रायपुर,एजेंसी। झांसी के वीरांगना लक्ष्मीबाई स्टेशन पर शुक्रवार शाम को छत्तीसगढ़ संपर्क क्रांति एक्सप्रेस (12824) को खाली करवाकर जांच की गई। दिल्ली में मिली बम की सूचना के बाद भी ट्रेन 400 किलोमीटर तक दौड़ती रही। यहां ट्रेन जैसे ही प्लेटफॉर्म पर रुकी तो सुरक्षाबलों ने उसे घेर कर सर्च ऑपरेशन शुरू किया।
बम और डॉग स्क्वायड ने कोच खाली कराकर चेकिंग की। ट्रेन में बम की सूचना अफवाह साबित हुई, जिसके बाद सभी ने राहत की सांस ली, लेकिन इस बीच सुरक्षा को लेकर कई सवाल भी खड़े हुए। दिल्ली से झांसी के बीच कई बड़े स्टेशन गुजरे, लेकिन ट्रेन को कहीं भी रोककर चेक नहीं किया गया।
GRP थाना प्रभारी निरीक्षक योगेंद्र प्रताप सिंह ने बताया-
छत्तीसगढ संपर्क क्रांति एक्सप्रेस हजरत निजामुद्दीन स्टेशन से शाम 5.55 बजे चली। 6.05 बजे उसमें बम होने की सूचना रेलवे को मिल गई। हमें कंट्रोल रूम लखनऊ से फोन आया। कहा गया कि ट्रेन के झांसी पहुंचने पर सर्च ऑपरेशन चलाएं।
बम की सूचना के बाद झांसी पहुंची छत्तीसगढ़ संपर्क क्रांति एक्सप्रेस
ट्रेन जैसे ही प्लेटफॉर्म पर रुकी पुलिस और जीआरपी ने कोच खाली करवाए।
सुरक्षा के लिहाज से यात्रियों को ट्रेन से उतारा गया
बता दें कि हजरत निजामुद्दीन से चलकर छत्तीसगढ़ के दुर्ग जाने वाली छत्तीसगढ़ संपर्क क्रांति एक्सप्रेस (12824) हजरत निजामुद्दीन से शाम 5.55 बजे खुली थी। इसके 10 मिनट बाद रेलवे के हेल्पलाइन रेल मदद पर किसी ने सूचना दी कि ट्रेन के स्लीपर कोच में बम है।
सूचना देने वाले ने खुद को रेल उपयोगकर्ता बताया था, लेकिन जब तक सूचना मिली ट्रेन स्टेशन छोड़ चुकी थी। इसके बाद अगला स्टॉपेज झांसी का वीरांगना लक्ष्मीबाई स्टेशन था, लेकिन दिल्ली से झांसी की दूरी 400 किलोमीटर है। बावजूद इसके ट्रेन को फरीदाबाद, मथुरा, आगरा, धौलपुर और ग्वालियर में नहीं रोका गया।
हालांकि, रेल प्रशासन ने उत्तर प्रदेश जीआरपी के हेड क्वाटर लखनऊ को इसकी सूचना दी थी, लेकिन ट्रेन को बगैर नियमित स्टॉपेज वाले स्टेशन पर रोकने का निर्णय रेल प्रशासन को लेना था। ऐसे में रेलवे ने सर्च ऑपरेशन के लिए 400 किलोमीटर दूर ट्रेन का अगला स्टॉपेज झांसी का वीरांगना लक्ष्मीबाई स्टेशन चुना।
इसके बाद लखनऊ जीआरपी ने अपने जवानों को एक्टिव कर दिया। ट्रेन आने से पहले सुरक्षा बलों ने प्लेटफॉर्म को छावनी में तब्दील कर दिया।
सुरक्षा बलों ने ट्रेन को घेर लिया।
9 मिनट की देरी से झांसी स्टेशन पहुंची ट्रेन
दूसरी तरफ सुरक्षा बलों ने किसी भी अफरा-तफरी की स्थिति से बचने के लिए प्लेटफॉर्म नंबर 2 को पूरी तरह से खाली करा लिया। इसके बाद छत्तीसगढ़ संपर्क क्रांति एक्सप्रेस जैसे ही अपने निर्धारित समय रात 11.22 बजे से 9 मिनट की देरी से 11.31 बजे प्लेटफॉर्म पर पहुंची।
यहां पहले से मौजूद सिटी मजिस्ट्रेट प्रमोद झा, एसपी सिटी ज्ञानेंद्र कुमार, आरपीएफ कमांडेंट विवेकानंद नारायण और स्टेशन डायरेक्टर सीमा तिवारी ने जिले की पुलिस, जीआरपी, आरपीएफ, डॉग स्क्वायड और बम निरोधी दस्ते के साथ मोर्चा संभाल लिया। ट्रेन के सभी कोच तुरंत खाली कराए गए।
