलाइन मोड पर समुचित प्रशिक्षण देने के लिए कहा।
बैठक में शासकीय ई.व्ही.पी. जी. कॉलेज की प्राचार्य डॉ. रेणुबाला शर्मा, वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. एल. एन. कँवर, डॉ. बी. एल. साय, डॉ. अमोला कोर्राम, शासकीय मिनीमाता कन्या महाविद्यालय की प्रभारी प्राचार्य डॉ. पापिया चतुर्वेदी, सहा. प्राध्यापक बलराम कुर्रे, मधु कँवर सहित विभिन्न महाविद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों के प्राचार्य, प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक,व्याख्याता उपस्थित थे।
कोरबा
सही दवा-शुद्ध आहार: कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देश पर कोरबा में पन्द्रह दिवसीय सघन जांच अभियान प्रारंभ
कोरबा। कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देश पर जिले में “सही दवा-शुद्ध आहार-यही छत्तीसगढ़ का आधार” थीम के तहत 27 अप्रैल से 11 मई तक पन्द्रह दिवसीय सघन जांच अभियान की शुरुआत हो गई है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जिले में सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण एवं मानक युक्त दवाओं और खाद्य पदार्थों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
अभियान के अंतर्गत जिले के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में फल और सब्जी दुकानों, चाय एवं गुपचुप विक्रेताओं, गन्ना रस एवं जूस सेंटर्स, सॉफ्ट ड्रिंक्स विक्रेताओं तथा डेयरी उत्पाद निर्माताओं एवं विक्रेताओं की सख्त जांच की जा रही है, ताकि खाद्य सुरक्षा एवं स्वच्छता मानकों का प्रभावी पालन सुनिश्चित हो सके।

अभियान के प्रथम दिन गुपचुप, चाट, जूस तथा गन्ना रस विक्रेताओं की सघन जांच की गई और सभी विक्रेताओं को खाद्य सामग्री में स्वच्छता बनाए रखने, निषिद्ध खाद्य रंगों का उपयोग नहीं करने तथा केवल खाद्य-ग्रेड बर्फ का उपयोग करने के निर्देश दिए गए।
औषधि प्रकोष्ठ के अंतर्गत सहायक औषधि नियंत्रक, औषधि निरीक्षक तथा पुलिस एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीम गठित की गई है। अभियान के पहले चरण में कोरबा ब्लॉक के प्रसाधन सामग्री के थोक एवं चिल्हर विक्रेताओं की जांच की गई, जिसमें प्रसाधन सामग्री नियमों के तहत उत्पादों के उचित संधारण के निर्देश दिए गए। साथ ही कॉस्मेटिक उत्पादों की एक्सपायरी तिथि की जांच कर ही विक्रय करने तथा सभी उत्पाद वैध बिल के साथ क्रय कर उनके अभिलेख संधारित करने के निर्देश भी दिए गए।

यह अभियान छह चरणों में संचालित किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के प्रसाधन सामग्री विक्रेताओं, थोक एवं खुदरा दवा विक्रेताओं तथा वैक्सीन संधारण करने वाले शासकीय एवं निजी अस्पतालों का निरीक्षण किया जाएगा। इसके साथ ही कोटपा के तहत चालानी कार्यवाही, नशीली औषधियों के दुरुपयोग की रोकथाम हेतु मेडिकल स्टोर्स की जांच तथा जनजागरूकता गतिविधियाँ भी संचालित की जाएंगी।

कलेक्टर कुणाल दुदावत ने कहा है कि यह अभियान जनस्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि नागरिकों को सुरक्षित खाद्य पदार्थ एवं गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है।
अभियान के दौरान दीपक ट्रेडर्स रानी रोड, वृंदावन एजेंसी, कन्हैया एजेंसी दर्री रोड, खूबसूरत कॉस्मेटिक शॉप, श्रुति श्रृंगार, ज़ी महासेल निहारिका, इंडिया सेल निहारिका रोड, संजरी बैंगल्स मेन रोड तथा मोहन्नम एजेंसी टीपी नगर सहित विभिन्न प्रतिष्ठानों में भी जांच की गई।
अभियान 11 मई तक जारी रहेगा, जिसके दौरान जिले भर में व्यापक स्तर पर जांच और जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे।
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