डॉग स्क्वायड ने मौके पर पहुंच कर चलाया सर्च ऑपरेशन
यात्रियों के साथ लगेज भी उतारा गया
यात्रियों के साथ लगेज भी प्लेटफॉर्म पर उतारा लिया गया। इसके बाद पूरी ट्रेन में सर्च ऑपरेशन चलाया गया। साथ ही बम निरोधी दस्ता और डॉग स्क्वायड ने यात्रियों के लगेज की भी जांच की। 50 मिनट तक चले सर्च ऑपरेशन में सुरक्षा बलों को कोई भी संदिग्ध वस्तु या बम नहीं मिला।
इसके बाद ही सभी ने राहत की सांस ली। वहीं, झांसी से ट्रेन को रात 12.24 बजे आगे के सफर के लिए रवाना किया गया।
सर्च ऑपरेशन की जानकारी देते सिटी मजिस्ट्रेट प्रमोद झा।
400किलोमीटरतकजोखिममेंरहे1700यात्री
छत्तीसगढ़ संपर्क क्रांति एक्सप्रेस में बम की सूचना के चलते 1700 से ज्यादा यात्रियों की जान 400 किलोमीटर तक जोखिम में रही। बता दें कि ट्रेन में कुल 22 कोच हैं। इनमें 6 स्लीपर कोच हैं, जिसके एक कोच में 80 यात्रियों के बैठने/सोने की सीट होती हैं।
थर्ड AC श्रेणी के 5 कोंच हैं, जिनमें सिटिंग और स्लीपर के लिए प्रति कोच 72 सीट हैं। थर्ड AC इकोनॉमी का 1 कोच है, जिसमें 80 सीट हैं। 3 कोच सेकेंड और फर्स्ट AC के हैं, जिनमें प्रति कोच 46 सीट हैं। इसके अलावा 5 कोच जनरल और दिव्यांगों के लिए हैं, जिसमें प्रति कोच न्यूनतम 120 मुसाफिर होते ही हैं। दूसरी तरफ इस ट्रेन में पेंट्रीकार की सुविधा भी उपलब्ध है। ऐसे में इन सभी की जान जोखिम में रही है।
घटना की जानकारी साझा करते आरपीएफ कमांडेंट विवेकानंद नारायण।
सूचनादेनेवालेकीतलाशमेंजुटेसुरक्षाबल
छत्तीसगढ़ संपर्क क्रांति में बम होने की सूचना देने वाले व्यक्ति ने दिल्ली से लेकर लखनऊ और झांसी तक हडकंप मचा दिया। एक सूचना पर सुरक्षा बलों के हाथ हाथ पांव फूल गए। इसके अलावा ट्रेन का संचालन भी प्रभावित हुआ है।
ऐसे में अफवाह उड़ाने वाले कॉलर की तलाश में अब सुरक्षा बल जुट गए हैं। इस बात का पता लगाया जा रहा है कि सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान क्या है और उसने किस आधार पर ट्रेन में बस होने की सूचना दी है।
संदिग्ध वस्तु नहीं मिलने से सभी ने ली राहत की सांस ली।
पहलेमिलगईथीसूचना, झांसीतककियाइंतजार
दैनिक भास्कर से बात करते हुए रेलवे और सुरक्षा बलों के अधिकारी ने बताया कि ट्रेन दिल्ली से चलने के 10 मिनट बाद ही कॉलर ने रेल में बम की सूचना दे दी थी। लेकिन ट्रेन को 400 किलोमीटर तक संभावित बम के खतरे के साथ ही दौड़ाया जाता रहा।
दिल्ली से चली सूचना लखनऊ जीआरपी से झांसी पहुंची। साथ ही कई रेल अधिकारियों को भी ट्रेन के मथुरा और आगरा पहुंचने से पहले जानकारी मिल गई थी। बावजूद इसके ट्रेन को झांसी से पहले नहीं रोका गया। हालांकि, इसके पीछे क्या कारण रहा ये जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ प्रदेश तीरंदाजी संघ ने राज्य में तीरंदाजी को बढ़ावा देने के लिए खिलाड़ियों को जरूरी खेल सामग्री और बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएं देने की मांग की है। संघ के अध्यक्ष कैलाश मुरारका ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र भेजकर अपनी मांग रखी है।
संघ ने बताया कि वह करीब 30 साल से खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने और उन्हें प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए तैयार करने का काम कर रहा है। संघ का कहना है कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में तीरंदाजी की प्रतिभाएं हैं, जिन्हें बेहतर सुविधाएं मिलने पर आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है।
संघ के मुताबिक राज्य, जिला, स्कूल और आदिवासी स्तर की तीरंदाजी प्रतियोगिताएं जल्द शुरू होने वाली हैं। इन प्रतियोगिताओं के लिए आर्चरी स्टैंड, बट्स, टारगेट फेस, पिन समेत कई अन्य खेल सामग्री की जरूरत होगी।
संघ खिलाड़ियों और खेल संस्थाओं को यह सामग्री करीब 25 प्रतिशत कम कीमत पर उपलब्ध कराता है। जिला संघ, स्कूल, प्रशिक्षण केंद्र और खिलाड़ी अपनी जरूरत की सामग्री की जानकारी समय पर संघ को दे सकते हैं।
संघ के मुताबिक राज्य, जिला, स्कूल और आदिवासी स्तर की प्रतियोगिताएं शुरू होने वाली हैं।
आर्थिक रूप से कमजोर खिलाड़ियों को अवसर
संघ अध्यक्ष ने बताया कि पिछले करीब 30 सालों से जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों से भाग लेने या प्रतियोगिता में भेजने के नाम पर कोई शुल्क नहीं लिया गया है। उन्होंने बताया कि यह व्यवस्था एनएमडीसी, एनटीपीसी, राज्य सरकार और अन्य सहयोगियों की मदद से चलती रही है।
संघ का कहना है कि इस व्यवस्था से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के खिलाड़ियों को भी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने और आगे बढ़ने का मौका मिलता है।
हर जिले में संसाधन और कोच की मांग
संघ ने कहा कि पदक के लिए प्रतिभा के साथ नियमित अभ्यास, प्रशिक्षित कोच, बेहतर खेल सामग्री और प्रतियोगिताओं का अनुभव जरूरी है। इसलिए हर जिले में तीरंदाजी के लिए जरूरी संसाधन और प्रशिक्षित कोच उपलब्ध कराने की मांग की गई है। संघ का मानना है कि इससे ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के अधिक खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का मौका मिलेगा।
सरकार से सहयोग की उम्मीद
संघ ने मुख्यमंत्री से तीरंदाजी के लिए आवश्यक खेल संसाधन और आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। साथ ही संबंधित विभाग को इस दिशा में जरूरी पहल के निर्देश देने की मांग की है। संघ का लक्ष्य हर जिले से प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराना और राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश के लिए अधिक पदक हासिल करना है।
जशपुर, एजेंसी। जशपुरनगर में राष्ट्रीय खेल दिवस पर शनिवार को जशपुर में खेल और विकास का संगम देखने को मिला। पुरानी टोली स्थित कम्युनिटी हॉल में उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने ‘चेकमेट एट जशपुर–अखिल भारतीय ओपन फिडे रेटेड शतरंज प्रतियोगिता 2026’ का शुभारंभ किया।
प्रतियोगिता में देश के 12 राज्यों से 175 से अधिक खिलाड़ी और कोच शामिल हो रहे हैं। साथ ही, उप मुख्यमंत्री ने जिले को करीब 93 करोड़ रुपए के विकास कार्यों की सौगात भी दी।
12 राज्यों से पहुंचे खिलाड़ी-कोच, साथ ही 93 करोड़ के विकास कार्यों का भूमिपूजन
29 अगस्त से 1 सितंबर तक चलेगी प्रतियोगिता
अखिल भारतीय शतरंज प्रतियोगिता 29 अगस्त से 1 सितंबर तक आयोजित होगी। इसके लिए कुल 2.50 लाख रुपए की पुरस्कार राशि निर्धारित की गई है। मुख्य वर्ग के विजेता को 50 हजार रुपए और ट्रॉफी, उपविजेता को 30 हजार और तीसरे स्थान पर रहने वाले खिलाड़ी को 20 हजार रुपए व ट्रॉफी दी जाएगी।
महिला, वरिष्ठ, विभिन्न आयु और रेटिंग वर्गों के साथ जशपुर व सरगुजा संभाग के खिलाड़ियों के लिए भी विशेष पुरस्कार रखे गए हैं। प्रतियोगिता फिडे स्विस प्रणाली के तहत 8 चक्रों में खेली जाएगी।
बोले- शतरंज जीवन में धैर्य और रणनीति सिखाता है
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि मेजर ध्यानचंद की जयंती पर 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया जाता है। जशपुर की प्राकृतिक वादियों में अखिल भारतीय शतरंज प्रतियोगिता का आयोजन गौरव की बात है।
उन्होंने कहा कि शतरंज भारत की प्राचीन परंपरा से जुड़ा खेल है। इसके 64 खानों और 32 मोहरों में जीवन की कई सीख छिपी हैं। यह व्यक्ति को धैर्य, एकाग्रता, रणनीति और सोच-समझकर निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने में मदद करता है। उन्होंने विश्वनाथन आनंद जैसे खिलाड़ियों का उदाहरण देते हुए जशपुर से नई शतरंज प्रतिभाओं को आगे लाने पर जोर दिया।
दादा-पोता भी साथ खेल सकते हैं शतरंज
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय महामंत्री योगेश बापट ने कहा कि वनांचल क्षेत्र जशपुर में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता होना बड़ी उपलब्धि है। इससे स्थानीय खिलाड़ियों को देशभर के खिलाड़ियों के साथ खेलने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने कहा कि शतरंज की खासियत है कि उम्र की कोई सीमा नहीं होती। दादा और पोता भी एक साथ बैठकर खेल सकते हैं। यह खेल एकाग्रता, अनुशासन, शांति और धैर्य सिखाता है। खिलाड़ी जीतता है या कुछ सीखता है, इसलिए इसे सिर्फ हार-जीत के नजरिए से नहीं देखना चाहिए।
नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद भगत ने प्रतियोगिता को जशपुर के लिए गौरव बताया। कलेक्टर रोहित व्यास ने बताया कि जिले में इंडोर स्टेडियम, कुनकुरी स्टेडियम के साथ फुटबॉल, क्रिकेट और रॉक क्लाइंबिंग की सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
93 करोड़ के विकास कार्यों का भूमिपूजन
कार्यक्रम के दौरान उप मुख्यमंत्री ने करीब 93 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का भूमिपूजन किया। इनमें 86.99 करोड़ रुपए की अमृत मिशन जल प्रदाय योजना और करीब 7 करोड़ रुपए की गंदे पानी के शुद्धीकरण से जुड़ी वाटर फिल्टर परियोजनाएं शामिल हैं।
इसके अलावा जशपुर नगर के लिए 4.68 करोड़ रुपए के विकास कार्यों की घोषणा की गई। इसमें रानी सती तालाब के विकास के लिए 4.30 करोड़ रुपए, हाईटेक बस स्टैंड के लिए 11.99 करोड़ रुपए और वशिष्ठ कम्युनिटी हॉल के जीर्णोद्धार के लिए 80 लाख रुपए की राशि स्वीकृत किए जाने की जानकारी दी गई। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि जशपुर के विकास में धन की कमी नहीं होने दी जाएगी।
रायपुर, एजेंसी। राज्य खेल एवं युवा कल्याण विभाग की ओर से शनिवार को पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में राज्य खेल अलंकरण समारोह-2026 आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि रहे, जबकि उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने अध्यक्षता की। केंद्रीय मंत्री तोखन लाल साहू, डॉ. रमन सिंह समेत प्रदेश के कई मंत्री और विधायक भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
इस बार समारोह में 2023-24, 2024-25 और 2025-26 यानी तीन साल के राज्य खेल अलंकरण एक साथ दिए गए। राज्य खेल अलंकरण में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों, कोचों और टीमों को अलग-अलग श्रेणियों में सम्मानित किया गया। तीन साल का सम्मान एक साथ दिए जाने से लंबे समय से लंबित सम्मान भी दिए गए।
2025-26 के नगद पुरस्कारों में 21 खेलों के खिलाड़ियों और प्रतिभागियों को कुल 325 पुरस्कार दिए गए। इनमें किक बॉक्सिंग और कुडो के पुरस्कार सबसे ज्यादा रहे। वहीं एथलेटिक्स में 2 और बैडमिंटन में 1 पुरस्कार दिया गया।
टीम प्रतियोगिताओं में अच्छा प्रदर्शन करने वाली टीमों को मुख्यमंत्री ट्रॉफी से सम्मानित किया गया। समारोह में अलग-अलग जिलों के खिलाड़ियों के साथ पैरा खेलों के खिलाड़ियों को भी सम्मानित किया गया।
राज्य खेल अलंकरण में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों, कोचों और टीमों को अलग-अलग श्रेणियों में सम्मानित किया गया।
तीन साल के खेल अलंकरण एक साथ, 2025-26 में 325 सम्मान
राज्य खेल अलंकरण सामान्य तौर पर हर साल राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों, कोचों और टीमों को दिए जाते हैं। इस बार 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के तीन वर्षों के लंबित अलंकरण एक साथ दिए गए।
पुरस्कारों में शहीद राजीव पांडेय पुरस्कार, शहीद कौशल यादव पुरस्कार, वीर हनुमान सिंह पुरस्कार, शहीद विनोद चौबे सम्मान और शहीद पंकज विक्रम सम्मान शामिल हैं। टीम स्पर्धाओं में बेहतर प्रदर्शन करने वाली टीमों को मुख्यमंत्री ट्रॉफी भी दी गई।
अलग-अलग खेलों में खिलाड़ियों के प्रदर्शन के आधार पर अलंकरण दिए गए।
21 खेलों के खिलाड़ियों को 325 पुरस्कार
2025-26 के नगद पुरस्कारों में 21 खेलों के खिलाड़ियों और अन्य प्रतिभागियों को कुल 325 पुरस्कार दिए गए। इनमें किक बॉक्सिंग और कुडो के खिलाड़ियों को सबसे ज्यादा पुरस्कार मिले। वहीं एथलेटिक्स में 2 और बैडमिंटन में 1 पुरस्कार दिया गया। अलग-अलग खेलों में खिलाड़ियों के प्रदर्शन के आधार पर ये पुरस्कार दिए गए।
दुर्ग-भिलाई और बिलासपुर के खिलाड़ियों की मजबूत मौजूदगी
अलंकरण सूची में दुर्ग-भिलाई के खिलाड़ियों ने हॉकी, टेबल टेनिस, बैडमिंटन, कुश्ती, नेटबॉल और मास्टर्स बैडमिंटन जैसे खेलों में जगह बनाई। हॉकी में भूमिका उपाध्याय, टेबल टेनिस में काजल, बैडमिंटन में संगीता राजगोपाल, कुश्ती में गामा यादव और वेटलिफ्टिंग में भूपेंद्र कुमार गडे का नाम शामिल है।
वहीं, बिलासपुर के खिलाड़ियों ने शूटिंग, तैराकी, तीरंदाजी समेत कई खेलों में अच्छा प्रदर्शन किया। सीता साहू, शशांक मसीह, स्वाती साहू, संकेत सामुएल और अजित्या सिंह सहित कई खिलाड़ियों को अलंकरण सूची में शामिल किया गया है।
अलंकरण सूची में दुर्ग-भिलाई के खिलाड़ियों की हॉकी, टेबल टेनिस, बैडमिंटन, कुश्ती, नेटबॉल और मास्टर्स बैडमिंटन जैसे खेलों में भागीदारी रही।
पैरा खिलाड़ियों को भी मिला सम्मान
खेल अलंकरण में पैरा खिलाड़ियों और पैरा खेलों को भी शामिल किया गया। सूची में पैरा एथलेटिक्स, पैरा फेंसिंग, पैरा जूडो, पैरा तैराकी और व्हीलचेयर फेंसिंग के खिलाड़ी शामिल रहे। महासमुंद के सुखदेव ने 100 मीटर और 1500 मीटर में राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक हासिल किए हैं।
बिलासपुर की सीता साहू और स्वाती साहू ने व्हीलचेयर फेंसिंग में स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीते हैं। पैरा जूडो और पैरा तैराकी के खिलाड़ियों को भी उनकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया।
अलंकरण सूची में बालोद, राजनांदगांव, बीजापुर और रायगढ़ समेत अन्य जिलों के खिलाड़ियों के नाम भी शामिल हैं।
दूसरे जिलों के खिलाड़ियों की भी रही भागीदारी
अलंकरण सूची में बालोद, राजनांदगांव, बीजापुर और रायगढ़ समेत अन्य जिलों के खिलाड़ियों के नाम भी शामिल हैं। बालोद के अमित कुमार ने एथलेटिक्स में स्वर्ण पदक हासिल किया। राजनांदगांव के महेंद्र ध्रुवे का वॉलीबॉल और ज्ञानेश्वरी यादव का बैडमिंटन में नाम शामिल है।
बीजापुर के राकेश कडती सॉफ्टबॉल और रायगढ़ के अमन तिवारी व दिव्यांशु देवांगन भी सूची में हैं। सॉफ्टबॉल और तीरंदाजी की बालिका टीमों में छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली खिलाड़ियों की भी भागीदारी रही।
मुख्यमंत्री ट्रॉफी में टीमों का प्रदर्शन
व्यक्तिगत खिलाड़ियों के अलावा राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करने वाली टीमों को मुख्यमंत्री ट्रॉफी दी गई। 2023-24 में व्हीलचेयर फेंसिंग पुरुष टीम ने राष्ट्रीय चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता। टीम में बिरेन्द्र नवरंग, हरिहर सिंह राजपूत, आशीष पटेल और महेंद्र साहू शामिल थे, जबकि सूरज साहू टीम मैनेजर रहे।
इसी वर्ष जूनियर बालिका सॉफ्टबॉल टीम ने 41वीं जूनियर नेशनल चैंपियनशिप, पटना में कांस्य पदक जीता। टीम में चंद्रकांता बरेठ, प्रतिमा सोना और रेणुका तेलम समेत 16 से अधिक खिलाड़ी शामिल थीं।
महिला तीरंदाजी टीम ने रजत के बाद जीता स्वर्ण
2024-25 में सीनियर महिला तीरंदाजी टीम ने झारखंड में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में रजत पदक जीता। टीम में सुलोचना राज, चंदनी साहू, हर्षिता साहू और सुशीला नेताम शामिल थीं। टीम के कोच ईतवारी सिंह राज रहे। 2025-26 में इसी टीम ने हैदराबाद में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल किया। टीम में चांदनी साहू, सुलोचना राज, पायल मरावी और माया शामिल थीं। कोच इतवारी राज रहे।
महासमुंद के सुखदेव ने पैरा एथलेटिक्स में राष्ट्रीय स्तर पर 100 मीटर और 1500 मीटर में स्वर्ण पदक हासिल किए। बिलासपुर की सीता साहू और स्वाती साहू ने व्हीलचेयर फेंसिंग में स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीते। पैरा फेंसिंग, पैरा जूडो और पैरा तैराकी के खिलाड़ियों को भी उनकी उपलब्धियों के आधार पर सम्मान मिला।
रायपुर की जानकारी, पैरा खिलाड़ियों की जानकारी और बाकी विश्लेषण को अलग कर दिया है। अनावश्यक सवाल और दोहराव हटाए हैं, जबकि दिए गए प्रमुख तथ्य रखे हैं।
रायपुर के खिलाड़ियों की भी रही मजबूत मौजूदगी
राजधानी रायपुर के खिलाड़ियों को भी अलग-अलग खेलों में उनके प्रदर्शन के लिए सम्मान मिला। टेबल टेनिस, वुशु, बैडमिंटन और वेटलिफ्टिंग में रायपुर के कई खिलाड़ी सूची में शामिल हैं। भाठागांव के राजीव साहू का नाम शहीद पंकज विक्रम पुरस्कार 2023-24 की सूची में है।
विवेकानंद नगर के गिरीराज बागड़ी ने वेटरन राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया है। प्रणय नंद मजूमदार का नाम 2025-26 की सूची में शामिल है। प्रदीप जोशी और अस्विनम देवांगन भी सूची में हैं।
वुशु में दिहलापारा की प्रियंका ठाकुर ने राष्ट्रीय स्तर पर कांस्य पदक हासिल किया है, जबकि सत्ती बाजार की मानसी डुंभरे 2024-25 की सीनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप में शामिल रहीं। बैडमिंटन में सुजय तम्बोली को 2025-26 के शहीद राजीव पांडेय पुरस्कार के लिए चुना गया।
दिव्यांश अग्रवाल ने जूनियर राष्ट्रीय प्रतियोगिता में कांस्य पदक हासिल किया और देवेंद्र नगर के ईशान भटनागर का नाम 2024-25 की बैडमिंटन सूची में शामिल है। वेटलिफ्टिंग में अजय दीप सारंग को वीर हनुमान सिंह सम्मान 2025-26 के लिए चुना गया है। उन्होंने राष्ट्रीय चैंपियनशिप में स्वर्ण और रजत पदक हासिल किए हैं। एवन कुमार जैन का नाम भी सूची में शामिल है।
किक बॉक्सिंग और कुडो के सबसे ज्यादा अलंकरण
2025-26 की सूची में किक बॉक्सिंग और कुडो को मिलाकर 146 अलंकरण दिए गए हैं। यह कुल 325 अलंकरणों का करीब 45 प्रतिशत है। वहीं एथलेटिक्स में 2 और बैडमिंटन में 1 अलंकरण दर्ज है। अलंकरण अलग-अलग खेलों की प्रतियोगिता, श्रेणी और खिलाड़ियों के प्रदर्शन के आधार पर दिए गए हैं।
छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के खिलाड़ियों को भी जगह
अलंकरण सूची में बड़े शहरों के साथ छोटे शहरों, ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों से आने वाले खिलाड़ियों के नाम भी शामिल हैं। सॉफ्टबॉल और तीरंदाजी की बालिका टीमों में ऐसे खिलाड़ियों की भागीदारी रही। इससे राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों के खिलाड़ियों की राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में मौजूदगी सामने आती है।